Author Topic: House Wood carving Art /Ornamentation Uttarakhand ; उत्तराखंड में भवन काष्ठ कल  (Read 6296 times)

Bhishma Kukreti

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भनार (बड़कोट , चम्पावत ) के  भवन संख्या 1 में कुमाऊँ  शैली'   की  'काठ  कुर्याणौ  ब्यूंत 'की  काष्ठ कला अंकन ,  अलंकरण

Traditional House Wood carving Art of Bhanar village, Barkot,  Champawat, Kumaun 
कुमाऊँ ,गढ़वाल, उत्तराखंड  के भवन ( बाखली,  तिबारी, निमदारी, जंगलादार  मकान , खोली ,कोटि बनाल )  में ' कुमाऊँ  शैली'   की  'काठ  कुर्याणौ  ब्यूंत 'की  काष्ठ कला अंकन ,  अलंकरण,-378

 संकलन - भीष्म कुकरेती   
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 चम्पावत से भी कुछ विशेष भवनों की सूचना मिलती जा रही हैं. आज भनार  ( बड़कोट , चम्पावत ) के  भवन संख्या 1  की काष्ठ कला अलंकरण पर चर्चा होगी।   भनार का यह भवन अपने समय का भव्य भवन है,  तिपुर  व दुखंड भवन है।  भनार (बड़कोट , चम्पावत ) के इस भवन संख्या 1  में  खोली के  अतिरिक्त , कक्षों व खड़कियों व छाजों  के द्वार -सिंगाड़ों (स्तम्भों ) में सपाट ज्यामितीय कटान से  कार्य  हुआ है जिससे इन भागों में कोई विशेष उत्कीर्णन /अंकन दृष्टिगोचर नहीं होता है।
भनार (बड़कोट , चम्पावत ) के इस भवन  की खोली में  उप सिंगाड़ों  व दरवाजों के पैनलों में काष्ठ कला उत्कीर्ण हुयी है।  भनार (बड़कोट , चम्पावत ) के प्रस्तुत भवन  में खोली के दोनों ओर  मुख्य  स्तम्भ दो दो उप स्तम्भों (सिंगाड़ों ) के युग्म से निर्मित हैं और दोनों उप स्तम्भों में कला उत्कीर्णन पृथक पृथक शैली में हुआ है।
 एक उप स्तम्भ के आधार में  चौखट आकर है जिसके उपर X  जैसे चित्रकं हुआ है जिसके ऊपर के चौखट में उलटा  बड़ा त्रिशूल का ऊपरी शूल अंकित हुएहैं . इस आकृति के ऊपर एक बड़ा चौकोर नुमा दीर्घ आकर का  ड्यूल (wooden plate ) है जिसके ऊपर लघु  आकार का ड्यूल है। लघु आकर के ड्यूल के ऊपर गोल घट नुमा आकृति है जिसके ऊपर जाल नुमा कुछ कुछ अंकिन हुआ  है।  इस घट आकृति के ऊपर चौखट नुमा ड्यूल है जिसके ऊपर X  आकृति  कुर्याण /अंकन हुआ है।  ड्यूल के ऊपर के चौखट नुमा आकृति में उलटा पुष्प कलियों का अंकन हुआ है। इस आकृति के ऊपरी भाग में स्तम्भ में उल्टे  व पुनः सीधे कमल कली का अंकन हुआ है।  यहां से उप स्तम्भ ऊपर बढ़कर मुरिन्ड /मथिण्ड /शीर्ष /header  का स्तर /layer  बन जाता है।  दूसरे  उप स्तम्भ में आधारिक चौखट में पहले उप स्तम्भ जैसी आकृति अंकित हुयी है व ऊपर  उल्टे त्रिशूल का   ऊपरी भाग अंकन हुआ है।  इस भाग के ऊपर सपाट ड्यूल है , ड्यूल के ऊपर घट के ऊपर पत्तियों का अंकन हुआ है।  इस घट आकार के ऊपर  ड्यूल है व ड्यूल के ऊपर घट है जिसपर कुछ ज्यामितीय कटान के चित्र अंकित हुए हैं।  इस घट के ऊपर गट्टे का दिल है। इस आकृति के ऊपर उप स्तम्भ में सर्पिल आकर के लताओं का अंकन हुआ है।  यहां से उप स्तम्भ ऊपर जाकर मुरिन्ड /मथिण्ड  का स्तर /layer  बन जाता है।  खोली का मुरिन्ड/header  चौकोर है।  मुरिन्ड /header  में देव मूर्ति स्थापित है.
 द्वार के दरवाजे के कुछ  पैनल /पट्टिका /तख्ती पर चार दलीय पुष्प का कटान। हुआ है   
 भवन के बाह्य दीवारों पर चक्र , मयूर , कोई देव आकृति , पुष्प व शगुन (जैसे  पूजा में चौकल में गणेश बनाते समय )  आकृति की पेंटिंग हुयी है। 
 निष्कर्ष निकलता है कि  भनार (बड़कोट , चम्पावत ) के इस भवन संख्या 1  में ज्यामितीय , प्राकृतिक , अलंकरण कला अंकन हुआ है।  काष्ठ अंकन /उत्कीर्णन /कुरयाण    महीन व उत्कृष्ट कोटि का है। 
प्रेरणा  आभार :  अमृता वाल्दिया
सूचना व फोटो आभार : Jay Thakkar 
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
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Bakhali House wood Carving Art in  Champawat Tehsil,  Champawat, Uttarakhand;  Bakhali    House wood Carving Art in  Lohaghat Tehsil,  Champawat, Uttarakhand;  Bakhali , House wood Carving Art in  Poornagiri Tehsil,  Champawat, Uttarakhand;  Bakhali , House wood Carving Art in Pati Tehsil ,  Champawat, Uttarakhand;  चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला,  चम्पावत    तहसील , चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला,  ; लोहाघाट तहसील   चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला अंकन ,  पूर्णगिरी तहसील ,  चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला अंकन   ;पटी तहसील    चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला,, अंकन   

Bhishma Kukreti

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बोकता  (गंगोलीहाट , पिथौरागढ़ ) के एक  बाखली युक्त भवन में कुमाऊं शैली की  'काठ  कुर्याणौ  ब्यूंत' की  काष्ठ कला अलंकरण अंकन

   Traditional House Wood Carving Art  of Bokata, Gangolihat   , Pithoragarh
गढ़वाल,कुमाऊँ,उत्तराखंड, के भवनों ( बाखली,तिबारी , निमदारी,जंगलेदार  मकान,खोली,कोटि बना  )  में कुमाऊं शैली की  'काठ  कुर्याणौ  ब्यूंत' की  काष्ठ कला अलंकरण अंकन - 379
 संकलन - भीष्म कुकरेती
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  पिथौरागढ़ से निरंतर  काष्ठ  कलयुक्त विशेष भवनों की सूचना  मिलती आ रही है।  आज बोकता  (गंगोलीहाट , पिथौरागढ़ ) के एक  बाखली या दीर्घ सामूहिक भवन में कुमाऊं शैली की  'काठ  कुर्याणौ  ब्यूंत' की  काष्ठ कला अलंकरण अंकन पर चर्चा होगी।
 बोकता  (गंगोलीहाट )  में प्रस्तुत बाखली  तिपुर  व दुखंड /तिभित्या  है।  भवन में तीन खोलियाँ व प्रत्येक तल में छाज /झरोखे गवाक्ष /ढुड्यार व कई खिड़कियां हैं जिनमे काष्ठ कला, उत्कीर्ण उल्लेखनीय है।   
भ्यूंतल (ground floor ) के कक्ष गौशाला व भंडार गृह हेतु उपयोग होते हैं अतः  भ्यूंतल के कश द्वार /सिंगाड़ों में विशेष कला उल्लेखनीय नहीं है।  भ्यूंतल व पहले तल के मध्य छाजों के आधार एक चौकोर बौळी  / शहतीर लगी हैं।  इन बौळियों  में रेखा कृत तीन उभर की पंक्ति उत्कीर्णित हुयी हैं।  साधारणतया  कुमाऊं में मय पिथौरागढ़ में शहतीरों/लट्ठा में प्राकृतिक कला अंकित रहती है। 
 खोलियाँ भ्यूंतल से पहले तल तक पंहुचीं है।  खोलियों  में काष्ठ  कला सिंगाड़ /स्तम्भ व मुरिन्ड /header  में उल्लेखनीय है।  खोली के मुख्य सिंगाड़ /स्तम्भ उप स्तम्भों /सिंगाड़ों  के युग्म /जोड़ से निर्मित हुए हैं।  उप सिंगाड़ों /स्तम्भ के आधार में उल्टे  कमल पंखुड़ियों से घुंडी /कुम्भी निर्मित हुयी हैं , कुम्भी के ऊपर ड्यूल है।  ड्यूल के ऊपर  सीधे कमल दल के अंकन से गोल घट आकार निर्मित होता है।  घट के ऊपर ड्यूल है व पुनः सीधा कुछ ऊँचा कमल दल अंकित हुआ है। यहां से स्तम्भ सीधे हो ऊपर मुरिन्ड /मथिण्ड /header  के  स्तर /layer  बन जाते हैं।  मुरिन्ड /header  कई तलों का है।  मुरिन्ड में चार या पांच देव आकृतियां अंकित हुयी हैं।  मुरिन्ड  के ऊपर छपरिका  भी है।  छाजों /झरोखों /ढुड्यारों  के छेद  अंडाकार हैं व ऊपर कलयुक्त तोरणम कटे हैं।  छाज के छेद के  निम्न ओर  पट्टिकायें   /तख्ते हैं। कुछ छज्जों के ढक्क्न आजकल के दरवाजों जैसे पैनल युक्त हैं।  छाजों  के स्तम्भ कला में बिलकुल खोली की  कलायुक्त  ( पदम् पुष्प अंकन से निर्मित घुंडी /कुम्भी आदि ) सामान हैं।  इसी तरह कुछ लघु खिड़कियों /मरियों के स्तम्भ भी कला में खोली स्तम्भ सामान हैं। 
 बाखली के  भ्यूंतल व पथम तल की  खिड़कियों के आंतरिक मुरिन्ड /header में   प्राकृतिक या अमूर्त कला अंकन हुआ है।  जबकि बाहर की और पाषाण कला उल्लेखनीय है।
   दूसरे तल की खिड़कियों में सपाट कटान की कला दृष्टिगोचर होती है। 
निष्कर्ष निकलता है कि  बोकता  (गंगोलीहाट )  में प्रस्तुत बाखलीभवन में प्राकृतिक , ज्यामितीय व मानवीय अलंकरण  कला उत्कीर्णन हुआ है। बोकता  में  प्रस्तुत . भवन  प्रगुण्य प्रकार है व काष्ठ कला उत्कृष्ट है। 
सूचना व फोटो आभार:बालकृष्ण ध्यानी
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . भौगोलिक मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
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 कैलाश यात्रा मार्ग   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  अंकन -उत्कीर्णन , बाखली कला   ;  धारचूला  पिथोरागढ़  के बाखली वाले  मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  अंकन उत्कीर्णन   ;  डीडीहाट   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त   अंकन -उत्कीर्णन ;   गोंगोलीहाट  पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  उत्कीर्णन   ;  बेरीनाग  पिथोरागढ़  के बाखली वाले मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त   अंकन  ;  House wood Carving  of Bakhali art in Pithoragarh  to be continued

Bhishma Kukreti

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बिंजोली (एकेश्वर , चौंदकोट , पौड़ी गढ़वाल ) मेंगमाल सिंह गोरला रावत के भवन में गढवाली  शैली की    'काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत '  की  काष्ठ कला अलंकरण, अंकन

गढ़वाल, कुमाऊँ, उत्तराखंड,की भवन (तिबारी,निमदारी,जंगलादार मकान,,बाखली,खोली , मोरी, कोटि बनाल ) में   गढवाली  शैली की    'काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत '  की  काष्ठ कला अलंकरण, अंकन -380
  संकलन - भीष्म कुकरेती   
एकेश्वर (चौंदकोट ) से अच्छी संख्या में काष्ठ कला युक्त भवनों की सूचना मिली है।  इसी क्रम में   आज बिंजोली के गमाल सिंह गोरला रावत के भवन में गढवाली  शैली की    'काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत '  की  काष्ठ कला अलंकरण, अंकन पर चर्चा होगी। 
 बिंजोली के गमाल सिंह रावत  का भवन दुपुर -दुघर है।गमाल सिंह रावत के प्रस्तुत भवन में खोली व तिबारी के  स्तम्भों , व मुरिन्ड /header  काष्ठ कला उल्लेखनीय हैं। खोली भ्यूंतल (ground floor ) से निकलकर पहले तल तक है।
गमाल सिंह रावत की खोली में दोनों ओर मुख्य स्तम्भ हैं जो दो प्रकार के  उपस्तम्भों के युग्म से निर्मित हैं।   एक प्रकार  के  उप स्तम्भ में ज्यामितीय कटान की कला अंकन हुआ है।  दुसरे प्रकार के उप स्तम्भ के आधार में अधोगामी पदम् पुष्प अंकन से कुम्भी निर्मित हुयी है जिसके ऊपर ड्यूल है और जिसके ऊपर उर्घ्वगामी पदम् पुष्प अंकन हुआ है। यहां से उप स्तम्भ सीधे लौकी आकार में ऊपर बढ़ता है।  यहां उलटे कमल ड्यूल व सीधा कमल से घुंडियां निर्मित हुयी है।  ऊपरी सीधे कमल दल से उप स्तम्भ तोरणम के स्कंध में परिवर्तित होता है।  एक अन्य उप स्तम्भ  मुरिन्ड  का स्तर  बनता है।
मुरिन्ड /मथिण्ड /header   में बिलकुल  अर्ध गोल चाप है जैसे धनुष हो।  तोरणम के अंदर देव आकृतियां स्थापित हैं। 
भवन के पहले तल में तिबारी है।  तिबारी में चार स्तम्भ (तीन ख्वाल ) हैं।   कला दृष्टि (पदम् पुष्प )  से तिबारी के  स्तम्भ  खोली की उप स्तम्भों  जैसे ही  है केवल आकार में अंतर् है।  तिबारी के उप स्तम्भ  मोठे हैं।  तिबारी के शीर्ष में तोरणम भी है तो trefoil  जैसे हैं।  तोरणम के स्कन्धों में सूर्यमुखी नुमा पुष्प व प्राकृतिक कला अंकन हुआ है। 
निष्कर्ष निकलता है कि  बिंजोली के गमाल सिंह रावत के भवन में मानवीय , ज्यामितीय, प्राकृतिक कला अलंकरण की काष्ठ कला   विद्यमान  है । 
सूचना व फोटो आभार: उमेश असवाल
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
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Bhishma Kukreti

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     मैठाणा  (नंदप्रयाग , चमोली गढ़वाल ) में योगेश्वर प्रसाद मैठाणी  के भवन में गढवाली  शैली की   'काठ  कुर्याणौ ब्यूंत' की काष्ठ कला  अलंकरण अंकन 

   House Wood Carving Art  from  Maithana, , Nandprayag , Chamoli   
 गढ़वाल, कुमाऊं की भवन (तिबारी, निमदारी,जंगलादार मकान, बाखली , खोली , मोरी, कोटि बनाल ) में गढवाली  शैली की   'काठ  कुर्याणौ ब्यूंत' की काष्ठ कला  अलंकरण अंकन, - 381
(अलंकरण व कला पर केंद्रित)   
 संकलन - भीष्म कुकरेती     
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चमोली में पारम्परिक भवनों की अच्छी संख्याओं में सूचना मिल रही  हैं।   इसी क्रम में आज  मैठाणा  (नंद प्रय्ग , चमोली गढ़वाल ) के पंडित  ज्योतिषाचार्य योगेश्वर प्रसाद मैठाणी  के भवन में काष्ट  कला , अलकरण उत्कीर्णन पर चर्चा होगी।  आज  मैठाणा  (नंद प्रयाग  , चमोली गढ़वाल ) के पंडित  ज्योतिषाचार्य योगेश्वर प्रसाद मैठाणी का भवन ध्वस्त है किन्तु एक समय यह भवन  दशौली के  उकृष्ठ प्रसिद्ध तिबारी खोली युक्त भवनों में होती थी। 
  गढ़वाल में मैठाणा मैठाणी  जाति  का मूल गाँव है.
  मैठाणा  (नंद प्रय्ग , चमोली गढ़वाल ) के पंडित  ज्योतिषाचार्य योगेश्वर प्रसाद मैठाणी     का प्रस्तुत भवन दुपुर व दुघर है।  भवन में काष्ठ कला हेतु  तिबारी के व खोली के  स्तम्भों व खोली के मुरिन्ड /मथिण्ड/header  में काष्ठ कला पर ध्यान देना होगा।  तिबारी चार स्तम्भों वाली है व खोली के मुख्य स्तम्भ उप स्तम्भों से निर्मित हुए हैं।  ुक उप स्तम्भ में कमल पुष्प का अंकन से घुंडी बनी हैं।  शेष उप स्तम्भों में प्राकृतिक अलंकरण अंकन हुआ है। 
तिबारी  के स्तम्भों व खोली के उप  स्तम्भों   में आकार छोड़ कला एक जैसी ही है. आधार में  अधोगामी पद्म पुष्प दल , ऊपर ड्यूल हैं व ऊपर उर्घ्वगामी पद्म  पुष्प अंकन है व पुनः ऊपर यही अंकन प्रक्रिया का दुहराव हुआ है।  खोली व तिबारी के शीर्ष /मुरिन्ड /मथिण्ड /header  में चौखट नुमा है व दोनों में कोई तोरणम /arch  नहीं हैं।  खोली के मुरिन्ड /मथिण्ड /header में  चतुर्भुज देव मूर्ति  स्थापित  है  हैं।
निष्कर्ष निकलता है कि  मैठाणा , बिरबट्टा , दशोली , नंद प्रयाग , चमोली गढ़वाल में पंडित ज्योतिषिचार्य योगेश्वर प्रसाद मैठाणी  के   भवन में ज्यामितीय , प्राकृतिक व मानवीय काष्ठ  अलंकरण , अंकन हुआ है। 
सूचना व फोटो आभार:शशिभूषण मैठाणी   
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत:  वस्तु स्थिति में  अंतर   हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
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गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली , मोरी , खोली,  कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन ,   श्रंखला जारी   
   House Wood Carving Ornamentation from  Chamoli, Chamoli garhwal , Uttarakhand ;   House Wood Carving Ornamentation/ Art  from  Joshimath ,Chamoli garhwal , Uttarakhand ;  House Wood Carving Ornamentation from  Gairsain Chamoli garhwal , Uttarakhand ;     House Wood Carving Ornamentation from  Karnaprayag Chamoli garhwal , Uttarakhand ;   House Wood Carving Ornamentation from  Pokhari  Chamoli garhwal , Uttarakhand ;   कर्णप्रयाग में  भवन काष्ठ कला,   ;  गपेश्वर में  भवन काष्ठ कला,  ;  नीति,   घाटी में भवन काष्ठ  कला,    ; जोशीमठ में भवन काष्ठ कला,   , पोखरी -गैरसैण  में भवन काष्ठ कला,   श्रृंखला जारी  रहेगी


Bhishma Kukreti

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 द्यूलख (चोपड़ा, रुद्रप्रयाग ) में त्रिपाठी परिवार (II ) के भवन में गढवाली शैली की  'काठ कुर्याणौ ब्यूंत' की काष्ठ कला अलंकरण उत्कीर्णन  अंकन

Traditional House wood Carving Art of  Dvyulakh, Chopra Rudraprayag         : 
  गढ़वाल, कुमाऊँ,उत्तराखंड की भवन (तिबारी, निमदारी, बाखली , जंगलादार  मकान ) में गढवाली शैली की  'काठ कुर्याणौ ब्यूंत' की काष्ठ कला अलंकरण उत्कीर्णन  अंकन,- 382 
 
 संकलन - भीष्म कुकरेती
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 द्यूलख (चोपड़ा, रुद्रप्रयाग  )  में त्रिपाठी परिवार से एक अन्य  तिबारी युक्त भवन  की भी सूचना मिली है।  प्रस्तुत भवन में दो तिबारी हैं, एक काश के स्तम्भ  व एक खोली है जिसमे काष्ठ  कला उल्लेखनीय है।  शेष स्थलों क्सक्षों के द्वारों व स्तम्भों में ज्यामितीय अलंकरण कला उत्कीर्णन हुआ है। 
  द्यूलख (चोपड़ा, रुद्रप्रयाग  )  में त्रिपाठी परिवार   (II ) का भवन दुपुर व दुखंड है।  भवन की खोली भ्यूं  तल   (Ground Floor )  में स्थापित है।  खोली के स्तम्भ गढ़वाली शैली के स्तम्भ हैं अर्थात आधार में अधोगामी पद्म पुष्प, दल ऊपर उर्घ्वगामी पुष्प कला अंकन से कुम्भी निर्माण तथा ऊपर मुरिन्ड /मथिण्ड के स्तर स्तम्भों से निर्मित होते है। 
 दो तिबारी पहले तल  में हैं ।   दोनों तिबारियों के  ४ -४ स्तम्भ हैं।  एक तिबारी के स्तम्भों में  आधार में अधोगामी पद्म पुष्प, दल ऊपर उर्घ्वगामी पुष्प कला अंकन से कुम्भी व पुनः दोहराव है।  तिबारी का मुरिन्ड/मथिण्ड /header चौखट है।
दूसरी तिबारी के स्तम्भ लगभग आयताकार चौकोर हैं।  पहले तल में एक कश के स्तम्भ के आधार मे भी  कमल पुष्पों से घुंडी /कुम्भी  निर्मित हुयी हैं। 
निष्कर्ष निकलता है कि द्यूलख (चोपड़ा  रुद्रप्रयाग )  में  त्रिपाठी परिवार (II nd )  के भवन में  ज्यामितीय व प्राकृतिक अलंकरण कला उत्कीर्णन हुआ है। 
सूचना व फोटो आभार:   अश्विनी गौड़

  * यह आलेख भवन कला संबंधी है न कि मिल्कियत संबंधी, भौगोलिक स्तिथि संबंधी।  भौगोलिक व मिलकियत की सूचना श्रुति से मिली है अत: अंतर  के लिए सूचना दाता व  संकलन  कर्ता उत्तरदायी नही हैं . 
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  रुद्रप्रयाग , गढवाल   तिबारियों , निमदारियों , डंड्यळियों, बाखलीयों   ,खोली, कोटि बनाल )   में काष्ठ उत्कीर्णन कला /अलंकरण ,
Traditional House Wood Carving Art (Tibari) of Garhwal , Uttarakhand , Himalaya ; Traditional House wood Carving Art of  Rudraprayag  Tehsil, Rudraprayag    Garhwal   Traditional House wood Carving Art of  Ukhimath Rudraprayag.   Garhwal;  Traditional House wood Carving Art of  Jakholi, Rudraprayag  , Garhwal, नक्काशी , जखोली , रुद्रप्रयाग में भवन काष्ठ कला,   ; उखीमठ , रुद्रप्रयाग  में भवन काष्ठ कला अंकन,  उत्कीर्णन  , खिड़कियों में नक्काशी , रुद्रप्रयाग में दरवाज़ों में उत्कीर्णन  , रुद्रप्रयाग में द्वारों में  उत्कीर्णन  श्रृंखला आगे निरंतर चलती रहेंगी


Bhishma Kukreti

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 सौड़,(कंताल टिहरी गढ़वाल ) में एक भवन में गढवाली शैली की काष्ठ  कला , अलकंरण , उत्कीर्णन , अंकन

Traditional House Wood Carving Art of   Saur, Kantal  Tehri   
  गढ़वाल, कुमाऊँ, देहरादून, उत्तराखंड भवन  (तिबारी, जंगलेदार निमदारी , बाखली, खोली, मोरी, कोटिबनाल   ) में गढवाली शैली की काष्ठ  कला , अलकंरण , उत्कीर्णन , अंकन, -383   

संकलन - भीष्म कुकरेती 
  टिहरी गढ़वाल से भी भवनों की अच्छे संख्या में मिल रहे हैं।  आज टिहरी  में सौड़  (कंताल ) के एक भवन में काष्ठ कला , अलकंरण , उत्कीर्णन, उत्कीर्णन पर चर्चा होगी।  सौड़ कंताल का प्रस्तुत भवन दुपुर व दुघर है । भवन के भ्यूंतल (ground floor ) में कोई कक्ष , द्वार आदि दर्शनीय नहीं है।  कला दृष्टि से सौड़ (कंताल, टिहरी ) के प्रस्तुत भवन में पहले तल पर दो तिबारियों में काष्ठ कला उत्कीर्णन विशेष उल्लेखनीय हैं।  दोनों तिबारियों में स्तम्भों पर कला उत्कीर्णन एक सामान ही है. दोनों तिबारियों में चार चार स्तम्भ स्थापित हुए हैं।  स्तम्भ के आधार में  उलटा कमल पुष्प से कुम्भी /घुंडी निर्मित है इसके ऊपर ड्यूल है , ड्यूल  के ऊपर सीधा कमल दल का अंकन से घुंडी बनी है।  कलम दल के ऊपर स्तम्भ सीधा ऊपर जाता है किन्तु शीर्ष से कुछ नीचे यही आकृतियां प्रकट होती हैं।  स्तम्भ चौखट आकर के हैं। मुरिन्ड /मथिण्ड / शीर्ष /header   भी चौखट हैं। 
निष्कर्ष निकलता है कि सौड़ कंताल (टिहरी गढ़वाल ) के प्रस्तुत भवन में प्राकृतिक व ज्यामितीय कला उत्कीर्णन हुआ है।
  सूचना व फोटो आभार:  राजेंद्र सिंह पंवार     
यह आलेख कला संबंधित है , मिलकियत संबंधी नही है I   भौगोलिक स्तिथि और व भागीदारों  के नामों में त्रुटि   संभव है I 
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गढ़वाल, कुमाऊं , देहरादून , हरिद्वार ,  उत्तराखंड  , हिमालय की भवन  (तिबारी, जंगलेदार निमदारी  , बाखली , खोली , मोरी कोटि बनाल     ) काष्ठ  कला  , अलकंरण , अंकन लोक कला  घनसाली तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला  ;  टिहरी तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला , ;   धनौल्टी,   टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला, लकड़ी नक्काशी ;   जाखणी  तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला  ;   प्रताप  नगर तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला, नक्काशी ;   देव प्रयाग    तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला, ; House Wood carving Art from   Tehri;   

Bhishma Kukreti

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मार्कण्डेयपूरी (मुखवा , उत्तरकाशी )  में  एक मंदिर भवन में  गढवाली शैली के  काठ कुर्याणौ ब्यूंत'  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन 
  Traditional House wood Carving Art in , Markandey Puri , Mukhuva    Uttarkashi   
गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की  परम्परागत भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार मकान , बाखली  , खोली  , कोटि बनाल )  में गढवाली शैली के  काठ कुर्याणौ ब्यूंत'  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन,- 384
 संकलन - भीष्म कुकरेती     
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 यद्यपि मंदिरों में काष्ठ  कला विषय इस श्रृंखला का विषय नहीं  है।  किन्तु मार्कण्डेयपुर  के इस मन्दिर की काष्ठ  शैली व कला से गढवाल की  प्राचीन   भवन शैली व कला आदि  का ज्ञान भी होता है।  इस मंदिर की काष्ठ कला व संरचना  नेलांग घाटी के भवनों में भी मिलती है। 
प्रस्तुत मंदिर भवन  तिपुर व दुखंड है।  भवन पिरामिड संरचना वाला है।   भवन में  तीनों तलों   में बाहर की ओर  बालकोनियाँ हैं।  बालकोनियों के बाह्य भाग में स्तम्भ स्थापित हैं।  तीनों बालकनियों के स्तम्भों से प्रतीत होता है कि  अवश्य ही पहले कुछ स्तम्भों में घुंडी /कुम्भियाँ अंकित थीं जो कमल पुष्प से निर्मित होती हैं।   भवन या तो जल गया था या समय के थपेड़ों से कला सा पद गया है और स्तम्भ की घुंडियां /कुम्भियाँ नहीं दिख रही हैं।   शेष भागों में ज्यामितीय कटान  से सपाट  काष्ठ पट्टिकाओं का प्रयोग हुआ है। 
भवन का महत्व काष्ठ उत्कीर्णन के कारण नहीं अपितु शैली हेतु महत्वूर्ण है।
उत्कीर्णन कला दृष्टि से मार्कण्डेय पुर (मुखवा उत्तरकाशी ) मंदिर भवन में  ज्यामितीय कटान ही हुआ है।   
सूचना व फोटो आभार :  रजत सेमवाल
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत हेतु . भौगोलिक ,  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020     
 Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakkhali,  Mori) of   Bhatwari, Uttarkashi Garhwal,  Uttarakhand ;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakhali,  Mori) of  Rajgarhi, Uttarkashi,  Garhwal,  Uttarakhand;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakkhali,  Mori) of  Dunda, Uttarkashi,  Garhwal,  Uttarakhand ;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakhali,  Mori) of  Chiniysaur, Uttarkashi ,  Garhwal ,  Uttarakhand ;   उत्तरकाशी मकान काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन  , भटवाडी मकान   ,  रायगढी    उत्तरकाशी मकान  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन, चिनियासौड़  उत्तरकाशी मकान  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन  श्रृंखला जारी   

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  सैंज (कालसी  , देहरादून ) में एक पारम्परिक भवन  (सं 1 ) में काठ कुर्याण  की  गढ़वाली शैली में   काष्ठ कला अंकन,  अलंकरण

  Traditional House wood Carving Art of  Sainj , Kalsi  , Dehradun   
 गढ़वाल,कुमाऊँ,  भवन  (तिबारी,निमदारी, जंगलादार  मकान,बाखली,खोली,छाज  कोटि बनाल )  काठ कुर्याण  की  गढ़वाली शैली में   काष्ठ कला अंकन - अलंकरण- 385 

 संकलन - भीष्म कुकरेती

पर्यटन स्थलों से भी मित्र   पारम्परिक  भवनों  की सूचना भेज रहे हैं।  स्वामित्व का नाम न होने से  कला , शैली पर  कोई अंतर् नहीं पड़ता है।  प्रस्तुत जौनसारी पारम्परिक   भवन कष्ट कला व भवन शैली दृष्टि से महत्वपूर्ण है। 
प्रस्तुत सैंज  का   जौन्सारी पारम्परिक भवन दुपुर , दुखंड है ।   भवन में काष्ठ कला उत्कीर्णन हेतु निम्न स्थलों पर ध्यान देना होगा -
भ्यूंतल ( ground floor ) में दस से अधिक स्तम्भों (सिंगाड़ ) , भवन के बरामदे के अंदर कक्ष के द्वार पर कला  उत्कीर्णन, स्तम्भों के मध्य ऊपर स्थापित तोरणम में कला।
परहम तल में बरामदे को ढकने वाले   पट्टियों/पटलों/तख्तों में व कड़ियों में कला , व एक ढ़ुड्यार में तोरणम आदि।; तथा पैनलों में  चित्रकारी। 
भ्यूंट्ल में बरामदे में दोनों ओर  कम से कम दस या अधिक स्तम्भ हैं।  प्रत्येक स्तम्भ में उत्कीर्णन कला सामान है।  प्रत्येक स्तम्भ के आधार में घुंडी /घट/कुम्भी है जो घट आकृति के ऊपर ड्यूल (a  round  Wooden  plate) और ड्यूल के ऊपर उर्घ्वगामी पद्म  पुष्प से कुम्भी निर्मित हुयी है. कमल दल  स्पष्ट हैं।  यहां स्तम्भ /सिंगाड़  लौकी आकर हो ऊपर बढ़ता है और जहां पर सबसे कम मोटाई है वहां पर अधोगामी कमल दल उभरता है जिसके ऊपर ड्यूल  है व ड्यूल  के ऊपर सीधा कमल दल है।  यहां से स्तम्भ   थांत  आकर ले ऊपर शीर्ष /मुरिन्ड /header  के कड़ियों से मिल जाता है।  यहीं से तोरणम के अर्ध चाप भी शुरू होते हैं जो सामने के स्तम्भ के अर्ध चाप से मिल तोरणम निर्माण करते हैं।  तोरणम के स्कन्द सपाट हैं। 
बरामदे के आंतरिक भाग में कक्ष द्वार हैं व द्वारों के पटलों /तख्तों में  सर्पीली आकर में पत्तियों  का उत्कीर्णन हुआ है. शेष स्थलों में ज्यामितीय कटान की कला है। 
 सैंज (कालसी , देहरादून ) के प्रस्तुत भवन के पहले तल में बरामदे   को  सपाट पटलों  से ढका गया है।   वहीं खड़कियाँ भी हैं।  एक मंदिर द्वार नुमा ढु द्यर भी है जो तोरणम का आभास देता है. भवन के पहले तल में  लकड़ी के पटलों पर सफ़ेद रंग से कपशुओं की चित्रकारी भी की गयी है। 
सैंज के प्रस्तुत भवन में प्राकृतिक , ज्यामितीय कटान अलंकरण उत्कीर्ण हुआ है और पशुओं की चित्र भी  दिखते  हैं  (मानवीय अलंकरण ) ।
सूचना व फोटो आभार:   दीपक  चौहान
  * यह आलेख भवन कला अंकन संबंधी है न कि मिल्कियत संबंधी, भौगोलिक स्तिथि संबंधी।  भौगोलिक व मिलकियत की सूचना श्रुति से मिली है अत: अंतर  के लिए सूचना दाता व  संकलन  कर्ता उत्तरदायी नही हैं . 
  Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020   
  Traditional House wood Carving Art of  Dehradun, Garhwal  Uttarakhand, Himalaya   to be continued 
ऋषिकेश, देहरादून के मकानों में  काष्ठ कला अंकन ;  देहरादून तहसील देहरादून के मकानों में  काष्ठ कला अंकन ;   विकासनगर  देहरादून के मकानों में  काष्ठ कला अंकन ;   डोईवाला    देहरादून के मकानों में  काष्ठ कला अंकन  ;  जौनसार ,  देहरादून के मकानों में  काष्ठ कला अंकन


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  दान  कुंडी  (रानीखेत , नैनीताल )  के एक पारम्परिक भवन में  कुमाऊं शैली  की  'काठ कुर्याणौ ब्यूंत' की काष्ठ कला अंकन,अलंकरण 

   Traditional House Wood Carving Art in   Daan Kundi,  Ranikhet, Nainital; 
   कुमाऊँ, गढ़वाल,  उत्तराखंड के भवन ( बाखली,  तिबारी, निमदारी, जंगलादार  मकान,  खोली , कोटि बनाल)  में कुमाऊं शैली  की  'काठ कुर्याणौ ब्यूंत' की काष्ठ कला अंकन,अलंकरण -386   
संकलन - भीष्म कुकरेती
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 नैनीताल आदि स्थलों से भवनों की सूचना सोशल मीडिया से मिलती जा रही है।  आज इसी क्रम में  दान कुड़ी , रानीखेत के एक पारम्परिक भवन  में  काष्ठ कला अंकन,अलंकरण  पर चर्चा होगी।  रानीखेत का विवेच्य भवन  दुपुर व दुखंड /दुघर है। 
भवन में काष्ठ कला  अंकन , उत्कीर्णन  हेतु  खोली के सिंगाड़ों /संगाड़ /स्तम्भ, खोली के मुरिन्ड/मथिण्ड /header , खोली के तोरणम , छाजों  (झरोखे ) के संगाड़ /स्तम्भ , छाजों  के ढुड्यारों (झरोखे/छेदों ) के पटिलों/तख्तों/panels में क्या क्या काष्ठ  कला , अलंकरण उत्कीर्णन हुआ है। 
 भवन के  भ्यूं /भू तल  (Ground  Floor )  में कक्षों /खिड़कियों के द्वारों व  सिंघाड़ों में ज्यामितीय कटान की सपाट कला दृष्टिगोचर होते हैं. उत्कीर्णन दृष्टिगोचर नहीं हो रहा है।  खोली  भ्यूंतल से नहीं अपितु कुछ ऊपर है अर्थात भवन का जीर्णोद्धार हुआ है।  खोली आधे भ्यूंतल से ऊपर पहले तल (first floor ) तक गयी है।  . खोली के संगाड़ /सिंगाड़   दो प्रकार के उपस्तम्भों के योग से निर्मित हैं। दोनों प्रकार के स्तम्भ ऊपर जाकर मुरिन्ड /मथिण्ड के स्तर बनाते हैं।   एक प्रकार के स्तम्भों में सर्पीली लता उत्कीर्णन (प्राकृतिक अलंकरण )  हुआ है।  दूसरे   में कमल दल कला उत्कीर्णन से घुंडियां /कुम्भियाँ निर्मित हुयी है।   
दुसरे प्रकार के उप स्तम्भ के आधार में उल्टे कमल  पंखुड़ियों  से कुम्भी निर्मित होती है जिसके ऊपर ड्यूल है व ड्यूल के ऊपर सीधा कमल दल अंकन हुआ है. यहां से स्तम्भ /संगाड में प्राकृतिक अलंकरण उत्कीर्ण हुआ है।  खोली के मुरिन्ड मे  स्तम्भों का स्तर है।  मुरिन्ड के आंतरिक भाग में तोरणम (arch ) है व तोरणम के स्कन्धों में जालनुमा अंकन हुआ है।   इस मुरिन्ड में धातु का देव मूर्ति जड़ी हैं।  इस आधारिक मुरिन्ड के ऊपर चौखट है जिस पर कुछ उत्कीर्णन हुआ है जो संभवतया पशु चित्र हैं।  मुरिन्ड के ऊपर छप्परिका से बेलन नुमा काष्ठ आकृतियां (लट्टन ) लटके हैं। 
  छाजों के मुख्य स्तम्भ भी कई उप स्तम्भों के जोड़ से निर्मित हुए हैं।  छाजों  के उप स्तम्भों के आधार में कमल दलों का उसी प्रकार प्रयोग हुआ है जैसे   खोली के उप स्तम्भों में है।  किन्तु छाजों  के उप स्तम्भों व खोली के उप स्तम्भों में बड़ा अंतर् है कि  छज्जों के उप स्तम्भ में सीधे कमल दल के ऊपर उप स्तम्भ लौकी आकार धारण करता है ऊपर बढ़ता है व कुछ ऊपर कमल दलों के अंकन दुहराव से कुम्भियाँ /घुंडियां निर्मित होती हैं जैसे कि  आधार में।  छाजों  के ढुड्यार अंडाकार हैं व नीचे तख्ते/पटिले  हैं तो ऊपर तोरणम आर्च अंकन हुआ है।  छाजों  के मुरिन्ड भी उप स्तम्भों से निर्मित हैं व चौखट नुमा है। 
भवन उत्कृष्ट शैली का गिना जायेगा व कला उत्कृष्ट है। 
 निष्कर्ष निकलता है कि   दान कुड़ी , रानीखेत , का प्रस्तुत भवन में ज्यामितीय व प्राकृतिक व मानवीय अलंकरण कला उत्कीर्णण हुआ है। 
सूचना व फोटो आभार: शोभित पांडे
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020
  Traditional House Wood Carving Art in Nainital;  Traditional House Wood Carving Art in Haldwani,  Nainital;   Traditional House Wood Carving Art in  Ramnagar, Nainital;  Traditional House Wood Carving Art in  Lalkuan , Nainital; 
नैनीताल में मकान काष्ठ कला अलंकरण,  ; हल्द्वानी ,  नैनीताल में मकान  काष्ठ कला अलंकरण, ; रामनगर  नैनीताल में मकान  काष्ठ कला अलंकरण,  ; लालकुंआ नैनीताल में मकान  काष्ठ कला अलंकरण 


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 चौक बज़ार दि   मेडिकल  हॉल (अल्मोड़ा ) में  भवन कला  व कुमाऊं की    'काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत'  की काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण
Traditional House Wood Carving art of,   Chouk  Bazar, Almora, Kumaon
 
कुमाऊँ ,गढ़वाल, उत्तराखंड  के भवन  में ( बाखली ,तिबारी, निमदारी ,जंगलादार  मकान  खोली,  कोटि बनाल )    कुमाऊं की    'काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत'  की काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण-  387
 संकलन - भीष्म कुकरेती
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 गजेंद्र बिष्ट से  अल्मोड़ा से कई भवनों की सूचना मिली है।   इसी कर्म में आज  चौक बजार  अल्मोड़ा में  द  मेडिकल हॉल  के  भवन में  कुमाऊं की    'काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत'  की काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण पर चर्चा होगी।   द  मेडिकल हॉल  पहले तल पर स्तिथ है।  भवन के पहले तल में छाजों में कला पर चर्चा होगी। 
 तीन या चार छाजों (झरोखे )  के मुख्य स्तम्भ  तीन उप स्तम्भों के युग्म से निर्मित हुए हैं।  सभी उप स्तम्भ के आधार  में अधोगामी पद्म  पुष्प उत्कीर्णन से कुम्भी निर्मित हुयी है जिसके ऊपर   ड्यूल है घट  पेट अंकन हुआ है जिसके ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प उत्कीर्णन हुआ है जिसके ऊपर से उप स्तम्भ ऊपर बढ़ते हैं व  यही कर्म ( उलटा पद्म  पुष्प, ड्यूल , सीधा पद्म पुष्प  आदि )  दो बार पुनरावृति हुयी है।   ऊपरी कमल दल के   पश्चात उप स्तम्भ सीधे ऊपर शीर्ष कड़ी /मुरिन्ड /मथिण्ड  से मिलते हैं।   छाज के अंदर ऊपरी भाग में तोरणम /arch   स्थापित हैं जिसके स्तम्भ में बेल बूटों का उत्कीर्णन हुआ है। 
छाज /झरोखे के अंदर नीचे बाग़ पटला /तख्ता से ढका है।  तीनों पटलों में अलग अलग उत्कीर्णन हुआ है।  किनारे के दोनों पटलों में शुभ चिन्ह चक्र (जैसे पूजा में चौकल में होता है ) . मध्य पटिले  में गोल जलयुक्त प्राकृतिक कला अंकन हुआ है। 
निष्कर्ष निकलता है कि  चौक बजार के द  मेडिकल हॉल भवन   के पहले तल भाग  में प्राकृतिक , ज्यामितीय कला अलंकरण अंकन हुआ है। 
सूचना व फोटो आभार :  गजेंद्र बिष्ट
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020
Traditional House Wood Carving art of , Kumaon ;गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली, कोटि  बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन, लकड़ी पर नक्काशी   
अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ; भिकयासैनण , अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ;  रानीखेत   अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ; भनोली   अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ; सोमेश्वर  अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ; द्वारहाट  अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ; चखुटिया  अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ;  जैंती  अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ; सल्ट  अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ;


 

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