Author Topic: Tradition & other customs of Uttarakhand- उत्तराखंड के कुछ रीति रिवाज  (Read 5179 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Dosto,


We are sharing some exclusive information about various work, cultural and ritual tradition of uttarakhand in this topic. Some of the tradition is at the verge of disappearing. However, in some parts of uttarakhand, some tradition are still alive. Go go through the detail. 

कत्यूर घाटी में आज भी जीवंत है पल्ट प्रथा

पहाड़ों में आज भी महिलाएं पल्ट प्रथा से काम कर रही हैं। पल्ट की रस्म को महिलाएं बखूबी निभाती हैं। इसके तहत एक-दूसरे के खेती से संबंधित कामों में हाथ बंटाती हैं। यह प्रथा गांवों की एकता, आपसी, मेलजोल व स्नेह की अद्भुत बानगी है।
यूं तो वर्ष भर गांवों में पल्ट प्रथा का चयन रहता है, लेकिन कृषि कार्य के समय यह प्रथा जोर पकड़ लेती है। गेहूं की कटाई, धान की मढाई, रोपाई, गुड़ाई, निराई और घास आदि कटान के लिए यह प्रथा नजर आती है, लेकिन गांवों के खेतों में मोव सराई (गोबर की खाद) के समय इस प्रथा का काफी महत्व है। पल्ट प्रथा में प्रतिदिन महिलाएं किसी एक परिवार का सहयोग करती हैं। बारी-बारी से गांव की महिलाओं द्वारा प्रत्येक परिवार के यहां कार्य करने का क्रम चलता रहता है। केवल कृषि कार्य के लिए ही नहीं बल्कि शादी बरातों के समय सामान लाने, मकान निर्माण के समय, बाजार से सामान लाने में भी पल्ट प्रथा नजर आती है। कत्यूरी राजाओं की स्मृद्धिशाली राजधानी कत्यूर घाटी में इन दिनों काश्तकारों द्वारा गेहूं बुआई की तैयारी की जा रही है। साल भर से घरों में जमा गोबर की खाद को महिलाएं डलियों में भरकर खेतों में डाल रही हैं। सिर में गोबर की खाद से भरी डलिया पंक्तिबद्ध तरीके से खेतों में पहुंचाई जा रही है। कहना गलत न होगा कि महिलाएं ही पल्ट प्रथा की धुरी हैं।
(Source amar ujala)

M S Mehta

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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सिनी  बाटना

पहाडो में एक प्रथा पहली थी! अगर किसी के घर में लड़का या लडकी पैदा हुयी हो तो लोग गुड या अन्य मीठी चीजे बाटते थे उसे सिनी बाटना कहते है! यह प्रथा अभी भी है लेकिन शब्द सिनी गायब होनी के कगार पर है! यह प्रथा उत्तराखंड के कुमाऊ क्षेत्र में प्रचलित है!

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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 नोबत लगाना

 पहाडो में बर्षो से चली आ रही एक और रिवाज है ! जब किसी आदमी ने किसी मंदिर में पूजा पाठ के लिए प्रण किया हो वह ढोली के वहां नोबत लगाने के लिए कहता है! ढोली शाम को रोजाना 10-10 मिनट के लिए ढोल बजाता है उसे नोबत लगाना कहते है!
 

Devbhoomi,Uttarakhand

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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चूड़ाकर्म अथवा मुंडन संस्कार का एक गढ़वाली लोकगीत

नाई रे नाई रेss तू मेरो भाई
नाई रे नाई रेss तू मेरो धरम भाई हेsss
त्वै द्योलो नाई पांउ खड़ाऊ
नाई रे नाई रेss कानू कुंडल है sss
नाई रे नाई रेss शाल दुशाला
नाई रे नाई रेss जरीद कपड़ी हेsss
नाई रे नाई रेss रेशमी पगड़ी
मेरा लाडला तैं तू पीड़ा ना लाई हे sss
Internet Presentation- Bhishma Kukreti

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
September 1
यज्ञोपवीत /उपनयन /जनेऊ संस्कार का गढ़वाली लोकगीत

भली -भली पुंगड्यूं मा बोइ च कबास
भाई बैण्यूं न मिलीकी गोडी च कबास
उनिया -धुनियान मिलिकी काती च कबास
माँ जी भौजीन मिलिकी काती च कबास
ब्रह्मा का बेटान बटी च कबास
बणावा ब्रह्मा जी नौलड्या जनेऊ
सुण ल्यावो ब्रह्मा जी , कायरों नि होयां , कायरों नि होयां ,
हमारो कारिज वित्त समाना ,वित्त समाना
सात स्वागिण्योन खैंडु च खीलो
सात स्वागिण्योन ग्वाडो च खीलो
सात स्वागिण्योन काती च कबास
काती कूति द्याई उन विशेश्वर का पास
विशेश्वरना तब यो सूत ब्रह्मा जी तैं द्याया
ब्रह्मा जीन चेला तैं गुरुमंत्र जनेऊ द्याया
ब्रह्मा जी को चेला आज गुरुमुखो ह्वै ग्याया
बघमरी आसण द्याया टिमरू को सोटा
काँध मा धैर्याला वैना खैरुवा की झोली
एक हाथ ल्याई वैना सूनो कमंडल
---------पुत्र द्वारा पिताजी से गुरु की खोज का आग्रह ----------
लावा मेरा बुबाजी ब्रह्मा खोजी लावा
आज चैंदो पिताजी वेदमुखी ब्रह्मा
य तो कारिज सुफल फलीन , य तो कारिज सुफल फलीन
आज च बेटा कु जनेऊ ,आज च बेटा कु जनेऊ
न्यूति आले वेद मुखी ब्रह्मा
गया पुरी मा होलो गौतिम को बेटा
गौतिम को बेटा होलो उत्तिम बरमा
जै जस दियां भूमि का भूम्याळ
जै जस दियां पितर दिबता
---गुरु द्वारा जनेऊ पहनाना और आशीर्वाद देना ---

दे द्यावा गुरु जी गुरु मंतरs ये
दे द्यावा गुरु जी गुरु मंतरs ये
दे याले चेला त्वे गुरु मंतरs ये
दे याले चेला त्वे गुरु मंतरs ये
सुगुरु को चेला छै गुरुमुखी ह्वेलो
गुरुमुखी चेला छे , निरमुखी ना ह्वेई
अमर रई चेला लाख बरस
जब तलक चाँद सूरज ये
सुगुरु को चेला छै गुरुमुखी ह्वेलो
तुम करा चेला कुल को उद्धार ये
ब्रह्म ब्रत ल्याई माँ जी भिक्छा दे द्यावा
आज बटी तेरो चेला गुरु चेला ह्वे ग्याया

-इंटरनेट प्रस्तुति -भीष्म कुकरेती

 

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