Author Topic: Uttarakhand Education System - उत्तराखण्ड की शिक्षा प्रणाली  (Read 34367 times)

पंकज सिंह महर

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पिथौरागढ़। सीमांत तहसील धारचूला के प्राथमिक विद्यालय पय्यापौड़ी में नियमित शिक्षक नहीं होने से बच्चों को पांचवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद दी जाने वाली टीसी (स्थानान्तरण प्रमाण पत्र) नहीं मिल पा रही है, जिससे बच्चे छठी कक्षा में प्रवेश लेने से वंचित है। विद्यालय में मात्र एक पैरा टीचर तैनात है जिस पर 150 विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है।

दुर्गम विद्यालयों की श्रेणी में आने वाले पय्यापौड़ी प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षक का तीन माह पूर्व एलटी में चयन हो गया था। शिक्षक के एलटी में चले जाने के बाद से विद्यालय में नियमित शिक्षक की नियुक्ति नहीं हो पायी है। विद्यालय में मात्र एक पैरा टीचर है और दुर्गम क्षेत्र में होने के कारण विद्यालय में छात्र संख्या काफी अधिक है। विद्यालय में वर्तमान में 150 बच्चे पढ़ रहे है। हाल ही में इस विद्यालय से दर्जनों विद्यार्थियों ने पांचवीं कक्षा उत्तीर्ण की है। इन विद्यार्थियों को अन्य विद्यालयों में छठी कक्षा में प्रवेश लेने के लिए टीसी की जरूरत है,लेकिन नियमित शिक्षक नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को टीसी नहीं मिल पा रही है जिस कारण विद्यार्थी और उनके अभिभावक खासे परेशान हैं। विद्यालय में प्रस्तावित निर्माण कार्य भी रुके पडे़ है। सामाजिक कार्यकर्ता बंशी राम ने जिला शिक्षाधिकारी को भेजे एक पत्र में विद्यालय में नियमित शिक्षक की तैनाती किये जाने की मांग की है। नियमित शिक्षक की तैनाती नहीं किये जाने पर उन्होंने क्षेत्रवासियों को साथ लेकर सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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I think our poor education system is one of the cause of migration of pahad.

Govt must ensure that atleast some standard of education should be there.

पिथौरागढ़। सीमांत तहसील धारचूला के प्राथमिक विद्यालय पय्यापौड़ी में नियमित शिक्षक नहीं होने से बच्चों को पांचवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद दी जाने वाली टीसी (स्थानान्तरण प्रमाण पत्र) नहीं मिल पा रही है, जिससे बच्चे छठी कक्षा में प्रवेश लेने से वंचित है। विद्यालय में मात्र एक पैरा टीचर तैनात है जिस पर 150 विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है।

दुर्गम विद्यालयों की श्रेणी में आने वाले पय्यापौड़ी प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षक का तीन माह पूर्व एलटी में चयन हो गया था। शिक्षक के एलटी में चले जाने के बाद से विद्यालय में नियमित शिक्षक की नियुक्ति नहीं हो पायी है। विद्यालय में मात्र एक पैरा टीचर है और दुर्गम क्षेत्र में होने के कारण विद्यालय में छात्र संख्या काफी अधिक है। विद्यालय में वर्तमान में 150 बच्चे पढ़ रहे है। हाल ही में इस विद्यालय से दर्जनों विद्यार्थियों ने पांचवीं कक्षा उत्तीर्ण की है। इन विद्यार्थियों को अन्य विद्यालयों में छठी कक्षा में प्रवेश लेने के लिए टीसी की जरूरत है,लेकिन नियमित शिक्षक नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को टीसी नहीं मिल पा रही है जिस कारण विद्यार्थी और उनके अभिभावक खासे परेशान हैं। विद्यालय में प्रस्तावित निर्माण कार्य भी रुके पडे़ है। सामाजिक कार्यकर्ता बंशी राम ने जिला शिक्षाधिकारी को भेजे एक पत्र में विद्यालय में नियमित शिक्षक की तैनाती किये जाने की मांग की है। नियमित शिक्षक की तैनाती नहीं किये जाने पर उन्होंने क्षेत्रवासियों को साथ लेकर सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है।


पंकज सिंह महर

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पौड़ी गढ़वाल। राज्य सरकार के एक फरमान ने जिले की प्राथमिक शिक्षा में भूचाल ला दिया है। नौनिहालों को पढ़ने के लिए दूर न जाना पड़े, इस उद्देश्य के तहत जगह-जगह खोले गए अधिकांश प्राथमिक विद्यालयों पर ताले लटकने जा रहे हैं। सरकार ने यह निर्णय इन विद्यालयों में छात्र संख्या नगण्य रहने पर उठाया है। हालांकि वर्तमान में यहां अध्यनरत विद्यार्थियों तथा 250 शिक्षकों को समीप के ही विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा।

शासन के आदेश पर शिक्षा विभाग जिले में दस अथवा इससे कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक विद्यालयों को आगामी सत्र से बंद करने में जुट गया है। पौड़ी जनपद में करीब डेढ़ सौ विद्यालयों को सूचीबद्ध किया गया है। पौड़ी के 15 विकासखण्डों में करीब 120 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं जहां पर छात्र संख्या चार से दस के बीच में हैं। दो दर्जन विद्यालय ऐसे हैं जहां पर छात्र संख्या 1 से 4 के बीच है। हैरानी वाली बात यह है कि आधा दर्जन विद्यालयों में छात्र संख्या शून्य है। पौड़ी, नैनीडांडा व दुगड्डा ब्लाक में सात-सात, बीरोंखाल, खिर्सू व कल्जीखाल में 11-11, द्वारीखाल में 12, जयहरीखाल 20, पोखड़ा 15, कोट 14, एकेश्वर 18, थलीसैंण 3, रिखणीखाल 4 तथा यमेश्वर के 13 प्राथमिक विद्यालयों को बंद किया जाएगा। वर्तमान में इन विद्यालयों में करीब 250 शिक्षक तैनात हैं। जिसमें 12 विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षु हैं। सरकार के इस फैसले पर शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना यदि छात्रों संख्या का सर्वे कराने के बाद की होती तो आज यह नौबत नहीं आती। सरकारी विद्यालयों में छात्रों के टोटे की एक वजह उनमें शिक्षा का गिरता स्तर है। इसकी वजह से अभिभावक अब अपने लाडलों को निजी स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं। विद्यालयों के बंद होने पर सरकार के सामने एक यह प्रश्न भी है कि करोड़ों की लागत से बने इनके भवनों का उपयोग कैसे हो। जिला शिक्षा अधिकारी राम हरिओम चतुर्वेदी का कहना है कि विभाग सरकार के आदेश के पालन में पूरी तरह जुट गया है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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i strongly believe that there is strong need to improve education system of UK. This is one of the factors due to which people are migrating from  hill.

पौड़ी गढ़वाल। राज्य सरकार के एक फरमान ने जिले की प्राथमिक शिक्षा में भूचाल ला दिया है। नौनिहालों को पढ़ने के लिए दूर न जाना पड़े, इस उद्देश्य के तहत जगह-जगह खोले गए अधिकांश प्राथमिक विद्यालयों पर ताले लटकने जा रहे हैं। सरकार ने यह निर्णय इन विद्यालयों में छात्र संख्या नगण्य रहने पर उठाया है। हालांकि वर्तमान में यहां अध्यनरत विद्यार्थियों तथा 250 शिक्षकों को समीप के ही विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा।

शासन के आदेश पर शिक्षा विभाग जिले में दस अथवा इससे कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक विद्यालयों को आगामी सत्र से बंद करने में जुट गया है। पौड़ी जनपद में करीब डेढ़ सौ विद्यालयों को सूचीबद्ध किया गया है। पौड़ी के 15 विकासखण्डों में करीब 120 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं जहां पर छात्र संख्या चार से दस के बीच में हैं। दो दर्जन विद्यालय ऐसे हैं जहां पर छात्र संख्या 1 से 4 के बीच है। हैरानी वाली बात यह है कि आधा दर्जन विद्यालयों में छात्र संख्या शून्य है। पौड़ी, नैनीडांडा व दुगड्डा ब्लाक में सात-सात, बीरोंखाल, खिर्सू व कल्जीखाल में 11-11, द्वारीखाल में 12, जयहरीखाल 20, पोखड़ा 15, कोट 14, एकेश्वर 18, थलीसैंण 3, रिखणीखाल 4 तथा यमेश्वर के 13 प्राथमिक विद्यालयों को बंद किया जाएगा। वर्तमान में इन विद्यालयों में करीब 250 शिक्षक तैनात हैं। जिसमें 12 विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षु हैं। सरकार के इस फैसले पर शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना यदि छात्रों संख्या का सर्वे कराने के बाद की होती तो आज यह नौबत नहीं आती। सरकारी विद्यालयों में छात्रों के टोटे की एक वजह उनमें शिक्षा का गिरता स्तर है। इसकी वजह से अभिभावक अब अपने लाडलों को निजी स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं। विद्यालयों के बंद होने पर सरकार के सामने एक यह प्रश्न भी है कि करोड़ों की लागत से बने इनके भवनों का उपयोग कैसे हो। जिला शिक्षा अधिकारी राम हरिओम चतुर्वेदी का कहना है कि विभाग सरकार के आदेश के पालन में पूरी तरह जुट गया है।


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Children in Uttarakhand Village Work in Cannabis Fields
 
In a shocking display of indifference by the authorities towards child labour, small children extracting contraband from 'bhang' (cannabis) leaves in the fields is a common sight in Matli Village in Uttarakhand.
 



Most of the children of Matli, many of them around ten years old, instead of being at school, are seen around cannabis fields extracting contraband for a meager amount to supplement paltry incomes of their poor families.

The extraction from the leaves of the cannabis plant is smoked, chewed, eaten, or infused and drunk to obtain mild euphoria.

"We squeeze bhang (cannabis) leaves and sell it. Most of the people buy it from us. We earn around 30-40 rupees in the process," said Anil, a child involved in the process of squeezing bhang leaves.

Consequently, these children have not merely become child labourers but are involved in the drugs trade totally oblivious of the consequences.

Shockingly, all this is happening with the willful consent and connivance of their parents who say that poverty and lack of employment opportunities in the area is the reason for sending their children for work in cannabis fields.

"They go to study at school sometimes, and on other occasions they rub bhang (cannabis) and sell it off for around 10-20 rupees. We don't have any other source of employment. So, this is the way we earn our living," said Meera, mother of a child labour

 
http://www.medindia.net/news/Children-in-Uttarakhand-Village-Work-in-Cannabis-Fields-38601-1.htm

पंकज सिंह महर

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पिथौरागढ़। सरकार एक ओर बच्चों को प्राथमिक शिक्षा देने के लिए विदेशों से ऋण लेकर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, दूसरी ओर शिक्षा विभाग अपनी कार्यप्रणाली से सरकार की मंशा पर पानी फेरने में लगा हुआ है। पिथौरागढ़ जनपद में मुख्यालय के आस-पास के विद्यालयों में जहां एक ही विद्यालय में पांच-पांच शिक्षक तैनात है, वहीं दूरदराज के विद्यालयों में वर्षो से एक भी शिक्षक नहीं है। ऐसे ही विद्यालयों में शामिल है धारचूला तहसील का प्राथमिक विद्यालय पैयापोड़ी जहां 105 विद्यार्थियों का भविष्य मात्र एक शिक्षा मित्र पर है।

जनपद के दुर्गम विद्यालयों में शामिल पैयापौड़ी में प्राथमिक शिक्षा के लिए सरकारी शिक्षा व्यवस्था ही है। अन्य कोई विकल्प नहीं होने से ग्रामीण सरकारी विद्यालय में ही अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए मजबूर है। विद्यालय में इस समय 105 विद्यार्थी है। इनमे से अधिकांश बीपीएल परिवारों से है। इस विद्यालय में लम्बे समय से विभाग ने रेगुलर शिक्षक की तैनाती नहीं की है। विभाग ने काम चलाऊ व्यवस्था के तहत एक शिक्षा मित्र की तैनाती की है। शिक्षा मित्र ही 105 विद्यार्थियों को पढ़ा रहा है, अंदाज लगाया जा सकता है कि 105 विद्यार्थियों पर मात्र एक शिक्षा मित्र की तैनाती से शिक्षा व्यवस्था का क्या हाल होगा। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण सिंह थापा ने बुधवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा जिसमें मांग की गयी है कि विद्यालय में मानकों के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती की जाये। शिक्षकों की तैनाती नहीं होने पर उन्होंने क्षेत्र की जनता को साथ लेकर सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है।

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पिथौरागढ़। सरकार एक ओर बच्चों को प्राथमिक शिक्षा देने के लिए विदेशों से ऋण लेकर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, दूसरी ओर शिक्षा विभाग अपनी कार्यप्रणाली से सरकार की मंशा पर पानी फेरने में लगा हुआ है। पिथौरागढ़ जनपद में मुख्यालय के आस-पास के विद्यालयों में जहां एक ही विद्यालय में पांच-पांच शिक्षक तैनात है, वहीं दूरदराज के विद्यालयों में वर्षो से एक भी शिक्षक नहीं है। ऐसे ही विद्यालयों में शामिल है धारचूला तहसील का प्राथमिक विद्यालय पैयापोड़ी जहां 105 विद्यार्थियों का भविष्य मात्र एक शिक्षा मित्र पर है।

जनपद के दुर्गम विद्यालयों में शामिल पैयापौड़ी में प्राथमिक शिक्षा के लिए सरकारी शिक्षा व्यवस्था ही है। अन्य कोई विकल्प नहीं होने से ग्रामीण सरकारी विद्यालय में ही अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए मजबूर है। विद्यालय में इस समय 105 विद्यार्थी है। इनमे से अधिकांश बीपीएल परिवारों से है। इस विद्यालय में लम्बे समय से विभाग ने रेगुलर शिक्षक की तैनाती नहीं की है। विभाग ने काम चलाऊ व्यवस्था के तहत एक शिक्षा मित्र की तैनाती की है। शिक्षा मित्र ही 105 विद्यार्थियों को पढ़ा रहा है, अंदाज लगाया जा सकता है कि 105 विद्यार्थियों पर मात्र एक शिक्षा मित्र की तैनाती से शिक्षा व्यवस्था का क्या हाल होगा। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण सिंह थापा ने बुधवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा जिसमें मांग की गयी है कि विद्यालय में मानकों के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती की जाये। शिक्षकों की तैनाती नहीं होने पर उन्होंने क्षेत्र की जनता को साथ लेकर सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है।


Education system needs to be improved in UK.

पंकज सिंह महर

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गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। राइका सिनलेख में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुयी है। नये सत्र में भी रिक्त पदों को नहीं भरे जाने से यहां अध्ययनरत बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। अभिभावक संघ ने शीघ्र रिक्त पदों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं किये जाने पर विभाग के खिलाफ आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है। राउमावि सिनलेख को वर्ष 1998 में उच्चीकरण किया गया था। परन्तु उच्चीकरण के बाद इण्टर के विज्ञान वर्ग में मात्र दो प्रवक्ताओं की नियुक्ति की गयी। वर्तमान में कला वर्ग में प्रवक्ताओं के सभी पद रिक्त पड़े है। एलटी में भी यही स्थिति है। एलटी में 12 पदों के विपरीत मात्र चार शिक्षक नियुक्त है। विद्यालय में वर्तमान में छात्र संख्या तीन सौ से अधिक हो चुकी है। महत्वपूर्ण विषयों में शिक्षक नहीं होने से छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों की कमी के कारण यहां अध्ययनरत छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। पिछले लम्बे समय से शिक्षकों की नियुक्ति की मांग कर रहे अभिभावकों में शिक्षा विभाग के खिलाफ जबरदस्त रोष है। अभिभावक संघ के अध्यक्ष जगत सिंह बिष्ट का आरोप है कि विभाग व शासन स्तर पर कई बार शिक्षकों की नियुक्ति की मांग करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने एक माह के भीतर महत्वपूर्ण विषयों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं किये जाने पर छात्रों को साथ लेकर आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है।

पंकज सिंह महर

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रुद्रप्रयाग। प्रखंड अगस्त्यमुनि के अन्तर्गत अधिकांश विद्यालय में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। वहीं, कई विद्यालय भवन का अभाव झेल रहे हैं। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जिससे क्षेत्रीय जनता में शिक्षा विभाग के प्रति खासा आक्रोश व्याप्त है।

विकासखंड अगस्त्यमुनि के अन्तर्गत अधिकांश विद्यालय शिक्षकों व भवनों की कमी झेल रहे हैं। राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बाड़व में चार एलटी शिक्षक पद रिक्त है, जबकि विद्यालय अभी तक भवनहीन है। राउमा विद्यालय भणज में भी चार महत्वपूर्ण विषयों में शिक्षकों के पद वर्षो से खाली पड़े हैं। राइंका चंद्रनगर में चार एलटी व तीन प्रवक्ता पद खाली पड़े हैं, जबकि राइंका क्यूंजा में तीन एलटी व चार प्रवक्ता पद रिक्त होने के साथ ही भवन का अभाव है।

भाजपा अगस्त्यमुनि मंडल अध्यक्ष शत्रुघन सिंह नेगी ने कहा कि विभागीय लापरवाही के कारण विद्यालयों में अव्यवस्था का माहौल है। उन्होंने बताया कि इस बाबत पूर्व में उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी से वार्ता कर विद्यालयों में रिक्त चल रहे शिक्षकों के पदों को तत्काल भरने की मांग की थी। साथ ही विद्यालयों में रिक्त चल रहे पदों व भवनों के अभाव को लेकर वह पूर्व में शिक्षा मंत्री को भी ज्ञापन भेज चुके है, लेकिन अभी तक कोई उचित कार्रवाई नहीं हो पाई है। वहीं अपर जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक विनोद कुमार ढौंडियाल का कहना है कि हाल में बड़े स्तर पर शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, हालांकि अभी भी शिक्षकों की कमी बनी हुई है।

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It is really shocking to listen such news about our education. This is one of the factors responsible for migration from pahad.


रुद्रप्रयाग। प्रखंड अगस्त्यमुनि के अन्तर्गत अधिकांश विद्यालय में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। वहीं, कई विद्यालय भवन का अभाव झेल रहे हैं। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जिससे क्षेत्रीय जनता में शिक्षा विभाग के प्रति खासा आक्रोश व्याप्त है।

विकासखंड अगस्त्यमुनि के अन्तर्गत अधिकांश विद्यालय शिक्षकों व भवनों की कमी झेल रहे हैं। राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बाड़व में चार एलटी शिक्षक पद रिक्त है, जबकि विद्यालय अभी तक भवनहीन है। राउमा विद्यालय भणज में भी चार महत्वपूर्ण विषयों में शिक्षकों के पद वर्षो से खाली पड़े हैं। राइंका चंद्रनगर में चार एलटी व तीन प्रवक्ता पद खाली पड़े हैं, जबकि राइंका क्यूंजा में तीन एलटी व चार प्रवक्ता पद रिक्त होने के साथ ही भवन का अभाव है।

भाजपा अगस्त्यमुनि मंडल अध्यक्ष शत्रुघन सिंह नेगी ने कहा कि विभागीय लापरवाही के कारण विद्यालयों में अव्यवस्था का माहौल है। उन्होंने बताया कि इस बाबत पूर्व में उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी से वार्ता कर विद्यालयों में रिक्त चल रहे शिक्षकों के पदों को तत्काल भरने की मांग की थी। साथ ही विद्यालयों में रिक्त चल रहे पदों व भवनों के अभाव को लेकर वह पूर्व में शिक्षा मंत्री को भी ज्ञापन भेज चुके है, लेकिन अभी तक कोई उचित कार्रवाई नहीं हो पाई है। वहीं अपर जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक विनोद कुमार ढौंडियाल का कहना है कि हाल में बड़े स्तर पर शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, हालांकि अभी भी शिक्षकों की कमी बनी हुई है।


 

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