Author Topic: Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख  (Read 744481 times)

Bhishma Kukreti

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फूड   स्टाइलिंग कु लघु इत्यास 
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फ़ूड स्टालिंग इतिहास भाग - 1
फूड   फोटोग्राफी वास्ता फूड स्टाइलिंग पर कुछ   ध्यान दीण  लैक बथ भाग -४
 फूड  फोटोग्रॉफी वास्ता फूड स्टाइलिंग , भाग 4
जसपुर तैं  छायाचित्रों द्वारा प्रसिद्धि दिलाण वळ  फोटोग्राफर श्री चंद्र मोहन जखमोला तैं  समर्पित
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  इतिहास  संकलन -  भीष्म कुकरेती 
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  भारत मफूड स्टाइलिंग पर प्राचीन साहित्य म भौत  चर्चा हुईं छन।  पर आधुनिक रूप मफूड स्टाइलिंग की चर्चा जन्म स्थान अमेरिका या ब्रिटेन ही माने जांदन। 
पायल गुप्ताक मनण  च बल आधुनिक जुगमफूड स्टाइलिंग लगभग १८०० म शुरू ह्वे। तब  चित्रकारों/पेंटरों   न चित्र बणानो बान फल टोकरी या बड़ा भोजन गृह तै मॉडल बणान शुरू कार।  एइ समौ  कुकरी बुक को छिटपुट  प्रकाशन बि  शुरू ह्वे   किन्तु यि पुस्तक भोजन  चित्र  बिहीन छा। 
१९०० लगभग भोजन चित्र /फोटो रिवाजौ जन्म हूंद गे।   १९०० म ब्लैक -व्हाइट फोरोग्राफी  प्रचलन  से भोजन  फोटोग्राफी बि  शुरू ह्वे। एइ समौफूड फोटोग्राफी विकास सेफूड स्टाइलिंग कु महत्व  बि शुरू ह्वे।
            १९२० -१९३० म फोटोग्राफी तकनीक म परिवर्तन ह्वे अर रंगीन फोटो क जमानो आई तफूड फोटोग्रैफी म बदलाव आई तोफूड स्टाइलिंग कु असल म जन्म ह्वे।  फोटोग्राफर अब रुस्वड़ो उपकरणों (properties )  सेफूड फोटो तै चमकाण  मिसे गेन।  यांसे  नई कला विधा क जन्म तो नि  ह्वे  परफूड स्टाइलिंग तैं  नई रंगत अवश्य मील।  या इन बि  बोल सक्यांद आधुनिक काल म कलर फोटोग्राफी न आधुनिक फूड स्टाइलिंग तै जन्म दे। 
           उदारणार्थ फोटोग्राफर  प्रचुर मात्रा म  बुफे टेबल म  बुफे भोजन तै फोटो वास्ता सजाण  लग गेन। भोजन का भिन्न भीं पकवान , भिन्न भिन्न फल , अलग अलग तस्तरी व थाली भौं- भौं  रकाबी , अलग अलग प्याला , सुरा वास्ता या फल रस वास्ता बड़ा बड़ा गिलास व कलयुक्त  भांड  , दिखाण लग गेन।   यी फोटो अलग अलग रंग युक्त व बणौट  का हूंदा छ।  यांसे  फोटोग्राफर तै फोड़ स्टाइलिंग कु सेन्स  बि आण  लग गे  या फोटोग्राफर  तै कखि  ना कखिफूड स्टाइलिस्ट की आवश्यकता बि  महसूस ह्वे  होली। 
फूड स्टाइलिंग को उपयोग युद्ध समय पर बि  हूण  लग गे जब राष्ट्र  व क्षेत्र भक्त  नाजी सरकारन  कैट्लॉग्स द्वारा जनता तै  कम मात्राम मटन  अर अल्लू खाणो  सलाह दे।  यी कैटलॉग  भोजन  चित्रों  से भर्यां  छ
 । 
 इथगा  हूण या  कठिन  दौर से गुजरण पर बि फूड स्टाइलिंग या भोजन सजावट तै उ  महत्व नि  मिल।  जब तक  पचास -साठ  मफूड ब्रैंडुनफूड स्टालिंग पर ध्यान नि  दे।  जनकि ब्रेटी क्रौकर (बेकरी ब्रैंड ) नफूड स्टालिंग तै अपण  विज्ञापन कु  एक मुख्य अंग बणाई  अर 1951 म प्रकाशित कुक बुक मफूड स्टाइलिंग की असली पौ पोड़ जन  बुल्यां। यीं  कूक बुक मफूड पदार्थ इन  दिखाए गेन जन बुल्यां ताजो होवन।  अर  यु संभव ह्वे फूड स्टाइलिंग कंसेप्ट /विचार से।    ये ही समय कलाकारों मध्य एक शब्द  प्रचलित ह्वे 'फ़ूड स्तालिस्ट'.फूड स्तालिस्ट अर्थात महिला ग्रेजुवेट जि  टेस्ट किचन याफूड कंपनियों म काम करदा छा। 
   60  का दशक म फूड कम्पन्यूंन  विज्ञापन व डिमोंस्ट्रेशन पर खर्चा करण  शुरू कार अर  भोजन तै सजा व अलंकृत स्थिति म दिखाणो  पर्तिस्पर्धा बढ़ गे। फूड फोटोग्राफी कुछ कुछ अलग
विज्ञान मने जाण  लग गे  अर फूड फोटोग्राफर ही मुख्यफूड स्तालिस्ट भि मने जाण लग गे। 
फूड स्टालिंग को वास्ता क्वी  औपचारिक प्रशिक्षण केंद्र नि  छा।  या तो निजी गुरुकुल (एक फोटोग्राफर अपण फूड स्टाइलिस्ट  च्यालों तै सिखाओ ) या एकलब्य शैली म ही प्रशिक्षण कु  जरिया छौ।  जु फूड स्तालिस्ट छा वो कलाकार अवश्य छा किन्तु वो फोटोग्राफी का अंदुरुनी विशेषता हि  नि  जणदा छा। 
             आधुनिक रचनाशीलता
सनै सनै कबफूड कम्पन्यूं विज्ञापन बजट बढ़ण  लग गे  तोफूड स्टाइलिस्ट  बि  रचनाशील  हूंद गेन  अर  स्टाइलिस्टों   नया सुचणो   लग्न लगण सुरु ह्वे।  कुछफूड स्टाइलिस्टोंन  पदार्थों तै प्रयोग करण  शुरू कार जनकि  फोरोग्राफी वास्ता ,  भोजन म  तेल कि  जगा पेण्ट प्रयोग हूण लग गे जाँसे  भोजन म चमक ऐ  जा।   इनि बियर म मथि  साबुणो  फ्यूण  का उपयोग बियर फ्यूण /फोम दिखाणो  हूण लग गे।  दूध व  ओट  कु लबसी   आदि दिखाणो ऊनि  गोंद दिखाणो प्रचलन शरू ह्वे। 
    संभवतया भारत म बि  इनि  ह्वे होलु अर  हरी सब्जी फोटो लींद दें  हरो रंग प्रयोग ह्वे होलु तो लाल  मिर्च दिखाण म लाल रंगो प्रयोग ह्वे होलु।  नकली भोज या फोटो दिखाणो रिवाज आजकल बि च। 
 पश्चिम म 70  दशक मफूड स्टाइलिंग न नया रूप ले।  अब मीट दिखाणो कुण  मीट की कटाई पर ध्यान दियाण शुरू ह्वे गे कि मीट अधिक आकर्षक लग तो इनि फल व सब्जी बि इन  कोण से कटे जाण लग गे कि  कुछ अलग इमेज बण  जा। 
ये इ दौरान  सन 1979   म  स्विस कलाकार  पीटर  फिसचली व  डेविड वीजन  एक  फैशन शो म भोजन याने अचार अर  सॉसेज तै मानवीय आकर द।
 90  दशक मफूड स्टाइलिंगन म एक ऑवर बदलाव आयी जब डिश अर  रुस्वाळ  दुयुं  तै  दिखाए जाण  लग गे अर फूड स्टालिंग म डौक्युमेंट्री  लॉस ऐ गे।  प्रसिद्ध सेफ अब  फूड  विज्ञापनों म दिखेण  लग गेन जनकि  भारत म सन  १९९० का बाद सेफ संजीव कपूरफूड ब्रैंडों विज्ञापन म दिखेण लगिन  अर फूड स्टाइलिंग म नया आयाम आयी।
  सन  2000 - 2100   याने नव क्रान्ति दशक

                 
फूड प्रदर्शन म कॉन्ट्रास्ट या व्यतिरेक विचार आयी वफूड स्टाइलिंग म नया नया आयाम आयी।
 अब तोफूड स्टाइलिस्टों की मांग न केवलफूड ब्रैंड विज्ञापन म सीमित रै  गे अपितु होटलों व शादी ब्यौ, कॉन्फरेंसेज  का  बैंकट हालों म बी बढ़ गे। 
   मोबाइल फोटोग्राफी न वफूड फोटोग्रैफी वफूड स्टाइलिंग म क्रान्ति आयी अब   लगभग प्रत्येक घरम   मोबाइलफूड फोटोग्राफी हूंद  अर  मोबाइल धारक अबफूड स्टाइलिंग पर अति ध्यान दींदन।   
  सन  2000 का बाद तो फूड  स्टाइलिंग म क्रान्ति ही आयी जब इंटरनेट म यूट्यूब म, सोशल मीडिया म  व्यक्तिगतफूड रेसिपी  प्रदर्शन हूण लग़  गे।
   कुकिंग ,फूड फोटोग्राफी अरफूड स्टाइलिंग वास्तव म एक दुसराक पूरक ह्वे गेन।
      ये दशक मफूड स्टाइलिंग को ट्रेनिंग बि  हूण लग  गे अर फूड स्टाइलिस्ट फोटोग्राफी गुर  बि सिखण  लग गेन।  इंटरनेट म बि  ट्रेनिंग कु  विस्तार हूण लग गे जाँसे एकलब्य सरीखा स्टाइलिस्ट बि ट्रेनिंग लीण लग गेन।   

 सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती
विली पब्लिशर  की पुस्तकफूड स्टाइलिंग अर  सेफ वफूड स्टाइलिस्ट    पायल  गुप्ता कु  एक लेख' विसडम  थ्रू स्टाइलिंग :  हिस्टोरिकल  जर्नी  दैट  इम्पैक्ट्स अस   अर  मधुर जाफरी क इंटरव्यू पर आधारित '   से साभार
History and uses of Food Styling will be continues;
  फूड स्टाइलिंग कु छुट इतिहास , भोजन सजावट का  लघुतम इतिहास ,  भोजन अलंकरण का इतिहास 


Bhishma Kukreti

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पारम्परिक    जावा -इंडोनेशियन  संबल बणानै   विधि
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पारम्परिक   इंडोनेशियाई , मलेसियाई, सिंगापुरी   संबल   पकाने की पाक विधि
  Recipe of Traditional Recipe of Indonesian, Malaysian, Singaporean Sambal 

 विदेशी   पारपम्परिक भोजन व्यंजन विधि /पाक विधि/ पाक कला  श्रृंखला  भाग - १

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संकलन - भीष्म कुकरेती
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 खाणा  मामलाम  इंडोनेसिया , सिंगापुर   मलेसिया  दक्षिण भारत अर  चीन कु  मिळवाक् च। 
 एक मसाला च जु  मलेसिया , सिंगापूर अर  इंडोनेशिया म प्रसिद्ध मसाला च वैक नाम च 'संबल' ।  संबल कु जन्म इंडोनेसिया क जावा म ह्वे।   
 संबल वास्तव म  मरचक  अर अन्य अवयवों मिळवाको   लुगदी /मस्यट/पेस्ट च। 
 सबंल बणाणो कुण  समान -
५ जख्यल ल्यासण
१ द्वी इंच सुधारीं   दरदरी कटीं  काची  हल्दी
१ द्वी इंच सुधार्युं  दरदरा कट्युं  गलंगल
१/२ औंस की २५ छुटि लाल मर्च  लगभग १० मिनट  पाणिम भिगायुं
२ औंस की ४५ थाई  ताज़ी मर्च
१० औंस की  कटीं  मर्च
५ चमच तेल
१ चमच फिश सॉस
३  चमच  पाम  चीनी
२ चमच इमली पेस्ट
मिक्सी म ल्यासण ,इमली , गलंगल , भिजीं  मर्च , ताज़ी मर्च  द्वी चमच   पाणि  पिसण अर  तब तक पिसण  जब तक इकसमान नि पीस जावो।
अब एक कड़ै  या पैन म तेल  मध्यम आँचम गरम   करण।
 निथर  सिल्वट   या  इमाम दस्ता म बि  कुटे  सक्यांद।  परम्परावादी अबि  बी सिल्वट प्रयोग करदन।
  एक पकाणो  विधि -
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अब मिक्स या पिस्युं  मसला तै तेल म डळण  अर  दस मिनट तक पकाण  अर  बरोबर खरोळणु  रौण। 
अब फिश सॉस , पाम सुगर , इमली पेस्ट डाळि  पांच मिनट  तक  पकाण  जब तक सुगर पिघळ  जा अर  तेल  अळग नि  ऐ  जा। 
तब चुलु बंद कर दीण।
 संबल तै  उतारिक   सळाणो  बाद कुछ समय बाद फ्रिजम  भविष्य की मांगक  वास्ता धर  दीण। 
दुसर  विधि - जु मेंताह  बुले जांद यानि  कच्चो raw संबल।  इखम  पकान्द  नि  छन
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Copyright @ Bhishma Kukreti , 2021
 मेलसिया में प्रसिद्ध पारम्परिक संबल बनाने की विधि /resipe; सिंगापोर  प्रसिद्ध पारम्परिक संबल बनाने की विधि /resipe ; इंडोनेसिया में    प्रसिद्ध पारम्परिक संबल बनाने की विधि /resipe , जग प्रसिद्ध पारम्परिक संबल बनाने की विधि /resipe   


Bhishma Kukreti

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रुस्वड़ म खाण -पीणै  चीजों पर टक्क  लगैक  ध्यान दीण  जरूरी च !
 
  रसोई में भोजन सामग्री पर ध्यान आवश्यक !
  Attention on Articles in Kitchen!
 उत्तराखंड रसोई विज्ञान वास्ता विशेष
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 संकलन: भीष्म कुकरेती
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उन  त सबि गृहणी अपण  रुस्वड़ो प्रति सचेत रौंदन किन्तु यु भलो च बल समय समय पर यूं  बत्थों  पर चर्चा हो कि रसोई म कौं कौं  भोजन सामग्री पर विशेष ध्यान दीण  कि  भोजन खराब बि  नि  ह्वावो अर खौत बि नि ह्वावो।
  इनि एक महत्वपूर्ण विषय च बल कुछ भोजन सामग्री पर हमेशा विशेष ध्यान  दीण आवश्यक च। 
अब जनकि मसाला , नमकीन , लूण  तैं बंद डब्बों म इ धरे  जाव। खाणा पकान्द  दैं  मसाला अलग अलग चमच से इ धुळे जाय , किलैकि निथर एक मसालो दूसर दगड़ रळो -मिसौ  ह्वे जांद जनकि  हळदि, जीरो , जख्या  अर लूणो  मिलण  से परेशानी ह्वे सकद। 
 मसालों डब्बी तै कबि  बि कढ़ाई मथि  नि लिजाण चयेंद  यांसे मसालों म भाप बैठ  जांद  अर मसालों   पर फफूंदी लगण  से खराब ह्वे सकदन। 
नमि से मसालों पर जाळ  बि पड़  जांदन तो मसालों पर हथ  बि  नि  लगाण  चयेंद। 
आटो , बेसण ,  डोसा आटो ,  -सूजी पर जाळी अर फफूंदी लगणो  भी भौत हूंद त  यूं पर ठीक से ध्यान दीण  जरूरी च।  यूं  सब तै हवा बंद डब्बा ही भलो रौंद। 
उल्युं  आटो तै हव्वा बंद डब्बा म फ्रिज भितर  धरण  भलो हूंद अर एक दिन म इ उपयोग हूण चयेंद . द्वी तीन दिनम खटास (फर्मेन्टेशन को वजह से  ) ऐ जांद .
  रुटि  पकान्द  दै  जु पथरण बच जावो तो वै पथरण तैं  आटो  डब्बा म नि डळण , कारण कि पथरण म नमि हूंद  जु  आटा तै नम कर  डींदो अर आटो पर फफूंदी , जळमट लगणो  अवसर बढ़ जांदन।
मसाला अर दाळुं  एक प्राकृतिक रुप  से एक्सपायरी डेट हूंद तो यूं  तै समय रौंद  उपयोग कर लीण इ  भलो च।  पुरण दाळ पर टेर लगणो भी हूंद  त पुरण मसल पर जाळ लग जांदन। 
कुछ भोज्य पदार्थ जन कि  आम , टमाटर , हौर  सब्जी , तरबूज , संतरा , दूध , दही जल्दी खराब ह्वे जांदन अर पता बि नि चलद तो यूं  चीजों तै समय रंद उपयोग आवश्यक च।   फ्रिज भीतर बि द्वी तीन दिनम ध्यान दीण पड़द बल क्वी भोज्य पदार्थ खराब तो नि  ह्वे।
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Attention on Food Articles in Kitchen is a must; रुस्वड़ म खाण -पीणै चीजों पर टक्क लगैक  ध्यान दीण  जरूरी च ;   रसोई में भोजन सामग्री पर ध्यान आवश्यक, किचन में भोजन सामग्री रख रखाव के तत्व   
                                                                                                                                                                             


Bhishma Kukreti

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  फूड फोटोग्राफी क ननु इत्यास

   फूड फोटोग्राफी इतिहास भाग - २
 फूड  फोटोग्राफी वास्ता   फूड स्टाइलिंग पर कुछ   ध्यान दीण  लैक बथ
  फूड फोटोग्रॉफी वास्ता   फूड स्टाइलिंग , भाग - ५
जसपुर तैं  छायाचित्रों द्वारा प्रसिद्धि दिलाण वळ  फोटोग्राफर श्री चंद्र मोहन जखमोला तैं  समर्पित
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   भीष्म कुकरेती
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जै फोटोग्राफी म भोजन पर विषय केंद्रित हो वो इ   फूड  फटॉग्रफी ह्वे।
आबि तक  फूड फोटोग्राफी क इतिहास पर लोगुं कम इ  रूचि च तो खोज म बि  ढिलाई इ  च।   जबकि  सन  १८८० से ही लोग  फूड फोटोग्राफी पर छ्वीं लगाण लग गे  छा।  सब भोजन पसंद करदन , सब भोजन छाया चित्र पसंद करदन किन्तु  फूड फोटोग्राफी तै क्वी  अधिक महत्व नि  मील , उल्टां  साहित्यकार तो ये विषय तै मूर्खतापूर्ण  अर कम महत्वपूर्ण मणदन। 
 फूड फोटोग्राफी क  जड़  १८०० सदी क पैलो पक्ष म जनमेन।  जब भोजन तै कलाकारों न अपण कला म समावेश कार।  भौत सा महान पेंटरों न अपण  पेंटिंग म भोजन या खाद्य पदार्थ तैं  जगा दे जनकि प्रसिद्ध पेंटर माइकलेंजो  (१५९५ -१५९६ ) की एक पेंटिंग म फल दिखाए गेन। 
 इनि  अठारवीं उनीसवीं सदी म बि  भौत सा कलाकारों अपण  पेंटिंग म भोजन तै प्रश्रय दे।  जनकि  जीन बाप्टिस्ट साइमन कार्डिन   पेंटिंग (१७३१ ) म रसोई उपकरणों पेंटिंग करीं च। 
नाइसेफर निप्स की पेंटिंग  (१८२७ , मेज म फल )  बि   फोटोग्राफी अर   फूड स्टाइलिंग  कु जन्मदात्री मने  जांद।  १८४६ म हेनरी फॉक्स टैब्लॉट कु  चित्र 'पेन्सिल ऑफ़ नेचर'  (जख्म फल दिखये छन ) तथा  वैक काम न  फोटोग्राफी का मार्ग प्रसस्त कार
  एक रंगी फोटो धीरे धीरे कुकबुक म छपण  शुरू ह्वे  गे  छौ ,  किन्तु  भौत ही धीमी गति छे। व्यवसायिक फोटोग्राफरों न  सस्तो बान हाफ टन विधि  अपणाइ।   सन १८६७  म पेरिस म प्रकाशित ले लिवर दे क्यूजीन (   रॉयल ल कूकरी बुक ) म २५ रंगीन चित्र छन छप्यां  जो द्योतक छन कि  भोजन हूब उपलब्ध च। 
  फूड विज्ञापनों न बि   फूड फोटोग्राफी कु  रस्ता साफ़ कार। यद्यपि कलर फोटोग्राफी १८६१  म शुरू ह्वे  किन्तु मंहगा हूण  से वास्तविक रूप से रंगीन  फूड फोटो १९३५  उपरान्त ही शुरू ह्वे।  १९३५  म निकोलस मरी न थ्री कलर कार्बरों प्रयोग कार।  McCall's  कम्पनी न निकोलस तै भोजन फोटोग्राफी दायित्व सौंप।  निकलोसन कलर कार्बरों पद्धति से  फूड स्प्रेड जनकि  चॉकलेट , मक्खन आदि तै बड़ा आकर्षक फोटो देन  (१९४४ )  जौन   पत्र-पत्रिकाओं का   आदि  पाठकों  तै आकर्षक कार।   १९५० दशक म भोजन कंपनियोंन  फूड फोटोग्राफी तै महत्व दे अर   फूड फोटोग्राफी तै बल मील।
उन  १९२० क ध्वार   फूड शेप याने भोजन आकर न  फूड फोटोग्राफी तै प्रभावित कार जनकि निक नजीब की फोटो।
  इना   फूड कंपनियों म प्रतियोगिता न बि   फूड फोटोग्राफी व  फूड स्टाइलिंग तै विकसित कार।   
     फूड फोटोग्राफी म प्रतियोगिता -
 जनि   फूड फोटोग्राफी क विकास शुरू ह्वे  तनि   फूड फोटोग्राफी म प्रतियोगिता बि  शुरू ह्वे  गे। अर प्रतियोगिता म  फूड फोटोग्राफी वास्ता प्रॉपर्टीज पर ध्यान चलण शुरू ह्वे गे।  घर , मेज , भांड , फूल , फ्लावर पॉट्स आदि भोजन छायाचित्र का संग जुड़न बिसे  गे।
दिखे जाय तो  फूड फोटोग्राफी इतिहास याने प्रॉपर्टीज व स्टाइलिंग म निरंतर बदलाव व रचनात्मक कला म बदलाव च। 
१९५७ क बाद कमरा म बि  बदलाव आयी तो  फूड फोटोग्राफी म बि  बदलाव आयी।  हेराल्ड यूजीन एजर्टन क प्रसिद्ध ' द मिल्क ड्राप कोर्नेट' फोटोग्राफ चर्चित ह्वे जु फोटोग्राफी तकनीक म क्रांति लायी। 
पश्चिम म १९७० क बाद को  फूड  फोटोग्राफी  काल तैं हाई फैशन  फूड कु  जमाना बि  बुले जांद जब  फूड  फोटोग्राफी म केवल  फूड नि रै  गे  अपितु  कटी कथा ,  फूड स्टैंडर्ड , उपभोक्ताओं तै वर्गीकृत करणो  जरिया बि  बौण जनकि ऐज फूड स्टूडियो द्वारा खैंचि गईं रेट्रो एम्ब्रोसिया सलाद की  तस्वीर।
१९७० बाद तो पॉपर्टीज क भौत बड़ो प्रभाव फूड फोटोग्राफी पर राई। 
 १९९० क बाद  फूड फोटोग्राफी म  फूड स्टाइलिंग की अधिपत्य राय।
 फिर  फूड फोटोग्राफी म मानवीय चित्रण से बि   फूड फोटोग्राफी तै कई क्रांतिकारी , अनमोल , आकर्षक फोटो मिलेन।
२००० बाद डिजिटल फोटोग्राफी न क्रान्ति लायी।  कल्पनाशीलता  व रचनात्मक कला को बड़ा से बड़ा उपयोग फूड फोटोग्राफी म हूण लग  गे
2008 का पश्चात  फूड फोटोग्राफी  नया माध्यम  अर्थात सोशल मीडिया आण  से फूड  फोटोग्राफी म कई किस्मक क्रान्ति आयी।  उपभोक्ता स्वयं ही अपण  पछ्याणक बान  मोबाइल या कैमरा द्वारा सोशल मीडिया
 म पोस्ट करण  बिसेन  अर  स्वयं ही पॉपर्टीज , स्टाइलिंग का ध्यान बि  रखण  लग गेनि।  अब फूड  फोटो प्रीस्टीज  निर्माण माध्यम बि  ह्वे  गे।  युटुब  आण  से लाइव फूड  फोटोग्राफी , रेसिपी दर्शाण  से फूड  फोटोग्राफी म क्रान्ति आयी।
२०२० बाद  फिर से स्टील फोटोग्राफी क तत्व फूड  फोटोग्राफी म आयी अर भोजन अवयव आदि फोटोग्राफी म अधिपति  जन  ह्वे गेन। 
  फिर फूड फोटोग्राफी म अवार्ड  आण  से बि  रचनात्मक फोटोग्राफी शुरू ह्वे अर  कई प्रकार का अवार्ड आज फूड फोटोग्राफी म छन।
 फूड  फोटोग्राफी इतिहास याने तकनीक , कल्पनाशीलता , रचनाधर्मिता , समाज म बदलाव , स्टाइलिंग, छवि निर्माण  आदि कु  इतिहास च। 


 सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती

 फूड फोटोग्राफी का लघु इतिहास ,  फूड फोटोग्राफी के कई पड़ाव ,  फूड फोटोग्राफी विकास में उतार चढ़ाव


Bhishma Kukreti

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 प्रारम्भिक गुजराती पाक विधा  कुकबुकों म   भारतम फूड  स्टाइलिंग   की    खोज

भारतम  ब्रिटिश कालम कुक बुक  प्रकाशन से  फूड   स्टालिंग की सूद  भेद -१

Indian Cook Books Publication in British Period
फ़ूड  फोटोग्राफी वास्ता  फ़ूड स्टाइलिंग पर कुछ   ध्यान दीण  लैक बथ -३
 फ़ूड फोटोग्रॉफी वास्ता  फ़ूड स्टाइलिंग , भाग  ७
जसपुर तैं  छायाचित्रों द्वारा प्रसिद्धि दिलाण वळ  फोटोग्राफर श्री चंद्र मोहन जखमोला तैं  समर्पित
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  संकलन -  भीष्म कुकरेती 
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 वास्तव म यि  दिखे  गे  बल फ़ूड स्टाइलिंग की सूद भेद या तो कुक  बुक्स से लिए जांद  या  फूड  ब्रैंड का विज्ञापनों से।  आज दिखे जाय बल भारत म ब्रिटिश युग म कु कु कुकबुक्स छपिन अर यूं कुकबुक्स कु  लक्षण क्या छौ।  इन  बि दिखला बल क्या यि  कुकबुक्स भारत म ब्रिटिश युगम  फूड स्टाइलिंगौ इत्यास बताण म सक्षम छन कि ना ?
 भारत म ब्रिटिश कालम हम तै सर्व प्रथम सूचना मिलदी  बल गुजराती भाषा म पाक शास्त्र की जु एक पारसी महिला मेहरबाई जमशेद जी वाहदिया (वाडिया )  न विविध वाणी  नाम से  ९ अगस्त १८९४ म प्रकाशित ह्वे। या पुस्तक कु तिसर  एडिसन १९१५ म प्रकाशित ह्वे।  अर  इन  बि  सूचना च  बल गुजराती म यां  से पैल १८५७ म उत्तमराव पुरुषोत्तम न गुजराती म पाक शास्त्र विषे ग्रंथ छापि  छे।  ग्रंथ से पता चलद बल पुरुषोत्तम कु मनण  छौ बल भोजन पकाण  एक कला च अर  हथ लगण  से ही सब कुछ हूंद।  या पुस्तक उत्तम राव पुरुषोत्तम क अनुभव व संस्कृत कुकबुक्स पर आधारित छे।  पुस्तक कु तिसर  बड़ो एडिसन १८६९ म छप जु  पैल  से बड़ो छौ। 
 सर्व प्रथम पारसी द्वारा कुकबुक छपणो  श्रेय बुरजोर जी नुसर वान जी हीरा तै जांद जौन  सन १८७८ म पकवान पोथी नाम से कुकबुक  छाप अर यीं  कुकबुक म ४०० रेसिपी कुकबुक म छाया।  दुसर एडिसन १८८२  म छप।  एक हैंकि पुस्तक छप बुरजोर जी की सन १८८७ म पकवान सागर नाम से छप। 
 यूं  कुकबुकों म फोस्टो छे कि  ना कि हम तै क्वी  सूचना   नि  मिल्दी किन्तु पारसी महिला मेहरबाई वाडिया की पुस्तक 'विविध वाणी' क तिसर एडिसन म एक चित्र  छप्युं  च जैमा एक सुघड़ व कॉन्फिडेंस पारसी जनानी टेबल म गैस स्टोव म भोजन पकाणी  च।  टेबल म एक फ्राई पैन , लुट्या , चमच दिखेणा छन।  बगल म तिपाई म पाणी  भांड च , ड्रावर से लम्बो रुमाल लट्कणो  च जु  इलीट पारसी किचन दिखाणम सफल ह्वे।  विविध वाणी क  तिसरो  आवृति म १२४८ रेसिपी छन जु अ  , आ से  क्रमगत लग्यां  छन। 


 सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती
मुरली रंगनाथन कु एक लेख व भास्कर दासगुप्ता आदि का लेख पर आधारित। 
भारत में  ब्रिटिश युग में कुक  बुक प्रकाशन ; ब्रिटिश युग में कुछ कुक बुक्स का संदर्भ महत्वपूर्ण है ; गुजराती में प्रकाशित पाक शास्त्र पुस्तकों में फ़ूड स्टाइलिंग के लक्षण
 


Bhishma Kukreti

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भारतम ब्रिटिश कालम कूक बुक प्रकाशन को ब्यौरा

भारतं ब्रिटिश कालम कुक  बुक्स से फ़ूड स्टाइलिंग कु सूद भेद - २
फ़ूड  फोटोग्राफी वास्ता  फ़ूड स्टाइलिंग पर कुछ   ध्यान दीण  लैक बथ -४
 फ़ूड फोटोग्रॉफी वास्ता  फ़ूड स्टाइलिंग , भाग - ८
जसपुर तैं  छायाचित्रों द्वारा प्रसिद्धि दिलाण वळ  फोटोग्राफर श्री चंद्र मोहन जखमोला तैं  समर्पित
-
   भीष्म कुकरेती
-
यां से पैल  हमन मुगल काल तक पाक शास्त्र ग्रंथ को पुरो विवरण दे छौ।  अब ब्रिटिश काल  म प्रकाशित कुछ पाक शास्त्रीय ग्रंथों क विवरण इन च।  अगनै  प्रत्येक ग्रंथ की अलग अलग चर्चा होली। 
१- पाक शास्त्र गुजरती १८७८  व अन्य पुस्तक भी
२- कलन्री जटिंग फार मद्रास १८९१
३- मिस्तान पाक बंगाली १९०४
४- बंगाल स्वीट्स , ले   . हलदर १९०४
५- रेसिपी ऑफ़ आल नेसन्स  १९२१ , ले   . काउंटेस  मर्फी , भारतीय मीठै बड़ा म विवरण
६-  हिंदी में मनीराम शर्मा  की पाक चंद्रिका १९२९
७- वीरास्वामी की इंडियन कुकरी १९३०
८- पंडित नरसिंगराम की हिंदी म वृहद पाक विज्ञान १९३९
९ -नवीन पाक शास्त्र गुजराती म पाकशास्त्र मेहता की
१०- डालडा कुकबुक , १९४९ , अंग्रेजी , हिंदी , तमिल व बंगाली म
११- मॉडर्न कुकरी ऍंगरेजी - थंगम फिलिप्स १९४६



 सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती
   भारतम ब्रिटिश कालम कूक बुक प्रकाशन को ब्यौरा   जारी रालो , भारतम पाक शास्त्र  ग्रंथ इतिहास जारी रालो ;


Bhishma Kukreti

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 भोजन होटल , रेस्ट्रां  , ढाबा क  यादगार समीक्षा लिखणो  सल्ला

  भोजन होटल , रेस्ट्रां  , ढाबा क  यादगार समीक्षा कैसे लिखें की सलाह

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संकलन भीष्म कुकरेती
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  सोशल मीडिआ आण  से अब मनिख अपण  पर्यटन क अनुभव बि  साझा करण  लग गेन।  गढ़वाली ,कुमाउँनी म अबि या विधा नि  आयी या विकसित ह्वे।  पर्यटन अनुभव म सबसे अधिक छ्वीं होटल , रेटस्टरां या ढाबा क समीक्षा हूंद।  तो जरा दिखे जाय होटल समीक्षा कन लिखे जांदी -
 पाठकों तै पढ़णो तैयार कारो - शुरुवाती वाक्य इन  हूण  चयेंद कि  बंचनेर   बींगी / समज जावो  कि होटल क बारा म क्वी आकर्षक यादगार छ्वीं लगल अर यूं  वाक्यों से ही बंचनेर की स्वाद ग्रंथि जागृत बि हूण चयेंद। 
पवाणी /शुरवाती वाक्य भोजन ऊर्जा , स्वाद ऊर्जा , बिगरैल  भोजन ऊर्जा व सेवा ऊर्जा से भरपूर हूण चएंदन अर  कुछ कुछ कथात्मक हूण चएंदन।  ऊर्जा ऊर्जा अर ऊर्जा ही मुख्य सूत्र हूंद होटल समीक्षा म। 
परिस्थिति बतावा - शुरवाती वाक्यों म बंचनेरों तै बताओ कि  कै  कारण (परिस्थिति , प्रकरण ) तुम समीक्षा लिखणा  छा।  जनकि देहरादून का लोकल पेपर का वास्ता  देहरादून क होटलक समीक्षा होटलों  तुलनात्मक गुणों   वास्ता होलि  किंतु  गंगोत्री या ऋषिकेश का होटल की समीक्षा क उद्देश्य कुछ ऑवर होलु .
भोजन विवरण - भोजन कु  विवरण उद्देश्य , क्या छौ भोजन , कन  छौ भोजन ,भोजन  कन दिख्याणु  छौ , भोजन म क्या क्या छौ  व अवयवों म क्या छा;   कैन  दे , कनै  दिए गे , सेवा समय )कथगा समय ) अर  कथगा  राशि म आयी कु ब्यौरा आवश्यक च।  भोजन कु  रूप , सुगंध , आकर्षण का ब्यौरा आण  चयेंद।  जरा कथा व हास्य हो तो आनंद आयी जालो।
 पाठक तै कखि ना कखि वैक भूतकाल म लिजाण  आवश्यक च कि  स्वाद ग्रंथि जागित ह्वे जावन।
 अंतआईएम वाक्य मजेदार व आपक निर्णय हूण चयेंद कि होटल कन  छौ -
  साफ़ सफाई ,
सुविधा व्यवस्था  या असुविधा
कर्मियों क व्यवहार
भोजन रूप व स्वाद , क्षेत्रीयता कथगा  च
सेवा समय व ब्यूंत /तरीका
भोजन की कीमत विरुद्ध वास्तविक भोजन
कुछ अन्य सल्ला -
 फोटो अवश्य हो
 अस्पष्ट शब्दों से बचण  चयेंद जनकि  सेवा बेकार छे या अच्छे छे।  सेवा तै विशेष स्पस्ट  शब्दों से व्याख्या कारो न कि  अस्पष्ट  शब्दों से। 
 समीक्षा निष्पक्ष हूण  चयेंद। बदनाम करणै  नीयत से नि  हूण चयेंद किन्तु अनावश्यक प्रशंसा बि ना।
  यदि उपरोक्त बथों  तै ध्यान देकि  होटल समीक्षा हो तो या समीक्षा ऊर्जावान सिक्षा होली अर  बँचनेर आपकी समीक्षा की जग्वाळम बि  राला।
तो शुरू कारो होटल, रेस्ट्रां , ढाबा  समीक्षा  .  .

Copyright@ Bhishma Kukreti
होटल समीक्षा कैसे लिखें , रेस्ट्रॉं की समीक्षा कैसे लिखें , ढाबे की समीक्षा कैसे लिखें श्रृंखला जारी रहेगी। 


Bhishma Kukreti

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  पर्यटन स्थलौं  की आकर्षक समीक्षा लिखणौ ब्यूंत (टिप्स )

  यात्रा व पर्यटक स्थल यात्रा  अनुभव या समीक्षा लिखणो शैली
   यात्रा संस्मरण लिखणो  तकनीक

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भीष्म कुकरेती
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  पिछ्ला दस पंदरा  वर्षों म हमर घुमण -घामाण बढ़ गे अर  अब हम सोशल मीडियम अपण पर्यटन  अनुभव साझा करदां।  इनमा  यू  जरूरी च बल हम सौब  कै बि पर्यटक स्थल , टूर /यात्रा , धार्मिक पूजन जात्रा क अनुभव व्यवसायिक ढंग  से करां , ब्यूंत से पर्यटक स्थल या जात्रा क अनुभव या समीक्षा करां।  ल्या   पर्यटक स्थल समीक्षा लिखणौ  कुछ याद रखण  लैक  बथ -
१- लिखण से पैल  मस्तिष्क म कथा क रूपरेखा बणाण आवश्यक - सबसे पैल  जनकि  प्रत्येक लेख म हूंद उनी पर्यटक स्थल समीक्षा या यात्रा रुट समीक्षा की स्पस्ट रूप रेखा बणाण  आवश्यक च।   लेख कथारप म ही हो तो कथा की स्पस्ट रूपरेखा हूण  चयेंद।   
२- लेख कु उद्देश्य  व दिशा स्पष्ट हूण  चयेंद -  लेख लिखण से पैल अपण पाठकों की पछ्याणक  अर  तब लेख की  व पर्यटन की दिशा वा उद्देश्य  मस्तिष्क म स्पस्ट हूण चयेंद कि लिखणम कु  बाटू अपणान।  भौत सा बार उद्देश्य अलग सी हूंद जनकि  खोज व संस्कृति तै समजण  तो शुरुवात म पाठक समिण  स्पस्ट कर सकदां। 
३- अपण अनुभव तै कथा जोग ल्याखो -   पर्यटन अनुभव म  रोमांटिक कथा का प्रत्येक अंग आवश्यक च. पर्यटक स्थल व यात्रा तै प्रेमी या प्रेमिका समजि  रोमांटिक कथा ल्याखो कि उखम  प्रेम दृश्य आवन। 
४-  आकर्षक पैलो पैरा ग्राफ ल्याखो - पैलो पैराग्राफ हमेशा ही आकर्षक हूण  चयेंद जन  प्रेम कथा म हूंद कि  कथा क दिशा दिखाए जांद अर बंचनेर अंथाज लगाणो तैयार  ह्वेक पढ़णो तैयार बि  ह्वे  जांद। 
५- संवादात्मक शैली अपणावा - समीक्षा म संवाद अवश्य हूण  चयेंद यि  संवाद यात्रा या होटल आदि म ह्वे होला। संवाद दृश्य म जान ऐ जांद।
६- दिखाण  अर  बुलण म अंतर् समझो - यात्रा वर्ण या समीक्षा म पाठकों तै सुणावो ना दिखावो शैली अपणाो। 
७- पाठक कु मनोरंजन कारो वै  पर प्रभाव /इम्प्रेसन नि  छवाड़ो - यात्रा अनुभय या पर्यटन स्थल समीक्षा म पाठक तै मनोरंजन द्यावो ना कि अपण रौब या इम्प्रेसन छुड़नो कोशिस। 
८- वातावरण वर्णन म विविधता शब्द शैली प्रयोग - वातवरण विवरण म विविधता व अलंकार हूण  चयेंद।
९- लेख म स्थल दिशा निर्देश ध्यान - यात्रा समीक्षा या संस्मरण म स्थल दिशा वर्णन बिलकुल स्पस्ट हूण  चयेंद। 
१०-  अचानक अंत नि लाण   - अचाणचक अंत नि  लाण  अपितु पाठक तै धीरे धीरे अंत तरफ लाण जनकि  रात एकदम नि  आदि।
११-  अंत म पाठक कुण  कुछ कार्य अवश्य द्यावो - जव बि पर्यटन समीक्षा या संस्मरण हो तो अंत म पाठक तै क्वी ना क्वी कार्य अवश्य द्यावो जनकि पूछो आप बद्रीनाथ  यात्रा कब शुरू करणा   छा ?
१२ - अनावश्यक आलोचना व बेकार की प्रशंसा से बचण - पर्यटक स्थल के समीक्षा निष्पक्ष हूण  चयेंद एक राजनीतिक प्रतिबद्धता तै छोड़ि यात्रा वर्णन या समीक्षा करण  चयेंद। 
आपन भौत सी यात्रा करि  होली तो आज एक पन्ना म यात्रा विवरण या समीक्षा लिखणौ खाका लयखो।  अर  तब सोशल मीडिया म यात्रा अनुभव या पर्यटक स्थल समीक्षा पोस्ट कारो।

Copyright @ Bhishma kukreti
 पर्यटक स्थल की समीक्षा कैसे लिखनी चाहिए , यात्रा संस्मरण में समीक्षा कैसे लिखनी , यात्रा रुट की समीक्षा कैसे लिखें ; र्यटन स्थलौं  की आकर्षक समीक्षा लिखणौ ब्यूंत (टिप्स )
  यात्रा व पर्यटक स्थल यात्रा समीक्षा लिखणो शैली ;    यात्रा संस्मरण लिखणो  तकनीक   श्रृंखला जारी रहेगी


Bhishma Kukreti

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कलनरी  जौटिंग फॉर  मद्रास : एक ब्रिटिश तहत बाट  बतांदी कुक बुक

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ब्रिटिश कालम  पाक शास्त्र   ग्रंथ  -३ 
 
जसपुर तैं  छायाचित्रों द्वारा प्रसिद्धि दिलाण वळ  फोटोग्राफर श्री चंद्र मोहन जखमोला तैं  समर्पित
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   भीष्म कुकरेती 
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 ब्रिटिश कालम ब्रिटिश लर्नल द्वारा लिखीं  ' कलनरी  जोट्टिंग  फॉर मद्रास (१८७८ ) की एक बड़ी महत्वपूर्ण अर एक मील क पत्थर बि च।  ग्रंथ ब्रिटिश भोजन, ब्रिटिश भोजन पाक  पद्धति क बारा म नि  बतांदी अपितु ब्रिटिश राजसी तहत बाट , सरकारी डिनर पार्टीज , भोजन अर  पैसा की खौत  फोळ , फ़ूड स्टाइलिंग की महत्ता व डिन्नर पार्टी कुण  क्या क्या आवश्यक च पर बि पुरो वृतांत  ब्रिटिश पाक शास्त्र ग्रंथ म च। 
कलनरी जोट्टिंग फॉर मद्रास  ग्रंथ म लिखवार क नाम च वाइवर्न च जबकि वैक असली नाम छौ - कर्नल आर्थर रॉबर्ट केनी हर्बर्ट जु  भारतीय सेना म भारतम सन १८५८ ब्रिटेन १८९२ तक सेवारत राय।  कलनरी जॉटिंग फॉर मद्रास वास्तव म एक स्मरणीय व घरम रखण  लाइक ग्रंथ च जु   भोजन इतिहास का अलावा कुछ ना कुछ  ब्रिटिश चौधराट  की गंध बी बथान्द। 
 कर्नल वाइवर्न  न अपर  रेसिपी पैल दैनिक मद्रास अथनियस  म प्रकाशित  करिन  अर  यूं लेखों क आधार पर संकलित करि  ग्रंथ प्रकाशित कार। 
 ब्रिटिश मेमसाब जु  भारत म छया उंकुण  यी  कुकिंग रेसिपी   लेख प्रकाशित करे  जांद छ।  ग्रंथम मेमसाबुं   कुण  अंग्रेजी , फ्रेंच भोजन पकाणो पद्धति विवरण च अर दगड़म स्थानीय अवयव व आयातित अवयवों उपयोग पर बि  प्रकाश डळे  गे।  वाइवर्न  नैसर्गिक अध्यापक छौ अर  या कलनरी जॉटिंग  फॉर मद्रास म साफ़ दिखेंद अर  यी कारण च बल सेवा निवृत हूणो  बाद वाइवर्नन लंदन म एक सफल कुकरी स्कुल चलाई।  लंदन बिटेन  बि वाइवर्नन  अन्य कुकरी ग्रंथ प्रकशित करिन। तेल , घी , चपाती ,
  ग्रंथ म ३० अध्याय छन  अर  बुले सक्यांद ऐंग्लो इंडियनों वास्ता मोती छा मोती। 
पुस्तक म  ब्रिटिश भोजन जन  फिश, सूप , सॉसेज आदि विवरण तो च दगड़म  करी , पुलाव (pillaw ), खिचड़ी (Ketchree ), साम्बार (sambal ),   4 चटनीज  ,आदि भोजन व कुछ भारीतय अवयवों नरयूळौ , घी , चपाती आदि विवरण बी सम्मलित च। एक अध्याय कैम्प कुकरी पर बी च।
बड़ी बड़ी पार्टयूं म कन ध्यान दीण पर बी अध्याय च।   
 ग्रंथ को महत्व स्पस्ट रेसिपी बान  इ नी च अपितु किचन प्रबंध कु अध्याय से ग्रंथ पर चार चाँद लग जांदन।  अध्याय क नाम च 'अवर किचन्स इन इण्डिया' म रसोई घर निर्माण , किचन म कर्मचारी प्रबंधन , च , यांक अलावा मीनू अध्याय व कंसर्निंग द  कुक  ऐंड हिज मैनेजमेंट बि रसोई प्रबंधन को नायब हिदायती अध्याय च।
 ब्रिटिश राज म  ब्रिटिश या ऐंग्लो इंडियन भोजन कु  आइना  च  ' कलनरी जटिंग फॉर मद्रास ' कुकरी ग्रंथ।  आज बि ग्रंथ प्रासंगिक ही मने जाल। 
ग्रंथ मिल्दो च अवश्य पौढ़ो। 
पुस्तक- कलनरी जौटिंग   फॉर  मद्रास
भाषा - अंग्रेजी
सन  १८७८

प्रकाशक - हिगिन  बॉथम ऐंड कम्पनी
कुल पृष्ठ ३१४
 सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती
ब्रिटिश काल म पाक ग्रंथ सूचना , ब्रिटिश कालम ब्रिटिश भोजन रूप रेखा , ब्रिटिश कालम बड़ी बड़ी पार्टी , ब्रिटिश  कर्नल वाइवर्न कु जीवन, कलनरी जौटिंग फॉर मद्रास पुस्तक  , ब्रिटिश काल म किचन प्रबंधन


Bhishma Kukreti

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फूड  फोटोग्राफी हेतु फूड   स्टाइलिंग  कुण  सही उपकरण किट /टूल किट

फ़ूड  फोटोग्राफी वास्ता  फ़ूड स्टाइलिंग पर कुछ   ध्यान दीण  लैक बथ
 फ़ूड फोटोग्रॉफी वास्ता  फ़ूड स्टाइलिंग , भाग
जसपुर तैं  छायाचित्रों द्वारा प्रसिद्धि दिलाण वळ  फोटोग्राफर श्री चंद्र मोहन जखमोला तैं  समर्पित
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   भीष्म कुकरेती 
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  फ़ूड फोटोग्राफी वास्ता फूड  स्टाइलिंग आवश्यक च   अर फूड   स्टालिंग म भौत सा  उपकरणों  आवश्यकता बगत बगत पर पड़द , ोटोग्राफर व फ़ूड स्तालिस्ट तैं  यूं  उपकरणुं  तै अपण किट म रखण  आवश्यक च।   तौळ  लिस्ट च फ़ूड स्टाइलिंग उपकरणों की -
१- ट्वीज़र्स /चिमटियां
२- चमच आदि  अर पेन
 ३- कटणो फट्टा। तख्ती /पाटी  -
४- भौं भौं किस्मौ चक्कू
५- वायर कटर्स
६- कपास पोचा
७- चाय क तौलिया
८-  भिन्न भिन्न प्रकारा पेंटिंग  ब्रशेज
९- वाटर स्पिरीटाइजर
१०-ग्लिसरीन
११- अलग किस्मौ स्क्वीज बोतल
१२- ग्लास क्लीनर्स
१३- एस्कॉर्बिक ऐसिड
१४- चौपस्टिक्स
१५- कुकिंग स्प्रे
१६- कुकिंग तेल
१७- फ़ूड कलरिंग
१८-  रसोई क गुलदस्ता
१९-फनेल /कीप्स
२०- छुट छुट कटोरी /बाउल्स
२१- पेस्ट्री टॉर्च 
२२- इंजेक्शन
२३- आई ड्रॉपर्स
२४- टूथपिक्स
२५-बेबी ब्लॉक्स
२६- मॉउंटिंग पुट्टी
२७ -डलिंग स्प्रे
२८- ोुफ़सेट स्पैटुला
२९- पेस्ट्री बैग्स ऐंड टिप्स
३०- फेक आइस
३१ - गूंद अर  भिन्न भिन्न टेप्स  अर ग्लोब्स
३२- मोमबत्ती , माचिस , आलपिन्स
३३- हीट गन्स
३४  - स्यूण  - धागो ,
३५ - स्ट्रॉ
३५- कैंची /कटर्स
३७ - सजावट को अन्य सामान परिस्थिति अनुसार
कार्य अनुसार यूं  उपकरणूं  आवश्यकता पड़दी। 

 सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती


tools for Food styling and Food Photography, फ़ूड स्टाइलिंग और फ़ूड फोटोग्राफी , फ़ूड फोटोग्राफी हेतु फ़ूड स्टाइलिंग आवश्यकता ;  फूड  फोटोग्राफी हेतु  फ़ूड स्टाइलिंग के लिए  सही उपकरण किट /टूल किट


 

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