Author Topic: Kabootri Devi: First Woman Folk Singer Of Uttarakhand - कबूतरी देवी  (Read 25797 times)

पंकज सिंह महर

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कबूतरी देवी जी के बारे में संक्षिप्त जानकारी मुझे उपलब्ध हुई है, जो आपके समक्ष प्रस्तुत है। हम कोशिशि करेंगे कि कबूतरी देवी जी के बारे में विस्तृत जानकारी आप लोगों तक पहुंचा पायें।

[/color]आकाशवाणी लखनऊ और नजीबाबाद से प्रसारित होने वाले कार्यक्रम "उत्तरायणी" से कई उत्तराखण्डी लोकगीत लोगों ने सुने, उत्तराखण्ड की पहली लोक गायिका श्रीमती कबूतरी देवी जी का एक गीत "आज पाणी झौं-झौं, भोल पाणी झौं-झौं, पोरखी त नै जूंला" आज भी कानों में गूंजता है। कबूतरी देवी जी ने बचपन में लोकगीत श्री देवराम और देवकी देवी जी से सीखे थे और गाने की प्रेरणा दी उनके पति स्व० श्री दीवानी राम जी ने। कबूतरी देवी जी सीमान्त जिले पिथौरागढ़ के नेपाल की सीमा से लगे मूनाकोट ब्लाक के गांव क्वीतड़ की रहने वाली हैं। उन्होंने आकाशवाणी के लिये १०० से अधिक गीत गाये, लेकिन पति की मौत के बाद उनका गायन थम गया।        २० साल अभावों में गुजारने के बाद २००२ में नवोदय पर्वतीय कला केन्द्र, पिथौरागढ़ ने उन्हें छोलिया महोत्सव तथा मोहन[/font] [/font]उप्रेती[/font] [/font]लोक[/font] [/font]संस्कृति[/font] [/font]कला[/font] [/font]एवं[/font] [/font]विज्ञान शोध समिति[/font][/font] ने अल्मोड़ा में सम्मानित किया। शायद अब संस्कृति विभाग भी उन्हें पेंशन दे रही है।       कबूतरी देवी जी ने जो भी गीत गाये वे दादी-नानी से विरासत में मिले प्रकृति से संबंधित लोकगीत थे। मेरा पहाड़ परिवार उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता है और आशा करता है कि उत्तराखण्ड की इस स्वर कोकिला के गीत हमें भविष्य में अवश्य सुनने को मिलेंगे।

पंकज सिंह महर

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Re: FIRST WOMEN FOLK SINGER OF UTTARAKHAND - KABOOTRI DEVI
« Reply #21 on: April 28, 2009, 01:34:23 PM »
A news on Kabutari devi

Kabutari’s sad chant
BD Kashniyal




She is known as the Teejan Bai of Uttarakhand hills for her folk singing but has been living a life of penury. It is difficult to reach Kawetar village after having an uphill trek of six km near the small town of Adkani in Pithoragarh district where the legendary folk singer Kabutari Devi lives.

After spending more than 20 years in oblivion, Kabutari was spotted by some mediapersons recently and made known to the folk lovers of Uttarakhand. She was felicitated recently by the “Pahar”, an organisation in Kumaon. She will be awarded the‘Keshav Anuragi’ award for her contribution to folk singing.

“I was born to a ‘mirasi’ (folk singers) family of Kali Kumaon in Champawat district. I inherited music as my parents were also folk singers, ” said Kabutari.

She was married to Diwani Ram of Kweatar village of Pitthoragarh district some 50 years ago. He introduced her to various stations of the All-India Radio after he recognised her talent.

She sang for AIR Rampur, AIR Lucknow, AIR Naziabad and AIR Churchgate Mumbai. “I was paid Rs 25 to Rs 50 for a song. After my husband died 25 years ago, being alone and without a guide, I had to stay put at my village,” said Kabutari.

She stays with her married daughter and son-in-law who are manual labourers. She has no land and gets a pension of Rs 1,000 given by the Uttarakhand Culture Department.

She is forced to sing at wedding ceremonies and religious occasions in nearby villages in exchange for food and other basic needs.

“After Netaji (she called her husband Netaji) died, I did not come out of my house. It was my husband who took me everywhere including AIR stations and local fairs,” she said.

“Being illiterate, wherever I was asked to define folk music, I did so by playing the harmonium and tabla,” she simply said.

Before singing for AIR, Kabutari Devi used to sing in fairs and was a rage in Kumaon region where people used to throng from far and near to listen to her serene music.

“I performed at the fairs at Dwarahat, Bageswar, Thal, Juljivi, Devidhura, and Gangolihat around the year to earn as singing was only means of livelihood for me and my family in those days,” she recalled.

The pension provided by the state is not sufficient to sustain her and her family members. “I am dependent on my daughter who herself is a labourer,” she lamented.

“When mere survival is not possible, how one can retain the art one possesses?” Kabutari commented with same volume of pain that is reflected in her songs.


साभार-http://www.tribuneindia.com/
Sunday, February 8, 2009, Chandigarh, India


jagmohan singh jayara

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Re: FIRST WOMEN FOLK SINGER OF UTTARAKHAND - KABOOTRI DEVI
« Reply #22 on: April 28, 2009, 01:43:15 PM »
आनन्द की अनुभूति हुई मन को
"पहाड़ो को ठण्डो पाणी, कि भली मीठी बाणी"
कबूतरी देवी जी के कंठ से सुनकर,
हमारे उत्तराखंड की शान,
कैसे करुँ बखान,
उम्र उनकी लम्बी हो,
क्योंकि, कितनी हैं महान.

जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिग्यांसु"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: FIRST WOMEN FOLK SINGER OF UTTARAKHAND - KABOOTRI DEVI
« Reply #23 on: April 28, 2009, 02:18:46 PM »

कुछ समय पहले इ टीवी पर कबूतरी देवी पर एक कवरेज देखा था !  कबूतरी देवी बहुत ही दयनीय जिन्दगी ब्यतीत कर रही है ! वह अभी अपने बेटी के साथ पिथोरागढ़ में रहती है और उसकी आर्थिक सिथित अच्छी नहीं है !


Rajen

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Re: FIRST WOMEN FOLK SINGER OF UTTARAKHAND - KABOOTRI DEVI
« Reply #24 on: April 28, 2009, 03:14:50 PM »
Pankaj ji, कबूतरी देवी जी और क्वींतड़ जागर की exclusive वीडियो पोस्ट करने हेतु धन्यवाद.

पंकज सिंह महर

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Re: FIRST WOMEN FOLK SINGER OF UTTARAKHAND - KABOOTRI DEVI
« Reply #25 on: June 04, 2009, 02:57:10 PM »
कबूतरी देवी जी, ग्राम- क्वीतड़, विकास खण्ड- मूनाकोट, जनपद पिथौरागढ़ की रहने वाली हैं। ये कुमाऊंनी ऋतु गायन शैली की गायिका हैं, इन्होंने देश के विबिन्न रेडियो चैनलों से ७०-८० के दशक में कर्णप्रिय ऋतु गीत गाकर धूम मचा दी थी। इनके पिता श्री रामकाली जी भी लोक गायक रहे, लोक गायन की प्रारम्भिक शिक्षा इन्होंने अपने पिता से ही ली। पहाड़ी गीतों में प्रयुक्त होने वाले रागों का निरन्तर अभ्यास करने के कारन इनकी शैली अन्य गायिकाओं से अलग है।
      वर्तमान में यह लोक गायिका अपनी पुत्री के साथ पिथौरागढ में निवास कर रही हैं।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: FIRST WOMEN FOLK SINGER OF UTTARAKHAND - KABOOTRI DEVI
« Reply #26 on: June 04, 2009, 03:53:29 PM »

One of the Hit Bhajans of Kabootri Devi Ji,


 "Durga Bhawani, Sher Ki Shawari Kari
   Durga Bhawani,........."

Innumerable numbers of Bhajan, Songs etc. A few months, I saw a TV converge on her personal life. She is leading a very deplorable life. Though, Govt of Uttarakhand has awarded her but her financial condition is very bad. 

push_singh007

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Re: FIRST WOMEN FOLK SINGER OF UTTARAKHAND - KABOOTRI DEVI
« Reply #27 on: August 06, 2009, 06:00:14 PM »
Pankaj ji hum aapke aabhari hain jo aapne kabootri devi ji ke baare mein itni vistrit jaankaari hume pradaan ki.
Jaisa ki ab hum sab ko yeh vidit ho gaya hai ki Kabootri ji ki aarthik sthiti thik nai hai mera ye anurodh hai forum ke member se ki hum sabhi ko milkar is disha mein kuch karna chaheeye.

Lalit mohan ojha......pithoragarh

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Re: FIRST WOMEN FOLK SINGER OF UTTARAKHAND - KABOOTRI DEVI
« Reply #28 on: August 06, 2009, 06:18:01 PM »
wow.............sir g gra8...i never expect that such type of topics can also be covered in this forum.....

maine bhi bachpan main pithoragarh ki ramleela main kabootri devi g ko gaate suna tha...but us time jante hi ho kaun itna dyaan de pata hai gane wane main but...now i realize that how gr8 singer she is....

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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  उत्तराखंड की प्रथम लोक गायिका कबूतरी देवी द्वारा गाया गया यह प्रसिद्ध   गाना!.. शायद मैंने इससे मधुर गाना कभी सुना होगा! कबूतरी देवी ने इस गाने   में पहाड़ की सुंदर को बया करने कोशिश की है! जो अतुल्य है!
 
  पहाडो को ठंडो  वाणी
  -----------------------
 
  पहाड़ो में हिमालय
  वा देवता रूनी...
  देवी देव  वास करनी देव भूमि  रूनी ..
  देव भूमि छोड़ी भेर.. जाणि नि लगानी
  छोड़ी नि नि लगानी
  --------..
 
  पहाड़ो  ठंडो पानी, सुन जस मीठी वाणी
  छोड़ी नि नि लगानी
  हो हो. छोड़ी नि नि लगानी
  पहाड़ो  ठंडो पानी, सुन जस मीठी  वाणी
    छोड़ी नि नि लगानी
    हो हो. छोड़ी नि नि लगानी............
 
  पहाड़ में हिमालय वाह देवता रूनी
  पहाड़ में हिमालय वाह देवता रूनी
    देवी देव वास करनी. देव भूमि रूनी.
  देव भूमि छोड़ भेर जाणि
 
  पहाड़ो  ठंडो पानी, सुन जस मीठी वाणी
    छोड़ी नि नि लगानी
    हो हो. छोड़ी नि नि लगानी
    पहाड़ो  ठंडो पानी, सुन जस मीठी  वाणी
      छोड़ी नि नि लगानी
      हो हो. छोड़ी नि लगानी.....
 
  कथि वसी शम्भू नाथ... कथि नंदा माई
  कथि वसी शम्भू नाथ... कथि नंदा माई
  कथि दुर्गा मैया, कथि महा काली
  देव भूमि छोड़ भेर जाणि.... नि लगानी.....
 
  पहाड़ो में हिमालय
    वा देवता रूनी...
    देवी देव  वास करनी देव भूमि  रूनी ..
    देव भूमि छोड़ी भेर.. जाणि नि लगानी
    छोड़ी नि नि लगानी
 
  चौमास  को हरियो परियो.. पानी की बौछार ..
  ...
  जनम भूमि छोड़ी भे.. णि नि लगानी
      छोड़ी नि नि लगानी
 
  पहाड़ो में हिमालय
    वा देवता रूनी...
    देवी देव  वास करनी देव भूमि  रूनी ..
    देव भूमि छोड़ी भेर.. जाणि नि लगानी
    छोड़ी नि नि लगानी
 
Quitter Jagar 2008, Kabootari Devi
 

 

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