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क्या आप सहमत है  की पहाडो मे छल - मसान पूजा बढ रही है ?

Yes - 100 %
25 (64.1%)
No
11 (28.2%)
Can't say
3 (7.7%)

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Author Topic: Evil Powers in Uttarakhand - क्या पहाडो मे छल/मसान पूजा बढ रही है?  (Read 11087 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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क्या आप मानते है की पहाडो मे छल - मसान पूजा बढ रही है ?
Dosto,

आधुनिकरण के चलते भी पहाडो मे आमतौर के यह देखा गया है कि पहाडो मे छल - मसान पूजा बढ रही है !

क्या आप इस बात से सहमत है.. कृपया इस विषय पर आपनी राय दे.

एम् एस मेहता  

हलिया

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अब महाराज बढ रही है, घट रही है ऐसा ठीक-२ कहना तो मुश्किल ठैरा लेकिन हां ऐसा पहले कुछ ज्यादा ही था अब तो मेरे हिसाब से कुछ कम है लेकिन है जरूर.  पुरानी मान्यता वाले जो लोग ठैरे वे तो करैंगे ही। छोटी - बढी हर बिमारी का पहला इलाज इनकी नजरों में यही होने वाला ठैरा। अब खैर पढी-लिखी पीढी है... तो वो जरा दूसरे ढंग से सोचने वाले ठैरे। 

पुछारी

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क्या आप मानते है की पहाडो मे छल - मसान पूजा बढ रही है ?
Dosto,

आधुनिकरण के चलते भी पहाडो मे आमतौर के यह देखा गया है कि पहाडो मे छल - मसान पूजा बढ रही है !

क्या आप इस बात से सहमत है.. कृपया इस विषय पर आपनी राय दे.

एम् एस मेहता 



महराज ..

मेरे से पूछो... . लोगो मेरो पास उनी.... क्या करो मेरो नज़रों मे तों ज्यादे परेशानियों की जड़ भूत प्रेत से संबंधित नकालती है .   


हलिया

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भलो करौ हो महाराज..आ ग्यैछा..
नारैण, यो अलै-बलै बटी म्यर पहाड कै बचाया हो.. तुमरि जै जैकार छु.  यो चांल का गुदा छन जरा मंतर मारि दिया हो पुछारि ज्यू..

महराज ..

मेरे से पूछो... . लोगो मेरो पास उनी.... क्या करो मेरो नज़रों मे तों ज्यादे परेशानियों की जड़ भूत प्रेत से संबंधित नकालती है .  

sanjupahari

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Pai PAi Mehta jew bhali baat puchi tumule too...Raju da lai bhalai kuni...per meri nazroon main ek baat to chu...ab pai aankhoon dekhi mananai padu hooo saukaara...jab ankhoon samin main ke hu to unku kasi nakari du....ab wu chahe kwe supernatural power chu bhalai ya fir psychosomatic affairs...je lai chu thwaar to hunai chu hoo...

sanjupahari

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Mahraj... Sanju Da.


I also feel that the practice of worshiping of chal, Masan etc is increasing despite of the fact that modern facilities are coming, people are much & more educated compared to earlier.

I think there should be decline on this front.



Pai PAi Mehta jew bhali baat puchi tumule too...Raju da lai bhalai kuni...per meri nazroon main ek baat to chu...ab pai aankhoon dekhi mananai padu hooo saukaara...jab ankhoon samin main ke hu to unku kasi nakari du....ab wu chahe kwe supernatural power chu bhalai ya fir psychosomatic affairs...je lai chu thwaar to hunai chu hoo...

sanjupahari

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पुछारी

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और महराज ... कुछ पूछ कारन छ की  ?

पुछारी

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वत्स .... .
.
चिंता की कोई बात नही.......

एक बकरी और कलि मुर्गी चाहिए होगी ... और समस्या का समाधान... ...

अगर बकरी सफ़ेद रंग की है तो उसपे कुछ काला रंग पोत दो क्योंकि मसान को काले रंग पसंद होता है....

पंकज सिंह महर

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मेहता जी,
छल, मसान, ऎडी, परी सहित कई और भी पूजायें पहाड़ों में वर्तमान तक प्रचलित हैं, इन पूजाओं पर आधुनिकीकरण का कोई फर्क नहीं पड़ रहा है और शायद उत्तराखण्ड राज्य के निवासी जिस तरह के आस्थावान हैं, उसे देखकर तो नहीं लगता कि कभी यह पूजायें बंद भी हो पायेंगी. आमतौर पर यदि पहाड़ों में देखा जाय तो बिमारी या कुछ भी अनहोनी होने पर आदमी सबसे पहले अपने इष्ट देवता के सामने उचैन रखता है कि भगवान सब सही कर दो, फिर पुछारी के पास जाता है, डाक्टर की जरुरत उन लोगों को प्रथम दृष्टया तो नही होती है. कई बार यह भी देखा गया कि तमाम इलाज के बाद भी स्थिति नहीं सुधरती, अंत में यह पूजायें करके ही काम सुधरता है......वर्तमान के परिप्रेक्ष्य में दिमाग इस बात से सहमत नही होता लेकिन कुछ बीमारियां और संकट हमारे पहाड़ के लोगों को मानसिक भी होते है और उन मानसिक समस्याओं का इलाज वास्तव में किसी भी डाक्टर के पास नहीं है..इलाज पुछारी और पूजा ही है.....वास्तविकता में यह भी देखा गया कि बीमारी का डाक्टर से इलाज कराने के बाद भी यदि कोई छोटी बात भी हो तो लोगों को लगता है कि यह कोई ऊपरी चक्कर है, तो मेरा मानना है कि यदि हमें किसी चीज में पूर्ण मानसिक संतोष मिलता है तो उसे करने में हर्ज क्या है?......
              वैसे एक बात और है यदि हम ईश्वर के अस्तित्व को मानते हैं तो हमें छल, मशान आदि को भी मानना ही होगा..............

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Mahar Ji,

You are right.

However, we cann't deny the fact that something is there. But it has also been seen that people in most of the cases go strightforward to Pochhari etc rather than taking medical treatment.

मेहता जी,
छल, मसान, ऎडी, परी सहित कई और भी पूजायें पहाड़ों में वर्तमान तक प्रचलित हैं, इन पूजाओं पर आधुनिकीकरण का कोई फर्क नहीं पड़ रहा है और शायद उत्तराखण्ड राज्य के निवासी जिस तरह के आस्थावान हैं, उसे देखकर तो नहीं लगता कि कभी यह पूजायें बंद भी हो पायेंगी. आमतौर पर यदि पहाड़ों में देखा जाय तो बिमारी या कुछ भी अनहोनी होने पर आदमी सबसे पहले अपने इष्ट देवता के सामने उचैन रखता है कि भगवान सब सही कर दो, फिर पुछारी के पास जाता है, डाक्टर की जरुरत उन लोगों को प्रथम दृष्टया तो नही होती है. कई बार यह भी देखा गया कि तमाम इलाज के बाद भी स्थिति नहीं सुधरती, अंत में यह पूजायें करके ही काम सुधरता है......वर्तमान के परिप्रेक्ष्य में दिमाग इस बात से सहमत नही होता लेकिन कुछ बीमारियां और संकट हमारे पहाड़ के लोगों को मानसिक भी होते है और उन मानसिक समस्याओं का इलाज वास्तव में किसी भी डाक्टर के पास नहीं है..इलाज पुछारी और पूजा ही है.....वास्तविकता में यह भी देखा गया कि बीमारी का डाक्टर से इलाज कराने के बाद भी यदि कोई छोटी बात भी हो तो लोगों को लगता है कि यह कोई ऊपरी चक्कर है, तो मेरा मानना है कि यदि हमें किसी चीज में पूर्ण मानसिक संतोष मिलता है तो उसे करने में हर्ज क्या है?......
              वैसे एक बात और है यदि हम ईश्वर के अस्तित्व को मानते हैं तो हमें छल, मशान आदि को भी मानना ही होगा..............