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  • कर्क संक्रान्ति (हरेला): July 16, 2012

Author Topic: Harela Festival Of Uttarakhand - हरेला(हरयाव)  (Read 107149 times)

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Re: हरेला(हरयाव): Harela
« Reply #30 on: July 15, 2008, 09:45:12 AM »
Bahut hi badhiya prayaas hai yeh aur ise jyda se jyda badhawa milna chahiye.

पर्व पर होगा पौधरोपणJul 14, 11:59 pm

टनकपुर (चंपावत): हरेला क्लब के तत्वावधान में उत्तराखण्ड की संस्कृति के प्रचार व प्रसार के लिए हरेला पर्व के अवसर पर संयुक्त चिकित्सालय परिसर में पौधरोपण किया जायेगा।

हरेला क्लब के सचिव दीनदयाल धामी ने बताया कि 16 जुलाई को हरेला पर्व के अवसर पर संयुक्त चिकित्सालय परिसर में पौधरोपण किया जायेगा। इसके बाद उत्सव गार्डन में क्लब की नई कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण व परिचय समारोह आयोजित किया जायेगा। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी जीवन सिंह नगन्याल होंगे। श्री धामी ने इस कार्यक्रम में क्षेत्र के लोगों से बढ़-चढ़ कर भाग लेने का आह्वान किया । उन्होंने कहा कि क्लब का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य , खेल, महिलाओं के उत्थान के साथ वृक्षारोपण, विकलांग व पीड़ित परिवारों को सहयोग करना है।



पंकज सिंह महर

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Re: हरेला(हरयाव): Harela
« Reply #31 on: July 15, 2008, 11:19:40 AM »
गढ़वाल में इसे हरियाली पर्व के नाम से जाना जाता है सभी लोग अपने घर में बोई गई हरियाली को गांव के बीच में लाकर पूजा करते हैं और फिर पूजन किया जाता है।


पंकज सिंह महर

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Re: हरेला(हरयाव): Harela
« Reply #32 on: July 15, 2008, 11:21:12 AM »
ek aur


Risky Pathak

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Source: www.in.jagran.yahoo.com


पंकज सिंह, हल्द्वानी कुमाऊं की सांस्कृतिक परम्पराओं की लंबी श्रृंखला में हरियाली का अपना महत्व है। ग्रीष्म की तपन के बाद वर्षा होने पर हरियाली के स्वागत में हरेला उत्सव मनाया जाता है। साथ ही यह पर्व प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है। श्रावण माह की संक्राति का यह त्यौहार हरेला रबी की फसल की बुआई के समय मनाया जाता है। यह त्यौहार सामाजिक-धार्मिक व आर्थिक सहित विविध आयामों को अपने में समेटे है। हरेला पर्व के दस दिन पूर्व पांच या सात प्रकार के गेहूं, धान, मक्का जैसे बीज मिलाकर एक छोटी टोकरी में बो दिये जाते हैं। इस पूजनीय टोकरी को घरों के पूजा स्थल पर रख दिया जाता है। इसकी प्रतिदिन जल चढ़ाकर पूजा की जाती है। इसी विधान में मिट्टी के डिकारे गौरी महेश्र्वर की प्रतिमाएं बनाकर उनका पूजन किया जाता है। इसके साथ ही आठ योनियों का भी ग्रह दशाओं के रूप में पूजन किया जाता है। सक्रांति के दिन हरेला या उगे हुए सात प्रकार के अनाजों की विधि विधान से पूजा की जाती है तथा रोग शोक निवारणार्थ प्राण रक्षक वरस्पते, इदा गच्छ नमस्तेस्तु हर देव नमोस्तुते मंत्रों का जाप किया जाता है। पूजन के उपरान्त हरेला को काटा जाता है तथा घर के सभी सदस्य हरेला को सिर पर रखकर एक दूसर को जी रया, जागि रया यो दिन यो मास भेटने रैया आर्शीवाद देते हैं। इसके साथ ही स्वादिष्ट व्यजंन बनाए जाते हैं तथा प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। ऋतुओं के परिवर्तन के साथ मल्हार का गहरा सामंजस्य है। अन्य रूप में यह पर्व वृक्षारोपण दिवस के धार्मिक प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है। इस अवसर पर भी लोग नये वृक्षों एवं पौधों को लगाते हैं। वृक्षारोपण एवं पर्व मनाने का समय मौसम के साथ भी मेल खाता है। हिमालय शोध संगीत परिषद के निदेशक डा पंकज उप्रेती ने कहा कि पहाड़ संस्कृति जहां वृक्ष सामजिक, आर्थिक एवं परम्परा सभी रूपों में महत्व रखते हैं, उसे संरक्षित करने एवं बढ़ावा देने के लिए ऐसे पर्व का प्रचलन है। यह एक वैज्ञानिक सोच के माध्यम से विकसित परम्परा है। प्रदेश सरकार को इन परम्पराओं के बढ़ावा के लिए ध्यान देना चाहिए।

पंकज सिंह महर

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Re: हरेला(हरयाव): Harela
« Reply #34 on: July 15, 2008, 02:49:43 PM »
लो महाराज हिमांशु गुरु की कृपा से मंत्र भी मिल गया।


रोग शोक निवारणार्थ प्राण रक्षक वनस्पते, इदा गच्छ नमस्तेस्तु हर देव नमोस्तुते

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Re: हरेला(हरयाव): Harela
« Reply #35 on: July 16, 2008, 09:17:04 AM »
Sabhi Sadasyon aur unke Parivaar ko Harela ki haardik Shubhkamnaen.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: हरेला(हरयाव): Harela
« Reply #36 on: July 16, 2008, 09:23:32 AM »
Happy Harela.

Happy Harela.
Happy Harela.
Happy Harela.
Happy Harela.
Happy Harela.

Risky Pathak

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Re: हरेला(हरयाव): Harela
« Reply #37 on: July 16, 2008, 09:26:43 AM »
Harele ki ShubKamnaye

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: हरेला(हरयाव): Harela
« Reply #38 on: July 16, 2008, 10:00:22 AM »

From Dinesh Pathak..

Harela is peculiarly a Kumaoni festival to mark the advent of the rainy season. The celebration falls on the first day of Shravan. Ten days before the due date, seeds of either five or seven kinds of grains are mixed together and sown in pots inside the room, using small baskets filled with earth. The sowing is done either by the head of the family or the family priest. It is done ceremoniously. Water is sprinkled after worship. On the last day of the month of Aasarh, one day before the actual celebration of the festival, a kind of mock weeding is done with small wooden hoes. Gaily painted images of Shiva and Parvati and their off springs are prepared and worshipped on the Shankranti day. Green shoots Harela are placed on the head gear.

The significance of Harela lies in the fact that it provides an opportunity to the cultivator to test the qualities or defects of the seeds he has in his store. Another significance is that the festival is the occasion to give taken monetary allowances - pocket money to the young girls of the family.

However, the more popular Harela is the one that is celebrated in the month of Shravan to commemorate the wedding of Lord Shiva and Parvati and to welcome the rainy season and the new harvest. On this day people make Dikaras* or clay statues of Gauri, Maheshwar, Ganesh etc. and worship them. Even the overworked bullocks are given a rest on the occasion of Harela. People put the blades of freshly cut Harela on their heads and send them to their relatives and friends as well.

*Dikars - Small idols of gods and godesses are made out of clay/red-soil. These idols are decorated with different colours. They are called Dikars.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: हरेला(हरयाव): Harela
« Reply #39 on: July 16, 2008, 10:15:50 AM »

KAILASH BHAI KA YAH SMS HARELA FESTIVEL PAR..

Pani na ho to nadiya kis kaam ki,
Ansu na ho to akhiya Kis Kaam Ki,
Dil Na ho to Dhadkan Kis Kaam Ki,
Agar aaj bhi aap na Nahaaye to Harela Kis Kaam Ki..

HAPPY HARELA.

 

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