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Khanduri Declares War Against Corruption - खंडूरी जी का भरष्टाचार के खिलाफ जंग
एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:
Khanduri second turn as CM. Though he had started anit-corruption drive in his first term as a CM. Now let us see, how it works in this time.
Devbhoomi,Uttarakhand:
खंडूरी जी अगर ये दिखावा है तो बंद करें अपना ये नाटक और अभी जतने बचे खुचे दिन हैं चुनाव आने में,कहीं ये चुनाव आ रहे इस लिए ये दिखावा हो रहा हो !
Devbhoomi,Uttarakhand:
पूर्व सीएम के कार्यो की हो सीबीआई जांच
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अल्मोड़ा: पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक के कार्यकाल में हुए विभिन्न मामलों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना था कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक के कार्यकाल में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ है। सभी मामलों की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। ज्ञापन में मजबूत लोकपाल विधेयक की मांग को भी शामिल किया गया।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि महाकुंभ में भारी घोटाले हुए हैं। राज्य में आयी आपदा राहत की धनराशि में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं। स्टर्डिया भूमि प्रकरण, जल विद्युत परियोजनाओं में गड़बड़ी, स्थानांतरण में भारी घोटाले हुए हैं। इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए।
ज्ञापन देने वालों में नगर अध्यक्ष बिट्टू कर्नाटक, हितेश वर्मा, कविंद्र पंत, राजीव कर्नाटक, अमन अंसारी, दीपक कांडपाल, गिरीश फुलारा, विनोद फुलारा, लीला रावत, दीपक नगरकोटी, शरद साह, साकिब हुसैन, मदन डांगी, अंकित उज्जैनवाल, कृष्ण सिंह बिष्ट, वीरेंद्र सिंह कार्की, जगदीश तिवारी, अब्दुल निजाम, कुंदन सिंह भंडारी, विनीत बंसल, तारा चंद्र जोशी सहित अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद थे।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_8382951.html
हलिया:
उत्तराखंड में भ्रष्टाचारियों को होगी उम्रकैद
4 Nov 2011, 0146 hrs IST,नवभारत टाइम्स
गुलशन राय खत्री
नई दिल्ली।। उत्तराखंड विधानसभा ने जिस लोकायुक्त बिल को मंजूरी दी है, उसके लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों को न सिर्फ तय वक्त पर काम पूरा करना होगा, बल्कि अपनी और अपने पर निर्भर परिवार वालों की संपत्ति का सालाना ब्यौरा भी देना होगा।
तय समयसीमा के भीतर ऐसा नहीं करने पर उसे भ्रष्टाचार का मामला माना जाएगा। बिल के दायरे में न सिर्फ विधायक, मंत्री बल्कि मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री को भी शामिल किया गया है। भ्रष्टाचार का दोषी पाए जाने पर 6 महीने से लेकर 10 साल और कुछ मामलों में तो उम्रकैद तक हो सकेगी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूरी की इस पहल को अन्ना हजारे के जन लोकपाल बिल से ज्यादा प्रभावी बताया जा रहा है।
टीम अन्ना ने भी इसकी तारीफ की है। उत्तराखंड संभवत: ऐसा पहला राज्य है, जहां इस ऐक्ट के लागू होने के बाद कर्मचारियों को हर साल जून में संपत्तियों का ब्यौरा देना होगा। उत्तराखंड के दिल्ली स्थित विशेष कार्याधिकारी डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि 30 जून तक ब्यौरा देने के बाद पब्लिक अथॉरिटी के हेड के लिए अनिवार्य होगा कि वह उस 30 अगस्त तक वेबसाइट पर डाल दे। बिल में उत्तराखंड के विधायकों, मंत्रियों और मुख्यमंत्री को भी पब्लिक सर्वेंट माना गया है, इसलिए उन्हें भी हर साल अपनी संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। बिल की कुछ और विशेषताएं इस प्रकार हैं :
कैसे मिलेगी राहत
यह भी प्रावधान किया गया है कि अगर सरकारी नियमों के तहत तय अवधि के भीतर किसी शख्स का काम नहीं होता, तो उसे भी भ्रष्टाचार का ही मामला माना जाएगा। मसलन, अगर ड्राइविंग लाइसेंस एक दिन में बनना चाहिए और ऐसा नहीं होता तो माना जाएगा कि करप्शन की नीयत से लाइसेंस नहीं बनाया गया। एफआईआर के मामले में भी यही लागू होगा।
अगर किसी भ्रष्टाचार के खिलाफ संबंधित अधिकारी को शिकायत की जाए और वह उसे ठंडे बस्ते में डाल दे तो उसे भी करप्शन माना जाएगा। अगर किसी को शिकायत की जाए और उसकी कॉपी किसी उच्च अधिकारी को भेजी जाए और वह भी इस पर कदम न उठाए तो इसे भी करप्शन माना जाएगा।
लोकायुक्त की पावर
उत्तराखंड हाई कोर्ट के जजों को छोड़कर सभी लोकायुक्त एक्ट के दायरे में आएंगे। करप्शन के मामले में अगर लोकायुक्त किसी भी विभाग को निर्देश देता है तो उसे उनका पालन करना होगा। अगर यह साबित होता है कि किसी अग्रीमेंट या लीज देने के मामले में करप्शन हुआ है , तो उस स्थिति में लोकायुक्त के पास उस लीज , लाइसेंस , परमिशन , ठेके या अग्रीमेंट को रद्द करने का अधिकार होगा। लोकपाल के निर्देश पर शुरू हुई जांच को तब तक बंद नहीं किया जा सकेगा , जब तक लोकायुक्त से उसकी अनुमति न ली जाए।
ऐसी शिकायत आती है , जिसमें शिकायतकर्ता का नाम ही न हो तो उस पर लोकायुक्त कार्यवाही नहीं कर सकेगा। यह जरूर है कि कोई शिकायतकर्ता लोकायुक्त से नाम गोपनीय रखने का अनुरोध करे। इस अनुरोध पर लोकायुक्त शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रख सकता है।
कैसे काम करेगा
लोकायुक्त सरकारी कर्मचारी के खिलाफ किसी भी शिकायत की जांच शुरू कर सकता है। लोकायुक्त खुद किसी मामले का संज्ञान लेकर उसकी जांच कर सकेगा। जरूरी नहीं वह किसी शिकायत पर ही जांच शुरू करे।
विडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध होगी
लोकायुक्त के समक्ष होने वाली सुनवाई लिखित में तो रिकॉर्ड होगी ही , उसकी विडियो रिकॉर्डिंग भी होगी। अगर बाद में कोई इसकी रिकॉर्डिंग चाहता हो तो वह पेमेंट देकर उसकी प्रति ले सकेगा। अगर लोकायुक्त को किसी मामले में यह लगे कि विडियो रिकार्डिंग जनहित में नहीं है , तो वह उसे रोक भी सकता है।
मुख्यमंत्री , मंत्रियों और विधायक
इनके मामले में लोकायुक्त को जांच से पहले लोकायुक्त बेंच के चेयरपर्सन और सभी सदस्यों से अनुमति लेना जरूरी होगा। यानी पूरी बेंच एकमत होगी , तभी इनके खिलाफ जांच शुरू हो सकेगी ।
हलिया:
राज्यपाल ने लोकायुक्त को अपनी मंजूरी दी NBT
देहरादून।। राज्य विधानसभा द्वारा पास किये जाने के दो दिन बाद ही राज्यपाल मार्गेट अल्वा ने आज उत्तराखंड लोकायुक्त विधेयक 2011 को अपनी स्वीकृति दे दी।
एक मैराथन चर्चा के बाद मंगलवार रात को राज्य विधानसभा ने एकमत से इस विधेयक को पारित किया था।
राजभवन की प्रवक्ता ने बताया कि राज्यपाल ने मुख्यमंत्री बी सी खंडूरी की उपस्थिति में विधेयक पर हस्ताक्षर किया।
अल्वा ने खंडूरी से कहा कि इस विधेयक को उसी भावना के साथ लागू करें जितना कि इसे लाते समय दिखाया गया था।
अल्वा ने कहा, 'मैं इस बात से बेहद खुश हूं कि इस बढि़या कानून उत्तराखंड में पारित किया गया।'
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