Uttarakhand > Development Issues - उत्तराखण्ड के विकास से संबंधित मुद्दे !
Khanduri Declares War Against Corruption - खंडूरी जी का भरष्टाचार के खिलाफ जंग
हेम पन्त:
निस्संदेह ही खण्डूरी जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है....लेकिन मुख्यमंत्री हर गांव या जिले में जाकर तो नहीं बैठ सकता.... अन्दर ही अन्दर सब चल रहा है अब भी.....
एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:
Hem Bhai,
Sahi kah rahe ho.. Lekin uttarkhand ko abhi bhi intezar hai development ka... In my opinion, there is no major development so far in UK after becoming the separate state.
We have to see the KHanduri Ji.. now.
--- Quote from: हेम पन्त on December 21, 2007, 05:39:32 PM ---निस्संदेह ही खण्डूरी जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है....लेकिन मुख्यमंत्री हर गांव या जिले में जाकर तो नहीं बैठ सकता.... अन्दर ही अन्दर सब चल रहा है अब भी.....
--- End quote ---
एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:
See this alarming news.
मंत्री ने कराए रिश्वत के पांच हजार रुपये वापसJan 01, 02:02 am
रुद्रप्रयाग। प्रदेश की खंडूड़ी सरकार रिश्वतखोरी बंद कराने के तमाम दावे कर रही है, लेकिन अभी भी पुलिस व अन्य विभागों में रिश्वत लेने का सिलसिला जारी है। इस बार प्रदेश के पेयजल मंत्री ने पुलिस द्वारा रिश्वत लेने पर अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए इसे पीड़ित को वापस करा दिया।
रविवार को मुख्य बाजार में एक दुकान में कार्य करने वाले सलोप सिंह का अपनी नजदीक की ही दुकान में कार्यरत एक व्यक्ति से मामूली बात पर विवाद हो गया। इसकी शिकायत थाने तक पहुंची तो पुलिस ने सलोप सिंह को थाने ले जाकर उस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया और समझौते के नाम पर पांच हजार रुपये ले लिए। पीड़ित सलोप सिंह की लड़की की शादी हाल में होने वाली है, उसने लड़की की शादी के लिए बनाई गई सोने की नथ बेच कर पांच हजार रुपये पुलिस को दिए। इसकी भनक क्षेत्र के युवा भाजपा नेता अनूप सेमवाल को लगी। उसने जब इस बाबत थाने में संपर्क किया, तो कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। इस पर उन्होंने पेयजल मंत्री मातबर सिंह कण्डारी को घटना की जानकारी दी। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से फोन पर वार्ता कर पीड़ित को पांच हजार रुपये वापस करने को कहा। पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद पैसे वापस किए गए।
एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:
Khanduri Ji ke tough ..
--- Quote from: M S Mehta on January 01, 2008, 11:38:26 AM ---
See this alarming news.
मंत्री ने कराए रिश्वत के पांच हजार रुपये वापसJan 01, 02:02 am
रुद्रप्रयाग। प्रदेश की खंडूड़ी सरकार रिश्वतखोरी बंद कराने के तमाम दावे कर रही है, लेकिन अभी भी पुलिस व अन्य विभागों में रिश्वत लेने का सिलसिला जारी है। इस बार प्रदेश के पेयजल मंत्री ने पुलिस द्वारा रिश्वत लेने पर अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए इसे पीड़ित को वापस करा दिया।
रविवार को मुख्य बाजार में एक दुकान में कार्य करने वाले सलोप सिंह का अपनी नजदीक की ही दुकान में कार्यरत एक व्यक्ति से मामूली बात पर विवाद हो गया। इसकी शिकायत थाने तक पहुंची तो पुलिस ने सलोप सिंह को थाने ले जाकर उस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया और समझौते के नाम पर पांच हजार रुपये ले लिए। पीड़ित सलोप सिंह की लड़की की शादी हाल में होने वाली है, उसने लड़की की शादी के लिए बनाई गई सोने की नथ बेच कर पांच हजार रुपये पुलिस को दिए। इसकी भनक क्षेत्र के युवा भाजपा नेता अनूप सेमवाल को लगी। उसने जब इस बाबत थाने में संपर्क किया, तो कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। इस पर उन्होंने पेयजल मंत्री मातबर सिंह कण्डारी को घटना की जानकारी दी। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से फोन पर वार्ता कर पीड़ित को पांच हजार रुपये वापस करने को कहा। पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद पैसे वापस किए गए।
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720:
राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में धांधलीJan 04, 02:24 am
देहरादून। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में कार्य अपेक्षित गुणवत्ता के नहीं थे। यह बात जिलाधिकारी ने भी मानी है। जिलाधिकारी ने कार्यो का भौतिक सत्यापन कराने के लिए जांच समिति गठित कर दी है। समिति निर्माण एजेंसी के सभी कार्यो की बारीकी से जांच करेगी।
राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में लंबे समय से धांधली की शिकायतें शासन, प्रशासन से की जा रही थीं। इस योजना में उत्तराखंड पावर कारपोरेशन द्वारा उत्तर प्रदेश निर्माण निगम, नेहरू कालोनी देहरादून के जरिए कार्य कराए जा रहे थे। जिलाधिकारी के मुताबिक इस योजना में किए गए कार्यो का लाभ ग्रामीण लोगों को नहीं मिला और कार्य भी गुणवत्तापरक नहीं थे। यह योजना विकास खंड रायपुर, चकराता, कालसी में संचालित थी। जिलाधिकारी ने तीनों विकासखंड में संचालित योजना के भौतिक सत्यापन कराने के लिए जांच के आदेश दिए हैं। जांच के लिए विकासखंड वार अलग-अलग तीन सदस्यीय पांच जांच समिति गठित की गयी हैं। पहली समिति में उपजिलाधिकारी सदर, खंड विकास अधिकारी रायपुर, संबंधित सहायक अभियंता उत्तराखंड पावर कारपोरेशन, दूसरी समिति में उपजिलाधिकारी चकराता, खंड विकास अधिकारी चकराता, संबंधित सहायक अभियंता उत्तराखंड पावर कारपोरेशन, तीसरी समिति में परियोजना निदेशक डीआरडीए, खंड विकास अधिकारी कालसी, संबंधित सहायक अभियंता उत्तराखंड पावर कारपोरेशन, चौथी समिति में जिला विकास अधिकारी, नायब तहसीलदार तहसील कालसी, संबंधित सहायक अभियंता उत्तराखंड पावर कारपोरेशन, पांचवीं समिति में जिला पंचायत राज अधिकारी, तहसीलदार चकराता, संबंधित सहायक अभियंता उत्तराखंड पावर कारपोरेशन शामिल हैं। ये समितियां मौके पर जाकर निर्माण एजेंसी के प्रत्येक कार्य की जांच करेंगी और उपयोग में लाए गए निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच भी कराकर अपनी संयुक्त जांच आख्या पेश करेंगी।
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