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House Wood carving Art /Ornamentation Uttarakhand ; उत्तराखंड में भवन काष्ठ कल

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Bhishma Kukreti:


माउंट अब्बौट  (Champawat )  के एक बंगले में ' कुमाऊँ  शैली'   की   काष्ठ कला अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन

Traditional House Wood carving Art of  Mount  Abbot Champawat, Kumaun 
कुमाऊँ ,गढ़वाल, के भवन ( बाखली,   खोली , )  में ' कुमाऊँ  शैली'   की   काष्ठ कला अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन  -593
 संकलन - भीष्म कुकरेती   
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 माउंट अब्बौट  का प्रस्तुत बंगला ब्रिटिश युग की याद दिलाता है।  ब्रिटिश शैली में निर्मित माउंट अबौट  का  प्रस्तुत भवन दुपुर व कई खंडों वाला भवन है।  भवन  के तल मंजिल में कोई विशेष काष्ठ कला उल्लेखनीय नहीं है याने सपाट कला। माउंट अबौट  (चम्पावत ) के प्रस्तुत   भवन में  तीन से अधिक बालकोनी के बाहर  जंगले नुमा आकृतियां हैं जिनमे स्तम्भ हैं।  स्तम्भ ज्यामितीय कटान में कटे हैं।  आधार में दो रेलिंग मध्य उप जंगले भी निर्मित हुए हैं। 
सर्वत्र ज्यामितीय अलंकरण की काष्ठ कला  ही दृष्टिगोचर होते हैं। 
सूचना व फोटो आभार : जय ठक्कर संग्रह
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021
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Bhishma Kukreti:

    धानाचुली (नैनीताल ) के भवन ८  में  काष्ठ कला, अंकन,अलंकरण, उत्कीर्णन

   Traditional House Wood Carving Art in Dhanachuli , Nainital; 
   कुमाऊँ, गढ़वाल, केभवन ( बाखली,तिबारी,निमदारी, जंगलादार मकान,  खोली, )  में कुमाऊं शैली की  काष्ठ कला, अंकन,अलंकरण, उत्कीर्णन  - 594

संकलन - भीष्म कुकरेती
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धानाचुली (नैनीताल ) के प्रस्तुत भवन संख्या ७ आम पारम्परिक कुमाउँनी भवन है। 
प्रस्तुत भवन दुपुर व दुखंड है।  भवन के प्रथम तल में भंडार व अथवा गौशाला के कश हैं. अतः  काष्ठ कला दृष्टि से कोई विशेष उल्लेखनीय वर्णन नहीं हो सकता है।  तल मंजिल से खोली है किन्तु आश्चर्य यह है कि खोली के स्तम्भ लकड़ी के नहीं मिले हैं। 
पहली मंजिल पर भंडार या गौशाला के ऊपर लकड़ी के शहतीर /बौळी हैं जिन पर प्राकृतिक (लता नुमा )  व ज्यामितीय कटान की काष्ठ चित्रांकन मिलता है। 
शहतीर के ऊपर एक एक जोड़ी   /झरना /छाज हैं जिनपर चित्रांकित उप स्तम्भों के युग्म से मुख्य स्तम्भ निर्मित हुए हैं।  उप स्तम्भों के आधार व ऊपरी भागों में कटान से कमल नुमा कटान कर घुंडियां या कुम्भिया निर्मित हुयी हैं।  प्रत्येक छाज आधार के छेदों को सपाट काष्ठ पटिलों /तख्तों से ढक्क्न निर्मित हुए हैं तो ऊपर तोरणम निर्मित हुए हैं।  तोरणम में प्राकृतिक कला अंकन हुआ है किन्तु स्पष्ट नहीं दिखता है।
भवन में खिन भी मानवीय (मनुष्य , जंतु या देव ) आकृति का अंकन नहीं मिलता है। छाज   छत तीन की बनी  दिखती है। 
निष्कर्ष है कि धनाचुली  (नैनीताल ) का  प्रस्तुत भवन   युवा अवस्था में उत्कृष्ट भवन में ज्यामितीय व प्राकृतिक कला अंकन मिलता है। 
सूचना  व फोटो आभार: मुकेश नायक संग्रह
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021

Bhishma Kukreti:

मझीरा (भिकियासैण , अल्मोड़ा ) के एक भवन में कुमाऊं की    ' काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन
Traditional House Wood Carving art of, Majhera  Bhikiyasain Almora, Kumaon   
 
कुमाऊँ ,गढ़वाल, के भवन  में ( बाखली ,तिबारी, निमदारी ,जंगलादार  मकान  खोली,  कोटि बनाल )   कुमाऊं की    ' काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन - 595 

 संकलन - भीष्म कुकरेती
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 मझीरा (भिकियासैण , अल्मोड़ा ) का  प्रस्तुत  भवन दुपुर व दुखंड है।  तल मंजिल में काष्ठ कलाकृति दृष्टि से कोई विशेष उललेकजन्य कृति नहीं है केवल सपाट दरवाजे वाले कमरे।  पहली मंजिल में एक बड़ा कमरे के दरवाजे व सिंगाड़  व छाज के स्तम्भादि उल्लेखनीय है।
कमरे वा छाज के स्तम्भ एक जैसे ही हैं।  मुख्य स्तम्भ दो उप स्तम्भों के युग्म से निर्मित हैं।  उप स्तम्भ में अधोगामी पद्म पुष्प दल , ड्यूल व उर्घ्वगामी पदम् पुष्प से निर्मित कुम्भिया निर्मित हैं।  कमरे के उप स्तम्भ में कमल दल से ऊपर लतानुमा अंकन हुआ है जो शीर्ष /मुरिन्ड /मथिण्ड  की परते भी हैं।  ऊपर मुरिन्ड /मथिण्ड  में देव प्रतीक सूरज मुखी पुष्प भी चिपकाया गया है।  छाज के उप स्तम्भों में ऊपर भी कुम्भिया हैं व फिर प्राकृतिक कला अंकन हुआ है। 
निष्कर्ष निकलता है कि  मझीरा (भिकियासैण , अल्मोड़ा ) के  प्रस्तुत  भवन में ज्यामितीय व प्राकृतिक अलंकरण अंकन हुआ है व कला अंकन उत्कृष्ट प्रकार का है। 
सूचना व फोटो आभार :  बलवंत सिंह
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022

Bhishma Kukreti:
देवराड़ी (पिथौरागढ़ ) में प्रोफेसर डी डी पंत परिवार  भवन कुमाऊं शैली की   काष्ठ कला अलंकरण, काष्ठ उत्कीर्णन अंकन[/colo
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   Traditional House Wood Carving Art  of  Devrari  , Pithoragarh
कुमाऊँ,के भवनों ( बाखली,तिबारी , निमदारी,छाजो, खोली स्तम्भ) में कुमाऊं शैली की   काष्ठ कला अलंकरण, काष्ठ उत्कीर्णन अंकन -596

 संकलन - भीष्म कुकरेती 
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प्रोफेसर डी  डी पंत एक प्रतिष्ठित भौतिक विज्ञानी थे व उत्तराखंड आंदोलन के सच्चे पक्षधर थे। 
आज   देवराड़ी गाँव  के प्रोफेसर  डी  डी  पंत के  पैतृक भवन की काष्ठ कला पर चर्चा की जाएगी। 
प्रोफेसर  डी  डी  पंत का भवन आम पारम्परिक  कुमाऊं भवन सैम ही है।  पंत  भवन दुपुर है व दुखंड है।  भवन के तल मंजिल में भंडार गृह हैं जिनके द्वारों में सपाट लकड़ी ही है। तल मंजिल ऊपर पहली मंजिल मध्य शक्तिशाली शहतीर (पसूण , बौळी ) बिठाई गयीं हैं।  एक फिट लगभग चौड़े  ये शहतीर कलाकृत हैं जिनमे लता व पत्तियों की नक्कासी हुयी है। 
 तल मंजिल से खोली उठती है जो पहले मंजिल तक है।  खोली भव्य प्रकार की है व उत्कृष्ट काष्ठ अंकन का उदाहरण है।  खोली के स्तम्भ अधोगामी पद्म पुष्प दल , ड्यूल व ऊर्घ्व गामी पद्म पुष्प दल से कुम्भी आकार  की घुंडियां  बनीं है।  कुम्भियों के ऊपर स्तम्भ में जालीदार कला अंकन है।  स्तम्भ के शीर्ष में खोली में तोरणम (arch मेहराब )  स्थापित है।  इन तोरणमें में कोई कला अंकन नहीं दीखता है। 
  खोली के तोरणम के ऊपर शीर्ष में पांच चौखट हैं जिनमे चतुर्भुज देव आकृतियां अंकित हैं जो शोभनीय हैं।  इन देव आकृतियों ऊपर चौखट हैं जो ज्यामितीय कला के लिए उल्लेखनीय हैं।
  पहली मंजिल में तीन जोड़ी छाज /झरोखे हैं जिनके स्तम्भ खोली के स्तम्भों की प्रतिरूप हैं।
छाज के आधार के ढक्क्न बड़े सुंदर कलायुक्त हैं। 
 देवराड़ी गाँव के  डी डी पंत परिवार के भवन के छाजों में उप शीर्ष में भी तोरणम है जिनमे कला अंकन हुआ होगा किन्तु अब सपाट दृष्टिगोचर हो रहा है। 
देवराड़ी गाँव के  डी डी पंत परिवार के भवन में काष्ठ कला उत्कृष्ट प्रकार का है।  देवराड़ी गाँव के  डी डी पंत परिवार के भवन में प्राकृतिक , ज्यामितीय व मानवीय अलंकरण कला समाहित है। 
सूचना व फोटो आभार: काफल ट्री
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . भौगोलिक मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022
 कैलाश यात्रा मार्ग   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  अंकन -उत्कीर्णन , बाखली कला   ;  धारचूला  पिथोरागढ़  के बाखली वाले  मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  अंकन उत्कीर्णन   ;  डीडीहाट   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त   अंकन -उत्कीर्णन ;   गोंगोलीहाट  पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  उत्कीर्णन   ;  बेरीनाग  पिथोरागढ़  के बाखली वाले मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त   अंकन  ;  House wood Carving  of Bakhali art in Pithoragarh  to be continued

Bhishma Kukreti:

भट्टी गाँव (पाबौ , पौड़ी गढ़वाल ) के एक भवन में भवन काष्ठ कला

    Tibari, Traditional  House Wood Art in House of Bhatiganv Pabau    , Pauri Garhwal       
गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन -597

 संकलन - भीष्म कुकरेती   
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भट्टी गाँव (पाबौ , पौड़ी गढ़वाल ) का प्रस्तुत भवन दुपुर  व दुखंड है।  तल मंजिल में भंडार व गौशाला है , जिनमे दरवाजे सपाट है।  भवन के पहले मंजिल में बालकोनी या बरामदे में जंगला बंधा है।  जंगले में दस से अधिक स्तम्भ हैं।  स्तम्भ सपाट व ज्यामितीय कटान के उत्तम उदाहरण है।  स्तम्भों के शीर्ष में तोरणम (arch ) स्थापित है जो सपाट ही हैं।  जंगले के आधार में भी उप जंगल है जो दो रेलिंग के मध्य लौह स्रियों की छड़ें हैं।  निष्कर्ष निकलता है कि भट्टी गाँव (पाबौ , पौड़ी गढ़वाल )  के प्रस्तुत भवन में ज्यामितीय कटान की ही काष्ठ कला दृष्टिगोचर हो रही है। 
सूचना व फोटो आभार: अनिल पंत
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022
गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,बाखली ,  बाखई, कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन नक्काशी श्रृंखला  जारी रहेगी   - 

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