Author Topic: Poster by Mera Pahad / 'मेरा पहाड़ नेटवर्क' के सदस्यों द्वारा बनाये गए पोस्टर  (Read 26008 times)


विनोद सिंह गढ़िया

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[justify]उत्तराखण्ड के रिंगाल उद्योग पर पोस्टर संख्या-03 

नाम : डोका (ड्वक)

उत्तराखण्ड की मनोहर वादियों में आज भी डोके का प्रयोग अन्य रिंगाल से निर्मित वस्तुओं की अपेक्षा अधिक होता है। चाहे हमें घास लाना हो या जंगल से सूखी पत्ती, डोके का प्रयोग करते आ रहे हैं। इन सब के बावजूद  आज डोके का प्रयोग पहले की अपेक्षा हम दिन-प्रतिदिन कम करते जा रहा हैं। कुछ सालों पहले तक इस डोके के उपयोग के आधार पर अलग-अलग नामों से जाना जाता था। जैसे- घस्यारी डोका ( घास लाने के लिए), घट्याव डोका (घट/घराट में अनाज लाने ले जाने के लिए), पतली डोका (जंगल से सूखी पत्ती/पत्याल लाने के लिए), पुरोली डोका (खेतों में गोबर का खाद/प्वर ले जाने के लिए)इत्यादि- इत्यादि। लेकिन आज इसके उपयोग सीमित रह गए हैं। आज आवश्यकता है तो हमारे उत्तराखण्ड के रिंगाल उद्योग का संरक्षण और संवर्धन की।

(भूल-चूक और संशोधन के लिए आपके सुझाव आमंत्रित हैं- विनोद गढ़िया)


विनोद सिंह गढ़िया

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उत्तराखण्ड के रिंगाल उद्योग पर पोस्टर संख्या-04

नाम : डलिया (डाल)

आज आपको संक्षिप्त जानकारी देते हैं रिंगाल से निर्मित बहुपयोगी वस्तु 'डलिया' के बारे में।


विनोद सिंह गढ़िया

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प्रवासी पहाड़ियों को 'पहाड़' का पहाड़ से सन्देश।


Devbhoomi,Uttarakhand

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Great work by Vinod Gadiya ji Bahut hi shandar Poster create kiye hain apne keep it up +1 karma apko

विनोद सिंह गढ़िया

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घुघूती त्यौहार और उत्तरायणी के बधाई सन्देश कार्ड निम्न अटैचमेंट से प्राप्त करें.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Makar Sangranti, Ghughutiya kee Sabko Hardhik Shubhkamnaye !
« Reply #56 on: January 14, 2015, 08:13:48 AM »

Makar Sankranti kee Hardhik Shubhkamnaye!

विनोद सिंह गढ़िया

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इस बार बरसात में हरेला पर्व पर अपने आसपास 05 फ़लदार / छायादार पेड़ अवश्य लगायें।

*जनहित में इस सन्देश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचायें।



Harela


विनोद सिंह गढ़िया

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[justify]आप सभी को सपरिवार बसन्त ऋतु के स्वागत में मनाया जाने वाला पर्व बसंत पञ्चमी, विद्या की देवी माँ सरस्वती के पूजन का पर्व और उत्तराखण्ड में 'सिर पञ्चमी' के रूप में मनाये जाने इस पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।

उत्तराखण्ड में 'सिर पञ्चमी' के दिन लोग जौ के खेत में जाकर पूर्ण विधि-विधान के साथ जौ के पौधों को उखाड़कर घर में लाते हैं और मिट्टी और गाय के गोबर का गारा बनाकर अपने घरों के चौखटों पर लगाते हैं साथ ही परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर इन जौ के पौधों को रखते हैं।बसंत ऋतु के आगमन पर पीला वस्त्र धारण करने की परंपरा है। साथ ही घरों में मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही पकवान भी बनते हैं। आज के दिन पहाड़ों में लोग अपने छोटे बच्चों के कान एवं नाक भी छिदवाते हैं। बसंत पंचमी के इस पर्व को गांवों में बहन-बेटी के पावन रिश्ते मनाने की भी परंपरा है, जो वर्षो से चली आ रही है। त्यौहार को मनाने के लिए ससुराल में रह रही बहन या बेटी मायके आती है। या फिर मां-बाप स्वयं पंचमी देने बेटी के पास जाकर उसकी दीर्घायु की कामना करते हैं।
विनोद गढ़िया
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Bahut khoob.. sabko Basant Panchmi ki hardik shubhkamanye!


[justify]आप सभी को सपरिवार बसन्त ऋतु के स्वागत में मनाया जाने वाला पर्व बसंत पञ्चमी, विद्या की देवी माँ सरस्वती के पूजन का पर्व और उत्तराखण्ड में 'सिर पञ्चमी' के रूप में मनाये जाने इस पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।

उत्तराखण्ड में 'सिर पञ्चमी' के दिन लोग जौ के खेत में जाकर पूर्ण विधि-विधान के साथ जौ के पौधों को उखाड़कर घर में लाते हैं और मिट्टी और गाय के गोबर का गारा बनाकर अपने घरों के चौखटों पर लगाते हैं साथ ही परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर इन जौ के पौधों को रखते हैं।बसंत ऋतु के आगमन पर पीला वस्त्र धारण करने की परंपरा है। साथ ही घरों में मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही पकवान भी बनते हैं। आज के दिन पहाड़ों में लोग अपने छोटे बच्चों के कान एवं नाक भी छिदवाते हैं। बसंत पंचमी के इस पर्व को गांवों में बहन-बेटी के पावन रिश्ते मनाने की भी परंपरा है, जो वर्षो से चली आ रही है। त्यौहार को मनाने के लिए ससुराल में रह रही बहन या बेटी मायके आती है। या फिर मां-बाप स्वयं पंचमी देने बेटी के पास जाकर उसकी दीर्घायु की कामना करते हैं।
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