Author Topic: First Mahavir Chakra Awardee प्रथम महावीर चक्र विजेता : श्री दीवान सिंह दानू  (Read 5138 times)

विनोद सिंह गढ़िया

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साथियों देश की आजादी के तुरंत बाद कबायली हमलावरों से बडगाम (जम्मू कश्मीर) हवाई अड्डे को बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले मेजर सोमनाथ शर्मा (परमवीर चक्र) के साथ सीमांत जिले पिथौरागढ़ के पुरदम (तल्लाजोहार) के सिपाही दीवान सिंह दानू की वीरगाथा भी जुड़ी होने की बात बहुत कम लोगों को मालूम होगी। आईये जाने महावीर चक्र विजेता सिपाही श्री दीवान सिंह दानू के बारे में।

विनोद सिंह गढ़िया

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पहले महावीर चक्र विजेता दीवान सिंह दानू


देश की आजादी के तुरंत बाद कबायली हमलावरों से बडगाम (जम्मू कश्मीर) हवाई अड्डे को बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले मेजर सोमनाथ शर्मा (परमवीर चक्र) के साथ सीमांत जिले पिथौरागढ़ के पुरदम (तल्लाजोहार) के सिपाही दीवान सिंह दानू की वीरगाथा भी जुड़ी होने की बात बहुत कम लोगों को मालूम होगी। उस आपरेशन में दीवान ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए 15 कबायलियों को मौत के घाट उतारा था। मेजर सोमनाथ को परमवीर तो दीवान को मरणोपरांत महावीर चक्र दिया गया था। दीवान का नाम देश के पहले महावीर चक्र विजेता के रूप में अंकित है। शहादत के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने शहीद के पिता को हस्तलिखित पत्र भेजा था। कुमाऊं रेजीमेंट सेंटर रानीखेत में महावीर चक्र विजेता के नाम पर उनके नाम पर दीवान हाल है।

4 मार्च 1923 को ग्राम पंचायत गिन्नी के पुरदम निवासी उदय सिंह और रमुली देवी के घर पर जिस बालक दीवान ने जन्म लिया, तब कोई नहीं जानता था कि यह बालक मात्र 20 बरस की उम्र में वह कर जाएगा, जहां तक पहुंचने के लिए एक भरपूर जिंदगी भी नाकाफी होती है। यह भी एक संयोग ही है कि ठीक 20 साल की उम्र में 4 मार्च 1943 को इस जांबाज का सेना के लिए चयन हुआ। 1 जून 1946 को 4 कुमाऊं रेजीमेंट में पहली पोस्टिंग हुई। 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के बाद पाकिस्तान के साथ कश्मीर में लड़ाई छिड़ गई। 3 नवंबर 1947 को बडगाम हवाई अड्डे को कब्जे में लेने के लिए कबायलियों ने दीवान की पलाटून पर धावा बोल दिया। 4 कुमाऊं रेजीमेंट की डी कंपनी के 11वीं पलाटून के सेक्शन नंबर 1 में ब्रेन गनर के रूप में तैनात दीवान ने ब्रेन गन से फायर खोलकर 15 कबायलियों को मौत के घाट उतार दिया।

इसी दौरान दीवान के कंधे में गोली लग गई लेकिन वे लगातार फायरिंग करते रहे। दीवान के खतरनाक रुख से घबराए कबायलियों ने दीवान पर चारों ओर से हमला कर दीवान का सीना छलनी कर दिया और दीवान देश के लिए शहीद हो गए। सरकार ने उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र दिया। यह आजाद भारत का पहला महावीर चक्र था। दीवान की शहादत का सम्मान करते हुए देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने शहीद के पिता उदय सिंह को लिखे हस्तलिखित पत्र में बलिदान के लिए संपूर्ण राष्ट्र को उनका कृतज्ञ बताया था। सेवारत कर्नल गंगा सिंह दानू देश के पहले महावीर चक्र विजेता को सलाम करते हुए कहते हैं कि कुमाऊं रेजीमेंट काइतिहास नामक पुस्तक के वीरगाथा चेप्टर में शहीद होने के बाद भी दीवान सिंह दानू के हाथ में गन जकड़ी होने का उल्लेख है।

साभार : अमर उजाला

विनोद सिंह गढ़िया

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Handwritten letter by PM Jawahar Lal Nehru to first Mahavir Chakra Awardee Shri Diwan Singh's father.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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उत्तराखंड के जवानो की वीरता को देखते हुए भारत सरकार ने यहाँ कुमाऊ और गढ़वाल रेजिमेंट बनाये है! यहाँ के वीरो ने देश की रक्षा के लिए जब जब जरूरत पडी अपने प्राणों की आहुति दी! शत शत नमन इन अमर शहीदों को!

धन्यवाद विनोद जी दानू जी के बारे में जानकारी देने के लिए! गर्व है हमें भारत माँ के ये इस वीर सपूत पर !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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 महावीर चक्र विजेताओं के नाम
  • कैप्टन अनुज
  • नायक दिगेन्द्र सिंह
  • चमन सिंह यादव
  • कोमोडोर बबरूभान यादव
  • रामउग्रह पांडेय
  • मेजर कुलदीप सिंह
  • ब्रिगेडियर भवानी सिंह
  • दीवान सिंह दानू
  • कैप्टन नीकेझाकू
  • कैप्टन राजीव संधू
  • मेजर विवेक गुप्ता
  • ब्रिगेडियर राय सिंह यादव
  • ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह

विनोद सिंह गढ़िया

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सिपाही दीवान सिंह दानू  को प्राप्त महावीर चक्र

विनोद सिंह गढ़िया

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 MAHAVIR CHAKRA :Sepoy Dewan Singh

  Born                     - 4 March 1923 Village- Purdam,Pithoragarh
  Father                  - Sh Udai Singh
  Enrolled                - 14 July 1943
  Award date           - 3 November 1947
  Religion                 - Hindu

During November 1947 at Srinagar in Kashmir, during an action at Badgam, against  the  Tribesmen   Sepoy Dewan  Singh was No 1 Bren Gunner his Section.
The Tribesmen were advancing in an over-whelming majority and his Platoon position was being swept away by enemy Light Machine Gun fire. The odds were such that the platoon commander was ordered to withdraw his Platoon from the position.  The enemy by now had reached very near. On seeing this Sepoy Dewan Singh picked up his Bren gun and commenced firing from his hip with great accuracy and speed and was himself responsible for accounting at least 15 casualties on the enemy thereby repulsing the enemy advance and allowing the other personnel of his Platoon to withdraw.

While thus firing at the enemy, he was severely wounded on the shoulder but this was not sufficient to make this Sepoy leave his position. The enemy now finding that the remainder of the Platoon had withdrawn and that this was lonely Bren gun firing being manned by one man, started concentrating on his post. But Sepoy Dewan Singh would not leave his Bren gun  till he himself got a burst of Bren gun on his chest and died.

This sepoy with complete disregard for his own life and through his example of determined and heroic offensive action undoubtedly saved not only his Section but the whole of the remaining Platoon personnel from being completely overrun. His courage, gallantry and devotion to duty is an example to other soldiers. For this heroic action, Sepoy Dewan Singh was awarded MAHAVIR CHAKRA.


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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पहले महावीर चक्र विजेता दानू को श्रद्धांजलि 
 
नाचनी। देश के पहले महावीर चक्र विजेता शहीद दीवान सिंह दानू के शहीदी दिवस पर उनके नाम से स्थापित महावीर चक्र दीवान सिंह दानू राजकीय हाईस्कूल बिर्थी में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर महावीर चक्र विजेता के दो भाईयों को सम्मानित किया गया।

3 नवंबर 1947 को कबायली हमलावरों से जम्मू-कश्मीर के बडगाम हवाई अड्डे को बचाने वाले पुरदम के महावीर की शहादत को याद किया गया। सामाजिक कार्यकर्ता रमेश सिंह बृथ्वाल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में महावीर के छोटे भाईयों श्याम सिंह दानू और पान सिंह दानू को सम्मानित किया गया। इस मौके पर शहीद की वीरगाथा बच्चों को सुनाई गई। महावीर चक्र, देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा दीवान सिंह के पिता उदय सिंह को भेजे गए पत्र के साथ ही भारत सरकार द्वारा दिए गए प्रशस्तिपत्र विद्यार्थियों को दिखाए गए।

 वक्ताओं ने देश के पहले महावीर चक्र विजेता की उपेक्षा को देश का अपमान बताते हुए कहा कि वीरों की अवहेलना किसी भी दशा में उचित नहीं है। कहा गया कि अब  विद्यालय परिवार हर साल शहीदी दिवस के साथ ही 4 मार्च को महावीर चक्र विजेता का जन्मदिन भी मनाएगा। वक्ताओं ने शहीद के नाम से स्थापित हाईस्कूल को इंटर का दर्जा देने की मांग उठाई। देब सिंह बृथ्वाल के संचालन में हुए कार्यक्रम में स्कूल के प्रधानाचार्य डा. रामजन्म मिश्र, पीटीए अध्यक्ष डिगर सिंह, स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष देब सिंह रिठाल ने विचार रखे।

(Source  - Amar Ujala)

विनोद सिंह गढ़िया

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Mahavir Chakra (MVC)
Awardee: Sep Dewan Singh, MVC
           

Gazette Notification: 2Pres/50, 26-1-50
Operation: 1947 Indo Pak Kashmir War
Date of Award: 03 Nov 1947

 

Citation: On 3 November 1947, at Srinagar in Kashmir during an action against the tribesmen at Badgam, Sepoy Dewan Singh was No. 1 Bren gunner of a platoon. The tribesmen were advancing overwhelming numbers and the odds were such that the platoon commander was ordered to withdraw. The enemy by now had reached very near. On seeing this, Sepoy Dewan Singh picked up his Bren gun and commenced firing from his hip with great accuracy and speed. He was responsible for inflicting at least 15 casualties on the enemy, thereby allowing the other personnel of his platoon to withdraw. While firing at the enemy he was severely wounded In the shoulder but Sepoy Dewan Slngh would not leave his Bren gun till he himself was killed This Sepoy incomplete disregard of his own life and through his example of determined and heroic offensive action, undoubtedly saved not only his section but the whole of remaining platoon from being completely over-run

His courage, gallantry and devotion to duty are examples to other soldiers.
 

Awardee's details

       Awarded Posthumously
 Service: Army
 Arm: Infantry
 Unit: 4 Kumaon
P. Number: 26301
Birth: 04 Mar 1923
Died: 03 Nov 1947

 Medals:
MVC, Operation: 1947 Indo Pak Kashmir War, Date of Award: 03 Nov 1947  More Details

 Permanent Address:

Shri Shayam Singh (Brother)
Vill Purdam, Tehsil Munsiari
 Girgaon,Pithorgarh
Uttarakhand 262553
India


 

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