Author Topic: Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख  (Read 1484408 times)

Bhishma Kukreti

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सरसर चबोड़

                 जब गढ़वळी साहित्यकार फ़ौज मा भर्ती ह्वेन !

 

                                                  भीष्म कुकरेती


                ब्याळि सुपिन मा क्या दिख्दु बल सौब् गढ़वळि साहित्यकार फ़ौज मा काम करणा छन अर सौब तैं ऊंका साहित्यिक काम से इ काम बंटे गे :

 


लीला दत्त कोटनाला - लार्ड रिप्पनक बड़ा लींण से लीला दत्त कोटनाला जी क प्रमोसन हूण इ वाळ च



योगेन्द्र पुरी - ' मिलिटरी मंदिरूं मा 'फूलकंडी 'लेकी ब्यणस्यरिक बिटेन स्याम तलक फूल पौन्चान्दन


अर मंदिरूं मा शशि शेखरा नन्द 'पुष्पांजलि' चढान्दन



भोला दत्त देवरानी - भोला दत्त देवरानी 'पाखा घसियारी ' क कट्यूँ घास फौजी घुडसाल तक सार्दन



सदा नन्द कुकरेती - 'गढवाळी ठाट 'मा सदा नन्द कुकरेती मेस मा स्वाळ-पक्वड़ पकौन्दन




केशवा नन्द कैंथोला, बलदेव प्रसाद नौटियाल अर गुणा नन्द पथिक फौज्युं तैं रामायण सुणान्दन त आदित्य राम दुधफुड़ी गीता पाठ करदन.

 

सदानंद जखमोला अर सचिदानंद कांडपाल - सदानंद जखमोला अर सचिदानंद कांडपाल द्वी मिलिटरी मा हलकर छन अर मिलिटरी बेस से डिफेन्स मिनिस्ट्री मा रैबार पौन्चान्दन

 

भजन सिंह सिंह- भजन सिंह सिंह मिलिट्री ट्रेनिंग स्कूल मा 'सिंग नाद' स्टाइल का मोटिवेटर छन



शिवा नन्द पांडे - शिवा नन्द पांडे क काम च गाड गदनो मा मिलिटरी टेंटूं मा दिवळ छिल या लालटेन से 'उज्यळि' करण



डा भक्त दर्शन : डा भक्त दर्शन सेना मा हाई प्रोफाइल 'दिवंगत औफ़िसरूं' विधवों पेन्सन पट्टा क काम सम्बाल्दन।

 


डा शिव प्रसाद डबराल- डा शिव प्रसाद डबराल 'अलकनंदा घाटी ' मा मिलिटरी सर्वेयर छन



अबोध बंधु बहुगुणा : टिट फॉर टैट ' रणनीति का ब्युंत अनुसार अबोध बंधु बहुगुणा तैं पाकिस्तान मा 'दैसत' फैलाणो पाकिस्तान भिजे गे.

उन बहुगुणा अर रजनी कुकरेती क आपस मा 'व्याकरण ' कु जि सिखाल क कारण मिलिटरी कोर्ट मा मुकदमा बि चलणु च



सुदामा प्रसाद प्रेमी - सुदामा प्रसाद प्रेमी स्टोर मा ज्वा बि 'अग्याळ ' आन्द वांको हिसाब किताब दिखदन.



चक्रधर बहुगुणा - बहुगुणा जी मिलिटरी बैंडमा 'मोछंग' बजांदन

 

रघुवीर सिंह रावत - रघुवीर सिंह रावत मिलटरी का 'गुठ्यारो' मोंळ ओ पतरोळ छन






घनश्याम रतूड़ी - . घनश्याम रतूड़ी 'चोला बदल' का एक्सपर्ट माने जान्दन त यूनीफ़ॉर्म विभाग मा दर्जी बण्या छन



कन्हया लाल डंडरियाल- कन्हया लाल डंडरियाल जी राशन ऑफिस मा छन अर 'अन्ज्वाळ'इन इ किचन वालूं तैं राशन भौरिक दींदन.

 कन्हया लाल डंडरियाल जीन कथगा इ कोशिश कार कि ए साल उंकी पोस्टिंग सिविल एरिया मा ह्व़े जाओ त ह्युन्दो मैनौं

 'कीडू ब्व़े' तैं गाँ से भट्यावन. पण ए साल बि साब लोगूँ न कन्हया लाल डंडरियाल जी तैं 'चुसणा' दिखै द्याई.




धर्मा नन्द उनियाल- धर्मा नन्द उनियाल मिलिटरी बग्वानूं मा 'हिसर, किनगोड़ अर काफळ' ऊँ बुट्या काटदन



गोविन्द चातक - गोविन्द चातक बि मिलिटरी बग्वानूं मा ' फूल पति' छंड्यार्दन



गिरधारी लाल कंकाल - गिरधारी लाल जी तैं बिल्डिंगऊँ पंछी भगाणो काम मिल्युं च त 'फुर्र 'घिंडुड़ी बोलिक कवा, करैं भगाणा रौंदन.

दगड मा भगवती चरण निर्मोही क काम बि 'हिलांस' जन पंछी भगाणो च बल.



दुर्गा प्रसाद घिल्डियाल - दुर्गा प्रसाद घिल्डियाल तैं रेजिडेंसियल क्वार्टरूं मा 'म्वारि'यूँ जळम्वट साफ करणो काम मिल्युं च पण रोज शिकैत आणा नि इ रौंदन बल

दुर्गा प्रसाद घिल्डियाल जी दूसरों 'ब्वारी' यूँ पर 'गारी' मारणा रौंदन.



भगवती प्रसाद जोशी हिमवंतवासी - बडी कोशिश अर सिफारिश से भगवती प्रसाद जोशी हिमवंतवासी तैं हिरदय राम मास्टर की जगा पर मास्टरगिरी मीली गे

सुरेन्द्र पौल- सुरेन्द्र पौल बि डंडरियाल जी दगड राशन स्टोर मा छन अर 'चुंगटि' न नापिक मसाला दीन्दन.





गोकुला नन्द किमोठी: लापता सैनिक विभाग मा सैनिकुं पितरूं रैबार अखब़ारूं मा छपवाणो काम करदन



ललित केशवान: ललित केशवान मिलट्री गार्डनूं मा 'खिल्दा पात अर हंसदा फूलूं ' की कट्टिंग करदन.



प्रेम लाल भट्ट - साब लोगूँ क पुटक पर 'कुतघळी' दीण से साब लोग खुश छन अर अब भट्ट जी तैं क्वी 'उर्ख्यलै घाण जन नि कुटदो' .

 


जीत सिंह नेगी- जीत सिंह नेगी नै नै भर्ती हुईं सूबेदारनि 'वीरा ' क दगड ' उचि-निसि डांड्यू ' सर्वे करदन .

 

चन्द्र सिंग राही - चन्द्र सिंग राही जी मिलिटरी बैंड मा 'रण सिंगा ' बाजंदन

 


पाराशर गौड़ - पाराशर गौड़ मिलिटरी फिलम पब्लिसिटी मा छन अर बीसेक सालुं से 'जग्वाळ' मा छन बल कै दिन त 'क्वी चक्र'

मीलल


 


योगेश्वर प्रसाद पांथरी- पैल गढ़वाल राइफल मा राइफल मैन छ्या पण 'गढ़वाल राइफल ' किताब मा टाइपिंग मिस्टेक से कुछ गलत घटना छपणो छ्वटो सी जुरम मा

पंथारी जी क ट्रांसफर लैंसडाउन से कोटद्वार ह्व़े गे. हालांकि सौब तैं पता बि च बल टाइपिंग मिस्टेक स्वरुप ढौंडियाल जी कि छे, पण ढौंडियाल जी पी.एम्.ओ.

मा मिलिटरी पर्सनल डिपार्टमेंट मा हूण से बची गेन

राजेन्द्र धष्माना - राजेन्द्र धष्माना 'अर्ध ग्रामेस्वर ' सिपैयुं तैं लेफ्ट-राइट लेफ्ट-राइट परेड करान्दन




नेत्र सिंग असवाल - बगैर अपण साब से पुछ्याँ अर नियम विरुद्ध नेत्र सिंग असवाल जीन कै 'ढांगा से साक्षात्कार ' कार बल त नेत्र सिंग असवाल तैं नौकरी से बर्खास्त करे गे

 

शेर सिंह गढ़ देसी- शेर सिंह गढ़ देसी न फांस कविता छपाई त सेना मा निरसा फैल़ाणा जुर्म मा सस्पेंड छन

 

कुला नन्द भारतीय - कुला नन्द भारतीय नाई क काम करदन अर स्ब्युं तैं 'डौळया ' बणान्दन



नित्या नन्द मैठाणी- ऑल इंडिया रेडिओ मा फौजी प्रोग्राम इ दीन्दन

 

प्रताप शिखर - प्रताप शिखर चैना बोर्डर पर मिलिटरी हवामान विभाग मा छन अर ऊं मा एकी काम च , दूरबीन लेकी इ दिखण कि 'कुरेड़ी फ़टी ' गे कि ना

 

जग्गू नौटियाल: जग्गू नौटियाल टियर गैस फैक्टरी मा टियर गैस प्रोडक्सन मा काम करदा छया अर अब रिटायर हूणो बाद अपण 'सम्लौण'

पर काम करणा छन.


भीष्म कुकरेती: फील्ड मार्शल भगवती प्रसाद नौटियाल तैं गाळि भ्वरीं चिट्ठी लिखणो दंड मा भीष्म कुकरेती क कोर्ट मार्शल हुयुं च

अर यांको बजै से भीष्म कुकरेती का  भौत सा जूनियर साहित्यकारूं तैं पचास हजारी मैडल मील पण भीष्म कुकरेती तैं मेडल नि मील त

भीष्म कुकरेती पर 'कबलाट' की बीमारी लगीँ च



डा. नन्द किशोर ढौंडियाल : ' गढ़वाली व्यंजन' किताब क कारण डा. नन्द किशोर ढौंडियाल मिलटरी मेस मा रूटळ पकान्दन.



डा. मनोरमा ढौंडियाळ अर धनेश कोठारी : डा मनोरमा ढौंडियाळ जु बि फौजी डौर जांद वैमा गढ़वळी मंतर पौढीक रख्वळी करदन अर

दगड मा धनेश कोठारी बखर या कुखुड़ मारद दें 'ज्यून्दाळ' डालदन .

 

वीना पाणी जोशी : वीना पाणी जोशी बि मिलटरी गार्डन मा काम करदिन अर कथगा इ दैञ बुरासुं पर पिठै लगाणो जुरम मा मिलिटरी से ससपेंड बि ह्व़ेन



बीना बेंजवाळ: बीना बेंजवाळ को काम च फौजी बिल्डिंगूं क दिवाल 'कमेड़ा' से लिपण. अर जरोरात पोड़ी गे त 'कमेड़ा क आखारूं न देश भक्ति का

सन्देश दिवालुं पर लिखण .



पूरण पंत पथिक- पूरण पंत को काम च मिलिटरी मेस मा जवानु तैं खाणक खाणो, चाय पीणो बान 'गढ़वाळी मा धाई' लगाण



मदन डुकलाण : मदन डुकलाण मिलिटरी पोस्ट औफ़िस मा फौज्युं 'चिट्ठी -पतरी ' छंट्याणो काम कर्रदन



इश्वरी प्रसाद उनियाल अर विमल नेगी : इश्वरी प्रसाद उनियाल दुश्मन देस मा अपण जासुसुं 'रन्त रैबार' लांदन त विमल नेगी दुश्मन देस मा

 गलत 'खबर सार' याने कि र्यूमर फैलान्दन


चक्रधर कुकरेती - चक्रधर कुकरेती अच्काल सस्पेंड छन. कुकरेती वंशावली मां चक्रधर कुकरेती न जसपुरों बहुगुणो वन्सावाली बि छापी दे.

अबोध बंधु बहुगुणा न मुकदमा कार बल बहुगुणा बन्सावली छापणो एकाधिकार बहुगुणो तै इ च ना कि कै कुकरेती तैं त अबोध जी मुकदमा जीति गेन.

एक हैंक मुकदमा राम प्रसाद बहुगुणा न कार बल जब हम मथि मुल्क्यों न बहुगुणा बन्सावली मा सल़ाणी बहुगुणो नाम नि छाप त चक्रधर कुकरेती

तैं क्वी अधिकार नि छयो कि वो सलाणी बहुगुणो क बन्सावली छापन. चक्रधर जी यू मुकदमा बि हारी गेन अर सस्पेंड ह्व़े गेन. उना कोटद्वार का ढाण्गळ

का कुकरेती अलग नाराज छन कि चक्रधर कुकरेती न जसपुर का कुकरेत्युं दगड बहुगुणा वंशावली त खूब छाप पण ढाण्गळक कुकरेत्युं वन्सावळी नि छाप.

विचारा चक्रधर जी ! ना मुंडित का रैन ना गाँव का



लोकेश नवानी- लोकेश नवानी क काम च जवानुं कपड़ा 'फंची ' भौरिक धोबी घाट लिजाण अर लाण. ऊँ लोकेश जी काम धोब्यूँ तैं 'धाद' लगाणो बि च



नरेंद्र सिंह नेगी: नरेंद्र सिंह नेगी डाइटिंग अर हेल्थ मेंटेनेंस डिपार्टमेंट मा हरेक जवान तैं बथान्दन बल " कथगा खैलि !"

 

बी. मोहन नेगी: बी. मोहन नेगी दुश्मन जासुसुं (जौंक फोटो उपलब्ध नि ह्वाऊ) क फोटो बणान्दन



जयपाल सिंह रावत : जयपाल सिंह रावत मिलटरी पेस्ट कंट्रोल विभाग मा छिपडु, किदलु, मूस जन कीड़ मक्वड़ भगांदन

 

बिहारी लाल जालंधरी : बिहारी लाल जालंधरी चाइना बोर्डर पर साउंड डिटेक्टर छन अर इन पता लगान्दन बल पल्तिर चीनी रडार 'गढ़वाळी या कुमाउंनी ध्वनि'

पकड़द छन कि ना

.

हरिश जुयाल : मिलिटरी हौस्पिटल मा जब बि मरीजुं की 'उकताट' बढ़दि हरीश जुयाल तें 'खिग्ताट 'कौरिक म्रीजुन बीमारी ठीक करण पड़द.



ओम प्रकाश सेमवाल - कै बि बड़ो असरदार औफ़िसरऊँ फूफुं तैं 'मेरी पुफु' बोलिक प्रमोसन पर प्रमोसन लीणा छन



उमा भट्ट - उमा भट्ट मिलिटरी स्कूल मा टीचर छे पण कै टी.वी रिपोर्टर बड़चोदन स्टिंग ओप्रेसन कार बल उमा भट्ट तैं 'द्वी आखर' से जादा नि आन्द त

अच्काल उमा भट्ट नौकरी से सस्पेंड च .

 

दर्शन सिंह बिष्ट- . दर्शन सिंह बिष्ट भारत- नेपाल 'केर' (बौर्डर) पर बिजली विभाग मा काम करदन.

 

गिरीश सुंदरियाल- गिरीश सुंदरियाल दुश्मन जासुसुं 'अन्वार' पछ्यणो विभाग मा छन

 

वीरेंद्र पंवार - मिलिटरी रिसर्च विंग मा ह्युन्दों मा 'कन कैक वसंत आलो' क खोज मा लग्यां  छन.



शांति प्रकाश 'जिज्ञासु' - शांति प्रकाश 'जिज्ञासु' न इंटरव्यू दियुं च अर 'आस' मा छन कि अप्वाइंटमेंट लेटर जल्दी इ आलो.

 

तोताराम ढौंडियाल - जब कबि मिलिटरी क्वार्टरूं मा कैक ब्या ह्वाओ त तोताराम ढौंडियाल जबरदस्ती ' गढ़वाळी मांगळ ' लगंदन .

साब लोग ऊंका ट्रांसफर करण चाणा छन पण साब लोगूँ समज मा इ नि आणो च बल तोताराम ढौंडियाल जी तैं 'गाव या शहर' मादे

कख भिजे जाओ.


डा.दाता राम पुरोहित: डा.दाता राम पुरोहित मिलिटरी ऑफिसरूं तैं 'चक्रव्यूह', 'गरुड़ व्यूह' जन वार स्ट्रेटिजी सिखान्दन अर कबि कबि डेप्युटेसन मा

जर्मनी बि जान्दन

 

.नरेंद्र कठैत - मेस मा 'पाणी ' भरदन



देवेश जोशी - देवेश जोशी हवामान विभाग मा 'घाम, पाणि , छैल' क हिसाब रिकार्ड करदन



डा. अचला नन्द जखमोला - 'कोष विधा' का लिख्वार' डा. अचला नन्द जखमोला अच्काल

गढ़वाळी आलोचना का फील्ड मार्शल भगवती प्रसाद नौटियाल बिटेन 'गढ़वाली मा हिंदी कन पुच्याण'

की ट्रेनिंग लीणा छन.

दीन दयाल बलुणी - साब लोग 'घंघतोळ मा छन बल बलुणी जी तैं बोर्डर पर रखे जाओ या बैक ऑफिस मा !


डा नरेंद्र गौनियाल- डा गौनियाल मिलिटरी रूस्वड़ बिटेन भैर इ नि आन्दन किलैकि उंकी 'धीत' इ नि भोर्यांदी


ब्रिजेंदर कुमार नेगी - ब्रिजेंदर कुमार नेगी क्या सुन्दर बैक ऑफिस मा छया एक दिन 'उमाळ' मा ऐक गौन्त्या (टूर वल़ू जॉब) विभाग मा ट्रांसफर ल्हें ल्याई


दिनेश ध्यानी- दिनेश ध्यानी तैं हमेशा बांजै धार मा निगरानी काम दिए जांद. जब की ध्यानी जी तैं काम करद दें ' गंगा जी का जौ' दिखण पसंद च


गीतेश नेगी , जयारा जी, जेठुरी जी , बाल कृष्ण ध्यानी - गीतेश नेगी , जयारा जी, जेठुरी जी , बाल कृष्ण ध्यानी जी आद्युंन

इन्टरनेट स्पेसोग्रैफी क अब्बल नंबरूं मा इम्तान  पास कौरी आल अब टेरीटोरियल एडमिनिस्ट्रेसन मा कमीसन/रिकोग्निसन कि जग्वाळ मा छन .

 .



(कृपया नॉट करें - यह लेख केवल कोरी कल्पना पर आधारित है . )



















 


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Bhishma Kukreti

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   आखिर पूरण पंत अर नरेंद्र कठैत मा दंगळयौ किलै होणु च ?

 

                        कन्द्युर्या /जासूस - भीष्म कुकरेती

 

                पूरण पंतौ व्यंग्य गद्य संग्रह 'स्वास्ति श्री ..'आण पर गढवाळी क दुसर व्यंग्यकार नरेंद्र कठैत न समालोचना ल्याख
 
' यो ठीक च बल गढवाळी मा पैनो/ तेजधारी व्यंग्य की कमी च अर पंत जी सरीखा लिखवारूं तैं यीं विधा मा आण इ चयेंद .
 
पण यू आपन ठीक नि कार बल मै से तेज धार वळ व्यंग्य लेखी दिने.

स्वस्ति श्री मा अभिनन्दन पत्र, समेत इकतीस व्यंग्य म्यार व्यंगों से बढिया छन. आपन प्रोफेसनल काम नि कार

जब आपन कविता मा नाम कमाई इ याल त क्या जरोरत छे जु आप व्यंग्य की दाथड़ी दाथ्दी, कुलाड़ी, खुन्करी क्या

बमग्व़ाळा लेकी गढवाली व्यंग्य थौळ मा ऐ गेवां.

स्वास्ति श्री मा -

                      आपन नेता अर फोकट का फुन्द्या नाथुं जड़ नाश करे दे अर इख पौड़ी मा लोक बुलण बिसे गेन की पूरण पंत का

व्यंग्युं मा ल्वे च ल्वे आग च आग, अर अब आपन व्यंग्य राज मा मेरी बणि बणयि गद्दी लुठणै ध्रिष्ट्ता कौरी दे

                            आपक व्यंग्युं नेतौं तैं नंगो करे गे याँ से मेरी बादशाहत खतरा मा पोड़ी गे. अरे समीक्षक वीरेंद्र पंवार जु म्यार

 हितेषी छन वो बि तुमारा उदाहर्ण दी णा छन बल द्याखो पुराण पंत की भाषा -
 
तुम समझदार छौ. जरा लिख्यां तैं बिंडी समज्याँ...ज्यू ब्व णु की तुमारि खूब खातिर ... उफार वे डाळी मा बांधिद्युन.....

आपक व्यंग्युं तैं बांचिक डा नन्द किशोर ढौंडियाल सरीखा आलोचक बि बुलण बिसे गेन बल असलियत मा पुरण पंत को क्वी क्या सामना कॉरल !

यो त  आपन मै पर सरासर अन्याय करी दे. आप तैं असलियत वादी व्यंग्य सिरफ़ म्योखुण रिजर्व रखण चयाणा छ्या. 

               अरे ! इख तलक की म्यार नया नया बण्या धरम गुरु गढवाळी आलोचना का सिरमौर भ.प्र. नौटियाल जी बि बुलणा छया बल

स्वास्ति श्री पाठकों को चौन्कांद बि च , पुराण पंत का लेख पाठक वृन्दों को आकस्मिक आघात लगाण मा  सक्षम छन

(वो त भलो च की नौटियाल जी आपकी क्वी आलोचना प्रकशित नि करदन ) .अब आप इ ब्थावा मै पर क्या गुजरणि होली

म्यार धर्म गुरु मेरी समणि म्यार प्रतियोगी , कम्पीटिटर की प्रशंषा करणा छन .अफु तैं मी गढवाळी व्यंग्यऔ रियासत को अकेला

वारिस  माणदो छौ आपन स्वास्ति श्रीमा   इथगा बढिया आकस्मिक आघात लगाण वल़ा व्यंग्य देका मेरी एकाधिकार  मा घुसपैठ करी  दे

                       गढवाळी सुकट्वा  देवेंद्र जोशी मदन डुक्लाण मा छ्वीं लगौणा  छया बल स्वास्ति श्री मा ऐतिहासिक काल अर, स्थान अर वर्ग को ध्यान

पूरो च. देवेन्द्र जीन उदाहरण दे , 'या कथा शुरू होंद उत्तरप्रदेश का जमाना बटी . बात च ल्ग्ब्गा १९९३ की ......'

                  श्री शिव . सि. निसंग जी से मी तैं उम्मेद छे की वो मै छोड़िक दुन्या मा कै हैंको तैं व्यंग्यकार इ नि माणदन ऊन बि मै तैं सुणै दे  बल पुराण पंत

का लेखुं मा अलंकार, अर घर्या मुहावरों प्रयोग से व्यंग्य मा धार इ नि आई बलकण मा बंचनेरूं तैं मजा बि आंदो जन की

'मी लमडांदू, अटगान्दू , रपटान्दू पन गिंगजांदू त नि छौं या रंद, मंद, खंड बंड, ....

             श्रीनगर मा मेरा गुण ग्राही डा.दाता राम पुरोहित जी से इन उम्मीद नि रौंदी कि वो कें पोथी क आलोचना फुलोचना कारल पन आपकी

किताब बांची त टेलीफोन मा बुल ण बिसेन बल यार कठैत जी ! भौत सि जगा मा स्वास्ति श्री मा उलटवासी संगत को भौत इ बढिया प्रयोग

हुयुं च . जन कि एक वाक्य कि बानकी द्याखो - 'हे निहुण्या मौ करौंका , या एक शीर्षक द्याखो हाँ 'औरी सब राजी ख़ुशी छन -१,

अर भितर ये शीर्षक का विषय बड़ा ड़रयौण्या छन . व्यंग्य मा विरिधाभासी भाव लैक पापियुं, गुंडों या दुरजनूं  पर चोट करण मा

पंत जी मास्टर ना प्रोफेसेर  लगदन. प्रोफ़ेसर पुरोहित न जब ब्वाल बल विश्वासी शब्दों से जब अनाचारीयुं , राजनैतिक -चोरुं,

प्रशाशन पर अविश्वास लाण  पन्त जी क खासियत च त मै पर क्या बीति होली  ? पंत जी ! जौं शब्दों सुणणो मी दबे गे छौ ओ इ शब्द अब जब

आपका बारा मा बोले जाल त क्या मीन निरस्याण नि च ?

   अब आप इ न्याय कारो कबि भीषम कुकरेती जी मेरी बड़ें कौरिक नि थगदो छौ. मेरी' कुळा पिचकारी' किताब मा भीष्म कुकरेती जीन कथगा

बडे कारि छे अब वी कुकरेती जी इन्टरनेट मा लिखणा छन बल -

    जन रूस का कॉमिक  रचनाकार अलेक्जेंडर एबलसिमोव  (१७४२-१७८३) आम जिन्दगी तैं आम बोल चाल की भाषा मा दर्शान्दा छयो उनि

पूरण पंत आम जीवन तैं आम बोल चाल की भषा मा बताण कुशल छन

  भौत सी बतुं मा रुसी कवि, व्यंग्यकार अर बच्चों सहित्यौ लिख्वार साशा  कोर्नी ( १८८०-१९३२)  मा अर पूरण पंत की रचनाओं मा  साम्यता च

               जन रुसी विक्टर डेनी  (१८९३-१९४६) क राज नैतिक पोस्टर राजनैतिक अनाचार पर बरछा चलान्दा छ्या उनि  पंत का व्यंग्यात्मक  लेख भ्रष्ट राजनीति तैं श्योळ जन छ्पोड़दन

                 रुसी साहित्यकार डानिल खारम्स (१९०५-१९४२) क व्यंग्यात्मक गद्य, पद्य मा अमलाण , तीक्ष्ता होंदी छे अर वो बालुप्योगी  साहित्य बि लिखद छौ . दिखे जाओ त पूरण पंत का

   स्वस्ति श्री मा  लेख बि तेज नोकधारी छन, उग्र छन, प्रचंड छन, भौत सी जगा त अति जगह कर्ण कटु बि छन .
 
               जन रुसी साहित्यकार , राष्ट्रीय गीत लिख्वार ) , सर्जे मिखालकोव (१९१३-२००९) क व्यंगात्मक पशु पंछी  वळा कथों तै पौढीक मजा आन्द त 

आनन्द का हिसाब से पंत का व्यंगात्मक गद्य मा बि भौत सी जगा मा उनि आनन्द आन्द.

      रूसी पत्रकार , सम्पादक मिखाइल साल्टायकोव श्चेड्रीन (१८२६-१८८९)  अर पूरण पंत मा एक बडी साम्यता च कि  मिखाइल साल्टायकोव श्चेड्रीन  अपण पत्रकारी लेखुं अर सम्पादकीय

व्यंग्यात्मक भाषा  मा लिखद छौ  त इनी पूर्ण पंत का गढवाळी धाई क सम्पादकीय मा व्यंग्यात्मक शैली  को पुरो असर होंद अर भौत सी जगह पूरण पंत का लेखुं मा

सम्पादकीय फैसला दीणे आदत बि साफ़ साफ़ दिखे सक्यांद जन कि 'धरम कर्म ' लेख. जन कि मिखाइल साल्टायकोव श्चेड्रीन न लेखी छौ बल ," मेरो साहित्यिक उद्देश्य च

बल मी सद्यनी आधुनिक रूस मा  लालच, पाखंड, झूठ, चोरी-जारी, धोखाबाजी, अर मूर्खता का सद्य्नी विरोध कौरु."

                अर पूरन पंत की किताब स्वास्ति श्री का लेख  बि उत्तराखंड , भारत मा अळगस -अळगस्यूं पर  अंगार लगंदन; ; उच्चका उच्चकापन

उठक-बैठक  करान्दन,  कामचोर-कामचोरी तैं कफन दीन्दन; , चोर-चाक्र्री तैं  चिमल्ठु जन तडकान्दन;  कपट-कपटी तैं कुरचदन ;  चोर -चोरी-चोरिका तैं चाबुकन चटकांदन; ;    ,

चोर्ब्जार-चोरबजार्या तैं चड़कौण्यान्दन (डंक मरना)  ; चोरहाटिया का चम्पी करदन;  छल-छली क छेछ्लेदारी करदन;   तस्कर-तस्करी पर तूण दीन्दन;

  दुर्भाव-दुर्भावी क दांत तुडदन , विकार-विकारी तैं वखळुम गंज्यळन कुटदन;   धुर्या पर धम से धौल जमान्दन   ; मिथ्या-मिथ्याबाज तैं मुठक्यान्दन ;

पाखंड-पाखंडी क पराळझड़ी से पिटाई करदन ; मक्कार-मक्कारी की मिरतु की बात करदन; ; मूर्ख-मूर्खता तैं उप्पन जन मिंडण चान्दन ; मूढ़-मूढ़ता तैं मड़गट जोग करण चान्दन .

        त पंत जी आप इ ब्वालो आप छ्या प्रसिद्ध व्यंग्य कवि अर आपन मेरी  टेरीटरी मा याने गद्यात्मक व्यंग्य क क्षेत्र मा अतिक्रमण कौरिक ठीक काम नि कार.
 
मी क्या सुंदर  इखुली गद्यात्मक क सारी मा  जमी क बैठूं छौ अर आपन म्यार एकाधिकार पर अधिकार करणे कोशिश करी दे , म्यार हिसा मा भागीदारी करी दे.   

आपसे आशा च आप अपणो व्यंगौ काव्य का स्यारुं मा  चबोड़ का सट्टी ब्वाओ; अर म्यार व्यंगात्मक पुंगडों मा उज्याड़ खाणै  कोशिश बन्द कौरी द्याओ. 

आपको हितैसी

नरेंद्र कठैत, पौड़ी,

   जब पूरण पंत जी न नरेंद्र कथित जी की समालोचना बांच  त पूरण पंत से णि रये ग्याई

पूरण जी न बि एक उत्तर गढवा ळी ढाई मा छाप

     प्रिय  व्यंग्य का जोशीला कलमदार श्री कठैत जी !
 
आपक लेख बांच अर जरा ज्यू कुछ खट्टो त णि ह्व़े पन उचमिची त लगी गे भै!

अब इन च शुरुवात आपन इ कार त फिर मी बि चुप किलै रौंदू भै!

मी बि व्यंग्यात्मक काव्य का स्यारों कब्जादार छौ. एकाद क्वी क्वी छूट मुट पुंगडों मा व्यंग्यात्मक खारिक (जीन)

ब्व़े बि लीन्दो छौ त मेरो एकाधिकार पर क्वी फ़रक नि पड़दो   छौ.

पण अतिक्रमण की  शुरुवात त तुमनी कार जब आपन व्यंग्य कविता संग्रह ' पाणी  ' छाप

ज़रा घड्यावदी मेफर क्या बीती होली !

ज़रा स्वाचो त सै जब भ.प्र. नौटियाल जी न 'पाणी' क भूमिका मा क्या  ल्याख -
 
'ये खंड काव्य मा  गढ़वालि भाषाई प्रांज्जलता  जख एक तिर्पान पढ्न मा सरल अर समझण मा छपछपी  पडाळणी

च. व्क्खी हैकि तिर्पान ठेठ गढ़वलि श्ब्दुं कु जनक जोड़ कवि का मनै गे ड्या तैं रोचकता का साथ खोलण मा सक्षम च."
 
   फिर महान आलोचक नौटियाल जी लिखणा छन बल " यद्यपि इन रचना मा व्यंग्य, विनोद च, कुछ चुटीली-कंटेली

नोक झोक बि छन. ...यानका वास्ता कवि कठैत साधुवाद का पात्र छन" त इन मा क्या मी तैं रोष णी ऐ होलू की

मेरा पुंगडों मा क्वी हैंको आई गे

                आप तैं  त पता इ च बल काव्य व्यंग्य मा म्यारो इ नाम भारी च त फिर आप किलै 'पाणी 'लेकी ऐन'. . 
 मै पर क्या बीति होली जब भीष्म कुकरेती न ब्वाल बल 'पाणी ' की कति कविता इगोर गुबेरमैन (१९३६) की जन तेज छन .

कन लगो होलू मैपर जब कुकरेती बुल्दो छौ बल कठैत की पाणी कवितौं मा मिथ तैं आधार बणेक एक बढिया काम होणु च कि
 
आम जनता कविता से सॉंग मा जुड़ी जावो. अब द्याखो जु काम म्यार छौ वो आप न शुरू करी दे त मीन बि गद्य मा आण इ छौ. 

 तुमन पाणी जन विषय उठैक आम गढ़वाळी जन मानस कि दुखती रग पर हाथ डाळ अर म्यार वाड सरकाणै कोशिश कार

त कठैत जी असली गुनाहगार को च / मी की आप?

                   वाह ! अप तैं बुरु लग जब भीष्म कुकरेती न मेरी बडे कौर ! पण मै पर क्या बीती होली जब भीष्म कुकरेती न ल्याख बल कठैत की कविता मा वो ही

टीस च ज्वा  टीस पाणी-कमी पर आधारित ज़ोन एप्पल औ उपन्यास ' हैचिंग्स' ९१९९३) मा मिलद, द्वी  विधा अलग अलग होण पर बि पाणी जन

आवश्यकता पर पाठ्कुं  ध्यान आकर्षित करण मा द्वी यानी कठैत अर एप्पल कामयाब छन.

              जी आप तैं मेरी बडे से दिक्कत ह्व़े पर आपन इन बि चिताई बल जब भीष्म बोल्दु बल ब्रेन मक्रेया (२००८) की 'कंट्री टाउन  ब्लूस ',

ऐन इंजीनियर्ड वाटर शोर्टेज' जन  कविता पाणि क कमी पर वा इ भयानकता , त्रासदी पैदा करदन  जो कठैत की  पाणी क कविता करदन. तब मै तैं बि त दिक्कत ह्व़े होली की ना?   

  जब भीष्म कुकरेती न ब्वाल बल कठैत की या खंड-काव्य /लम्बी कविता सैमुअल बटलर (१६१३-१६८०) की लम्बी व्यंगात्मक कविता,  ऑस्ट्रेलियाई कवि टिम थोर्न  (१९४४)

स्कौटिश   कवि डगलस लिप्टन की 'ड़ फ्लोरा एंड फौना ऑफ़ ..';   या लोरिन्गोवें जन कवियुं  लम्बी व्यंगात्मक कवितौं याद दिलांदी .

  आपन सौज सौज मा जथगा बि टुट ब्याग, पाप. भ्रष्टाचार , गलत सलत तरीका हमर ज़िना छन वो पर  बंदूक ताण त में पर बि कुछ ना कुछ फ़रक त पोड़ी

होलू की अब व्यंग्य का कवितौ  मैदान एक हैको पहलवान बि ऐ गे .

त कठैत जी आपन मेरी देळी लांग मीन आपकी देळी लांग

आशा च बात आप बींगी गे हवेल्या.

आपकू हितैषी

पुराण पंत पथिक

 (मैंने यह लेख केवल एक प्रयोग के तौर पर लिखा है. आपकी प्रतिक्रिया की इन्तजार में )

१-स्वास्ति श्री (गढवाळी गद्य व्यंग्य संग्रह)

लिख्वार - पूरण  पंत

गढ़वाली धाई प्रकाशन फोन- ०९४१२९३६०५५

२- पाणी

(खंड काव्य)

कवि - नरेंद्र कठैत

पौड़ी फोन ०१३६८-२२१०१६



 

 

 

)   
 

 
 


 

 

Bhishma Kukreti

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Satire and Fatkar
चबोड़ इ चबोड़ मा
 

                        जड्डू/ ठञड से बचणौ 12 कामयाब  उपाय

            (Garhwali Satire, Kumauni Irony, Uttarakhandi Humour, Himalayn Wits )

                               
                                                                            भीष्म कुकरेती
             

         जन कि हर साल होंद अर हर मौसम मा हून्द् उनि ये बरस बि ह्व़े. सब्युंन ब्वाल बल ये साल से बिंडी जड्डू त

म्यार पड़-ददा न बि नि द्याख. म्यार  पड़ -ददा न बि हरेक ह्यूंद मा ब्वाल छौ, " इन जड्डू कबि नि प्वाड़. जन ये बरस पोड़ .."

  त मी ये साल जणगरों/स्पेसिलिस्ट तैं पुछणु   रौं  बल  जड्डू मौसम /ह्युन्दो मौसम मा जड्डू से कनै बचे जाव.ए साल ना सै हैंक

साल त इ नुस्का भोळो साल त काम आइ जाला ।

१-  गढवाळ से भागो अर दूर ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड , मौरिसिस क तर्फां घुमणो जाओ .

२- जु तुमन इन कामयाब नौना पैदा नि कौरिन जु ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड , मौरिसिस मा

ह्वावन त मुंबई, गुजरात, हैदराबाद, बेंगलोर का तरफ भागो . मी तैं सोळ आना उम्मेद  च इख त क्वी ना क्वी नौनु ह्वालू .

अब जब साग-भुज्जी  नि ह्वाओ त  लूण से काम चलाण पोड़द . नौनु ना सै त रिश्तेदार होला त जड्डू मा दक्खिण का

रिश्तेदारूं इख  अड्डा जमाओ. पगाळ बौडाणो बान रुड्युञ/गर्मी मा रिश्तेदारूं आवभगत गढवाळ मा कारो.

३- उत्तरी भारत  वाळु  कुण सला च जडडू /ह्यूंद मा काम पर कबि नि जाण. अपण ना सै  दसरौ ड्यारम आग तापो.

४- हाँ ! जु तुमर औफ़िस मा हीटिंग रेडिएटर लग्याँ  छन त ऐत्वारो बि मय बालबच्चों/यार दगड्यो सैत  औफ़िस जावो.

५- हीटिंग रेडिएटर खरीदो. हैं! पैसा नीन ! ये भै यूँ विदेशी बैंकु भट्टा किलै बैठाणा छंवां ?  विदेसी /परदेसी बैंकु से  उधार मा, पगाळ मा,

इंस्टालमेंट मा  हीटिंग रेडिएटर खरीदो. आप जड्डू से बची जैल्या, विदेसी बैंक मुनाफ़ा कमाला अर भारत की इकोनोमी ग्राफ

ऐंच जाण बिसे जालो.  अपण खातिर ना सै , देसौ  खातिर  उधार मा हीटिंग रेडिएटर खरीदो अर देस की इकोनोमी सुदारो.

इनी नयाणो बान इम्पोर्टेड गीजर इ इस्तेमाल कारो. 

६- जड्डों मा इम्पोर्टेड जिंजर, इम्पोर्टेड ब्लैक पेप्पर, इम्पोर्टेड क्लोवऔ पेस्ट/इम्पोर्टेड मस्टर्ड ऑइल   ड्यारम रखो . मीन  रिसर्च  से पता लगाई बल अब 

हम भारतियुं बौडी   निखालिस भारतीय चीजुं से हंड्रेड  परसेंट इम्युन्ड ह्व़े गे याने की हमर सरैल पर अब भारतीय नुस्कों से

क्वी फ़रक नि पोड़द. जन अब हम अपणि बोली -भाषा नि बींग/समज  सकणा छंवां उनि हमारो पवित्र भारतीय शरीर का क्वी बि अंग

निखालिस भारतीय आदु/अदरक/काळी मिर्च/मुलेठी आदि से प्रभावित नि होंद. हमर सरैल पर केवल  इम्पोर्टेड ब्रांड को इ असर होंद.

अर मनमोहनी  इकोनोमिक्स का हिसाब से इम्पोर्ट करण  से भारतीयता को हरण ह्व़े जाओ त हूण द्याओ  पण इन्डियन इकोनोमी अळग भगण

लगी जाली. त अपण शरीर की केमिस्ट्री अर इन्डियन इकोनोमी का खातिर विंटर सीजन मा कम्पलसरी इम्पोर्टेड जिंजर,

इम्पोर्टेड ब्लैक पेप्पर, इम्पोर्टेड क्लोवऔ पेस्ट, इम्पोर्टेड मस्टर्ड ऑयल  यूज कारो. 

७- केवल इम्पोर्टेड गरम कपड़ा अर इम्पोर्टेड डिसाणो कपड़ा  ही खरीदो.  जब तलक हम देशभक्त भारतीय  मीलिक हरेक  ग्रामीण  उद्यम  पर 

ताल़ो नि लगौला तब तलक हमारि ठंड कम नि ह्व़े सकदी. जड्डू बचाणो खातिर, भारत मा क्वी बि गरीब जड्डू से नि मोर का वास्ता केवल 

इम्पोर्टेड गरम कपड़ा अर इम्पोर्टेड डिसाणो कपड़ा  ही खरीदो.अमेरिकी राष्ट्रपति  की सौं छन जैदिन भारतीयूँन बच्यां -खुच्यां  सबि ग्रामीण उद्यम खतम

कौरी द्याई त समज  ल्याओ वैदिन  भारत मा क्वी बि ठंड से नि मोर सकद .उन हम गढवाळी ये मामला मा हौर इन्डियनूं से जादा प्रगतिशील /प्रोग्रेसिव छंवां 

अब कै बि गढवाळी तैं पता बि नी च बल ग्रामीण उद्योग हुंद क्या छन.

 ८-  नाक पुंजणो  इम्पोर्टेड हैण्ड कर्चीफ/ रुमाल, टिस्स्यु पेपर, इम्पोर्टेड चाइनीज बाम  आदि गाड़ी मा या खिसाउन्द धर्युं रौण चयेंद.खादी क रुमाल भूल से बि यूज  नी होण

चयेंद . अच्काल खादिक रुमालऔ प्रयोग  से हमर नाक लाल ह्व़े जांद. 

९- ह्युन्दुं मा गाजर आदि को रस सौब दकियानूसी बात इ ना अवैज्ञानिक बात ह्व़े गेन .  ह्युन्दुं मा दिन मा चार पंच दें रम या व्हिस्की पीण जरूरि च . अमेरिका मा एक नामी गिरामी मेडिकल रिसर्च कम्पनी न सिद्ध कौर याल बल अब हम भारतीयूँ

ल्वे/खून मा भौत बड़ो बदलाव ऐ गे. अब हमारो हिन्दुस्तानी ल्वे/खून बदलिक  वेस्टर्नाइज्ड अफेक्टेड क्रुओर( ब्लड)  ह्व़े गे . त अब हमारू  ब्लड मा हर समौ

अल्कोहल का कुछ डोज जरूरी हूण चयेंदन  . अब इन मा हरेक भारतीय तैं खासकर जडडू  मा  टक्क लगैक ध्यान दीण पोड़ल बल हर समौ ल्वे/खून मा दारु/अल्कोहल 

क मात्रा कतै   बि कम नि ह्वाऊ . जनि इंडियन ब्लड मा  अल्कोहल की मात्रा कम  ह्व़े ना तनी इन्डियन ब्लड   हिन्दुस्तानी खून मा बदली जालो अर आज हिन्दुस्तानी खून

ह्यूंद तैं बरदास्त नि कौर सकद. यो इ कारण च अच्काल प्युअर  इंडियन टी.वी चैनेल प्रकृति दत्त ह्यूंद, हेमंत अर शिशिर मौसम /जलवायु  तैं  ठञडासुर,  मौत का सौदागर, मानव विरोधी

बरफ का कहर, जन नाम दीन्दन.  हाँ त ! ह्युन्दुं  मा,  दिन मा हरेक इंडियन तैं चार से पांच दें दारु  पीण चयेंद.सरैल बि गरम रौंद अर   इन्डियन इकोनोमी मा बि उच्छाला रौंद.

१०- जब बि क्वी पौण/मेंमान  तुमर ड़्यार आण चांदो त वै खुण कडक शब्दुं मा हिदैत दीण  चएंद बल दगड मा   दारु-सारु क बोतळ अर मुर्गा-सुरगा बि जरुर लाओ.

हम तैं अपण इकोनोमिकल डेवलपमेंट का खातिर  अपणि संस्कृति मा कल्चरल इवोल्युसन ल़ाण जरूरी च.त यांक बान जरूरी च कि जडडू मा चा या गरम पाणि से ना

 बल्कि मेहमानों स्वागत मुर्गा-सुरगा अर दारु-सारु से ही ह्वाओ.

११- जब कबि आप जडडू मा कैक पौण/ मैमान बणनो  जावन  त घर्वाती/घराती/मेजवान मा साफ़ बोली दीण चयेंद, " जड्डों मा पौणों स्वागत मा वेलकम  ड्रिंक मा जिन का एक या द्वी पैग ह्वावन.

सुस्ताणों ड्रिंक मा  द्वी रम का पैग ह्वावन अर लेजर (मौज) ड्रिंक मा व्हिस्की ही होण चयेंद. मंचिंग त मुर्गा से तौळ हूण इ नि चयेंद.अर सी औफ़ ड्रिंक  वाइन या .."

१२- ह्यूंन्दुं , मा अपणी सोच सकारात्मक बणाओ अर गरम जोशी से राओ जां से गर्मी चौड़  /जल्दी ऐ जाओ.


Satire from Garhwal, Satire from Kumaun, Satire from uttarakhand, Satire from Himalayas  to be continued..........

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Bhishma Kukreti

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                           हैप्पी फ्यूंळी डे की चाहत

 
              कभी कभी  मेरे दिल में नही दिमाग में दधिसारी (नवनीत) विचार आता है की कभी हम सभी एक दुसरे को हैप्पी फ्यूंळी डे की दुआ

देंगे .

  कभी कभी मेरे को सपना आता है कि जितने जतन से, जितनी फिकर से, जितनी चिंता से, जतने ध्यान से  हम रोज डे को याद करते हैं उतने जतन से 

ना सही फंकी (चुंगटि) बरोबर ही सही हैप्पी फ्यूंळी डे की भी याद करती तो हमारे नॉन-पहाड़ी दगड्याओं दोस्तों/ मित्रों का  क्या जता? मुझे नही लगता

कोई भी हमारा नॉन-पहाड़ी दग ड्या, दोस्त, मित्र/फ्रेंड हमे और्थोडौक्ष कहते !

  यह ठीक है रोज (गुलाब) शांति,  प्रेम, सौहार्द्य , पवित्रता और सुवा (प्रेमि) के साथ   रोमांस का प्रतीक है . पर किसने कहा की हमारि प्यारी दुलारी ,
 
लाडली, फ्यूंळी  निम्न भाव की प्रतीक नही है

फ्यूंळी  रति संयोग  व राति वयोग  दोनों की निसानी भी है.

फ्यूंळी में मात्री, पित्री, भ्रात्री, भगनी, समाज प्रेम अन्तर्हित है

फ्यूंळी चपलता का भी प्रतीक है

अहा ! फ्यूंळी कोमलता को भी प्रदर्शित करने में गुलाब से कहीं अधिक सक्षम व सही प्रतीक है

जी हाँ! फ्यूंळी प्रतीकोपासना के रूप में प्रयोग होता है.

आह! जब प्रेमी की बात जोही जा रही हो तो फ्यूंळी शब्द प्रतीक्षण (प्रतीक्षा करना ) को उजागर करता है, फ्यूंळी प्रतीक्षण (आसरा) भी

दे देती है, अलंकृत भाषा में  फ्यूंळी प्रेमी को प्रतीक्षक (पूज्य) भी बान जाती है जनाब !

फ्यूंळी शब्द से कोई भी  प्रेमी, किसी भी प्रकर के प्रेम में  हास और उत्साह रोमांच, स्मृति, संतोष, हर्स, मद उत्सुकता के भाव प्र्सर्षित कार सकता है.
 
   रोज डे   सेंट वेलेंटाइन (२६९ इ.) के क्रिस्चियनिटी  के त्याग की याद में मनाया जाता  है और हमे क्या किसी को भी ऐतराज नही होगा कि

कोई भी हिन्दू इस अनोखे मानववादी दिन को याद करे और एक दुसरे को वधाइयां दे.

          यह बहुत ही भली बात है,; प्रशंशनीय बात है  कि हम दूसरे के मां बाप की बडी इज्जत करें पर दुःख तो तब  होता ही है कि जब कोई अपने मा-बाप को तो

अनाथालय में भर्ती कर आता है और दूसरों के मा-बाप की सेवा या इज्जत करने में अपणा सौभाग्य समझता है .
 
कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है की हम भी हैप्पी फ्यूंळी डे मनायें  .


                Happy ----Fyunli--- Day and Happy Rose Day Too!

Bhishma Kukreti

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Grammar of Kumauni language
Grammar of Garhwali Language
Grammar of Languages of Uttarakhand
Grammar of Nepali Language
Grammar of Mid Himalayan Languages


                                      मध्य हिमालयी कुमाउंनी , गढ़वाली एवं नेपाली भाषा-व्याकरण का तुलनात्मक अध्ययन भाग -22


    Comparative Comparative Study of Grammar of Kumauni, Garhwali Grammar and Nepali Grammar ,Grammar of Mid Himalayan Languages-Part-22       

                                          सम्पादन : भीष्म कुकरेती

                         Edited by Bhishm kukreti


                                                         कुमाउंनी में  अव्यय    


                             १- कुमाउंनी  में  समुच्चय  बोधक अव्यय

              डा. भवानी दत्त उप्रेती ने कुमाउंनी समुच्चयों को निम्न प्रकार विभाजित किया है

१- संयोजक - और/हौर, आजि

२-प्रतिरोध वोधक- पर, लेकिन, परन्तु, मगर

३-आश्रय - कि,

विभाजक-

अ-  इश्ये,  जश्ये

ब- चाये, या,

                                                         २- कुमाउंनी में विस्मय  वोधक अव्यय

ओहो! , अहा!

                                       

                                                          ३- कुमाउनी में  दशा सूचक अव्यय

हाय !, राम राम ! , छिछि


                                ४- कुमाउंनी में अनुमोदक वोधक अव्यय

ह्साबाश! , होय, होय होय


                            ५- कुमाउंनी में तिरस्कार वोधक  अव्यय

छि: , चुप, हत्, बप्


                            ६- कुमाउंनी में संबोधन वोधक अव्यय

ओ !, रे!, ल़ा, रे, ऊ 


सन्दर्भ

१- अबोध बंधु बहुगुणा , १९६० , गढ़वाली व्याकरण की रूप रेखा, गढ़वाल साहित्य मंडल , दिल्ली ( Structure of Garhwali Grammar)

२- बाल कृष्ण बाल , स्ट्रक्चर ऑफ़ नेपाली ग्रैमर , मदन पुरूस्कार, पुस्तकालय , नेपाल (Structure of Nepali Grammar)

३- डा. भवानी दत्त उप्रेती , १९७६, कुमाउंनी भाषा अध्ययन, कुमाउंनी समिति, इलाहाबाद (Study of Kumauni Language Grammar)

४- रजनी कुकरेती, २०१०, गढ़वाली भाषा का व्याकरण, विनसर पब्लिशिंग कं. देहरादून ( Grammar of Garhwali Language)

५- कन्हयालाल डंड़रियाल , गढ़वाली शब्दकोश, २०११-२०१२ , शैलवाणी साप्ताहिक, कोटद्वार, में लम्बी लेखमाला (Garhwali- Hindi Dcitionary)

६- अरविन्द पुरोहित , बीना बेंजवाल , २००७, गढ़वाली -हिंदी शब्दकोश , विनसर प्रकाशन, देहरादून (Garhwali hindi Dictionary )

७- श्री एम्'एस. मेहता (मेरा पहाड़ ) से बातचीत

८- श्रीमती हीरा देवी नयाल (पालूड़ी, बेलधार , अल्मोड़ा) , मुंबई से कुमाउंनी शब्दों के बारे में बातचीत

९- श्रीमती शकुंतला देवी , अछ्ब, पन्द्र-बीस क्षेत्र, , नेपाल, नेपाली भाषा सम्बन्धित पूछताछ

१० - भूपति ढकाल , १९८७ , नेपाली व्याकरण को संक्षिप्त दिग्दर्शन , रत्न पुस्तक , भण्डार, नेपाल (Briefs on Nepali Grammar)

११- कृष्ण प्रसाद पराजुली , १९८४, राम्रो रचना , मीठो नेपाली, सहयोगी प्रेस, नेपाल (Nepali Grammar)

१२- चन्द्र मोहन रतूड़ी , गढ़वाली कवितावली ( सं. तारा दत्त गैरोला, प्र. विश्वम्बर दत्त चंदोला) , १९३४, १९८९

Comparative Study of Kumauni Grammar , Garhwali Grammar and Nepali Grammar (Grammar of , Mid Himalayan Languages ) to be continued ........

. @ मध्य हिमालयी भाषा संरक्षण समिति

Bhishma Kukreti

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                Let Us Learn Garhwali Part- 60
                  आवा गढवाळी सिखला , फड़की 60

                   (  Learn Garhwali, Learn Kumauni, Learn Himalayan Languages, Learn Uttarakhandi Languages

                       Bhishm Kukreti

 

                        Animals, Birds, Etc in Garhwali and Kumauni Languages

 
                                    कुमाउंनी व गढ़वाळी में पशु, पक्षी  व जंगली जानवर

                            संकलन - भीष्म कुकरेती
 

हिंदी नाम ----------------------------कुमाउंनी -------------------गढ़वळी

                            जल-जीव

घोंघा ---------------------------------गंड्याल /गर्नेल --------------गंडेळ

केंचुवा ---------------------------------गिदुलो-----------------------किदलु

 मेढक ---------------------------------- भेकान ---------------------मिंडुक

टेडपोल ---------------------------------   ??-----------------------डौख         

मच्छी -----------------------------------माछ, माच्छी-------------माछ

केकड़ा ----------------------------------गंज्याड़ ------------------- गिगुड़ 

                                     थल-जीव

  खरगोश --------------------------------शशो---------------------खरगोस

   साही ------------------------------------शौलो -------------------शौलु/शौल

 हिरन की एक ज़ात ------------------- काकड़ -----------------------काखड़   

 हिरन की एक जाति -------------------??----------------------------मिरग

हिरन की एक जाति --------------------- घुरड़ ---------------------------घ्वीड़

सियार की एक जाति

जिसकी पूँछ चितकबरी----------------??? ----------------------कुरस्यळु

 लम्बी , ग्रे कलर

सियार की एक जाति -------------------श्याल/सियाव  ----------------------- स्याळ

सियार की एक जाति --------------------??? ----------------------फ्योंलु/फ्योडु  (इसकी आवाज अशुभ माना जाता है, गाली का प्रयोग भी)

 घर/गाँव के नजदीक का

बाघ --------------------------------------- ??--------------------------फ्यूंडु

बाघ-----------------------------------------बाघ ------------------------बाग़, ढीराग/गुलदार

नरभक्षी बाघ -------------------------------------------------------------मैस्वाग

(गढ़वाली व कुमाऊं में बाघ परिवार में विभाजित नाम नही हैं.)

भालू ----------------------------------------भालु--------------------------- रिक्क, रिक्ख , भल्लु   

हाथी ----------------------------------------हाति -----------------------------हाति

बंदर -----------------------------------------बानर ---------------------------बांदर

बंदरी ----------------------------------------                ----------------------बांदरि

लंगूर ------------------------------------------गूण---------------------------गूणि 
 
सुअर -----------------------------------------भर्रा ---------------------------सुंगुर/सुंगर   

चूहा -------------------------------------------मुश , --------------------------मूशु , मुश

बड़ा चुहा (अधिकतर खेतों) ---------------- ? -------------------------------लुखुन्दर /हूस

                                          घरेलू जानवर

गौसाला के जानवर ----------------------गोरु-बाछ --------------------------गोर-बछर

गाय ----------------------------------------गोरु ------------------------------गौड़/गौड़ी 

बछडा ---------------------------------------भौड/ बाछ -----------------------------बछुर

बछड़ी ---------------------------------------- बाछ ---------------------------बाछी /बछरि

जवान बछडा -----------------------------    भौड          -------------------------बौड़

जवान बछड़ी ---------------------------------   ?? --------------------------कलोड़/ कल्वडि

बूढी गाय ---------------------------------------??----------------------------ढाञगि

  बैल -----------------------------------------बल्द/बल्ड---------------------------बल्द

 भैंस --------------------------------------------भैंस ---------------------------भैंस, भैंसि

भैंसा -------------------------------------------          -------------------------ब्याला 

भैस का नवजात बच्चा -----------------------कट्ट  ----------------------------कट्या (पु.) कट्टी (स्त्रीलिंग)

जवान भैंस ------------------------------------  ??? -----------------------------पौंडळ  (जो गर्भधारणअवस्था की हो)

बकरी -------------------------------------------           ---------------------------बखरी/बाखरि   

बकरा -------------------------------------------               -------------------------बुगठया (कभी कभी बखुर )

ताकतवर प्रौढ़ , बकरा -------------------------               --------------------------खस्सी बुगठया

देवता निम्मित बकरा ------------------------                -------------------------अमुक दिवता (  ) कुण सिरयुं बुगठया

बकरी का बच्चा -------------------------------               -------------------------- चिनुख /चिनखु

बकरी की बच्ची -------------------------------                --------------------------चिनखि

भेड़ (स्त्री)-----------------------------                                    ------------------- ढिबर / ढिबरी

मेमना ---------------------------------------                                 ----------------------छौनु

मेमनी ----------------------------------------                               -----------------------छौनी

मेढ़ा--------------------------------------                        -----------------------------खाडु /कभी कभी ढिबुर   

घोडा -------------------------------------------घ्वड़ ------------------------------घवाड़ा

घोड़ी --------------------------------------------घ्वडि ------------------------------घोडि  (ड़ +इ)

खच्चर -----------------------------------------खेचर  -------------------------------खचर (पु.) खचरि (स्त्री) 

अन्य घरेलू जानवर (पेट्स)

कुत्ता --------------------------------------                 ------------------------------कुकर / कुकुर                                 

कुत्ती -------------------------------------                     ---------------------------कुत्ति

बिल्ली --------------------------------------                  -----------------------------बिरळि/ बिरळ

बिल्ला --------------------------------------                 -------------------------------ढढु/,  ढडु

                          कीड़े मकोड़े

पिस्सू -----------------------------------------उप्यां ----------------------------------उपन

खटमल----------------------------------------शल्शा/शनेश--------------------------सर्सु   

मच्छर ---------------------------------------छीना -----------------------------------झांझ,डांस 

कनखजूरा ----------------------------कणशागोंल़ो/ कणशागोंव---------------------घंजीर

बडी ततैया --------------------------------अन्ग्र्याल, अंगरयाव-----------------------अंगार , अंगर्याळ /रिंगाळ

ततैया/बर्र  ------------------------------------झिमौड़ो -------------------------------------चिमडा/चिमल्ठु

शहद कि म्क्खी -------------------------------मौनों   --------------------------------------म्वार

चींटी --------------------------------------------किरमोलो/किरमोव-----------------------किरम्वळ/किरमळ/ बुरळ (जब ये जमीन से निकल कर  पंख के साथ होते हैं तो झंग्वर भति कहते हैं)   

काली बडी चींटी ---------------------------------                        ---------------------- सिपड़ी 

तितली -----------------------------------------                           ------------------------पोतळ (अनाज पर लगने वाली तितली को भी पोतळ )

मकड़ा ----------------------------------------                              ------------------------मकड़ा

बिच्छु -------------------------------------------                          ---------------------------बिछु

मक्खी ------------------------------------------                          -----------------------------माख

 

 

                             सर्पधारी

छिपकली ----------------------------------------छिपोड़ो ---------------------------------छिपडु  ( ड़  +उ) 

सांप --------------------------------------------- श्याप -------------------------------------गु रौ/गुरा

अजगर ----------------------------------                  ------------------------------------ चिडौ  ( ड़ + औ )       

  ???? ------------------------------------ ?? ---------------------------------------------गौलू ( यह  धीरे चलता है और मोटा होता है)

Bhishma Kukreti

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Satire only
चबोड़ इ चबोड़ मा


                                            अपण पूठो गू दुसरौ  पूठ पर   


( Satire in Garhwali, Satire in Kumauni , Satire in Uttarakhandi and Satire in Himalayan Languges )
                                                     
                                                                         भीष्म कुकरेती

 

                     इख मुंबई मा हमर बिल्डिंग गढवाल दर्शन मा गणपति अर इसाइयूँ  नै साल पर बच्चा अपर बणयाँ प्रोग्राम करदन. बिल्डिंग औ हौल मा बच्चा लोक रिहर्सल करदन. एक दिन सबि अपण  अपण रोल अलग अलग ह्वेका हौल मा रटणा छ्या जां से कि वो अपण डाएलौग ठीक से बोली साकन . अब द्याखो कन अदाकारी होंद धौं !

  कपिल सिब्बल कु  रोल वळ - हाँ! ए.राजा से टू जी स्कैंडल मा चुंगटि बरोबर गलती ह्व़े च पण यू सौब बी.जे.पी. सरकारै गलती च . बी.जे.पी. गबर्मेंट टू जी इ नि लांद त किलै   देशौ  बरखबान इन ढंग से हुंद. बी.जे.पी. वळु तैं  देश मुंगन मोबाइल लाणो बान माफ़ी मंगण चयेंद . ना मोबाइल आन्द अर ना ही बिचारो ए.राजा जी छ्वटि-म्वटि   भुलमार मा  गल्ति करदा

बी.जे.पी. क रवि शंकर प्रसाद -  पत्रकारों ! महाराष्ट्रऔ भूतपूर्व  मुख्यमंत्री अशोक चौहाण  को भ्रष्टाचार अक्षम्य च  किलैकि अशोक चौहाण पर धारा अड़गम -बड़गम   सड़म से   लागू होन्दन. पत्रकार जी ! क्या पुछणा छ्न्वां ..? यदुरप्पा जी !  .. बिलकुल नै ..यदुरप्पा जी पाक साफ़ छन, वून क्या वूंका कै बी रिश्तेदार न  क्वी भ्रस्टाचारी काम नि कार . बी.जे.पी. क मतिमारी, बेवकूफ बणाओ, गल्ति ह्वाओ त जोर से  हल्ला कारो नियमों हिसाब  से यदुरप्पा जी अर वूंका रिश्तेदारूं  पर भ्रष्टाचार को क्वी केस इ नि बणदु

डा. अभिषेक संघवी - पत्रकार लोगो! यो ठीक च महाराष्ट्रऔ भूतपूर्व मुख्यमंत्री अशोक चौहाण  पर धारा अड़गम -बड़गम   क हिसाब से थ्वडा भौत केस बणदो च पण मी रवि शंकर प्रसाद जी तैं याद दिलाण चांदो बल  कोंग्रेस की उलजलूल, तिकड़मि-सिकड़मि, अणभर्वसि नियमों क हिसाब  से अशोक चौहाण से बड़ो इमानदार मुख्यमंत्री  भारत मा पैदा ह्वाई इ नी च.   

भारत कु शिक्षा मंत्री - आज अग्यारा नवम्बर (राष्ट्रीय  शिक्षा दिवस) सन २०१२  को  दिन इन्डियन एज्युकेसन का बान ग्रेट डे  च.  आज यीं बैठक मा भारत का जण्या-मण्या शिक्षा शास्त्री कट्ठा हुयाँ छन. त ख़ुशी क मौक़ा पर  मी महान भारत का   एज्युकेसन मिनिस्टर अनाउंस करदो बल हमारो  शिक्षा विभाग न सन अठारा सौ अट्ठावन (१८५८) का शिक्षा नियम कोड यक्स, यक्स, वाई --वाई, जेड -जेड  मा एक क्रांतिकारी, इंकलाबी तब्दीली कौरी आल. पैल  सन अठारा सौ अट्ठावन (१८५८  शिक्षा नियम कोड यक्स, यक्स, वाई --वाई, जेड -जेड को नाम छौ " क्लर्क बणाणो अणसाळ'. अब हमारि सरकार न ये नियम को नाम  धौरी आल," सीनियर (ठुलो )  क्लर्क बणाणौ निर्माण शाला" ।  हमन सन अठारा सौ अट्ठावन (१८५८) का शिक्षा नियम  " क्लर्क बणाणो अणसाळ'  क भितर एक बि शब्द नि बदलिन जां से कि राज्य अर केन्द्रीय सरकारूं प्रशासनिक  स्टाफ तैं क्वी परेशानी नि ह्वाऊ.  मी तैं पूरो भर्वस बल हमारी सरकारों ये क्रांतिकारी, रिवोल्युसनरी कदम से शिक्षा मा आमूल-चूल  परिवर्तन ह्वालू अर  इंडिया क नाम फोरेन कंट्रीज मा उज्ज्वल होलू. 

भारत कु वित्त मंत्री - पत्रकार  लोगो! आज मी सिरफ़ यू बुलण चांदो बल भारत मा    ये साल ज्वा बि प्रगति ह्वाई वो श्रीमती सोनिया गाँधी जी क दूर दृष्टि अर श्री राहुल गांधी जी क उत्तर प्रदेश मा अथक भ्रमण का बदौलत ह्वाई. अर जो भी मंहगाई बढ़णि च या भारत मा गरीबी बढणि च  वा सौब हमारि विरोधी पार्टीयूँ असहयोग को कारण होणु च .

पर्यावरण मंत्री - भाइयो अर बहिनों ! कु -गाँ - कखौ -गाँ मा विकास इलै नि होणु च किलैकि कु -गाँ - कखौ -गाँ  की जनता हमेशा से ही औद्योगिक विकास क बारा मा इ सुचणि रौंदि   अर एक रति भर बि पर्यावरण बचाणो बारा मा   नि सुचदी .

विकास मंत्री -  भाइयो अर बहिनों ! कु -गाँ - कखौ -गाँ मा विकास इलै नि होणु च किलैकि कु -गाँ - कखौ -गाँ  की जनता हमेशा ही पर्यावरण बचाणो बारा मा इ सुचणि रौंदि   अर एक रति भर बि औद्योगिक विकास क बारा नि सुचदी   

कृषि मंत्री -   उस्मानाबाद  का दगड्यों  (वोटर्स)  ! उस्मानाबाद महाराष्ट्र मा सबसे पिछड़ा क्षेत्र च. जब तलक उस्मानाबाद मा कृषि विकास नि होलू इखाक विकास असम्भव च. पण उस्मानाबाद मा  कृषि विकास इलै नि होणु च किलैकि खेल मंत्रालय न अबि तलक मोडर्न क्रिकेट ग्राउंड की अनुमति नि दे . जैदिन खेल मंत्रालय उस्मानाबाद मा मोडर्न क्रिकेट ग्राउंड की अनुमति दे द्यालों उस्मानाबाद जिलौ  भाग खुलि जाला .

विज्ञान अर तकनीक मंत्री - हम अब जून (चाँद) मा जाणै तैयारी करणा छंवां . मी प्रधान मंत्री को अहसान मंद छौं बल जौन शिक्षा मंत्रालयौ  अद्धा बजट काटिक ' मिसन  टु मून '  योजना तैं दे

एक राज्यौ मुख्य मंत्री - चीफ सेक्रेटरी जी !   क्या बुलणा छंवां ? बल  मिनिस्टरूं अर विधायकुं बंगला, गाड़ी-घ्वाड़ा , बिजली-पाणी, यात्रा भत्ता आदि क बजट छैइ मैना मा खतम ह्व़े गे? त इन कारो कि  ' अति गरीबी हटाओ योजना' क बजट कम कौरिक विधायकुं अर मन्त्र्युं मेंटेनेन्स बजट बढ़े द्याओ.

बुड्या गूणी  छ्वटा  छ्वटा गूणयूँ तैं सिखाणो छौ- हम गूणियूँ तैं  मनिखों बिटेन सीख लीण चयेंद कि कन अपण पूठो गू दसरौ  पूठ  पर घुसण चयेंद जां से अपण पूठ लोगूँ समणि साफ़ दिखयाउ !   


 Satire in Garhwali, Satire in Kumauni , Satire in Uttarakhandi and Satire in Himalayan Languges to be continued...

Copyright@ Bhishm Kukreti 


 

Bhishma Kukreti

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Great Garhwali Personalities

             Vaidraaj   Sohan Lal Kukreti: an Ayurvedik medicine practitioner  and Social worker

                         Bhishm Kukreti


              Ayurved had been our main medicinal practices in Indian and Garhwal too.  There had been tens of Kukreti who were Ayurvedik practitioners.
     Uttarakhandis are proud of Late Sohan lal Kukreti one of the great Ayurvedik practitioners of Himalayas.
            Sohan Lal Kukreti was born in 1907 in Kheda village, Udaypur, Pauri Garhwal. His father name was Rajvaidy  Keshva Nand Kukreti who was famous Vaid of his area. When Sohan lal was only eight years old he lost his father.
  His mother sent Sohan lal to her eldest daughter Mrs.  Shayma Devi at Bhogpur. Sohan lal Kukreti got primary education from Bhogpur, Dehradun.
  Sohan lal was sent to Lahore for getting Ayurvedik knowledge. Sohan Lal passed Ayurvedachaary degree from Dayanand Ayurvedik College, Lahore
  After completing post graduation education in Ayurved, Sohan returned to Dehradun and started his medical practice at  Jhanda Muhalla (1929). His clients were elite Indians and a sizable numbers of British. In 1940, Sohan lal established his clinic at Dispensary road, Dehradun.

 Sohan lal Kukreti used collect herbs and medicinal plants from jungles and used to do experimentations as well production.
  People from sahranpur, Bijnor, Haridwar, and Garhwal used to visit Sohan lal vaid ji for medical advices.
 Sohan Lal ji was the family doctor of owner of Darshan Tea estate.
 Sohan lal Kukreti founded a charitable medical trust in his mother’s memory. The trust serves the poor.
  Sohan lal ji was also famous for his social activities in Dehradun.
 Sohan la Ji had four sons
His youngest son , Col.  Madhav Kukreti is famous social worker.
  Sohan Lal Kukreti left this world in 1983.

Copyright@ Bhishm Kukreti

Bhishma Kukreti

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Grammar of Kumauni language
Grammar of Garhwali Language
Grammar of Languages of Uttarakhand
Grammar of Nepali Language
Grammar of Mid Himalayan Languages

                                         मध्य हिमालयी कुमाउंनी , गढ़वाली एवं नेपाली भाषा-व्याकरण का तुलनात्मक अध्ययन भाग -23

Comparative Comparative Study of Grammar of Kumauni, Garhwali Grammar and Nepali Grammar ,Grammar of Mid Himalayan Languages-Part-23       

                                         सम्पादन : भीष्म कुकरेती

                           Edited by Bhishm kukreti

                                               गढवाली में अव्यय

                                          १- सम्बन्ध बोधक

चुले (अपेक्षा ), ऐथर, अग्वाड़ी, बिगर, सी , दगडे, तरौं, बाना, का, कु, कि, रा, रु, रि 


                                         २- सम्मुचय बोधक

अ- संयोजक - अर, बि

ब-वियोजक- चा, निथर,

स- विरोध  दर्शक  - पर

द- परनाम दर्शक - यां/इलै

इ- कारण वाचक - किलैकि

फ- उदेश्य बाचक - ज्यान की

ज- संकेत बाचक- जु, त

ह- व्याख्या बाचक-   याने की, हैं कि ना

                                            ३- विस्मय  बोधक   

त्वा, द यार , चुछौ, यू: , हे राम दा,  हैं, ह्व़ा ,

                                                                   ४- अनुकारक  अव्यय

टळपळ  टळपळ  ; खल्तम; खीं-च्वी;   पुळपुळ पुळपुळ; सड़म , च्याँ                                                           


सन्दर्भ :


- अबोध बंधु बहुगुणा , १९६० , गढ़वाली व्याकरण की रूप रेखा, गढ़वाल साहित्य मंडल , दिल्ली ( Structure of Garhwali Grammar)
२- बाल कृष्ण बाल , स्ट्रक्चर ऑफ़ नेपाली ग्रैमर , मदन पुरूस्कार, पुस्तकालय , नेपाल (Structure of Nepali Grammar)

३- डा. भवानी दत्त उप्रेती , १९७६, कुमाउंनी भाषा अध्ययन, कुमाउंनी समिति, इलाहाबाद (Study of Kumauni Language Grammar)

४- रजनी कुकरेती, २०१०, गढ़वाली भाषा का व्याकरण, विनसर पब्लिशिंग कं. देहरादून ( Grammar of Garhwali Language)

५- कन्हयालाल डंड़रियाल , गढ़वाली शब्दकोश, २०११-२०१२ , शैलवाणी साप्ताहिक, कोटद्वार, में लम्बी लेखमाला (Garhwali- Hindi Dcitionary)

६- अरविन्द पुरोहित , बीना बेंजवाल , २००७, गढ़वाली -हिंदी शब्दकोश , विनसर प्रकाशन, देहरादून (Garhwali hindi Dictionary )

७- श्री एम्'एस. मेहता (मेरा पहाड़ ) से बातचीत

८- श्रीमती हीरा देवी नयाल (पालूड़ी, बेलधार , अल्मोड़ा) , मुंबई से कुमाउंनी शब्दों के बारे में बातचीत

९- श्रीमती शकुंतला देवी , अछ्ब, पन्द्र-बीस क्षेत्र, , नेपाल, नेपाली भाषा सम्बन्धित पूछताछ

१० - भूपति ढकाल , १९८७ , नेपाली व्याकरण को संक्षिप्त दिग्दर्शन , रत्न पुस्तक , भण्डार, नेपाल (Briefs on Nepali Grammar)

११- कृष्ण प्रसाद पराजुली , १९८४, राम्रो रचना , मीठो नेपाली, सहयोगी प्रेस, नेपाल (Nepali Grammar)

१२- चन्द्र मोहन रतूड़ी , गढ़वाली कवितावली ( सं. तारा दत्त गैरोला, प्र. विश्वम्बर दत्त चंदोला) , १९३४, १९८९

Comparative Study of Kumauni Grammar , Garhwali Grammar and Nepali Grammar (Grammar of , Mid Himalayan Languages ) to be continued ........

. @ मध्य हिमालयी भाषा संरक्षण समिति

Bhishma Kukreti

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                                            मध्य हिमालयी कुमाउंनी , गढ़वाली एवं नेपाली भाषा-व्याकरण का तुलनात्मक अध्ययन भाग -24


Comparative Comparative Study of Grammar of Kumauni, Garhwali Grammar and Nepali Grammar ,Grammar of Mid Himalayan Languages-Part-24


                                                                       सम्पादन : भीष्म कुकरेती
 

                                     

                                           Edited by Bhishm Kukreti


                                                                      नेपाली में अव्यय
                                                   

अनि, अथवा,कि, किन्तु, तर , यद्यपि, नकि, बा , परन्तु तैपनि  र, न .. न 

-----,

अधि, कि, भने, पछि,यदि

-----

                                            सम्बन्ध बोधक

अगाडि,  मा, सित

                                                           विस्मय  बोधक

अं, अहं  , ओहो, अबुई , लै छि, धतेरिका , अया




सन्दर्भ :

 

- अबोध बंधु बहुगुणा , १९६० , गढ़वाली व्याकरण की रूप रेखा, गढ़वाल साहित्य मंडल , दिल्ली ( Structure of Garhwali Grammar)
२- बाल कृष्ण बाल , स्ट्रक्चर ऑफ़ नेपाली ग्रैमर , मदन पुरूस्कार, पुस्तकालय , नेपाल (Structure of Nepali Grammar)

३- डा. भवानी दत्त उप्रेती , १९७६, कुमाउंनी भाषा अध्ययन, कुमाउंनी समिति, इलाहाबाद (Study of Kumauni Language Grammar)

४- रजनी कुकरेती, २०१०, गढ़वाली भाषा का व्याकरण, विनसर पब्लिशिंग कं. देहरादून ( Grammar of Garhwali Language)

५- कन्हयालाल डंड़रियाल , गढ़वाली शब्दकोश, २०११-२०१२ , शैलवाणी साप्ताहिक, कोटद्वार, में लम्बी लेखमाला (Garhwali- Hindi Dcitionary)

६- अरविन्द पुरोहित , बीना बेंजवाल , २००७, गढ़वाली -हिंदी शब्दकोश , विनसर प्रकाशन, देहरादून (Garhwali hindi Dictionary )

७- श्री एम्'एस. मेहता (मेरा पहाड़ ) से बातचीत

८- श्रीमती हीरा देवी नयाल (पालूड़ी, बेलधार , अल्मोड़ा) , मुंबई से कुमाउंनी शब्दों के बारे में बातचीत

९- श्रीमती शकुंतला देवी , अछ्ब, पन्द्र-बीस क्षेत्र, , नेपाल, नेपाली भाषा सम्बन्धित पूछताछ

१० - भूपति ढकाल , १९८७ , नेपाली व्याकरण को संक्षिप्त दिग्दर्शन , रत्न पुस्तक , भण्डार, नेपाल (Briefs on Nepali Grammar)

११- कृष्ण प्रसाद पराजुली , १९८४, राम्रो रचना , मीठो नेपाली, सहयोगी प्रेस, नेपाल (Nepali Grammar)

१२- चन्द्र मोहन रतूड़ी , गढ़वाली कवितावली ( सं. तारा दत्त गैरोला, प्र. विश्वम्बर दत्त चंदोला) , १९३४, १९८९

Comparative Study of Kumauni Grammar , Garhwali Grammar and Nepali Grammar (Grammar of , Mid Himalayan Languages ) to be continued ........

. @ मध्य हिमालयी भाषा संरक्षण समिति

 

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