Author Topic: Why We Are Leaving Our Tradition? - हमारी संस्कृति में क्या बुराई है?  (Read 9867 times)

Devbhoomi,Uttarakhand

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burai humari sanskirti main nahin hai, buraai hain hum logon main humare sochane ke trikon main humare,ird gird hai buraiyon ka bhandaar,sanskirti to jo pale thi wahi aaj bhi hai or wahi humesha rahegi

humare aas paas ji buraaiyan whi humari sanskirti ko karaab karti hai ,humara sochaane or samjhne ka tarika galat hai,chhetrwaad ki jo bhawana humare andar hai wo bhavna humari sanskirti naashak hai !

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संस्कृत भाषा सभी भाषाओं की जननी आवश्यक

उत्तरांचल संस्कृत अकादमी द्वारा जिला स्तरीय संस्कृत प्रतियोगिता प्रारम्भ हो गई है। प्रतियोगिता का शुभारम्भ करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष राम सिंह कोरंगा ने संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी बताते हुए इसके प्रचार-प्रसार के लिए वृहद कार्य योजना तैयार करने को कहा।

 राजकीय इंटर कालेज बागेश्वर में आयोजित प्रतियोगिता का शुभारम्भ करते हुए कहा कि अगर संस्कृत भाषा का अपमान हुआ तो समझा जाना चाहिए कि यह देश का अपमान है उन्होंने सभी भाषाओं की जननी संस्कृत को बताया। विशिष्ट अतिथि नपा अध्यक्ष सुबोध साह व क्षेपं प्रमुख राजेंद्र टंगणियां ने संस्कृत भाषा के प्रचार के लिए गम्भीर कार्य करने की अपील की। जिला शिक्षाधिकारी सुषमा सिंह ने कहा कि प्रत्येक अध्यापक को चाहिए कि वे संस्कृत के विकास के लिए ईमानदारी से कार्य करे तथा इस पर आधारित प्रतियोगिताएं समय-समय पर आयोजित करते रहे।

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हिमालयी संस्कृति का केंद्र बने उत्तराखंड


Sep 26, 02:04 am

देहरादून। मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने उत्तराखंड को हिमालयी संस्कृति के विश्व प्रसिद्ध केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए।

सचिवालय में संस्कृति विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में ललित कला, साहित्य, संगीत, नाट्य, वाद्य एवं गायन सभी विधाओं में संस्कृति का समग्र विकास होना चाहिए। बदरी-केदार सहित चार धाम तक सर्वमुखी विकास संस्कृति व धर्मस्व विभाग की नैतिक जिम्मेदारी है। इन विभागों के लिए दीर्घकालिक नीति बननी चाहिए। बदरी-केदार मंदिर समिति को तिरुपति धाम की भांति विश्वविद्यालय, चिकित्सालय सहित समाजोपयोगी गतिविधियां संचालित करने वाली संस्था के तौर पर विकसित करने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृति विभाग का प्रमुख कार्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण व संव‌र्द्धन है। इस विरासत व पुरातात्विक स्थलों पर गहन शोध व अभिलेखीकरण किया जाना चाहिए। अल्मोड़ा में प्रस्तावित उदय शंकर अकादमी को शीघ्र निर्माणदायी संस्था से हस्तांतरित कर लोक कला के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश उन्होंने दिए। उन्होंने संस्कृति विभाग की ओर से बनाए जा रहे प्रेक्षागृहों की गुणवत्ता व उपयुक्तता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। संस्कृति प्रमुख सचिव राकेश शर्मा ने बताया कि उदय शंकर अकादमी केंद्रीय लोक निर्माण विभाग निर्मित कर रही है। शीघ्र ही इसे संस्कृति विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा। प्रदेश के नौ जिलों में संस्कृति विभाग ने प्रेक्षागृहों के लिए धनराशि स्वीकृत की है। इनमें हरिद्वार व दून में निर्माण कार्य जारी है। शेष सात जिलों में प्रेक्षागृह के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है। दून में विभाग का अभिलेखागार भवन तैयार हो गया है। इसमें शीघ्र सांस्कृतिक धरोहर प्रदर्शित होंगी। बैठक में सीएम के प्रमुख सचिव शत्रुघ्न सिंह, अपर सचिव अजय प्रद्योत, उप सचिव सुमन सिंह वल्दिया, संस्कृति विभाग निदेशक बीना भट्ट समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_5818958.html

 

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