Author Topic: Articles By Shri D.N. Barola - श्री डी एन बड़ोला जी के लेख  (Read 138648 times)

WilliamideahIU

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D.N.Barola / डी एन बड़ोला

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मानस खंड मंदिर माला मिशन  ( कनरा डोल आश्रम को ‘धाम’ की मान्यता )
राज्यपाल लैफ्टिनेंट जर्नल गुरमीत सिंह (सेवा निवृत) ने विधान सभा  में अपने अभिभाषण में कहा कुमायूं के प्राचीन मंदिरों को भव्य बनाने के लिए मानस खंड मंदिर माला मिशन की शुरूवात होगी !
राज्यपाल व सरकार का यह संकल्प प्रसंसनीय है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए ! सरकार के इस कदम से कुमायूं को भी एक तीर्थ स्थल के रूप में भी विकसित किया जा सकेगा ! देव भूमि गढ़वाल में प्राचीन मंदिरों की श्रंखला है ! वहाँ केदारनाथ धाम है, बद्रीनाथ धाम है, गगोत्री धाम है, यमुनोत्री धाम है, गढ़वाल में ही हरिद्वार है व  ऋषिकेश भी है ! परन्तु देखा जाय तो कुमायूं क्षेत्र में मंदिर तो बहुत हैं, पर वह ‘धाम’ की श्रेणी में नहीं आते !
कुमायूं में पर्यटन को विकसित करने हेतु आवश्यकीय है धार्मिक पर्यटन को कुमायूं से जोड़ा जाय ! पर्यटक हरिद्वार, ऋषिकेश व  चार धामों की यात्रा कर वापस गढ़वाल के मार्ग से ही वापस चला जाते है !  मानस खंड मंदिर माला मिशन के प्रारंभ होने के साथ ही पर्यटक कुमायूं  के मंदिरों व अन्य पर्यटक स्थलों में प्रवास कर वापस जाएगा ! इससे कुमायूं का पर्यटन कारोबार बढ़ेगा ! कुमायूं में जागेश्वर धाम है, बाघ नाथ धाम है, कैंची धाम है, बैजनाथ धाम है, बग्वाल युद्ध के लिए मशहूर देवीधुरा धाम है ! दूनागिरी मंदिर है, परन्तु इन्हें धाम की मान्यता प्राप्त नहीं है! पर्यटन के लिए कुमायूं में  कटारमल सूर्य मंदिर है, कौसानी में विश्व प्रसिद्द अनाशक्ति आश्रम है, पहाड़ों की रानी नैनीताल जैसा आधुनिक शहर है, रानीखेत जैसा खूबसूरत हिल स्टेशन है, जहां से 360 किलोमीटर लम्बी हिमालय श्रंखला के दर्शन होते हैं !
कल्यानिका कनरा डोल आश्रम को ‘धाम’ की मान्यता :                                                                                                                                             
 विश्व के सबसे बड़े व सबसे भारी श्रीयंत्र की  स्थापना के अवसर पर तत्कालीन  राज्यपाल डॉ०के के पॉल ने  दिनांक  24 अगस्त, 2022 को घोषणा की थी कि कल्यानिका कनरा डोल आश्रम को  पांचवे धाम की मान्यता दी जायेगी ! यह मान्यता अब नई सरकार को शीघ्र देनी चाहिए ! डोल आश्रम  कनरा की खासियत यह हैं कि यहां पर 126 फुट ऊंचे तथा 150 मीटर व्यास के श्रीपीठम का निर्माण हुआ है। इस श्रीपीठम में एक अष्ट धातु से निर्मित लगभग डेढ़ टन (150 कुंतल) वजन और साढ़े तीन फुट ऊंचे श्रीयंत्र की स्थापना आध्यात्मिक आस्था को एक साथ जोड़ने के लिए की गई है । श्री पीठम में लगभग 500 लोग एक साथ बैठ कर ध्यान लगा सकते हैं ।
    इसी गाँव कनरा में 1,000 वर्ष से भी अधिक प्राचीन पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित सड़क मार्ग से जुड़ा शिव लिंग, ‘शिव जिव्हा’ के रूप में स्थापित है ! इस  शिव लिंग में अर्पित जल चमत्कारिक रूप से अलोप हो जाता है !                                                                                                                                                           
  आशा है सरकार अपने उपर्युक्त संकल्प को पूरा करने का कार्य करेगी, जिससे कि कुमायूं क्षेत्र के पर्वतीय अंचल में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलो सके !                     
डीएन बड़ोला,                                                                                                                                                                                      अध्यक्ष, प्रेस क्लब, रानीखेत                                                     
9412909980

D.N.Barola / डी एन बड़ोला

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ये दशक उत्तराखंड का दशक है ! – नरेन्द्र मोदी प्रधान मंत्री की इस घोषणा को मूर्त रूप देने हेतु मानस खंड (कुमायूं) के चार धाम परिभाषित हों !!
स्कन्द पुराण में वर्णित केदारखंड (गढ़वाल) में अवतरित  केदारनाथ  धाम का पुनरुद्धार करने व चारों धाम – बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री व गंगोत्री को आल वैदर रोड से जोड़ने की योजना के पश्चात मानस खंड (कुमायूं) के लिए राज्यपाल लैफ्टिनेंट जर्नल गुरमीत सिंह (सेवा निवृत) ने विधान सभा  में अपने अभिभाषण में  कुमायूं के प्राचीन मंदिरों को भव्य बनाने के लिए मानस खंड मंदिर माला मिशन की घोषणा की है ! राज्यपाल व सरकार का यह संकल्प प्रसंसनीय है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए ! सरकार के इस कदम से कुमायूं को भी एक तीर्थ स्थल के रूप में भी विकसित किया जा सकेगा !
देव भूमि गढ़वाल में प्राचीन मंदिरों की लम्बी श्रंखला है ! वहाँ केदारनाथ धाम है, बद्रीनाथ धाम है, गगोत्री धाम है, यमुनोत्री धाम है, गढ़वाल में ही हरिद्वार है व  ऋषिकेश भी है ! परन्तु देखा जाय तो कुमायूं क्षेत्र में मंदिर तो बहुत हैं, पर वह ‘धाम’ की श्रेणी का कोई मंदिर नहीं है !
कुमायूं में पर्यटन को विकसित करने हेतु आवश्यकीय है धार्मिक पर्यटन को कुमायूं से भी जोड़ा जाय ! पर्यटक हरिद्वार, ऋषिकेश व  चार धामों की यात्रा कर वापस गढ़वाल के मार्ग से ही वापस चला जाते है !  मानस खंड मंदिर माला मिशन के प्रारंभ होने के साथ ही पर्यटक कुमायूं के मंदिरों व अन्य पर्यटक स्थलों में प्रवास कर ही गन्तव्य स्थान को जायेंगे  ! ऐसी अपेक्षा की जा सकती है ! इससे कुमायूं का पर्यटन व खास तौर पर धार्मिक पर्यटन का कारोबार बढ़ेगा ! कुमायूं में जागेश्वर धाम  12 ज्योतिर्लंगों में 8वां ज्योतिर्लिंग  है तथा पांचवे धाम के रूप में प्रसिद्द है ! बाघ नाथ धाम है, कैंची धाम है,बैजनाथ धाम है,आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित माता का शाक्तिपीठ हाट कलिका मंदिर है; स्कन्द पुराण में वर्णित पाताल भुवनेश्वर गुफा मंदिर है;बग्वाल युद्ध के लिए मशहूर देवीधुरा धाम है ! दूनागिरी मंदिर है,रानीखेत में  प्राचीन झूला  देवी मंदिर है, हैड़ाखान मन्दिर है , परन्तु इन्हें धाम की मान्यता प्राप्त नहीं है ! इसी प्रकार पुरातात्विक रूप से , द्वाराहाट के 55 मंदिरों समूह जिनका निर्माण 10 से 12 सदी के बीच में किया था दर्शनीय हैं | पर्यटन के लिए कुमायूं में  कटारमल सूर्य मंदिर है, कौसानी में विश्व प्रसिद्द अनाशक्ति आश्रम है, पहाड़ों की रानी नैनीताल जैसा आधुनिक शहर है, रानीखेत जैसा खूबसूरत हिल स्टेशन है, जहां से 360 किलोमीटर लम्बी हिमालय श्रंखला के दर्शन होते हैं !
भारत में कुल 4 धाम हैं – बद्रीनाथ धाम, रामेश्वर धाम, जगन्नाथ पूरी, व द्वारका !  इन मंदिरों को 8वीं शदी में आदि शंकराचार्य ने एक सूत्र में पिरोया था ।
बीसवीं शताब्दि के मध्य  में हिमालय की गोद में बसे इन चारों तीर्थस्थ लों  बद्रीनाथ  को छोड़ कर केदारनाथ , यमुनोत्री एवं गंगोत्री को ‘छोटा' विशेषण दिया गया जो आज भी यहां बसे इन देवस्था नों को परिभाषित करते हैं । 
प्रश्न है कि कैसे चार धाम यात्रियों को मानस खंड की ओर आकर्षित किया जाय ? चार धाम यात्री हरिद्वार, ऋषिकेश होते हुए चार धामों के दर्शन कर वापस लौट जाते हैं ! कुमायूं में एक भी धाम नहीं है, इसलिए आवश्यकीय है कि कुमायूं के प्राचीन मंदिरों को ‘धाम’ कि मान्यता मिले !जिस प्रकार बीसवीं शताब्दि के मध्य  में इन चारों तीर्थ स्थकलों, बद्रीनाथ को छोड़ कर केदारनाथ , यमुनोत्री एवं गंगोत्री को ‘छोटा' विशेषण दिया गया था उसी प्रकार चार या अधिक महत्वपूर्ण मंदिरों  को ‘छोटा धाम’ का विशेषण दिया जा सकता है !  प्रशन्नता है कि 22 अगस्त, 2022 को तत्कालीन राज्यपाल डॉ केके पॉल ने हमें राह दिखलाई है ! उन्होंने विश्व के सबसे बड़े ‘श्रीयंत्र’ की स्थापना के अवसर पर घोषणा की थी कि विश्व प्रसिद्द कल्यानिका कनरा डोल आश्रम को  उत्तराखंड के पांचवे धाम के रूप में पहिचाना जाएगा ! इस प्रकार राज्यपाल महोदय ने धाम की मान्यता देने का श्रीगणेश कर दिया है ! इसलिए मानस खंड (कुमायूं ) में भी अधिकतम चार ‘छोटा’ धामों की मान्यता दी जा सकती है ! धार्मिक पर्यटक केदारखंड (गढ़वाल) में चार धाम मंदिरों के दर्शन कर मानस खंड (कुमायूं)  में नए चार धामों – पूर्व राज्यपाल द्वारा घोषित ‘धाम’ कल्यानिका कनरा डोल आश्रम, के अतिरिक्त  8वें ज्योतिर्लिंग जागनाथ धाम जो धाम के रूप में प्रसिद्ध है व  बागनाथ धाम आदि  के दर्शन के इच्छुक होंगे !  इस हेतु पर्यटन विभाग धार्मिक पर्यटन यात्रियों को विस्तृत जानकारी दे सकता है ! इसमें राज्य सरकार व केंद्र सरकारं  का योगदान महत्वपूर्ण  रहेगा !                                                                                  अतः इस विषय को लेकर आगे बढ़ा  जाय  तो कुमायूं में भी धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, इसमें संदेह नहीं  !                                                                         
डीएन बड़ोला, DN Barola  प्रेसिडेंट,  प्रेस क्लब, बड़ोला कॉटेज, रानीखेत  ! Mob.9412909980 

 

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