Author Topic: House Wood carving Art /Ornamentation Uttarakhand ; उत्तराखंड में भवन काष्ठ कल  (Read 50540 times)

Bhishma Kukreti

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बामणखोला  के एक  भवन में पारम्परिक गढवाली शैली की काष्ठ  कला, अलकंरण, उत्कीर्णन, अंकन

Traditional House Wood Carving Art of,  Bamankhola Tehri   
गढ़वाल, कुमाऊँ,  भवनों (तिबारी, जंगलेदार निमदारी, बाखली, खोली, मोरी, कोटिबनाल ) में पारम्परिक गढवाली शैली की काष्ठ  कला, अलकंरण, उत्कीर्णन, अंकन- 598   

संकलन - भीष्म कुकरेती 
 बामणखोला  का   प्रस्तुत   भवन दुपुर है व दुखंड है। बामणखोला  के  भवन के तल मंजिल   में  दो काष्ठ  तिबारी हैं  जैसे कि  जिठण में मिली थी ।  तिबारी में चार काष्ठ स्तम्भ हैं।  स्तम्भ आम गढ़वाली तिबारी के आम स्तम्भ जैसे हैं अर्थात  आधार पर अधोगामी पद्म पुष्प दल , ड्यूल व ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल से निर्मित कुम्भियाँ है  और यही क्रम ऊपरी भाग में भी है।  स्तम्भ के ऊपर  थांत (क्रिकेट बैत ब्लेड जैसे ) है जो ऊपर शीर्ष से मिलते हैं।  ऊपरी कमल दल के ऊपर से तोरणम भी स्थापित हैं जिनमे प्राकृतिक कला अंकन हुआ है। 
 बामणखोला (गढ़वाल ) का  प्रस्तुत भवन ही नहीं काष्ठ कला में भी उत्कृष्ट है व ज्यामितीय कटान व प्राकृतिक अलंकरण कला दृष्टिगोचर हो रही है। 

  सूचना व फोटो आभार:   रमेश ध्यानी   
यह आलेख कला संबंधित है , मिलकियत संबंधी नही है I   भौगोलिक स्तिथि और व भागीदारों  के नामों में त्रुटि   संभव है I 
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022 
गढ़वाल, कुमाऊं , देहरादून , हरिद्वार ,  उत्तराखंड  , हिमालय की पारम्परिक भवन  (तिबारी, जंगलेदार निमदारी  , बाखली , खोली , मोरी कोटि बनाल ) काष्ठ  कला  , अलकंरण , अंकन लोक कला  घनसाली तहसील  टिहरी गढवाल  में   पारम्परिक भवन काष्ठ कला  ;  टिहरी तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला , ;   धनौल्टी,   टिहरी गढवाल  में  पारम्परिक  भवन काष्ठ कला, लकड़ी नक्काशी ;   जाखणी  तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला;   प्रताप  नगर तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला, नक्काशी ;   देव प्रयाग    तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला, ; Traditional House Wood carving Art from  Tehri


Bhishma Kukreti

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भटियाणा  (चमोली ) के भवन संख्या २ में  काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन  अंकन
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Traditional House Wood Carving Art from  Bhatiyana    , Chamoli   
 गढ़वाल,कुमाऊंकी भवन (तिबारी, निमदारी,जंगलादार मकान, बाखली,खोली) में पारम्परिक गढ़वाली शैली की  काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन  अंकन, -५९९ 
(अलंकरण व कला पर केंद्रित) 
 
 संकलन - भीष्म कुकरेती     
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   भटियाणा   (चमोली गढ़वाल )  का  प्रस्तुत भवन संख्या २ दुपुर भवन है।  भवन के कक्षों के सिंगाड़ (स्तम्भ )  काष्ठ कलायुक्त हैं।   आधार में  प्राकृतिक लता कलायुक्त  व अधोगामी  पद्म पुष्प दल, ड्यूल , उर्घ्वगामी पद्म  पुष्प दल  से निर्मित  कुम्भियाँ हैं।  कक्षों के सिंगाड़ ऊपर म्वार (शीर्ष , header ) में सूर्यमुखी नुमा देव मूर्ति स्थापित की गयी हैं। 
   भटियाणा   (चमोली गढ़वाल )  का  प्रस्तुत भवन अपने समय  में भव्य भवनों की गिनती में आता था।  काष्ठ कला दृष्टि से तिबारी बिहीन होने पर भी काष्ठ कला प्राकृतिक , ज्यामितीय व मानवीय अलंकरण का उदाहरण मिलता है। 
सूचना व फोटो आभार: अजय जोशी
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत:  वस्तु स्थिति में  अंतर   हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021
गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली , मोरी , खोली,  कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन ,   श्रंखला जारी   कर्णप्रयाग में  भवन काष्ठ कला,   ;  गपेश्वर में  भवन काष्ठ कला,  ;  नीति,   घाटी में भवन काष्ठ  कला,    ; जोशीमठ में भवन काष्ठ कला,   , पोखरी -गैरसैण  में भवन काष्ठ कला,   श्रृंखला जारी  रहेगी


Bhishma Kukreti

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मदनपुर  में  धुलिया पधान  परिवार के  भव्य भवन में गढवाली  शैली   की  उत्कृष्ट  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन


    Tibari, Traditional  House Wood Art in House of  Dhulia family Madanpur (Langur )  , Pauri Garhwal       
गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन -600

 संकलन - भीष्म कुकरेती   
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 मदनपुर धुळगांव  लंगूर पट्टी (पौड़ी गढ़वाल ) का एक जाना माना नाम है।  मदनपुर से पधान ( जमींदार बरोबर  )  परिवार के भवन में काष्ठ कला की सूचना मिली है। 
मदनपुर (लंगूर , पौड़ी गढ़वाल ) में पधान परिवार का प्रस्तत भवन तिपुर  या चौपुर   है।  भवन में दुखंड से अधिक तिखण्ड  लगते हैं।  मदनपुर (लंगूर , पौड़ी गढ़वाल ) में पधान परिवार  के  प्रस्तत भवन में काष्ठ कला हेतु निम्न बिंदुओं पर ध्यान देना होगा -
 १- भवन की खोली में काष्ठ कला
२-  भवन में  तीन प्रकार की तिबारियों / नीमदारियों में काष्ठ कला
३- जंगलों  की काष्ठ कला
   १- भवन की खोली में काष्ठ कला 
भवन में निम्न तल से  पहले तल तक खोली है।  खोली के दोनों और कलायुक्त स्तम्भ हैं। स्तम्भ दो प्रकार के हैं एक प्रकार के स्तम्भों में आधार पर व ऊपर कमल दल कला अंकन वाले व दूसरे प्रकार के लतायक्त अंकित स्तम्भ हैं।  कलमल दल वाले स्तम्भ में आधार पर अधोगामी पद्म पुष्प दल , तब ड्यूल , फिर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल अंकित हुए हैं।  उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल के ऊपर स्तम्भ लौकी आकार में ऊपर बढ़ता है व जहां सबसे हीन मोटाई है वहां पुनः  अधोगामी पद्म पुष्प दल , ड्यूल व उर्घ्वगामी पद्म  पुष्प दल उपस्थित हुए हैं।  आंतरिक स्तम्भ ऊपर मिलकर खोली के तोरणम का  निम्न स्तर   निर्माण करते हैं।  बाह्य स्तम्भ ऊपर जाकर तोरणम के बाह्य स्तर  निर्माण करते हैं।  तोरणम के मध्य में देव मूर्ति स्थापित या अंकित हुयी है। देव मूर्ति चतुर्भुज गणपति हैं।  तोरणम के स्कन्धों में कलाकृति अंकित हुयी हैं। 
    खोली के तोरणम के दोनों ओर  दीवालगीर (ब्रैकेट ) हैं जो तीन सूंडों जैसे आकृति में स्थापित हैं।  सूंड ाकृत्यों के सबसे ऊपर दीवालगीर में  तेन तीन सिंह आकृतियां दृष्टिगोचर हो रही हैं।  सिंह आकृतियां शक्ति , बल व शकुन का प्रतीक हैं।
खोली में छपरिका के नीचे दसियों काष्ठ शंकु आकृतियां लटकी दृष्टिगोचर हो रही हैं। 
तिबारियों में काष्ठ कला -
  पहले मंजिल में तीन तिबारियां हैं जिनमे दो तिबारियों के स्तम्भ शैली बिलकुल खोली के कमल दल वाले स्तम्भ जैसे ही हैं।  (स्तम्भ में आधार पर अधोगामी पद्म पुष्प दल , तब ड्यूल , फिर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल अंकित हुए हैं।  उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल के ऊपर स्तम्भ लौकी आकार में ऊपर बढ़ता है व जहां सबसे हीन मोटाई है वहां पुनः  अधोगामी पद्म पुष्प दल , ड्यूल व उर्घ्वगामी पद्म  पुष्प दल उपस्थित हुए हैं )।एक तिबारी के ६ स्तम्भ दृष्टिगोचर हो रहे है व एक में चार स्तम्भ हैं किन्तु प्रत्येक स्तम्भ चार चार उप स्तम्भों के योग से निर्मित हैं। 
दुसरे प्रकार की तिबारी में चार सपाट चौकोर स्तम्भ हैं अर्थात ज्यामितीय कटान से निर्मित  चार स्तम्भ हैं। 
 पहले व तीसरे तल में या दूसरे -तीसरे मंजिल में तिबारी व बालकोनी को जंगलों से भी ढका गया है।  प्रत्येक जंगले  में सपाट स्तम्भ हैं व रेलिंग मध्य भी उप स्तम्भों से जंगले  निर्मित हैं।
 रचना दृष्टि से गारा , पत्थर , मिटटी व काष्ठ कला , अंकन  निर्माण, शैली  उत्कृष्ट प्रकार का है व लगता    है कि  मदनपुर पधान ने भवन दिल लगाकर व  उत्साह में निर्माण किया है।  भवन में ज्यामितीय , प्राकृतिक व मानवीय अलंकरण प्रकार की उत्कृष्ट काष्ठ कला अंकन दृष्टिगोचर हो रहा है व मुंह से नकलता है वाह !
गंगा सलाण (ढांगू , डबरालस्यूं , उदयपुर , अजमेर , लंगूर , शीला  पट्टियां ) में इस प्रकार का भवन एक ही प्रकार का मिला है।  भवन अभिनव है। 
सूचना व फोटो आभार: विकास धुलिया व सहयोगी  बिक्रम तिवारी
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
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गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,बाखली ,  बाखई, कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन नक्काशी श्रृंखला  जारी रहेगी


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कोटनाली ( पोचाकैडी रिखणीखाल , पौड़ी गढ़वाल ) में कोटनाला परिवार के  भवन जंगले में  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन

    Tibari, Traditional  House Wood Art in House of Kotnali, Rikhani Khal  Pauri Garhwal       

गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन -601


 संकलन - भीष्म कुकरेती   

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कोटनाली (रिखणीखाळ , पौड़ी ) से चार पांच काष्ठ कला युक्त भवनों की सूची मिली है व अन्यों काष्ठ का युक्त भवनों की सूची मिलनी बाकी है।  कोटनाली में  बीरेंद्र कोटनाला का  प्रस्तुत भवन दुपुर , दुखंड है।  कोटनाला परिवार का प्रस्तुत भवन अपने . समय का भव्य भवन है जो उपरोक्त पट्टी में प्रसिद्ध भवन कहा जाता था।   
कोटनाला परिवार के प्रस्तुत भवन में  आधार तल पर जो भी काष्ठ कला है वह सामन्य (जैसे दरवाजों , खिड़कियों ) स्थलों में सामन्य होती है।  भवन में पहले तल में काष्ठ जंगला बंधा है व बल्कोनी लम्बी है जिसके आधार में लकड़ी के हैं व नीचे भी लकड़ी के ही  चौखट आयताकार दास दृष्टिगोचर हो रहे हैं।  कोटनाला परिवार के भवन  जंगले में आयताकार १४ स्तम्भ से सजे हैं व इन आयताकार आकृति के आधार पर दोनों और चौखट आयताकार आकृतियां जुडी हैं जो स्तम्भों को आकर्षक निर्मित करने में सक्षम हुए हैं।  जंगले  में तीन रेलिंग हाँ व दो रेलिंग के मध्य लोहे की छड़ियाँ उप स्तम्भों का कार्य क्र रही हैं।   या पशु या मानव आकृति नहीं दिखाई दे रहा है।
 निष्कर्ष निकलता है कि  कोटनाली (रिखणीखाल ) के कोटनाला परिवार के जंगलेदार भवन में आकर्षक ज्यामितीय कटान की  काष्ठ अलंकृत कला  विद्यमान है। 

सूचना व फोटो आभार:कृष्ण कुमार कोटनाला

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

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गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,बाखली ,  बाखई, कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन नक्काशी श्रृंखला  जारी रहेगी -


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कोटनाली ( पोचाकैडी , रिखणीखाल , पौड़ी गढ़वाल ) के कोटनाला परिवार के जंगलेदार भवन में  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन 

    Tibari, Traditional  House Wood Art in House of, Kotnali, Rikhanikhal  Pauri Garhwal       

गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन  602


 संकलन - भीष्म कुकरेती   

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प्रस्तुत भवन  कोटनाली में मनोहर कोटनाला  का जंगलेदार भवन है।  भवन दुपुर व दुखंड है।  प्रथम तल मर बालकोनी पर जंगला बंधा है जो संभवतया चारों ओर  है।  जंगल में एक ओर १३ स्तम्भ हैं।  स्तम्भ आम गढ़वाली जंगलों  के स्तम्भ जैसे ही हैं।  स्तम्भ चौखट हैं व आधार पर  शक्तिशाली बड़े छिलपट हैं जयस्तम्भ को आकर्षक शक्ल दे सकने में समर्थ हैं।  आधार पर दो कड़ियों की रेलिंग हैं व मध्य लोहे की स्रियाँ हैं।
निष्कर्ष निकलता है कि  कोटनाली के मनोहर कोटनाला के भवन के जंगल में ज्यामितीय कटान की कला विद्यमान है।  जंगल उत्कृष्ट प्रकार का है। 

सूचना व फोटो आभार: कृष्ण कुमार कोटनाला

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

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गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,बाखली ,  बाखई, कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन नक्काशी श्रृंखला  जारी रहेगी,पौड़ी गढ़वाल के भवनों की काष्ठ कला , उत्तराखंड भवनों की काष्ठ कला 

Bhishma Kukreti

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कोटनाली (रिखणीखाल , पौड़ी )  में  कोटनाला परिवार के भवन  के  जंगले में काष्ठ कला व काष्ठ अलंकरण

    Tibari, Traditional  House Wood Art in House of, Kotnali, Rikhanikhal  Pauri Garhwal       

गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन  -603


 संकलन - भीष्म कुकरेती   

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 कोटनाली के काष्ठ कलयुक्त भवनों की श्रेणी में यह तीसरा भवन है जिसमें  जंगल बंधा है।  प्रस्तुत भवन कोटनाला परिवार का है। भवन के प्रथम तल पर बालकोनी में  काष्ठ जंगला बंधा है।  छज्जा व दास काष्ठ के ही हैं।  जंगले  पर दस से अधिक स्तम्भ स्थापित हैं व सभी स्तम्भ चौखट है और पुरे भवन (खिड़की द्वारों आदि )  में ज्यामितीय कटान की ही काष्ठ कला दृष्टिगोचर हो रही है। 

सूचना व फोटो आभार: कृष्ण कुमार कोटनाला

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

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गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,बाखली ,  बाखई, कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन नक्काशी श्रृंखला  जारी रहेगी,पौड़ी गढ़वाल के भवनों की काष्ठ कला , उत्तराखंड भवनों की काष्ठ कला   


Bhishma Kukreti

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कोटनाली (रिखणीखाल , पौड़ी ) के बलोदी - कोटनाला परिवार के एक  भवन  (संख्या ४ )  की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन

    Tibari, Traditional  House Wood Art in House of, Pauri Garhwal       

गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन  -604


 संकलन - भीष्म कुकरेती   

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कोटनाली से यह चौथे भवन की चर्चा आज करेंगे।  कृष्ण कुमार लिखते हैं कि बाहर तरफ की तिबारी गिरीश चंद्र बलोदी व अंदर दुखंड में राजेंद्र कोटनाला की है। 
 प्रस्तुत भवन दुपुर -दुखंड  है व  आधार  तल (ground floor )  में तिबारी है व प्रथम तल पर जंगला  है जहां की काष्ठ कला व अलंकरण पर चर्चा होगी।  प्रस्तुत भवन के जंगले में दस से अधिक स्तम्भ हैं जो लकड़ी के छज्जे पर बंधे हैं।  स्तम्भ चौखट हैं , आधार पर कुछ ऊंचाई तक छिलपट (छपते आकृति के पटले  (तख्ते )  लगे हैं जिससे स्तम्भ आकर्षक लगने लगे हैं।  ऊपरी भाग में सभी स्तम्भ तोरणम )मेहराब , arch )  से सजे हैं।  तोरणम के स्कंध सपाट ही हैं। 
आधारिक तल में बरामदे के बाहर तिबारी स्थापित है।  तिबारी भव्य व उत्कृष्ट प्रकार की है।  कोटनाली के बलोधी व कोटनाला परिवारों के भवन की  तिबारी चार भव्य स्तम्भों से बनी है।  तिबारी  स्तम्भ गढ़वाली  शैली के तिबारी जैसे ही हैं।  आधार पर स्तम्भ में कुम्भी है जो अधोगामी पद्म पुष्प से निर्मित हुए हैं , इसके ऊपर ड्यूल  है , ड्यूल के ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल से कुम्भी बनी है।  दल के कमल पत्तों के ऊपर कला अंकित हुयी है।  ऊपर कमल दल के बाद स्तम्भ लौकी आकर धारण करता है जो ऊपर जाकर सबसे कम मोटाई से इसी प्रकार कुम्भियों का दोहराव हुआ है।  ऊपरी कमल दल से स्तम्भ थांती  की शक्ल अख्तियार कर लेता है।  थांती के अगल बगल में तोरणम स्थापित हुए हैं।  तोरणम के स्कंध बहुत की कलायुक्त हैं।  तोरणम के स्कंध में सूरजमुखी के पुष्प अंकित हैं व संकंधों में फूल पत्तियों व नली की कल अंकित हुए हैं। 
चारों स्तम्भों के तोरणमों  के ऊपर भी दो तीन कलायुक्त कड़ियाँ लगी हैं इन कड़ियों पर प्राकृतिक वानस्पतिक आकृतियों की  आकृतियां  हुयी  हैं। 
शेष स्थलों में जैसे द्वारों , खिड़कियों आदि में ज्यामितीय अलंकरण की कला अंकित हुयी है।  भवन की काष्ठ कला उत्कृष्ट है।  भवन भव्य दृष्टिगोचर हो रहा है।

सूचना व फोटो आभार: कृष्ण कुमार कोटनाला

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

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गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,बाखली ,  बाखई, कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन नक्काशी श्रृंखला  जारी रहेगी,पौड़ी गढ़वाल के भवनों की काष्ठ कला , उत्तराखंड भवनों की काष्ठ कला   

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खाल गाँव (चमोली ) में राजेश बेंजवाल (ऋतू खंडूड़ी ) के भवन में  काष्ठ कला

खाल गाँव (चमोली ) में राजेश बेंजवाल (ऋतू खंडूड़ी ) के भवन में  काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन  अंकन
Traditional House Wood Carving Art from  Khal Ganv    , Chamoli   
गढ़वाल में  भवन (तिबारी, निमदारी,जंगलादार मकान, बाखली,खोली) में पारम्परिक गढ़वाली शैली की  काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन  अंकन, - 605
( काष्ठ कला पर केंद्रित ) 
 
 संकलन - भीष्म कुकरेती     
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आज उत्तराखंड विधान सभा अध्यक्ष ऋतू खंडूड़ी के ससुराली गाँव में उनके पति राजेश बेंजवाल के पैतृक भवन पर काष्ठ कला , अलंकरण अंकन  पर चर्चा होगी। खाल गाँव  ( पोखरी  कर्णप्रयाग मार्ग , चमोली ) में   राजेश बेंजवाल  का प्रस्तुत भवन  दुपुर  व दुखंड  है। भवन  परम्परागत  चमोली के भवन शैली का है।  भवन के आधार तल में संभवतया पहले गौशाला थी व खोली के अंदर से अंदर ऊपरी तल में जाने का मार्ग है। आधार तल में   खोली  व ऊपर पहले तल में बरामदे पर तिबारी है।  खोली के  दोनों स्तम्भ व तिबारी के चारों स्तम्भ भारी व चौखट शैली में कटे हैं।  खोली के शीर्ष (मथिण्ड /मुरिन्ड ) में देव मूर्ती स्थापित है जो गढ़वाली परम्परा का द्योत्तक है।  स्तम्भों में कटान से ज्यामितीय कुम्भी निर्माण कर ज्यामितीय अलंकृत कला दृष्टिगोचर होती है।
शेष स्थलों मोरी -द्वारों के के पटले /तख्ते सपाट हैं।
निष्कर्ष निकलता है कि खाल गाँव (चमोली ) में राजेश बेंजवाल (ऋतू खंडूड़ी ) के भवन में  ज्यामितीय कटान की कला है और एक स्थल खोली के शीर्ष में मानवीय अलंकरण (देव मूर्ती ) दृष्टिगोचर होती है। 
सूचना व फोटो आभार: सचिदा नंद सेमवाल
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत:  वस्तु स्थिति में  अंतर   हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022 
गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली , मोरी , खोली,  कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन ,   श्रंखला जारी   कर्णप्रयाग में  भवन काष्ठ कला,   ;  गपेश्वर में  भवन काष्ठ कला,  ;  नीति,   घाटी में भवन काष्ठ  कला,    ; जोशीमठ में भवन काष्ठ कला,   , पोखरी -गैरसैण  में भवन काष्ठ कला,   श्रृंखला जारी  रहेगी


Bhishma Kukreti

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घंडियाल  (टिहरी गढ़वाल ) के   एक  भवन में पारम्परिक गढवाली शैली की काष्ठ  कला, अलकंरण, उत्कीर्णन, अंकन


Traditional House Wood Carving Art of,  Ghandiyal Tehri   

गढ़वाल, भवनों (तिबारी, जंगलेदार निमदारी,  खोली, मोरी, कोटिबनाल ) में पारम्परिक गढवाली शैली की काष्ठ  कला, अलकंरण, उत्कीर्णन, अंकन-606   

संकलन - भीष्म कुकरेती 
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घंडियाल (टिहरी गढ़वाल ) से एक भवन में काष्ठ कला की सूचना मिली है।  घंडियाल के प्रस्तुत भवन में तिबारी  का  छायाचित्र मिला है जिससे पता चलता है कि भवन दुपुर व दुखंड है।  संभवतया तिबारी आधारिक तल में स्थापित है।  तिबारी उत्कृष्ट व भव्य प्रकार की है जिसमे  बरामदे के बाहर पांच से अधिक स्तम्भ हैं।  प्रत्येक स्तम्भ के आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल से लोटनुमा कुम्भी निर्मित हुयी है।  आधारिक कुम्भी से ऊपर एक कुम्भी है जिसके ऊपर ड्यूल व ड्यूल के ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल निर्मित हुआ है।  इस उर्घ्वगामी कमल दलों के आकर के ऊपर से स्तम्भ चौखट नुमा हो ऊपर बढ़ता है व ऊपर शीर्ष से नीचे पुनः  यही आकार की कुम्भियाँ निर्मित हुयी है। कमल दलों के ऊपर प्राकृतिक आकर के चित्र अंकित हैं।   इसके ऊपर स्तम्भ थांत  रूप में है व यहां दो स्तम्भ तोरणम निर्माण हुआ है।  थांत  व तोरणम के ऊपर पत्तियों , लताओं का अंकन हुआ है। 
बरामदा के अंदर दिवार पर काष्ठ  गट्टे में चक्र व सूरजमुखी पुष्पनुमा आकृतियों के ऊपर चाप अंकन हुआ है।
 निष्कर्ष निकलता है कि घंडियाल के प्रस्तुत भवन में  प्राकृतिक व ज्यामितीय अलंकरण कला अंकन हुआ है। 
  सूचना व फोटो आभार: अभिषेक रावत     
यह आलेख कला संबंधित है , मिलकियत संबंधी नही है I   भौगोलिक स्तिथि और व भागीदारों  के नामों में त्रुटि   संभव है I 
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022
गढ़वाल, कुमाऊं , देहरादून , हरिद्वार ,  उत्तराखंड  , हिमालय की पारम्परिक भवन  (तिबारी, जंगलेदार निमदारी  , बाखली , खोली , मोरी कोटि बनाल ) काष्ठ  कला  , अलकंरण , अंकन लोक कला  घनसाली तहसील  टिहरी गढवाल  में   पारम्परिक भवन काष्ठ कला  ;  टिहरी तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला , ;   धनौल्टी,   टिहरी गढवाल  में  पारम्परिक  भवन काष्ठ कला, लकड़ी नक्काशी ;   जाखणी  तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला;   प्रताप  नगर तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला, नक्काशी ;   देव प्रयाग    तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला, ; Traditional House Wood carving Art from  Tehri

Bhishma Kukreti

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  जखोल   (उत्तरकाशी )  के  भवनों  में काष्ठ कला
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  Traditional House wood Carving Art in , Barkot   Uttarkashi   
गढ़वाल,  कुमाऊँ ,  के भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार मकान , बाखली  , खोली  , कोटि बनाल )  में पारम्पपरिक    गढवाली शैली  की    काष्ठ  कला,  अलकंरण, अंकन उत्कीर्णन - 607

 संकलन - भीष्म कुकरेती     
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 जखोल  से दो तीन भवनों की सूची मिली है।  भवन प्राचीन शैली अर्थात आदि शैली के है।  इस तरह के आधारभूत  काष्ठ  भवन  नेलांग ,  बागोरी , नीती  माणा , मलारी गाँवों में मिले हैं व जौनसार के कई गाँवों में ऐसे ही भवनों की सूचना मिली हैं। 
भवनों की छत  (स्लेटी पटाल से निर्मित ) छोड़ शेष भवन काष्ठ के पटिलों  (तख्ते ) व काष्ठ स्तम्भों से निर्मित हैं।  इस तरह के भवनों को शहरों में खोका नाम दिया जाता है।  भवन के आधार तल खाली हैं (संभवतया शीत  ऋतू में  हिमपात होता है व जल भराव से बचा जाता है )  व भवन खम्भों /स्तंभों पर टिके  हैं। 
भवन की दीवारें काष्ठ पटिलों  (तख्तों ) से निर्मित हैं।  सभी पटिले (तख्ते ), खम्भे , कड़ियाँ   ज्यामितीय कटान से निर्मित हैं। 
निष्कर्ष निकलता है कि  जखोल  (उत्तरकाशी ) के भवनों में ज्यामितीय कटान की काष्ठ कला दृष्टिगोचर हो रही है। 
सूचना व फोटो आभार : सैन  सिंह राणा
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत हेतु . भौगोलिक ,  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021     
 Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakkhali,  Mori) of   Bhatwari, Uttarkashi Garhwal,  Uttarakhand ;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakhali,  Mori) of  Rajgarhi, Uttarkashi,  Garhwal,  Uttarakhand;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakkhali,  Mori) of  Dunda, Uttarkashi,  Garhwal,  Uttarakhand ;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakhali,  Mori) of  Chiniysaur, Uttarkashi ,  Garhwal ,  Uttarakhand ;  पारम्परिक   उत्तरकाशी मकान काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन  , भटवाडी मकान   ,  पारम्परिक , रायगढी    उत्तरकाशी मकान  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन, चिनियासौड़  पारम्परिक  उत्तरकाशी मकान  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन  श्रृंखला जारी    उत्तरकाशी में भवन शैली


 

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