Author Topic: Kandali: A Festival Of Bhotia Community - कंडली: भोटिया जाति का प्रमुख त्यौहार  (Read 18968 times)

Anil Arya / अनिल आर्य

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 1,547
  • Karma: +26/-0
आइये चलें कंडली 2011 !

पंकज सिंह महर

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 7,401
  • Karma: +83/-0
12 वर्ष बाद दिखेगी अनूठी संस्कृति-सात दिन तक होगा 12 पुष्पों वाले कंडाली पौधे का संचार

यूं तो नवरात्रि को देश भर में बुराई पर अच्छाई की जीत के रुप में मनाया जाता है। प्रतिवर्ष कुछ स्थानों पर रामलीला का मंचन होता है तो कहीं दुर्गा पूजा होती है। चीन और नेपाल सीमा से लगे सीमांत के चौदांस क्षेत्र में बारह वर्षो बाद बुराई का प्रतीक माने जाने वाली कंडाली वनस्पति को नष्ट किया जाता है। इसी के साथ आने वाले बारह वर्षो के लिये क्षेत्र को संभावित सभी संकटों से मुक्त होना माना जाता है।

तहसील धारचूला की चौदांस पट्टी में रं संस्कृति के लोग बसते हैं, जो अपनी लोक संस्कृति और सामाजिक सद्भाव के लिये विख्यात है। इस क्षेत्र में मनाये जाने वाले प्रमुख त्यौहारों में स्यांड़ ठांड़ है, जो प्रतिवर्ष मनाया जाता है। इस त्यौहार में स्यंड़सै (शिव), गबला (गणेश) के अलावा ईष्ट, ग्राम देवताओं सहित पूर्वजों का आह्वान और पूजा अर्चना की जाती है। चार दिनों तक मनाये जाने वाले इस उत्सव में पहले दिन की उपासना चिलमन से शुरू होती है। चिलमन का मतलब तन और मन को पवित्र बनाना है। दूसरे दिन मैमसा होता है, जिसके तहत अपने पूर्वजों का गौरव गान कर उनसे मानसिक संबंध स्थापित करना होता है।

तीसरे दिन होतीे है भगवान शिव की पूजा। समाज के पुरुष और महिलाएं परम्परागत वेशभूषा धारण करती है। शिव के अलावा 14 देवताओं और 30 देवियों की पूजा होती है। चौथे दिन सभा होती है, जो एक संस्कार महोत्सव है।

ठीक 12वें वर्ष में सभा के स्थान मनाया जाता है कंडाली, जो बुराई को नष्ट करने का प्रतीक है। इस पर्व पर चौदांस के नर नारी सभी पारम्परिक वेशभूषा में जंगलों में जाकर सामूहिक रूप से कंडाली पौधों का संहार करते हैं। यह महाकुंभ इस वर्ष मनाया जा रहा है। चौदांस क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में बारह वर्ष बाद मनाये जाने वाला कंडाली महोत्सव इस वर्ष 3 अक्टूबर से हिमखोला गांव से शुरु हो रहा है। नौ अक्टूबर को पांगू गांव में कंडाली नष्ट करने के साथ समाप्त होगा।

महाकुंभ की तर्ज पर बारह वर्षो बाद मनाये जाने वाले कंडाली महोत्सव के लिये देश सहित विदेशों में रहने वाले चौदांसी लोग मय परिवार के घर आना शुरु हो चुके हैं। चौदांस के सभी गांवों में तैयारियां जोर-शोर पर हैं।

--------------

क्या है कंडाली पौधा

उच्च मध्य हिमालयी भू-भाग में पायी जाने वाली कंडाली वनस्पति एक पुष्पीय पौधा है। इस पौधे में प्रतिवर्ष एक फूल खिलता है। बारहवें वर्ष में बारह फूल खिल जाते हैं। इसी के साथ इसे क्षेत्र के लिये अभिशप्त मानते हुए सामूहिक रुप से नष्ट किया जाता है।

====

महिला के श्राप से अशुभ हुआ कंडाली

लोक परम्परा के अनुसार अतीत में इस क्षेत्र में रहने वाली महिला का इकलौता 12 वर्षीय पुत्र बीमार पड़ गया था, जिसका उपचार स्थानीय जड़ी-बूटी से करने पर वह स्वस्थ होने लगा। इसी क्रम में जब कंडाली के पौधे को भी औषधि के रुप में दिया गया तो लड़के की मौत हो गयी। जिससे खिन्न महिला ने अपने घर के पास उगे कंडाली के सभी पौधों को नष्ट कर श्राप दिया कि जिस प्रकार बारहवें वर्ष में उसका पुत्र छिन गया है ठीक उसी तरह बारहवें वर्ष में तेरा भी नाश हो। तभी से 12वें वर्ष में कंडाली पर्व का आयोजन कर उसके पौधों को नष्ट किया जाता है।





एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0





Kangdali Festival is a festival held by the [rung] tribe of the Pithoragarh district of Uttarakhand state in India. This festival coincides with the blooming of the Kandali plant, which flowers once every twelve years. It is held in the Chaudas Valley between August and October. It celebrates the defeat of Zorawar Singh's army, which attacked this area from Ladakh in 1841. There also goes a regional Folklore related to this festival.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
About Kandali Festival.

Kandali Festival is a festival held by the tribe of the Pithoragarh district of Uttarakhand state in India. This festival coincides with the blooming of the Kandali plant, which flowers once every twelve years. It is held in the Chaudas Valley between August and October. It celebrates the defeat of Zorawar Singh's army, which attacked this area from Ladakh in 1841. There also goes a regional Folklore related to this festival.
The Ritual

The women go out in procession in their traditional attire to destroy the Kangdali plants, where the soldiers were hidden. The demoralised army returned along the Kali River, looting the villages on the way. The women resisted them and this is re-enacted to this day. Another version, comes a folklore, which tells of a boy who died upon applying the paste of the root from a shrub known as Kang-Dali on his wound. Enraged, his mother cursed the shrub and ordered the Shauka women to pull up the root of the Kang-Dali plant off its ground upon reaching its full bloom, which happens once in twelve years.

Since then, a victory dance is performed every twelve years upon the decimation this shrub in its blooming period. The women with lead the procession, each armed with a ril, a tool which was used in compacting carpet on the loom. The children and men armed with swords and shields would follow closely behind. As they sing and dance, their music echoes in the valley, and upon approaching the blooms, warlike tunes are played and war cries are uttered. The women, fierce as they were, attacked the bushes with their rils. The menfolk will follow up and the bushes are hacked with swords, who will uproot the bushes and take them back, as the spoils of the war. In turn, victory cries are raised and rice grains are again cast towards the sky to honour the deities with the prayer that the people of Chaundas Valley may be ever victorious over enemies. After the victory dance and the extermination of the shrub, the festival is concluded with a feast.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,912
  • Karma: +76/-0
 "कंडाळी-सिस्यूण"    कंडाळी प्यारा पहाड़ मा प्रसिद्ध छ.  कंडाळी कू त्यौहार भी होन्दु छ पहाड़ मा.  कंडाळी कू साग....जू नि खै सकलु...यनु बिंगा...नि छन वैका बड़ा भाग... वीर भड़ुन...हमारा पित्रुन भी खाई छकिक......भूत भौत डरदु छ कंडाळी देखिक....

प्यारा उत्तराखंड मा, झर-झरी कंडाळी की डाळी,
गौं का न्यौड़ु पुन्गड़ौं मा, होन्दि छ झपन्याळी.

वीर भड़ुन भी खाई, झंगोरा मा राळि-राळि.
भूत भगौण मा काम औन्दि, झर-झरी कंडाळी.

ब्वै बाब डरौंदा दिखैक, छोरों तैं झर-झरी कंडाळी,
ऊछाद नि कन्नु मेरा बेटा, देख त्वैन बिंग्याली.

कथगा सवादि होन्दु छ,  झर-झरी कंडाळी कू साग,
खालु क्वी भग्यान छकिक, जैका होला बड़ा भाग.

पित्रुन खाई काफलु बणैक, आस औलाद भी पाळी,
उत्तराखंडी भै बन्धु, बड़ा काम की चीज छ कंडाळी.

झूठा अर् चोर मन्खि फर, जब लगौन्दा छन कंडाळी,
वैका मुख सी छूटि जान्दु सच, देन्दु सारा राज ऊबाळी.

जुग-जुग राजि रै पहाड़ मा, बड़ा काम की हे कंडाळी,
फलि फूली प्यारा पहाड़, सदानि रै हरी भरी झपन्याळी.
     

(सर्वाधिकार सुरक्षित,उद्धरण, प्रकाशन के लिए कवि,लेखक की अनुमति लेना वांछनीय है)
जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासू"
ग्राम: बागी नौसा, पट्टी. चन्द्रबदनी,
टेहरी गढ़वाल-२४९१२२
निवास: संगम विहार, नई दिल्ली
16.9.2009, दूरभास:9868795187
E-Mail: j_jayara@yahoo.com

पंकज सिंह महर

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 7,401
  • Karma: +83/-0



इस साल के कंडाली उत्सव में एक महिला।
स्रोत- फेसबुक

पंकज सिंह महर

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 7,401
  • Karma: +83/-0
Latest photo of Kandali Festival 2011
« Reply #17 on: October 13, 2011, 02:27:51 AM »
हमारे फोरम के वरिष्ठ सदस्य श्री कमल जी इस बार के कंडाली उत्सव, 2011 में शरीक हुये थे, उन्होंने कुछ फोटो भेजे हैं, जो आपके समक्ष प्रस्तुत हैं।




 

Sitemap 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22