Author Topic: Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख  (Read 1484647 times)

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
          गढवाळीअ वरिष्ठ कवि अर समीक्षक वीरेंद्र पंवार औ  दगड भीष्म कुकरेतीअ  लिखाभेंट

भीषमौ   सवाल : आप कविता क्षेत्र मा किलै ऐन  ?

पंवारो जबाब-- मिन पहाड़ी जीवन का दुःख सुख अर संघर्ष बहोत्त नजिक बट्टी माँ -बैन्यु
दगड़ा  देख्यां भोग्यंअ  छन्न,इल्लै जबरी बी मी कुछ लिख्दु जादातर  वू
 कविता का रूपमा भैर औंद

 सवाल: आपकी कविता पर कौं कौं कवियुं प्रभाव च ?सवाल : आप कविता क्षेत्र मा किलै ऐन  ?

जबाब--असर गढ़वाली का तकरीब सब्बी वरिस्थ  कब्यु को च,पर मेरी कविता जादातर
गढ़वाली  का  स्वनामधन्य कवि अबोध बंधु  बहुगुणा अर नरेन्द्रसिंग नेगी से
 प्रभावित छन ! कविता संवेदनो  से जुडी  चीज छ,शैत मीतै कविता भौत  पसंद
छन ! कविता का छेत्र मा औणो  एक कारण ई बी व्हे सक्दो !
सवाल : आपका लेखन मा भौतिक वातावरण याने लिखणो  टेबल, खुर्सी, पेन,इकुलास, आदि को कथगा महत्व च ?

जबाब--कवी जादा मोल नि, पर एकांतमा लिखनो ज्यू बिंडी करदो ,इल्लै एकांतमा जादा
लिखेंदु बी छ! पर लिखना वास्ता हमेसा एकांत चयेनु  हो ,इन् जरुरी नि !

सवाल: आप पेन से लिख्दान या पेन्सिल से या कम्पुटर मा ? कन टाइप का कागज़आप तैं सूट करदन मतबल कनु कागज आप तैं कविता लिखण मा माफिक आन्दन?


 जबाब--जादातर पेन से लिखदो ! कम्पुटर मा अब्बी ढब्ब नि आई १मि सुफेद कागज़मा हल बिंडी लिखदो!

सवाल: आप अपण कविता तैं कथगा दें रिवीज करदां ?

जबाब--कबी कबी कविता एक ही बारमा  पूरी व्हेजंद !पर  हर बार इन्नु नि होन्द!कत्गाई बेर ता भौत दें  देखण  पोडदू !

 

सवाल: आपन कविता गढ़णो बान क्वी औपचारिक (formal ) प्रशिक्षण ल़े च ?

जबाब--कविता ल्यखना वास्ता कवी खास प्रसिक्षण नि ले !बस मनमा भाव औंदन अर लिख देंदो !


 सवाल : आपका लेखन मा भौतिक वातावरण याने लिखनो टेबल, खुर्सी, पेन, इकुलास, आदि को कथगा महत्व च ?


जबाब--लिखणअ  वास्ता  कुर्सी मेज की जादा जर्वत नि पड़दी ! पर हाँ एकुलांस
लिखणअ  वास्ता बहोत्त माफिक आन्द ! पर इन्नु बी नि च की हर बार लिखणअ
वास्ता एकुलांस ही खोजे जावु  ! क्वी बी रचना  कबि बी अर कखि बी उपज सकदी!
 
 सवाल: जब आप अपण डेस्क या टेबले से दूर रौंदा अर क्वी विषय दिमाग मा ऐ जाओ त क्या आप क्वी नॉट बुक दगड मा रखदां ?

जबाब--बिचार औंदा जांदा रान्दन !पर इन्नामा  भौत  मुस्किल होन्द ! कन्न क्या
 च  ? ! अब मोबाइल ऐगनी ,इल्लै कबी इन्नमा मोबाइल का मेसेजमा टाइप कर
देन्दु !


 सवाल: माना की कैबरी आप का दिमाग मा क्वी खास विचार ऐ जवान अर वै बगत आप उन विचारूं तैं लेखी नि सकद्वां त आप पर क्या बितदी ? अर फिर क्या करदा ?

जबाब-- इन्नी हालतमा स्वीली पीड़ा सी  बहोत्त बुरी  बीतदि ,पर करे क्या सकेंदो! बहोत्त बार वे अया  बिचार तै दुबारा याद कन्नै कोसिस करदो पर याद नि आई ता तबरी बी भौत इ  बुरी बीतदि !


सवाल: क्या कबि आपन कविता वर्कशॉप क बारा मा बि स्वाच? नई छिंवाळ तैं गढवाळी  कविता गढ़णो को प्रासिक्ष्ण बारा मा क्या हूण चएंद /


जबाब--प्रसिक्षण का बारमा सोची छैंच !एक बार सन २००५ मा इस्कूल स्तर पर  हमुन एक बाल
 कवि सम्मलेन शिक्षा विभाग का सहयोग से पौड़ीमा कर्वे छौ !मिन मैसुस करी
नै पीडी तै कविता  अर खास कैकि गढ़वाली गढ़वाली कवितअ  अर गढ़वाली समाज
 का सांस्कृतिक सरोकार  का बारामा   जानकारी दिए जाणी जरुरी छ ! जबरी तक
अपणा संस्कारू का बारामा पता नि होलू , क्वी  बी सार्थक रचना लिखे नि
सकेन्दन ! लिखेली बी ता वो  साफ़ बनावटी सी लग्दन ! इल्लै नै छ्वाल तै
रचना का वास्ता मूल वातावरण का बारामा बताये जानू जरुरी छ ! वे तै अपणा
 लोक से जुड्नो जरुरी छ !

 सवाल: हिंदी साहित्यिक आलोचना से आप की कवितौं या कवित्व पर क्या प्रभौ च .

जबाब-- भौत असर छ !असलमा जबरी तक हम लिखवार भैरै कविता अर भैरा साहित्य तै नि
 पड़ला तबरी तक हम लिखवार नया ट्रेंड का बारामा कंक्वे जाण सकदा ! समकालीन
लेखन का संपर्कमा रैनू जरुरी छ !
 सवाल: क्वी उदहारण ?

जबाब--मेरी एक कविता फ्यूली अर बुरांस, आन्तुरीमा पहाड़ जनि कविता   मीतै
 भौत  अछि लगदी !इन्नी हौरि  कविता बी छन्


 सवाल : आप का कवित्व जीवन मा रचनात्मक सुखो बि आई होलो त वै रचनात्मक सुखा तैं ख़तम करणों आपन क्या कौर ?

जबाब--रचनात्मक सूखो तै ख़तम कनम आपन(भीष्म कुकरेती जिन )लिखणो  भौत  प्रेरित करी ,यका वास्ता मी आपो भौत कर्जदार छू !

 सवाल: कविता घड़याण मा, गंठयाण मा , रिवाइज करण मा इकुलास की जरुरत आप तैं कथगा हूंद ?

जबाब--कविता रीवाइज  कन्नमा इन्नी कवी ख़ास जरुरत ता नि होंद पर एकुलांसमा रचना अछि तरो से लिखे जन्दन ,पर हर बार एकुलांस या भीड़ -भाड़ ही चयेनी हो इन्नु जरुरी नि होंदु


 सवाल-इकुलासी मनोगति से आपक काम (कार्यालय ) पर कथगा फ़रक पोडद

जबाब--फरक ता पोडदू चा,अछू बी अर बुरो बी. एकुलंसी मनोगति से अपना   काममा फरक नि पोडदू, काम अर कविता या रचनाकर्म तै अलग रखनो जरुरी चा,कामम़ा फरक पोड्ल्लू ता रोजी रोटी कंक्वे चालली !  लूण-तेलों जुगाड़ ता पैली कन्न पोडदू

 सवाल : गढवळी समालोचना से बि आपको कवित्व पर फ़रक पोडद ?
बिलकुल पोडदू चा  ! मी गढ़वाली म़ा होरी लिख्वार्वी  समालोचना करदो
!इल्लै मी जबरी बी अफु कविता लिख्दौ ता इन्नु ध्यान ता रैंदु चा की
 कविता  या क्वी बी रचना हो मी अछी से अछि  लिखने कोसिस करू ! रचना करदी
 बेर मी सिर्फ एक लिखवार रैन्दो! तबरी ता बस  रचना दिमागमा रैंदी !


सवाल: भारत मा गैर हिंदी भाषाओं वर्तमान काव्य की जानकारी बान आप क्या करदवां ? या, आप यां से बेफिक्र रौंदवां!

जबाब--गैर हिंदी भाषाओ का बारामा  बी  चित्वळ  रैण पड़दो  निथर मालूम बी नि
 होंदु की नया दौर का साहित्य मा क्या ट्रेंड चलन्णु छ !
 सवाल : अंग्रेजी मा वर्तमान काव्य की जानकारी बान क्या करदवां आप?

  जबाब-- कबी कबी इन्टरनेट पर देख्दो !
सवाल: भैर देसूं गैर अंगरेजी क वर्तमान साहित्य की जानकारी क बान क्या करदवां ?
 
 जबाब-- भौत  कुछ नि करदो ,पर कबी अनुवाद की क्वी  किताब वगैरा
मिलगी ता खरीद लेन्दो !

सवाल: आप को को शब्दकोश अपण दगड रख्दां ?

जबाब--गढ़वाली की  मेमू मास्टर जयलाल वर्मा की डिक्सनरी  छ ! अंग्रेजी की  छ !
 गढ़वाली का  लोक शब्दू को काम  जादातर मि पुराणी किताबु से लेन्दो !
 

 सवाल: आपन बचपन मा को को वाद्य यंत्र बजैन ?

  जबाब--  हारमोनियम पर अंगुला चलाई छा, पर बजानो नि आई


सवाल: आप संस्कृत , हिंदी, अंग्रेजी, भारतीय भाषाओँ क, होरी भासों  क कौं कौं   कवितौं क अनुवाद गढवाळी मा करण चैल्या ?

  जबाब--   मेतै दुष्यंत कुमार की ग़ज़ल भौत  पसंद छन् ,इल्लै छंद आलो तावूँको अनुवाद कण चांदो !
कुकरेती जी इथगा  बढ़िया बढ़िया सवाल पुछणअ वास्ता  आपको भौत भौत धन्यवाद !

Copyright@ Bhishm Kukreti

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
Grammar of Kumauni language
Grammar of Garhwali Language
Grammar of Languages of Uttarakhand
Grammar of Nepali Language
Grammar of Mid Himalayan Languages


                                मध्य हिमालयी कुमाउंनी , गढ़वाली एवं नेपाली भाषा-व्याकरण का तुलनात्मक अध्ययन भाग -31



Comparative Comparative Study of Grammar of Kumauni, Garhwali Grammar and Nepali Grammar ,Grammar of Mid Himalayan Languages-Part-31


                                                                  सम्पादन : भीष्म कुकरेती

                                       Edited by Bhishm Kukreti

 
 

                                                                         कुमाउंनी में क्रिया रूप    भाग -१                        

                                          Verbs in Kumauni Language Part - 2

 

१- मूल क्रियाएं :

रूप गठन अनुसार दो प्रकार की क्रियाएं होती हैं

१अ -- एकक्षरात्म्क  - अ/अक/क/कक/ गठनयुक्त होती हैं  औ, उठ, जा, पड़ , सो, हिट आदि

१ब- द्वयक्षरात्मक - अक, क युक्त होती हैं जैसे -अखर, पशक, खरोड़, कटोर

२- क्रियाओं का काल  पर निर्भरता  --- क्रियाएं काल पर निर्भर करती हैं

                                            २क- वर्तमान निश्चयार्थ

 वर्तमान निश्चयार्थ लिंग, पुरुष व वचन अनुसार रूप साधक प्रत्यय से जुड़ते हैं

 

-----------------------------------एकवचन -----------------------------बहुवचन ------------------

--------------------पुल्लिंग -------------स्त्रीलिंग------- ----------------पुल्लिंग --------------------स्त्रीलिंग

उत्तम पुरुष --------उ (छूं, जांछु) --------उ (छुं, जान्छु )------------ऊ (छूं , जानूं , कर्नूं )-------ऊं (छूं , जानूं , कर्नूं  )   

मध्यम पुरुष ------ऐ (छै , जांछै )-------ई(छै,जान्छे , जान्छी )-----आ(छौ, जांछा )----------आ/इऔ (छौ, जांछा ,जान्छियौ )

अन्यपुरुष --------अ (छ, जान्छ  )-------इ(जांछि ) ----------------अन्/आन(छन,जांनान)-----अन,इन (छन , जांछिन    )

 

                                                   २ ख- भूत  निश्चयार्थ

कुमाउनी में उत्तम पुरुष में लिंग भेद नही मिलता है     


-----------------------------------एकवचन -----------------------------बहुवचन ----------------------------

--------------------पुल्लिंग ----------------स्त्रीलिंग------- ----------------पुल्लिंग --------------------स्त्रीलिंग

 उत्तम पुरुष------ऊं (छ्यूं , गयूं  )------ऊं  (छ्यूं , गयूं )----------------ऊ (जयां , गयां )  ---------- ऊ (जयां , गयां )

मध्यम पुरुष ----ऐ (छे, आछे ) ----------ई (आछी )-----------------------आ (आछै ) ------------------इऔ (आछी )

अन्य पुरुष -----अ, ओ, (आछ, आथ्यौ )--अ, इ, ऐ, (आछि, )-----------आ, आन (छया, आयन, )------इन, अन, ऐन(गैन, ऐन्छिन)

कहीं कहीं थ' भी भूतकाल में मिलता है विशेषत: नेपाल हद्द पर

 

                                            २ ग - भविष्य  निश्चयार्थ   

 
-------------------------------एकवचन --------------------------------------------------बहुवचन -------------------

--------------------पुल्लिंग ----------------स्त्रीलिंग------- ----------------पुल्लिंग --------------------स्त्रीलिंग
 
 उत्तम पुरुष ----ओ (हून्लो ,कर्लो) - -------ओ (हून्लो ,कर्लो)-----------आ ( हून्ला, कर्ला)----------आ ( हून्ला, कर्ला)

मध्यम पुरुष ---- ऐ (होलै,जालै) ----------ई (होली, कर्ली )-------------आ (होला, जाला, )---------आ, इऔ, (जाला, आलियौ )
 
अन्य पुरुष ------ओ (जालो) --------------इ (जालि) ---------------------(जाला) ---------------------इन (होलिन,जालिन )

 

 

सन्दर्भ :

- अबोध बंधु बहुगुणा , १९६० , गढ़वाली व्याकरण की रूप रेखा, गढ़वाल साहित्य मंडल , दिल्ली ( Structure of Garhwali Grammar)
२- बाल कृष्ण बाल , स्ट्रक्चर ऑफ़ नेपाली ग्रैमर , मदन पुरूस्कार, पुस्तकालय , नेपाल (Structure of Nepali Grammar)

३- डा. भवानी दत्त उप्रेती , १९७६, कुमाउंनी भाषा अध्ययन, कुमाउंनी समिति, इलाहाबाद (Study of Kumauni Language Grammar)

४- रजनी कुकरेती, २०१०, गढ़वाली भाषा का व्याकरण, विनसर पब्लिशिंग कं. देहरादून ( Grammar of Garhwali Language)

५- कन्हयालाल डंड़रियाल , गढ़वाली शब्दकोश, २०११-२०१२ , शैलवाणी साप्ताहिक, कोटद्वार, में लम्बी लेखमाला (Garhwali- Hindi Dcitionary)

६- अरविन्द पुरोहित , बीना बेंजवाल , २००७, गढ़वाली -हिंदी शब्दकोश , विनसर प्रकाशन, देहरादून (Garhwali hindi Dictionary )

७- श्री एम्'एस. मेहता (मेरा पहाड़ ) से बातचीत

८- श्रीमती हीरा देवी नयाल (पालूड़ी, बेलधार , अल्मोड़ा) , मुंबई से कुमाउंनी शब्दों के बारे में बातचीत

९- श्रीमती शकुंतला देवी , अछ्ब, पन्द्र-बीस क्षेत्र, , नेपाल, नेपाली भाषा सम्बन्धित पूछताछ

१० - भूपति ढकाल , १९८७ , नेपाली व्याकरण को संक्षिप्त दिग्दर्शन , रत्न पुस्तक , भण्डार, नेपाल (Briefs on Nepali Grammar)

११- कृष्ण प्रसाद पराजुली , १९८४, राम्रो रचना , मीठो नेपाली, सहयोगी प्रेस, नेपाल (Nepali Grammar)

१२- चन्द्र मोहन रतूड़ी , गढ़वाली कवितावली ( सं. तारा दत्त गैरोला, प्र. विश्वम्बर दत्त चंदोला) , १९३४, १९८९

 

Comparative Study of Kumauni Grammar , Garhwali Grammar and Nepali Grammar (Grammar of , Mid Himalayan Languages ) to be continued ........

. @ मध्य हिमालयी भाषा संरक्षण समिति

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
Marketing Guru -13
Sales Guru-13
विपणन गुरु-13

                                                     जय कोनार्ड  लेविन्सन : जैन गुरिल्ला मार्केटिंग विचार बताई 

                                 Jay Conard Levinson : Guerrilla Marketing Guru



( Notes on , Marketing Gurus, Advertising Guru , Sales Guru, Internet Marketing Gurus, Consumer Loyalty Guru, Branding Guru, Market Research Guru, Marketing Strategy Guru , General Management Guru, , Management Thinkers and Bright Management Practices,Management Gurus, Marketing management Guru, Human Resource Development Management Guru, Quality Management Guru, Operation Management Guru, )
 

                                                  Bhishm Kukreti


                 जे लेविन्सन (१९३३) मनोविग्यानौ विद्यार्थी छौ अर विज्ञापन संसार मा आणो उपरान्त वैन एक शब्द या सिद्धांत विपणन दुनिया तैं दे. वु सिद्धांत च गुर्रिल्ला मार्केटिंग.

लेविन्सन छ्वटा -छ्वटा  बिजिनेस वालूँ तैं बड़ो काम की बात बथाण मा बड़ो प्रसिद्ध च. वैकी किताब ६० भाषाओं मा अनुदित ह्व़े गेन अर एम्.बी.ए क क्लासुं मा पढ़ये जान्दन.

मी ट बोदू हरेक छ्वटु व्यापार्युं तैं जे कोनार्ड लेविन्सन की किताब बंचण चयेंद.

वैन नौकरी खुज्याण वळ, कंसल्टेंटु सरीखों खुणि बि किताब लिखीं छन अर सौब कामौ  छन



                                            Key  Books by Jay Conard Levinson

 Jay conard published more than twenty books on Guerrilla marketing alone or with co-authors .A few are as



1- Guerrilla Marketing

2-Guerrilla Marketing for job hunters

3-Guerrilla Marketing for Non Profits

4- Guerrilla Marketing on the Internet

5-Start up Guide to Guerrilla Marketing

6-Guerrilla Marketing Success Secrets

7-Guerrilla Marketing for financial Advisors

8-Guerrilla Marketing Revolution

9-Guerrilla Advertising

9-Guerrilla Marketing for Consultants

10-Guerrilla Marketing Excellence

11-Guerrilla Marketing Attack

12-Guerrilla Marketing with Technology

13-Mastering Guerrilla Marketing

14-Guerrilla Marketing during tough times

15-Guerrilla Marketing Weapons


Notes on , Marketing Gurus, Advertising Guru , Sales Guru, Internet Marketing Gurus, Consumer Loyalty Guru, Branding Guru,Market Research Guru, General Management Guru, , Management Thinkers and Bright Management Practices,Management Gurus, Marketing management Guru, Human Resource Development Management Guru, Quality Management Guru, Operation Management Guru to be continued........

 

Copyright@ Bhishm Kukreti

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
Grammar of Kumauni language
Grammar of Garhwali Language
Grammar of Languages of Uttarakhand
Grammar of Nepali Language
Grammar of Mid Himalayan Languages

                              मध्य हिमालयी कुमाउंनी , गढ़वाली एवं नेपाली भाषा-व्याकरण का तुलनात्मक अध्ययन भाग -32



Comparative Comparative Study of Grammar of Kumauni, Garhwali Grammar and Nepali Grammar ,Grammar of Mid Himalayan Languages-Part-31

                                         सम्पादन : भीष्म कुकरेती

                           Edited by Bhishm Kukreti


                                                  कुमाउंनी में क्रिया रूप भाग -2     

                 

                                             Verbs in Kumauni Language Part - 2



                                          वर्तमान  आज्ञार्थक  क्रियाएं

इस वर्ग के प्रत्यय केवल मध्यम पुरुष में ही मिलते हैं और लिंग भेद नहीं मिलता. केवल ल़ा व वचन भेद मिलता है


-------------------------------------एक वचन -------------------------बहुवचन

-------------------------------जा, कर --------------------------------जा, करअ


                                     भविष्य आज्ञार्थक क्रियाएं

इस वर्ग में भी केवल मध्यम पुरुष में प्रत्यय लगता है और लिंग भेद नही मिलता

-------------------------------------एक वचन -------------------------बहुवचन

प्रत्यय -------------------------------ऐ -----------------------------------या

---------------------------------आए, जाए, करे ------------------------आया, कर्या , जाया



सन्दर्भ :

- अबोध बंधु बहुगुणा , १९६० , गढ़वाली व्याकरण की रूप रेखा, गढ़वाल साहित्य मंडल , दिल्ली ( Structure of Garhwali Grammar)
२- बाल कृष्ण बाल , स्ट्रक्चर ऑफ़ नेपाली ग्रैमर , मदन पुरूस्कार, पुस्तकालय , नेपाल (Structure of Nepali Grammar)

३- डा. भवानी दत्त उप्रेती , १९७६, कुमाउंनी भाषा अध्ययन, कुमाउंनी समिति, इलाहाबाद (Study of Kumauni Language Grammar)

४- रजनी कुकरेती, २०१०, गढ़वाली भाषा का व्याकरण, विनसर पब्लिशिंग कं. देहरादून ( Grammar of Garhwali Language)

५- कन्हयालाल डंड़रियाल , गढ़वाली शब्दकोश, २०११-२०१२ , शैलवाणी साप्ताहिक, कोटद्वार, में लम्बी लेखमाला (Garhwali- Hindi Dcitionary)

६- अरविन्द पुरोहित , बीना बेंजवाल , २००७, गढ़वाली -हिंदी शब्दकोश , विनसर प्रकाशन, देहरादून (Garhwali hindi Dictionary )

७- श्री एम्'एस. मेहता (मेरा पहाड़ ) से बातचीत

८- श्रीमती हीरा देवी नयाल (पालूड़ी, बेलधार , अल्मोड़ा) , मुंबई से कुमाउंनी शब्दों के बारे में बातचीत

९- श्रीमती शकुंतला देवी , अछ्ब, पन्द्र-बीस क्षेत्र, , नेपाल, नेपाली भाषा सम्बन्धित पूछताछ

१० - भूपति ढकाल , १९८७ , नेपाली व्याकरण को संक्षिप्त दिग्दर्शन , रत्न पुस्तक , भण्डार, नेपाल (Briefs on Nepali Grammar)

११- कृष्ण प्रसाद पराजुली , १९८४, राम्रो रचना , मीठो नेपाली, सहयोगी प्रेस, नेपाल (Nepali Grammar)

१२- चन्द्र मोहन रतूड़ी , गढ़वाली कवितावली ( सं. तारा दत्त गैरोला, प्र. विश्वम्बर दत्त चंदोला) , १९३४, १९८९

 

Comparative Study of Kumauni Grammar , Garhwali Grammar and Nepali Grammar (Grammar of , Mid Himalayan Languages ) to be continued ........

. @ मध्य हिमालयी भाषा संरक्षण समिति

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1

                   Journalism of That Time and Journalism of This Time

                                                 Bhishm Kukreti
                  Jay Prakash Panwar JP of ‘Paharnama’ fame wrote in a title ‘Media ka Chaltau Chunvai Vishleshan’ Yogwani weekly that the journalists were even not knowing the geographical diversities between Gangotri valley and Yamanotri valley and many journalists wrote a if both the valleys are one and same. A few journalists might have perceived Neti and Mana are in the same area as far as election is concerned because we commonly say Neeti-mana area without knowing that both areas are apart.
            I remember at the time of Jagmohan Singh Negi Ji verses Bhairv Datt Dhulia assembly election, a press reporter came to our area for taking the stock. He came on foot from Kotdwara and since, there was no hotel culture in Garhwal, and the said journalist had to take meal with a village family in each village. The journalist had to pay attention the villagers in a Baithwak where villagers used to come and the villagers used to share their views without any prejudice mind. The journalist had to talk with real people and had to experience the real problems or happiness of the people. In such circumstances, the story would be real because of experiencing was real. Touch with people by journalists was there in old time.
   Long back, I met Shri Chandola ji of Yugwani , Dehradun. Initially Chandola ji was a crime journalist with Times of India. Chandola Ji used to travel by bus or tram in getting news. In travelling, Chandola ji had to stand on bus stops and in those circumstances had to meet people everywhere.   
Now days, the advancement in technology had made our life easy including getting news by journalists. Now, any journalist sitting in Kochin, Kerala can talk with known personality of Piplakoti and can write about happenings of Piplakoti or Pandukeshwar with ease. The journalist of Jamnagar Gujarat can know few main points through emails from Garhwal.  But touch with human beings is missing in those findings.
  Take an example of journalism of modern time. Most of the newspapers and television media were reporting that Maharashtra Nav nirman Sena of raj Thakrey will harm his uncle’s Shiv Sena. However, the results were just opposite of journalists reporting from all media.  Those who watched yesterday’s television reporting about election held for Maharashtra Self governments. Most of the channels were making the outcome of Mumbai as the entrance for Shiv Sena in next assembly election in Maharashtra. However, most of the channels forgot to highlight that Congress won the most of Zila Parishad elections. The real high light was Congress-NCP winning   seats in most of the Zila parishad election and not Mumbai. Sensitization of news has becoming more popular than the reality.
 These days, journalists from cities come through motor bike or car in rural area. They talk with people in mandi type of places and by evening return to cities. 
               I know a journalist, who always watches the daily survey being done by news papers or television channels on Internet. The said journalist uses these surveys for improving his reporting. However, the human touch is missing there.
  Most of us are well experienced that journalists and poll forecasting by journalists failed miserably in past. The real cause of journalists failing in election forecasting is those journalists have less human touch with the people and thus failing in assessing   the real aspiration of people.

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
Grammar of Kumauni language
Grammar of Garhwali Language
Grammar of Languages of Uttarakhand
Grammar of Nepali Language
Grammar of Mid Himalayan Languages

                                     मध्य हिमालयी कुमाउंनी , गढ़वाली एवं नेपाली भाषा-व्याकरण का तुलनात्मक अध्ययन भाग -33


Comparative Comparative Study of Grammar of Kumauni, Garhwali Grammar and Nepali Grammar ,Grammar of Mid Himalayan Languages-Part-33


                                                                      सम्पादन : भीष्म कुकरेती


                                         Edited by Bhishm Kukreti

                                              कुमाउंनी में क्रिया रूप भाग -3                                                     

                                           Verbs in Kumauni Language Part - 3


                                                  कुमाउंनी में भूतकाल सम्भाव्नार्थ क्रियाएं

 इस वर्ग में दो प्रत्यय पाए जाते हैं न  और अन्य लिंग-वचनानुसार


---------------------------------एकवचन ---------------------------------------------बहुवचन ------------------

--------------------पुल्लिंग -------------स्त्रीलिंग------- ----------------पुल्लिंग --------------------स्त्रीलिंग

उत्तम पुरुष -----ऊं (जानूं )---------------ऊं (जानूं )----------------------औ (जानौ )-------------------- औ (जानौ )

माध्यम पुरुष ----ऐ, (जानै)--------------ई (जानी)------------------------आ (जाना )-------------------इयौ ( खानियौ )

अन्य पुरुष --------ओ (जानो)------------इ (जानि)------------------------आ (जाना) --------------------आ, इन (जानि , करनिन)   


                                                  कुमाउनी में वर्तमान प्रेरणार्थक क्रिया


इसमें मध्यम पुरुष में वचन भेदानुसार प्रत्यय जुड़ते हैं

पुल्लिंग /स्त्रीलिंग --------------------एकवचन -------------------------------------बहुवचन

---------------------------------------औ (हिटऔ,करौ  ) -------------------------आ ( हिटा , करा)


                                 कुमाउंनी में अभिप्राय द्योतनार्थ  क्रियाएं

कुमाउनी में अभिप्राय द्योतनार्थ क्रियाएं में केवल उत्तम व अन्य पुरुष के द्योत्कों पर प्रत्यय में मिलते हैं

पुल्लिंग/स्त्रीलिंग -------------------------एकवचन -----------------------बहुवचन

उत्तम पुरुष ---------------------------ऊं (जाऊं , हिटूं )-----------------नऊं (जानूं , हिटनूँ ०

अन्य पुरुष -----------------------------औ (जवौ , हिटौ )--------------ऊंन (जऊँन, हिटूंन  )


 


सन्दर्भ :

- अबोध बंधु बहुगुणा , १९६० , गढ़वाली व्याकरण की रूप रेखा, गढ़वाल साहित्य मंडल , दिल्ली ( Structure of Garhwali Grammar)
२- बाल कृष्ण बाल , स्ट्रक्चर ऑफ़ नेपाली ग्रैमर , मदन पुरूस्कार, पुस्तकालय , नेपाल (Structure of Nepali Grammar)

३- डा. भवानी दत्त उप्रेती , १९७६, कुमाउंनी भाषा अध्ययन, कुमाउंनी समिति, इलाहाबाद (Study of Kumauni Language Grammar)

४- रजनी कुकरेती, २०१०, गढ़वाली भाषा का व्याकरण, विनसर पब्लिशिंग कं. देहरादून ( Grammar of Garhwali Language)

५- कन्हयालाल डंड़रियाल , गढ़वाली शब्दकोश, २०११-२०१२ , शैलवाणी साप्ताहिक, कोटद्वार, में लम्बी लेखमाला (Garhwali- Hindi Dcitionary)

६- अरविन्द पुरोहित , बीना बेंजवाल , २००७, गढ़वाली -हिंदी शब्दकोश , विनसर प्रकाशन, देहरादून (Garhwali hindi Dictionary )

७- श्री एम्'एस. मेहता (मेरा पहाड़ ) से बातचीत

८- श्रीमती हीरा देवी नयाल (पालूड़ी, बेलधार , अल्मोड़ा) , मुंबई से कुमाउंनी शब्दों के बारे में बातचीत

९- श्रीमती शकुंतला देवी , अछ्ब, पन्द्र-बीस क्षेत्र, , नेपाल, नेपाली भाषा सम्बन्धित पूछताछ

१० - भूपति ढकाल , १९८७ , नेपाली व्याकरण को संक्षिप्त दिग्दर्शन , रत्न पुस्तक , भण्डार, नेपाल (Briefs on Nepali Grammar)

११- कृष्ण प्रसाद पराजुली , १९८४, राम्रो रचना , मीठो नेपाली, सहयोगी प्रेस, नेपाल (Nepali Grammar)

१२- चन्द्र मोहन रतूड़ी , गढ़वाली कवितावली ( सं. तारा दत्त गैरोला, प्र. विश्वम्बर दत्त चंदोला) , १९३४, १९८९

 

Comparative Study of Kumauni Grammar , Garhwali Grammar and Nepali Grammar (Grammar of , Mid Himalayan Languages ) to be continued ........

. @ मध्य हिमालयी भाषा संरक्षण समिति

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
Humor Climbed 
Fun Melts 
Wit  fell  down   
 हौंस इ हौंस मा


                  जब तेल लमडदु छयो अर  घ्यू मा तिड्वाळ पोड़दि  छे

(Humor in Garhwali, Kumauni Humor, Humor of Uttarakhand, Himalayan  Humor)

                                    भीष्म कुकरेती
                   
              बात क्वी जादा दिन पुराणि नी च भै! बस,  होली क्वी पैंतीस चालीस साल पुराणी .वैबरी जै गाँ

मा अखबार आन्दु छौ त माने जांद छौ यू गाँ मातबर या विद्वानु गाँ च. अब जै गाँ मा अखबार आन्दन वै गां तैं

आदि निवास्युं गाँ माने जांद किलैकि ये भै ! टी.वी,मोबाइल  नेट को जमानो मा अखबार ? 

   हाँ त हमर गां मा बि अखबार आंदो छौ ठेट डिल्ली बिटेन. (वैबेरी गढवाळ मा डिल्ली डिल्ली छे अब देहली ह्व़े गे ).

         पुरिया नैथाणी या  राजा सुदर्शनौ बगत पर क्वी  आदिम  डिल्ली बिटेन खुट्या खुटि चलदो थौ त पंचों ना सै सतों दिन गढ़वाळ पौंची जांद छौ.

पण हमर गाँ मा दैनिक हिन्दुस्तान डिल्ली बिटेन चौलिक ना हल्कारूं काँद्यूं अर   पोस्ट मैनूं थैलौं मा बैठिक, पोस्ट ओफिसुं मा बासो कौरिक

 पंद्रौं दिन मा हमर गाँ जसपुर पौन्च्दो छौ.

        हाँ त जब अखबार घन्ना दिदा क इक पौन्चदो छौ त पैल पड्यां लिख्यां बूड बुड्यों तैं पता चलदो छौ बल वो अछेकिक

सिनिएर सिटिजन छन ऊँ तै अखबार बंचणो पैलो हक मिल्दो छौ.  हम स्कुल्या  पढंदेरुं पांति  दुसर दिन आंदो छौ. मतबल हम सत्रा दिन

बासी-खूसी खबर तैं ताजा  खबर समजिक बांचदा छ्या.

       हमर स्कुल्या दगड्या छयो चंदा काका . चन्दा काका जरा  फेमिनिस्ट कार्यकर्ताओं  से जादा स्त्री उत्थान मा विश्वास करदो छौ त

चन्दा काका कम से कम सात आठ जनान्युं बीच अखबार बांचदो छौ. अर अखबार हिंदी मा ना  फटाफट गढवाळी अनुवाद कौरिक बांचदो छौ.

बाकी थाकी त ठीकि चलदो छौ पण जब  चंदा काका अनाज-बजार की खबर गढवाळी मा सुणान्दो छौ त जनानी इ ना हम स्कुल्या बि अचेते जांद छ्या. 

अनाज बजारों या अनाज मंड्यूँ  भाषा आज बि बिगळी/अलग अर  बिलखणि/ विलक्षणी भाषा च .

      जब चंदा काका खबर सुणान्दो  छौ बल 'कोटद्वार मंडी मा ग्यूं मा आग लगी ' त जादातर जनानी डिल्ली , बॉम्बे

(वै बगत लोग  बॉम्बे मा रौंदा छ्या अब मुंबई मा रौंदन)  मा नौकरी करदार  नौन्याळ या कजेयुं तैं  मा बैणयूँ   की गाळी दीण बिसे जांदा छयी 

बल जौन टैम पर  मन्यौडर  नि भ्याज त कखन टैम पर ग्यूं लीण छौ!  अब जब कोटद्वार मा ग्यूं  पर आग लगी गे त

 समजी ल्याओ ए साल ग्यूं जगा कोदो से काम चलाण पोड़ल.

         जब चंदा काका सूचना दीन्दो छौ बल ऋषिकेश मा उड़द उछली या उड़द उछंड्याई या  उड़द कुतकी  त सौब जनानी अर हम गस खै जांदा छ्या  .

बात बि सै च अरे हमर गां मा कैन बि उड़द तैं उछ्ल्दो/  उछंड्यान्द /कुतकी मारदो नि देखी छौ. हाँ सब्यून टेरूं तैं त  उड़द-गौथ-तोर  मा उछंड्यान्द

देखी छौ.    अर यू अखबार बुलणो बल रिसिकेश मा  उड़द उछली  या उड़द उछंड्याई या उड़द कुतकी  त सौब बुलण बिसे जांदा छ्या  बल

रिसिकेश मा दिवतौं बास नि रै गे अब त उख भुतुं राज ह्व़े गे तबी त रिसिकेश मा उड़द टेरूं जगा उछंड्याणा छन .

    जब चंदा काका सुणान्दो छौ बल लौंग, काळी मिर्च, आदो जन गरम मसाला मा गर्माहट आई त हम बि अर जनानी बि बोल्दा छ्या बल या बि क्वी खबर च

अरे गरम चीजुं  मा गर्माहट नि आली त बरफ मा गर्माहट आली क्या ? पण जब चंदा काका खबर सुणान्दो छौ बल  बम्बै मा लौंग, काळी मिर्च, आदो जन गरम मसाला

ठञडो ह्वे गेन त सौब अपण  नौन्याळऊँ , भतीजों या प्रिय  पति जी खुण हमसे चिट्ठी लिखाण बिसे जांदा छ्या बल हे गुंदरु बुबा जी !  ड्यार आन्द दैञ  बम्बै बिटेन ठञडो गरम  मसाला

बुकणो जरुरात नी च  हम इखी रिसेकेश या कोटद्वार-दुगड्ड  बिटेन गरम मसालों पर कांड लगै ल्योंला . अर कत्ति त लौंग, काळी मिर्च, आदो जन गरम मसाला

ठञडो ह्वे गेन की खबर सुणिक इ फटाक से अपण  ड्यार भाजी जांदा छया अर ड्यारम जु बि गरम मसाला  अर आदू होंद छौ वै तैं घाम मा सुकाणो  धौरी दीन्दा छ्या बल

कुज्याण पता नी  कखी बॉम्बे  बीमारी इख गां मा बि सौरी/फैली  गे होली त ?

     गढवाळ मा सन साठ क्या सहतर  तक बि लूण अर गुड़ो  किल्लत होंदी छे. बच्चों मंगन दूध खते ग्याई त मुआफ  छौ बल बाळ छन त गलती होई जांद.

पण कै तीन सालौ छ्वटो /छ्वटि से लूण-गुड़ खत्याई ना कि पैल त ह्यळि  गाडिक  गाडिक छ्वटो /छ्वटि क गाळियूँन पड़चतन  करे जांद छौ अर फिर

चमकताळ, फड़कताळ  से कार्यकर्म को समापन होंद छौ . जब चंदा काका ' उत्तरी भारत के सभी मंडियों में  नमक व  गुड़ गिरा ' क अनुवाद कौरिक खबर सुणान्दो छौ 

बल ' सौब जगा लूण-गूड़ भेळ उन्द पोड़ ' त गाँ मा भिलंकार क्या बड़जात पोड़ी जांदी छे कि साल भर तक क्वी बि लूण-गूड़ क्या द्याखल  !, सौब च्याँ च्याँ अपण

घौर अटकी जांदा छया अर  अपण ड्यारम बच्युं  लूण-गूड़  तैं  ढाईपर कूणयों मा लुकै/छिपै   दीन्दा छ्या .

        कपास या रुवां को  बि अपणो  महत्व होंद छौ.  एक दिन हिंदी मा समाचार  छौ, " कपास ऐंठने या  कपास टाईट होने से  सब जगह कपास पर आग लगी " त चंदा काका अपण हिसाब से बोली "

कपास/रुवां मा ज्यूड़ जन  ऐंठन या कपास कडक ह्व़े  गे छे अर यां से सौब जगा कपास पर आग लगाये  गे ." अर जनि बिबरट्या ददिन या खबर सुणि कि उखमी

बैठयूँ अपण सिमसिमु कजै  तैं फणट्योन  पीटी दे अर ब्वाल  '  मी छै मैना बिटेन बुलणो छयाई बल गद्दा -खंतुड़ बणाणो दुगड जाओ,  दुगड जाओ

 अब बेटी क ब्यौ कुणि  जु गद्दा खंतुड़  बणाण छौ, अब   रूंवां जगा तुमारि  हडकी भरण ?" 

          जब चन्दा काका खबर सुणान्दो छौ बल 'तेल लमडि ' त सौब फैसला करदा छ्या बल  लयाक  खेती बन्द नि होण चयेंद अर कुलड़ो  मरम्मत चौड़ होण चयेंद.

सब्यूँ क  मनण छौ हम तैं मैदानों (माल)  लमड्यूँ तेल  नि खाण चयेंद. लमड्यूँ तेल माने भूतूं भिड़यूँ  तेल इलै हरेक तैं  लया क खेती पर जादा ध्यान दीण चयेंद  .

    एक खबर से क्वी बि चिंतित नि होंदा छा अर वा न्यूज छे ' घ्यू मा तिडवाळ  पोड़ ' , सब्यूँ तैं पता छौ बल घ्यू मा तिड़वाळ तबी पोड़दि जब घी जमाण वळी

तैं घी जमाण नि आन्द . सबी एकमत ह्व़े जांदा छ्या बल घ्यू जमाणो मामला मा गाँ की जननी शहरी जनान्यूँ से होशियार छन . उख घी मा तिड़वाळ पोड़नि

इ रौंदी अर हमर गाँ मा कुसवर्या से कुसवर्या जनानी बि जाणदि च बल घ्यू पर तिड़वाळ पड़ण से कनो बचण.
 
 इनि ' तेल कडक , गुड़ पिगळ, चीनी तीखी,  धणिया बैठ अर जीरो उठ, इथगा ह्यूं पोड़ पण कम विकवाली से  से ऊन ठंडी ; लोखर नरम अर सोना गरम,

चाँदी खसखसो अर पीतळ  भसभसो, ' जन खबरूं  से पैल सब्युं पुटकुन्द च्याळ पोडि जांदा छ्या .पण अब बाजार की भाषा सब्युं समज मा ऐ गे

अब गढ़वाळ मा जनान्युंक कोटद्वार आण-जाण वळा बस ड्राईबरूं तैं हिदैत होंद बल  जै दिन न्यूज ह्वाओ कि  ग्युं लमडिन त ग्यूं लै जयां भैरों .

जै दिन खबर ह्वाओ बल तेल मा चमक कम त द्वी कंटर  तेल लै जयां अर जै दिन खबर ह्वाओ कि चीनी तीखी त पगाळ मा बि चिनि नि खरेदण.     

   , 
 
 Humor in Garhwali, Kumauni Humor, Humor of Uttarakhand, Himalayan Humor to be continued......

Copyright@ Bhishm Kukreti

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
Grammar of Kumauni language
Grammar of Garhwali Language
Grammar of Languages of Uttarakhand
Grammar of Nepali Language
Grammar of Mid Himalayan Languages

                मध्य हिमालयी कुमाउंनी , गढ़वाली एवं नेपाली भाषा-व्याकरण का तुलनात्मक अध्ययन भाग -34

Comparative Comparative Study of Grammar of Kumauni, Garhwali Grammar and Nepali Grammar ,Grammar of Mid Himalayan Languages-Part-34

                                   सम्पादन : भीष्म कुकरेती


                         Edited by Bhishm Kukreti
 
                                  कुमाउंनी में क्रिया रूप भाग -4     


                                 Verbs in Kumauni Language Part - 4

                       

                                         कुमाउंनी में क्रिया के क्रिदंतीय  रूप

 विभिन्न कालों में कुमाउंनी में क्रिया कृदंत रूप भिन्न भीं होते हैं

 

धातु  - हो

कृदंत भेद -------------------------------प्रत्यय ------------------------उदहारण

कर्त्रि वाचक संज्ञा ---------------------एर -----------------------------हुनेर

वर्तमान कालिक कृदंत ----------------ए------------------------- -----हुन्ने

भूतकालिक कृदंत ----------------------ओ ---------------------------भयो /भौ

पूर्वकालिक कृदंत ----------------------ए/बेर  -----------------------------ह्व़े/ह्व़े बेर

तात्कालिक कृदंत ---------------------ऐ ---------------------------------(हुनै ) --------होते ही

पूर्ण क्रिया द्योत्तक कृदंत -----------इना ------------------------------होईना

अपूर्ण क्रिया द्योत्तक कृदंत ---------ऐ ---------------------------------हुनै -----------होते हुए

 

                                कुमाउंनी में   संदिग्ध भूतकाल

संदिग्ध भूतकाल दो प्रत्ययों का संयोग होता है , दोनों लिंगों में समान होता है और संयुक्त क्रियाओं में लिंग नर्धारण प्रथम क्रिया करती है

धौ- हो

प्रत्यय ---------------------------उदहारण

न+ओ----------------------------हुनो (होती होगी/होता होगा )

-----------------------------------खानि हुनो

ऊन -----------------------------खाना हनून

----------------------------------खानि हनून

 

                        कुमाउंनी में असम्बन्ध क्रिया रूप

कुछ क्रियाओं में विभिन्न कलों में क्रिया रूप अम्सब्न्ध मिलते हैं

पुरुष ---------------वर्तमानं ------------------भविष्य ---------------भूय काल

उत्तम ------------जान्छु ---------------------जून्लो----------------गयुं/गोयुं

मद्ध्य्म -----------जांछै ---------------------जालै -----------------ग्योछे   

अन्य ---------------जान्छ -------------------जालो ----------------ग्योछ

 

                         कुमाउंनी में निरन्तरार्थ  क्रिया रूप

 कुमाउंनी में निरन्तरार्थ में अनेक प्रत्यय पाए जाते हैं

मर, मरी , न्न, ण

                            कुमाउंनी में वर्तमान निरन्तरार्थ क्रिया रूप 

धातु जा

----------------------पुल्लिंग -----------------------स्त्रीलिंग -------------------

--------एकवचन -----------बहुवचन -------------एकवचन -------------बहुवचन

१- जान्मछर्य ---------------जान्मर्यान-----------जान्मछर्य-------------जान्मछर्न 

२- जान्मर्योछ ----------------जान्मरयान --------जान्मरैछ-------------- जान्मरैछन

३- जान्मर्योछ---------------- जान्मरयान----------जान्मरैछ------------जान्मरैछन

४-जान्नौछ --------------------जान्न्यान -----------जान्नैछ ------------- जान्नैछ

५- जाणौछ----------------------जाणइ  --------------जाणै------------------  जाणैछन

                              कुमाउंनी में अपूर्ण भूत क्रिया/ भूत निरन्तरार्थ

धातु- जा

  ---------------------पुल्लिंग -----------------------स्त्रीलिंग -------------------
 --------एकवचन -----------बहुवचन -------------एकवचन -------------बहुवचन

 1- जान्मर्छयो --------------जान्मर्छया-----------जान्मर्छि------------------ जान्मर्छिन 

२- जान्मरेछ्या ---------------जान्मरेछ्या---------जान्म्रैछि---------------- जान्म्रैछिन   

३- जान्मरेछयो---------------- जान्मरेछ्या--------जान्म्रैछि---------------- जान्म्रैछिन   

४- जन्नेछयो ----------------जाणेछ्या ----------जान्नैछि-------------------- जान्नैछिन   

५- जाणेछियो------------------- जाणेछ्या ----------जाणैछि -------------------जाणैछिन

                   कुमाउंनी भविष्य निश्चयार्थ प्रत्यय के योग से बनी क्रियाएं


धातु- जा

---------------------पुल्लिंग -----------------------स्त्रीलिंग -------------------
--------एकवचन -----------बहुवचन -------------एकवचन -------------बहुवचन 

१- जान्मरौलो----------------जान्मरौला------------जान्मरौलि----------  जान्मरौलिन

२-जान्मरौलो----------------जान्मरौला------------जान्मरौलि---------- जान्मरौलिन

३--जान्नौलो ------------------जान्नौला------------- जान्नौलि------------ जान्नौलिन

४- जाणौलो--------------------  जाणौला-------------   जाणौलि-----------जाणौलिन 

इन सभी में आशय एक ही है

 

                 कुमाउंनी में क्रिया साधक प्रत्यय तालिका

 

                कुमाउंनी में वर्तमान काल क्रिया साधक प्रत्यय तालिका

पुरुष  ---------------- एकवचन --------------------------------बहुवचन -------------

--------------पुल्लिंग----------------स्त्रीलिंग ----------------पुल्लिंग --------------स्त्रीलिंग

उत्तम ------ -उ ------------------ -उ ------------------ -ऊं-------------------- - ऊं

मद्ध्य्म ------ -ऐ -----------------ई -------------------- -आ ---------------------- आ, इऔ

अन्य ----------- - अ --------------इ --------------------अं, आन, -----------------अन-इन   

                    कुमाउंनी में भूतकाल क्रिया साधक प्रत्यय तालिका

 
पुरुष ---------------- एकवचन --------------------------------बहुवचन -------------

--------------पुल्लिंग----------------स्त्रीलिंग ----------------पुल्लिंग --------------स्त्रीलिंग

 उत्तम -----ऊं ------------------------ऊं ----------------आँ-----------------------आँ

मध्यम ------ए, ऐ, -------------------ई, ऐ, -------------आ , -------------------आ, इऔ

अन्य ---------ओ , -------------------अ, इ , ------------आ, आँ, --------------इन, अन , न

 

              कुमाउंनी में भविष्य काल  क्रिया साधक प्रत्यय तालिका

 
पुरुष ---------------- एकवचन --------------------------------बहुवचन -------------

 --------------पुल्लिंग----------------स्त्रीलिंग ----------------पुल्लिंग --------------स्त्रीलिंग

 उत्तम --------ओ --------------------ओ -----------------------आ, -----------------आ

मध्यम --------ऐ, --------------------ई, ------------------------आ, ---------------आ, इऔ

अन्य -----------ओ ------------------इ --------------------------आ -----------------इन

भूतकाल में कुछ स्थानों में अन्त्य प्रत्यय में य मिलता है -छयो, गयो

       

                           कुमाउंनी में वर्तमान काल में काल द्योतक रूप तत्व 'छ'

कुमाउंनी में वर्तमान काल में काल द्योतक रूप तत्व 'छ' है जिसका एक रूप -न भी है जो

वर्तमान काल उत्तम पुरुष और अन्य पुरुष दोनों लिंगों व दोनों वचनों में आता है

जान्छु - जानूं

जान्छ -जानान

स्थान भेद के कारण कहीं न ण के रूप में प्रयुक्त होता   है 

अन्य प्रत्यय -----

उ --- एकवचन उत्तम पुरुष सूचक व दोनों लिंगों में मिलता है - जान्छु. बहुवचन में  में ऊं - जानूं

ऐ---मध्यम पुरुष, एकवचन पुल्लिंग द्योतक -- जांछै

ई--- मध्यम पुरुष , एकवचन व स्त्रीलिंग द्योतक

आ--- मध्यम पुरुष बहुवचन पुल्लिंग द्योतक , स्त्रीलिंग में इऔ भी जाछियौ

अ--- अन्यपुरुष, एकवचन, पुल्लिंग द्योतक --जान्छ

इ--- अन्यपुरुष, एकवचन, स्त्रीलिंग द्योतक --- जान्छि
 
आन/अन ---  अन्यपुरुष , भुचन, पुल्लिंग द्योतक -- जानान

इन --अन्यपुरुष बहुवचन, स्त्रीलिंग द्योतक

                    भूतकाल में काल  द्योतक प्रत्यय 

भूतकाल द्योतक प्रमुख तत्व छ' है जो '  पुरुष/लिंग व वचन के हिसाब से बदलता रहता है

ऊं- उत्तम पुरुष , एकवचन तथा दोनों लिंगो में रहता है ---आयूँ

आं --  उत्तम पुरुष वहुवचन दोनों लिंगों में मिलता है --आयां

ऐ- मध्यम पुरुष, एकवचन, पुल्लिंग --आछै ९य ए -- आछे )

ई ---मध्यम पुरुष, एक वचन, स्त्रीलिंग -- आछी

आ--- मध्यम पुरुष, एकवचन, दनो लिंग -----आछा  (कभी कभी आएं या इऔ )

ओ-- अन्यपुरुष एकवचन, पुल्लिंग द्योतक -- ग्यो

अ--- अन्य पुरुष, एकवचन , पुरुष व स्त्रीलिंग में --- आछ (ध्वनि में बदलाव होता है)

इ- अन्य पुरुष, एकवचन, स्त्रीलिंग --आछि . एक रूप  ऐ भी है ---गए

आन -----अन्य पुरुष बहुवचन पुल्लिंग ----आयान . एक रूप आ भी है --आया

इन ----अन्य पुरुष वहुवचन, स्त्रीलिंग ----- गैछिन. कभी कभी अन एक रूप है ---ऐछन
 
 

                  कुमाउंनी में     भविष्य काल   में काल द्योतक प्रत्यय     

 भविष्य काल में काल द्योतक प्रत्यय 'ल' है   

'ल' के साथ पुरुष लिंग-वचन द्योतक प्रत्यय जुड़ते हैं

उत्तम पुरुष में लिंग भेद नही है

ओ --- उत्तम पुरुष, एक वचन  दोनों लिंगों में  ल के बाद आ जुड़ता है --- जूँलो 

आ-- उत्तम पुरुष एक वचन बहुवचन दोनों लिंग में ओ जुड़ता है --जूंला

ऐ---- मध्यम पुरुष, एकवचन, पुल्लिंग --- जालै   
 
ई---- मध्यम पुरुष, एकवचन, स्त्रीलिंग --- जाली

आ--- मध्यम पुरुष, बहुवचन, दोनों  लिंग -- जाला . कभी कभी मध्यम पुरुष, बहुवचन, स्त्रीलिंग में इऔ लगता है ---जालियौ

ओ---- अन्यपुरुष, एकवचन, पुल्लिंग --जालो

आ- अन्यपुरुष, बहुवचन, पुल्लिंग  ---जाला

इ--- अन्य पुरुष, एकवचन, स्त्रीलिंग , ---जालि

इन -- अन्यपुरुष, बहुवचन, स्त्रीलिंग ---जालिन 

             कुमाउंनी में अनुनासिक क्रियाएं

जान्छु /जांछै /जान्छि / जूंला

किन्तु कुछ क्रियाओं में यह नही मिलता है - ग्योछै , जालै   

                            'छ' का क्रियाओं में  महत्वपूर्ण स्थान

भविष्यकाल को छोड़ दोनों काल में 'छ' का महत्वपूर्ण स्थान है . 'छ' प्रमुख व सहायक क्रियाओं के रूप

में प्रयोग होता है.

 

 -------------------------एक वचन ---------------------------------------बहुवचन -------------

काल-------- पुरुष -----पुल्लिंग ------------स्त्रीलिंग ------------------पुल्लिंग ------------------स्त्रीलिंग

वर्तमान ----उत्तम -----छूं--------------------छूं ------------------------छूं  --------------------छूं

वर्तमान ----मध्यम ----छै ------------------छै -------------------------छौ ----------------------छौ

वर्तमान -----अन्य ------छ ------------------छ-------------------------छन ----------------------छन

भूत --------उत्तम -----छ्यूं ---------------छ्यूं ------------------------छ्याँ --------------------छ्याँ

भूत --------मध्यम ----- छे ---------------छी--------------------------छ्या/छिया--------------- छ्या/छिया

भूत --------अन्य -------छयो -----------छि ---------------------------छ्या -----------------------छिन


 
 


सन्दर्भ :
 
- अबोध बंधु बहुगुणा , १९६० , गढ़वाली व्याकरण की रूप रेखा, गढ़वाल साहित्य मंडल , दिल्ली ( Structure of Garhwali Grammar)
 २- बाल कृष्ण बाल , स्ट्रक्चर ऑफ़ नेपाली ग्रैमर , मदन पुरूस्कार, पुस्तकालय , नेपाल (Structure of Nepali Grammar)

३- डा. भवानी दत्त उप्रेती , १९७६, कुमाउंनी भाषा अध्ययन, कुमाउंनी समिति, इलाहाबाद (Study of Kumauni Language Grammar)

४- रजनी कुकरेती, २०१०, गढ़वाली भाषा का व्याकरण, विनसर पब्लिशिंग कं. देहरादून ( Grammar of Garhwali Language)

५- कन्हयालाल डंड़रियाल , गढ़वाली शब्दकोश, २०११-२०१२ , शैलवाणी साप्ताहिक, कोटद्वार, में लम्बी लेखमाला (Garhwali- Hindi Dcitionary)

६- अरविन्द पुरोहित , बीना बेंजवाल , २००७, गढ़वाली -हिंदी शब्दकोश , विनसर प्रकाशन, देहरादून (Garhwali hindi Dictionary )

७- श्री एम्'एस. मेहता (मेरा पहाड़ ) से बातचीत

८- श्रीमती हीरा देवी नयाल (पालूड़ी, बेलधार , अल्मोड़ा) , मुंबई से कुमाउंनी शब्दों के बारे में बातचीत

९- श्रीमती शकुंतला देवी , अछ्ब, पन्द्र-बीस क्षेत्र, , नेपाल, नेपाली भाषा सम्बन्धित पूछताछ

१० - भूपति ढकाल , १९८७ , नेपाली व्याकरण को संक्षिप्त दिग्दर्शन , रत्न पुस्तक , भण्डार, नेपाल (Briefs on Nepali Grammar)

११- कृष्ण प्रसाद पराजुली , १९८४, राम्रो रचना , मीठो नेपाली, सहयोगी प्रेस, नेपाल (Nepali Grammar)

१२- चन्द्र मोहन रतूड़ी , गढ़वाली कवितावली ( सं. तारा दत्त गैरोला, प्र. विश्वम्बर दत्त चंदोला) , १९३४, १९८९

 

Comparative Study of Kumauni Grammar , Garhwali Grammar and Nepali Grammar (Grammar of , Mid Himalayan Languages ) to be continued ........

. @ मध्य हिमालयी भाषा संरक्षण समिति

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
Marketing Guru -13
Sales Guru-13
विपणन गुरु-13

                                        एडवार्ड डे बोनो :रचनाधर्मिता मा अपरोक्ष विचारूं अह्मियातौ  धड़यौ                                  

                            Edwar de Bono : Coiner of Lateral Thinking 



( Notes on , Marketing Gurus, Advertising Guru , Sales Guru, Internet Marketing Gurus, Consumer Loyalty Guru, Branding Guru, Market Research Guru, Marketing Strategy Guru , General Management Guru, , Management Thinkers and Bright Management Practices,Management Gurus, Marketing management Guru, Human Resource Development Management Guru, Quality Management Guru, Operation Management Guru, )

                                                             Bhishm Kukreti

              एडवर्ड डे बोनो (१९३३) क्वी मार्केटिंग या विपनण  को विशेषग्य नी छ बलकण मा एक डाक्टर च. . पण वैको काम रचनाधर्मिता मा अनोखा च, बोनो न एक शब्द तैं जन्म दे अर वो शब्द च लेटरल थिंकिंग याने कि रचना धर्मिता या क्रिएटिव थिंकिंग मा कुछ हौर ढंग से सुच ण जरोरी च   .लेटरल थिंकिंग मा बोनो क तौळो खास सिद्धांत छन -

१- इन विचारों तैं जन्म द्याओ बल जो पुराणा विचार शैली या थकीं विचार शैली या थमीं विचार शैली तैं बदल  द्याओ 

२-इन साधनों पर जोरों से ध्यान द्याओ जो नया विचारूं तैं लाण मा सहायक ह्वावन

३- इन उपकरणु या साधानू तैं जन्म द्याओ जु विचारों से जादा कीमती  (Value ) बात लावन/दयावान

४-इन उपकरणो तैं बढावा द्याओ जो वास्तविक समस्याओं, संसाधन अर सहयोग तैं सही ढंग से बतावन

५- रचनाधर्मिता मा गैर-पारंपरिक ढंग से सुचण जरूरी च

अब तलक एडवर्ड डे बोनो क बयासी (८२) किताब छपी गेन जौंक अनुवाद इकतालीस भाषाओं मा हुयुं च                                                                                                                                                               
                              Key Books by Edward de Bono



1- The Use of Lateral Thinking

2-New Thinking

3-Lateral Thinking

4-Six Thinking Hats

5-hand Book for Positive Revolution

7-Simplicity



Notes on , Marketing Gurus, Advertising Guru , Sales Guru, Internet Marketing Gurus, Consumer Loyalty Guru, Branding Guru,Market Research Guru, General Management Guru, , Management Thinkers and Bright Management Practices,Management Gurus, Marketing management Guru, Human Resource Development Management Guru, Quality Management Guru, Operation Management Guru to be continued........

 

Copyright@ Bhishm Kukreti

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1

Marketing Guru -14

Sales Guru-14

विपणन गुरु-14

                                  जौन केन्नेथ गालब्रेथ ;महान अर्थ शास्त्री       

                                John Kenneth Galbrayth : Profilic Economic Theoritician



( Notes on , Marketing Gurus, Advertising Guru , Sales Guru, Internet Marketing Gurus, Consumer Loyalty Guru, Branding Guru, Market Research Guru, Marketing Strategy Guru , General Management Guru, , Management Thinkers and Bright Management Practices,Management Gurus, Marketing management Guru, Human Resource Development Management Guru, Quality Management Guru, Operation Management Guru, )


                                   Bhishm Kukreti

जौन केन्नेथ गालब्रेथ (१९०८-२००६) बीसवीं सदी को महानतम अर्थशास्त्र्युं  मदे एक छौ  . वैन अड़तालीसऔ करीब  किताब अर हजार से बिंडी लेख लेखिन

 जौन केन्नेथ गालब्रेथ क अर्थ शास्त्राऊ सिद्धांत विपणनकार्युं  खुण भौत मददगार होन्दन. बगैर अर्थ शास्त्र समज्याँ विपणन करे इ नि स्क्यान्द .

जौन केन्नेथ गालब्रेथ औ बुलण छौ बल असलियत मा बड़ा बिजिनेस घराना/कम्पनी  की बाजारी -शक्ति ही ग्राह्कुं क मानसिकता बणान्दन ना कि
 
 ग्राहक अर बडी कम्पन्यूँ  से असल मा ग्राहकुं स्वतन्त्रता खतम होंदी

जौन केन्नेथ गालब्रेथ मनण छौ बल बडी क्म्पंयुन कि तागत से महंगाई बढ़द  ना कि कम .
 
जौन केन्नेथ गालब्रेथ को मनण छौ बल जब जादा गरीबी छे त अर्थशास्त्र का पारम्परिक  नियम ठीक छया  पन अब नया ही नियमों उतपति होली

 
 
                                 Key  Books by John Kenneth Galbrayth ot of 48 books

1-The Afluent Society

2-The Industrial Satate

3-The Age of Uncertainity

4-The Culture of Contentment




Notes on , Marketing Gurus, Advertising Guru , Sales Guru, Internet Marketing Gurus, Consumer Loyalty Guru, Branding Guru,Market Research Guru, General Management Guru, , Management Thinkers and Bright Management Practices,Management Gurus, Marketing management Guru, Human Resource Development Management Guru, Quality Management Guru, Operation Management Guru to be continued........


 

Copyright@ Bhishm Kukreti

 

Sitemap 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22