Grammar of Kumauni language
Grammar of Garhwali Language
Grammar of Languages of Uttarakhand
Grammar of Nepali Language
Grammar of Mid Himalayan Languages
मध्य हिमालयी कुमाउंनी , गढ़वाली एवं नेपाली भाषा-व्याकरण का तुलनात्मक अध्ययन भाग -28
Comparative Comparative Study of Grammar of Kumauni, Garhwali Grammar and Nepali Grammar ,Grammar of Mid Himalayan Languages-Part-28
सम्पादन : भीष्म कुकरेती
Edited by Bhishm Kukreti
गढवाली में प्रत्यय
अबोध बंधु बहुगुणा ने गढ़वाली भाषा में दो प्रकार के प्रत्ययों की विवेचना की है- १-कृत प्रत्यय और २- तद्धित प्रत्यय.
जब कि रजनी कुकरेती ने तीन प्रकार के प्रत्ययों की विवेचना की है- १-क्रिया प्रत्यय २- कृत प्रत्यय व ३-तद्धित प्रत्यय , . व्याकरणीय दृष्टि व सही प्रयोग की दृष्टि से रजनी की विवेचना तर्क संगत है
१- क्रिया प्रत्यय
धातु में जब प्रत्यय लगते हैं तो क्रिया बज जाय उसे क्रिया प्रत्यय खते हैं
आणु -- खाणु
आणि - कहानी
आन्दु -- खांदु
अन्दन - खान्दन
ऐगि - खैगि
एगेन - खैगेन
कृत प्रत्यय
जब शब्द कोई संज्ञा , विशेषण या क्रिया विशेषण बनाते है तो वे शब्द कृत प्रत्यय कहलाते हैं
वळु, वळा/ वळी --खाणवळु, खाणवळा, घटवळी
अन्दरू/अन्दरा - खन्दरु/खंदरा
आलु/ऐलु - झगडालू/झगडैलु /बिगडैलु
सार - मिलनसार
एकी- पकी
दिदां - देदिदां
तैं - जैकितैं
गिरि - पटवरिगिरि
कुछ शब्द भाववाचक संज्ञा बनाते है जैसे
चढ़न से चढ़े (ढ़ +ऐ)
मुतण से मुताड़
गाण से गवय्या
रुण से रुताडु
जग्वळण से जग्वाळ
, हुणमांग, बरज़ात आदि
तद्धित प्रत्यय
वळु - घौरवळु
अरु - म्यारु
गुणु -दुगुणु
अङ्गत - पंगत
या - दुघर्या
अणि - सलाणि
याण - सड़याण
दां - तेरिदां
सन्दर्भ :
- अबोध बंधु बहुगुणा , १९६० , गढ़वाली व्याकरण की रूप रेखा, गढ़वाल साहित्य मंडल , दिल्ली ( Structure of Garhwali Grammar)
२- बाल कृष्ण बाल , स्ट्रक्चर ऑफ़ नेपाली ग्रैमर , मदन पुरूस्कार, पुस्तकालय , नेपाल (Structure of Nepali Grammar)
३- डा. भवानी दत्त उप्रेती , १९७६, कुमाउंनी भाषा अध्ययन, कुमाउंनी समिति, इलाहाबाद (Study of Kumauni Language Grammar)
४- रजनी कुकरेती, २०१०, गढ़वाली भाषा का व्याकरण, विनसर पब्लिशिंग कं. देहरादून ( Grammar of Garhwali Language)
५- कन्हयालाल डंड़रियाल , गढ़वाली शब्दकोश, २०११-२०१२ , शैलवाणी साप्ताहिक, कोटद्वार, में लम्बी लेखमाला (Garhwali- Hindi Dcitionary)
६- अरविन्द पुरोहित , बीना बेंजवाल , २००७, गढ़वाली -हिंदी शब्दकोश , विनसर प्रकाशन, देहरादून (Garhwali hindi Dictionary )
७- श्री एम्'एस. मेहता (मेरा पहाड़ ) से बातचीत
८- श्रीमती हीरा देवी नयाल (पालूड़ी, बेलधार , अल्मोड़ा) , मुंबई से कुमाउंनी शब्दों के बारे में बातचीत
९- श्रीमती शकुंतला देवी , अछ्ब, पन्द्र-बीस क्षेत्र, , नेपाल, नेपाली भाषा सम्बन्धित पूछताछ
१० - भूपति ढकाल , १९८७ , नेपाली व्याकरण को संक्षिप्त दिग्दर्शन , रत्न पुस्तक , भण्डार, नेपाल (Briefs on Nepali Grammar)
११- कृष्ण प्रसाद पराजुली , १९८४, राम्रो रचना , मीठो नेपाली, सहयोगी प्रेस, नेपाल (Nepali Grammar)
१२- चन्द्र मोहन रतूड़ी , गढ़वाली कवितावली ( सं. तारा दत्त गैरोला, प्र. विश्वम्बर दत्त चंदोला) , १९३४, १९८९
Comparative Study of Kumauni Grammar , Garhwali Grammar and Nepali Grammar (Grammar of , Mid Himalayan Languages ) to be continued ........
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