Author Topic: Let Us be Effective Manager (Mangament Guru)-By Bi  (Read 18737 times)

Bhishma Kukreti

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Re: Let Us be Effective Manager (Mangament Guru)-By Bi
« Reply #20 on: December 31, 2011, 08:06:52 AM »
Mangament Guru -23
प्रबंध शास्त्री - 23         

                                               गैरी हैमल ; नवी रण नीति क धड़्वे   
 
                       
                      Gary Hamel : Famous for The Search for a New Stretegic Platform                                                             


(Notes on Management Theories from Old Age till date, Notes on Managemnt Thinkers and Management Practices,

Management Gurus, Marketing management Guru, Qaulity Mangement Guru, Operation Managemnt Guru,
 
Human Resourse Development Management Guru, General management Guru )

 

                                          Bhishm Kukreti

                    गैरी हेमल (१९५४-) अर वैको  गुरु सी.के.प्रहलाद 'कम्पीटिंग  फॉर फ्यूचर  ' लेख अर किताब का कारण प्रबंधन क्षेत्र मा प्रसिद्ध

ह्व़े.  गैरी हेमल का व्यौपार मा रण नीति न प्रबंधन विज्ञान्युं अर प्रबन्धकुं  दुयूं तैं प्रभावित कार.


                                      गैरी हेमल का  ख़ास विचार

 १- आज व्यौपारिक संस्थानुं तैं परम्परा तोडू रण नीति से भविष्य दिखण चएंद

२- रण नीति तैं  मुख्य प्रतिस्पर्धी गुण बणाण चएंद

३- गैरी हैमल न रण नीति क्रान्ति (Strategy as revolution )  लेख मा कथगा इ ख़ास बात बतैन

४- रण नीति कि रचना करे जांद ना कि रण नीति कखी पड़ीं रौंद

                   Key Books by Gary Hamel

1- Cooauthor with C.K.Prahlad,  Competing for Future, 1994

2-Coauthor with yves Doz , Aliance Advantage : The Art of Creativng  Value. 1998 

3- Staretegic Flexibilty , 1998

4- Leading the Revolution , 2000

 

हैंको Management Guru का बारा मा फड़कि -24 मा बाँचो
Management Guru Series to be continued.......

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Re: Let Us be Effective Manager (Mangament Guru)-By Bi
« Reply #21 on: December 31, 2011, 10:14:19 AM »
Mangament Guru -24

प्रबंध शास्त्री - 24         

                          चार्ल्स हैंडी: संस्थानु मा बदलाव समजण वाळ अर बदलाव कु  बक्की (भविष्यवक्ता )   

     

                          Charles Handy : Famous for Understanding the Changing Orgaanization                       


(Notes on General management Guru, Management Theories from Old Age till date, Notes on Managemnt Thinkers and Management Practices,

Management Gurus, Marketing management Guru, Qaulity Mangement Guru, Operation Managemnt Guru,

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                        Bhishm Kukreti

              चार्ल्स हैंडी को जनम आयर लैंड मा १९३२ ह्व़े , चार्ल्स हैंडी तैं महान प्रबंधन विचारकुं मा गणे जांद .

शेल पेट्रोलियम कम्पनी मा चार्ल्स भौत सालुं तक मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव राई , फिर एम्.ऐ.टी. मा फेलोशिप का बाद

चार्ल्स हैंडी लन्दन स्कूल आफ इकोनोमिक्स मा प्रोफ़ेसर बि राई. फ्री लांसर लिख्वार क अलावा चार्ल्स रोयल सोसाइटी

ऑफ़ आर्ट्स को अध्यक्ष बि राई .

   चार्ल्स हैंडी  न ओर्गेनैजेसनल बिहेविअर या संस्थानु मा आचरण अर मनेजमेंट पर  खूब ल्याख.

   चार्ल्स हैंडी क ' शैमरौक' सिधांत भौत  प्रसिद्ध ह्व़े जां मा चार्ल्स हैंडी न संस्थानु मा कामगत्युं तैं तीन भागूं मा बाँट :

१- क्वालिफाइड प्रोफेसनल : प्रोफेसनल टेक्नीसियन, मैनेजर 

२- ठेकेदारी वाळ विशेषग्य : विज्ञापन विभाग, अनशन विभाग  आदि का कामगति

३- लचीला कामगति : जन कि साधारण मजदूर, पार्ट टैम मजदूर आदि


                   Key Books by Charles Handi

1- Understanding Organization, 1985

2-Gods of Management , 1985

3- The Age of Unreason , 1989

4- The Empty Raincoat, 1994

5- Beyond Certainity , 1995

6- The hungry spirit 


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Re: Let Us be Effective Manager (Mangament Guru)-By Bi
« Reply #22 on: January 01, 2012, 02:22:25 AM »

Mangament Guru -25

प्रबंध शास्त्री - 25     

 

                             फ्रेडेरिक्क  हर्जबर्ग :  प्रोत्साहनौ  बान स्वच्छ वतावरण , या पूठा पर चटका लगाण ?   

     

                             Frederick Herzberg :  Famous for The Hygiene-Motivation Theory                     




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                            Bhishm Kukreti

 

                   फ्रेडेरिक्क हर्जबर्ग (1923-2000 ई ) क बिजिनेस मनेजमेंट संसार मा कथगा इ सिद्धांत प्रसिद्द ह्वेन .

पण फ्रेडेरिक्क हर्जबर्ग का यूँ सिद्धान्तुं मादे जॉब इनरिचमेंट  अर हाइजीन-मोतिवासन सिधांत जादा प्रसिद्द ह्वेन .

वैको " किक्क ऑन द आस्स  (किट्टा )"  या "पूठा पर चटका लगाओ  " सिद्धांत आज बि मनोविग्यानिकुं अर

प्रबन्धकुं बीच चर्चित विषय च . फ्रेडेरिक्क हर्जबर्ग न कामस्थानुं मा  व्यक्ति अर व्यक्ति क काम का

प्रति रुझान पर भौत ध्यान राई अर दगड मा प्रबन्धकुं तैं व्यक्ति तैं कने प्रोत्साहन दीण पर बि ध्यान राई.

                  मनिखों द्वी ख़ास जरोरात

१- तौळऐ जरोरात : दुःख से निजात पौण अर कमी तैं पूरी करण

२- अळगै जरोरात : मनिख क  मनोवैज्ञानिक विकास

                   स्वच्छ वतावरण

 मनिख जै बि वतावरण मा काम करदो  अर स्वच्छ वातावरण की कामना करदो .

कै बि कम्पनी मा स्वच्छ वतावरण का अंग इन छन

१- कम्पनी मा  नीति अर प्रशासन

२-कार्यगत  सम्बन्ध

३- कामौ शर्त, दशा, 

४-  कामगत्युं  सामाजिक स्तिथि

५- सुरक्छा

६- तनख्वा

                    प्रोत्साहन का आतंरिक अंग

 १- उपलब्धि

२-पछ्याणक मिलण

३- जै काम तैं करे जांद

४- जुमेवारी मिलण

५- काम मा गति

६-विकास

                पूठा पर चटका लगाणो  सिद्धांत  (किक्क ऑन द आस्स या किट्टा )

               जादातर प्रबंधक माणदा   छया या अबि बि माणदन बल काम मा गति लाणो बान या कामगत्युं

तैं प्रोत्साहन का वास्ता पूठा पर चटका लगाण, जादा तनखा/नफा  दीण या आरामदायक वातवरण

तैं महत्व दीन्दा छया या माणदन जब कि फ्रेडेरिक्क हर्जबर्ग क मानण च बल काम मा मजा अर

आतंरिक सुख ही काम गत्युं तैं प्रोत्साहन दीन्दन .


 
                              स्व-प्रोत्साहन का गुण

                  फ्रेडेरिक्क हर्जबर्ग को मनण छौ बल असल मा जॉब इनरिचमेंट का मुख्य आयाम इ छन :

१- सेल्फ शिड्यूल /समौ क अफिक पाबन्द हूण

२- जबाबदेही

३- विशेषग्य बणणो बान   ख़ास काम करण 

                  Books by Frederick Herzberg

1- Work and the Nature of Man , 1968

2-The managerial Choice : To be Efficient and to Be Human, 1976

3- Coauthor of The Motivation to Work, 1959

 

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Re: Let Us be Effective Manager (Mangament Guru)-By Bi
« Reply #23 on: January 01, 2012, 06:43:49 AM »

Mangament Guru -26

प्रबंध शास्त्री - 26       

                                             गीर्ट होफस्टेड : संस्कृति मा अनेकता कु धड्वे

                         Geert Hofstede :  Famous for 'Cultural Diversity


                               

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                                      Bhishm Kukreti

                         हौलैंड वासी  गीर्ट हौफस्टेड (१९२८) एक प्रसिद्ध सामाजिक मनोवैज्ञानिक अर समाज शास्त्री च.हौफस्टेड न क्रौस कल्चर

क दिसा मा भौत काम कार लोगुन ध्यान अंतररास्ट्रीय संस्थानुं मा सांस्कृतिक अनेकता क बारा मा प्रबन्धकुं अर समाज शास्त्रियुं

ध्यान आकृष्ट कार .र्ट हौफस्टेड न IBM मा काम कार अर वैन भौत सा तर्क अर सिद्धांत दुनिया तैं देन. गीर्ट हौफस्टेड न

 इंस्टीच्युट फॉर रिसर्च ऑन इंटरकलचरल 

कोर्पोरेसन  स्थापित कार. गीर्ट हौफस्टेड तैं कथगा सात विश्व विद्यालयुं न मानद पीएच.डी कि उपाधि देन.

संस्कृति सिद्धांत :   संस्कृति एक सामुदायिक पहलु च पण यू पहलु भौतिक रूप से नि दिख्यांद , हाँ संस्कृति मा

 निदिख्यांद पहलू छन - सांस्कृतिक मूल्य अर भौतिक पहलू छन धार्मिक या सामाजिक कर्मकांड

राष्ट्रीय संस्कृति : हरेक देस मा एक खास रास्ट्रीय संस्कृति बि बणदी

शक्ति-दूरी या असमान शक्ति/संसाधन वितरण  : कै बि देस मा शक्ति दूरी वांकण बुल्दन जकम  कमजोर वर्ग शक्ति पाण मा

असमानता क ई बात करद, शक्ति पाणे आशा करद कि शक्ति मा समानता आण चएंद

समूह का प्रति व्यक्तिवादी अर सामूहिक व्यवहार : हरेक समाज, समूह या देस मा व्यक्तिवादी, समूहवादी, व्यवहार पाए जांद.

कखी व्यक्ति अप ण चिंता अफिक कार्ड , कखी समूह व्यक्ति कि चिंता करद.

समाज मा पुरुष अर औरत वाद की हैसियत : हरेक देस या समाज मा पुरुसुं अर औरतुं क कर्तव्य अर अधिकार बिगळयाँ/अलग

होन्दन अर याँ से समाज की प्रतिस्पर्धा शक्ति पर फ़रक पोडद. 

अनिश्चतता तैं रुकणो तैयारी : हरेक समाज अर देस मा अनिश्चतता की मात्रा अलग अलग होंदी अर याँ से अनिश्चतता तैं रुकणो 

बान नियम अलग अलग होन्दन. कखी अनिश्चतता-डौर  भौत होंदी त नियम बिंडी होन्दन अर कखी अनिश्चतता-डौर  कम होंदी

त नियम बि कम होंदी.

प्रायोगिक धरातल कु पहलू : गीर्ट हौफस्टेड को बुलण च विका बुल्यां/लिख्यां पहलु क्वी नियम या सिद्धांत इन नि छन कि

जौं तैं दवाई कि पुडिया समजीक प्रयोग करे जवान. गीर्ट हौफस्टेड बुल्दु च बल वैका संस्कृति का पहलू विचार छन ना कि सिद्धांत

अर   संस्थान/देस/समाज/समूह  तैं यूँ पहलुऊँ कि जांच कौरिक अफुकुणि अपण हिसाब से रणनीति बणाण चएंद. 

 

                              Books by Geert Hofstede

 

1- Cultural consequences : International Differences in Work Related Values , 1980

2- Cultures and Organizations: Software of the Mind, 1991

 

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« Reply #24 on: January 01, 2012, 08:45:00 AM »

Mangament Guru -27

प्रबंध शास्त्री - 27   

                                                    जोसेफ जुरान : गुणवत्ता प्रबंधन को विशेषज्ञ   

                             Joseph Juran : Famous for Quality Management


 

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                                       Bhishm Kukreti

       

               यहूदी मूल को जोसेफ जुरान (१९०४-२००६ ) को जनम रोमानिया मा एक गाँव मा ह्व़े. १९१२ इ. मा जोसेफ जुरान

अपण परिवार क दगड अमेरिका मा बस . जोसेफ न  भौत सा संस्थानों मा गुणवता विभागुं मा  काम कार अए दगड मा गुणवत्ता

प्रबंधन आन्दोलन कु काम बि करणा रैन.

                         

 ८०: २० को सास्वत नियम की पछ्याणक :  जोसेफ जुरान न विलफ्रेडो पारेटो   क नियम गुणवत्ता प्रयोग कार अर ब्वाल बल अस्सी प्रतिशत समस्या सिरफ़

बीस प्रतिशत कारणो से उपजदन. 

 मैनेजमेंट ब्रेकथ्रू : जोसेफ की किताब मैनेजमेंट  ब्रेकथ्रू मा  प्रब्धाकुं क मानव आदत-व्यवहार, अर काम करणों  तरीका
  तैं समजण पर जोर दे

गुणवत्ता योजना :  इखम जोसेफ को बुलण च   बल

१- अपण ग्राहक तैं पछ्याणो

२- ग्राहकुं आवश्यकता तैं पछ्याणो

३- ग्राहकुं आवश्यकता तैं प्रबंधकों तैं अपण भाषा मा प्रयोग करण चएंद

गुणवत्ता नियंत्रण:

१-उत्पाद क गुण उत्पादन शैली अर ग्राहकुं आवश्यकतानुसार हूण चएंद .

२- उत्पाद मा इन विधि अपनाण चएंद जाण से उत्पाद उनि उत्पादित ह्वाऊ जन वै तैं बणाण चाणा छन

गुणवत्ता मा सुधार ;

१- विधि तैं उच्चतम स्तिथि मा लाओ या विधि पर ध्यान द्याओ

२- उत्पाद तैं विधि अनुसार बणण सरल हूण चयेंद

संस्थान मा गुणवत्ता जाग्रति :

१- विशेष उद्देश्य बणये जावन जु पुरा बि ह्व़े सौकन

२- उद्देश्य पूर्ति बान योजना बणण जरोरी च

३- हरेक सदस्य तैं उद्देस्यपुर्ती खातिर स्पस्ट  जुम्मेवारी दिए जाव

४- फल परापती क बाद इनाम या पुरूस्कार की व्यवस्था करण जरुरी च


जोसेफ जुरान गुणवत्ता प्रबंधन मा क्रांति लाई 



                    Books by Joseph Juran

1- Quality Control Handbook, 1951

2- Managerial Breakthrough , 1964

3-Management of Quality Control, 1967

4-Quality Planning and Analysis , 1970

5- Upper Management and Quality, 1980

6- Juran on Planning for Quality , 1988

 

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Re: Let Us be Effective Manager (Mangament Guru)-By Bi
« Reply #25 on: January 02, 2012, 05:10:46 AM »

Mangament Guru -28
 
प्रबंध शास्त्री - 28   

                                रोजाबेथ  मोस कैंटर : बदलौ प्रबंधन  अर  स्वगर्व की धड्वेयाण   

                  Rosabeth Moss Kanter:  Poineer of Empowerment and Change Management                           



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                                   Bhishm Kukreti

 

                      रोजाबेथ (१९४३-)  क नाम कथगा इ विधाओं मा याद करे जांद. पण जादातर प्रबंध विज्ञानी वीं तैं

बदलौ प्रबंधन (Change Management ) अर स्वगर्व क धड्वे बुल्दन.


                    रोजबेथ कु जनम ओहिओ , अमेरिका मा ह्व़े अर वींक पढे नामी गिरामी अकादमी मा ह्व़े . रोजबेथ कैंटर न

मिसिगन वि.वि से पीएच .डी. की डिग्री पाई . रोजबेथ न हार्वर्ड वि.वि मा  पढ़ाई. 

       

                       रोजबेथ कैंटर की कटघ इ किताब अर डेढ़ सौ से जादा लेख छपी गेन   

  रोजबेथ मोस तैं २३ संस्थानुं से मानद डॉक्टरेट उपाधि अर कथगा इ पुरुष्कार मिलेन .


                         Key  Books by Rosabeth Moss Kanter


1- Men and Women of the Corporation, 1977

2- The Change Masters: Corporate Enterprenuers at Work, 1983 ,

3- When Giants Learn to Dance: Master the Challenge of Strategy, Management, and Careers in 1990s 1989

4- The Challenges of Organizational Change: How Companies,Experience it and Leaders Guide It, 1992

5- World Class, 1995

6- Rosabeth Moss Kanter on the Frontiers of Change, 1997

7- Confidence: How winning Streak and Loosing Streaks Begin and End


रोजबेथ तैं टाइम्स लन्दन न ' दुनया क ५० महान प्रभावी औरत ' घोषित कर ट एक हैंक संस्थान न रोजबेथ मोस कैंटर तैं

'दुनया का ५० महान विचारक' मान

 

 


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Re: Let Us be Effective Manager (Mangament Guru)-By Bi
« Reply #26 on: January 02, 2012, 07:02:51 AM »

Mangament Guru -29

प्रबंध शास्त्री - 29   



                             रोबर्ट  कपलान अर डेविड नोर्टन : स्कोरकार्ड का जन्म दाता 

                         

                  Robert Kaplan and David Norton: Famous for The Balanced Scorecard


                                                 



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                                                    Bhishm Kukreti

   
                    रोबर्ट कपलान (१९४०) अर डेविड नोर्टन न प्रबंधन दुनिया तैं एक नायाब विचार दे जैक नाम च ' द बैलेंस्ड स्कोरकार्ड'.

  कपलान अर नोर्टन को बुलण च बल   कम्पनी क तागत खाली फैनेंसियल बैलेंस शीट से नि दिखे जान चएंद बल्कण मा

कुछ हौरी बातुन तैं बि ध्यान मा रखण पोडल . फैनेंसियल बैलेंस शीट से रंनेती तैं कार्यवानित कनो करण को पता नि चल्दो.

                                     कपलान अर नोर्टन उपजयुं  द बैलेंस्ड  स्कोरकार्ड का कुछ ख़ास पहलु

                                            १- फाइनेंसियल यथार्थ 


फिनैन्सियल बैलेंस शीट उनि होण चएंद जन सरकार अर संबिधान तैं चएंद पण इख मा

उद्देश्य : ज़िंदा रौ ण की कीमत, सफलता, बढ़ोतरी आदि आन्द अर ओ सब चीज होण चएंद  जो अकौंटिंग मा जरुरी च

                                   २- ग्राहकुं यथार्थ



अ- उद्देश्य : उद्देश्य मा ग्राहक कनकैक बौणल, ग्राहक कनकैक कम्पनी क दगड जुड़याँ राला, गराहक संतुश्थी कनकैक होली अर

नफा कनकैक होलू की बात हूण चएंद

ब- मापदंड : इख्मा भौत सा मापदंड की बात हूण चएंद  जन की मार्केट शेयर , वितरण लगत, ग्राहक भक्ति अर वांको आकलन,

स्प्लायारूं  दगड  अर वितरण जंजीरों दगड सम्बन्ध को मापदंड

                                     ३- आतंरिक ब्यापार विधि क यथार्थ

अ- गोल

ब- मापदंड

                                       ४- सिखण अर नवनिर्माण

अ- गोल

ब-मापदंड 

                                        ५- स्कोरकार्ड या रणनीति को कारयावनित करण

 कपलान अर डेविड न याँ पर साथ सीढ़ी  बतैन  कि रणनीती तैं कार्यवानित करण तक कन कन काम अर विधि अपनाण चएंद 

 

                Books by Robert Kaplan and  David Norton

 

 1- The Balanced Scorcards :Translating Strategy into Action, 1996

2- The Stretegy-Focused Organization: how Balanced Scorecards Companies Thrive in the New Business

Environment , 2000   
 
 

कपलान अर नोर्टन का विचारूं बडी काट बि होंदी पण या बात सै च कि 'ड़ बैलेंस्ड स्कोरकार्ड ' न प्रबंध विज्ञानं मा धमाका कार

अर जादातर कम्पनी ये मापदंड तैं ये तरीका या वै तरीका से अपनाणा  ही छन . 

 


हैंको Management Guru का बारा मा फड़कि -30 मा बाँचो

 

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Re: Let Us be Effective Manager (Mangament Guru)-By Bi
« Reply #27 on: January 02, 2012, 08:39:16 AM »
Mangament Guru -30

प्रबंध शास्त्री - 30   





                                       थिओडोर लेविट : मार्केटिंग को महत्व बथाण वाळ 

                     Theodore Levitt : Who Put Marketing  in First t Place             






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                                            Bhishm Kukreti

                   

                 थिओडोर लेविट (१९२५-२००६, दगड्यों बीच टेड ) क लेख 'मार्केटिंग मायोपिया' (१९६०) न ब्यौपार अर व्यौपार- अकादमी संसार 

मा धमाका कार. जै टैम पर  उत्पादन काम छौ अर मांग जादा छे वै बगत पर थिओडोर लेविट क 'मार्केटिंग मायोपिया' लेख न

अकादमी विद्वानु अर ब्यापारियुं तैं सुचण पर मजबूर कार बल मार्केटिंग को भौत इ महत्व च. इनी लेविट कु लेख

'ग्लोबलाइजेसन ऑफ़ मार्केट्स' (१९८३)  से सन १९४४ मा सुच्युं शब्द 'ग्लोबलाइजेसन' तैं ब्यापारिक अर अकादमिक

संसार मा प्रचार अर प्रसार मील.



            थिओडोर लेविट कु जनम जर्मनी मा ह्व़े छौ अर वो अपण परिवार को दगड जर्मनी छोड़िक अमेरिका आई.

    थिओडोर लेविट ण हार्वर्ड बिजिनेस स्कूल मा तीस साल तलक मार्केटिंग पढ़ाई अर जग प्रसिद्ध हार्वर्ड बिजिनेस रिव्यू  क

पांच साल तक संपादक बि राई

              थियोडोर को मनण छौ बल बगैर मार्केटिंग तैं महत्व दियां क्वी बि बड़ो बिजिनेस तैं सफलता नि मील सकदी .मार्केटिंग मायोपिया

लेख का बाद थिओडोर न मार्केटिंग मुतालिक अकादमीय विद्वानु अर ब्यापारिक प्रबन्धकुं तैं कथगा इ विधाऊ से  परिचय कराई

             थिओडोर लेविट तैं कथगा इ प्रसिद्ध संस्थानु न पुरुष्कार देन

               

                    Books and Artilces by Theodore Levitt

Artilce, which created stir in business world, 'Marketing Myopiya', 1960

Another article 'Globalization of Markets' 1983,  popularized the word 'Globalization' in the business world.



1- Innovation in Marketing : New perspectives for Profit and Growth, 1962

2-Marketing for Business Growth, 1974

3- The Marketing Imagination, 1983

4- Thinking about Management, 1991



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Re: Let Us be Effective Manager (Mangament Guru)-By Bi
« Reply #28 on: January 03, 2012, 04:02:26 AM »
Mangament Guru -31

प्रबंध शास्त्री - 31   





                                      कुर्ट लेविन  : बदलौ प्रबंधन अर ग्रुप डाईनेमिक्स  को  धड्वे                           

                         Kurt Lewin: Change Management and Group Dynamics Fame




(Notes on General management Guru, , Notes on Managemnt Thinkers and Bright Management Practices,
 
Management Gurus, Marketing management Guru, Qaulity Mangement Guru, Operation Managemnt Guru,

Human Resourse Development Management Guru, )

 

                                             Bhishm Kukreti
 

       कुर्ट लेविन  (१८९०-१९४७ ) की खोज अर सिद्धांत अबि बि औचित्यपूर्ण अर संगत  छन.

जर्मनी मा जनम्युं कुर्ट लेविन औ नाम  सामाजिक मनोविज्ञान मा   बड़ो आदरणीय च .

बर्लिन वि.वि बिटेन पीएच. ड़ी कार अर फिर वुखी पढ़ाण बिसे गे पण १९३२ मा कुर्ट तैं

जर्मनी छुड़ण   अर अमेरिका मा बसण पोड़.

 

                      नेतृत्व का ढंगढाळ /शैली अर शैली को प्रभाव

 

            लिप्पिट, व्हाईट क दगड  कुर्ट न नेतृत्व क ढंग ढाळ पर खोज (१९३९)  आर अर पाई की

तीन तरां का नेतृत्व हूंद :

१- डेमोक्रेटिक, प्रजातंत्री नेतृत्व 

 २-ऑटोक्रेटिक , निरंकुश नेतृत्व

३- लाइसेज -फेयर , ठीक ठाक बस

            यूँ तीन सामाजिक मनोविग्यानकों न पाई बल प्रजातांत्रिक नेतृत्व जादा सटीक अर सफल ढंग च

 

                     ग्रुप मा निर्णय लीण

 

              दुसर विश्व  जुद्ध को परांत कुर्ट न अमेरिकी सरकार का वास्ता एक खोज करे अर पाई

कि बदलाव  करद दें लोगूँ/सदस्यों तैं योजना, विधि बणाण दें शामिल करे जाव त बदलाव चौड़ /जल्दी

बि औंद अर बदलौ ल़ाण मा औसंद/अट्वांस /कठिनाई बि कम आन्द
 
             वातावरण  को सदस्यों क स्क्यात/शक्ति पर प्रभाव 

  कै बि संगठन या समूह मा कुछ फ़ोर्स काम करदन अर य़ी फ़ोर्स काम कु  क्षेत्र

क वातावरण से प्रभावित हुन्दन

* आचरण वातावरण को फल च

*कबि बि निरीक्षण या समीक्षा पूरो काम को हूण  चएंद ना कि काम क टुकड़ो क

हाँ ! हरेक टुकडा पूरो तैं प्रभावित करदो

* ठोस व्यक्ति याने ठोस काम

 

                    बदलाव नमूना /मॉडल  का तीन सूत्र    

  कुर्ट लेविन क बदलौ बदलू नमूना या चेंज मॉडल आज बि संगत च अर या बिगळी/अलग

बात च कि मानो विज्ञानिकुन इख मा कुछ बदलाव कौरिन पण आधारिक नमूना   
 
कुर्ट का इ हूंद

१- बदलाव की तैयारी : यीं स्थिति मा पैल त नेतृत्व तैं बदलाव तैं स्वीकार करण पोडद ,

फिर बद्लौ  की तैयारी कौरिक हौर्युं तैं बि बदलाव का बान तैयार करण पोडद. बदलाव क्वी

बि ह्वाऊ सद्यानी इ बदलाव मा पैल पैल आराम से कम-आराम की स्थिति से भेंट हुंदी अर यो इ

आराम अर कम-आराम की स्तिथि लोगूँ तैं बदलाव से दूर करदी

२- संक्रमण काल या बदलाव: बदलाव एक घटना णि होंदी बल्कण मा एक विधि/प्रोसेस होंद.
 
जब बदलाव की तैयारी से बदलाव क तरफ कदम बढ़ये जान्दन त,बदलाव हुंद अर यो बि

एक संक्रमण काल कु समौ हूंद. संक्रमण काल कठण समौ होंद जख मा लोक बदलाव विधि

सिखदन, लोक विधि तैं समजण मा टैम लगांदन , बदलाव तैं अपण्यान्दन, अफु तैं अनुकरण

लैक बणान्दन.   इख मा उच्च प्रबंध पंगत तैं तौळ वाळऊं  तैं पूरो समर्थन दीण जरुरी च .
 
३- बदलाव को टिकण: तीसरी स्तिथि मा बदलाव अपण जगा मा जमी जांद याने बदलाव

अपण उद्देश्य पूर्ति करण बिसे जांद, बदलाव अब एक सत्य ह्व़े जांद.
 
 

                           ट्रेनिंग ग्रुप (टी-ग्रुप)     

 

कुर्ट लेविन ट्रेनिंग ग्रुप या टी-ग्रुप क खोजी बि छौ . जब कै बि काम /खेल मा 

 अलग अलग ग्रुप आन्दन त हरेक ग्रुप अलग अलग आचरण करदन अर

उदेश्य पूर्ति बान  अलग अलग ग्रुपुं मा एका करणे खास विधि होंद. 

 

                            एक्सन रिसर्च
  कुर्ट लेविन क  टी  ग्रुप अर एक्सन  रिसर्च कु आपस मा  मा सम्बन्ध  च .

एक्सन रिसर्च मा कुर्ट को बोल ण च बल कार्य क बान  खोज औ बान

कार्यकर्ताओं को  शामिल हूण जरुरी च

 

              Books by Kurt Levin

1- Resolving Social Conflicts : Selected Papers on Group Dynamics, 1948

2- Field Theory in Social Science (Edited by Dowrwin), 1952

 
 
 


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Re: Let Us be Effective Manager (Mangament Guru)-By Bi
« Reply #29 on: January 03, 2012, 06:02:57 AM »

Mangament Guru -32     

प्रबंध शास्त्री - 32     


                                          अब्राहम मासलो : मानवीय जरुरात को जणगरु       



                        Abraham Maslow : Famous for The Heiarchy of Needs


               



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                                        Bhishm Kukreti



                        अब्राहम मासलो 'थिओरी ऑफ़ हैरार्की ऑफ़ नीड्स' क बान प्रसिद्ध च .

               महान मनोवैज्ञानिक अर आचरण वैज्ञानिक अब्राहम मासलो (१९०८-१९७०)अमेरिकौ वासिन्दा  छौ.

अब्राहम क मनिखों पांच आधारभूत जरोरत की चर्चा आज  क्या भोळ बि होली .

मासलो न बताई बल य़ी पाँच आवश्यकता मनुष्य का वास्ता प्रोत्साहन दायी/प्रोत्साहन मूलक  छन

१- ज़िंदा रौणे आवश्यकता : खाणक , पाणी, झुल्ला, कूड, गर्मी अर निंद जन आवश्यकता ज़िंदा रौणे जरूरी छन

२- सुरक्षा, बचाव, जमानत: सुरक्छा, बचाव, जमानत आदि दुसर महत्वपूर्ण आवश्यकता च

३-सामाजिक आवश्यकता; गाँव गौळ मा रौणे याने समाज मा रौणे आवश्यकता बि जरुरी च

४- अहम् तुष्टि  भावना : चौथी आवश्यकता अहम् तुष्टि च गर्व, मान, सम्मान , आदर सत्कार आदि बि

जरुरी ह्व़े जान्दन.

५- अंतर्मन या आत्म संतुष्टि :  जब सौब कुछ प्राप्त ह्व़े जाओ त मनिख आत्म संतुष्टि चांदो या आत्म संतुष्टि की

खोज मा जांद.

  हरेक मनिख की आवश्यकता अलग अलग होन्दन अर वीं आवश्यकता /जरोरात तैं पछ्याणिक

मनुष्य तैं प्रोत्साहन दिए जाण चएंद


                    Books by Abraham Maslow


 1- Motivation and Personality, 1987

2- The Further Reaches of Human Nature 

 



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