Author Topic: House Wood carving Art /Ornamentation Uttarakhand ; उत्तराखंड में भवन काष्ठ कल  (Read 14444 times)

Bhishma Kukreti

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    रैला में भवन काष्ठ कला

रैला (नैनीताल ) के एक भवन में  काष्ठ कलाअंकन,अलंकरण, उत्कीर्णन
   Traditional House Wood Carving Art in Raila Nainital; 
   कुमाऊँ, गढ़वाल, केभवन ( बाखली,तिबारी,निमदारी, जंगलादार मकान,  खोली, )  में कुमाऊं शैली की  काष्ठ कलाअंकन,अलंकरण, उत्कीर्णन  -

संकलन - भीष्म कुकरेती

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नैनीताल से पारम्परिक  कुमाउँनी भवनों के अतिरिक्त ब्रिटिश शैली के भवनों की सूचना अधिक मिल रही हैं।   प्रस्तुत भवन वास्तव में एक होम स्टे है व ब्रिटिश काल या स्वतन्त्रता पश्चात निर्मित हुआ भवन है।     रैला (नैनीताल ) का प्रस्तुत  भवन दुपुर व दुखंड है व आम कुमाऊंनी बाखली आधार पर नहीं है अपितु गढ़वाल में जंगलेदार भवनों की भाँती जंगलदार भवन है।  भवन के तल मंजिल में बरामदे के बाहरी छोर पर  गोल लट्ठे  स्तम्भ हैं।  ऊपरी मंजिल की बालकोनी के बाहर चौखट नुमा स्तम्भ हैं।  स्तम्भों के मध्य आधार में उप जंगले हैं जो XXX  नुमा हैं। कक्षों के सिंगाड़ , द्वारों व बरमदे व बालकोनी के जंगलों में  सर्वत्र ज्यामितीय कटान की सपाट कला दृष्टिगोचर हो रही है। 

सूचना व फोटो आभार: अरविन्द मेहता

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021 

Bhishma Kukreti

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पौखान में भवन काष्ठ कला

पौखान (अल्मोड़ा ) में देवे न  बिष्ट के भवन में कुमाऊं की    ' काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन

Traditional House Wood Carving art of, Paukhan ,  Almora, Kumaon   
 

कुमाऊँ ,गढ़वाल, के भवन  में ( बाखली ,तिबारी, निमदारी ,जंगलादार  मकान  खोली,  कोटि बनाल )   कुमाऊं की    ' काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन -  ५२७

 

 संकलन - भीष्म कुकरेती
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अल्मोड़ा से अच्छी खासी संख्या में काष्ठ कला युक्त भवनों की सूचना मिलती जा रही है।  इसी क्रम में आज पौखान (अल्मोड़ा ) में देवेन  बिष्ट के भवन में कुमाऊं की    ' काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन पर चर्चा होगी।   पौखान (अल्मोड़ा ) में देवन  बिष्ट का भवन दुपुर व दुखंड है।  तल मंजिल मवेशियों हेतु संरक्षित है अतः कमरों में कोई विशेषतः काष्ठ कला दृष्टिगोचर नहीं हो रही है।  पौखान (अल्मोड़ा ) में देेवेन  बिष्ट के भवन के    प्रथम मंजिल में  चार छाज (झरोखे ) हैं।  इन सभी के सिंगाड़ एक जैसे हैं  छाजों के दक्क्णों /दरवाजों में भी ज्यामितीय सपाट कटान के अतिरिकी कोई उत्कीर्र्ण नहीं हुआ है।

छाजों से सिंगाड़ कला युक्त हैं।  प्रत्येक छाज के सिंगाड़ के आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल से कुम्भी निर्मित हुयी है जिसके ऊपर ड्यूल है फिर कुम्भी है व ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल कटान से कुम्भी निर्मित हुयी है।  यहां से सिंगाड़ लौकी आकर लेता है व फिर कुछ सिंगाड़ों  (स्तम्भ ) में  ऊपर कुम्भियों की पुनरावृति होती है।  छाजों के मथिण्ड /मुरिन्ड /शीर्ष /header  में सपाट कलाकारी ही है व कोई तोरणम नहीं दिख रहे हैं जो आमतौर पर कुमाउँनी छाजों की विशेषता है। 

छाजों के *शीर्ष में कोई देव मूर्ति भी स्थापित नहीं है ना ही अंकन हुआ है।

निष्कर्ष निकलता है कि   पौखान (अल्मोड़ा ) में देवेन  बिष्ट के भवन में उत्कृष्ट किस्म का उत्तीर्ण हुआ है व ज्यामितीय व प्राकृतिक अलंकरण मिलता है। 

सूचना व फोटो आभार :  देवेन बिष्ट

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

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भनार (चम्पावत ) भवन  ३ में काष्ठ कला

 भनार (चम्पावत )  के भवन संख्या ३ में काष्ठ कला अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन

Traditional House Wood carving Art of Bhanar     Champawat, Kumaun 

कुमाऊँ ,गढ़वाल, के भवन ( बाखली,   खोली , )  में ' कुमाऊँ  शैली'   की   काष्ठ कला अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन  -528

 संकलन - भीष्म कुकरेती   
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भनार के कुछ भवनों की जानकारी मिली। है।  प्रस्तुत भनार    तिपुर ( तल मंजिल + २ मंजिल )  व दुखंड है।  तल मंजिल में गौशाला व भंडार हैं व काष्ठ कला  ज्यामितीय सपाट कटान  के अतिरिक्त   कुछ विशेष उल्लेखनीय नहीं है।  खोली तल मंजिल पर है जिसके स्तम्भ (सिंगाड़ों  ) में कुम्भियाँ कटी हैं।  खोली के मथिण्ड /मुरिन्ड /header /शीर्ष में कोई  है किन्तु छायाचित्र से स्पष्ट है कि मुरिन्ड में देव मूर्ति स्थापित हुयी होगी।

भनार के भवन संख्या ३ के प्रथम मंजिल में पांच जोड़े छाज दृष्टिगोचर हो रहे हैं।  छाजों से स्तम्भ व तोरणम (मथिण्ड ) में सपाट काश्त कला दिख रही है।  झरोखों (छाजों ) के ढक्क्नों व दरवाजों में ज्यामितीय कटान ही मिल रहा है।  ढक्क्नों के नीचे भी सपाट व जालीनुमा संरचना मिली हैं। 

भनार के प्रस्तुत भवन में तीसरे मंजिल में जंगला स्थापित हुआ है।  जंगले में स्तम्भ सपाट ज्यामितीय कटान मिला है।  जंगले के स्तम्भों के मध्य आधार में भी उप जंगला संरचना स्थापित हुए हैं।  जंगलों के उप स्तम्भों में ज्यामितीय  कला दृष्टिगोचर हो रही हैं।  कडिओं में भी सपाट कटान हुआ है। 

सूचना व फोटो आभार : जय  ठक्कर  संग्रह

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

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  चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला,  चम्पावत    तहसील , चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला,; लोहाघाट तहसील   चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला अंकन ,  पूर्णगिरी तहसील ,  चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला अंकन   ;पटी तहसील    चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला,, अंकन   

Bhishma Kukreti

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  देवराड़ी बागेश्वर में स्व डी  डी  पंत के भवन में  काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन अंकन 

Tradiitonal House wood Carving Art in Bageshwar, Kumaun
कुमाऊँ, गढ़वाल, के भवन(बाखली, तिबारी,निमदारी,जंगलेदार,मकान, खोली,कोटि बनाल)  में कुमाऊं शैली; की काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन अंकन- 529 
संकलन - भीष्म कुकरेती

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 जनपद बागेश्वर के देवराड़ी में  कुमाऊं विश्व विद्यालय के प्रथम कुलपति स्व डी डी पंत के भवन  दुपुर है।  तल मंजिल में खोली शुरू होती है।  तल मंजिल गौशाला व भंडार हेतु सुरक्षित है।  इन कक्षों में सिंगाड़ (स्तम्भ ) , कड़ियाँ सपाट हैं (ज्यामितीय अलंकरण उदाहरण )। 

खोली के स्तम्भों में कमल दलों  के अंकन से से घुंडी निर्मित हुयी हैं व दो घुंडियों के मध्य ड्यूल भी है।  ऊपर मुरिन्ड /मथिण्ड /header में तोरणम भी ज्यामितीय कटान का सपाट संरचना है।  तोरणम के स्कंध में कोई अंकन नहीं दिख रहा है।  ऊपर की कड़ियों में जाली व लड़ियों का अंकन हुआ है।

खोली के मुरिन्ड/शीर्ष  के ऊपर के पांच  चौखटों में अलग देव व पक्षी अंकित हुए हैं।  दो चौखट वर्ग में मयूर , एक चौखट में गणपति , व दो चौखटों में देव अंकन हुआ है।

 जनपद बागेश्वर के देवराड़ी में  कुमाऊं विश्व विद्यालय के प्रथम कुलपति स्व डी डी पंत के भवन के पहले  मंजिल में तीन जोड़ी छाज हैं।  प्रत्येक छाज के सिंगाड़ों /स्तम्भों की कला खोली की सिंगाड़ों की प्रतिरूप ही है।  छाजों के तोरणम /मेहराब के स्कंध भी स्पॉट संरचना वाले ही हैं। 

छाजों के निम्न तल की संरचना में जालीदार/छेद  युक्त  संरचनाएं भी सपाट हैं। 

 जनपद बागेश्वर के देवराड़ी में  कुमाऊं विश्व विद्यालय के प्रथम कुलपति स्व डी डी पंत के भवन कला दृष्टि व अंकन दृष्टि उत्कृष्ट है व इसमें प्राकृतिक , ज्यामितीय व मानवीय अलंकरण लिए हुए हैं। 

सूचना व फोटो आभार: सोनु  पाठक (FB ) 

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है नकि मिल्कियत  संबंधी Iभौगोलिक  व मालिकाना   सूचना  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

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 कांडा तहसील , बागेश्वर में परंपरागत मकानों में   काष्ठकला अंकन  ;  गरुड़, बागेश्वर में परंपरागत मकानों में काष्ठकला अंकन  ; कपकोट ,  बागेश्वर में परंपरागत मकानों में काष्ठकला अंकन )

Bhishma Kukreti

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नागलिंग ( दारमा  घाटी , पिथौरागढ़ ) के भवन संख्या १ में भवन काष्ठ कला अलंकरण, काष्ठ उत्कीर्णन अंकन

   Traditional House Wood Carving Art  of  Nagling  , Pithoragarh

कुमाऊँ,के भवनों ( बाखली,तिबारी , निमदारी,छाजो, खोली स्तम्भ) में कुमाऊं शैली की   काष्ठ कला अलंकरण, काष्ठ उत्कीर्णन अंकन -530

 

 

 संकलन - भीष्म कुकरेती 

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नागलिंग ( दारमा घाटी , पिथौरागढ़ ) के भवन संख्या १ ,  तिमंजिला  है व ऊपरी भाग देख लगता है जैसे भवन ऊपरी पश्चमी उत्तरकाशी या जौनसार बाबर का भवन ही हो।  भवन का तीसरा मंजिल पूरा लकड़ी का है।  भवन के तल मंजिल में दो कमरे व दो खोली नुमा द्वार हैं।  खोलियों , कमरों के  द्वारों के स्तम्भ /सिंगाड़ों  की संरचना एक जैसे ही है।  सिंगाड़ों के आधार में अधोमुखी व उर्घ्वगामी  कमल दल के अंकन से कुम्भी निर्मित हुए हैं।  कमरों के मथिण्ड /मुरिन्ड  चौकोर हैं व लहरों जैसे चित्रांकन का उत्कीर्णन हुआ है। 

खोली के शेरश में तोरणम हैं व तोरणम के स्कन्धों में भी कला कृति उत्कीर्णन हुआ है। 

नागलिंग ( दारमा घाटी , पिथौरागढ़ ) के भवन संख्या १  के पहली मंजिल में दो जोड़ी छाज  हैं व  छाजों के स्तम्भ (सिंगाड़ ) व तोरणम में  वही की वही  कला उपस्थित है जो खोली के सिंगाड़ों /तोरणम में विद्यमान है। 

नागलिंग ( दारमा घाटी , पिथौरागढ़ ) के भवन संख्या १  तीसरी मंजिल में भवन की दीवारें सभी ज्यामितीय कटान से निर्मित कड़ियों , XX  जाली व तख्तों से निर्माण हुआ है। 

 

नागलिंग ( दारमा घाटी , पिथौरागढ़ ) के भवन संख्या १  में प्रकृतिक व ज्यामितीय कला अलंकरण विद्यमान है। 

सूचना व फोटो आभार:  जय दसौनी

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . भौगोलिक मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

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 कैलाश यात्रा मार्ग   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  अंकन -उत्कीर्णन , बाखली कला   ;  धारचूला  पिथोरागढ़  के बाखली वाले  मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  अंकन उत्कीर्णन   ;  डीडीहाट   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त   अंकन -उत्कीर्णन ;   गोंगोलीहाट  पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  उत्कीर्णन   ;  बेरीनाग  पिथोरागढ़  के बाखली वाले मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त   अंकन  ;  House wood Carving  of Bakhali art in Pithoragarh  to be continued

Bhishma Kukreti

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बडोली (एकेश्वर , पौड़ी ) के तेजराम बडोला की निमदारी में भवन काष्ठ कला , उत्कीर्णन

    Tibari House Wood Art in House of  Badoli , Ekeshwar  , Pauri Garhwal       

गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन -५३१

 

 संकलन - भीष्म कुकरेती   

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बडोली से कुछेक भवनों की सूचनाएं उपलब्ध हुयी हैं।  बडोली (एकेश्वर , पौड़ी ) के तेजराम बडोला की निमदारी में भवन काष्ठ कला , उत्कीर्णन  पर चर्चा होगी।  बडोली (एकेश्वर , पौड़ी ) के तेजराम बडोला की निमदारी दुपुर व दुखंड है।  बडोली (एकेश्वर , पौड़ी ) के तेजराम बडोला की निमदारी के सभी कमरों के सिंगाड़ (स्तम्भ ) , द्वारों ,  व  /म्वार /मुरिन्ड /मथिण्ड /header में ज्यामितीय कटान की सपाट कला दृष्टिगोचर होती है।  पहली मंजिल पर बालकोनी (निम दारी ) है जिसके बाहर ९ स्तम्भ हैं।  कुछ रिंग /कंगना रूप कटान छोड़ स्तम्भ सपाट हैं।

निष्कर्ष निकलता है कि बडोली (एकेश्वर , पौड़ी ) के तेजराम बडोला की निमदारी में  केवल ज्यामितीय कटान का उत्कीर्णन हुआ है। 

सूचना व फोटो आभार: सुनील बडोला

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

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गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,बाखली ,  बाखई, कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन नक्काशी श्रृंखला  जारी

Bhishma Kukreti

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सेम गाँव (चमोली गढ़वाल ) में एक भवन में काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन  अंकन

Traditional House Wood Carving Art from  Sem Ganv    , Chamoli   

 गढ़वाल,कुमाऊंकी भवन (तिबारी, निमदारी,जंगलादार मकान, बाखली,खोली) में पारम्परिक गढ़वाली शैली की  काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन  अंकन - 532

(अलंकरण व कला पर केंद्रित) 

 

 संकलन - भीष्म कुकरेती     

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 सेम गाँव (चमोली ) की सूचना मिली है।    सेम गाँव (चमोली गढ़वाल ) का प्रस्तुत भवन दुपुर  व दुखंड है।   सेम गाँव (चमोली गढ़वाल ) के तल मंजिल में  साधारण कक्षों में ज्यामितीय कटान की कला दृष्टिगोचर हो रही है।  तल मंजिल के सभीकमरों के मथिण्ड /मुरिन्ड पर देव आकृति स्थापित हुयी हैं।  सेम गाँव (चमोली गढ़वाल ) के प्रस्तुत भवन के  तल मंजिल  में खोली है।  यद्यपि छायाचित्र में सिंगाड़ /स्तम्भ पूरे नहीं दिख रहे है हैं किन्तु अनुमान सत्य है कि सिंगाड़ों में कुम्भी व लताओं , तरंगों का प्राकृतिक चित्रांकन हुआ है।  खोली के मुरिन्ड /मथिण्ड में चतुर्भुज गणपति की मूर्ती स्थापित हुयी है। 

 सेम गाँव (चमोली गढ़वाल ) के प्रस्तुत भवन के पहले मंजिल में बालकोनी पर  जंगला बंधा है , जंगल के मुख्य स्तम्भ व उप स्तम्भ ज्यामितीय कटान से निर्मित हुए हैं। 

निष्कर्ष निकलता है कि  सेम गाँव (चमोली गढ़वाल ) के प्रस्तुत भवन में प्राकृतिक , ज्यामितीय , मानवीय अलंकरण कला का उत्कीर्णन हुआ है। 

सूचना व फोटो आभार: दिवाकर चमोली

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत:  वस्तु स्थिति में  अंतर   हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली , मोरी , खोली,  कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन ,   श्रंखला जारी   

    कर्णप्रयाग में  भवन काष्ठ कला,   ;  गपेश्वर में  भवन काष्ठ कला,  ;  नीति,   घाटी में भवन काष्ठ  कला,    ; जोशीमठ में भवन काष्ठ कला,   , पोखरी -गैरसैण  में भवन काष्ठ कला,   श्रृंखला जारी  रहेगी

Bhishma Kukreti

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महड़  (दसज्यूला , रुद्रप्रयाग ) में लक्ष्मी प्रसाद पुरोहित के भवन में पारम्परिक गढवाली शैली की काष्ठ कला अलंकरण उत्कीर्णन  अंकन

Traditional House wood Carving Art of  Mahad , Dashjyula Rudraprayag         : 

गढ़वाल, के भवन (तिबारी, निमदारी, बाखली,जंगलेदार  मकान, खोलियों ) में पारम्परिक गढवाली शैली की काष्ठ कला अलंकरण उत्कीर्णन  अंकन,- 533 

 

 

 संकलन - भीष्म कुकरेती

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महड़ से यह दुसरे काष्ठ कला युक्त भवन की सूचना है।  प्रस्तुत महड़  (दसज्यूला , रुद्रप्रयाग ) में लक्ष्मी प्रसाद पुरोहित का भवन दुपुर व दुखंड शैली का भवन है।  प्रस्तुत महड़  (दसज्यूला , रुद्रप्रयाग ) में लक्ष्मी प्रसाद पुरोहित  के  भवन में खोली छोड़ अन्यत्र कमरों में ज्यामितीय कटान से लकड़ी चिरान कर प्रयोग हुआ है।  खोली के स्तम्भों  में एक स्तम्भ के आधार में  अधोगामी कमल दल निर्मित कुम्भी है , फिर ड्यूल आकृति है व फिर अधोगामी कमल दल निर्मित  कुम्भी है।   फिर ऊपर व स्तम्भ के अगल बगल के स्तम्भ में बेलबूटे की चिकतरकारी अंकन हुआ है।  खोली के ऊपर शीर्ष /मथिण्ड /मुरिन्ड/header   में सपाट कड़ियाँ हैं जिनमे बेलबूटे जैसे अंकन ही हुआ है।  शीर्ष में कोई तोरणम नहीं है।  शीर्ष   में उत्कीर्णित चतुर्भुज गणेश मूर्ति स्थापित हुयी है। 

निष्कर्षज निकलता है कि प्रस्तुत महड़  (दसज्यूला , रुद्रप्रयाग ) में लक्ष्मी प्रसाद पुरोहित के  भवन में प्राकृतिक , ज्यामितीय व मानवीय अलंकृत कला अंकन हुआ है। 

सूचना व फोटो आभार:  सुभाष चौहान

  * यह आलेख भवन कला संबंधी है न कि मिल्कियत संबंधी, भौगोलिक स्तिथि संबंधी।  भौगोलिक व मिलकियत की सूचना श्रुति से मिली है अत: अंतर  के लिए सूचना दाता व  संकलन  कर्ता उत्तरदायी नही हैं . 

  Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021   

  रुद्रप्रयाग , गढवाल   तिबारियों , निमदारियों , डंड्यळियों, बाखलीयों   ,खोली, कोटि बनाल )   में काष्ठ उत्कीर्णन कला /अलंकरण ,

 

Traditional House Wood Carving Art (Tibari) of Garhwal , Uttarakhand , Himalaya ; Traditional House wood Carving Art of  Rudraprayag  Tehsil, Rudraprayag    Garhwal   Traditional House wood Carving Art of  Ukhimath Rudraprayag.   Garhwal;  Traditional House wood Carving Art of  Jakholi, Rudraprayag  , Garhwal, नक्काशी, जखोली , रुद्रप्रयाग में भवन काष्ठ कला,   ; उखीमठ , रुद्रप्रयाग  में भवन काष्ठ कला अंकन,  उत्कीर्णन  , खिड़कियों में नक्काशी , रुद्रप्रयाग में दरवाज़ों में उत्कीर्णन  , रुद्रप्रयाग में द्वारों में  उत्कीर्णन  श्रृंखला आगे निरंतर चलती रहेंगी

Bhishma Kukreti

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पूर्वालगांव (टिहरी गढ़वाल ) भवन काष्ठ कला

पूर्वालगांव (घनसाली , टिहरी गढ़वाल ) में मालदत्त तिवारी परिवार के भवन में काष्ठ  कला, अलकंरण, उत्कीर्णन, अंकन
        भवन में पारम्परिक गढवाली शैली की काष्ठ  कला, अलकंरण, उत्कीर्णन, अंकन
 

Traditional House Wood Carving Art of, Purvalganv , Ghansali , Tehri   

गढ़वाल  भवनों (तिबारी, जंगलेदार निमदारी, बाखली, खोली, मोरी, कोटिबनाल ) में पारम्परिक गढवाली शैली की काष्ठ  कला, अलकंरण, उत्कीर्णन, अंकन-534   



संकलन - भीष्म कुकरेती 

 

 

पूर्वालगांव  के मालदत्त तिवारी का प्रस्तुत भवन तिमंजिला (तिपुर ) है व भवन  के प्रथम व द्वितीय मंजिलों में में दो तिबारियां हैं। 

पूर्वालगांव (घनसाली , टिहरी गढ़वाल ) में मालदत्त तिवारी परिवार के भवन के तल मंजिल के कमरों , उनके सिंगाड़ों , द्वारों , मरिंडों /मथिण्डों में सपाट ज्यामितीय कटान की लकड़ी लगीं हैं।  पहले मंजिल की दो तिबारियां हैं जिनके चार चार सिंगाड़ (स्तम्भ ) हैं।  प्रत्येक स्तम्भ के आधार में  क्रमशः उलटे कमल दल व सीधे कमल दल के अंकन से प्राप्त कुम्भियाँ है व ऊपर  सिंगाड़ सपाट हैं।  तिबारी शीर्ष /header में कोई तोरणम नहीं हैं व कड़ियाँ सीधी हैं। तिबारी के शीर्ष में देव मूर्ति स्थापित हैं संभवता धातु की हैं। 

दूसरे मंजिल में भी दो दो तिबारियां हैं एक के स्तम्भ प्रथम तल के सिंगाड़ों की प्रतिरूप हैं किन्तु दूसरी तिबारी के सिंगाड़ चौखट हैं।  दोनों तिबारियों के बाहर जंगले बंधे हैं व  सामने से बांयें वाले   जंगले के मुख्य स्तम्भ भी तिबारी के स्तम्भ की प्रतिरूप हैं किन्तु दांयें वाली तिबारी के समनुक्ख जंगले  के मुख्य स्तम्भ सपाट  हैं। 

निष्कर्ष निकलता है कि पूर्वालगांव  के मालदत्त तिवारी के प्रस्तुत भवन में ज्यामितीय , प्राकृतिक (बहुत कम व दृष्टिगोचर कम हो रहा है ) अलंकरण अंकन हुआ है। 

  सूचना व फोटो आभार: मधुर वादनी तिवारी     

यह आलेख कला संबंधित है , मिलकियत संबंधी नही है I   भौगोलिक स्तिथि और व भागीदारों  के नामों में त्रुटि   संभव है I 

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गढ़वाल, कुमाऊं , देहरादून , हरिद्वार ,  उत्तराखंड  , हिमालय की पारम्परिक भवन  (तिबारी, जंगलेदार निमदारी  , बाखली , खोली , मोरी कोटि बनाल ) काष्ठ  कला  , अलकंरण , अंकन लोक कला  घनसाली तहसील  टिहरी गढवाल  में   पारम्परिक भवन काष्ठ कला  ;  टिहरी तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला , ;   धनौल्टी,   टिहरी गढवाल  में  पारम्परिक  भवन काष्ठ कला, लकड़ी नक्काशी ;   जाखणी  तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला;   प्रताप  नगर तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला, नक्काशी ;   देव प्रयाग    तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला, ; Traditional House Wood carving Art from  Tehri;

Bhishma Kukreti

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  जखोल (उत्तरकाशी )  के भवन में  काष्ठ  कला,  अलकंरण, अंकन उत्कीर्णन
  जखोल , उत्तरकाशी , भवन,  काष्ठ कला   
  Traditional House wood Carving Art in , Jakhol ,   Uttarkashi   
गढ़वाल,  के भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार मकान , बाखली  , खोली  , कोटि बनाल )  में पारम्पपरिक    गढवाली शैली  की    काष्ठ  कला,  अलकंरण, अंकन उत्कीर्णन - 535

 

 संकलन - भीष्म कुकरेती     
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 जखोल यात्रा पंक्ति में होने के कारण यात्री इन जगहों की फोटो लेकर सोशल मीडिया में पोस्ट कर ते हैं।  भवन स्वामित्व की जानकारी न मिलने से कमी तो रह जाती है किन्तु चित्र मिल ही जाते हैं।

प्रस्तुत जखोल के  चित्र में चार पांच भवनों के चित्र दृष्टिगोचर हो रहे हैं।  सभी भवनों की एक विशेषता है कि भवनों की दीवारें सभी काष्ठ की हैं।  भवन निर्माण शैली ७०० -८०० वर्ष प्राचीन आदि शैली के हैं।  छतें कुछ बदली हैं जैसे चददर की छतें। 

एक भवन जो पूरी तरह से दृष्टिगोचर हो रहा है में बालकोनी है व बालकोनी को आधार में लकड़ी पटिलों (तख्तों ) से ढका गया है।  व बाहर की ओर स्तम्भ भी हैं।  सभी कला सपाट ज्यामितीय कटान , अलंकृत कला है है।



सूचना व फोटो आभार : विक्रम सिंह  रावत  (FB )

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत हेतु . भौगोलिक ,  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021   

 Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakkhali,  Mori) of   Bhatwari, Uttarkashi Garhwal,  Uttarakhand ;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakhali,  Mori) of  Rajgarhi, Uttarkashi,  Garhwal,  Uttarakhand;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakkhali,  Mori) of  Dunda, Uttarkashi,  Garhwal,  Uttarakhand ;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakhali,  Mori) of  Chiniysaur, Uttarkashi ,  Garhwal ,  Uttarakhand ;  पारम्परिक   उत्तरकाशी मकान काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन  , भटवाडी मकान   ,  पारम्परिक , रायगढी    उत्तरकाशी मकान  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन, चिनियासौड़  पारम्परिक  उत्तरकाशी मकान  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन  श्रृंखला जारी   

 

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