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  • हरेला/HARELA: July 17, 2010
  • कर्क संक्रान्ति (हरेला): July 17, 2010

Author Topic: Harela Festival Of Uttarakhand - हरेला(हरयाव)  (Read 6752 times)

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Offline Himanshu Risky Pathak

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हरेला: हरयाव

हरेला उत्तराखंड का १ प्रमुख त्यौहार है| हरेला उत्तराखंड की संस्कृति का १ विभिन्न अंग है| ये त्यौहार सामाजिक सोहार्द के साथ  साथ कृषि व मौसम से भी सम्बन्ध रखता है|

हरेला: भिन्न प्रकार के खाद्यानों के बीजो को एक साथ उगाकर, दस दिन के बाद काटा जाता है| 

हरेला साल में तीन बार मनाया जाता है|

१. चैत्र: चैत्र मास के प्रथम दिन बोया जाता है और नवमी को काटा जाता है|
२. श्रावण: श्रावन लगने से नौ दिन पहले अषअड़ में बोया जाता है और १० दिन बाद काटा  जाता है|
३. आशिवन: आश्विन  नवरात्र के पहले दिन बोया जाता है और दशहरा  के दिन काटा जाता है|

पिठां (तिलक), चन्दन और अक्षत के साथ थाली में रखा हुआ हरेला..

« Last Edit: July 15, 2010, 11:23:04 AM by हेम पन्त »

लुकी छिपी बादवो में चमकी जैसी ज्यून तेरो मुख चमको
तेरा रसीला होठो बे आज मौ जै टपको

 

Offline rajeshpant4u

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Re: हरेला(हरयाव): Harela
« Reply #46 on: July 16, 2008, 11:33:48 AM »
हरेला की हार्दीक बधाईया....... :D

Offline Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Re: हरेला(हरयाव): Harela
« Reply #47 on: July 16, 2008, 11:35:24 AM »
सभी उत्तराखंडी मित्रों को हरेला की शुभकामनाएं।
हरेला आते ही मन में एक हिलोर सी उठती है
याद आते हैं वे दिन जब कई दिन पहले से ही हरेला की तैयारियां शुरू हो जाया करती थी।

हरेला के दिन मां या बड़ी दीदी लोग हरेला लगाते थे -

लाग हरयाई, लाग दशें, लाग बग्वा
लाग उतरेंणी लाग पंचमी लागो सब त्योहार

स्यू क पराण हैजो, स्याव की बुद्धि है जो
एकै इकास है जो पांचै पचास है जो

दुब जब मौवे जाए, ब्यर जस फौवे जाए
जांठि टेकि बे माव हैं जाए, घुन टेकि बेर भ्यार जाए

झालों मालों है जाए।

with regard :-   Mohan C Bahuguna
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Offline Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Re: हरेला(हरयाव): Harela
« Reply #48 on: July 16, 2008, 11:36:49 AM »
Harela is remarkably an ultimate Uttarakhandi festival that is been celebrated to welcome the rainy season. This festivity falls on the first day of Shravan, (which is of course today as per Hindu Panchanga). Ten days before the due date, seeds of either five or seven kinds of grains are mixed together and sown in pots inside the darkroom, The sowing is done either by the head of the family or the family priest. It is done ceremoniously and water is sprinkled  daily till  last day worship. In addition, one day before the actual celebration of the festival (last day of Month Aasarh) mock weeding is been done with small wooden hoes. Gaily painted images of Shiva and Parvati and their off springs are prepared and worshipped on the Shankranti day. Yellowish -green shoots Harela are placed on the head gear.

In every house AMA-BUBU/IZA-BABU use to bless with following words

JEE RAYA JAGI RAYA, DUBE JAI PANAPIYA, SYAU JAI BUDHDHI HOO, SHERAK JAI TARAN HOO, GAONK PADHAAN HAI JAYA,,,,

The consequence of Harela lies in the fact that it provides an opportunity to the cultivator to experiment the quality or flaw of seeds in small scale which suppose to use in mass scale, at the same time for young dudes (like me ) its time to get pocket money from elders. 

Once again I wish you all a very happy Harela. Bhagwan se yehi prarathana hai “is prithwi ko global warming se dure rakhna aur sada such&samridhdhi banaye rakhna”


Best Wishes and Regards


sanjupahari
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Offline पंकज सिंह महर

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Re: हरेला(हरयाव): Harela
« Reply #49 on: July 16, 2008, 11:57:07 AM »
रोग शोक निवारणार्थ प्राण रक्षक वनस्पते, इदा गच्छ नमस्तेस्तु हर देव नमोस्तुते

हरेला पर्व आप सभी के लिये मंगलमय हो, सुखमय, शांतिमय हो। यह पर्व आप सभी के घर में सुख, शांति, समृद्धि, ऎश्वर्य लेकर आये। आप सभी सफलता के नित नये सोपान चढ़ते रहें।

जय उत्तराखण्ड!
आंखों के आगे वनश्री के खुलते पट न्यारे-२ हैं,
छोटे-छोटे खेत और आडू सेबों के बगीचे, देवदार वन,
जो नभ तक अपना छवि जाल पसारे हैं,
मुझको तो हिम से भरे अपने पहाड़ ही प्यारे हैं.

Offline Himanshu Risky Pathak

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Re: हरेला(हरयाव): HARELA FESTIVEL OF UTTARAKHAND
« Reply #50 on: July 16, 2008, 12:38:06 PM »
हरेला मेले की तैयारियां पूरी उद्घाटन आज
जागरण कार्यालय, भीमताल: बुधवार से नगर में शुरू होने वाले हरेला मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मल्लीताल स्थित रामलीला मैदान में हरेला खेल एवं सांस्कृतिक मंच के तत्वावधान में आयोजित इस मेले में इस बार ढाई सौ से अधिक दुकानें लगी हैं। मेला परिसर में चारो ओर से लाइटिंग की व्यवस्था कर पूरे क्षेत्र को बिजली से चकाचांैध कर दिया गया है। मेले का उद्घाटन बुधवार को सांसद केसी सिंह बाबा अपराह्न 2 बजे करेंगे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि उक्रांद के केन्द्रीय अध्यक्ष डा. नारायण सिंह जंतवाल तथा विशेष अतिथि सांसद प्रतिनिधि डा. हरीश बिष्ट होंगे। मेला समिति द्वारा इस बार मेले को भव्य रूप दिया जा रहा है। पांच दिनों तक चलने वाले मेले में इस बार हर रोज सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। नगर के स्कूलों समेत विभिन्न स्थानों से सांस्कृतिक दलों को आमंत्रित किया गया है। समिति के अध्यक्ष सुभाष जोशी ने बताया कि मेले की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मेला परिसर में सफाई, पानी व चिकित्सा व्यवस्था आदि के पूरे इंतजाम कर दिए हैं। इसके अलाव पुलिस सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौकसी बरत रही है। तैयारियों को लेकर समिति संरक्षक मनोहर लाल चौधरी, व्यवस्थापक जगदीश पांडे, सचिव कमलेश रावत, लोकनाथ गिरि, ललित लोहनी, संदीप पांडे, चंदन बिष्ट, खीमानन्द दुम्का, उपापति भट्ट आदि ने मेला परिसर का निरीक्षण किया। हरेला पर्व के अवसर पर 16 जुलाई बुधवार को भीमताल विकासखंड के सभी प्राथमिक व जूनियर स्कूलों में अवकाश रहेगा। उत्तराखंड प्राथमिक शिक्षक संघ की भीमताल शाखा की मांग पर खंड शिक्षा अधिकारी ने अपने कोटे से हरेला अवकाश घोषित किया है। संघ के मंत्री हरीश पाठक ने बताया कि अब बुधवार स्कूल बंद रहेंगे।

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Offline पंकज सिंह महर

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Re: हरेला(हरयाव): HARELA FESTIVEL OF UTTARAKHAND
« Reply #51 on: July 16, 2008, 12:58:30 PM »


डिकारे, हरेला, भीमताल का हरेला मेला और हरेले की शुभकामनायें देते लोग।
आंखों के आगे वनश्री के खुलते पट न्यारे-२ हैं,
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Offline दिनेश मन्द्रवाल

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Re: हरेला(हरयाव): HARELA FESTIVEL OF UTTARAKHAND
« Reply #52 on: July 16, 2008, 01:03:57 PM »
सभी सदस्यों को हरेला/हरियाली पर्व की हार्दिक शुभकामनायें।
जय देवभूमि उत्तराखण्ड, तुझे शत-शत प्रणाम

Offline K C Joshi

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Re: हरेला(हरयाव): HARELA FESTIVEL OF UTTARAKHAND
« Reply #53 on: July 16, 2008, 01:13:49 PM »
hapaay harela to all mera pahad members
jee rayaa jaagi raya


जय मां दूनागिरी, सब्बु भल करिये।

Offline कमल

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Re: हरेला(हरयाव): HARELA FESTIVEL OF UTTARAKHAND
« Reply #54 on: July 16, 2008, 01:18:44 PM »
यह भी पढ़ें.

कका बालकनी में बैठे हुए सामने पार्क में खेलते हुए बच्चों को देख रहे थे.साथ ही पातड़ा (पंचाग) भी देख रहे थे. मैने उनसे पूछा.

"कका.. पंचाग में क्या देख रहे हो..? "

"अरे देख रहा था हरेला कब है. भोल (कल) हरेला है."

"ओ..कल है! कका बताइये कल क्या क्या करना है. "

http://kakesh.com/2008/harela-festival-of-uttarakhand

Offline पंकज सिंह महर

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Re: हरेला(हरयाव): HARELA FESTIVEL OF UTTARAKHAND
« Reply #55 on: July 16, 2008, 02:29:41 PM »
हरेला वैसे तो सभी जातियों में हर घर में बोया जाता है, लेकिन किसी-किसी घर में नहीं बोया जाता, इसके पीछे कारण यह है कि हरेले के दिन यदि उस घर में किसी की मृत्यु हो जाय तो हरेला तब तक नहीं बोया जा सकता जब तक हरेले के दिन उस घर में किसी बच्चे का जन्म न हो। साथ ही एक छूट भी है ;D  ;D कि यदि उसी घर में गाय की भी बछिया हो जाये तो भी हरेला बोना शुरु किया जा सकता है।
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Offline Virendra S. Vishth/वीरेन्द्र सिंह बिष्ट

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Re: हरेला(हरयाव): HARELA FESTIVEL OF UTTARAKHAND
« Reply #56 on: July 16, 2008, 07:41:42 PM »
सभी भाई बन्दों को हरेला की शुभकामनाएं..

हमारे घर में भी हरेला नहीं बोया जाता, लेकिन इस दिन हलवा, पूरी, भूड़े आदि बनाकर तथा हमारे पंडित जी तथा अन्य लोगों से मिले हरेला को सिर पर रख कर हम यह त्योहार मनाते है,

वीरेन्द्र

हरेला वैसे तो सभी जातियों में हर घर में बोया जाता है, लेकिन किसी-किसी घर में नहीं बोया जाता, इसके पीछे कारण यह है कि हरेले के दिन यदि उस घर में किसी की मृत्यु हो जाय तो हरेला तब तक नहीं बोया जा सकता जब तक हरेले के दिन उस घर में किसी बच्चे का जन्म न हो। साथ ही एक छूट भी है ;D  ;D कि यदि उसी घर में गाय की भी बछिया हो जाये तो भी हरेला बोना शुरु किया जा सकता है।
धन खोया तो कुछ नहीं खोया, तन खोया तो थोड़ा-बहुत खोया..   पर यदि चरित्र खोया तो सब कुछ खोया..

Offline Charu Tiwari

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Re: हरेला(हरयाव): HARELA FESTIVEL OF UTTARAKHAND
« Reply #57 on: July 16, 2008, 09:00:45 PM »
आप सभी को हरेले की हार्दिक शुभकानाएं

Online एम.एस. मेहता /M S Mehta

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Re: हरेला(हरयाव): HARELA FESTIVEL OF UTTARAKHAND
« Reply #58 on: July 17, 2008, 09:32:14 AM »
धूमधाम से मना हरेला पर्वJul 16, 11:26 pm

बागेश्वर। जनपद के विभिन्न स्थानों में हरेला त्यौहार धूमधाम के साथ मनाया गया। इस दौरान लोगों ने मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना कर हरेला चढ़ाया व इसके बाद आपस में भी हरेला लगाकर शुभकामनाएं दी। हरेला पर्व के चलते आज मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। त्यौहार के चलते आवागमन भी अधिक रहा।
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Re: हरेला(हरयाव): HARELA FESTIVEL OF UTTARAKHAND
« Reply #59 on: July 17, 2008, 09:38:14 AM »
हरेला पर्व पर जगह-जगह हुआ वृक्षारोपणJul 16, 11:26 pm

लोहाघाट। सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक हरेला पर्व यहां धूमधाम से मनाया गया। विभिन्न ग्रामीण अंचलों में लोगों ने वृक्षारोपण कर उनकी रक्षा का संकल्प लिया तथा खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गयी। पाटी विकास खण्ड में सरस्वती कलाकेन्द्र धरसौं, वैलफेयर सोसायटी तथा युवक मंगल दल धरसौं की ओर से गांव में वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। शुरूआत खुदाई मंदिर से हुई। इस दौरान बांज, उदिश व माल्टा, संतरा के फलदार पौधे लगाये गये। वृक्षारोपण कार्यक्रम का निर्देशन नवीन रसीला ने किया। शाम को सरस्वती कलाकेन्द्र की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गये। मुख्य अतिथि प्रधानाचार्य हीरा राम आर्य व अध्यक्षता कर रहे अनुसूचित जाति जन जाति महासंघ के क्षेत्रीय अध्यक्ष नवीन आर्य ने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ने का आह्वान किया। युवक मंगल दल धरसौं द्वारा बालीबाल प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। लोहाघाट व बाराकोट विकास खण्डों में भी बड़े पैमाने पर वृक्ष लगाये गये।

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Re: हरेला(हरयाव): HARELA FESTIVAL OF UTTARAKHAND
« Reply #60 on: July 17, 2008, 10:57:39 AM »

त्योहार व संस्कृति को बचाना जरुरी: बाबा

भीमताल: कई दशकों से निरंतर आयोजित होने वाला हरेला मेला बुधवार को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ शुरू हो गया। हरेला खेल एवं सांस्कृतिक विकास समिति के तत्वावधान में मल्लीताल स्थित रामलीला मैदान में पांच दिनों तक चलने वाले इस मेले को सांसद केसी सिंह बाबा ने दीप प्र”वलित कर विधिवत शुभारम्भ किया। उद्घाटन अवसर पर अपने सम्बोधन में श्री बाबा ने कहा कि अपने परम्परागत तीज-त्योहारों व संस्कृति को बचाए रखने के लिए मेलों का विशेष महत्व है। ऐसे आयोजनों को निरंतर करते रहना चाहिए। श्री बाबा ने कहा कि हरेला पर्व हरियाली व सुख समृद्धि का प्रतीक है। आज तेजी से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। मैदानी क्षेत्रों के साथ अब पर्वतीय इलाकों में भी पर्यावरण दूषित हो रहा है। पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए सभी को आगे आना होगा। विशिष्ट अतिथि उक्रांद के केन्द्रीय अध्यक्ष डा. नारायण सिंह जंतवाल ने कहा कि मेले किसी भी व्यक्ति के जीवन को नई दिशा देने के लिए प्रेरणादायक होते हैं। ऐसे मौसम में जब चारों ओर हरियाली छाई हो और उसके बीच हरियाली को बचाए रखने के लिए मेले आयोजित होने से इसका महत्व और भी अधिक हो जाता है। ब्लाक प्रमुख गीता बिष्ट ने पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए ऐसे आयोजनों को निहायत जरूरी बताया। डा. हरीश बिष्ट ने कहा कि हरेला मेला हरियाली का प्रतीक होने के साथ ही दूर-दूर रहने वाली बहू-बेटियों को मिलाने के लिए लाभकारी है। अध्यक्षता करते हुए नगर पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि यहां का हरेला मेला नगर व ब्लाक की धरोहर है। इसे आगे बढ़ाने के लिए सभी को आगे आना होगा। समिति के अध्यक्ष सुभाष जोशी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर नगर के विभिन्न विद्यालयों में अव्वल रहे विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन नवीन पांडे, अजय खड़का व संदीप पांडे ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर समिति संरक्षक मनोहर लाल चौधरी, उपाध्यक्ष जगदीश पांडे, सचिव कमलेश रावत, पूर्व प्रमुख चंदन सिंह अधिकारी, नन्दा बल्लभ जोशी, लीलाधर पांडे, लोकनाथ गिरि, ललित लोहनी, चंदन बिष्ट, दयाल सिंह, खीमानन्द दुम्का आदि मौजूद थे।  

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