Author Topic: Marriages Customs Of Uttarakhand - उत्तराखंड के वैवाहिक रीति रिवाज  (Read 70744 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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उत्तराखंड के वैवाहिक रीति रिवाज - DIFFERENT MARRIAGE CUSTOMS OF UTTARKAHAND

Dosto,

India is a Country of multi-culture. In almost every state different languages are spoken, different culture is followed. However, we have “Unity in Diversity”. Where it comes the point of marriage, different kind of customs are followed in any state.

If we talk about Dev Bhoomi Uttarakhand, we have different kind of caste are residing. The marriage customs is accordingly followed in different manner. In kumoani-garwali almost same customs are followed expect of some area specific and language changes. Though the marriage culture of Jaunsari, Bhotia, Tharu etc has different.

We would give information about various marriage systems/ cumstoms are followed in Uttarkahand under this thread.

Regards,  
 
M  S Mehta

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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TRADITION FOLLOWED IN KUMOAN AREA OF UTTARAKHAND
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In arranged marriage, parents of Bridegroom visit Bride house with the proposal. In this case, generally it is seen marriage is arranged by any person who is known both the parties and then process starts after the horoscopes of Bride and Bridegroom are match. A particular word is used for this “Chihn Bhinan” means . .matching of Horoscope. This is considered to be crucial. None of the parties moved ahead without matching the Horoscope.

After this the matter is left upto to liking / disliking of Bride and Bridegroom and they give the consent to their parents about the marriage proposal. However, it is said that in gone days, even this was not allowed. Marriages were held as per the agreement bride and bridegroom parents.   

 
 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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दाम काटना / पिठा लगाना ( यानी सगाई)
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लडकी एव लड़के के सहमित के बाद अब बारी है सगाई की ! बहुत पुराने समय में लोगो इस दाम काटना भी कहते थे ! फिर बाद में यह हुवा पिठा लगाना सब शुद्ध हिंदी का शब्द सगाई !

एक दिन और वार (डे) को सुनिश्चित कर अब लड़के के तरफ से विषम संख्या में लोग संगाई के लिए लडकी के घर जाते है और संगाई की रस्मो रिवाज अदा करते है !  इस प्रथा में लडकी के लिए कुछ आभूषण और वस्त्र के जाए जाते है!  इसके आलवा दही की ठेकी (यानी दही को ले जाना इस असवर पर शुभ माना जाता है ) !

सगाई में दुल्हे की जरुरत नहीं
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खासतौर से हिंदी फिल्मो में और अन्य समाज में देखा जाता है कि लड़का लडकी को अंगूठी पहनता है पर यहाँ दुल्हे कि उपस्थिति ज्यादे मायने नहीं रखती ! 

लड़के का पिता लडकी को पिठा ( यानी टीका - चन्दन) लगाते है और सगाई फिक्स !

RUTURN GIFT
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जब लड़के के तरफ से लोग सगाई कर के वापस आते है तो उपकार के तौर पर ताम्बे का कोई वर्तन उन्हें दिया जाता है ! जैसे कि गागर, आदि .. !

समय बदल रहा है इन सब पर अब परिवर्तन आ रहा है !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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शादी के दिन फिक्स करना जैसे कहते है लगन सुझाना
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सगाई के बाद दोनों परिवार अपने सुविधा और शुभ लगन के अनुसार एक date शादी के लिए तय करते है ! इसके बाद होती है शादी कि तैयारिया ! एक आदमी बरात के दिन लड़के के घर से बारात से पहले जाता है यानी वह खबर के जाता है कि लड़के के तरफ से सब ठीक है और बारात समय पर आयेगी! इस कहते है मस्चुन्गाई  ( वर पक्ष का दूत, वधू के द्वार)

हमारे वरिष्ठ सदस्य श्री डी एन बडोला जी का यह article पढिये
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मस्चुन्गाई  ( वर पक्ष का दूत, वधू के द्वार )

पर्वतीय अंचल में जब वर वधू की शादी रचाई जाती है तो अनेक रश्में निभाई जाती है  मोबाइल व इन्टरनेट के युग में आज भी वधू के बाकायदा  आगमन की सूचना देने हेतु मस्चुन्गाई, मन्ग्च्बाई या मस्चोई को वधू पक्ष के घर भेजा जाता है.  मस्चुन्गाई कंधे में  मॉस की दाल (उरद की दाल ) व चावल की थैली तथा  हाथों में दही की ठेकी लेकर वधू पक्ष के घर जाता है.(कुछ लोग मास व चावल नहीं ले जाते हैं) उसे ससम्मान पिठ्याँ लगा व दक्षिणा देकर पठाया जाता है  दही की ठेकी पीले वस्त्र में लपेटकर व कच्ची हल्दी तथा एक मुट्ठा हरी साग (सब्जी) व दूब  के साथ भेजी जाती है. वधू पक्ष के लोग इस लगुनी शगुनी ठेकी का इन्तजार करते हैं तथा कौतुक वस पूछते है की मस्चुन्गाई दही की ठेकी लेकर आया कि नहीं मस्चुन्गाई दही की ठेकी को वर पक्ष द्वारा निर्मित मंडप में रख देता है.  इस प्रथा का मुख्य उद्देश्य वधू पक्ष को बरात के आगमन तथा बारातियों की संख्या आदि की सूचना देना होता है.  वधू पक्ष मस्चुन्गाई का स्वागत शंख  घंट बजाकर करता है तथा उसको जलपान एवं टीका पिठ्या लगाकर तथा समुचित दक्षिणा देकर सम्मानित करता है.
मस्चुन्गाई से सूचना प्राप्त होते ही वधू पक्ष में चहल पहल शुरू हो जाती है तथा वधू के माता पिता दुल्हे व बरात के स्वागत एवं धूलि अर्घ के लिये  तैयार हो जाते हैं.

मस्चुन्गाई

  पुराने जमाने मैं जब यातायात अवं टेलीफोन आदि के साधन नहीं थे मस्चुन्गाई एक दिन पहले ही वधू पक्ष के घर जाकर वधू पक्ष को वर पक्ष द्वारा  तैयारी, बारातियों की संख्या व बरात आने का समय आदि की पूर्ण जानकारी दिया करता था तथा दूसरे दिन बरात आने से पूर्व  कुछ दूर पहले बरात मैं शामिल होकर वधू पक्ष की तयारियोँ की पूर्व  सूचना एक भेदुवे (सी आइ डी) की तरह देता था.

वर पक्ष के दूत को मस्चुन्गाई क्यों कहा जाता है ? इसका  कारण यह हो सकता है की वर पक्ष एक थैली मैं मॉस की दाल व चावल भी भेजता है. पहले थैली मैं मॉस की दाल रखी जाती है, फिर र्थैली मैं एक गाँठ मारी जाती है . इस गाँठ के बाद थैली मैं चावल भर दिया जाता है. फ़िर इसे गाँठ पाड़कर  बंद कर दिया जाता है.  इस थैली को कंधे मैं सहूलियत से रख व हाथ मैं दही की ठेकी लेकर मस्चुन्गाई वधू पक्ष के घर जाता है. थैली  मैं मॉस व चावल रखे जाने के कारण ही  इसे मॉस चावल का अपभ्रन्स मस्चुन्गाई कहा जाता है.मस्चुन्गाई  हेतु एक से ज्यादा लोग भी जा सकते हैं  कुछ लोग इसे मंग्चुनई भी कहते हैं.  उनका कहना है की जो लोग लड़की मांगने तथा चुनने जाते हैं साधारणतया वही लोग मंग्चुनई बनाये जाते हैं
 इस प्रकार मस्चुन्गाई प्रथा आज भी बदस्तूर जारी है.  (D.N.Barola)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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MARRIAGE DAY
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After long a lot ritual formalities eventually the auspicious day for Bride and Bridegroom that they tie in nuptial knot. 

CUSTOMS FOLLOWED AT BRIDEGROOM HOUSE BEFORE DEPARTURE OF  THE
”BARAT”


1)   Ganesh Pooja is performed before the Barat departs for bride house. Bridegroom Parents and bridegroom himself particiate in this Pooja. A yellow colour strip is tied on right wrist of bridge groom. A “Diya” it lit at groom house.
2)   Cholia and other folk dances are performed in country ward of the house where all the Barati and others gather to witness the function.





Folk Dance


NISHAN POOJA (A FLAG WORSHIP)
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A flag of red color which has sign of  “Om” is worshiped at the time of departure of marriage for bride house. This flag is called “Nishan” in local language. It said that this Nishan is sign of Bhagwati Mata blessing for the marriage.

3-5 eldest women of the bridegroom side worship the Nishan. They throw some rice on Nishan and backward the house side.

https://www.youtube.com/watch?v=t4ICORMYOBU

Kumauni Wedding Dance with Dhol, Damu

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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WOMEN FROM BRIDE-GROOM SIDE HARDLY ATTEND THE MARRIAGE
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This tradition has been going on since long and women from Bridegroom side do not join the marriage. May in gone days, this system might have been made due to on foot journey of “barat” and geographical reasons.

However, this tradition is now changing. In another change that local folk Dol, Damau is being replaced by Band.

RATAYEE
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On marriage day women at bridegroom side arrange a special party which is called “Ratayee” in local language. They sing their local song Jhoda, Chachri etc and enjoy this auspicious occasion.

Risky Pathak

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पर्वतीय विवाह

बरात आने से पहले वधु के घर में होने वाली पूजा


1. गणेश पूजा
2. मातृ पूजा
3. आव देव
4. पुण्य वाचन
5. कलश स्थापन
6. रक्षा विधान ( कंकड़ - रक्षा धागे की प्रतिष्ठा )
7. ग्रह स्थापन
8. कन्या पूजन
9. हल्दी


No 9. Haldi



Photo Courtesy : Tilak Bisht.

Risky Pathak

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बारात आने के बाद विवाह की प्रक्रिया


1. धुल्यर्घ
२. मधुपरक विधान
३. अग्नि स्थापन
४. वस्तु चतुष्ठय
५. शाको चारः
५. छोलिका वर्णं
६. लग्न दान
७. कन्या महादान संकल्प
८. शय्या दान
९. बहि निष्करण विधि (अग्नि पूजा)


Risky Pathak

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धुल्यर्घ:

इस विधान में कन्या के पिता द्बारा वर और वर पक्ष के आचार्य का स्वागत किया जाता है| आचार्य और वर को चौकी पर खडा कर उनका पूजन किया जाता है|
पहले वधु के पिता द्बारा वर के चरण धोये जाते है| फिर वर की पूजा की जाती है| जिसमे वर को तिलक, चन्दन, रोल्ली, जनेऊ आदि पहनाया जाता है| वर को अटैची भी दी जाती है जिसमे धोती, घडी तथा अन्य समान होता है| इसके बाद यही प्रक्रिया आचार्य के साथ दोहराई जाती है| आचार्य को भी चोकी और अटैची दी जाती है|

Risky Pathak

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शाको चारः


इस विधान में वर एवं वधु पक्ष के आचार्यो द्वारा अपने अपने(वर एवं वधु के) कुल का वर्णन किया जाता है|
पहले वधु पक्ष के आचार्य द्वारा प्रशन किया जाता है (कि वर्णं, कि शाखा, कि गोत्रस्य... ?)| फिर वर के आचार्य द्बारा अपने तीन पीडियों का वर्णन किया जाता है| वर्ण, वेद ध्यायी, शाखा अन्य बताया जाता है| फिर यही प्रश्न वर पक्ष के आचार्य द्वारा पुछा जाता है  और वधु पक्ष द्वारा उत्तर दिया जाता है|