Author Topic: Festival Dates - उत्तराखंड के विभिन्न त्योहारों एव मेलो को मनाने की निश्चित तिथि  (Read 27287 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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बद्रि-केदार उत्सव

2 से 24 जून के मध्य बद्रि केदार उत्सव का आयोजन हरिद्वार, अगस्त्यमुनी व बद्रीनाथ में आयोजित किया जाता है।

खरसाली मेला

उत्तरकाशी में आयोजित इस मेले का आयोजन 27-28/ जुलाई को उत्तरकाशी के खरसाली नामक स्थल पर आयोजित किया जाता है।

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कणवाश्रम मेला
ऋषि कणव की तपस्थली होने के कारण 11-12 फरवरी को इस मेले का आयोजन कोटद्वार के निकटतम पौड़ी गढ़वाल में किया जाता है। यह आश्रम पौड़ी में स्थित है।
ताडकेशवर महादेव मेला
शिवरात्रि के अवसर पर पर्यटन की दृष्टि से इस मेले का भव्य आयोजन 6 मार्च को पौड़ी में किया जाता है।

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झण्डा मेला
देहारादून में स्थित गुरु राय दरबार साहिब में इस मेले का आयोजन माह मार्च में आयोजित किया जाता है।
पिरान कलियर मेला
रुड़की में इस मेले का आयोजन पिरान कलियर में साबिर साहब की प्रसिद्ध दरगाह है। इस स्थल पर लाखों की संख्या में मुस्लिम धर्म के अनुयायियों के साथ विभिन्न धर्मों के लोग भी अपनी मन्नतें पूरी करने के लिए दुआ करने आता हैं। यह मेला मार्च व अप्रैल के मध्य होता है।
वीर गब्बर सिंह मेला
टिहरी गढ़वाल का यह सपूत प्रथम विश्वयुद्ध में शहीद हुआ था। यह वीर सेनानी विक्टोरिया क्रांस विजेता की याद में 8 अप्रैल को इस मेले का आयोजन किया जाता है।
सुरकंडा मेला
टिहरी गढ़वाल के अंतर्गत यह स्थल धार्मिक व पौराणिक सिद्धपीठ माँ सुरकंडा के नाम से 12-13 अप्रैल को आयोजित होता है।
बिस्सू मेला
चकराता के अंतर्गत जौनसार बावर के जनजातीय क्षेत्र में परंपरागत मेले का आयोजन 12-18 अप्रैल के मध्य आयोजित होता है।
कुंजापुरी पर्यटन विकास मेला

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माँ कुंजपुरी से संबन्धित पर्यटन विकास मेले का आयोजन 12-13 अप्रैल को कुंजापुरी में आयोजित किया जाता है।
बैशाखी मेला
गौतम ऋषि की तपस्थली गौतम कुण्ड चंद्रबनी, देहारादून तथा महर्षि अगस्त्य की तपोभूमि अगस्त्मुनी में भी इस मेले का आयोजन 14 अप्रैल को आयोजित किया जाता है।
कंडक मेला
उत्तरकाशी में कंडक देवता के नाम से आयोजित इस मेले का आयोजन 16 अप्रैल को किया जाता है।
पंटागणिया पर्यटन विकास मेला
रुद्रप्रयाग में इस मेले का आयोजन 18-19 व 20 अप्रैल के मध्य किया जाता है।

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 वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली स्मृति मेला
वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली की याद में इस मेले का आयोजन पौड़ी गढ़वाल में 23 अप्रैल को क्रांति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
गुरु मणिकनाथ जात यात्रा
टिहरी में इस मेले का पाँच दिवसीय आयोजन गुरु मणिकनाथ जी की जात यात्रा का 1-5 मई के मध्य भव्य आयोजन किया जाता है।
शहीद केशरी चंद मेला
2-3 मई को इस मेले का आयोजन शहीद केशरी चन्द्र के बलिदान दिवस के रूप में चकराता में आयोजित किया जाता है।

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मधुगंगा घाटी विकास गंगा महोत्सव

11-15 मई के मध्य आयोजित इस मेले का आयोजन होता है, जिसमें कृषि व जिला उद्योग से संबन्धित कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है।

किसान औधोगिक पर्यटन विकास मेला
गौचर में इस मेले का आयोजन खादी एवं ग्रामोद्योग द्वारा 15-25 मई तक किया जाता है।

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नागराजा सेम-मुखेम मेला
26 नवम्बर को टिहरी में इस मेले का आयोजन किया जाता।
मदमहेश्वर मेला
उखीमठ (रुद्रप्रयाग) में इस मेले का आयोजन 20-25 नवम्बर में आयोजित होता है।
वंड विकास मेला
चमोली मे आयोजित इस मेले का आयोजन 15-25 दिसम्बर को लोकगीतों व लोकनृत्य के साथ आयोजित किया जाता है।
जौनसार बावर महोत्सव
जौनसार बावर महोत्सव 29-30 दिसम्बर को लोकसंस्कृति के प्रचार-प्रसार पर आधारित है।

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कोटद्वार में स्थित यह मंदिर बजरंगबली का है। 1-7 जनवरी के मध्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
रवांई किसान विकास एवं सांस्कृतिक मेला
वीर शिरोमणि माधो सिंह भण्डारी के नाम पर इस मेले का आयोजन उनके जन्मस्थल मलेथा में 4-8 जनवरी के मध्य किया जात है।
शहीद नागेंद्र सकलानी मोलू भारदारी विकास मेला (कीर्तिनगर टिहरी)
शहीद नगेंद्र सकलानी के नाम पर इस मेले का आयोजन 11-14 जनवरी को प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है।
गेंदा कौथिक
यह पारम्परिक मेला दो समूहों के बीच गेंद खेलने की परंपरा पर आधारित है। थल नदी यमकेशवर तथा डांडामंडी द्वारीखाल में 14-16 जनवरी को आयोजित होता है।
माघ मेला
14-27 जनवरी के मध्य इस मेले का आयोजन उत्तरकाशी में पौराणिक लोकगीतों तथा लोकनृत्यों के साथ बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
बसंतोत्सव मेला
बसंत ऋतु के आगमन पर इस मेले का आयोजन टिहरी तथा उतरकशी के जनपदों में 11-17 फरवरी के मध्य मनाया किया जाता है।

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महामृत्युंजय मेला
असेड़-सिमली व नारायंबगड़ में इस आयोजन को धार्मिक आस्था के प्रतीक के तौर पर 12-15 अगस्त को किया जाता है।
महासू देव जागरण पर्व
चकराता-देहरादून में महासू देवता के जागड़ा पर्व को 25-30 अगस्त को जौनसार बावर में धूमधाम से मनाया जाता है।
श्री लक्ष्मी नारायण पर्यटन सांस्कृतिक विकास मेला
किमोली - कपीरी में आयोजित इस सांस्कृतिक-पर्यटन मेले का आयोजन 2-4 सितम्बर माह में आयोजित किया जाता है।
रूपकुंड महोत्सव
हिमालय का महाकुंभ राज जात यात्रा जो प्रत्येक 12 वर्ष के अंतराल में आयोजित होती है। इस स्थान पर प्रतिवर्ष 2-5 सितम्बर को रूपकुंड महोत्सव आयोजित किया जाता है।
सेलकु मेला
उत्तरकाशी में आयोजित इस मेले का आयोजन 5-10 सितम्बर के मध्य आयोजित होता है।
काश्तकार मेला
चमोली में इस मेले का आयोजन 18-25 सितम्बर को हस्तनिर्मित उत्पादों की बिक्री व व्यापारिक दृष्टि से आयोजित किया जाता है।
विश्व पर्यटन दिवस
लैन्सडाउन-पौड़ी में इस उत्सव का आयोजन 27 सितम्बर को आयोजित होता है।
श्री नागराज देवता मेला
उत्तरकाशी मेला 23 सितम्बर को एक सप्ताह तक धार्मिक दृष्टि से आयोजित किया जाता है।

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दशहरा मेला लखवाड़
कालसी के अंतर्गत लखवाड़ में आयोजित इस मेले का आयोजन 21-22 अक्टूबर को किया जाता है।
बैकुंड चतुर्दर्शी मेला
श्रीनगर गढ़वाल में आयोजित इस मेले का आयोजन 1-10 नवम्बर तक किया जाता है।
गढ़वाल महोत्सव
पर्यटन विभाग द्वारा 10-15 नवम्बर तक इस मेले का आयोजन गढ़वाल की समस्त लोक संस्कृति को प्रदर्शित किया जाता है।\
गौचर मेला
14-20 नवम्बर तक इस मेले का आयोजन गौचर में व्यापारिक, सामाजिक व सांस्कृतिक के लिए विख्यात है।
यमुनाघाटी क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक विकास मेला
नैनबाग (टिहरी गढ़वाल) में आयोजित इस मेले का आयोजन 17-20 नवम्बर में आयोजित होता है।
नागराजा सेम-मुखेम मेला
26 नवम्बर को टिहरी में इस मेले का आयोजन किया जाता।

 

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