MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers

*
  • Home
  • Apna Uttarakhand
  • MeraPahad

Welcome, Guest. Please login or register.
Did you miss your activation email?

Login with username, password and session length

  • Home
  • Help
  • Search
  • Calendar
  • Login
  • Register

जानिये अनुसूया मंदिर चमोली के बारे में।            Debate-Should Gairsain Be Permanent Capital of Uttarakhand            How to use MeraPahad Forum            Listen Pahadi Songs Online           

  • MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers »
  • Uttarakhand »
  • Personalities of Uttarakhand - उत्तराखण्ड की महान/प्रसिद्ध विभूतियां (Moderators: Rajneesh, Charu Tiwari) »
  • Dr. Pitamber Dutt Barthwal-First D.Lit. In Hindi From India:डा० पीताम्बर बड़थ्वाल

!!

Registration

Please Register To View All Content (Photos, Videos, Audio Files)

collapse

Recent Topics

उत्तराखंड पर कविताये : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!! by एम.एस. मेहता /M S Mehta
[Today at 09:15:30 AM]


Poems Written by Shailendra Joshi- शैलेन्द्र जोशी की कविताये by एम.एस. मेहता /M S Mehta
[Yesterday at 09:37:47 PM]


Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख by bhishma kukreti
[Yesterday at 07:02:27 PM]


History of Uttarakhand, Kumaon & Garhwal-उत्तराखंड का इतिहास (कुमाऊ & गढ़वाल) by bhishma kukreti
[Yesterday at 07:00:59 PM]


UKD: Regional Party - उत्तराखंड क्रांति दल: उत्तराखंड की क्षेत्रीय पार्टी by एम.एस. मेहता /M S Mehta
[Yesterday at 06:59:20 PM]


Poems by Rajendra Singh Kunwar-युवा कवि राजेन्द्र सिह कुवर 'फरियादी' की कविताएं by एम.एस. मेहता /M S Mehta
[Yesterday at 06:56:30 PM]


Hemkund Sahib - सिक्खों की आस्था का केन्द्र हेमकुण्ड साहिब by विनोद सिंह गढ़िया
[Yesterday at 01:00:37 PM]


Jagar: Calling Of God - जागर: देवताओं का पवित्र आह्वान by bhishma kukreti
[May 20, 2013, 08:09:41 PM]


REMARKABLE ACHIEVEMENTS BY UTTARAKHANDI - उत्तराखंड के लोगो की उपलब्धिया by एम.एस. मेहता /M S Mehta
[May 20, 2013, 12:23:27 PM]


Currupt System in Uttarakhand - ये कैसा भ्रष्टाचार है उत्तराखण्ड में? by krantiveer
[May 20, 2013, 11:48:45 AM]

Poll

  • क्या आप मानते हैं कि हमारे कुल देवी-देवता हमारे दुःख-दर्द में सहायक हैं ?
  • Dot मैं इस बात में विश्वास करता हूँ।
  • 26 (81%)
  • Dot मैं इस बात में बिलकुल भी विश्वास नहीं करता हूँ।
  • 2 (6%)
  • Dot कुछ हद तक मैं इस बात में विश्वास करता हूँ।
  • 4 (12%)
  • Total Members Voted: 32
  • View Topic

Hot Topics

  • topic Video Of Uttarakhand Songs - उत्तराखण्डी गीतों की वीडियो गैलरी
  • topic My Village Jarti, Distt Bageshwar Photo- मेरे गृह जिले बागेश्वर की फोटो 12
  • topic Uttarakhand News - उत्तराखंड समाचार
  • topic Har Ki Dun,Valley Of Gods,Uttarakhand-हर की दून उत्तराखंड
  • topic Bikhoti Mela Dwarahat,Uttarakhand- बिखोती मेला, द्वाराहाट उत्तराखंड
  • topic Identify Songs From Its Mid Lines - गाने की बीच की लाइन से गाने को पहचानो
  • topic Famous Temples Of Bhagwati Mata - उत्तराखंड मे देवी भगवती के प्रसिद्ध मन्दिर
  • topic Musical Instruments Of Uttarakhand - उत्तराखण्ड के लोक वाद्य यन्त्र
  • topic Famous Lakes Of Uttarakhand - उत्तराखंड के प्रसिद्ध ताल
  • topic Etymology Of Various Places - कैसे पड़ा उत्तराखंड के विभिन्न जगहों का नाम
  • topic Premier of Uttarakhandi Film Rajula-राजुला उत्तराखंडी फिल्म का प्रीमियर
  • topic REMARKABLE ACHIEVEMENTS BY UTTARAKHANDI - उत्तराखंड के लोगो की उपलब्धिया
  • topic लाखामंडल का चमत्कारी शिवलिंग, लाखामंडल उत्तराखंड -Lakhamandal Uttarakhand
  • topic Government Jobs In Uttarakhand - सरकारी नौकरी
  • topic Exclusive photos by Kiran Rawat- उत्तराखण्ड किरन रावत के कैमरे से
  • topic Collection of Uttarakhand Bhajans - उत्तराखंड के भजनों के संग्रह
  • topic Pahadi Dhol Damau (Pahadi Band)-पहाड़ी ढोल दमाऊ के वीडियो
  • topic Gandhi Of Uttarakhand : Indramani Badoni : इन्द्रमणि बड़ोनी जी
  • topic Kotdwar,Uttarakhand,कोटद्वार उत्तराखंड का ब्यापारिक केंद्र
  • topic Development Survey Of Uttarakhand - उत्तराखंड राज्य के विकास का सर्वेक्षण
  • topic Weekly Newspaper(Janm Bhumi Uttaranchal) - जन्म भूमि उत्तराचल साप्ताहिक अखबार
  • topic Sad Songs of Uttarakhandi Folk Music- दिल को छूने वाले उत्तराखंडी लोक गीत
  • topic Poet Gumani - लोककवि गुमानी : साहित्य का विलक्षण लेकिन गुमनाम व्यक्तित्व
  • topic उत्तराखंड पर कविताये : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!
  • topic Justice for Radha Rape Victim of Kaladungi Haldwani who was raped by a Doctor.
  • topic Photographs of My Village ( Kapkote ) Bageshwar
  • topic शेर दा अनपढ -उत्तराखंड के प्रसिद्ध कवि-SHER DA ANPAD-FAMOUS POET OF UTTARAKHAND
  • topic Information about Garhwali plays-विभिन्न गढ़वाली नाटको का विवरण
  • topic Milam Glacier, Munsiyari Uttarakhand-मिलम ग्लेशियर उत्तराखंड
  • topic Dwarahat-cultural and spiritual Place- सांस्कृतिक एवं पर्यटन नगरी द्वाराहाट
  • topic Upcoming Festivals - आने वाले स्थानीय त्यौहार
  • topic Exclusive Photos of Tehri Dam, Uttarakhand-टिहरी गढ़वाल और डाम की कुछ तस्वीरें
  • topic Custom of Sacrificing Animals,In Uttarakhand,(उत्तराखंड में पशुबलि की प्रथा)
  • topic Tribute To Uttarakhandi personalities : उत्तराखण्डी विभूतियों को नमन
  • topic Ain: Uttarakhand Riddle - आँण: उत्तराखंडी पहेली
  • topic Photo Gallery Of Uttarakhand - मेरा पहाड कैमरे की नज्ञर से
  • topic Photographs of Kapkote (Bageshwar) कपकोट क्षेत्र (बागेश्वर) की तस्वीरें
  • topic Unmukt Chand Crickter from Uttarakhand-उन्मुक्त चंद क्रिकेट खिलाड़ी उत्तराखंड से
  • topic Save Trees & Plant Trees Initiative by Merapahad-पेड़ बचाओ पेड लगाओ
  • topic Critical Review of Garhwali Satirical and Humrous Literature'- गढवाली हास्य व्यं
  • Send this topic
  • Print
Pages: [1] 2

Author Topic: Dr. Pitamber Dutt Barthwal-First D.Lit. In Hindi From India:डा० पीताम्बर बड़थ्वाल  (Read 6586 times)

0 Members and 1 Guest are viewing this topic.

Barthwal

  • सभी भै-बैणो ते म्यारु नमस्कार्!
  • Jr. Member
  • **
  • Posts: 54
  • Karma: 5
  • Gender: Male
  • अच्छू लगदू अपरु लुखो क दगड और उत्तराखंड का बारा मा जानकारी.
    • मेरा चिंतन
Dr. Pitamber Dutt Barthwal-First D.Lit. In Hindi From India:डा० पीताम्बर बड़थ्वाल
« on: September 30, 2009, 02:25:59 PM »

डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल ( १३ दिसंबर, १९०१-२४ जुलाई, १९४४) हिंदी में डी.लिट. की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले शोध विद्यार्थी

डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल का जन्म तथा मृ्त्यु दोनो ही पाली ग्राम( पौडी गढवाल),उत्तराखंड, भारत मे हुई. बाल्यकाल मे उन्होने "अंबर" नाम से कविताये लिखी. फिर कहानिया व संपादन ( हिल्मैन नामक अंग्रेजी पत्रिका) किया. डॉ० बड्थ्वाल ने हिन्दी में शोध की परंपरा और गंभीर अधय्यन को एक मजबूत आधार दिया. आचार्य रामचंद्र शुक्ल और बाबू श्यामसुंदर दास जी के विचारो को आगे बढाया और हिन्दी आलोचना को आधार दिया. वे उत्तराखंड की ही नही भारत की शान है जिन्हे देश विदेशो मे सम्मान मिला. उत्तराखंड के लोक -साहित्य(गढवाल) के प्रति भी उनका लगाव था.


डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल स्वन्त्रत भारत के प्रथम शोध छात्र है जिन्हे १९३३ के दीक्षांत समारोह में डी.लिट(हिन्दी) से नवाज़ा गया उनके शोध कार्य " हिन्दी काव्य मे निर्गुणवाद" ('द निर्गुण स्कूल आफ हिंदी पोयट्री' - अंग्रेजी शोध पर आधारित जो उन्होने श्री श्यामप्रसाद जी के निर्देशन में किया था) के लिये.


उनका आध्यातमिक रचनाओ की तरफ लगाव था जो उनके अध्यन व शोध कार्य मे झलकता है. उन्होंने संस्कृत, अवधी, ब्रजभाषा, अरबी एवं फारसी के शब्दो और बोली को भी अपने कार्य मे प्रयोग किया. उन्होने संत, सिद्घ, नाथ और भक्ति साहित्य की खोज और विश्लेषण में अपनी रुचि दिखाई और अपने गूढ विचारो के साथ इन पर प्रकाश डाला. भक्ति आन्दोलन (शुक्लजी की मान्यता ) को हिन्दू जाति की निराशा का परिणाम नहीं माना लेकिन उसे भक्ति धारा का विकास माना. उनके शोध और लेख उनके गम्भीर अध्ययन और उनकी दूर दृष्टि के भी परिचायक हैं. उन्होने कहा था "भाषा फलती फूलती तो है साहित्य में, अंकुरित होती है बोलचाल में, साधारण बोलचाल पर बोली मँज-सुधरकर साहित्यिक भाषा बन जाती है". वे दार्शनिक वयक्तित्व के धनी, शोधकर्ता,निबंधकार व समीक्षक थे. उनके निबंध/शोधकार्य को आज भी शोध विद्दार्थी प्रयोग करते है. उनके निबंध का मूल भाव उसकी भूमिका या शुरुआत में ही मिल जाता है.


निम्नलिखित कृ्तिया डॉ० बडथ्वाल की सोच, अध्यन व शोध को दर्शाती है.

· रामानन्द की हिन्दी रचनाये ( वारानसी, विक्रम समवत २०१२)

· डॉ० बडथ्वाल के श्रेष्ठ निबंध (स. श्री गोबिंद चातक)

· गोरखवाणी(कवि गोरखनाथ की रचनाओ का संकलन व सम्पादन)

· सूरदास जीवन सामग्री

· मकरंद (स. डा. भगीरथ मिश्र)

· 'किंग आर्थर एंड नाइट्स आव द राउड टेबल' का हिन्दी अनुवाद(बच्चो के लिये)

· 'कणेरीपाव'

· 'गंगाबाई'

· 'हिंदी साहित्य में उपासना का स्वरूप',

· 'कवि केशवदास'

· 'योग प्रवाह' (स. डा. सम्पूर्णानंद)


उनकी बहुत सी रचनाओ मे से कुछ एक पुस्तके "वर्डकेट लाईब्रेरी" के पास सुरक्षित है..हिन्दी साहित्य अकादमी अब भी उनकी पुस्तके प्रकाशित करती है. कबीर,रामानन्द और गोरखवाणी (गोरखबानी, सं. डॉ० पीतांबरदत्त बडथ्वाल, हिंदी साहित्य संमेलन, प्रयाग, द्वि० सं०) पर डॉ० बडथ्वाल ने बहुत कार्य किया और इसे बहुत से साहित्यकारो ने अपने लेखो में और शोध कार्यो में शामिल किया और उनके कहे को पैमाना माना. यह अवश्य ही चिंताजनक है कि सरकार और साहित्यकारो ने उनको वो स्थान नही दिया जिसके वे हकदार थे. प्रयाग विश्वविद्यालय के दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर डा॰ रानाडे भी कहा कि 'यह केवल हिंदी साहित्य की विवेचना के लिये ही नहीं अपितु रहस्यवाद की दार्शनिक व्याख्या के लिये भी एक महत्त्वपूर्ण देन है.


"नाथ सिद्वो की रचनाये " मे ह्ज़ारीप्रसाद द्विवेदी जी ने भूमिका मे लिखा है

" नाथ सिद्धों की हिन्दी रचनाओं का यह संग्रह कई हस्तलिखित प्रतियों से संकलित हुआ है. इसमें गोरखनाथ की रचनाएँ संकलित नहीं हुईं, क्योंकि स्वर्गीय डॉ० पीतांबर दत्त बड़थ्वाल ने गोरखनाथ की रचनाओं का संपादन पहले से ही कर दिया है और वे ‘गोरख बानी’ नाम से प्रकाशित भी हो चुकी हैं (हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग). बड़थ्वाल जी ने अपनी भूमिका में बताया था कि उन्होंने अन्य नाथ सिद्धों की रचनाओं का संग्रह भी कर लिया है, जो इस पुस्तक के दूसरे भाग में प्रकाशित होगा. दूसरा भाग अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है अत्यंत दुःख की बात है कि उसके प्रकाशित होने के पूर्व ही विद्वान् संपादक ने इहलोक त्याग दिया. डॉ० बड़थ्वाल की खोज में 40 पुस्तकों का पता चला था, जिन्हें गोरखनाथ-रचित बताया जाता है. डॉ० बड़थ्वाल ने बहुत छानबीन के बाद इनमें प्रथम 14 ग्रंथों को निसंदिग्ध रूप से प्राचीन माना, क्योंकि इनका उल्लेख प्रायः सभी प्रतियों में मिला.तेरहवीं पुस्तक ‘ग्यान चौंतीसा’ समय पर न मिल सकने के कारण उनके द्वारा संपादित संग्रह में नहीं आ सकी, परंतु बाकी तेरह को गोरखनाथ की रचनाएँ समझकर उस संग्रह में उन्होंने प्रकाशित कर दिया है".


उन्होने बहुत ही कम आयु में इस संसार से विदा ले ली अन्यथा वे हिन्दी में कई और रचनाओ को जन्म देते जो हिन्दी साहित्य को नया आयाम देते. डॉ० संपूर्णानंद ने भी कहा था यदि आयु ने धोखा न दिया होता तो वे और भी गंभीर रचनाओं का सर्जन करते'


उतराखंड सरकार, हिन्दी साहित्य के रहनुमाओ एवम भारत सरकार से आशा है कि वे इनको उचित स्थान दे.

(आप में से यदि कोई डॉ० बड़थ्वाल जी के बारे में जानकारी रखता हो तो जरुर बताये)


also you can find same article at http://merachintan.blogspot.com/2009/09/blog-post_30.html and
http://barthwal-barthwal.blogspot.com/2009/09/blog-post.html
आपका सहयोग - आपके विचारो और राय के माध्यम से मिलता रहेगा येसी आशा है और मुझे मार्गदर्शन भी मिलता रहेगा सभी अनुभवी लेखको के द्वारा. इसी इच्छा के साथ - प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल
« Last Edit: October 06, 2009, 02:41:48 PM by पंकज सिंह महर »
Logged
प्रतिबिम्ब बडथ्वाल, आबू धाबी, यूएई

अपणी भाषा/बोलि मा पढला, लिखला, सिखला अर बुलला !!!!

हेम पन्त

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 4,477
  • Karma: 43
  • Gender: Male
    • Myor Pahar
Re: डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल - हिंदी में डी.लिट. की उपाधि प्राप्त करने वाले पह
« Reply #1 on: September 30, 2009, 02:35:23 PM »
प्रतिबिम्ब जी पीताम्बर बड़्थ्वाल जी का जीवन निश्चय ही हम सब लोगों के लिये एक प्रेरणा श्रोत है. एक छोटे से गांव से निकलकर हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में किये गये उनके शोध काफी प्रसिद्ध हैं. अगर सम्भव हो तो कृपया आप उनके चित्र भी हमारे साथ बांटें.

Logged

गारा-रा-रा ऐगे रे बरखा झुकी ऐगे...

Barthwal

  • सभी भै-बैणो ते म्यारु नमस्कार्!
  • Jr. Member
  • **
  • Posts: 54
  • Karma: 5
  • Gender: Male
  • अच्छू लगदू अपरु लुखो क दगड और उत्तराखंड का बारा मा जानकारी.
    • मेरा चिंतन
Re: डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल - हिंदी में डी.लिट. की उपाधि प्राप्त करने वाले पह
« Reply #2 on: September 30, 2009, 02:42:24 PM »
जी चित्र जोडना चा रहा था लेकिन जोड नही पाया कैसे..एक ही चित्र उपलब्ध है मेरे पास..
Logged
प्रतिबिम्ब बडथ्वाल, आबू धाबी, यूएई

अपणी भाषा/बोलि मा पढला, लिखला, सिखला अर बुलला !!!!

Barthwal

  • सभी भै-बैणो ते म्यारु नमस्कार्!
  • Jr. Member
  • **
  • Posts: 54
  • Karma: 5
  • Gender: Male
  • अच्छू लगदू अपरु लुखो क दगड और उत्तराखंड का बारा मा जानकारी.
    • मेरा चिंतन
Re: डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल - हिंदी में डी.लिट. की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले शोध विद्दार्थी
« Reply #3 on: September 30, 2009, 02:55:39 PM »


डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल ( १३ दिसंबर, १९०१-२४ जुलाई, १९४४)
हिंदी में डी.लिट. की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले शोध विद्यार्थी
« Last Edit: September 30, 2009, 02:59:58 PM by पंकज सिंह »
Logged
प्रतिबिम्ब बडथ्वाल, आबू धाबी, यूएई

अपणी भाषा/बोलि मा पढला, लिखला, सिखला अर बुलला !!!!

एम.एस. मेहता /M S Mehta

  • msmehta@merapahad.com
  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 31,427
  • Karma: 76
  • Gender: Male
  • +91-9910532720
    • www.apnauttarakhand.com / www.creativeuttarakhand.com
Re: डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल - हिंदी में डी.लिट. की उपाधि प्राप्त करने वाले पह
« Reply #4 on: September 30, 2009, 03:02:04 PM »

MORE ABOUT : DR. PITAMBAR DUTT BARTHWAL---------------------------------------------------

Dr. Pitambar Dutt Barthwal will be remembered as a great educationalist and journalist throughout the country as he became the first man to have been honored with a degree of D.Litt. in the Hindi language. He was born in December 1901 in Pali village near Lansdown in district Pauri Garhwal. He was honored with the degree of ‘Doctor of literature’ in convocation in 1933 on his research work in ‘Hindi Kavya Mein Nirgun Bad’ at the age of 32. Unfortunately, his dedication and hard work in the field of education adversely affected his heath and he expired on 24th July 1944 at his native village.

(Source : http://pauri.nic.in/Nextpage11.htm)
Logged
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!
For any query mail to - msmehta@merapahad.com

+919910532720

पंकज सिंह महर

  • +91-9412005856
  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 7,547
  • Karma: 81
  • Gender: Male
  • जय भारत! जय उत्तराखण्ड!!
    • MERA PAHAD / मेरा पहाड़
Re: डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल - हिंदी में डी.लिट. की उपाधि प्राप्त करने वाले पह
« Reply #5 on: September 30, 2009, 03:03:22 PM »
प्रतिबिम्ब जी, श्रद्धेय पीताम्बर बड़थ्वाल जी का जीवन परिचय उपलब्ध कराने हेतु आपको धन्यवाद। निश्चित रुप से बड़थ्वाल जी उत्तराखण्ड के गौरव हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किये हैं, उनके अतुलनीय कार्यों का सम्मान करते हुये सरकार द्वारा कोटद्वार के डिग्री कालेज का नाम "डा० पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल राजकीय स्नात्कोत्तर माहाविद्यालय, कोटद्वार" रखा गया है।
« Last Edit: September 30, 2009, 03:15:01 PM by पंकज सिंह »
Logged
आंखों के आगे वनश्री के खुलते पट न्यारे-२ हैं,
छोटे-छोटे खेत और आडू सेबों के बगीचे, देवदार वन,
जो नभ तक अपना छवि जाल पसारे हैं,
मुझको तो हिम से भरे अपने पहाड़ ही प्यारे हैं.

Devbhoomi,Uttarakhand

  • M S JAKHI/ टिपिकल उत्तराखंडी
  • MeraPahad Team
  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 13,458
  • Karma: 58
  • Gender: Male
  • "UTTARAKHAND...A SURPRISE AROUND EVERY CORN"
Re: डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल - हिंदी में डी.लिट. की उपाधि प्राप्त करने वाले पह
« Reply #6 on: September 30, 2009, 06:06:00 PM »

                       डा. पीतांम्बरदत्त बड़थ्वाल ( १३ दिसंबर, १९०१-२४ जुलाई, १९४४)
                      (हिंदी में डी.लिट. की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले शोध विद्यार्थी


हिंदी में डी.लिट. की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले शोध विद्यार्थी थे। उन्होंने अनुसंधान और खोज परंपरा का प्रवर्तन किया तथा आचार्य रामचंद्र शुक्ल और बाबू श्यामसुंदर दास की परंपरा को आगे बढा़ते हुए हिन्दी आलोचना को मजबूती प्रदान की। उन्होंने भावों और विचारों की अभिव्यक्ति के लिये भाषा को अधिक सामर्थ्यवान बनाकर विकासोन्मुख शैली को सामने रखा।

 अपनी गंभीर अध्ययनशीलता और शोध प्रवृत्ति के कारण उन्होंने हिन्दी मे प्रथम डी. लिट. होने का गौरव प्राप्त किया। हिंन्दी साहित्य के फलक पर शोध प्रवृत्ति की प्रेरणा का प्रकाश बिखेरने वाले बड़थ्वालजी का जन्म तथा मृत्यु दोनो ही उत्तर प्रदेश के गढ़वाल क्षेत्र में लैंस डाउन अंचल के समीप पाली गाँव में हुए। बड़थ्वालजी ने अपनी साहित्यिक छवि के दर्शन बचपन में ही करा दिये थे।

 बाल्यकाल मे ही वे 'अंबर'नाम से कविताएँ लिखने लगे थे। किशोरावस्था में पहुँचकर उन्होंने कहानी लेखन प्रारंभ कर दिया। १९१८ के पुरुषार्थ में उनकी दो कहानियाँ प्रकाशित हुईं। कानपुर में अपने छात्र जीवन के दौरान ही उन्होंने 'हिलमैन' नामक अंग्रेजी मासिक पत्रिका का संपादन करते हुए अपनी संपादकीय प्रतिभा को भी प्रदर्शित किया।

जिस समय बड़थ्वालजी में साहित्यिक चेतना जगी उस समय हिन्दी के समक्ष अनेक चुनैतियाँ थी। कठिन संघर्षों और प्रयत्नों के बाद उच्च कक्षाओं में हिन्दी के पठन-पाठन की व्यवस्था तो हो गई थी,लेकिन हिन्दी साहित्य के गहन अध्ययन और शोध को कोई ठोस आधार नही मिल पाया था। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और बाबू श्याम सुन्दर दास जैसे रचनाकार आलोचना के क्षेत्र में सक्रिय थे। बड़थ्वालजी ने इस परिदृश्य में अपनी अन्वेषणात्मक क्षमता के सहारे हिंदी क्षेत्र में शोध की सुदृढ़ परंपरा की नींव डाली।

 संत साहित्य के संदर्भ में स्थापित नवीन मान्यताओं ने उनकी शोध क्षमता को उजागर किया। उन्होने पहली बार संत, सिद्घ, नाथ और भक्ति साहित्य की खोज और विश्लेषण में अपनी अनुसंधनात्मक दृष्टि को लगाया। शुक्लजी से भिन्न उन्होंने भक्ति आन्दोलन को हिन्दू जाति की निराशा का परिणाम नहीं अपितु उसे भक्ति धारा का सहज -स्वभाविक विकास प्रमाणित कर दिया। इस संदर्भ में लिखे उनके शोध लेख उनके गम्भीर अध्ययन और मनन के साथ- साथ उनकी मौलिक दृष्टि के भी परिचायक हैं।

परवर्ती साहित्यकारों ने उनकी साहित्यिक मान्यताओं को विश्लेषण का आधार बनाया। उन्होंने स्वयं कहा, 'भाषा फलती फूलती तो है साहित्य में, अंकुरित होती है बोलचाल में, साधारण बोलचाल पर बोली मँज-सुधरकर साहित्यिक भाषा बन जाती है।' इस तरह भावाभिव्यंजन के लिये उन्होंने जिस शैली को अपनाया उसमें उनका सर्वाधिक ध्यान भाषा पर ही रहा।

 उन्होंने संस्कृत, अवधी, ब्रजभाषा, अरबी एवं फारसी के शब्दों को खड़ीबोली के व्याकरण और उच्चारण में ढालकर अपनाया। बड़थ्वालजी निश्चय ही विपुल साहित्य की सर्जना करते, यदि वे लम्बी उम्र ले कर आते। डा॰ संपूर्णानंद ने ठीक ही कहा है,'यदि आयु ने धोखा न दिय होता तो वे और भी गंभीर रचनाओं का सर्जन करते।' अल्पवधि में ही उन्होंने अध्ययन और अनुसंधान की जो सुदृढ़ नींव डाली उसके लिये वह हमेशा याद किये जाएँगे

बाबू शयामसुंदर दास के निर्देशन में अग्रेजी में लिखे उनके शोध प्रबंध 'द निर्गुण स्कूल आफ हिंदी पोयट्री' पर काशी विशविद्यालय ने उन्हें डी॰लिट॰की उपाधि प्रदान की। हिंदी साहित्य जगत में उस शोध प्रबंध का जोरदार स्वागत हुआ। उसे भूरि - भूरि प्रशंसा मिली। प्रयाग विश्वविद्यालय के दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर डा॰ रानाडे ने इस पर अपनी सम्मति व्यक्त करते हुए कहा कि 'यह केवल हिंदी साहित्य की विवेचना के लिये ही नहीं अपितु रहस्यवाद की दार्शनिक व्याख्या के लिये भी एक महत्त्वपूर्ण देन है।' बाद में यह शोध प्रबंध 'हिन्दी में निर्गुण संप्रदाय' नाम से हिंदी में प्रकाशित हुआ।

 हिन्दी जगत में बड़थ्वालजी ने अपनी शोध प्रव्रति और समीक्षा दृष्टि के कारण ही पहचान बनाई, लेकिन उनके 'कणेरीपाव' 'गंगाबाई' 'हिंदी साहित्य में उपासना का स्वरूप', 'कवि केशवदास' जैसे विचारात्मक निबंधों में उनकी निबंध कला का उत्कर्ष देख उनके निबंधकार रुप को भी हिंदी संसार में भरपूर सरहाना मिली। उनकी प्रकाशित कृतियों में -'योग प्रवाह', (सं. डॉ. सम्पूर्णानंद) 'मकरंद' (सं. डॉ. भगीरथ मिश्र), डा॰ पितांबरदत्त बड़थ्वाल के श्रेष्ट निबंध' (सं॰ गोविंद चातक) आदि हैं।

 उन्होंने कवि गोरखनाथ की रचनाओं का संकलन और संपादन किया जो ‘गोरख बानी’ के नाम से प्रकाशित हुआ।[२] हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी में भी उन्होंने कुछ श्रेष्ठ साहित्यिक निबंध लिखे, जिनमें - मिस्टिसिज्म इन हिन्दी पोयट्री' और'मिस्टिसिज्म इन कबीर' विशेष उल्लेखनीय हैं। बड़थ्वालजी के निबंधों की विशिष्टता यह है कि निबंध का मूल भाव प्रारंभ में ही स्पष्ट हो जाता है। निबंध के प्रारंभिक वाक्य रोचक प्रस्तावना की तरह उभरते हैं।

 फिर लेखक विषय की गहराई में उतरता चला जाता है। तार्किक ढंग से विषय सामग्री को सजाकर वह पाठक को लुभाते हुए बडी रोचकता और जिज्ञासा के साथ विषय के निष्कर्ष तक पहुँचाता है। शोध लेखों और निबंधों के अतिरिक्त उन्होंने 'प्रणायामविज्ञान और कला' तथा 'ध्यान से आत्म चिकित्सा' जैसी पुस्तकें लिखकर प्रारक्रतिक चिकित्सा और योग प्रणाली में अपनी रुचि प्रकट की।

 गढवाली लोक-साहित्य की तरफ भी उनका गहरा रुझान था। बच्चों के लिये उन्होंने'किंग आर्थर एंड नाइट्स आव द राउड टेबल' का हिन्दी अनुवाद भी किया। शोधकर्ता और निबंधकार के साथ- साथ बड़थ्वालजी अपनी दार्शनिक प्रव्रत्ति के लिए भी विख्यात थे। आध्यात्मिक रचनओं को उन्होंने अपने अध्ययन का आधार बनाया। उन्होंने धर्म, दर्शन और संस्कृति की विवेचना की।

 उनका समूचा लेखन उनकी गहरी अध्ययनशीलत का परिणाम है। कहा जाता है कि मस्तिष्क की दासता उनके स्वभाव के विपरीत थी। एक-एक पंक्ति को प्रकाशित होने से पहले कई बार लिखते हुए उन्हें देखा गया।
Logged
"जुगराज रैया या धरती और याखाका मनखी जय देवभूमि उत्तराखंड "

http://ghughutiuttarakhand.blogspot.com/

Barthwal

  • सभी भै-बैणो ते म्यारु नमस्कार्!
  • Jr. Member
  • **
  • Posts: 54
  • Karma: 5
  • Gender: Male
  • अच्छू लगदू अपरु लुखो क दगड और उत्तराखंड का बारा मा जानकारी.
    • मेरा चिंतन
Re: डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल - हिंदी में डी.लि
« Reply #7 on: September 30, 2009, 06:44:15 PM »
श्री महर जी बस एक डिग्री कालेज के अलावा भुला दिया गया है. जैसा कि मैने कहा कि अभी भी शोध छात्र डा.बडथ्वाल के शोध और अन्य रचनाओ का प्रयोग करते है लेकिन उन्हे वो स्थान नही मिला जो वास्तव मै मिलना चाहिये था हिन्दी साहित्य अकादमी उनकी रचनाओ को हर 3-4 साल में पुन: प्रकाशित करता है लेकिन उनके परिवार को रायल्टि भी नही दी जाती अब(पहले मिलती थी). मैने कुछ  दिन पह्ले ही फूफू(डा.बड्थ्वाल की पुत्री) से बात की थी और भाई(डा.साहब के पौत्र) से कुछ जानकारी मिली इस बाबत. मैने हिन्दी के कुछ सुप्रसिध लोगो से बात की है जो मीडिया और हिन्दी साहित्य  से जुडे है और उन्होने माना है कि शाय्द पक्षपात पूर्ण रवैया शाय्द् इसमे बाधक रहा है और वे इस बात को आगे ले जायेगे. उनका शुक्रिया इस आश्वासन के लिये.
जखी जी का शुक्रिया.. यही जानकारी मुझे विकीपीडिया (खुशी हुई कि कम से कम ये जानकारी उपलब्ध है) मे भी मिली जिसे मैने फेसबुक में अपने साथियो तक पहुंचाया. डा़. बडथ्वाल जी की 3 पुत्रिया है और वे किसी कारणवश इस पर ज्यादा ध्यान न दे सकी अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियो के कारण. मै बहुत पहले से सोच रहा था कि लोगो को बताया जाये उनके बारे में. अबकी बार जब भारत आना होगा तो अवश्य ही अधिक जानकारी एकत्र करुगा हिन्दी साहित्य अकादमी और फूफू (डा.साहब की पुत्रिया) लोगो से व परिवार से.
Logged
प्रतिबिम्ब बडथ्वाल, आबू धाबी, यूएई

अपणी भाषा/बोलि मा पढला, लिखला, सिखला अर बुलला !!!!

पंकज सिंह महर

  • +91-9412005856
  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 7,547
  • Karma: 81
  • Gender: Male
  • जय भारत! जय उत्तराखण्ड!!
    • MERA PAHAD / मेरा पहाड़
Re: डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल - हिंदी में डी.लिट. की उपाधि प्राप्त करने वाले पहल
« Reply #8 on: October 06, 2009, 12:30:52 PM »
डा० पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल
1902-1944

डा० पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल जी का जन्म ग्राम-पाली, लैंसडाउन, जनपद पौड़ी में वर्ष १९०२ में हुआ था। उन्हें हिन्दी साहित्य में डी०लिट० (डाक्टर आफ लिटरेचर) की उपाधि प्राप्त करने वाले प्रथम भारतीय होने का गौरव प्राप्त हुआ है। औपनिवेशिक काल में उत्तराखण्ड के सई विद्वानों ने राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी भाषा और गढ़वाली,  बोलियों में महत्वपूर्ण ग्रन्थों की रचना की।  डा० बड़थ्वाल इनमें से अकेले ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी और गढ़वाली में एक साथ कार्य करते हुये भारतीय साहित्य में एक कीर्तिमान स्थापित किया। लेकिन अफसोसजनक बात यह है कि इस उपल्ब्धि के बाद भी इनका नाम हिन्दी साहित्य में उपेक्षित और गुमनामी में खोकर रह गया है।
प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही लेने के उपरान्त श्रीनगर गढवाल से वर्नाक्यूलर मिडिल पास किया और १९२० में लखनऊ के कालीचरण हाईस्कूल से हाईस्कूल तथा छात्रवृत्ति के सहयोग से १९२२ में कानपुर से इण्टर की परीक्षा उत्तीर्ण की। १९२६ में बनारस से बी०ए० किया, आर्थिक संकटों के कारण अध्ययन जारी न रख सके तो श्री श्याम सुन्दर दास, जो उस समय बनारस में हिन्दी के विभागाध्यक्ष थे, के सहयोग से एम०ए० (हिन्दी) में प्रवेश पाया और १९२८ में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुये। बनारस से ही इन्होंने १९२९ में कानून की परीक्षा उत्तीर्ण की। किन्तु साहित्य साधना की ओर उन्मुख डा० बड़थ्वाल कानून को अपना पेशा नहीं बना सके। १९३० में इन्हें हिन्दी विभाग में प्रवक्ता के पद पर नियुक्ति मिल गई, इनकी अध्ययनशीलता को देखते हुये ’काशी नागरी प्रचारिणी सभा’ ने इन्हें अपने शोध विभाग में संचालक नियुक्त कर दिया। तीन वर्षों के कठोर परिश्रम  और अनवरत साहिय साधना के फलस्वरुप १९३१ में इन्होंने अपना शोध प्रबन्ध "हिन्दी साहित्य में निर्गुणवाद" बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में प्रस्तुत किया। इसी शोध प्रबन्ध पर इन्हें डी०लिट० की सम्मानजनक उपाधि दी गई। हिन्दी साहित्य में इस डिग्री को पाने आले आप पहले भारतीय थे।
१९३७ में डा० बड़थ्वाल को हिन्दी साहित्य सम्मेलन, शिमला में निबन्ध पाठ के लिये आमंत्रित किया गया। १९४० में तिरुपति (आन्ध्र प्रदेश) में आयोजित प्राच्य विद्या सम्मेअलन में इन्हें हिन्दी विभाग का सभापति मनोनीत किया गया। इस मंच से आपने पहली सन्त साहित्य कीए निरंजिनी धारा का मौलिक विश्लेषण किया। इस प्रकार अनेक राष्ट्रीय संगोष्ठियों में डा० बड़थ्वाल ने गवेषणापूर्ण निबन्धों पर व्याख्यान दिये। १९३८ में वेतन विसंगतियों के विरोध में इन्होंने बनारस वि०वि० की नौकरी छोड़ दी और लखनऊ आ गये। निरन्तर अध्ययन और बीतर-बाहर के आघातों ने इन्हें रोगी बना दिया, फलस्वरुप लखनऊ छोड़कर अपने गांव पाली आ गये, वहीं पर २४ जुलाई, १९४४ को इनका निधन हो गया।
डा० बड़थ्वाल की प्रतिभा बहुमुखी थी, उन्होंने हिन्दी और अंग्रेजी में ७० से अधिक शोधपूर्ण निबन्ध लिखे। उनकी विषयवस्तु मध्यकालीन सन्त कवियों के मूल्यांकन से लेकर महात्मा गांधी और छायावाद के अध्ययन तक व्याप्त है। उनकी कुछ प्रमुख पुस्तकें-
गोरखवाणी, हिन्दी साहित्य का विवेचनात्मक इतिहास, कबीर और उसकी कृति, युग प्रवर्तक रामानन्द, हिन्दी काव्य की योगधारा, रुपक रहस्य।

डा० बड़थ्वाल गढ़वाली साहित्य के भी मर्मज्ञ थे, उन्होणे गढवाली में कई नाटक लिखे और गढ़वाली साहित्य की दुर्लभ पाण्डुलिपियों का संकलन किया। अंग्रेजी में मिस्टिसिज्म इन हिन्दी पोयट्री, मिस्टिसिज्म इन कबीरा और माडर्न हिन्ही पोयट्री उल्लेखनीय है।


श्री शक्ति प्रसाद सकलानी जी द्वारा लिखित "उत्तराखण्ड की विभूतियां" से साभार टंकित।
Logged
आंखों के आगे वनश्री के खुलते पट न्यारे-२ हैं,
छोटे-छोटे खेत और आडू सेबों के बगीचे, देवदार वन,
जो नभ तक अपना छवि जाल पसारे हैं,
मुझको तो हिम से भरे अपने पहाड़ ही प्यारे हैं.

Barthwal

  • सभी भै-बैणो ते म्यारु नमस्कार्!
  • Jr. Member
  • **
  • Posts: 54
  • Karma: 5
  • Gender: Male
  • अच्छू लगदू अपरु लुखो क दगड और उत्तराखंड का बारा मा जानकारी.
    • मेरा चिंतन
Re: डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल - हिंदी में डी.लि
« Reply #9 on: October 06, 2009, 02:25:41 PM »
पंकज जी बहुत बहुत शुक्रिया सकलानी जी द्वारा इस लेख को शामिल करने के लिये. क्या आप सकलानी जी के द्वार लिखे इस लेख का लिन्क दे सकते है.. अपने ब्लाग मे जोडना चाहूंगा ताकि वे बाकि लोग भी पढ सके..
खुशी हुई कि आप जैसे लोग इस दिशा मे प्रयास कर रहे है.
सप्रेम.
Logged
प्रतिबिम्ब बडथ्वाल, आबू धाबी, यूएई

अपणी भाषा/बोलि मा पढला, लिखला, सिखला अर बुलला !!!!

पंकज सिंह महर

  • +91-9412005856
  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 7,547
  • Karma: 81
  • Gender: Male
  • जय भारत! जय उत्तराखण्ड!!
    • MERA PAHAD / मेरा पहाड़
Re: डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल - हिंदी में डी.लि
« Reply #10 on: October 06, 2009, 02:37:29 PM »
Quote from: Barthwal on October 06, 2009, 02:25:41 PM
पंकज जी बहुत बहुत शुक्रिया सकलानी जी द्वारा इस लेख को शामिल करने के लिये. क्या आप सकलानी जी के द्वार लिखे इस लेख का लिन्क दे सकते है.. अपने ब्लाग मे जोडना चाहूंगा ताकि वे बाकि लोग भी पढ सके..
खुशी हुई कि आप जैसे लोग इस दिशा मे प्रयास कर रहे है.
सप्रेम.
प्रतिबिम्ब जी, श्री शक्ति प्रसाद सकलानी जी ने अथक प्रयासों से "उत्तराखण्ड की विभूतियां" नामक पुस्तक लिखी है, जिसमें उन्होंने लगभग सभी विभूतियों को स्माहित किया है। मैने उसी पुस्तक से यह अंश फोरम में टाईप किया है, फोरम से कापी करने की व्यवस्था नहीं है।
सादर,
Logged
आंखों के आगे वनश्री के खुलते पट न्यारे-२ हैं,
छोटे-छोटे खेत और आडू सेबों के बगीचे, देवदार वन,
जो नभ तक अपना छवि जाल पसारे हैं,
मुझको तो हिम से भरे अपने पहाड़ ही प्यारे हैं.

Barthwal

  • सभी भै-बैणो ते म्यारु नमस्कार्!
  • Jr. Member
  • **
  • Posts: 54
  • Karma: 5
  • Gender: Male
  • अच्छू लगदू अपरु लुखो क दगड और उत्तराखंड का बारा मा जानकारी.
    • मेरा चिंतन
Re: Dr. Pitamber Dutt Barthwal-First D.Lit. In Hindi From India:डा० पीताम्बर बड़थ्वाल
« Reply #11 on: October 07, 2009, 01:33:17 AM »
पंकज जी शुक्रिया. क्या आप इस लेख को ( आपने जो लिखा है) मुझे भेज सकते है. मै फेसबुक मे और अन्य ब्लाग मे जोडना चाहता हूं क्या मै इसे कापी कर सकता हूं ..
सप्रेम
Logged
प्रतिबिम्ब बडथ्वाल, आबू धाबी, यूएई

अपणी भाषा/बोलि मा पढला, लिखला, सिखला अर बुलला !!!!

पंकज सिंह महर

  • +91-9412005856
  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 7,547
  • Karma: 81
  • Gender: Male
  • जय भारत! जय उत्तराखण्ड!!
    • MERA PAHAD / मेरा पहाड़
Re: Dr. Pitamber Dutt Barthwal-First D.Lit. In Hindi From India:डा० पीताम्बर बड़थ्वाल
« Reply #12 on: October 07, 2009, 10:46:54 AM »
Quote from: Barthwal on October 07, 2009, 01:33:17 AM
पंकज जी शुक्रिया. क्या आप इस लेख को ( आपने जो लिखा है) मुझे भेज सकते है. मै फेसबुक मे और अन्य ब्लाग मे जोडना चाहता हूं क्या मै इसे कापी कर सकता हूं ..
सप्रेम


प्रिय प्रतिबिम्ब जी,
मैने इस मैटर को सीधे फोरम में ही टाईप किया है, फोरम से कापी करने की सुविधा उपलब्ध नहीं है, फेसबुक आदि पर  आप इस टापिक का लिंक दे सकते हैं।

link is- http://www.merapahad.com/forum/personalities-of-uttarakhand/t965/
Logged
आंखों के आगे वनश्री के खुलते पट न्यारे-२ हैं,
छोटे-छोटे खेत और आडू सेबों के बगीचे, देवदार वन,
जो नभ तक अपना छवि जाल पसारे हैं,
मुझको तो हिम से भरे अपने पहाड़ ही प्यारे हैं.

Barthwal

  • सभी भै-बैणो ते म्यारु नमस्कार्!
  • Jr. Member
  • **
  • Posts: 54
  • Karma: 5
  • Gender: Male
  • अच्छू लगदू अपरु लुखो क दगड और उत्तराखंड का बारा मा जानकारी.
    • मेरा चिंतन
Re: Dr. Pitamber Dutt Barthwal-First D.Lit. In Hindi From India:डा० पीताम्बर बड़थ्वाल
« Reply #13 on: October 29, 2009, 09:41:56 AM »
Research work of Dr. Barthwal was used by many scholars and even today all research student(in hindi) read his books and take notes.

Nirvikar Singh (University of California, Santa Cruz CA 95064) mentioned about Dr Barthwal in his first draft in September 1999 on - Guru Nanak and the ‘sants’ : A Reappraisal

Below are some abstract where he used Dr. Barthwals Name in his first draft:

” The idea that there is a coherent body of Sant teachings (sant mat) and that individual Sants belong to a common spiritual line of descent (sant parampara) distinct from that of sectarian Vaishnavas did not become fully crystallized until the mid-nineteenth century. Originating in certain late esoteric Sant circles more self-conscious about belonging to a tradition than were the earlier Sants, it has however gained general acceptance among the members of Sant panths (communities of shared belief and practice)….The pioneering works in this regard were Pitamber D. Barthwal’s The Nirguna School of Hindi Poetry (1936) and Parashuram Chaturvedi’s historical study published in 1952, Uttari Bharat ki sant-parampara….The more recent work of Charlotte Vaudeville and W.H. McLeod also reflects this point of view, as does the present volume. (pp. 3-4)”

The criticism of Sikh writers as nonscholarly believers, while the constructs of writers such as Barthwal and Chaturvedi are accepted as relatively objective, displays a striking inconsistency. The Orientalist problem is more general than just one of Westerners writing on the East!
“The ‘Sant tradition’ as construct
Mark Juergensmeyer (1987) provides a summary of the ‘central Sant motifs’, based on the work of P. D. Barthwal (1936). Barthwal is acknowledged as a pioneer in attempting to identify “the major themes of Kabir, Nanak, Dadu and others of the ‘nirguna school’”, whose effort “has not been superseded”. Briefly, these themes are:
1. The Absolute as Nirguna
2. The Interior Path of Spirituality
3. The Necessity of a Guru
4. The Fellowship of Satsang

Much of Juergensmeyer’s elucidation of these themes draws on the modern Radhasoami example, though he also discusses Kabir and Guru Nanak. Certainly, these four broad themes can be found in the teachings of Guru Nanak, and we return to this concordance later in the paper”

As to the Rajasthani and Panjabi forms in the sakhis, Barthwal, like Shukla, is of the opinion that they reflect “the language of renunciates” discourse (sadhukkari bhasha), prevalent at the time. Actually the language of Kabir’s sakhis resembles the language of the Gorakh-banis…(p. 121)

Though agreeing with Shukla and Barthwal about the influence of the Nath-panthi language and style on the language of Kabir’s sakhis, Chaturvedi remarks that many such sakhis appear directly influenced by folk-songs and ballads in dohas. (p. 122)


".....Barthwal’s book is permeated with the attitudes illustrated by the above quotes. His entire introductory chapter, in fact, frames the ‘Nirguna School’ as something like a purification of traditional Hinduism in the face of an antagonistic cultural invader, but one that did not reject all the essence of Hinduism. In his view, even the Sufis’ “monistic pantheism was a gift from the Hindu philosophy” (p. 9)

"To summarize, Barthwal and Chaturvedi are used as authorities by Western scholars seeking to construct a posteriori a medieval ‘Sant tradition’, and to situate Guru Nanak within it. Aside from the direct shortcomings in the arguments used, the sources are also problematic. This is especially so in light of attempts to respond to criticism by constructing false oppositions between ‘scholars’ and ‘believers’ or ‘historians’ and ‘theologians’, when the sources used by Western scholars are themselves subject to the same potential criticism"

References
Barthwal, Pitamber D., (1936), The Nirguna School of Hindi Poetry, Banaras: Indian Book Shop, republished with minor changes as Traditions of Indian Mysticism: based upon Nirguna School of Hindi Poetry, New Delhi: Heritage Publishers, 1978.

If you have not read abt Dr. barthwal earlier then click at this link - mera chintan blog: http://merachintan.blogspot.com/2009/09/blog-post_30.html (यंहा आपको अन्य लोगो की टिप्पणिया भी मिलेगी )

एक और लिन्क पेश कर रहा हूं स्तम्भ चित्रावली से वंहा भी डा. बड्थ्वाल जी की बारे मे पढने को मिलेगा आप लोगो को तथा सभी मित्रो की टिप्पणिया भी.
http://www.facebook.com/photo.php?pid=30687098&l=be71bb14c8&id=1385517958
Logged
प्रतिबिम्ब बडथ्वाल, आबू धाबी, यूएई

अपणी भाषा/बोलि मा पढला, लिखला, सिखला अर बुलला !!!!

Barthwal

  • सभी भै-बैणो ते म्यारु नमस्कार्!
  • Jr. Member
  • **
  • Posts: 54
  • Karma: 5
  • Gender: Male
  • अच्छू लगदू अपरु लुखो क दगड और उत्तराखंड का बारा मा जानकारी.
    • मेरा चिंतन
Re: Dr. Pitamber Dutt Barthwal-First D.Lit. In Hindi From India:डा० पीताम्बर बड़थ्वाल
« Reply #14 on: December 13, 2009, 10:18:07 AM »
-------आज डा. बड्थ्वाल के जन्मदिन पर उन्हे श्रद्दांजलि--------

पाली ग्राम (उत्तराखंड) में हिन्दी का जन्मा लाल
कर शोध हिन्दी में पहली बार सबको दिखाई नई राह
बने प्रथम भारतीय् जिन्होने डी.लिट हिन्दी में पाई
नाम इस साहित्य्कार का था डा.पीताम्बर दत्त बडथ्वाल

हिन्दी काव्य मे निर्गुणवाद पर कर गये वो शोध
संस्कृत,अवधी,ब्रजभाषा अरबी व फारसी का था उनको बोध
संत,सिद्ध,नाथ और भक्ति का किया उन्होने विश्लेषण
दूर दृष्टि के थे वे परिचायक,निबंधकार और थे वे समी़क्षक

हिन्दी को नया आयाम दे गया ये हिन्दी का सेवक
कर गया दुनिया मे नाम हिन्दी का ये लेखक
छात्र करते है शोध आज भी पढ उनकी रचनाये
कह गये जो वो उसे लोग आज भी अपनाये

अल्प आयु मे कह गया अलविदा वो हिन्दी का नायक
दे गया धरोहर हमे गोरखबाणी और नाथ सिद्धो की रचनाओ का
आज भले ही भूल चुका है उन्हे हिन्दी का साहित्य समाज
हिन्दी का सम्मान करे, कर याद इस लेखक को आज.


- प्रतिबिम्ब बडथ्वाल

http://merachintan.blogspot.com/2009/12/blog-post_12.html "मेरा चिंतन"  ब्लाग से लिया गया.
http://merachintan.blogspot.com/2009/09/blog-post_30.html 
(पुरानी पोस्ट भी देख सकते है आप लोग डा.पीताम्बर दत्त बड्थ्वाल जी के बारे में) 
Logged
प्रतिबिम्ब बडथ्वाल, आबू धाबी, यूएई

अपणी भाषा/बोलि मा पढला, लिखला, सिखला अर बुलला !!!!

  • Send this topic
  • Print
Pages: [1] 2
  • MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers »
  • Uttarakhand »
  • Personalities of Uttarakhand - उत्तराखण्ड की महान/प्रसिद्ध विभूतियां (Moderators: Rajneesh, Charu Tiwari) »
  • Dr. Pitamber Dutt Barthwal-First D.Lit. In Hindi From India:डा० पीताम्बर बड़थ्वाल
 

Related Topics

  Subject / Started by Replies Last post
How To Use Hindi In Forum? - फोरम में हिन्दी भाषा का प्रयोग कैसे करें?

Started by पंकज सिंह महर « 1 2 3 4 » How to use MeraPahad Forum - मेरा पहाड़ फोरम को कैसे प्रयोग करें!

48 Replies
12986 Views
Last post January 08, 2011, 09:24:10 AM
by हेम पन्त
Cultural Program at BK Dutt colony

Started by Anubhav / अनुभव उपाध्याय « 1 2 3 4 » Functions by Uttarakhandi Organizations - उत्तराखण्डी संस्थायें तथा उनकी गतिविधियां

59 Replies
7175 Views
Last post June 10, 2008, 11:09:03 AM
by KAILASH PANDEY/THET PAHADI
Hindi: Our Identity - हिन्दी : हमारी पहचान: आओ बढाये इसका मान

Started by Veer Vijay Singh Butola « 1 2 » General Discussion - सामान्य वार्तालाप !

25 Replies
3353 Views
Last post July 18, 2009, 02:36:19 PM
by hem
Hindi Movies Shoot In Uttarakhand - उत्तराखंड मे हुयी हिन्दी फिल्मो की शूटिंग

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta « 1 2 ... 5 6 » Films of Uttarakhand - उत्तराखण्ड की फिल्में

77 Replies
21066 Views
Last post April 17, 2013, 10:32:03 AM
by एम.एस. मेहता /M S Mehta
Dr.Gopal Dutt Bisht Guinesse Book of world record Holder fडा. गोपाल दत्त बिष्ट,

Started by Rajen Personalities of Uttarakhand - उत्तराखण्ड की महान/प्रसिद्ध विभूतियां

7 Replies
3600 Views
Last post December 28, 2012, 09:34:59 PM
by Hemant Bisht
डॉ. नारायण दत्त पालीवाल Dr. Narayan Dutt Paliwal ji

Started by खीमसिंह रावत Articles By Esteemed Guests of Uttarakhand - विशेष आमंत्रित अतिथियों के लेख

2 Replies
2485 Views
Last post April 17, 2010, 11:49:57 AM
by खीमसिंह रावत
Live Chat with Bela Negi Ji Director Hindi Film'Daayen Ya Baayen' 25 Oct

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta « 1 2 ... 7 8 » Celebrity Online - व्यक्ति विशेष से सीधी बात !

119 Replies
10856 Views
Last post October 26, 2010, 11:03:58 AM
by richa.pant
Hari Dutt Pant: A Great Freedom Fighter from Kumaon (Uttarakhand)

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta Uttarakhand History & Movements - उत्तराखण्ड का इतिहास एवं जन आन्दोलन

13 Replies
2946 Views
Last post October 31, 2010, 04:28:48 PM
by हेम पन्त
Shekhar Joshi, Renowned Hindi Author From Uttarakhand-शेखर जोशी प्रसिद्ध लेखक

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta « 1 2 » Utttarakhand Language & Literature - उत्तराखण्ड की भाषायें एवं साहित्य

15 Replies
3250 Views
Last post November 01, 2012, 12:32:33 PM
by हेम पन्त
Hansa Hindi Feature Film on Uttarakhand- हंसा उत्तराखंड पर बनी हिंदी फीचर फिल्म

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta Films of Uttarakhand - उत्तराखण्ड की फिल्में

13 Replies
865 Views
Last post December 27, 2012, 05:40:08 PM
by एम.एस. मेहता /M S Mehta