Author Topic: Pandav Nritya: Mythological Dance - पांडव नृत्य उत्तराखंड का पौराणिक नृत्य  (Read 21735 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Heyyyy prakat hwe jana
Prakat hwe jana
Prakat hwe jana
Kunti mata, prakat hwe jana
Kunti mata hweli darmyali mata,
Bhookhon dekhi ann ni khanda,
Naango dekhi wastr ni landa.

Hey prakat hwe jana, panch bhai pandav,
Ransoor, ranveer
Prakat hwe jana, dharmraj Judhisthir
Dharm ka autari, nyay ka pujari, prakat hwe jana
Prakat hwe jana dhanurdhari Arjun,
Arjun ko gandeev, prakat hwe jana
Hey, prakat hwe jana mahabali Bhimsen,
Bhimsen ko bal, prakat hwe jana
Prakat hwe jana, Nakul Sahdev
Nakul ko bhala, Sahdev ki pati, prakat hwe janaaaaaaaaaaaaaaaa

Daubhayyyy Hastinapur ma bal Kauron ki chaupad bichayin cha,
Bada bada jodha maharathi mastak nawai ki baithya chan,
Kauron ki lalkarna suni Pando dharm sankat ma pudya chan,
Hey prabho hey parmeswara
Dyut krida ko yo kano dharm yudh cha,
Kano dharm sankat chaaaaaaaaaa…..

Khela panso, khela panso
Khela panso, khela panso
Bha re, khela panso, khela panso
Pandon, khela panso, khela panso
Hastinapur maja, khela panso
Lage naurata chaupada, khela panso
Hweli chandi ki chaupada, khela panso , khela panso
Be chana sobana ki goti, khela panso, khela panso
Chana sobana ki goti, khela panso, khela panso
Bha re, khela panso, khela panso
Pandon, khela panso, khela panso

Bha re ton paapi Kaurun na, khela panso
Dhairya adhara mi pansa, khela panso
Chalya anyau ki chala, khela panso
Chhal kapat ka daun, khela panso, khela panso,
Chhal kapat ka doun, khela panso, khela panso
Bha re, khela panso, khela panso
Pandon, khela panso, khela panso

Kano prapancha rachyu cha, khela panso
Paapi hey mama Sakuni, khela panso
Hwelyo jalyunma ko jaali, khela panso
Kapatyun ma ko kapati, khela panso, khela panso
Re kapatyun ma ko kapati, khela panso, khela panso
Bha re, khela panso, khela panso
Pandon, khela panso, khela panso

Aige Durjodhan raja, khela panso
Kaiki adayin ni landa, khela panso
Baithi gaeni Judhishthira, khela panso, khela panso
Dharm ka autari, khela panso, khela panso
Dharm ka autari khela panso, khela panso
Bha re, khela panso, khela panso
Be Pandon, khela panso, khela panso

Kauron ki tain chaupad chal ma
Pandav sakal rajpaath haar gaeni
Haar geni dhan ka darav
Haar geni Bhim, Arjun
Haar geni Nakul, Sahdev
Dharmraaj Judhisthiran aph tai bhi daun ma haareli
Ton ka daun ni purenieeeeeeeeee haaaaaaaaaaaan

Khela panso khela panso, khela panso, khela panso
Bha re, khela panso, khela panso
Pandon, khela panso, khela panso

Pailo pailu daun hari, khela panso
Pandon n dhan ki darav, khela panso
Dujo teejo daoun haare, khela panso
Sakala raaj path, khela panso, khela panso
Bai sakal raaj path, khela panso, khela panso
Bha re, khela panso, khela panso
Pandon, khela panso, khela panso

Lagya daun ma ka daun, khela panso
Chalya paso ma ka pasa, khela panso
Dhairyali ton pandon na, khela panso
Rani Dropada daun ma, khela panso , khela panso
Be Rani Dropada daun ma, khela panso , khela panso
Bha re, khela panso, khela panso
Be Pandon, khela panso, khela panso

Kan dann mann runda, khela panso
Daun hari wa Drupada, khela panso
Hey Dwarika nandana, khela panso, khela panso
Kani dhawadi lagonda, khela panso, khela panso
Be kani dhawadi lagonda, khela panso, khela panso
Bha re, khela panso, khela panso
Be Pandon, khela panso, khela panso

Wi daini dwarika ma, khela panso
Hola dwarika nandana, khela panso
Teri paiyedyun paraaj, khela panso
Tera gala ma baduli, khela panso , khela panso
Be tera gala ma baduli, khela panso khela panso
Bha re, khela panso, khela panso
Pandon, khela panso, khela panso

Sune Draupadai karuna, khela panso
Aige raududo dhaududo, khela panso
Hey Krishna bhagibana, khela panso
Raakhi drupada ki laaja, khela panso, khela panso
Be raakhi Drupada ki laaja, khela panso, khela panso
Bha re, khela panso, khela panso
Pandon, khela panso, khela panso
Bha re, khela panso, khela panso
Pandon, khela panso, khela panso
Bha re, khela panso, khela panso
Pandon, khela panso, khela panso
Bha re, khela panso, khela panso
Pandon, khela panso, khela panso
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[/size][size=85%]NOTE: Original lyrics contributed by Mr Yogesh Manjkhola on Orkut Community.[/size]

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[/size][size=85%](source http://uttarakhandsongs.blogspot.com)
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Devbhoomi,Uttarakhand

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देव निशाणों के स्नान से शुरू हुआ पांडव नृत्य





  रुद्रप्रयाग,  जिला मुख्यालय सटी दरमोला गांव में एकादशी पर्व के अवसर पर देव निशाणों के गंगा स्नान के साथ ही पांडव नृत्य का शुभारंभ हो गया है। रविवार को अलकनंदा-मंदाकिनी नदी के संगम स्थल पर दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष एकादशी पर्व की पूर्व संध्या पर गांव के ग्रामीण ढोल-दमाऊ के साथ देव निशाणों को गंगा स्नान के लिए अलकनंदा-मंदाकिनी के संगम पर लाए।

 पूरी रात ग्रामीण देव निशाणाों के साथ संगम स्थल पर जागरण करते हैं। इन दौरान देवताओं के पश्वों की चार पहर की पूजा-अर्चना की गई। रविवार सुबह देव निशाणों का संगम के पावन तट पर गंगा स्नान करने के बाद उन्हें सजाया गया। इसके बाद विभिन्न देवताओं के पश्वों द्वारा नृत्य कर वहां उपस्थित श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया गया। यह परम्परा सदियों से चली आ रही है।


 संगम स्थल पर पुजारी द्वारा देव निशाणों की पूजा-अर्चना के साथ ही हवन किया जाता है। इसके बाद ही देव निशाण अपने गंतव्य की ओर चल पड़े। इन निशाणों को गंतव्य पर पहुंचने के साथ ही दरमोला में पांडव नृत्य शुरू हो गया है। नृत्य लगभग एक माह चलेगा।


मान्यता है कि एकादशी पर्व पर देव निशाणों को इसलिए बहार लाते है कि इस दिन भगवान विष्णु एवं तुलसी का विवाह सम्पन्न हुआ था, जो शुभ माना जाता है और ग्रामीणों द्वारा देवताओं को स्नान के लिए यह निश्चित किया गया।


Source dainik jagran

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झांकी और पांडव नृत्य रहा आकर्षण का केंद्र



 शनिवार को खेल स्पर्धाओं में वॉलीबाल में विजेता तोपाल बद्रर्श कर्णप्रयाग व उपविजेता देवलकोट की टीम रही, जबकि लोकनृत्य सीनियर में राइंका नैणी प्रथम, नंदासैंण द्वितीय व चौरासैंण तृतीय रहा। मांगलिक गीत महिला मंगल दल ऐरोली प्रथम, बेनौली द्वितीय व कल्याणी तृतीय रहे। लोकनृत्य जूनियर कन्या हाईस्कूल नौटी प्रथम, राइंका नैणी द्वितीय व देवलकोट एसजीआरआर तृतीय रहा।

 100 मी. सीनियर बालक वर्ग में संजय सती प्रथम, उत्तम सिंह द्वितीय व सुनील तृतीय रहा, जबकि बालिका वर्ग में अनीता प्रथम, आशा द्वितीय व चंद्रकला तृतीय रही। 100 मी. ग्रामीण दौड़ में अनुज कुमार प्रथम, संजय सती द्वितीय व सुनील तृतीय रहे। मेला कमेटी अध्यक्ष भुवन नौटियाल ने सभी आंगतुकों का आभार प्रकट किया।


sabhar Dainik jagran

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पांडव नृत्य देखने उमड़ रहे सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु

 



 जिला मुख्यालय से सटी ग्राम पंचायत दरमोला में पांडव नृत्य का आगाज चरम सीमा पर चल रहा है। इस नृत्य को देखने एवं देव निशाणों से आशीर्वाद लेने के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इस अवसर पर पांडव नृत्य समिति की नई कार्यकारिणी का गठन करते हुए अध्यक्ष जसपाल सिंह पंवार एवं सचिव बलवीर कप्रवान को मनोनीत किया गया।



प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी दरमोला गावं के ग्रामीणों की ओर से एकादशी के पर्व पर देव निशाणों को गंगा स्नान के लिए लाया गया, जिसके पश्चात पांडव नृत्य शुरू कर दिया गया। अस्त्र-शस्त्र, देव निशाणों के साथ ही खली (नृत्य का स्थान) की पूजा-अर्चना की गई। उसके बाद पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्रों के साथ सजीव रुप में नृत्य शुरू किया। इस नृत्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भगवान बदरीविशाल, शंकरनाथ के निशाणों व पांडवों से अपने परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद लिया।



इस अवसर पर ग्रामीणों ने ग्राम सभा अध्यक्ष विक्रम सिंह पंवार की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित कर पांडव नृत्य समिति की नई कार्यकारिणी का गठन किया, जिसमें अध्यक्ष व सचिव के अलावा उपाध्यक्ष गजपाल सिंह पंवार, कोषाध्यक्ष पूर्व क्षेपंस राजेन्द्र सिंह कप्रवाण, संरक्षक जीत सिंह पंवार को सर्वसम्मति से मनोनीत किया गया। इसके साथ ही सदस्यों में रचपाल सिंह, गोविन्द सिंह, धूम सिंह, बालम सिंह को शामिल किया गया है।

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पांडव नृत्य में झूमे श्रद्धालु

   



गढ़वाल क्षेत्र में सदियों से चली आ रही पांडव लीला के आयोजन की प्रथा को ग्रामीण अनन्य धार्मिक अनुष्ठान के रूप में आयोजित करते हैं। प्रत्येक परिवार इसमें भागीदारी को अपना सौभाग्य मानता है।

खुरड में भी इस आयोजन की यही भावना परिलक्षित हो रही है जिसमें गांव के पुरुष, महिलाएं, वृद्ध एवं बच्चे पूरे उत्साह के साथ  पूर्ण भागीदारी निभा रहे हैं। क्षेत्र में चल रहे पांडव नृत्य में श्रद्धालु अपने परिवार की खुशहाली एवं सुख-शांति का आशीर्वाद ले रहे हैं।


कोटेश्वर के महंत शिवानंद गिरी महाराज ने बताया कि 15 नवम्बर को पांडव अपनी परम्परागत पोशाकों एवं गाजे-बाजे के साथ गंगा स्नान के लिए प्रसिद्ध तीर्थ कोटेश्वर जायेंगे। 20 नवम्बर को चक्रव्यूह का मंचन आकर्षण का केन्द्र रहेगा। तथा 22 नवम्बर को पांडव नृत्य का समापन किया जाएगा।

इस अवसर पर वयोवृद्ध इन्द्र सिंह बुटोला, दर्शन सिंह, भरत सिंह, गुलाब सिंह, नारायण सिंह, बृजमोहन सिंह, वीरेन्द्र सिंह, जगमोहन सिंह समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।


    Source Dainik Jagran

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 देवी देवताओं के नृत्यों व खला मेलों की धूम है इस माह उत्तराखण्ड में
 रुद्रप्रयाग,(प्याउ)। इन पूरे उत्तराखण्ड में कहीं माॅं भगवती की अठवाड़ रूपि नृत्य तो कहीं कोई ग्वेल, भैरव व नरसिंह आदि देवी देवताओं की नृत्य व पूजन भी इसी महिने किया जाता हे। एक प्रकार से यह महिना पूरे उत्तराखण्ड में देवी देवता पूजन व खला मैलों का महिना यानी उत्सव का महिना ही माना जाता है। यहां हर जनपद में किसी न किसी प्रकार का मेला का आयोजन होता हैं। हर क्षेत्र में देवी देवताओं व स्थानीय मेलो का आयोजन किया जाता है। टिहरी में सेम मुखेम हो या पौडी में बूंखाल की कालिंका, चम्पावत हो या सुदूर पिथोरागढ़, अल्मोड़ा हो या पौड़ी सभी जगह मेलों व देवी देवताओं के नृत्यों का आयोजन इसी नवम्बर माह में बड़ी धूम धाम से किया जाता हे। जौल जीवी का मेला हो या पूर्णागिरी का मेला चारों तरफ मेलों का आयोजन।
  इन दिनों जनपद रूद्रप्रयाग व चमोली में पांडव नृत्यों की धूम मची हुई है। सदियो ंसे उत्तराखण्ड के इन अंचलों में पांडव लीला के आयोजन अनन्य धार्मिक अनुष्ठान के रूप में आयोजित किया जाता है। पांडव नृत्यों का उत्सव मनाने वाले गांवों में पूरा गांव सामुहिक रूप से इसमें पूरी श्रद्वा से भाग लेता है।  कई जगह चक्रव्यूह का आयोजन व कई जगह बिना चक्रव्यूह के यह आयोजन किया जाता रहा है। परन्तु भले ही देश के इतिहास में पांडवों को राजपरिवार के रूप में माना जाता रहा हो पर उत्तराखण्ड के इन भू भाग में पांडव देवता के रूप में सदियों से पूजे जाते है।



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Dev Singh Rawat

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पांडव नृत्य में स्वांग जोड़ी रही आकर्षण का केंद्र



    ग्राम खासकोटी में पांच दिवसीय पांडव नृत्य का समापन हो गया है। मेले में स्वांग जोड़ी आकर्षण का केंद्र रहा।
प्रखंड जौनपुर के ग्राम पंचायत बमणगांव के तहत ग्राम खासकोटी में पांच दिवसीय पूजा-अर्चना व पांडव नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें गांव व दूर क्षेत्रों से दर्जनों देवताओं के अवतारी दिन रात मंडाण में नृत्य करते रहे।


 इस दौरान ग्रामीणों व पाडवों की टोली ने नदी में स्नान भी किया। बाद में पूजा-अर्चना कर पाडवों ने गांव की सुख, शांति के लिए प्रार्थना की। मंडाण में देर दराज क्षेत्र सहित आस-पास गांव के दर्जनों देवताओं के अवतारी नाच पडे़।


  इस अवसर पर  कुशला नंद, महिमा नंद, गुलाब सिंह, सुमन लाल, मगन लाल, सोवत सिंह राणा, रामभरोसा, रणवीर सिंह, आंनद सिंह, गोपाल सिंह, जबर सिंह, सूरत सिंह रावत, महिपाल सिंह, भरत सिंह आदि भारी संख्या में उपस्थित थे।
   

Source Dainik jagran

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लौटी देवभूमि की रौनक
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 उत्तरकाशी,   बाड़ाहाट में चमाला की चौंरी में पैंतीस साल बाद पांडव (पस्वा) अवतारियों पर अवतरित हुए। पांडव नृत्य में देवभूमि की रौनक लौट आई।

बीते सोमवार सांय को पांडवों के अवतारियों ने अस्त्र शस्त्रों की पूजा की। मंगलवार को पांडव पश्वा ने मणिकर्णिका घाट पर भागीरथी नदी पर विधि विधान के साथ स्नान कर पूजा अर्चना की।

इसके बाद पांडव के पस्वा (अवतारी) ने छाड़ी गाकर अपने माता पिता का आह्वान किया। इस मौके पर पांडवों के पस्वा (अवतारी) ने कंडार देवता की भोग मूर्ति का देवदार का तिलक दूध गंगाजल से स्नान कर डोली को तैयार किया।


कंडार देवता की अनुमति से विश्वनाथ चौक पर पांडवों ने ढोल की थाप पर नृत्य किया। इस मौके पर पांडव नृत्य आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील असवाल, सुरेंद्र पुरी, मंगल सिंह चौहान, बुद्धि सिंह पंवार, महेंद्र पाल सिंह सजवाण, सत्य नारायण पुरी, गणेश गिरी, लाखी राम नौटियाल समेत अन्य मौजूद थे।

विधायक ने दिए पच्चीस हजार

उत्तरकाशी: गंगोत्री विधायक गोपाल सिंह रावत ने पांडव नृत्य समिति के बेहतर आयोजन के लिए पच्चीस हजार रूपए धनराशि दी।  इस मौके पर विधायक ने लक्षेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में बने सामूहिक महिला मिलन केंद्र का उद्घाटन किया। इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौहान समेत अन्य मौजूद थे।



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पांडवों ने किया अस्त्र-शस्त्रों के साथ नृत्य





   जिला मुख्यालय के पुनाड़ में आयोजित पांडव नृत्य में सोमवार को पांडवों के अस्त्र-शस्त्रों को बाहर निकाल कर विधि-विधान के साथ उनकी पूजा अर्चना की गई। इसके बाद पांडव के पश्वों ने नृत्य शुरू किया जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे।



नगर क्षेत्रान्तर्गत पांडव खली में विगत आठ दिसंबर से चल रहे पांडव नृत्य के आयोजन के दौरान सोमवार को सर्वप्रथम यहां स्थित शिवालय में भगवान शिव की पूजा अर्चना की गई।

 पुनाड़ क्षेत्र की भूमि को शिव की भूमि माना जाता है, इसलिए सर्वप्रथम यहां भगवान शिव की पूजा की जाती है। इसके बाद पांडवों के अस्त्र-शस्त्रों की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर बाहर निकाल कर नृत्य शुरु किया गया।



Dainik Jagran

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