Author Topic: House Wood carving Art /Ornamentation Uttarakhand ; उत्तराखंड में भवन काष्ठ कल  (Read 23831 times)

Bhishma Kukreti

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   मसूरी के एक फ़ार्म हाउस में काष्ठ कला
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गढ़वाल, देहरादून सह, भवनों ( (तिबारी, जंगलेदार निमदारी, बाखली, खोली, मोरी, कोटिबनाल ) में की काष्ठ  कला, अलकंरण, उत्कीर्णन, अंकन- ६०८   

संकलन - भीष्म कुकरेती
 
 सूरी से भवनों की सूचना यदा कदा  मिलती रहती हैं।  इसी क्रम में आज मसूरी के किसी फ़ार्म हाउस या हम स्टे की काष्ठ कला पर चर्चा करेंगे।  प्रस्तुत एक तलीय (only one floor ) हैं व तल तल में ही हैं और संभवतया दुखंड हैं ।  ये भवन वास्तव में उत्तरकाशी , नीति , मलारी , मुन्सियारी  के हिमानी स्थलों के प्राचीनतम भवनों की प्रतिरूप शैली में निर्मित हुयी है. छत चद्दर की निर्मित हुयी  हैं। 
भवन की चारो दीवारें काष्ठ पटिलों  (तख्तों ) से निर्मित हैं व दरवाजों के सभी अंग भी काष्ठ पत्तियों /कड़ियों से बनी हैं। 
सभी भवन के दीवारें काष्ठ से निर्मित हैं व सपाट हैं अर्थात ज्यामितीय कटान की कला विद्यमान है। 
  सूचना व फोटो आभार:  चंद्र धीरेन्द्र रावत     
यह आलेख कला संबंधित है , मिलकियत संबंधी नही है I   भौगोलिक स्तिथि और व भागीदारों  के नामों में त्रुटि   संभव है I 
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022
देहरादून में भवन काष्ठ कला , देहरौन परम्परागत भवनों में  काष्ठ कला


Bhishma Kukreti

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अल्मोड़ा बाजार के भवन संख्या  15  (संदर्भ 29 ) में कुमाऊं की    ' काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन
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Traditional House Wood Carving art of, Almora, Bazar  Kumaon   
 
कुमाऊँ ,गढ़वाल, के भवन  में ( बाखली ,तिबारी, निमदारी ,जंगलादार  मकान  खोली,  कोटि बनाल )   कुमाऊं की    ' काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन -  609

 संकलन - भीष्म कुकरेती
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अल्मोड़ा बाज़ार के भवनों की सूचना लम्बी है।  आज   अल्मोड़ा बाज़ार के भवन संख्या १५ (संदर्भ २९ ) की काष्ठ कला पर चर्चा होगी।
प*रस्तुत भवन तीन तल (three floors  =ground + 2 , तल तल +२ तल ) अर्थात तिपुर  है व संभवतया दुखंड या बहुखंडी होगा।  चित्र में बाखली के दो तलों में (पहले व दुस्सरा तल )  छाजों के चित्र दृष्टिगोचर हो रहे हैं। 
दोनों तलों के छाज एक सामान हैं। 
छज्जों के स्तम्भ के आधार में कुम्भियाँ है जो अधोगामी पद्म पुष्प दल , ड्यूल व उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल से निर्मित हुयी हैं।  इस आकृति के ऊपर यही आकृतियां स्थापित हैं। दो स्तम्भ मध्य ऊपर तोरणम भी स्थापित हैं जिन पर ज्यामितीय सपाट  कलयुक्त हैं।  छोटे छज्जों के ढक्क्न सपाट व निम्न स्तर पर सपाट , ज्यामितीय कटान से निर्मित चौकोर चौखट आदि हैं।  किन्ही स्तम्भों के मध्य कुम्भियाँ भी हैं। 
दो तेन ढक्क्नों में XX  जैसे कुछ कटान दृष्टिगोचर हो रहे हैं। 
दो तलों के मध्य की बौळी (शहतीर ) में भिन्न भिन्न चित्र हैं। 
निष्कर्ष निकलता है कि  प्रस्तुत अल्मोड़ा बाज़ार के भवन संख्या १५ (संदर्भ २९ ) में सपाट , प्राकृतिक व ज्यामितीय अलंकरण कला दृष्टिगोचर हो रहे हैं। 
सूचना व फोटो आभार :  गजेंद्र बिष्ट
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
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अल्मोड़ा बाजार के भवन काष्ठ कला , अल्मोड़ा कुमाऊं के भवनों की कला , अल्मोड़ा में पारम्परिकभवनों की पारम्परिक काष्ठ कला व अलंकरण व अंकन


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 चम्पावत निकट गाँव के एक   भवनो में कुमाऊँ  शैली'   की   काष्ठ कला अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन
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Traditional House Wood carving Art of  Neraby  village    of Champawat, town  Kumaun 
कुमाऊँ ,गढ़वाल, के भवन ( बाखली,   खोली , )  में ' कुमाऊँ  शैली'   की   काष्ठ कला अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन  -610
 संकलन - भीष्म कुकरेती   
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 चम्पावत के कई गाँवों से काष्ठ कलायुक्त  भवनों की सूची मिली है।  आज चम्पावत  कस्बे के निकटतम एक गाँव में स्थित एक भवन की काष्ठ कला , काष्ठ कला अंकन/ उत्कीर्णन    पर चर्चा की जाएगी। 
प्रस्तुत भवन दुपुर  व दुखंड है।  भवन के तल तल (ground floor ) में स्तम्भ ही दृष्टिगोचर हो रहे हैं। पहले तल (first floor ) में बालकोनी/छज्जा पर जंगला बंधा है।  जंगले में सपाट स्तम्भ व सपाट कड़ियों की रेलिंग स्थापित हैं। 
सम्पूर्ण भवन में ज्यामीत्य कटान की लकड़ी लगी हैं।  खिन भी प्राकृतिक व मानवीय अलंकरण कला दृष्टिगोचर नहीं हो रही है। 
सूचना व फोटो आभार : जय ठक्कर संग्रह (के एस   बोरा सहयोग )
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
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  चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला,  चम्पावत    तहसील , चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला,; लोहाघाट तहसील   चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला अंकन ,  पूर्णगिरी तहसील ,  चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला अंकन   ;पटी तहसील    चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला,, अंकन   , चम्पावत की बाखली शैली , चम्पावत में भवन शैली , पारम्परिक चम्पावत भवन


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दुगतु  (पिथौरागढ़ ) के भवन में छाज पर काष्ठ कला अलंकरण, काष्ठ उत्कीर्णन अंकन
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   Traditional House Wood Carving Art  of   , Pithoragarh
कुमाऊँ,के भवनों ( बाखली,तिबारी , निमदारी,छाजो, खोली स्तम्भ) में कुमाऊं शैली की   काष्ठ कला अलंकरण, काष्ठ उत्कीर्णन अंकन -611

 संकलन - भीष्म कुकरेती 
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पिथौरागढ़ के नेपाल व तिब्बत सीमावर्ती गाँवों से अच्छी संख्या में काष्ठ कलयुक्त भवनों की सूचना मिली है। 
इसी क्रम में आज दुगतु गाँव (धारचूला , पिथौरागढ़ ) के एक भवन के छाज पर काष्ठ कला पर चर्चा की जाएगी।
छायाचित्र से अनुमान लगाना सरल है कि  दुगतु गाँव का यह भवन दुपुर व दुखंड था।   आधार  तल (उबर , Ground  Floor )  में  गौशाला , भंडार रहा होगा।  आधार तल व पहिले तल मध्य एक शक्तिशाली चोकौर  बौळी (शहतीर ) है जिस पर सर्पीली या तरंगें अथवा मोती लता नुमा आकृति उत्कीर्ण हुयी हैं व आकर्षक है।
 छाज  (झरोखा ) के दोनों ओर सुडौल /शक्तिशाली कष्ठ के स्तम्भ हैं।  प्रत्येक स्तम्भ के आधार में अधोगामी पदम् पुष्प दल से अंकित कुम्भी निर्मित हुयी है, जिसके ऊपर ड्यूल नुमा आकृति है व ऊपर लम्बे लम्बे उर्घ्वगामी  पद्म  पुष्पों के दल का अंकन हुआ है । यहां से स्तम्भ लौकी आकार धारण करता हुआ ऊपर बढ़ता है।  जहां पर सबसे हीन मोटाई है वहां पुनः से अधोगामी पद्म पुष्प दल निर्मित कुम्भी , ड्यूल व उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल निर्मित कुम्भी अंकन हुआ है। यहां से स्तम्भ का रूप परिवर्तित होता दृष्टिगोचर होता है व थांत (क्रिकेट बैट नुमा आकृति ) के ऊपर सांप के स्केल जैसे आकृतियां एक के ऊपर अंकित हुए हैं।  छाजों के ऊपर बौळी )कड़ी ) है जिस पर ज्यामितीय कटान से अंकन हुआ है। 
 छाजों  के ढक्कन (दरवाजे ? ) में आँख के अंदर कई आँख नुमा आकर की आकृतियां उत्कीर्ण हुयी है जो बड़ी आकर्षक लगती हैं।  ऊपर बंद गोभी के वर्टिकल कटान  जैसे कुछ आकृति अंकित हुयी हैं जो नीचे के क्षेत्र में भी अंकित हुयी हैं। 
निष्कर्ष निकलता है कि  दुगतु (धारचूला, पिथौरागढ़ ) के प्रस्तुत भवन के छाज में प्राकृतिक व ज्यामितीय अलंकृत कला के दर्शन होते हैं।   कुमाऊं के अन्य छाजों की तरह इस भवन के छाजों में ऊपर तोरणम नहीं मिला है। 
सूचना व फोटो आभार:विनीता यशवी
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . भौगोलिक मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
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 कैलाश यात्रा मार्ग   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  अंकन -उत्कीर्णन , बाखली कला   ;  धारचूला  पिथोरागढ़  के बाखली वाले  मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  अंकन उत्कीर्णन   ;  डीडीहाट   पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त   अंकन -उत्कीर्णन ;   गोंगोलीहाट  पिथोरागढ़  के मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त  उत्कीर्णन   ;  बेरीनाग  पिथोरागढ़  के बाखली वाले मकानों में लकड़ी पर   कला युक्त   अंकन  ;  House wood Carving  of Bakhali art in Pithoragarh  to be continued


Bhishma Kukreti

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कुटकुंड्याइ  (पौड़ी गढ़वाल ) के भवन में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन
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    Tibari, Traditional  House Wood Art in House of, Kutkundyayi Pauri Garhwal       

गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन  -612


 संकलन - भीष्म कुकरेती   
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  कुटकुंड्याइ  (पौड़ी गढ़वाल ) का प्रस्तुत भवन दुपुर व दुखंड है। कुटकुंड्याइ  (पौड़ी गढ़वाल ) के प्रस्तुत भवन के   उबर (ground floor , आधार तल ) में खिड़कियों , द्वारों व द्वारों के स्तंभ , मथिण्ड आदि व पहले तल के द्वारों व खिड़कियों में लकड़ी की साज सज*जा सपाट व ज्यामितीय है व कला सामान्य ही कहि जाएगी।
कुटकुंड्याइ  (पौड़ी गढ़वाल ) के प्रस्तुत भवन में पहले तल के  लकड़ी के छज्जे पर आकर्षक  जंगला बंधा है जो कला दृष्टि से उत्तम श्रेणी का है।  जंगले में सात से अधिक स्तंभ हैं। रत्येक स्तम्भ के आधार से कुछ ऊपर घुंडियां   हैं व पुनः ऊपर भी  घुंडियाों  की पुनरावृति हुयी है।  शीर्ष में दो स्तम्भ को तोरणम जोड़ता है व छह से अधिक आकर्षक तोरणम  (arch , मेहराब ) भवन को विशेष पहचान देते हैं।  जंगले  के  स्तम्भों के ऊपर के तोरणम के स्कन्धों में बेल बूटे अर्थात लता पतवार जैसे प्राकृतिक कला उत्कीर्णन हुआ है।
निष्कर्ष निकलता है कि कुटकुंड्याइ  (पौड़ी गढ़वाल ) के इस भवन में ज्यामितीय कटान , प्राकृतिक अलंकरण कला अंकन मिलता है।  कला उत्तम प्रकार की है। 


सूचना व फोटो आभार: जय कृत बिष्ट

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन  कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

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गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,बाखली ,  बाखई, कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन नक्काशी श्रृंखला  जारी रहेगी,पौड़ी गढ़वाल के भवनों की काष्ठ कला , उत्तराखंड भवनों की काष्ठ कला    * पौड़ी की लकड़ी  नक्कासी

Bhishma Kukreti

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खुबानी  (जहरीखाल , पौड़ी )  के भवन संख्या १ में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन

    Tibari, Traditional  House Wood Art in House of, Khubani, Jahrikhal  Pauri Garhwal       

गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन -613 


 संकलन - भीष्म कुकरेती   

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खुबानी से रघुबीर सिंह बिष्ट द्वारा दो तीन भवनों की सूचना भेजी है।  आज खुबानी भवन संख्या की काष्ठ कला पर चरचा होगी।  प्रस्तुत भवन संख्या १ एक तला (ground floor ) भवन है।  भवन में बाहर की ओर छज्जा है जिसपर जंगला बंधा है जो गढ़वाल में कम ही मिलता है।  जंगले  में दस स्तम्भ (खाम /खंबा ) दृष्टिगोचर हो रहे हैं।  सभी स्तम्भ /खम्भे /खाम  सपाट व चौखट हैं।  किसी भी स्तम्भ पर कोई कलयुक्त उत्कीर्णन नहीं दिख रहा है। 
निष्कर्ष निकलता है कि  खुबानी (जहरीखाल , पौड़ी )  के भवन संख्या १ में सपाट ज्यामितीय कटान की कला दृष्टिगोचर हुयी है।

सूचना व फोटो आभार: रघुबीर सिंह बिष्ट

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

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गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,बाखली ,  बाखई, कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन नक्काशी श्रृंखला  जारी रहेगी,पौड़ी गढ़वाल के भवनों की काष्ठ कला , उत्तराखंड भवनों की काष्ठ कला    * पौड़ी की लकड़ी  नक्कासी


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इराणी (दशौली चमोली )   गाँव के भवन में  उच्च  हिमालयी   शैली की  काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन  अंकन
Traditional House Wood Carving Art from  Irani Village    , Chamoli   
 गढ़वाल,कुमाऊंकी भवन (तिबारी, निमदारी,जंगलादार मकान, बाखली,खोली) में पारम्परिक गढ़वाली शैली की  काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन  अंकन, - 614
( काष्ठ कला पर केंद्रित ) 
 
 संकलन - भीष्म कुकरेती     
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भौगोलिक दृष्टि से इराणी  गाँव उच्च श्रृंखला में बसा गाँव है।  आज इराणी गांव के एक भवन की काष्ठ अलंकरण , कला , अंकन पर चर्चा होगी।
इराणी  गाँव (चमोली ) का प्रस्तुत भवन दुपुर  व  अनुमानतः दुखंड है।  पूरा भवन काष्ठ निर्मित हुआ है व कहीं  भी गारा , मिटटी का प्रयग नहीं हुआ है।  इराणी का  प्रस्तुत भवन  नेलांग , बागोरी , हर्षिल घाटी , मलारी , नीति , माणा  व चकराता के कुछ गाँवों में मिलने वाले सम्पूर्ण काष्ठ के भवन सामान ही है।  छत छोड़ ,  भवन की दीवारें , कड़ियाँ आधार आदि कालीन युगीन शैली के हैं व हिम खंड व हिम गलने से उत्पादित जल से बचने के सभी कारक हैं।  भवन की दीवारें कष्ठ पट्टियों (तख्तों ) से निर्मित हुयी हैं व खिन भी प्राकृतिक या मानवीय अलंकरण के दर्शन नहीं होते हैं (चित्र में)। 
निष्कर्ष निकलता है कि  इराणी का प्रस्तुत भवन में आदिकालीन शैली की ज्यामितीय  सपाट काष्ठ  कला विद्यमान है।
सूचना व फोटो आभार: संजय चौहान
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत:  वस्तु स्थिति में  अंतर   हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022 
गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली , मोरी , खोली,  कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन ,   श्रंखला जारी   कर्णप्रयाग में  भवन काष्ठ कला,   ;  गपेश्वर में  भवन काष्ठ कला,  ;  नीति,   घाटी में भवन काष्ठ  कला,    ; जोशीमठ में भवन काष्ठ कला,   , पोखरी -गैरसैण  में भवन काष्ठ कला,   श्रृंखला जारी  रहेगी

Bhishma Kukreti

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भाणजा  ग्वार (रुद्रप्रयाग ) के एक भवन में काष्ठ कला
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Traditional House wood Carving Art of Rudraprayag         : 
गढ़वाल के भवन (तिबारी, निमदारी, बाखली,जंगलेदार  मकान, खोलियों ) में पारम्परिक गढवाली शैली की काष्ठ कला अलंकरण उत्कीर्णन  अंकन,- 615 

 
 संकलन - भीष्म कुकरेती
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भाणजा  ग्वार  का प्रस्तुत भवन एक तलीय (उबर ) है व आधार के तल में बालकोनी पर में जंगल बंधा है।  जंगले  पर दस से अधिक स्तम्भ हैं।  प्रत्येक स्तम्भ में घुंडियां /कुम्भियाँ उकेरी (कटान से ) निर्मित हुयी हैं।  जंगले  के आधार में दो कड़ियों से रेलिंग निर्मित हुयी हैं। 
जंगले  व भवन में ज्यामितीय कटान से ही काष्ठ कला  पूरी   की गयी है। 
सूचना व फोटो आभार:  डी  . एस  . कांडपाल   
  * यह आलेख भवन कला संबंधी है न कि मिल्कियत संबंधी, भौगोलिक स्तिथि संबंधी।  भौगोलिक व मिलकियत की सूचना श्रुति से मिली है अत: अंतर  के लिए सूचना दाता व  संकलन  कर्ता उत्तरदायी नही हैं . 
  Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022     
  रुद्रप्रयाग , गढवाल   तिबारियों , निमदारियों , डंड्यळियों, बाखलीयों   ,खोली, कोटि बनाल )   में काष्ठ उत्कीर्णन कला /अलंकरण ,
Traditional House Wood Carving Art (Tibari) of Garhwal , Uttarakhand , Himalaya ; Traditional House wood Carving Art of  Rudraprayag  Tehsil, Rudraprayag    Garhwal   Traditional House wood Carving Art of  Ukhimath Rudraprayag.   Garhwal;  Traditional House wood Carving Art of  Jakholi, Rudraprayag  , Garhwal, नक्काशी, जखोली , रुद्रप्रयाग में भवन काष्ठ कला,   ; उखीमठ , रुद्रप्रयाग  में भवन काष्ठ कला अंकन,  उत्कीर्णन  , खिड़कियों में नक्काशी , रुद्रप्रयाग में दरवाज़ों में उत्कीर्णन  , रुद्रप्रयाग में द्वारों में  उत्कीर्णन  श्रृंखला आगे निरंतर चलती रहेंगी


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देवका (हिंडोलाखाल , टिहरी )   भवन में पारम्परिक गढवाली शैली की काष्ठ  कला, अलकंरण, उत्कीर्णन, अंकन
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Traditional House Wood Carving Art of,  Devka Tehri   
गढ़वाल भवनों (तिबारी, जंगलेदार निमदारी, बाखली, खोली, मोरी, कोटिबनाल ) में  गढवाली शैली की काष्ठ  कला, अलकंरण, उत्कीर्णन, अंकन-  616 

संकलन - भीष्म कुकरेती 
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 देवका (हिंडोलाखाल, देवप्रयाग , टिहरी ) का प्रस्तुत भवन ढैपुर व दुखंड भव्य भवन है।   देवका (हिंडोलाखाल, देवप्रयाग , टिहरी ) के  प्रस्तुत भवन  में आधार तल (उबर ) में द्वारों व खड़कियों के काष्ठ में सपाट काष्ठ ज्यामितीय कला दृष्टिगोचर होती है।  भवन के पहले तल में दो तिबारियां व एक खोली है जिसमे काष्ठ कला उत्कीर्ण हुयी है।
खोली के स्तम्भ सपाट ज्यामितीय कटान से निर्मित हुए हैं।  खोली के तोरणम के स्कंध भी सपाट दिख रहे हैं किन्तु लगता है कभी देव मूर्ति उत्कीर्ण हुईं थीं
देवका (हिंडोलाखाल, देवप्रयाग , टिहरी ) के  प्रस्तुत भवन  के पहले तल में  ब्रांडों के भार स्थित  प्रत्येक दोनों  तिबारियों में पांच पांच स्तम्भ है व स्तब्ध व तिबारियां आम गढ़वाली तिबारियों जैसे ही हैं।  स्तम्भ के आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल , ड्यूल व उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल की कुम्भियाँ है जो पुनः ऊपर भी दृष्टिगोचर होती हैं।  शीर्ष /मथिण्ड /मुरिन्ड में तोरणम हैं व तोरणम के स्कन्धों में सूरजमुखी पुष्प व लता कला उत्कीर्ण हुयी हैं।
देवका (हिंडोलाखाल, देवप्रयाग , टिहरी ) के  प्रस्तुत भवन  में काष्ठ  कला उत्कृष्ट है व प्राकृतिक व ज्यामितीय अलंकरण कला उत्कीर्णन के उदाहरण मिलते हैं। 

 
  सूचना व फोटो आभार:   बिलेश्वर  झल्डियाल   
यह आलेख कला संबंधित है , मिलकियत संबंधी नही है I   भौगोलिक स्तिथि और व भागीदारों  के नामों में त्रुटि   संभव है I 
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गढ़वाल, कुमाऊं , देहरादून , हरिद्वार ,  उत्तराखंड  , हिमालय की पारम्परिक भवन  (तिबारी, जंगलेदार निमदारी  , बाखली , खोली , मोरी कोटि बनाल ) काष्ठ  कला  , अलकंरण , अंकन लोक कला  घनसाली तहसील  टिहरी गढवाल  में   पारम्परिक भवन काष्ठ कला  ;  टिहरी तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला , ;   धनौल्टी,   टिहरी गढवाल  में  पारम्परिक  भवन काष्ठ कला, लकड़ी नक्काशी ;   जाखणी  तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला;   प्रताप  नगर तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला, नक्काशी ;   देव प्रयाग    तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला, ; Traditional House Wood carving Art from  Tehri


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  जखोल (मोरी उत्तरकाशी ) के  भवन  संख्या ६  में   गढवाली शैली  की    काष्ठ  कला,  अलकंरण, अंकन उत्कीर्णन
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  Traditional House wood Carving Art in , Jakhol (Mori ),  Uttarkashi   
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गढ़वाल,  कुमाऊँ ,  के भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार मकान , बाखली  , खोली  , कोटि बनाल )  में पारम्पपरिक    गढवाली शैली  की    काष्ठ  कला,  अलकंरण, अंकन उत्कीर्णन - 617

 संकलन - भीष्म कुकरेती     
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  जखोल (मोरी , उत्तरकाशी )  के भवन संख्या ६ की काष्ठ कला पर चर्चा होगी।  प्रस्तुत  भवन आम पर्वत उच्च श्रेणियों के गाँवों वाला ही है अर्थात जिसमें लकड़ी अधिक है व छत सीधी छोड़ शेष भवन कार्य काष्ठ से ही हुआ है।  प्रस्तुत भवन दुपुर है व भवन की दीवारें लकड़ी के तख्तों से निर्मित दृष्टिगोचर हो रहे हैं।  पहले तल में बालकोनी /छज्जे पर जंगल बंधा है जिसके स्तम्भ व रेलिंग सपाट लकड़ी की कड़ियों से निर्मित हुए हैं। 
सम्पूर्ण भवन में सपाट काष्ठ की कला दर्शित हो रही है।  भवन आदिकालीन शैली व कला अनुसार निर्मित हुआ है व हिम बचाव हेतु लकड़ी प्रयोग हुआ है। 
सूचना व फोटो आभार : आशीष सेमवाल
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत हेतु . भौगोलिक ,  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
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 Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakkhali,  Mori) of   Bhatwari, Uttarkashi Garhwal,  Uttarakhand ;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakhali,  Mori) of  Rajgarhi, Uttarkashi,  Garhwal,  Uttarakhand;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakkhali,  Mori) of  Dunda, Uttarkashi,  Garhwal,  Uttarakhand ;   Traditional House Wood Carving Art (Tibari, Nimdari, Bakhali,  Mori) of  Chiniysaur, Uttarkashi ,  Garhwal ,  Uttarakhand ;  पारम्परिक   उत्तरकाशी मकान काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन  , भटवाडी मकान   ,  पारम्परिक , रायगढी    उत्तरकाशी मकान  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन, चिनियासौड़  पारम्परिक  उत्तरकाशी मकान  काष्ठ  कला,  अलकंरण- अंकन  श्रृंखला जारी    उत्तरकाशी में भवन शैली


 

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