Grammar of Kumauni language
Grammar of Garhwali Language
Grammar of Languages of Uttarakhand
Grammar of Nepali Language
Grammar of Mid Himalayan Languages
मध्य हिमालयी कुमाउंनी , गढ़वाली एवं नेपाली भाषा-व्याकरण का तुलनात्मक अध्ययन भाग -35
Comparative Comparative Study of Grammar of Kumauni, Garhwali Grammar and Nepali Grammar ,Grammar of Mid Himalayan Languages-Part-35
सम्पादन : भीष्म कुकरेती
Edited by Bhishm Kukreti
गढ़वाली में क्रिया विधान - भाग -१
Verbs Uses in Garhwali Language - Part -1
अबोध बंधु बहुगुणा ने गढ़वाली क्रिया विधान का बहुत ही संक्षिप्त रूप में विवेचन किया और वहीं रजनी कुकरेती ने क्रिया विधान का विस्तार पूर्वक विवेचना की है
गढ़वाली की क्रियाएं
१- नामिक क्रियाएं
२-समस्त क्रियाएं
३-व्युत्पन्न क्रियाएं
४- मूल अथवा साधारण क्रियाएं
५-सयुंक्त क्रियाएं
नामिक क्रियायों के उदहारण
अधिकतर देखा गया है कि गढवाली में संज्ञा, सर्वनाम व विशेषणों की धातुओं पर आण , औणो, अण, एण , औण, याण प्रत्यय लगाणे से नामिक क्रिया बनायी जाती हैं
मूल ----------------- प्रत्यय --------------------------------------क्रिया
संज्ञा------------------------अण , आण एण, याण, औणो
रंग ---------------------------------------- --------------रंगण, रंगाण, रंगेण,रंग्याण , रंगौणो,
सर्वनाम
अपणु --------------------औ ण -------------------------------------------- अपणौण
विशेषण -------------------अण , आण एण, याण, औणो, यौण
नेडू/न्याड़ --------------------------औण/आण -----------------------------निडौण /निडाण
बौळ-----------------------------------एण /याण ------------------------------बौळेण, बौळयाण
पुरू ------------------------------------यौण/ याण------------------------------पुर्याण, पुर्यौण
समस्त क्रियाएं
१- योगित क्रियाएं
उठण -बैठण , चलण - फिरण
२- ध्वनि अनुसरणात्मक क्रियाये
अधिकतर प्रत्यय औण व आण हैं
ध्वनि -------------------प्रत्यय -------------क्रिया
फड़ -फड़ --------------- आण ---------------फड़फड़ाण
भिण- भिण-------------आण /औ ण --------भिणभिणाण / भिणभिणौण
व्युत्पन्न क्रियाएं
मूल क्रिया----------------------प्रथम प्रेरणार्थक---------------------द्वितीय प्रेरणार्थक
(सकर्मक व अकर्मक)
रुण /रोण -------------------------रुलाण/रुलौण----------------------रुलवाण/रुवाण.रुलवौण लौ ण
दीण /देण------------------------- दिलाण/दिलौण--------------------दिलवौण
गढ़वाली में सकर्मक मूल क्रियाएं
मन्न (क्या रै ग्ज्या तैं अपण भै किलै नि मणदु ?,
समजण/समझण ( चल ! मी तैं जादा इ लाटो समजदी हैं?)
गढ़वाली में अकर्मक मूल क्रियाएं
भाई न अब सीण/सेण च
ढिबर भगणा छन
गढवाली में संयुक्त क्रियाएं
अ बाध्यताबोधक संयुक्त क्रिया
धातु -पोड़ (पड़ना )
१- कृदंत स्वरुप
वर्तमान काल कर्मवाच्य
------------------------------एकवचन ---------------------------बहुवचन -------------------------
पुरुष ----------------पुल्लिंग /स्त्रीलिंग ---------------------------पुल्लिंग/स्त्रीलिंग
उत्तम ------------- पोड़दो-------------------------------------------- पोड़दो
मध्यम ------------पोड़दें --------------------------------------------पोड़दों
अन्य ---------------पोड़दु/ दि--------------------------------------पोड़दिन/दन
वर्तमान काल कर्त्री वाच्य
------------------------------एकवचन ---------------------------बहुवचन ------------------
पुरुष -----------पुल्लिंग------------स्त्रीलिंग ---------------पुल्लिंग-------------स्त्रीलिंग
सभी पुरुषों में . ----------पोड़दु/ पोड़दि/पोड़दन और सभी लिंगों में
--------------------------भूतकालिक कल्पना कर्मवाच्य
१- कृदंत होने पर सभी पुरुषों के एकवचन में 'पोड़दु'
२-सभी पुरुषों के बहुवचन में 'पोड़दा'
भूतकालिक कल्पना कर्त्री वाच्य
सभी पुरुषों के एकवचन व बहुवचन में प्रयोग --पोड़दु/पोड़दि/पोड़दा
भूतकाल कर्मवाच्य
पुरुष --------एकवचन---------------बहुवचन
उत्तम--------पोड्योञ---------------पोड़याँ
मध्यम -----------पोडें ----------------पोडयाञ
अन्य पुरुष------- पोडि-------------- पोडेन
( ड को ड़ पढ़े )
भूतकाल कर्त्री वाच्य
भूतकाल कर्त्री वाच्य में सभी पुरुषों के एकवचन व बहुवचन में ' पोडि/ पोडेंन' प्रयोग होता है
भविष्य काल - कर्मवाच्य
भविष्य काल - कर्मवाच्य के एकवचन वाले उत्तम पुरुष व अन्य पुरुष में --पोड़लु ' प्रयोग होता है
भविष्य काल - कर्मवाच्य के एकवचन वाले मध्यम पु. में 'पोड़लि' प्रयोग होता है
भविष्य काल - कर्मवाच्य क एसभी पुरुषों , सभी वचनों में 'पोड़ला' प्रयोग होता है
भविष्य काल कर्त्री वाच्य
भविष्य काल कर्त्री वाच्य के सभी पुरुषों, सभी लिंगों व सभी वचनों में पोड़लु /पोड़लि /पोड़ला का प्रयोग होता है
भविष्यकाल कल्पना क्रम वाच्य (कृदंत की उपस्थिति)
पुरुष -------------- एकवचन------------------ बहुवचन
उत्तम ---------------पोडौञ ---------------------पोडां
मध्यम ----------------पोडे--------------------- पोडां
अन्य -----------------पोडु ----------------------पोड़ोन
भविष्यकाल कल्पना कर्त्री वाच्य (कृदंत की उपस्थिति)
सभी पुरुषों के सभी लिंगों व वचनों में पोडु /पोड़ोन का प्रयोग होता है
सन्दर्भ :
- अबोध बंधु बहुगुणा , १९६० , गढ़वाली व्याकरण की रूप रेखा, गढ़वाल साहित्य मंडल , दिल्ली ( Structure of Garhwali Grammar)
२- बाल कृष्ण बाल , स्ट्रक्चर ऑफ़ नेपाली ग्रैमर , मदन पुरूस्कार, पुस्तकालय , नेपाल (Structure of Nepali Grammar)
३- डा. भवानी दत्त उप्रेती , १९७६, कुमाउंनी भाषा अध्ययन, कुमाउंनी समिति, इलाहाबाद (Study of Kumauni Language Grammar)
४- रजनी कुकरेती, २०१०, गढ़वाली भाषा का व्याकरण, विनसर पब्लिशिंग कं. देहरादून ( Grammar of Garhwali Language)
५- कन्हयालाल डंड़रियाल , गढ़वाली शब्दकोश, २०११-२०१२ , शैलवाणी साप्ताहिक, कोटद्वार, में लम्बी लेखमाला (Garhwali- Hindi Dcitionary)
६- अरविन्द पुरोहित , बीना बेंजवाल , २००७, गढ़वाली -हिंदी शब्दकोश , विनसर प्रकाशन, देहरादून (Garhwali hindi Dictionary )
७- श्री एम्'एस. मेहता (मेरा पहाड़ ) से बातचीत
८- श्रीमती हीरा देवी नयाल (पालूड़ी, बेलधार , अल्मोड़ा) , मुंबई से कुमाउंनी शब्दों के बारे में बातचीत
९- श्रीमती शकुंतला देवी , अछ्ब, पन्द्र-बीस क्षेत्र, , नेपाल, नेपाली भाषा सम्बन्धित पूछताछ
१० - भूपति ढकाल , १९८७ , नेपाली व्याकरण को संक्षिप्त दिग्दर्शन , रत्न पुस्तक , भण्डार, नेपाल (Briefs on Nepali Grammar)
११- कृष्ण प्रसाद पराजुली , १९८४, राम्रो रचना , मीठो नेपाली, सहयोगी प्रेस, नेपाल (Nepali Grammar)
१२- चन्द्र मोहन रतूड़ी , गढ़वाली कवितावली ( सं. तारा दत्त गैरोला, प्र. विश्वम्बर दत्त चंदोला) , १९३४, १९८९
Comparative Study of Kumauni Grammar , Garhwali Grammar and Nepali Grammar (Grammar of , Mid Himalayan Languages ) to be continued ........
. @ मध्य हिमालयी भाषा संरक्षण समिति