Author Topic: Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख  (Read 1484235 times)

Bhishma Kukreti

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Mangement Guru- 50
प्रबंधन गुरु - 50



                                                    एल्विन टोफ्फ्लर  बक्युं बक्की

                           Alvin Toffler :The Futurologist's Futurologist





(Notes on General management Guru, , Managemnt Thinkers and Bright Management Practices,Management Gurus, Marketing management Guru, Human Resourse Development Management Guru, Qaulity Mangement Guru, Operation Managemnt Guru, )

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                 

                                                                   Bhishm Kukreti

                  न्यूयार्क मा १९२८ मा जनम्युं एल्विन  टोफ्फ्लर  तैं फुचरोलोजिस्ट औफ़ फुचरोलोजिस्टस  (बक्क्युं  बक्की ) बुले जांद . एल्विन टोफ्फ्लर की हरेक किताबन दुनया क प्रबंधन विज्ञान अर तकनीकी विज्ञान मा तहलका मचाई .

                         फ्यूचर शौक पोथा मा  एल्विन टोफ्फ्लर न ब्वाल बल अब थ्वड़ा सी टैम मा भौत सा खोज होली अर दुनया दिखणि   च बल इनी होणु च. फ्यूचर  शौक पोथा की कौपी साठ लाख से जादा बिक गेन

                        फस्ट वेव प्वाथा मा  एल्विन टोफ्फ्लर न बात कौरी बल पाषण  संस्कृति क अयेड़ी संस्कृति (शिकारी संस्कृति ) तैं कृषि संस्कृति न पछाड़ अर यीं किताब मा कां एक संस्कृति हैंकि संस्कृति तैं ठस्कांदी  च, कन धक्ल्यांदी च जन बथौं पर बात करी

                           सेकंड वेव मा एल्विन टोफ्फ्लर उद्योग क्रान्ति क पैथरै  संस्कृति बात कौर

                          थर्ड वेव मा  एल्विन टोफ्फ्लर न   औद्योगिक संस्कृति पैथरै  या उत्तर औद्योगिक संस्कृति  का गुणों बारा मा बात कौरी  अर जु हम आज ग्लोबलाइज़ेसन का सांस्कृतिक गुण दिखणा छ्न्वां वांक बारा मा  एल्विन टोफ्फ्लर पैलि बाक बोली दे छौ

 

 
                  Key Books by Alvin Toffler


 1- Future Shock, 1970

2-The Third Wave , 19800

3- Power Shift , 1990

4-War and Anti War (with his wife Heldi Toffler) , 1993

 भौत सा नामी गिरामी संस्थानुं न मान सम्मान मा    एल्विन टोफ्फ्लर तैं पुरुस्कृत कार

 

Notes on General Management Guru, , Notes on Managemnt Thinkers and Bright Management Practices,Management Gurus, Marketing Management Guru, Qaulity Mangement Guru, Operation Managemnt Guru,

Human Resourse Development Management Guru to be continued ......in part 51

 

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Grammar of Kumauni Language

Grammar of Garhwali Language

Grammar of Languages of Uttarakhand

Grammar of Nepali Language

Grammar of Mid Himalayan Languages





                                      मध्य हिमालयी कुमाउंनी , गढ़वाली एवं नेपाली भाषा-व्याकरण का तुलनात्मक अध्ययन भाग -7
                                                                                                       

                                                       ( Comparative Study of Grammar of Kumauni, Garhwali Grammar and Nepali Grammar ,Grammar of Mid Himalayan Languages-Part-7 )

                                                                          सम्पादन : भीष्म कुकरेती


                                          Edited by : Bhishm Kukreti

इस लेखमाला का उद्देश्य मध्य हिमालयी कुमाउंनी, गढ़वाळी एवम नेपाली भाषाओँ के व्याकरण का शास्त्रीय पद्धति कृत अध्ययन नही है अपितु परदेश में बसे नेपालियों, कुमॉनियों व गढ़वालियों में अपनी भाषा के संरक्षण हेतु प्रेरित करना अधिक है. मैंने व्याकरण या व्याकरणीय शास्त्र का कक्षा बारहवीं तक को छोड़ कभी कोई औपचारिक शिक्षा ग्रहण नही की ना ही मेरा यह विषय/क्षेत्र रहा है. अत: यदि मेरे अध्ययन में शास्त्रीय त्रुटी मिले तो मुझे सूचित कर दीजियेगा जिससे मै उन त्रुटियों को समुचित ढंग से सुधार कर लूँगा. वास्तव में मैंने इस लेखमाला को अंग्रेजी में शुरू किया था किन्तु फिर अधिसंख्य पाठकों की दृष्टि से मुझे हिंदी में ही इस लेखमाला को लिखने का निश्चय करना पड़ा . आशा है यह लघु कदम मेरे उद्देश्य पूर्ति हेतु एक पहल माना जायेगा. मध्य हिमालय की सभी भाषाएँ ध्वन्यात्म्क हैं और कम्प्यूटर में प्रत्येक भाषा की विशिष्ठ लिपि न होने से कहीं कहीं सही अक्षर लिखने की दिक्कत अवश्य आती है किन्तु हम कुमाउंनी , गढवालियों व नेपालियों को इस परेशानी को दूसरे ढंग से सुलझानी होगी ना की फोकट की विद्वतापूर्ण बात कर नई लिपि बनाने पर फोकटिया बहस करनी चाहिए. ---- भीष्म कुकरेती )


                                                                       नेपाली भषा में सर्वनाम विधान


                       नेपाली में भी सर्वनाम संज्ञा या सर्वनाम की जगह प्रयोग होता है

 कृष्ण प्रसाद पराजुली व  कृष्ण प्रसाद पराजुली ने  नेपाली सर्वनामों को छ भागो में विभाजित किया है

१- पुरुष वाचक ; 

-------------------------------एक वचन --------------------------------------बहुवचन-----

 

१-प्रथम पुरुष ----------------म ---------------------------------------------हामी (हरु) -------

मध्यम पु.-----------------------तं/तपाई -----------------------------------------तिमीहरु/ तपाई हरु --

अन्य पु. ------------------------उ -----------------------------------------------उनिहरु /तिनिहरू   

२-दर्शक वाचक ----------------यो ----------------------------------------------- यी

दर्शक वाचक-------------------त्यो -----------------------------------------------ती

 दर्शक वाचक------------------यहाँ /त्यहाँ -----------------------------------------

३-सम्बन्धवाचक --------------------------केही/ कोहि, जे , जेसुक्कै ---------------------------- वचन निर्धारण   अन्य आधार करते हैं

४& ५ प्रश्न वाचक ------------------ ------------जो, जस्ले,जे, जुन --------------------------------वचन निर्धारण  अन्य  आधार करते हैं

नेपाली मे भी  सर्वनाम लिंग  भेद क्रिया से होता है

बाल कृष्ण बाल कहते हैं कि यह देखा गया है कि नेपाली में सर्वनाम में कारकों व संख्याओं  का प्रयोग अधिकतर अनियमित होते हैं

 सर्वनाम में लिंग भेद के उदहारण :

उ ( वह,  पुल्लिंग )

तिनी (वह , स्त्रीलिंग)

उस्को (उसका , पुल्लिंग)

तिनको (उसकी , स्त्रीलिंग )

उस्लाई ( उसको पुल्लिंग )

तिनलाई (उसको, पुल्लिंग)

जी.जी. रोजर्स (१९५१)  'कोलोक्वियल नेपाली ' पुस्तक में लिखते हैं कि गढ़वाली व कुमाउंनी भाषाओँ कि तरह ही सर्वनामों को आदरसूचक भी बनया जाता है . यथा

सर्वनाम -----------आदर देने हेतु परिवर्तित

म ------------------------मऐ

तं--------------------------तैं

उ -------------------------उई 

   


संदर्भ
:


१- अबोध बंधु बहुगुणा , १९६० , गढ़वाली व्याकरण की रूप रेखा, गढ़वाल साहित्य मंडल , दिल्ली

२- बाल कृष्ण बाल , स्ट्रक्चर ऑफ़ नेपाली ग्रैमर , मदन पुरूस्कार, पुस्तकालय , नेपाल


३- भवानी दत्त उप्रेती , १९७६, कुमाउंनी भाषा अध्ययन, कुमाउंनी समिति, इलाहाबाद

४- रजनी कुकरेती, २०१०, गढ़वाली भाषा का व्याकरण, विनसर पब्लिशिंग कं. देहरादून


५- कन्हयालाल डंड़रियाल , गढ़वाली शब्दकोश, २०११-२०१२ , शैलवाणी साप्ताहिक, कोटद्वार, में लम्बी लेखमाला

६- अरविन्द पुरोहित , बीना बेंजवाल , २००७, गढ़वाली -हिंदी शब्दकोश , विनसर प्रकाशन, देहरादून


७- श्री एम्'एस. मेहता (मेरा पहाड़ ) से बातचीत

८- श्रीमती हीरा देवी नयाल (पालूड़ी, बेलधार , अल्मोड़ा) , मुंबई से कुमाउंनी शब्दों के बारे में बातचीत


९- श्रीमती शकुंतला देवी , अछ्ब, पन्द्र-बीस क्षेत्र, , नेपाल, नेपाली भाषा सम्बन्धित पूछताछ


१० - भूपति ढकाल , १९८७ , नेपाली व्याकरण को संक्षिप्त दिग्दर्शन , रत्न पुस्तक , भण्डार, नेपाल

११- कृष्ण प्रसाद पराजुली , १९८४, राम्रो रचना , मीठो नेपाली, सहयोगी प्रेस, नेपाल






Comparative Study of Kumauni Grammar , Garhwali Grammar and Nepali Grammar (Grammar of , Mid Himalayan Languages ) to be continued ........



. @ मध्य हिमालयी भाषा संरक्षण समिति

Bhishma Kukreti

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Humour/Satire

चबोड़ इ चबोड़ मा भैरों!

                                                           मुन्ना भाई क क्षेत्र मा  ओपिनियन  पोल की पोल

                                            भीष्म कुकरेती

                       अच्काल चुनौ मौसम नी च असल मा अच्काल त एक्जिट पोल को मौसम च . चुनौ प्रत्यास्युं से बिंडी त  एक्जिट पोल का सर्वेयरूं टेंट/तम्बू लग्याँ  छन.  इनां  एक्जिट पोल, उना एक्जिट पोल, इख एक्जिट पोल, उख एक्जिट पोल, तौळ एक्जिट पोल त मैल (मथिन) एक्जिट पोल  जख जाओ तख़ एक्जिट पोल.   १८२४ हेनिसबर्ग पेनिसिल्वेनीयन  ओपिनियन पोल की पवाण लगै छे अर अब या बीमारी  आन्द आन्द सरा गढ़वाळ मा लेँटीना  खौड जन सौरी गे. जैदिन बिटेन मुन्ना भाई चुनौ मा खड़ो ह्व़े अर मुन्ना  भाई न चुनौ  पर्चा क्या भौर कि में  कुण मुसीबत ह्व़े गे .

                 अब हर चार घडी मा  मेरापहाड़डोट कौम  का एम्.एस मेहता जी क फोन आन्दु बल भीसम जी आप मुन्ना भाई  क एरिया क छन त मुन्ना भाई क एरिया क  एक्जिट पोल मा हर घड़ी हिस्सा ल़ीणा राव अर  व्व्युअर्स तैं बतान्दा रावा बल मुन्ना भाई  क एरिया बिटेन कु जीतल, मेहता जी फोन नि धरदन कि यंग उत्तराखंड का विपिन पंवार जी को फोन ऐ जांद बल कुकरेती जी यू क्या च ? आप मेरापहाड़ मा एक्जिट पोल मा हिस्सा लीणा छ्न्वां अर यंग उत्तराखंड तैं छ्वारा छपार समजिक तिराणा छ्न्वां, ज़रा हमर यंग उत्तराखंड का एक्जिट पोल या ओपिनियन पोल मा बि जोगध्यान/गहरी रूचि  लगैक  हिस्सा ल्याओ . उख ड्याराडुण  बिटेन    दून दर्पण, गढ़वाळ पोस्ट, दैनिक हिंदुस्तान, अमर उजाला, , दैनिक जागरण का दगड्या संवाददातों क फोन त ठीक च पण जब मेरी पट्टी क कथगाई अखब़ारूं   संवाददाता नंदा दत्त बड़थ्वाळ जी क फोन आई बल ए भीषम जरा अपण गाँ जसपुर,  म्यार गां  बडेथ का, न्याड़  ध्वारो सब्बी गाँऊँ अर त्यार रिश्तेदारूं  सब्बी गाऊँ मा  ओपिनियन पोल या एक्जिट पोल  कौर अर रिजल्ट श्याम दें तलक मै तैं बथा . त मी झसके ग्यों

मीन आजौ पत्रकार पण ब्याल़ो रिटायर्ड मास्टरजी तैं  पूछ , " मास्टर जी ! कनो ? मी रौंद मुंबई मा अर आप रौंदा बडेथ  मा  त मीन जि ओपिनियन /एक्जिट पोल करण छौ कि उख रैका तुमन ? "

मास्टर जी उर्फ़ पत्रकार जीन बिंगाई/समजाई, " अरे भीसम ! इख क्या च ! अच्काल लोक क्या अपणि   कज्याण बि पत्रकारूं देखिक इन बितकदन जन इकुळया सन्नी /छन्नी /गौसाला क इकुळया गोर उपरि गोरुं   देखिक बितकदन. क्वी बि ओपिनियन पोल या एक्जिट पोल मा हिस्सा इ नि ल़ीणो च अर जु बथाणा भी छन ओ सौब झूट बुलणा छन. मीन चार दिन पैल कनै  कौरिक बि लोकुं तैं पुल़े पुसेकि ओपिनियन ब्वालो कि एक्जिट पोल कार त पायी कि यमकेश्वर ब्लौक बटें परिवर्तन पार्टी जितणि च अर इख बिटेन परिवर्तन पार्टी क क्वी उम्मेदवार इ नी च . वोटर अब पत्रकारूं से इनी खार खाणा छन जन दिग्विजय सिंग आर एस. एस से खार खांद . भीसम अब त त्यारो इ  सार च.  जरा मुंबई मा बैठिक  म्यार अर दुसर गाँव कि खबर दे भै कि कु जितणु च."
 
   भुर्त्या बौणिक , अपुण बाड़ी पळयो  खैक, अपण  मोबाइल का बिल बढैक मुंबई मा बैठिक ढाञगु पट्टी क नामी गिरामी पत्रकार जी खुणि ढाञगु  पट्टी याने मुन्ना भाई क चुनौ क्षेत्र मा ओइपिनियन पोल कार अर ओपिनियन पोल को रिजल्ट या च

   अब जन कि जसपुर ग्राम सभा मा जसपुर गाँ का वोटरूं संख्या हौरू गाँ से भौत जादा च पण जसपुर वाळ अपण गाँ वाळ पर कतै बि विश्वास नि करदन अर जादातर जसपुर ग्राम सभा क   प्रधान दुसर गौं  को ही चुने जांद. जु जसपुर का लोक सद्यनो तरां

 अपण गां वालूं पर विश्वास नि कारल त जसपुर वालूंन ग्वील , बडेथ  का ऐजेंटूं कि इ सुणन.  जसपुर का कुकरेत्युं  न ग्वील का जाती भाई कुकरेती एजेंट कि नि सुणनअर बडेथ का बड़थ्वालूं बात जरुर मानी जाण   अर जसपुर का जखमोला अर बहुगुणोन ग्वील वालूं बात त मानी ल़ीण पण बडेथ वालूं  क नि सुणनि अर फिर जसपुर का शिल्पकारुं न ना त जसपुर , ना बडेथ  अर ना ही  ग्वील वलूं क  बात मनण (बात बि सै च  जब जसपुर का शिल्पकार तिनी गावूं हौळ लगांदन त अच्काल जब हल्योंकमी ह्वाओ त किलै शिल्पकारूं ण कैकी बि सुणन !) . ग्वील वालुं बात बि अजीब छ सरा  अडगें मा इखाक  कुकरेती कै बि कुकरेती कि इख तलक कि अपनों गां का कुकरेत्युं कि बात नि माणदन अर बडेथ वालूं बात बि ग्वील़ो कुकरेती नि सुणदन. इन मा जसपुर का शिल्पकार इ ग्वील वालूं पर दबाब बणे सकदन कि ग्वील वाळ कै तैं वोट दयावान . पण सबसे बड़ो सवाल च जसपुर का शिल्पकारों तै कु पटालो. जसपुर का शिल्पकार अपणि  अडगें  (क्षेत्र)  का कै बि बामण, राजपूत अर  शिल्पकारूं बात नि मणदन . जसपुर का शिल्पकारूं बुलण च बल हम त यीं पट्टी का पुराणा बासिन्दा छंवां जु कुकरेत्युं दगड इ जसपुर मा बसी छ्या, हम जसपुरौ शिल्पकारूं क हुक्का श्रीनगर अर टीरी क माराज बि पसंद करदा था त  हमन कैकी बात किलै सुणन. इन मा जसपुर का शिल्पकारूं  तैं पटाणो डबरालस्यूं, उदैपुर,  अजमेर, लंगूर का ऐजेंटूं तैं लाण पोड़ल . अब जब यीं अडगें /क्षेत्र मा दुसर अडगें का   एजेंट ऐ जाला त तबी पता चौलल कि गौल या ऊँट कै हौड़ फरकल.

 अर इ हाल म्यार सौब रिश्तेदारूं  गाऊँ हाल छन . सबि जगा भैराक एजेंट जाला त पता चौलल बल ऊँट कें हौड़ बैठल .

           या त ह्व़े माइक्रो लेवल कि बात अब ज़रा माइक्रो लेवल कि बात बि जणन जरुरी च .

         हाँ जु बि आश्वासन का औडळ बीडळ खाली लाला इ ना बल्कण मा  लोकुं तैं लगण बि चएंद  बल नेता जी आश्वासन  पूरा कौरल त सैत च वो नेता जीति जालो जो आश्वासन का औडळ -बीडळऊँ दगड विश्वास का ढांड बि बरखे साकल वैका जितणो असार जादा राला. चुनौ  माया  ( परसेप्सन  )  को खेल जु  च . अर जखम जाती गणत कि गोटी फिट करण उखम गोटी फिट करणी पोडल .

        अब जब कै तैं जग्गी मा खाणक खलये जाओ अर दक्षिणा नी लगए जावू  , पाणि पिठे नी ह्वाऊ त वा जग्गी सुफल नि होंद . जग्य/ यग्य  मा जु होम सामग्री नि फुके  जाओ त वो यग्य सुफल नि मणे जांद त जु जथगा  रूप्या चुनावी यग्य मा

फूकल वैको जितणो असार जादा होला.

   अब को जमाना छ्वायों/छोयों क नी च अच्काल त गाड -गदनो क जमानो च . त जु बि गाड- गदनो मा पाणी जगा गाड- गदनो मा  शराब , दारु बौगालो वो इ जितलो .

        अब सौब कुछ ह्व़े बि जालो अर चुनाऊ दिन बिदू नि रालो , ह्यूं पोड़ी जालो  त समजी ल्याओ पकीं पकयीं  खीर मा कवा न बीटी द्याई. त जू बि प्रत्यासी  वोटरूं  तैं रगोंड़ी -रगोंडिक, ल्ह्सोरि- ल्ह्सोरिक , जनकै-जनकैक, खेंचि-खेंचिक पोलिंग बूथ ल्ही जालो वैका जितणों  असार  बिंडी राला.

  मी यू लेख लिखणु इ छयो कि  चुनौ प्रत्यासी मुन्ना भाई क फोन आई , " यार भीसम!  , ज़रा अपण ओपिनियन पोल कु हिसाब से मी तैं बतादी  कि मी जितणु छौं कि ना. इख कुछ पता इ नि चलणु कि मी जितणु छौं कि ना  ?"

 (Its just a fiction and satire )

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                      Garhwali Words, now Being Extinct -13


                               Presented by Bhishm Kukreti



Sources : 1-Shri Ramakant Benjwal and Shrimati Vina Benjwal , Garhwali Shabdkosh, Vinsar Publishing co. Dehradun

 2- Late Kanhyaa Lal . Dandriyal Garhwali shabd Kosh (Series in Shailvani, Kotdwara )


डंक्वणि = चालाकी से पंहुचाया ग्या नुकसान

डंग्याण = पत्रों वाली जगह

डंड्वाक  = पहाड़ी भालू

डंणसिलु  = दूसरों को सहन न करने वाला 

डक्वति  = झूटी बाते, शेखी 

डडैल  = वस्तु को तेल में पकाने के बाद वर्तन में बचा तेल

डळघास = पेड़ों की पत्तियाँ जो घास के काम आती है , चारे के पेड यथा भीमल, खड़ीक

डांडरा, डांडर, डांडण  = हल लगे दो स्यूं के बीच की बिन जुती जमीन

डमराण = सीं पर सीं हल न लगाकर ऐसे ही बेतरतीब  हल लगाना

डांसि = नुकसान

डाबर = जंगल

डार = झुण्ड , समूह, कतार

डिगण = किसी खाद्य  पदार्थ की तीब्र इच्छा

डिलारू = खेत में मिटटी के ढेल़े फोड़ने का लकड़ी का टुकड़ा

 डीट  = नजर, दृष्टि 

डीप = नीचे की ओर का किनारा

डुकाण = गाय/भैंस के थानों में स्वाभाविक रूप से दूध उतर आणा

डुकौणु - गाय/भैंस के स्तनों को मलासना जिससे दूध उतर जाय

डोंर्या  - डमरू बजाने वाला

डोंर्या (Dounryaa ) =समूह में सबसे ताकतवर या बड़ा

 ड्वैंटा,  ड्वणेटु , द्वणेटु = तेल पिराने के लिए प्रयुक्त लकड़ी


ञ= अनिस्वर बिन्दु




Courtesy: Shri Ramakant Benjwal and Shrimati Vina Benjwal , Garhwali Shabdkosh, Vinsar Publishing co. Dehradun

Courtsey : Shri H.K. Dandriyal , Delhi

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Mangement Guru- 51
प्रबंधन गुरु - 51

                                                   विक्टर व्रूम ; नेतृत्व , प्रेरणा अर निर्णय विज्ञानों जणगरु                                                   
                   

                           Victor Vroom : Motivation and Leadership Decision Making Expert

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                                                       Bhishm Kukreti

          कनाडा मा जनम्युं विक्टर व्रूम (१९३२ ) कु नाम  प्रबंधन मा नेतित्व, प्रेरणा अर कनकैक निर्णय  ल़ीणो ब्युंत /तकनीक मा  agwaadi ma  च .

                                                      आशा सिद्धांत


  व्रूम को  आशा सिधांत बड़ो कामौ च . सिद्धांत च

M= E x V

Motivation = Expectency Measures x Valence for Individuals

             

                                      व्रूम अर येट्टो क   नेतृत्व द्वारा निर्णय लीणो मौडल 

 येट्टो आर व्रूं क नेतृत्व द्वारा निर्णय सिधान्त  मौडल इन छन

१- औथरिटि डिसीजन : पधानो अफुक निर्णय

२- कंस्लटिव   डिसीजन- पढान जब  सलाकारूं सलाकरून  सल्ला से निर्णय लेन्दु 

३- ग्रुप डिसीजन - जब सौब गां -गौळ /डार/ग्रुप  की सुणवै से निर्णय हूंद

   

                             Books by Victor Vroom

1- Work and Motivation, 1964

2-Leadership and Decision Making  (with Yetton) , 1973

3-The New Leadership, (with Jago) , 1988


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Mangement Guru- 52
प्रबंधन गुरु - 52

                                               मैक्स  वेब्बर:   दफ्तरशाही  को धड्वे                             

                            Max Webber : The Conceptuliser of Bureaucracy 

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                                                       Bhishm Kukreti
 
   उन त आज क्या भोळ बि लोकुन बुलण बल ब्यूरोक्रेसी /दफ्तर शाही /लाल फीता शाही रचना धर्मिता क दुश्मन च पण बगैर  दफ्तर शाही क  सरकारी या गैर सरकारी संस्थानु मा काम-काज होण मुस्किल च . जर्मनी मा जनम्युं मैक्स वेब्बर (१८६४-१९३०) 

न ही  पैल पैल संस्थानुं मा दफ्तर शाही की छ्वीं लगैन अर लोकुन तैं बताई बल बगैर दफ्तरशाही क ठीक से काम नि ह्व़े सकदो. वेब्बर तैं समाज शाश्त्र को बुबा जी बि बुले जांद.   

  वेब्बर न करिश्माई अधिकार/औथरिटि;, पारंपरिक अधिकार;  तार्किक, बुद्धिमतापूर्णअधिकार  /रेसनल औथरिटि की व्याख्या कार अर ब्युरेक्रेसी  /दफ्तर शाही पर  कथगा इ सिद्धांत दुनया तैं देन  जु आज बि प्रशासन मा  सन्दर्भ का काम करदन .                                                         

              Books by Max Webber
 
 

 1- Protestant Ethic and Spirit of Capitalism,1904, reprinted 1930

2- Theory of Social and economic Organization                                             



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                                           मध्य हिमालयी कुमाउंनी , गढ़वाली एवं नेपाली भाषा-व्याकरण का तुलनात्मक अध्ययन भाग -8

                       

                               ( Comparative Study of Grammar of Kumauni, Garhwali Grammar and Nepali Grammar ,Grammar of Mid Himalayan Languages-Part-8 )



                                                         सम्पादन : भीष्म कुकरेती 

                                    Edited by : Bhishm Kukreti
                                                                     
                                        कुमाउंनी में विशेषण विधान  (Adjectives in Kumauni Language

                         
                           संज्ञा की भांति  कुमाउंनी  में विशेषण दो वचनों व लिंगो से प्रयुक्त होते हैं

              कुमाउंनी में विशेषण निम्न प्रकार से पाए जाते हैं

१- गुणवाचक विशेषण

२- प्रणाली वाचक विशेषण

३-परिमाण वाचक विशेषण

४-संख्यावाचक विशेषण

५- सार्वनामिक विशेषण

कुछ विशेषण रूपान्तरयुक्त  होते हैं व शेष रूपांतर मुक्त होते हैं

 

                                                        १-  कुमाउंनी में गुणवाचक विशेषण


                                                      १ अ-   रूपांतरमुक्त गुण वाचक विशेषण

                       रूपांतरमुक्त गुण वाचक विशेषण मूल प्रतिवादक व व्युत्पुन प्रतिपादक दोनों होते हैं

मूल प्रतिपादक रुपंतारमुक्त  गुण वाचक विशेषण : मूल प्रतिपादक गुण वाचक विशेषण अधिकतर व्यंजनान्त तथा लिंग-वचन से अप्रभावित होते हैं

दक्ष (चतुर )

च्ल्लाक (चालाक )

शुन्दर (सुन्दर)

व्युत्पन्न प्रतिपादक रुपंतारमुक्त गुण वाचक विशेषण

गुलिया (मीठा)

मरियल ( दुर्बल )

 

                                         १ब- रूपांतरयुक्त गुण वाचक विशेषण

                      रूपांतरयुक्त गुण वाचक विशेषण लिंग व वचन अनुसार परिवर्तित होते हैं

1 रूपांतरयुक्त गुण वाचक विशेषण में पुल्लिंग एकवचन अविकारी कारक में ओ (उड़- निको, शारो ) , पुल्लिंग बहुवचन में आ ( निका, शारो )   , तथा स्त्रीलिंग में इ  (निकी, शारी ) जुड़ता है

                   

                            १स- गुणवाचक विशेषण की तीन अवस्थाएं

१- सामान्य - निको  (अच्छा)

२- अधिक्य वोधक- वी है निको  (उससे अच्छा)

३-अतिशय वोधक - शब् है निको (सबसे अच्छा )

 

                                                         २- कुमाउंनी में प्रणाली वाचक विशेषण

कुमाउंनी में प्रणाली वाचक विशेषण में दो प्रकार के विशेषण होते हैं

१- पुल्लिंग प्रणाली वाचक विशेषण - पुल्लिंग प्रणाली वाचक विशेषण के रूप एक वचन व कारको के अनुसार व्यवहार करते हैं

पुल्लिंग एक वचन में इस प्रकर के विशेषणों में अंत में -ओ तथा बहुवचन में -आ प्रत्यय लगता है . जैसे

इशा (ऐसा), इशा  (ऐसे);

उशो (वैसा) , कशो

उशा (वैसा) , कशा

२- स्त्रीलिंग प्रणाली वाचक विशेषण - स्त्रीलिंग प्रणाली वाचक विशेषण दोनों वचनों व कारकों में अपरिवर्तित रहते हैं

इशी (ऐसी)

उशी (वैसी)

कशी (कैसी)

                                                  ३- कुमाउनी में परिमाण वाचक विशेषण

 

              कुमाउनी में परिमाण वाचक विशेषण दो प्रकार के पाए जाते हैं

३ अ  पुल्लिंग परिमाण वाचक विशेषण

३ ब - स्त्रीलिंग परिमाण वाचक विशेषण-  स्त्रीलिंग परिमाण वाचक विशेषण मूल प्रतिपादक के अतिरिक्त व्युत्पन्न प्रतिपादक भी है

मूल प्रतिपादक परिमाण वाचक विशेषण  - शब , कम, भौत

व्युत्पन्न प्रतिपादक परिमाण वाचक विशेषण -

अत्थ्वे (पूरा का पूरा) ,

शप्पै (सब के सब )

मनें (थोड़ा ), मणि (थोडा ) आदि .

इस प्रकार के विशेषण रूपान्तर मुक्त हैं . किन्तु रूपान्तर युक्त परिमाण वाचक विशेषण में लिंग, वचन व कारक के अनुसार परिवर्तन का विधान है .यथा

इतनो (इतना )

इतना (इतने )

इतुनी (इतनी )

उतुनो (उतना )   

उतुना (उतने )

उतनी (उतनी )

                                      ४- कुमाउनी में  संख्या वाचक विशेषण

 

संख्या वाचक विशेषण  के दो भेद हैं

४अ- अनिश्चित वाचक संख्या वाचक विशेषण - गणनात्मक संख्यावाचक विशेषण के साथ विशेषण व्युत्पादक पर प्रत्यय लगाकर अनिश्चय संख्या वाचक विशेषण की प्राप्ति होती है

शैकड़ों

एकाध

दशेक

शौएक

कुमाउंनी में कभी कभी गणनात्मक संख्या वाचक विशेषण  की जगह संज्ञा का प्रयोग होता है . जैसे

बर्शेक

दिनेक

 

कुछ केवालात्मक विशेषण भी  संख्या वाचक विशेषण की कोटो में पाए जाते हैं . यथा

एकोलो-दुकोलो

एकाला-दुकाला

इकली- दुकली

 

४ब- निश्चय संख्या वाचक विशेषण

 

निश्चय संख्या वाचक विशेषण  सात कोटि के होते हैं १- गणना वाचक, २- क्रम वाचक विशेषण , ३- गुणात्मक वोधक , ४- समूह वोधक, ५- ५- प्रत्येक बोधक ६-ऋणात्मक बोधक ७-  केवालात्मक

१- गणना वाचक निश्चय संख्या वाचक विशेषण
 
 गणना वाचक निश्चय संख्या वाचक विशेषण  दो प्रकार के होते हैं

१अ -पूर्णांक बोधक : पूर्णांक बोधक  दो प्रकार के होते हैं

क- मूल प्रतिपादक - एक, द्वी, तीन. चार, पाँच, छै  शात 

ख- व्युत्पन्न - उन्नीश , उन्तीश , द्वी शौ, दश हजार

१ब-  अपूर्णांक वोधक गणना वाचक विशेषण - अपूर्णांक वोधक गणना वाचक विशेषण  दो प्रकर के होते हैं

ब क- मूल प्रतिपादक

पौ

आद्धा

पौन

शवा

डेढ़

बख- व्युत्पन्न अपूर्णांक वोधक गणना वाचक विशेषण 

पौनेद्वी

शवाद्वी

शाढ़े तीन

२- क्रम वाचक विशेषण

क्रम वाचक विशेषण दो प्रकार के होते हैं

२अ- रूपांतर उक्त क्रम वाचक विशेषण

पैञलि (पहली ) ,पैञलो (पहला ),पैञला  (पहले )

दुशरि, दुशोरी , दुशारा

तिशरि , तिशोरी, तिशारा

चौथि , चौथो, चौथे

२ब् रूपान्तर मुक्त क्रम वाचक विशेषण

रूपान्तर मुक्त कर्म वाचक विशेषण मे पाञ्च के बाद कर्म  द्योतक विशेषणों मे कर्म  द्योतक पर-प्रत्यय के रूप मे ऊँ  रहता है व दोनों लिंगों, कारकों व वचनों में अपरिवर्तित रहता है

पंचुं

छयुं

शतुं

अठुं 

नवुं 

 दशुं

शौउं 

हजारूं

 

३- गुणात्मकता  वोधक निश्चय संख्या वाचक विशेषण

गुणात्मकता  वोधक निश्चय संख्या वाचक विशेषण में पूर्णांक गणनात्मक  संख्या वाचक विशेषण के साथ गुणात्मकता बोधक प्रत्यय -गुन तथा लिंग वचन द्योतक प्रत्यय -ओ (पुल्लिंग एक वचन) , -आ,  (पुल्लिंग बहुवचन  ) तथा -इ  (स्त्रीलिंग) संलग्न रहते हैं   .

दुगुनो, दुगुना ,दुगुनि

तिगुनो,तिगुना, तिगुनि

स्त्रीलिंग एक वचन व बहुवचन में एक रूप होता है और -इ प्रत्यय ही रहता है

 
 
४- समूह वोधक  निश्चय संख्या वाचक विशेषण 

 पूर्णांक  गणनात्मक संख्या वाचक विशेषण के साथ प्रत्यय -ऐ तथा ऊँ जोड़ने से  समूह वोधक निश्चय संख्या वाचक विशेषण रूप बनता है

दिय्यै

तिन्नें  (न्न + ऐं  ) 

पचाशें

द्शुं

बीशुं

५- प्रत्येक बोधक  निश्चय संख्या वाचक विशेषण   

५- प्रत्येक बोधक निश्चय संख्या वाचक विशेषण में कुछ मूल प्रतिपादक हैं तथा शेष व्युत्पन्न  प्रतिपादक हैं

मूल प्रतिपादक - हर (प्रत्येक) , हर मैश (प्रत्येक व्यक्ति )

व्युत्पन्न  प्रतिपादक - पूर्णांक गणनात्मक वाचक विशेषणों की द्विरुक्ति  से व्युत्पन्न  प्रतिपादक बनते हैं - एकेक, चार- चार

अपुर्नात्मक गन्ना वाचकों की  द्विरुक्ति से भी ब्युत्पन्न प्रतिपादन बनते हैं - आधा -आधा , पौवा -पौवा

६- ऋणात्मक बोधक  निश्चय संख्या वाचक विशेषण   

इस प्रकार के विशेषणों दो गणनात्मक संख्या वाचक विशेषणों के मध्य काम लगाने से बनते हैं . यथा द्विकम पचाश, पांच कम शौ

७- केवालात्मक निश्चय संख्या वाचक विशेषण   

केव्लात्मक विशेषण दो प्रकार के होते हैं

रूपांतर युक्त  - एकोलो , एकाला , एकली

रूपांतर मुक्त - इन विशेषणों के साथ -ऐ प्रत्यय जुड़ा होता है पर समूह बोधक से भिन्न भी है जैसे -एक्कै (केवल एक ), द्विय्ये  (केवल दो), तिन्नैं

 

                                        विशेषण रूप सारिणी

चूँकि विशेषणों के लिंग बोधक पर प्रत्यय विशेष्य के लिंग बोधक पर प्रत्ययों के अनुसार रुपतारिंत होते हैं इसलिए रूपांतरणो  पर वाक्य स्तर पर विचार किया जाता है.

१- ओकारांत संज्ञाओं की भांति ही वाक्यन्तार्गत ओकारांत विशेषण सर्वत्र पुल्लिंग बोधक होते हैं

२- इकारांत विशेषण सर्वत्र स्त्रीलिंग होते हैं

३- व्यंजनान्त पुल्लिंग संज्ञाएँ  एकवचन में -ओ  तथा बहुवचन में - आ  प्रत्यय्युक्त विशेषणों द्वारा पुर्वगामित होती हैं

४-  आकारांत , एकारांत  तथा ऐकारांत संज्ञाओं (दोनों लिंग) के विशेषणों में पुल्लिंग में -ओ व आ और स्त्रीलिंग में -इ हो जाते हैं

५- यद्यपि बहुत थोड़ी ही पुल्लिंग संज्ञाएँ इकारांत होती हैं इस प्रकार की इकारांत संज्ञाओं के विशेषण में अन्त्य -ओ व -आ पुल्लिंग में होता है

६-  -उ, -ए, -औ अन्त्य्युक्त संज्ञाएँ जो केवल पुल्लिंग होती हैं इनके साथ भी विशेषणों में - एकवचन -ओ तथा बहुवचन में -आ रहता है 
 
प्रातिपदिक मूल-------एक वच.पु.----------बहु .वच.पु. ------------- स्त्रीलिंग , एक.बच, तथा बहु.वच.
 
  काल -------------------कालो ---------------काला ----------------------कालि

नान---------------------नानो -----------------नाना ----------------------नानि
 
निक ----------------------निको ------------निका ------------------------निकि

 ७- पुल्लिंग ओकारांत , इकारांत, उकारांत , इकारांत , ऐकारांत , औकारांत संज्ञाओं के पूर्व विशेषण ओकारांत रहते हैं

८- पुल्लिंग बहुवचन में आकारान्त तथा स्त्रीलिंग दोनों वचनों में व्यंजनान्त आकारान्त, एकारांत, ऐकारांत, तथा ऐकारांत संज्ञाओं के पूर्व विशेषण इकारांत होते हैं

निकि बात

निको घर

ठुलि  माला

ठुलो ब्याला

नानि चेलि   

नानो आदिम

काचो आरू

ठुलो चौबे

नानि मै

निको दै
 
ठुलि   शै

पाको केलो

मंदों द्यौ

निष्कर्ष में कहा जा सकता है कि ---
 
कुमाउनी में विशेषणों के पुल्लिंग व स्त्रीलिंग संज्ञाओं के साथ रूपान्तर युक्त आबद्ध रूपों -ओ, -आ, (क्रमश: पुल्लिंग व स्त्रीलिंग एक वचन व बहुबचन ) एवम -इ (स्त्रिलिन्ग एक वचन में ) से युक्त होते हैं

 

                            विशेषण लिंग बोधक रूपिम

 {-ओ} - विशेषण पुल्लिंग बोधक रूपिम के दो रूप होते हैं -ओ व -आ

क- -ओ :  विशेषण पुल्लिंग बोधक ; एक वचन ओकारांत विशेषण के अन्त्य रूप में आता है

कालो

नानो

शारो
 
ख- - आ:  विशेषण पुल्लिंग बोधक अन्त्य रूप में अन्यत्र आता है

श्याता

ठुला

चुकिला

क्यारा

{-इ} - इ विशेषण स्त्रीबोधक है . इ केवल स्त्रीबोधक है जो स्त्रीवाचक विशेषणों में अन्त्य रूप में अन्यत्र आता है

ठुलि

निकि

कालि

शारि

                                  विशेषण , वचन व कारक रूप  
 
 

 कुमाउंनी में वचन, प्रत्ययों का लिंग वाचकों से सम्बन्ध होता है

१- अविकारी करक में -ओ युक्त प्रत्यय एक वचन का बोधक है , यथा निको और -आ प्रत्यय युक्त बहुवचन का बोधक है , यथा निका

२- -इ प्रत्यय लिंग निर्णय स सम्बंद्ध है और एक वचन व बहुवचन दोनों में समरूप प्रयुक्त होता है , यथा निकि

                        लुप्त  विशेषणों में कारक

विशेषण प्रातिपदिक --------------------------------एक वचn. -------------------------बहुवचन  -------------

-----------------------------------------अविकारी -----------विकारी -------------------अविकारी -----------विकारी

ओकारांत -----------------------------ओ----------------------आ -----------------------आ --------------------आन

इकारांत ------------------------------इ-------------------------इ-------------------------इ--------------------ईन
 
उदहारण

---------------------------------------कालो -----------------काल़ा -----------------------काला ---------------कालान

---------------------------------------भौत ------------------भौत -------------------------भौत ----------------भौतान
 
---------------------------------------नानि ------------------नानि ----------------------नानि -------------------नानीन 

-------------------------------------बड़िया-------------------बड़िया--------------------बड़िया ------------------बड्यान 


 
 प्रतिपादक ----------------------------------------------विकारी कारक -------------------------------

निको -------------------------एक वचन --------------------बहुवचन

कर्ता कारक (ले)---------------निकाले --------------------निकानले

कर्मकारक  (आश )----------निकाश -------------------निकान

करण ----------------------निकाक्पिति ---------------निकानक्पिति   

सम्प्रदान -----------------निकाखिन-----------------निकानखिन 

अपादान --------------------निकाबटे ----------------निकानबटे

छटी -------------------------निकाको ----------------निकानको

अधिकरण ------------------निका --------------------निकान में

सम्बन्ध --------------------निक-आ ! ---------------निकौ  !

इसी प्रकार व्यंजनान्त विकारी बहु वचन में ऊन के पश्चात् कारक परसर्ग जुड़ते हैं

 

 

 
 
ञ = अनुस्वरीक  बिंदु

 
 
संदर्भ :



१- अबोध बंधु बहुगुणा , १९६० , गढ़वाली व्याकरण की रूप रेखा, गढ़वाल साहित्य मंडल , दिल्ली

२- बाल कृष्ण बाल , स्ट्रक्चर ऑफ़ नेपाली ग्रैमर , मदन पुरूस्कार, पुस्तकालय , नेपाल


३- डा. भवानी दत्त उप्रेती , १९७६, कुमाउंनी भाषा अध्ययन, कुमाउंनी समिति, इलाहाबाद

४- रजनी कुकरेती, २०१०, गढ़वाली भाषा का व्याकरण, विनसर पब्लिशिंग कं. देहरादून


५- कन्हयालाल डंड़रियाल , गढ़वाली शब्दकोश, २०११-२०१२ , शैलवाणी साप्ताहिक, कोटद्वार, में लम्बी लेखमाला

६- अरविन्द पुरोहित , बीना बेंजवाल , २००७, गढ़वाली -हिंदी शब्दकोश , विनसर प्रकाशन, देहरादून


७- श्री एम्'एस. मेहता (मेरा पहाड़ ) से बातचीत

८- श्रीमती हीरा देवी नयाल (पालूड़ी, बेलधार , अल्मोड़ा) , मुंबई से कुमाउंनी शब्दों के बारे में बातचीत


९- श्रीमती शकुंतला देवी , अछ्ब, पन्द्र-बीस क्षेत्र, , नेपाल, नेपाली भाषा सम्बन्धित पूछताछ


१० - भूपति ढकाल , १९८७ , नेपाली व्याकरण को संक्षिप्त दिग्दर्शन , रत्न पुस्तक , भण्डार, नेपाल

११- कृष्ण प्रसाद पराजुली , १९८४, राम्रो रचना , मीठो नेपाली, सहयोगी प्रेस, नेपाल






Comparative Study of Kumauni Grammar , Garhwali Grammar and Nepali Grammar (Grammar of , Mid Himalayan Languages ) to be continued ........



. @ मध्य हिमालयी भाषा संरक्षण समिति

Bhishma Kukreti

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                                    Garhwali Words, now Being Extinct -14

                                    Presented by Bhishm Kukreti





Sources : 1-Shri Ramakant Benjwal and Shrimati Beena Benjwal , Garhwali Shabdkosh, Vinsar Publishing co. Dehradun

 2- Late Kanhyaa Lal Ji . Dandriyal Garhwali shabd Kosh (Series in Shailvani, Kotdwara )

3- Abodh Bandhu Bahuguna , garhwali Vyakaran ki Rup Rekha

4- Rajni Kukreti , Garhwali Vyakaran                 


ढंगच्याळ =प्रबंध, हालत

 ढंगबाणि  =अनुकूल, कहना मानने वाला

ढंट =बदमाश

ढंडक =अस्योग, विरोध

ढंडकौण =बरगलाना

 ढाञट/ ढाञटणि =कुत्ता/कुत्ती

ढाडि  =अफवाह

ढुंढयासु =धान का भूसा

ढुडीर = नितम्ब


Curstsey to all

1-Shri Ramakant Benjwal and Shrimati Beena Benjwal , Garhwali Shabdkosh, Vinsar Publishing co. Dehradun
 2- Late Kanhyaa Lal Ji . Dandriyal Garhwali shabd Kosh (Series in Shailvani, Kotdwara )

3- Abodh Bandhu Bahuguna , garhwali Vyakaran ki Rup Rekha

4- Rajni Kukreti , Garhwali Vyakaran

Bhishma Kukreti

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                  Dudhau Doodh Panya Pani : an Appreciable Efforts by Pooran Pant ‘Pathik’
       
            (A Review on poetry Collection ‘Dudhau Doodh Panya Pani’ by Pooran Pant ‘Pathik’.
        (Garhwali Literature, Literature from Uttarakhand, Himalayan Literature)

                            Bhishm Kukreti

           There is always shortage of writing for children in any language.  As far as Garhwali literature is concerned, there are folk poems, folk stories, folk riddles and folk sayings for children in Garhwali language.  Abodh Bandhu Bahuguna initiated writing poems for children in Garhwali; Bhishm Kukreti initiated drawing pictorial riddles etc in Garhwali prose.  Less is written about literature for children in modern Garhwali langue. Dudhau Doodh Panya Pani’ by Pooran Pant ‘Pathik’ is second poetry collection in Garhwali after ‘Ankh Pankh’ a poetry collection for children by Abodh Bandhu Bahuguana. 
             Pooran Pant is multifarious talent in Garhwali literature. Pant is a satirical poet, a story teller, a satirist in prose, an editor of a Garhwali weekly and now Pooran Pathik presents a poetry collection in Garhwali
 Dudhau Doodh Panya Pani’ by Pooran Pant ‘Pathik’ is definitely a mile stone in the Garhwali poetry history as the poems deals to early teen aging children. 
 There are seventeen poems in the collection
Doodhua Doodh Panyau Pani – is about loss by unnecessary greed and hording
Akal- talks about relativity in very simple words.
Ghaindudi banigye – is about dally life of a child narrated by her/his mother.
Audul ar bagh : is about the horrible result by burgling .
Mungari ka chor- is about a lesson to trust on the trusted matter only
Kudratai shiksha is about taking lessons from nature.
Garhwali Nari deals about the hard working and sacrificing common women of Garhwal; Desh Gan-1and 2 verses are about our duties towards our country; there is lesson of loss by greed in Markhulya Khadu; Bani jaula takes the children for creating imagery in their mind; ‘whatever you sow you will get that’ is moral lesson in karmon ka fal; Kucchh Kan says about execution is also important than dreaming; Bwe poem is about showing the characteristics s of a mother;  Chhatri speak s about consequences of various old things and values of experiences; Gadni is to tell children about rivers and rivulets and bravery rapture is in Pandra august.
   From technique point view, from narrating style of view, most of the poems in Dudhau Doodh Panya Pani’ by Pooran Pant ‘Pathik’ are in the line of suggestions by Lynch-Brown and Tomlinson (2008) .
        As Rothlein and Meinbach  (1996) suggest the characteristics of poems suitable for classrooms, the poems of Pant are very much suitable for classrooms too.
 K Egan (2006) explains that the essential aspect of children poetry is that the poems should engage the imagination of children readers.  Pant is successful in engaging the imagination of children of aging between eleven and fourteen.
 There is word play, there is humor, as
Bani jaula fyunli buransh ka fool
Hansla, banikai banspa kaa fool
 Personification in children poem creates positive effects in children mind and  Chhatri poem is good example of personification in  children poem.
  Pooran pant successfully could create lively imagery in many poems.
 Uses of last word in the poems, Pant is victorious in creating repeated sound for making poems rhymed that children remember the poems as
Dagd ka Naunon n kauri padhai
Naukari byo band, pet bharai

Aini kauki , jeewan apno vitai
 Since, Pooran Pant is humorous and satirical poet from his early age, humor is also found in his narration in this verses volume for children.
  The poems are simple and are having memorable lines too.
 As world literature will never forget the works of William Wordsworth, Edward Lear, Christina Rossetti, Kipling, Stevenson, Ganados Antonia, Alonso, John Gey,  James Montgomery, J. Taylor Behn ,Mrs clark, Eva Strittmatter, H.Hoffman, Ko Un, D.younglin Lee,  Samuil Yokovlevich Marshak, Agnia Barto, the world  literature will always remember  the work of Pooran Pant Pathik for his contribution   for bring cpoems for children in Garhwali language.
Dudhau Doodh Panya Pani’ by Pooran Pant ‘Pathik’
(balopayogi Garhwali Kavita Snagrah)
Gadhwalai Dhai Prakashan, Dehradun, India
Contact Number 9412936055

Copyright@ Bhishm Kukreti

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                                            मध्य हिमालयी कुमाउंनी , गढ़वाली एवं नेपाली भाषा-व्याकरण का तुलनात्मक अध्ययन भाग -9
                                                                 

                            ( Comparative Study of Grammar of Kumauni, Garhwali Grammar and Nepali Grammar ,Grammar of Mid Himalayan Languages-Part-9 )



                                                           सम्पादन : भीष्म कुकरेती

                                  Edited by : Bhishm Kukreti

 

                                                     गढ़वाली भाषा  में विशेषण विधान

 

                                   Adjectives in Garhwali Language

       

                       अबोध बंधु बहुगुणा ने गढ़वाली में चार प्रकर के विशेषणों की व्याख्या की है

१- गुणवाचक -

छाल़ो,

काजोळ,

डर्खु ,

रमाळ,

सेल़ोमंद,

चलमलो,

हौन्सिया,

लमडेर,

सवादी,

चकडैत,  आदि

२- परिमाण वाचक -

बिंडी,

बिंडे, उ
 
थगा,

इथगा

इच्छि ,

 इच्छे ,

 कति ,   

३- संख्या वाचक -   

 एक बीसी,

दुयेक, दुय्ये ,

चारेक

४- संकेतात्मक -
 
 इ,

उ,

कति

रजनी कुकरेती ने गढ़वाली विशेषणों को पांच भागों में बांटा है

 
 
                                    १- सार्वनामिक विशेषण 

 

जो सर्वनाम अपने सार्वनामिक रूप में संज्ञा की विशेषता बताते हैं  और रजनी कुकरेती ने उन्हें चार भागों में विभाजित किया है

१ क- निश्चय अथवा संकेतवाचक - वु, या

१ख - अनिश्चय वाचक - कै, कु

१ग - प्रश्न वाचक -  क्या, कै

१घ- सम्बन्ध वाचक - जु, सौब
 
 

                                        २- गुणवाचक विशेषण

रजनी ने लिखा है कि संज्ञा के गुण दोष रंग, काल, स्थान, गंध, दिशा, अवस्था, आयु, दशा एवम स्पर्ष का बोध कराने वाले शब्द गुण वाचक विशेषण कहलाते हैं जैसे
 
तातु

पुरणि

चिलखण्या

मलमुलख्या

चिफळण्या

रजनी कुकरेती अपने नोट में लिखती हैं

अ- - जब गुण वाचक विशेषण लुप्त होते हैं तो उनका पर्योग संज्ञा समान होता है

सयाणा ठीकि बुल्दन

ब-- गुणवाचक विशेषण के बदले अधिकांस संज्ञाओं व सर्वनामों के साथ कु/कि /का एवम रि/रा प्रस्र्गों के संयोग से बाना रूप प्रयुक्त होता है जैसे

घर्या घी   ,
 
 बण्या  तैडु

                                    ३- संख्या वाचक विशेषण

जो विशेषण संज्ञा व सर्वनाम कि संख्या का बोध कृते हैं उन्हें संख्या वाचक विशेषण कहते हैं

क- निश्चित संख्यात्मक जैसे

छै

चार

ख- अनिश्चित वाचक

हजारु

लक्खु 

रजनी ने स्पष्ट भी किया कि संख्याएं सात प्रकार कि होती हैं

 अ- गणना वाचक- दस, बीस, पचास

ब- अपूर्ण संख्या वाचक - अधा, त्याई, सवा
 
स- क्रमवाचक - पैलू, दुसरू

ड़- आवृति वाचक - दुगुणु , तिगुणु

इ- समुदायवाचक - चौकड़ी , तिकड़ी, जोळी (जोड़ी)
 
ऍफ़. सम्मुचय वाचक - दर्जन, चौक बिस्सी, सैकड़ा

जी- प्रत्येक बोधक - एकेक , द्विद्वी , हरेक,   

 

                                 ४- परिमाण वाचक विशेषण
 
रजनी ने परिमाण वाचक संज्ञाओं को दो भागों में विभाजित किया

४ क- निश्चित परिमाण वाचक विशेषण जैसे

तुरांक,

पथा

खंक्वाळ   

४ ख-   अनिश्चित परिमाण वाचक विशेषण जैसे

बिंडि 

थ्वड़ा

बिजां

भौत

४ग- समासयुक्त परिमाण वाचक विशेषण  जैसे

थ्वड़ा-भौत

कम-जादा

४घ- आवृति  परिमाण वाचक विशेषण  जैसे

भौत- भौत

जरा-जरा

                                    ५- विशिष्ठ विशेषण
रजनी कुकरेती ने कुछ विशिष्ठ विशेषणों का भी उल्लेख किया है यथा-
 
द्वियाद्वी 

तिन्या तिन्नी

चर्याचरी 

                                                  न्यूनता, व आधिक्य बोधक विशेषण

 अबोध बंधु बहुगुणा ने यद्यपि अपने बिभाजन मे न्यूनता व आधिक्य बोधक विशेषणों को अलग नही बताया किन्तु लिखा की गढ़वाली मे कई विशेषण गुण की न्यूनता व आधिक्य प्रकट करते हैं . यथा

झंगरेणो- झंगरेणो सी

ललांगो -लाल 

भली मनखेण आदि

रजनी कुकरेती ने भी लिखा की गढ़वाली मे विशेषण की उत्तरावस्था एवम उत्तमावस्था बताने वाले शब्द प्रयोग नही किये जाते हैं

किन्तु रजनी स्पष्ट करती हैं कि गढ़वाली मे इस उद्देश्य हेतु पर-विशेषणों का उपयोग किया जटा है. जैसे

उच्चू, वैसे उच्चू , हौरू उच्चू, सबसे उच्चू, निसु, हौर निसु आदि

आगे रजनी स्पष्ट करती हैं कि विशेषणों के मध्याक्षरों पर संहिता यथा लम्म+ बु , छोट्टु , मत्  + थि से गुण कि अधिकता प्रकट कि जाति है।

गध्वलि मे द्विरुक्ति जैसे -

काळु-काळु,

भूरु -भूरु एवं भूरण्या   

                                गढ़वाली भाषा में  विशेषण  बनाने कि नियम 

 

 १- संज्ञा शब्दों के अंत में वल़ो, वळी, दरो , दरी ,   जोड़ने से विशेषण बनते हैं    जैसे

भारावळी, गढवळी

जसपुर वल़ो , कुमाऊ वल़ो   

हैंसदरि 

पढंदरो

२- संज्ञा शब्दों के अंत में या जोड़ने से यथा

जस्पुर्या, दिपरग्या , इस्कुल्या , सरबट्या

३- संज्ञा के अंत में आन, वान  या मान जोड़ने से

भग्यान,

बुद्धिमान

४- संज्ञा शब्द के अंत में री जोड़ने से , जैसे

पुजारी , फुलारी, जुवारी

५- क्रिया शब्दांत में  दो या दी जोड़ने से

उठदो, बैठदो     

खांदी -पींदी

अबोध बंधु  ने सरलतम तरीका अपनाया वहीँ रजनी  कुकरेती ने नियमों को अधिक स्पष्टता के साथ तालिका बद्ध किया है और बगैर रजनी के उद्धरणो  के गढवाली व्याकरण /विशेषणों का तुलनात्मक अध्ययन  पूरा नही माना जा सकता है

१- गढवाली में मूल विशेषण :

१-क खाने का सवाद - मिट्ठू,  गळगल़ू , घळतण्या , सळसल़ू ,

१ख मनुष्य प्रकृति - अळगसि,  फोंद्या, क्वांसी, मुन्जमुन्जू, चंट

१ग- द्रव्य विशेषताएं - चचगार, ठंडो, तातु , खिडखिडु

१घ- पेड सम्बन्धी - कुंगळी, झपनेळी     

१च- मात्र - छौंदु , बिंडी, बेजां, इच्छी

                               सर्वनामो से विशेषण बनाने के नियम

सर्वनाम------------------------------------------विशेषण

मूल सर्वनाम-----------------पुल्लिंग एक वचन-----------स्त्री. ए.व.----- -------बहुवचन ,

मै/मि--------------------------म्यार/मेरु/मेरो --------------मेरि---------------------मेरा

तख --------------------------तखौ--------------------------तखै----------------------तखा

त्वे -------------------------तेरो/ तेरु /त्यारु/त्यारो---------तेरी -----------------------त्यारा/तेरा

कख -------------------------कखौ -------------------------कखै-------------------------कखा

जख ---------------------------जखो ----------------------जखै-------------------------जखा

हम --------------------------हमारू/ /हमारो--------------हमारि -----------------------हमारा

कु -----------------------------कैकु ---------------------कैकी --------------------------कैका

वु /वा --------------------------वैकु/वैको ---------------वींक/वींकी-----------------------वीन्का   



                        क्रिया से विशेषण  बनाने के  कुछ  उदाहरण

क्रिया --------------------------विशेषण

खंडऔण -----------------------खंडऔण्या

बौल़ेण ---------------------------बौळया               
 

संदर्भ :


१- अबोध बंधु बहुगुणा , १९६० , गढ़वाली व्याकरण की रूप रेखा, गढ़वाल साहित्य मंडल , दिल्ली

२- बाल कृष्ण बाल , स्ट्रक्चर ऑफ़ नेपाली ग्रैमर , मदन पुरूस्कार, पुस्तकालय , नेपाल


३- डा. भवानी दत्त उप्रेती , १९७६, कुमाउंनी भाषा अध्ययन, कुमाउंनी समिति, इलाहाबाद

४- रजनी कुकरेती, २०१०, गढ़वाली भाषा का व्याकरण, विनसर पब्लिशिंग कं. देहरादून


५- कन्हयालाल डंड़रियाल , गढ़वाली शब्दकोश, २०११-२०१२ , शैलवाणी साप्ताहिक, कोटद्वार, में लम्बी लेखमाला

६- अरविन्द पुरोहित , बीना बेंजवाल , २००७, गढ़वाली -हिंदी शब्दकोश , विनसर प्रकाशन, देहरादून


७- श्री एम्'एस. मेहता (मेरा पहाड़ ) से बातचीत

८- श्रीमती हीरा देवी नयाल (पालूड़ी, बेलधार , अल्मोड़ा) , मुंबई से कुमाउंनी शब्दों के बारे में बातचीत


९- श्रीमती शकुंतला देवी , अछ्ब, पन्द्र-बीस क्षेत्र, , नेपाल, नेपाली भाषा सम्बन्धित पूछताछ


१० - भूपति ढकाल , १९८७ , नेपाली व्याकरण को संक्षिप्त दिग्दर्शन , रत्न पुस्तक , भण्डार, नेपाल

११- कृष्ण प्रसाद पराजुली , १९८४, राम्रो रचना , मीठो नेपाली, सहयोगी प्रेस, नेपाल






Comparative Study of Kumauni Grammar , Garhwali Grammar and Nepali Grammar (Grammar of , Mid Himalayan Languages ) to be continued ........



. @ मध्य हिमालयी भाषा संरक्षण समिति

 

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