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  • Uttarayani - उत्तरायणी कौतिक(मकर संक्रान्ति): January 14, 2014

Author Topic: Uttarayani घुघुतिया उत्तरायणी (मकर संक्रान्ति) उत्तराखण्ड का सबसे बड़ा पर्व  (Read 166371 times)

Devbhoomi,Uttarakhand

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मेले को लगने लगे झूले
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बागेश्वर: 14 जनवरी से होने वाले उत्तरायणी मेले के लिए नगर में व्यापारियों ने व्यवसाय प्रारम्भ कर दिया है। सांस्कृतिक मैदान के एक छोर में सांस्कृतिक मंच सज रहा है तो दूसरे छोर में झूला व सर्कस लगने लगे हैं। सरयू घाट में नुमाइश लगने लगी है।

बागनाथ नगरी में सरयू व गोमती के संगम पर लगने वाले उत्तरायणी मेले की रौनक आने लगी है, सांस्कृतिक मैदान में मौत का कुआ, विभिन्न प्रकार के झूले व सर्कस लग गए हैं। इसके अलावा बाहर से आए विभिन्न व्यवसायियों ने व्यवसाय प्रारम्भ कर दिया है। बुधवार को मेलाध्यक्ष सुबोध लाल साह व मेलाधिकारी एसएस राणा, गरुड़ के उपजिलाधिकारी श्रीष कुमार ने बैठक कर मुख्यमंत्री के संभावित कार्यक्रम के तैयारियों की चर्चा की। साथ ही मेलास्थल का निरीक्षण किया व आवश्यक दिशा निर्देश दिए। अस्थायी पुलों के लिए बनाए गए तकनीकी दल के अधिशासी अभियंता गुलाब राम, श्री कौशिक समेत नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ईश्वर सिंह रावत, अभियंता श्री पांडे आदि ने पुलों का निरीक्षण किया।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7171549.html

Devbhoomi,Uttarakhand

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बसुकेदार में उत्तरायणी मेले का रंगारंग आगाज
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बसुकेदार में तीन दिवसीय उत्तरायणी मेले का रंगारंग कार्यक्रमों के साथ शुरू हो गया है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि संसदीय सचिव आशा नौटियाल ने मेले के मंच निर्माण के लिए डेढ़ लाख रुपये देने की घोषणा की।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मेले हमारी संस्कृति की पहचान हैं। मेले विकास के साथ ही सौहार्द व मिलन का परिचायक भी होते हैं। उन्होंने कहा कि मेले को और भव्य रूप दिया जाएगा, इसके लिए सरकार पूरा प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि मेले के मंच निर्माण के लिए डेढ़ लाख देने की घोषणा की।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि पशु कल्याण बोर्ड की उपाध्यक्ष बीना बिष्ट ने कहा कि मेलों का महत्व धार्मिक व विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके लिए सहभागिता से कार्य करना चाहिए। मेले के शुभारंभ अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर, कन्या जूनियर हाईस्कूल, दुर्गा चिल्ड्रन समेत विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

विनोद सिंह गढ़िया

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ऐतिहासिक, धार्मिक सांस्कृतिक महत्व है उत्तरायणी मेले का

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर नगर में लगने वाले उत्तरायणी मेले का ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक महत्व है। सरयू और गोमती के पावन संगम पर स्थित भगवान बागनाथ का पौराणिक क्षेत्र के लोगों के अपार श्रद्धा का केंद्र है। लोगों का विश्वास है तीन दिन तक नगर में रहकर त्रिमाघी करने वाले व्यक्ति के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
देश की आजादी में उत्तरायणी मेले ने अपनी प्रमुख भूमिका निभाई। 14 जनवरी 1921 के दिन आजादी के रणबांकुरों ने कूर्मांचल केसरी बद्री दत्त पांडे के नेतृत्व में कुली उतार, बर्दायश और बेगार प्रथा के काले कानूनों के प्रस्ताव के रजिस्टरों को पवित्र सरयू में बहा दिए थे। इस दिन लिए गए निर्णय से आजादी की लड़ाई कूर्मांचल में तेज हो गई थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस आंदोलन की सराहना की थी। इस ऐतिहासिक निर्णय से ही मकर संक्रांति के दिन ऐतिहासिक सरयू बगड़ में राजनैतिक दल पंडाल लगाकर वर्ष भर के कार्यक्रम तय करते हैं। इस मेले का धार्मिक महत्व है मकर संक्रांति के दिन भगवान बागनाथ बागनाथ, कालभैरव और बाणेश्वर के मंदिर में जल चढ़ाने वालों का तांता लगा रहता है। लोग भगवान शंकर को जल अर्पित कर पुण्य करते हैं। मेला सांस्कृतिक दृष्टि से खासा महत्व रखता है। लोग इस पर्व पर विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर अपने आराध्य को अर्पित करते हैं। बच्चों के लिए मीठे आटे से बने घुघुतों, डमरू, हुड़का, ढाल, तलवार की माला बनाते हैं। मेले में तिब्बत से भी व्यापारी पहुंचते थे। पांच दिन तक चलने वाले इस मेले में मेला समिति सांस्कृतिक कार्यक्रमों और खेलकूद का आयोजन करती है।

http://www.amarujala.com/city/Bagrswar/Bagrswar-10390-114.html
 

हलिया

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मकर संक्रांति और घुगुती त्यौहार  की आप सब लोगों को हार्दिक शुभ कामनायें ठैरी हो महाराज !  हम तो लगे हैं शाम को घुगुती बनाने की तैयारी में, आप लोग भी जरूर बनाना और बडे चाव से खाना.

साथियो,
        मकर संक्रान्ति का त्यौहार वैसे तो पूरे भारत वर्ष में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है और यही त्यौहार हमारे देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नाम और तरीके से मनाया जाता है।  इस त्यौहार को हमारे उत्तराखण्ड में "उत्तरायणी" के नाम से मनाया जाता है। कुमाऊं में यह त्यौहार घुघुतिया के नाम से भी मनाया जाता है तथा गढ़वाल में इसे खिचड़ी संक्रान्ति के नाम से मनाया जाता है। यह पर्व हमारा सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है और मैं समझता हूं कि यह हमारा FOLK FESTIVAL  भी  है।
     इस पर्व पर पिथौरागढ़ और बागेश्वर को छोड़कर कुमाऊं के अन्य क्षेत्रों में मकर संक्रान्ति को आटे के घुघुत बनाये जाते हैं और अगली सुबह को कौवे को दिये जाते हैं (यह पितरों को अर्पण माना जाता है) बच्चे घुघुत की माला पहन कर कौवे को आवाज लगाते हैं;

काले कौवा का-का, ये घुघुती खा जा   
   
       वहीं पिथौरागढ़ और बागेश्वर अंचल में मकर संक्रान्ति की पूर्व संध्या (मशान्ति) को ही घुघुत बनाये जाते हैं और मकर संक्रान्ति के दिन उन्हें कौवे को खिलाया जाता है। बच्चे कौवे को बुलाते हैं

काले कौव्वा का-का, पूस की रोटी माघे खा

घुघुतिया त्यार से सम्बधित एक कथा प्रचलित है....

कहा जाता है कि एक राजा का घुघुतिया नाम का मंत्री राजा को मारकर ख़ुद राजा बनने का षड्यन्त्र बना रहा था... एक कौव्वे ने आकर राजा को इस बारे में सूचित कर दिया.... मंत्री घुघुतिया को मृत्युदंड मिला और राजा ने राज्य भर में घोषणा करवा दी कि मकर संक्रान्ति के दिन राज्यवासी कौव्वो को पकवान बना कर खिलाएंगे......तभी से इस अनोखे त्यौहार को मनाने की प्रथा शुरू हुई|
   

Hisalu

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पंकज सिंह महर

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फोटो साभार- श्री विक्रम नेगी

Devbhoomi,Uttarakhand

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बागेश्वर बाजारा हुड़कि बाजे रे घमा घम.
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बागेश्वर: उत्तरायणी मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम अनवरत रूप से जारी है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में जय बागनाथ कला मंच पोखरी व मल्लिका लोक कला मंच हल्द्वानी के कलाकारों ने दर्शकों की वाह-वाही लूटी। देर रात तक चले कार्यक्रमों का सैकड़ों दर्शकों ने आनंद लिया।
 

   जय बागनाथ कला मंच पोखरी के गायक मनोज चौबे ने बागेशरा बाजारा हुड़कि बाजी रे घम व मनोज पहाडि़या ने हे रियूड़ी निजात रियूड़ी गीत गाया तो दर्शक अपने सीटों में नाचने लगे। गायिका पूजा द्वारा गाया गीत रहट की तान कुंदना गीत काफी सराहा गया। इसके अलावा अजय चंदोला, विक्रम सिंह, राजू, दरपान, हीरा, उमा, पूजा, सपना सोनी आदि ने लोक गीतों में आकर्षक नृत्य पेशकर दर्शकों का मनोरंजन किया।



सोमवार की रात्रि मल्लिका लोक कला मंच हल्द्वानी के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रदर्शित किए। इसके अलावा उत्तर मध्य क्षेत्र चंडीगढ़ के कलाकारों ने भी विभिन्न प्रांतों की संस्कृति का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर नपा अध्यक्ष सुबोध साह, रघुवीर दफौटी, बसंत पांडे, सुरेश साह, राजू उपाध्याय, हेमंत साह, गोविंद साह आदि उपस्थित थे। संचालन जयंत सिंह भाकुनी ने किया।
   

Devbhoomi,Uttarakhand

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मेले की रात्रि पिथौरागढ़ के कलाकारों के नाम
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बागेश्वर: उत्तरायणी मेले की समापन रात्रि को पिथौरागढ़ से आए कलाकारों ने धमाल मचाया। पिथौरागढ़ के कलाकारों को दर्शकों द्वारा सर्वाधिक सराहा। खुशी जोशी व सुरेश प्रसाद सुरीला के गीतों में दर्शक जमकर थिरके।
मंगलवार की रात्रि में प्रकृति एवं संस्कृति संरक्षण व पर्यावरण अनुसंधान समिति पिथौरागढ़ के कलाकारों ने मंच संभाला। जिसका शुभारम्भ ईश वंदना के साथ किया। दल के कलाकारों ने एक के बाद एक हिंदी, गढ़वाली व कुमाऊंनी गाने गाकर मेले के दौरान हुए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों से अलग प्रदर्शन किया व जनता की वाहवाही लूटी। खुशी जोशी द्वारा गाया गीत मोहना-मोहना रटी गो..गीत में दर्शक जमकर थिरके। सुरेश प्रसाद सुरीला ने भी एक के बाद एक गीत गाकर दर्शकों का मनोरंजन किया इसके अलावा कलाकार सुंदर वाफिला की भी लोगों ने जमकर तारीफ की।

 कार्यक्रम का संचालन जनार्दन उप्रेती ने किया। इस अवसर पर नपा अध्यक्ष सुबोध साह, सभासद गीता कांडपाल, गंगा कांडपाल, नागेश्वरी देवी, राजू उपाध्याय, रघु दफौटी, हेमंत साह, गोविंद साह, हरीश सोनी,संजय साह जगाती, जगदीश जोशी, भुवन कांडपाल, जयंत सिंह भाकुनी, जगदीश कालाकोटी आदि उपस्थित थे

Dainik jagran

jissu

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काले कौवा काले घुगती बड़ा खा ले
ले कौवा घुगुत
मके डिज़ा सुना मुकुट
ले कौवा भात
मके डिज़ा सुना लात
ले कौवा रोंट
मके डिज़ा सुना मौट

हेम पन्त

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