Author Topic: Religious Chants & Facts -धार्मिक तथ्य एव मंत्र आदि  (Read 47478 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Chandra Shekhar Shaastri माँ से प्रार्थना करे ..हम सभी की गति माँ की ओर हो, सदा ही माँ की करुणा परमकृपा बनी रहे ...
                             || - भवान्याष्टकं ||
 न तातो न माता न बन्धुर्न दाता न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता .
 न जाया न विद्या न वृत्तिर्ममैव गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि .. १..
 
 भवाब्धावपारे महादुःखभीरु पपात प्रकामी प्रलोभी प्रमत्तः .
 कुसंसारपाशप्रबद्धः सदाहं गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि .. २..
 
 न जानामि दानं न च ध्यानयोगं न जानामि तन्त्रं न च स्तोत्रमन्त्रम् .
 न जानामि पूजां न च न्यासयोगं गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि .. ३..
 
 न जानामि पुण्यं न जानामि तीर्थं न जानामि मुक्तिं लयं वा कदाचित् .
 न जानामि भक्तिं व्रतं वापि मातर्गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि .. ४..
 
 कुकर्मी कुसङ्गी कुबुद्धिः कुदासः कुलाचारहीनः कदाचारलीनः .
 कुदृष्टिः कुवाक्यप्रबन्धः सदाहं गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि .. ५..
 
 प्रजेशं रमेशं महेशं सुरेशं दिनेशं निशीथेश्वरं वा कदाचित् .
 न जानामि चान्यत् सदाहं शरण्ये गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि .. ६..
 
 विवादे विषादे प्रमादे प्रवासे जले चानले पर्वते शत्रुमध्ये .
 अरण्ये शरण्ये सदा मां प्रपाहि गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि .. ७..
 
 अनाथो दरिद्रो जरारोगयुक्तो महाक्षीणदीनः सदा जाड्यवक्त्रः .
 विपत्तौ प्रविष्टः प्रनष्टः सदाहं गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि .. ८..
 
 .. इति श्रीमदादिशंकराचार्य विरचिता भवान्यष्टकं समाप्ता .
 आप को माँ का सानिध्य और शरणागति सहज हो ....माँ से मंगल प्रार्थना . जय हो .....

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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ॐ नमः सच्चिदानंदरूपाय परमात्मने
ज्योतिर्मयस्वरूपाय विश्वमांगल्यमूर्तये॥१॥

प्रकृतिः पंचभूतानि ग्रहलोकस्वरास्तथा
दिशः कालश्च सर्वेषां सदा कुर्वंतु मंगलम्‌॥२॥

रत्नाकराधौतपदां हिमालयकिरीटिनीम्‌
ब्रह्मराजर्षिरत्नाढ्याम् वन्दे भारतमातरम्‌ ॥३॥

महेंद्रो मलयः सह्यो देवतात्मा हिमालयः
ध्येयो रैवतको विन्ध्यो गिरिश्चारावलिस्तथा ॥४॥

गंगा सरस्वती सिंधु ब्रह्मपुत्राश्च गंदकी
कावेरी यमुना रेवा कृष्णा गोदा महानदी ॥५॥

अयोध्या मथुरा माया काशी कांची अवंतिका
वैशाली द्वारका ध्येया पुरी तक्शशिला गया ॥६॥

प्रयागः पाटलीपुत्रं विजयानगरं महत्‌
इंद्रप्रस्थं सोमनाथस्तथामृतसरः प्रियम्‌॥७॥

चतुर्वेदाः पुराणानि सर्वोपनिषदस्तथा
रामायणं भारतं च गीता षड्दर्शनानि च ॥८॥

जैनागमास्त्रिपिटकः गुरुग्रन्थः सतां गिरः
एष ज्ञाननिधिः श्रेष्ठः श्रद्धेयो हृदि सर्वदा॥९॥

अरुन्धत्यनसूय च सावित्री जानकी सती
द्रौपदी कन्नगे गार्गी मीरा दुर्गावती तथा ॥१०॥

लक्ष्मी अहल्या चन्नम्मा रुद्रमाम्बा सुविक्रमा
निवेदिता सारदा च प्रणम्य मातृ देवताः ॥११॥

श्री रामो भरतः कृष्णो भीष्मो धर्मस्तथार्जुनः
मार्कंडेयो हरिश्चन्द्र प्रह्लादो नारदो ध्रुवः ॥१२॥

हनुमान्‌ जनको व्यासो वसिष्ठश्च शुको बलिः
दधीचि विश्वकर्माणौ पृथु वाल्मीकि भार्गवः ॥१३॥

भगीरथश्चैकलव्यो मनुर्धन्वन्तरिस्तथा
शिबिश्च रन्तिदेवश्च पुराणोद्गीतकीर्तयः ॥१४॥

बुद्ध जिनेन्द्र गोरक्शः पाणिनिश्च पतंजलिः
शंकरो मध्व निंबार्कौ श्री रामानुज वल्लभौ ॥१५॥

झूलेलालोथ चैतन्यः तिरुवल्लुवरस्तथा
नायन्मारालवाराश्च कंबश्च बसवेश्वरः ॥१६॥

देवलो रविदासश्च कबीरो गुरु नानकः
नरसी तुलसीदासो दशमेषो दृढव्रतः ॥१७॥

श्रीमच्छङ्करदेवश्च बंधू सायन माधवौ
ज्ञानेश्वरस्तुकाराम रामदासः पुरन्दरः ॥१८॥

बिरसा सहजानन्दो रमानन्दस्तथा महान्‌
वितरन्तु सदैवैते दैवीं षड्गुणसंपदम्‌ ॥१९॥

रविवर्मा भातखंडे भाग्यचन्द्रः स भोपतिः
कलावंतश्च विख्याताः स्मरणीया निरंतरम्‌ ॥२०॥

भरतर्षिः कालिदासः श्रीभोजो जनकस्तथा
सूरदासस्त्यागराजो रसखानश्च सत्कविः ॥२१॥

अगस्त्यः कंबु कौन्डिण्यौ राजेन्द्रश्चोल वंशजः
अशोकः पुश्य मित्रश्च खारवेलः सुनीतिमान्‌ ॥२२॥

चाणक्य चन्द्रगुप्तौ च विक्रमः शालिवाहनः
समुद्रगुप्तः श्रीहर्षः शैलेंद्रो बप्परावलः ॥२३॥

लाचिद्भास्कर वर्मा च यशोधर्मा च हूणजित्‌
श्रीकृष्णदेवरायश्च ललितादित्य उद्बलः ॥२४॥

मुसुनूरिनायकौ तौ प्रतापः शिव भूपतिः
रणजितसिंह इत्येते वीरा विख्यात विक्रमाः ॥२५॥

वैज्ञानिकाश्च कपिलः कणादः शुश्रुतस्तथा
चरको भास्कराचार्यो वराहमिहिर सुधीः ॥२६॥

नागार्जुन भरद्वाज आर्यभट्टो वसुर्बुधः
ध्येयो वेंकट रामश्च विज्ञा रामानुजायः ॥२७॥

रामकृष्णो दयानंदो रवींद्रो राममोहनः
रामतीर्थोऽरविंदश्च विवेकानंद उद्यशः ॥२८॥

दादाभाई गोपबंधुः टिळको गांधी रादृताः
रमणो मालवीयश्च श्री सुब्रमण्य भारती ॥२९॥

सुभाषः प्रणवानंदः क्रांतिवीरो विनायकः
ठक्करो भीमरावश्च फुले नारायणो गुरुः ॥३०॥

संघशक्ति प्रणेतारौ केशवो माधवस्तथा
स्मरणीय सदैवैते नवचैतन्यदायकाः ॥३१॥

अनुक्ता ये भक्ताः प्रभुचरण संसक्तहृदयाः
अविज्ञाता वीरा अधिसमरमुद्ध्वस्तरि पवः
समाजोद्धर्तारः सुहितकर विज्ञान निपुणाः
नमस्तेभ्यो भूयात्सकल सुजनेभ्यः प्रतिदिनम्‌ ॥ ३२॥

इदमेकात्मता स्तोत्रं श्रद्धया यः सदा पठेत्‌
स राष्ट्रधर्म निष्ठावानखंडं भारतं स्मरेत्‌ ॥३३॥

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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अम्बे तू है काली, जय दुर्गे खप्पर वाली
 तेरे गुण गायें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती
 
 तेरे जगत के भक्त जनन पर भीर पड़ी भारी
 दानव दल पर टूट पड़ो माँ करके सिन्हा सवारी
 सौ सौ सिंहो सी तू बलशाली, है अष्ट भुजाओ वाली
 दुष्टों को तू ही संहारती || ओ मैया ||
 
 माँ बेटे का है जग में बड़ा ही निर्मल नाता
 पूत कपूत सुने है पर न माता सुनी कुमाता
 सब पर अमृत बरसाने वाली, सबको हरषाने वाली
 नैया भंवर से उबारती || ओ मैया ||
 
 नहीं मांगते धन और दौलत ना चांदी ना सोना
 हम तो मांगे माँ तेरे मन में एक छोटा सा कोना
 सब पे करुणा बरसाने वाली, विपदा मिटने वाली
 दुखियों के दुःख को तू टारती || ओ मैया ||
 
 चौदस के दिन तेरे भवन में भीड़ लगी हैं भारी
 जो कोई मांगे सोई फल पावे, कोई ना जावे खाली
 सबकी झोली भरने वाली, मांगो मुरादों वाली
 दुखियों के दुःख को निवारती || ओ मैया ||
 
 हम पापी माँ अधम अधम अनाड़ी, अपने सूत की करना रक्षा
 तेरा ही यश गान करे माँ, मागे प्रेम की भिक्षा
 मैया सहस दिलाने वाली, मार्ग दर्शाने वाली
 संकट से तू ही तो निकालती || ओ मैया ||
 
 मन मंदिर में गूंज रहा है आज तेरा जयकारा
 हम दुखियों का तुझ बिन मैया कौन होगा सहारा
 मैया रूप दिखने वाली, शक्ति जताने वाली
 दुखियों के दुःख को तू टारती || ओ मैया ||
 
 बीच भंवर में आन पड़ी नैया
 तुम बिन हमको नहीं मिलेगा दूजा और खिवैया
 मैया संकट मिटाने वाली, बिगड़ी बनाने वाली
 नैया को तू ही तो उतारती || ओ मैया ||
 
 तुम होप मेरी इष्टाध्यायी, पिता गुरु और माता
 तुम ही मेरी सब कुछ हो, तुम्हे छोड़ में कहा जाता
 दुर्ग सिंह सवारी वाली, काली कलकत्ते वाली
 धारण तू ही है धारती || ओ मैया ||


मोहन जोशी

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bhot aanad aa go ho mehta ju ji raya

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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5 अक्षरों की इस शिव मंत्र शक्ति से जल्द होती है शनि दोष शांति

शास्त्रों में भगवान शिव सुख व मंगल से जुड़ी कामनासिद्धि करने वाले देवता तो उनके परम भक्त शनि भाग्य विधाता बताए गए हैं। काल के नियंत्रक देवता होने से भी भगवान शिव की भक्ति न केवल शनि दोष बल्कि सभी ग्रह दोषों का शमन करने वाली मानी गई है।

खासतौर पर प्रदोष, शनिवार या सोमवार की शुभ घड़ी में आशुतोष यानी शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता भगवान शिव की उपासना में शिव पंचाक्षर स्त्रोत शनि या अन्य ग्रहों के अशुभ प्रभाव से पैदा समस्त रोग, शोक, संताप का नाश क र जीवन में शांति, सुख और समृद्धि लाने वाला माना गया है। शिव पंचाक्षर स्त्रोत शिव के अद्भुत रूप और शक्ति की स्तुति है, जो पंचाक्षर मंत्र नम: शिवाय के पांच अक्षरों न, म, श, व, य में छुपी शिव शक्ति का भी आवाहन है। भगवान शिव का यह स्त्रोत पाठ नियमित रूप से पंचोपचार पूजा कर भी जरूर करें -

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय|

 नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मै "न" काराय नमः शिवायः॥

मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय|

 मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मै "म" काराय नमः शिवायः॥

शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय|

 श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै "शि" काराय नमः शिवायः॥

वषिष्ठ कुंभोद्भव गौतमार्य मुनींद्र देवार्चित शेखराय|

 चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय तस्मै "व" काराय नमः शिवायः॥

यज्ञस्वरूपाय जटाधराय पिनाकस्ताय सनातनाय|

 दिव्याय देवाय दिगंबराय तस्मै "य" काराय नमः शिवायः॥

पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेत शिव सन्निधौ|

 शिवलोकं वाप्नोति शिवेन सह मोदते॥

(source http://religion.bhaskar.com/article/ups-5-words-shiv-mantra-power-dominate-shani-dosh-2771172.html?LHS-)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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चाहें ज्यादा आमदनी व बचत तो बोलें ये 8 सरल लक्ष्मी मंत्र

लाभ-हानि जीवन का हिस्सा है। जीवन के हर क्षेत्र में हार-जीत और खोने-पाने का सिलसिला चलता रहता है। यह सच जानते हुए भी हर व्यक्ति स्वाभाविक रूप से घाटे या नुकसान से बचने की तमाम कोशिशें करता है, किंतु कहीं न कहीं बुरे समय या किसी चूक से उसे मुश्किलों से दो-चार होना ही पड़ता है।

शास्त्रों में ऐसे ही विपरीत हालात से बचने और बाहर आने के लिए देव उपासना का महत्व बताया गया है। मातृशक्ति लक्ष्मी को सभी संपत्ति, सिद्धि और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है। इसलिए खासतौर पर जब व्यक्ति आर्थिक परेशानियों से घिर जाता है और परिवार तंगहाली या कारोबार में घाटे के दौर से गुजर रहा हो तो माता लक्ष्मी के आठ रूपों यानी अष्टलक्ष्मी की उपासना व मंत्र ध्यान आमदनी व बचत बढ़ाने वाले माने गए हैं।

जानते हैं शुक्रवार के दिन लक्ष्मी की सामान्य पूजा विधि व 8 सरल लक्ष्मी मंत्र-

- शुक्रवार के दिन शाम के समय स्नान कर घर के देवालय में एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर केसर मिले चन्दन से अष्टदल बनाकर उस एक मुट्ठी चावल रख जल कलश रखें।

- कलश के पास हल्दी से कमल बनाकर उस पर माता लक्ष्मी की मूर्ति प्रतिष्ठित करें।

-  माता लक्ष्मी की मूर्ति के सामने श्रीयंत्र भी रखें।

- इसके अलावा सोने-चांदी के सिक्के, मिठाई, फल भी रखें।

- इसके बाद माता लक्ष्मी के आठ रूपों की इन मंत्रों के साथ कुंकुम, अक्षत और फूल चढ़ाते हुए पूजा करें-

- ॐ आद्यलक्ष्म्यै नम:।

- ॐ विद्यालक्ष्म्यै नम:।

- ॐ सौभाग्यलक्ष्म्यै नम:।

- ॐ अमृतलक्ष्म्यै नम:।

- ॐ कामलक्ष्म्यै नम:।

- ॐ सत्यलक्ष्म्यै नम:।

- ॐ भोगलक्ष्म्यै नम:।

- ॐ योगलक्ष्म्यै नम:।

- इसके बाद धूप और घी के दीप से पूजा कर नैवेद्य या भोग लगाएं।

- श्रद्धा भक्ति के साथ माता लक्ष्मी की आरती करें।

- आरती के बाद जानकारी होने पर श्रीसूक्त का पाठ भी करें।

- अंत में उपासना में हुई त्रुटि के लिए क्षमा मांग तन, मन और धन की परेशानियों को दूर करने की कामना करें।


http://religion.bhaskar.com/article/ups-if-want-more-income-and-savings-than-chant-this-8-easy-laxmi-mantra-2763319.html?LHS-

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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शास्त्रों के मुताबिक ईश्वर का ज्ञान स्वरूप व शक्ति गुरु के रूप पूजनीय है। क्योंकि गुरु से मिला ज्ञान, शिक्षा, सत्य, प्रेरणा व शक्ति ही पूर्ण व कुशल बनाती है। इसलिए गुरु सेवा, भक्ति या स्मरण मात्र से जागा बुद्धि और विवेक जीवन की तमाम परेशानियों से उबारने वाला माना गया है।

धर्म परंपराओं में त्याग, तप, ज्ञान व प्रेम की साक्षात् मूर्ति साईं बाबा भी ऐसे ही जगतगुरु के रूप में पूजनीय है, जिनका ध्यान व दर्शन मात्र भी सारे दु:ख, संकट, परेशानियों व बाधाओं को टालने व खत्म करने वाला माना गया है।

साईं बाबा व उनके उपदेशों का स्मरण ईर्ष्या, द्वेष, स्वार्थ, कलह जैसे सारे बुरे भावों को दूर कर हर काम व कामना को पूरा करना आसान बना देता है। इसी कड़ी में हिन्दू मान्यताओं में गुरु उपासना के विशेष दिन साईं बाबा के सामने शास्त्रों में बताया एक विशेष गुरु मंत्र का ध्यान मनचाहे कामों में आ रही बाधा को दूर करने वाला माना गया है। जानिए यह विशेष मंत्र -

- गुरुवार को साईं बाबा की प्रतिमा या तस्वीर को चंदन, अक्षत, फूल, प्रसाद अर्पित कर धूप व दीप जलाकर नीचे लिखा गुरु मंत्र बोलें और सुख-सफलता की मुरादें मांग आरती करें-

नमो गुरुभ्यो गुरुपादुकाभ्यो नमः परेभ्यः परपादुकाभ्यः।

आचार्यसिद्धेश्वरपादुकाभ्यो  नमोऽस्तु लक्ष्मीपतिपादुकाभ्यः।।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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काम हो या कोई इम्तिहान, यह गणेश मंत्र बोल पाएं सफलता

बुद्धि और विवेक का तालमेल न केवल लक्ष्य तक पहुंचना आसान बनाकर सुख की हर चाहत को पूरी करता है। किंतु मकसद को पूरी करने के लिए अहम है कि उससे जुड़ी संभावित बाधाओं को ध्यान रख पहले से ही तैयारी की जाए। इनके  बावजूद भी अनेक  अवसरों पर अनजानी-अनचाही मुसीबतों से दो-चार होना पड़ता है।

हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश ऐसे ही देवता के रूप में पूजनीय है, जिनका नाम जप ही कार्य में आने वाली जानी-अनजानी विघ्र, बाधाओं का नाश कर देता है।

शास्त्रों में गृहस्थी हो या व्यापार या फिर किसी परीक्षा और प्रतियोगिता में सफलता की चाह रखने वालों के  लिए श्री गणेश के  इस मंत्र जप का महत्व बताया गया है। जिसमें भगवान श्री गणेश के 12 नामों की स्तुति है। जानते हैं यह श्री गणेश मंत्र -

- बुधवार या हर रोज इस मंत्र का सुबह श्री गणेश की सामान्य पूजा के साथ जप बेहतर नतीजे देता है। पूजा में दूर्वा चढ़ाना और मोदक  का यथाशक्ति भोग लगाना न भूलें।

गणपर्तिविघ्रराजो लम्बतुण्डो गजानन:।

द्वेमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिप:।

विनायकश्चायकर्ण: पशुपालो भावात्मज:।

द्वाद्वशैतानि नामानि प्रातरूत्थाय य: पठेत्।

विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्रं भवते् कश्चित।

http://religion.bhaskar.com/article/ups-get-success-in-work-or-exam-by-chant-this-ganesh-mantra-2759193.html?LHS-

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यह हनुमान मंत्र मिटाए बुरी नजर या दोष का भय-संशय


आज के जमाने की दौड़ती-भागती जिंदगी में आगे निकलने की चाह में हो रही प्रतियोगिता और परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारियों के चलते इंसान न चाहकर भी जाने-अनजाने में ईर्ष्या या द्वेष के कारण अपने बोल या व्यवहार से दूसरों को पीड़ा और नुकसान पहुंचाता है। व्यावहारिक जीवन में यह बातें कहीं न कहीं हमारे लिए भी कष्टों का कारण बनती है, वहीं धार्मिक दृष्टि से भी हम अदृश्य दोष के भागी बनते हैं।

ऐसे ही अदृष्य दोषों में नजर लगना, बददुआएं भी मानी जाती हैं, जिनसे मानवीय मन में भय-संशय घर कर जाती हैं। जीवन में बाधा बनने वाली ऐसी से रक्षा करने के लिए बल, बुद्धि और विद्या के दाता संकटमोचक हनुमान की उपासना का महत्व बताया गया है। जिसके लिए हनुमान गायत्री मंत्र बहुत ही अचूक माना गया है -

ॐ अंजनीसुताय विद्महे,

वायुपुत्राय धीमहि,

तन्नो मारुति: प्रयोचदयात्।।

मंगलवार या हर रोज श्री हनुमान का लाल आसन पर बैठ लाल पूजा सामग्रियों लाल चंदन, अक्षत, फूल अर्पित कर धूप व दीप लगाकर इस मंत्र से यथासंभव एक माला यानी 108 बार उच्चारण आपको अनचाहे संकट, विपत्ति, आपदाओं से बचाता ही है, साथ ही शत्रु बाधा, भय और रोग से भी बचाव करता है।

 

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