Author Topic: Appreciations / Feedback Received by Merapahad - प्रतिक्रिया  (Read 40365 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Manoj Bhai.

I will try.. Other members can also help. If they have this song and lyric.

Mehta ji Namaskar,

kya aap yaha per "pyari janam bhoomi chooti ge ho pardesh jaan main" ki lyrics bhej sakte hai agar uska instrumental mil jaye to bahut hi sunder.....
kaha iska music mil sakta hai kirpaya yeh bataye ?

Namaskar
Manoj Singh Bisht
Almora

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Dainik Jagran - 23 May 2011 Dehradun
 
 देवभूमि के सुरों में वंदेमातरम्    दिनेश कुकरेती, देहरादून वंदेमातरम् शब्द नहीं नाद है, ठीक ú की तरह। ú में सृष्टि समाई हुई है तो वंदेमातरम में मां भारती। इसीलिए वंदेमातरम् गाते-गाते आजादी के परवाने फांसी पर झूल गए। बंकिमचंद्र चटर्जी की इस कालजयी रचना को संगीतकार एआर रहमान ने जब अपने सुरों में सजाया तो पूरा मुल्क झूम-झूमकर गा उठा, मां तुझे सलाम..। अब शक्तिका यह स्रोत उत्तराखंडी लोक के कंठ से फूटा है और माध्यम बने नई पीढ़ी के गायक रजनीकांत सेमवाल व शेखर शर्मा। कुमाऊंनी में गाई गई यह रचना राष्ट्रप्रेम का भाव ही नहीं जगाती, जड़ों से जुड़े रहने को भी प्रेरित करती है। लियो एट्थ एंड राइजिंग सन फिल्मस व मेरा पहाड़ ग्रुप की कुमाऊंनी में यह दूसरी ऑडियो प्रस्तुति । इसलिए एलबम को नाम दिया गया म्यर पहाड़-दो। एलबम में हालांकि आठ गीत हैं, लेकिन वंदेमातरम् की प्रस्तुति इसे खास बनाती है। मां तुझे सलाम.. में जैसे प्रयोग संगीतकार एआर रहमान ने किए, इसमें ठीक वैसे ही शेखर शर्मा ने किए हैं, लेकिन प्रयोगों की सफलता का श्रेय जाता है युवा गायक रजनीकांत सेमवाल को। परिवर्तन को स्वीकारना रजनीकांत की विशेषता है, जिसकी झलक उनकी एलबम टिकुलिया मामा और हे रमिए. में भी देखने को मिली। यही वजह है गीत के बोल तेरो बाना मरी ज्यूना, यो हमारो धरम, वंदेमातरम्, मेरी भारत भूमि तेरी वंदेमातरम् खास बन पड़े हैं। गीत की एक विशेषता, उसमें राष्ट्रप्रेम के साथ आंचलिकता का समावेश है। यथा, अलग छु बोली भाषा, अलग छु नाम, अलग-अलग कुड़ी, अलग छु कम, सार फूल गछिया रेई, यो मावा एकम, वंदेमातरम्। उत्तराखंड फौजी पृष्ठभूमि वाला प्रदेश है, इसलिए गीत में किसान व विज्ञान से आगे जवान खड़ा नजर आता है। जैसे, सीमा में पहरी दीणी, फौजिया जवान छे, धरती चिरण रेई, कर्मठ किसान छे, विज्ञानी खोजण रेई, पाणी यो झुलम, वंदेमातरम्। उत्तराखंडी अपनी शक्ति को भी पहचानता है, इसलिए उसकी ललकार जब सुरों में फूटती है तो साफ सुनाई पड़ता है, आंख नी दिखा पड़ोसी, मानी ले तो बात, तीन बार भाजी गेछे, मुक्का खाई लात, खुटा नी धरण दियूना, यो आपुन जागम, वंदेमातरम्..। खास बात यह कि वंदेमातरम् की सफलता का जितना श्रेय युवा गायकों को जाता है, उससे कहीं ज्यादा मेरा पहाड़ गु्रप के संयोजक महिपाल सिंह मेहता को। उन्हीं के सद्प्रयासों से यह पहल सफल हो पाई। 
 
 
http://in.jagran.yahoo.com/epaper/index.php?location=43&edition=2011-05-24&pageno=3#id=111712189771983088_43_2011-05-24

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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निखिल उत्तराखंडी       
  •    निखिल उत्तराखंडी   May 21निखिल उत्तराखंडी 
    • पैलाग दाज्यू ! आपकी पोस्ट पढ़ी याहू के पौड़ी गढ़वाल ग्रुप और मेरा पहाड में भी ..बहुत खुशी हुई कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम दिल्ली में निरंतर होते रहते हैं ..इससे पहले भी गढ़वल भवन में लगातार दो रविवार सांस्कृतिक कार्यक्रम हर थे जो कि मैं परीक्षा के कारण नहीं शरीक हो पाया था ..परन्तु कल अवश्य आऊंगा और आशा है आप से भी भेंट होगी ..आपको यदि स्मरण होगा तो हमारी पहले भी बातचीत हो चुकी है मेरा पहाड पर और फेसबुक पर भी .

      एक और शिकायत है आपसे आप इस प्रकार के आयोजनों का समुचित प्रचार नहीं करते हैं ..जिससे लोगन को नहीं पता चल पाता ..मैने भी आपकी पोस्ट अचानक याहू ग्रुप में देखि तो फिर उसे विभिन्न फेसबुक के पन्नों में प्रचारित किया ..आपसे निवेदन है कि भविष्य में ऐसे समाचार कम से कम फेसबुक के कुछ लोकप्रिय उत्तराखंडी पृष्ठों में "पहाड़ी क्लासेस " और "मी उत्तराखंडी छौ " सरीखों में भी पोस्ट करें ..और यदि आप मुझे भी सूचित करने का कष्ट करें तो मैं आपका आभारी रहूँगा ...धन्यवाद ....
      आपक भुला निखिल
  •    निखिल उत्तराखंडी   7 hours agoनिखिल उत्तराखंडी 
    • नमस्कार दाज्यू ! महिपाल दाज्यू ..मैं २१ मई को प्रदर्शित नाटक आछरी माछरी देखा था ..बहुत अच्छा लगा था ...मैं उसपर एक लेख लिख रहा हूँ ..बस आपसे निवेदन है कि नाटक की यदि कुछ तस्वीरें हों तो कृपया भेज दें ..
  •    Mahipal Singh Mehta   a few seconds agoMahipal Singh Mehta 
    •   Nikhil bhai thai for your msg. hum apne group se logo ko regular msg dete rahte hai. Future me aapko milate rahega informaiton. thanks.. daju. MS Mehta

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Fwd: hello   Inbox   
  bhishma kukreti <bckukreti@gmail.com>  Wed, Jun 29, 2011 at 8:14 PM 
To: M S Mehta Mehta <msmehta8@gmail.com>, "M.S. Mehta" <msmehta@merapahad.com> 
Reply | Reply to all | Forward | Print | Delete | Show original 



---------- Forwarded message ----------
From: pooja sah <sahpooja@gmail.com>
Date: Wed, Jun 29, 2011 at 9:13 AM
Subject: hello
To: bckukreti@gmail.com




Hello sir,
 i have seen garhwali wedding songs in uttarakhand e-magazine contributed by u, can u send me kumaoni song (folk songs) related to wedding and other ceremonies.
 thanking you
 regards
pooja
--

Pooja Sah
Research Associate
International Centre for Agricultural Research in the Dry Areas (ICARDA)
South Asia & China Regional Program (SACRP)
NASC Complex, CGIAR Block
New Delhi, 110012
e-mail-  p.sah@cgiar.org



 





--

 


Regards
B. C. Kukreti                         
Director
Factory Retail (I) Limited
3, White Hose, 154 Sher E Punjab ,
Near Tolani College
Andheri (East)
Mumbai 40093
Contact 9920066774
 
 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Digamber Negi <digamber1632@yahoo.co.in>
Thu, Jun 30, 2011 at 3:38 PM
Reply-To: PauriGarhwal@yahoogroups.com
To: PauriGarhwal@yahoogroups.com
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Mehta Ji, Dhanyabad for sending such beautiful photographs.  Photo of Lingwara has refrshed memories of my village life.  The Lingwara (also known as Khuntra) is generally found in upper hill slopes during monsoon season. This is cooked mixed with onion. This is good for liver and blood purification as well as for sugar patients.      Anyone may please share more information about Lingwara.   Digambr Negi

--- On Wed, 29/6/11, M S Mehta <msmehta@merapahad.com> wrote:
 
From: M S Mehta <msmehta@merapahad.com>
Subject: [PGGroup] My Hometown Bageshwar Trip Photos June 2011
To: kumaoni-garhwali@yahoogroups.com, PauriGarhwal@yahoogroups.com, younguttaranchal@yahoogroups.com, TriStateUSA_Uttaranchal@yahoogroups.com, Extreme_Uttranchal@yahoogroups.com
Cc: uttaranchalassociationofemirates@yahoo.com
Date: Wednesday, 29 June, 2011, 8:14 AM - Hide quoted text -</blockquote>[/t][/t][/t][/t][/t][/t][/t][/t][/t][/t][/t][/t][/t]
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Chandrashekhar Chauhan - From Bacebook     
  Today (12 July 2011)   Report · 9:34pm namaskar..... aapka mera pahad foram bahut badiya hai......! kafi sari jankari ka bhandar hai       Report · 9:35pm jai you chauhan ji koish kee hai thoda sa.    Report · 9:35pm par badiya kosis hai......!

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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from   Mukund Dhoundiyal ml.dhoundiyal@gmail.com via yahoogroups.com
subject   [uttaranchal_bangalore] उपयोगी और सकारात्मक पोस्टिंग्स करें
mailing list   <uttaranchal_bangalore.yahoogroups.com> Filter messages from this mailing l
   
hide details 3:31 AM (4 hours ago)
   
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  प्रिय बंधुवो

  हमारे उत्तराँचल पोर्टल ग्रुप्स यानि की जैसे   "म्योर पहाड़",  "यंग उ ग्रुप",  पौढ़ी गढ़वाल ग्रुप  और  भी हमारे  बहुत से ग्रुपों के माध्यम से  हमारे लोगों में काफी जाग्रति हुयी है 
हमारे लोग अपनी अपनी छोटी से छोटी  समस्या   इन ग्रुपों   में लिखते हैं  जो  लोगों को  पढने को मिलती है
 कुछ  लोग   जो कुछ   भी सहायता कर पाते हैं  या फिर  जो कुछ  सलाह दे सकते हैं तो दे देते हैं.
और   जब काम बन जाता है  तो उन    लोगों में  भी कुछ करने धरने की हिम्मत बढ़ जाती है

बाकी लोग  भी प्रेरित होते  ही  हैं   और इसी प्रकार ये सिलसिला बढ़ता जता है
 अपने पहाड़ी  की जरूरत वाले की जरूरत पूरी करना  भी  हमारा  एक     उत्तरांचली योगदान  ही  तो है ..
इसीको तो विकास कहते हैं

लेकिन ...हाँ .... नकारात्मक आलोचना से हमको   बचते   रहना चाहिए   क्योंकि ऐसी आलोचनI    स  हमारे समाज  के लिए विध्वंसकारी  और विनाशकारी होती है   जो  हमारे सुयोजित   संजोये हुए आपसी मधुर रिश्तों  को तोडती है
हाँ    सकारत्मक   आलोचना हमेशा हमको  जोड़ती   है  आलोचना ऐसी हो की  जो मार्गदर्शक हो  और   अछि लगती हो

इस लिए   हमे  चाहिए   हम जो कुछ  अछे सुजाव दें   और  हमारे अपने  इन ग्रुपों  को और   भी मजबूत करें..

और अछे अछे सकारात्मक  पोस्टिंग्स करें   जो  हमारे   लोगो   के लिए उपयोगी  और  कामयाबी  ला सकें 
  हमारा यही  छोटा प्रयास  शायद    उत्तराँचल के विकास  में सही  योगदान होगा

जय बद्री विशाल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Mahi Singh Mehta know about Baba Mohan Uttarakhandi. who sacrified this live for Uttarakhand afater 42 days hunger strike.

http://www.merapahadforum.com/uttarakhand-history-and-peoples-movement/baba-mohan-uttarakhandi%28hero-of-uttrakhand-struggle%29/new/#newBaba Mohan Uttarakhandi(Hero Of Uttrakhand Struggle) - बाबा मोहन उत्तराखण्डी www.merapahadforum.comBaba Mohan Uttarakhandi(Hero Of Uttrakhand Struggle) - बाबा मोहन उत्तराखण्डी14 hours ago · Like ·  · Unsubscribe · Share
  • Pratap Singh and Gaur Singh like this.
    • Puran Manral mehtaji aapkw prayas srahniya hain.Aap jaise uvaon per hi uttarakhand
      ka bhavishya nirver hai.Gairsain ke liye Baba mohan singh Yttarakhandi ki sahadat pahad Bhul nahi sakta .ab samay aaya hai jan Abhiyan Aap jaise log chalayen pahad aapka sath dega.baba per vistar se jankari
      dene ke liye bahut bahut dhanyabad.jai uttarakhand.12 hours ago via  · Unlike ·  2 people
    • Dev Singh Rawat षहीदों की सपनों को रौंदने वाले आंदोलनकारी कैसे बने
      खटीमा, मसूरी व मुजफरनगरकाण्ड-94 के गुनाहगारों को सजा दिलाने के बजाय जो हुक्मरान अपने आप को आंदोलनकारी के तकमें से नवाजने की धृश्ठता कर रहा हो वहीं उत्तराखण्ड की जनांकांक्षाओं को साकार करने क...See More12 hours ago · Like

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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From : http://primarykamaster.wordpress.
उत्तराखण्ड की शिक्षा प्रणाली पर कुछ विचार ….  Posted on सितम्बर 11, 2008 by प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI                अचानक  इन्टरनेट  पर  घुमते  हुए   मैं  उत्तराखंड  के  एक  इन्टरनेट  फोरम  पर जा पहुँचा  ।  यंहा   बढ़िया   चर्चा  जारी   थी  कई तरह के विचार उत्तराखंड की शिक्षा  प्रणाली  पर थे  ।  कुछ विचार मैं आपके सामने पेश कर रहा हूँ ।  ज्यादा और पूरा पढने के लिए मेरा  पहाड़.कॉम[ पर क्लिक   करें ।  पहले यह कविता को ध्यान से पढ़े ।  शायद यह पूरी व्यवस्था का सीधा प्रसारण है एकल शिक्षक वाले स्कूलों का ।  बताता चलूँ की ज्यादातर सरकारी स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहें हैं । 

 मैं व्यथित हूँ शिक्षा के स्तर से
 बयां करूँ क्या अपनी पाठशाला का
 जहाँ कक्षायें पांच हैं पर अध्यापक एक
 पाठशाला की जिम्मेदारियों से
 सरकारी आदेशों  के  भार से
 समय से पहले बूढा होता अध्यापक
 कर भी नही पता पढाने का श्री गणेश
अभी तक नही समझ सका वह शासन प्रशासन का आदेश 
जन गणना, गाँव गणना, पशु गणना, और सालों साल मत गणना, 
होते इसी अध्यापक को निर्देश
मैंने सोचा चलो पूछें हाल चाल
मर्साब नमस्कार, सब कुशल मंगल जवाब दे नही पता रुआं सा जाता है
मर्साब उवाच:- दर्द एक हो तो बताऊँ 
यहाँ एक में अनेक समाये  है
कैंसर के दर्द से भी भयंकर एकल अध्यापक का दर्द है
फ़िर भी सुनाता हूँ आपबीती
समय पर पाठशाला खोलता हूँ
तब बच्चे नही मैं ही होता हूँ 
प्रथम कर्तव्य की आहुति से बच्चों की राह  मैं ताकता हूँ 
शिवगण कहूँ या फ़िर राम सेना किसी तरह प्रार्थना करा देता हूँ
एक एक की उपस्थिति लेकर कक्षाओं को नही सजा पाता हूँ
मेरी कलम, दवात, कापी किताब
मर्साब वह लिखता है न पढ़ता है 
मर्साब पेशाब जाऊँ,
वह मुझे मारता है
सुनते सुनते सिर पकड़ लेता हूँ
फ़िर दिन के भोजन के लिए बच्चो की गिनती करता हूँ
हिसाब लगाकर चावल दाल  लकडी पानी का इंतजाम करता हूँ 
इसी चक्कर में मध्यांतर हो  जाता है
मध्यांतर के बाद थक जाता हूँ
राम सेना शांत कैसे रहे  कुर्सी पर पीठ टिका देता हूँ
कभी कभी मुझे लगता है सरकार की ओर से नियुक्त  प्रशिक्षित ग्वाला हूँ
जो पेड़ की छाँव में बैठा भेड़ बकरियों को ही चारा रहा 
अपनी विवशस्तता पर आंसू बरबस यों ही पी लेता हूँ

अगला विचार

पब्लिक स्कूल में जो शिक्षक होते है उनका शिक्षा का स्तर क्या है १० वी या १२ वी फ़िर भी वे बच्चो को अच्छा पड़ते है/ क्यो / सरकार प्राथमिक विद्यालयो में भी शिक्षक बी टी सी होते है फ़िर भी बच्चो को उस ढंग से नही पढाते है जैसा उनको प्रशिक्षण दिया गया है/ सरकारी पदाधिकारी है कौन क्या कर सकता है/ मुझे तो हैरानी तब हुई जब सरकारी अध्यापको के बच्चे पब्लिक स्कूल में पढ़ने जाते है/ एक और बानगी देखिये अभिभावकों की/ जब बच्चा सरकारी स्कूल   में पढ़ने जाता है तो बिना बाल बनाये, बिना पालिस का जूता,  घर  के दरवाजे तक भी उसको नही छोड़ने नही जाते है अब वाही बच्चा जब पब्लिक स्कूल  में जाता है- बालो में कंघी करेगे, कपडे साफ पहनायेगे, स्कूल के गेट तक छोड़ने जायेगें , लेन भी जायेगे  एक सज्जन का विचार था …….
  हमारे प्रदेश की शिक्षा नीति के बारे में क्या कहना! प्राइमरी स्कूल बन गये हैं बाल होटल। वैसे भी अब सरकारी प्राइमरी स्कूल में या तो गरी़ब तबके के ही छात्र आते है क्योंकि जो भी सक्षम आदमी है वह गांव-घरों में खुले अंग्रेजी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाना अपनी शान समझ्ते हैं, भले ही वहां गांव के प्राइमरी स्कूल से भी दोयम दर्जे की पढ़ाई होती है। क्योंकि प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने वाला शिक्षक कम से कम B A, BTC  तो होता है और उसी गांव में अंग्रेजी स्कूल के टीचर और मैडम इंटर पास बेरोजगार ही होते हैं।   अब बात प्राइमरी स्कूलों की शिक्षा प्रणाली की।  बेचारा वहां का मास्टर स्वीपर भी खुद है, चौकीदार भी खुद है, राशन लाने वाला भी वह और मास्टर तो है ही। हमारा शासन तंत्र पता नहीं क्यों इस बात को नहीं समझ पाता है कि प्राइमरी स्कूलों में जो सुविधायें दी जानी चाहिये, वह क्यों नहीं दी जाती हैं? वहां के मास्टर को सबसे पहले आकर स्कूल खोलना है, श्याम-पट साफ करने हैं,  और मिड डे मील के लिये भोजन माता को राशन देना है, इस सब के अतिरिक्त उसे कई तरह के कागजात भी तैयार करने होते हैं। अगर वह इन सब कामों को छात्रों से कराये तो लोगों को आपत्ति है कि हमारे बच्चों से काम कराया जा रहा है और अगर वह खुद करे तो कहा जाता है कि पढ़ाता नहीं है। सोचने की बात यह है कि इतने सारे कामों को वह कैसे करे। जहां पर दो-तीन अध्यापक हैं वहां तो ठीक है, लेकिन हमारे प्रदेश के और खासतौर पर पहाड़ों में एकल अध्यापक ही प्राथमिक स्कूलों में हैं। बच्चों का ध्यान सिर्फ और सिर्फ भात पकने तक ही सीमित रह गया है। गरीब लोग बच्चों को इसलिये ही स्कूल भेजते हैं कि कम से कम उनका बच्चा एक समय  तो पेट भर सके। दूसरे पहलू  की ओर  चर्चा को मोड़ते हुए सज्जन का कहना  था ……..
  छह घंटे की पढ़ाई के लिए एक तो भारी भरकम ट्यूशन फीस, ऊपर से कोचिंग के नाम पर और मोटी रकम और वह भी स्कूल टाइम में ही। तर्क भी ऐसा दिया जा रहा कि अभिभावकों के न तो गले उतर रहा और न ही वे विरोध कर पा रहे हैं। वाह भई, बड़ी दूर की कौड़ी निकाल कर लाए हैं पब्लिक स्कूल। पब्लिक  स्कूलों के इस तरह के खेल से अभिभावक ही नहीं राज्य सरकार भी परेशान है। पर  स्कूल प्रबंधन हैं कि मनमानी से बाज आते नहीं दिख रहे हैं। अभी तक आमतौर पर इन स्कूलों में मनमाफिक फीस लेने की शिकायतें अभिभावकों की तरफ से मिलती रहीं, लेकिन अब इन स्कूलों में स्कूल टाइमिंग में ही कोचिंग कराना सामने आया है और वह भी एक्सट्रा रकम लेकर। टयूशन फीस, लाइब्रेरी फीस और कंप्यूटर फीस के नाम पर अच्छा-खासा शुल्क लेने वाले कुछ पब्लिक स्कूलों ने अब आईआईटी और मेडिकल स्कूलों की प्रवेश परीक्षा के लिए कोचिंग भी शुरू कर दी है। स्कूलों की यह पहल उनके ही लिए सोने पर सुहागा साबित हो रही है। 
 ???????????
आप का क्या कहना है  शायद इतने प्रश्न-वाचक चिन्हों को लगाना समीचीन हो।   

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   from   H S Rawal hsrawal9@gmail.com
to   msmehta@merapahad.com
date   Mon, Sep 5, 2011 at 9:58 AM
subject   Registration
mailed-by   gmail.com
signed-by   gmail.com
   Important mainly because of the people in the conversation.
   
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Dear Mehtaji, I Harish Chandra Singh Rawal from Jabalpur (MP) congratulate to you and all the members of your team for making grant success to MeraPahad. I hails from Vill-Kafali, PO-Rawatsera, Distt-Bageshwar and would like to register in Merapahad to get latest news,forum etc conerning of my Motherland. I have just retired from Army and looking second career in Devbhoomi. Please advice me to register in merapahad. Thanks. The same request also being sent to Hem Pantji. Thanks and warm regards.

 

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