Author Topic: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date  (Read 14742 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0
Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« on: December 04, 2011, 03:36:52 AM »

Dosto,

Our Senior Member Bhishma Kukreti JI has collected this exclusive information on Great Personalities of Garhwal from Malari Era  to till Date. I am sure you would appreciate the hard work done by him.

  गढवाळऐ बड़ा आदिम (मलारी काल से लेकी अब तलक: फडकी -१

(गढवाल कि विभूतियाँ : मलारी युग से आज तक भाग-१   )                              ( Great Personalities of Garhwal from Malari Era  to till Date Part -1 )                                                गढवाल का बड़ा आदिम : भाग -१                                                                                                                             भीष्म कुकरेती ( ये लेख कु उद्देश्य नवाड़ी साख/छिंवाळी/न्यू जनरेशन  तैं गढवाळी भाषा मां अपण ऊँ लोकुं  तैं याद कराण  जौंक कारण  आज गढवाळ च , जौंक वजै से आज हम तैं घमंड च / गर्व च )                                                        मलारी जुग का नामी गिरामी गढवाळी (बड़ा आदिम /महान विभतियाँ)       मलारी सरदार : गढवाळ  मा मलारी सभ्यता वेदूं सभ्यता से भौत पैलाकी च  . डा. शिव प्रसाद डबराल की खोज से  (कर्म भूमि १९५६ अर १९५८ का लेख)  एक मलारी  सरदार की समाधी ११००० फीट पर नीति घाटी कु गाँव मलारी मा मील मील. सरदार बड़ो वीर छयो.इस लगद यू मलारी सरदार ५००० साल पैलाकू  सरदार छौ! (Bhishma Kukreti)


M S Mehta
   

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0
Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #1 on: December 04, 2011, 03:39:05 AM »
वेदूं, महाभारत, पुराणु  मा वर्णित गढवाली बड़ा आदिम (विभूतियाँ )

    भेद नरेश : ऋग्वेद कु हिसाब से गढवाल मा  भेद नरेश एक अनार्य राजा छौ अर वैन अपण अधीन भड़ू (बीर) अज, शिग्रु, यक्षु की  सहायता से  आर्य राजा सुदास को दगड भारी लडै करी छे . भेद नरेश न शम्बर की भी हत्या करी थौ. भेद तैं सुदास न मारी छौ!

अज : खरसाली को मंदिर को हिसाब से इन  लगद अज ऋग्वेदीय समौ मा  गढवाल अर हिमाचल कु खस रज्जा   छौ शिग्रु : इन मने सक्यांद ऋग्वेद कु समौ मा शिग्रु भाभर अर शिवालिक पख्यडों  कु रज्जा  छौ!

पैलू वेनपुत्र  : महाभारत /पुराणु क हिसाब सेयू अत्याचारी रज्जा वेन कु बै जंघड़ से पैदा ह्व़े अर गढवाल अर हौरी पहाड़ों का गोंड, कोल, भील जात्युं आदि बुबा छौ.दुसुर  वेनपुत्र : वेन कु दें जंघड़ से   दुसुरु नौनु पैदा ह्व़े अर वैन उत्तराखंड को दखिणी भाग, भाभर, अर उत्तरप्रदेश पर राज कौर . एको क्वाठा भितर (राजधानी) हरिद्वार छे. कोल राक्षस : केदारखंड मा कोल राक्षस को बिरतांत च जैन उत्तराखंड पर राज करी थौ अर राजा सत्य संध  न कोल राक्षस की हत्या करी थौ.!

सत्य संध : सत्य संध न कोल राक्षस तैं मारिक उत्तराखंड पर राज करी थौ.!

पुरूरवा  अर उर्वशी : हरिवंश  को हिसाब से पुरुरवा अर उर्वशी न बद्रिकाश्रम जं जगा मा वास करी छौ अर पर्वतीय दासुं तैं मारी छौ पण ऊ एक भलो शाषक भी छयो!
 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0
Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #2 on: December 04, 2011, 03:40:16 AM »
ययाति जुग

नहुष :  नहुष पुरुरवा को नाती छौ अर सैत  च वैन उत्तराखंड पर राज करी थौ [/b][/size]ययाति : पुरुरवा को पड़नाती   बड़ो भड़ रज्जा थौ अर वैन अपण राज मध्य देस तक पसारी (फ़ैलाया ) थौ!

अनु : अनु ययाति को पांच नौन्याळउं मदे एक छौ अर वै तैं भैबांटो   मा उत्तराखंड को राज मीली थौ.!

अंगिरा ऋषि  :  अंगिरा ऋषि न बद्रिकाश्रम मा तपस्या कॉरी छौ!

मरीचि ऋषि : मरीचि  ऋषि न बद्रिकाश्रम मा तपस्या कॉरी छौ
पुलह ऋषि
: पुलह ऋषि न बद्रिकाश्रम मा तपस्या कॉरी छौ

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0
Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #3 on: December 04, 2011, 03:41:33 AM »
मन्धाता जुग या कृत  जुग मन्धाता रज्जा : मन्धाता की राजधानी अयोध्या छे अरउ भौत बड़ी अडगें (क्षेत्र ) कु रज्जा छौ (मध्य देश, पंजाब, मध्य भारत आदि . विक राज उत्तराखंड पर बि छौ

[/b]
[/size]कुत्स : कुत्स मन्धाता कु नौनु छौ अर वैकु  बि उत्तराखंड पर   अधिकार अपण बुबा जं रये!

 
मुचकुंद : मुचकुंद कुत्स कु लौड़ छौ , अर मान्धाता कु नाती जैकू उत्तराखंड पर अधिकार रयो .!

महान त्यागी उशीनगर नरेश : वैदिक साहित्य मा उत्तराखंड कु नाम उशीनगर थौ . ययाति बंशी अनु को झड़ -झड़ नाती उशिनारेश ण फिर से उत्तराखंड पर राज करी . उशिन्रेश बड़ो त्यागी छौ. एक दें इंद्र अर अग्नि न उशिनारेश क त्याग कि परीक्षा बान बाज अर कबूतर को रूप धारण करी . उशिनारेश या उत्तराखूंट   नरेश न कबूतर की जाण बचौणोऊ  खातिर अपण जंघड़उं , सरैल कु मांश तराजू मा छधी थौ इथगा बड़ो त्यागी थौ उत्तराखूंट   को ऊ रज्जा .!

मुनि बशिष्ठ : एक अन्य मुनि बशिष्ठ की  छ्वीं महाभारत आदि पर्व (९९/६-७ ) मा च जखमा मुनि बशिष्ठ की बात करे गे बल  सहस्त्रार्जुन का दौरान भृगुवंशी लोक मुनि बशिष्ठ को आश्रम, उत्तराखूंट   मा लुक्याँ रैन!

कण्व ऋषि : कण्व ऋषि गढवाली ऋषि थौ अर मालिनी नदीक  किनारों (कोटद्वार, भाभर ) पर वैकु आश्रम छौ . कण्व ऋषि  विश्व मित्र अर मेनका कि नौनी  शकुन्तला को धर्म बुबा को नाम से पछ्याणे जांद .!

शकुन्तला : शकुन्तला को जन्म , परवरिश , भरण पोषण मालनी न्दी क किनारों पर ही ह्व़े . वा दुष्यंत रजा कि राणि बौण . शकुन्तला सही माने मा गढवाळी ही छे भरत : भरत शकुन्तला अर दुष्यंत कु नौनु छौ अर गढवाली छौ जैक जनम , परवरिश मालनी नदी (कोटद्वार )  क किनारों पर ही ह्व़े . वो बड़ो भड़ छयो अर वैको नाम से ही आज जम्बुद्वीप को नाम भारत पोड़ी .!

भृगु ऋषि : महाभारत का तीर्थ पर्व मा भृगु  संहिता कु लिख्वार भृगु मुनि की छ्वीं छन. ब्रिगु ऋषि क आश्रम हरिद्वार का न्याड़ बताये गे अर हरिद्वार कु पास ही आज भी उदयपुर पट्टी, यमकेश्वर क्षेत्र , पौड़ी गढवाल क भृगुखाळ जगा च .अगने बाँचो --लन्गत्यार मा ..... फडकी द्वी (2)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0
Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #4 on: December 04, 2011, 03:43:08 AM »
गढवाल का बड़ा आदिम : भाग -2

(गढवाल कि विभूतियाँ : मलारी युग से आज तक भाग-2

( Great Personalities of Garhwal from Malari Era  to till Date part - 2  )                                                                                                                                         भीष्म कुकरेती     ( ये लेख कु उद्देश्य नवाड़ी साख/छिंवाळी/न्यू जनरेशन  तैं गढवाळी भाषा मां अपण ऊँ लोकुं  तैं याद कराण  जौंक कारण  आज गढवाळ च , जौंक वजै से आज हम तैं घमंड च / गर्व च                                                                                              कुलिंद जनपद जुग का गढवाळी बड़ा आदिम (विभूतियाँ )                         Great garhwali Personalities of Kulind Era    कुलिंद जुग कु समौ 1400 B.C  se 1000 B.C तलक माने जांद . महाभारत को हिसाब से कुलिंद रजवाड़ा हरिद्वार से महा हिमालय तलक थौ. किरात राज सुबाहु:  राजा सुबाहु पांडव सभा पर्व मा शामिल ह्व़े थौ.सुबाहु की सेना न कुरुक्षेत्र मा पांडवों दगड साथ दे  छौ. हरिद्वार  (गंगाद्वार ) क नाग्कुमारी उलिपी : उलिपि हरद्वार कि नाग्कुमारी छे जेंक ब्यौ पांडव अर्जुन क दगड ह्व़े छौ.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0
Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #5 on: December 04, 2011, 03:43:57 AM »
इरवान : उलिपि-अर्जुन कु लौड़ कु नाम इरवान छौ जु बड़ो भड़ ह्व़े!

हिडंब : हिडंब भीम (पांडव) की कज्याण हिडंबा क भै छौ अर बड़ो भड़ (बीर) थौ. वैक हौर भायुं नाम थौ- बक अर जटासुर अर सब्बी बड़ा बीर मनिख छ्या
हिडम्बा
: हिदम्बा एक बिगरैली बांद छे जेंक दगड भीम न गन्धर्व ब्यौ करी छौ .

घटोत्कच्छ
: घटोत्कच्छ हिडम्बा-भीम कु लौड़ छौ अर वैकु भरण -पोषण गढवाल मा ही ह्व़े छौ.

एकचक्रा का ब्राह्मण
:  महाभारत मा  आदि पर्व मा जब पांडव हिमालय अडगें(  क्षेत्र )म अग्यात्वास मा ऐं त एकाचक्र्न्गरी क एक बामन का यख शरण ल़े छे . बामण बड़ो भलु मनिख थौ

बकासुर
: बकासुर एकाचक्रीनगरी कु अधिपति थौ अर मैस्वाग थौ जय तैं भीम न मारी .
वेदव्यास : वेदव्यास की कर्मस्थली /वेदाश्रम गढवाल हिमालय ही छौ वेदव्यास का पांच च्याला : महाभाग सुमन्तु , महाबुधिमान जैमुनी, तपसी पैल, वैश्याम्पन अर  शुकदेव न  गढवाल मा वेद आश्रम  मा शिक्षा ल़े छे   भारद्वाज ऋषि : भारद्ववाज ऋषि गढवाळी माने जान्दन जौंक आश्रम गढवाळ मा छौ ( Based on Dr Dabral's Uttarakhand ka Itihas -2 and Mahabharata )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0
Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #6 on: December 18, 2011, 03:06:04 AM »
Garhwali ki DivangatVibhutiyan (1980 ke pashcat): One of the Greatest Biography Series   
                       (Review of Garhwal kiDivangat Vibhutiyan by Dr Nand Kishor Dhoundiyal)
                                     (Great Personalitiesof Garhwal, Great personalities of Himalaya, Great Personalities of India,great Personalities of Asia)
 
                                                       Bhishm Kukreti
                            To tell the legendarystories about the ancestor is basic human nature. That is why people acrosscelebrates father’s day, mother’s day or Hindus celebrate Pitri Paksh forsixteen days and remember their forefathers. In Shradh Tarpan, hindus not only remembertheir fathers but the original person of the caste and other all persons ofancestral history.
  The legendary folk stories are nothing but topay tributes to ancestors by people. Mahabharata or Ramayana is nothing butpaying tributes to legendary ancestors. Purans are also a way of remembering thelegendary ancestors. There are thousands of biographies available in the worldtoday. Howver, Garhwal ki Divangat Vibhutiyan (in six parts) by Dr Nand KishorDhoundiyal is one of the 100 greatest biographies written so far.
                     Great Garhwali personalities life sketches in Garhwal ki Divangat Vibhutiyan  gives account of lives of saints and sages of Garhwalexpired after 1980-2010 as Biographies : God their sides(1980)  by Frances Heeray  (1985) provides life sketches of world’s greatpersonalities who faced God with their sides.
                   Scholastic Books published a book (2001)Biographies which deals with training to write biographies. There is nosurprise that great Hindi language biographer Dr Dhoundiyal have been successfulin maintaining the standard of writing great biography as mentioned in the bookBiographies by said publication.
                France E Ruffin published a biographyof great personality Fredrick Douglass ‘Fredrick Douglass Rising up Slavery’ (2008).The inspiration level, feeling of Douglass and struggle for freeing slavery  by Douglass is the essence of biography FredrickDouglass Rising up Slavery’ (2008)’ and same essence and emotions  could be found in Garhwal ki DivangatVibhutiyan when Dr Dhoundiyal describes about freedom fighters of India in thebook.
                     Ellen Blue Phillips wrote a biography of AbrahamLincoln (2007), so many writers wrote biography of Lincoln and readers getinspiration from each book. When one of the great writer of Hindi literature DrDhoundiyal describes Hemvati  Nandanbahuguna , the readers gets inspiration from the content .
               Tabattha Yeatts (2007), Stephanie Sammartino ,Alice Calaprice , Joyce Goldenstern  ,Marrie Hammontree, Ann Henrichs etc wrote the biographies of great Albert Einstein and they were successful to open theinsight of becoming Albert as great genius or great personality. Same way, Dr Dhoundiyalis successful in portraying the way many great Garhwalis became genius thoughin adverse conditions.
       The biographies  of Thomas Jefferson by   RitaMullin, Victoria Sherrow, Carol H. Behrman,  A.M.Kishel, R.b. Bernstein, T.S. Trueit ,Ellan Phillips create desire for freedom from any type of slavery and when Dr Dhoundiyal describes the life span of a freedomfighter or a soldiers in Garhwal ki Divangat Vibhutiyan (Great Garhwalipersonalities) the readers gets desire for freedom from from all types ofslavery
              As the life works of 204 greatpersonalities cited in Biographies by John L. Wakelyn make readers aware abouttheir works important same way Garhwal ki Divangat Vibhutiyan make the readersfully aware about contributions of those great personalities important forGarhwali society and India. 
                 The essence of any biographicalbook is to brief about personalities for their contribution in a or many fieldsas New Biography of south African Biography by Human research councils (editedby Verwey) serves the purpose same way, serves the basic essence of biographicaldetails Garhwal ki divangat Vibhutiyan by scholarly investigator  Dr Dhoundiyal
           If you might have read the biography bookWomen and Art in South Africa by Marion Arnold, Great English Painters by AllanCunningham you would get good knowledge of women art creation and emotion of andartists besides women artists of Africa. Same way, Dr Dhoundiyal had been captivatingin explaining art and way of art creation when he portrays artists as AvtarSingh panwar , Ranbeer Singh
  Catherine Clay could fruitfully found theinsight of women writers in her book British Women Writers (1914-1945) andthere is no surprise that Dr Dhoundiyal have productively got the insight of Garhwaliwomen writers in Garhwal ki Divangat Vibhutiyan (Great Garhwali personalitie*pired after 1980).
           Rylene Ramsy wrote biography book French Womenin politics. The readers will enjoy Woman in French Politics and the Garhwali womenin politics cited in Divangat Vibhutiyan  with same vigour.
  As Don Cook impresses readers by his thebiography book Charles De Gaulle, Dr Dhoundiyal too impresses by hisbiographical sketches of political leaders of Garhwal in his book Garhwal keDivangat Vibhutiyan
  As the Italians pay respect to thebiographers as Antonio Bonfini , Angelo Fabroni, A. Gallo, Ascanio Condivi, B.Platina, Dominico Bernini,  F. Micanzio, G,Papini, Giuseppe Carpani, G. Mazzucchelli, G.B. Cavalcaselle, G. Vasari, L.Ugolini, S. Gotta, S.B Soncino, V.da Bissticci, for their great works Indiansrespect the work of dr Nand kishor Dhoundiyal fr his biographical works
  If Brazilians feel proud of biographerAlessandra Silvestry-Levy, Garhwalis across the world are proud of Dr NandKishor Dhoundiyal
           International readers have to depend on AnhuaGao, Gao Wenqin, tien-Min Lee  to tastethe   Chinese biographies and Hindi readers have torefer Dr Dhoundiyal to know great personalities expired after 1980 on the worksof Dr Nand Kishor Dhoundiyal
     LyndallGordon, M. Masson and tony Peake served South African society by writingbiographies and Dr Dhoundiyal serves Garhwali societies by publishing sixvolumes of biographical books about great Garhwalis.
       Whenpeople know about Israel through the biographies by A. Dankner, Shamul Katz, AryehKrishek, Simon Louvish, Robert Rosenberg, people come to Garhwal throughreading books as Garhwal ki Divangat Vibhutiyan (Great Garhwalis)
The importance of dr Nand Kishor Dhoundiyal inGarhwal region is as important as  J.Graff, J Jorgenson, J.M Jnudsen, H. Nathansen, G.N von Nissen, J.M . Thiele areimportant in biographical literature of Danish region.
  The world biography analysts praise biographersof Dutch region as Booven, G. Brandit, Liempt, K.van Mander,Casper  Winterman   ,famous Hindi critic Mohan Babulkar praises Dr Dhoundiyal for his biographies  about Garhwali personalities.
  The biographies written by Austrianbiographers O.E Deustsch, Theodor von Frimmel, G.A. Griesinger , Geza  Silberer , Alfred von Wurzbach,  C.con Wurzbach, Stefan Zweig are appreciated worldwideand definitely the biographies written by Dr Dhoundiyal will be read with greattaste by the readers all across the globe
         New Zealand biographers as Michael Basset,James Cowan, Dunmore, E.J. Godley,   Michael King had been successful in providinginsight of personalities of new Zealand as Dr Dhoundiyal could provide theinsight of Garhwalis described in his book Garhwal ki Divangat Vibhitiyan.
                 The contribution of Dr Dhoundiyal inGarhwal ki Divangat Vibhutiyan is equally important as works of Germanbiographers as   Adolf Strodtmann, Anton Praetorius,  F von OppelnBronikwski , Emil Ludwig , TheodoreKolde,  Otto Jahn, Linna Raman , ErikaRosenberg, Joseph Wulf, Karl Goedeke, H. Fraenkel, Ludwig Geiger, G.Eduard,H.Dukas, Peter Bamm, Lilly Becher, Berling , W. Hildesheimer, L.Prowe, GerdPuritz, j.h Mackay, Anton Schindler etc for preserving regional heritage andhistory.
                      Venezuelan biographers E. Bruzual andChristina Marcono are famous for creating identity for the region Venezuela andsame way dnad Kishor Dhoundiyal hs been perfect in creating an image for Garhwalisthrough his books Garhwal ki Divangat Vibhutiyan.
         Historians, analysts will always rememberthe works of Dr Nand Kishor Dhoundiyal .


Garhwal ki DivangatVibhutiyan (1980 ke pashchat) in six volumes  (san 1980-2010)
By Dr. Nand KishorDhoundiyal
Year of publication –2011
Language: Hindi
Cost Rs 3000 for fullset
Dhad Prakashan
74 A New ConnaughtPlace
Dehradun , 248001
Contact Number of Dr Nand Kishor Dhoundiyal---09412111996
Copyright @ BhishmaKukreti , Mumbai 2011
 
--
                                Garhwalki Divangat Bibhutiyan -1: A Book,  Every Young Indian Should Posses

                                             (Reviewof Garhwal ki Dibangat Bibhitiyan (San 1980 ke Pashchat) -Part-1 by Dr NandKishor Dhoundiyal )

                                                 (Great Personalitiesof Himalayas India, Great Personalities of Garhwal, Great Personalities ofUttarakhand)
         
                                                                                                 Bhishma Kukreti
             Dr Mohan Babulkar rightly statesthat to write about the great personalities is a basic social and humanresponsibility of a writer. Dr Nand Kishor Dhoundiyal had been successful inmaintaining his social and human responsibility for bringing gigantic sixvolumes of Great Personalities of Garhwal, India expired after 1980 AD. Thewritings and popularizing about life span of great achievers is very muchessential at the time of globalization. Globalization requires competency andbooks as Garhwal ki Dibangat Bibhutiyan by the great research scholar of IndiaDr Nand Kishor Dhoundiyal are certainly the need of the hour for every youngIndians as these books inspire young Indians for setting goals and achievingtheir set goals.
The act of getting details about achievers andthen molding them into words in easily understandable language by Dr NandKishor Dhoundiyal make him important as Paul Perigold, John Vile, W.f. Paris,Edwin Wildman, John Augustus Roger, Adele Bildersee, Prof. R P Chaturvedi,Havelock Ellis, D K Simonton, James Bennett, Guy Wint, Khoon Choy Lee, J.C.Thomas, Wilhelm Heiliger, john P Fieg, H C G Von Seherr  and many more writers who wrote about greatpersonalities of various territories for benefiting young generation.
There are six volumes of Garhwal ki DibangatBibhutiyan (1980 ke Pashchat) and each volume is master piece of life sketchesof great personalities of Garhwal, India. Dr Nand Kishor Dhoundiyal is himselfan achiver (a Doctor in Literature and Professor in HNB Garhwal University, PDBPG College Kotdwara) and his writing will definitely inspire every youngIndians.
   In the introductory note of first volume outof six volumes of Garhwal ki Dibangat Bibhitiyan, Dr Mohan Baulkar provides thereaders about the tradition of writing about memorial write ups and books aboutgreat achievers of Garhwal, India as ‘ Shri Dev Suman Smiriti Granth (1947),Shri dev Suman smiriti Granth (Edited by Dr Bhakt Darshan, 1973), Chandra SinghGarhwali (by Rahul Sankrityayan), Kaml Sahityalamkar (by Trilochan Panpai) andtens of such books on great Garhwali, Indian achievers.
There are two major parts of this volume. Thefirst part provides details of life sketches of 43 Great Personalities ofGarhwal, India and second part deals with short profile of Great Garhwalimartyr soldiers killed in Blue start operation Amritsar in 1984.
                  The great, learned academicDr Nand Kishor  Dhoundiyal provides thecomplete life sketches, becoming the characters as achievers of following GreatGarhwali, Indian personalities.
                          Great Garhwali, Indian Personalities expired after 1980
1-Hari ram Mishr‘Chanchal (Saruda, Dugadda, Pauri G, 1918-1980): A freedom fighter, socialworker, journalist and apoet
2-Captain Ram PrasadNautiyal ( Kanda, Khatali, Pauri G 1905-1980): A freedom fighter and politician
3-Dr Hari vaishnav (Nand Prayag, 1918-1981): Army man, great doctor
4-Narendra Uniyal (Sakloni, Aswalsyun, Pauri  G.,1952-1981): A social worker, political activist and fearless-energeticjournalist, editor of Jayant weekly
5-Sayapal Pandhi(Amritsar, 1923-1981). Great Journalist and publisher
6- Pundit Adity RamDhyani ( Borgaon, Guradsyun,Ppauri G , 1903-1981): Indian Freedom Fighter andgreat social worker
7- Keshva NandNaithani‘ Bhauk’ (Jakh, Kafolsyun, Barahsyun, Pauri g , 1897-1981): ExcellentHindi poet
8-Bhuvnesh BaudaiVidyarthi ( Bangar ,Sabli, Pauri g , 1901-1981): Freedom fighter, FarmerActivist, political activist, social worker
9- Swami Ganesh GiriMaharaj (1860-1981): Religious leader
10- Pundit BaldevPrasad Nautiyal (Kadakot, Gagwadsyun, Pauri g, 1895-1981): Garhwali languagewriter, Garhwali novelist, creator of Garhwal shabdkosh etc.
11-Sain Singh (Nala,Guptkashi, Chamoli G, -1981): Freedom Movement activist
12-Barister Mukandilal ( Patli, Gopeshwar, Chamoli G, 1885-1982): Art critics, Judge of TihriRiyasat, politician, social worker, literature , writer, Art collector, Artinvestigator
13-Mnager Sahib NandaDatt Kukreti (Gweel, Malla Dhangu, Pauri G, 1910-1982): Educational InstitutionManagement, politician. Social activist
14-Balwant SinghRawat (Dob, Chaundkot, Pauri G, 1925-1982): Lieutenant Colonel in Azad HindFauz, Police Force in Gujrat, Judge for Shooting Competition in Asiad
15- Daya ShankarBhatt ‘Bandi’ (Falswadi, Sitaunsyun, Pauri G, 1905-1982) Freedom Fighter, NewScript creator of Bhatt Lipi for Hindi, Musician, Music script creator, Poet,Social Activist
16-Pundit RaghubarDayal (Pakhri, Maudadsyun, Chaundkot, Pauri G 1885-1982), Fredom Fighter,  Vedic movement Activist, Social Reformer, IdealFarmer and businessman
17-Padm Bibhushan SushriMeera Bahin ( London 1881-1982) Caw Protecting Activist and social worker
18- ChakradharBahuguna (Pokhari, Chalnsyun, Pauri G, 1902-1982) Freedom Fighter, LiteratureCreator of Hindi and Garhwali, social worker
19-Dr Mahaveer PrasadLakheda ( Jakhand, Tihri Garhwal1926-1982) Phonologies, Linguistic sciencescholar, writer, editor, teacher
20-Shyam Chand Negi(Belgram, Athud, Tihri G 1925-1982) Freedom fighter,  English Book writer, journalist
21-Deva Nand Saklani(Juva Udaypur, Bhainskoti, Tihri G 1902-1982): Freedom Fighter, politician,social activist
22-Lietinent KhushhalSingh Rawat (Kasyali, Malla Udaypur, Pauri g 1915-1983): Azad Hind Fauz andIndian Army man, social worker
234-Bhagwati PrasadChandola (1911-1983) Chayavadi poet, Kvita Kala Poster creative, Garhwali stageplay write
24-Swami SacchidanandSarswati Maharaj ( Khalla , Chamili G1897-1983): Sanysi and Educationinstitutions founder
25-Vaidraj sohan lalKukreti ( Kheda, Udaypur, Pauri G, 1907-1983): Medical practitioner
26- Shridhara NandJamloki: Bamankhola, Ukhimath, Chamoli G 1920-1984): Sanskrit, Garhwali andHindi Literature creator
27- Lieutenant colonelKunwar Singh Rawat (Unchakot, Ekeshwar, Chaundkot, Pauri G 1907-1984): Veer ChakraReceiver,  Village Craft industry promoter, Social worker
29-LakhpatiPrayagdatt Dhashmana (Toli, Malla Badalpur, Pauri g 1902-1984) Social worker,Environment activists, great donor
30-Ram Lal Pundir(Nauli, Chalansyun, Pauri G1915-1984) Journalist, Garhwali poet
31- Babu Botha Singh(Koladi, Barahsyun, Pauri G 1898-1984): Shilpkar  Vikash andolankari/Untouchability eradicationmovement  activist
32- Bhawani DattJoshi (Chepdon, Tharali, Chamoli G 1952-1984) Martyr in Blue Star OperationAmritsar
33-Shyam Charan kala(Sumadi, Katalsyun, Pauri G 1910-1984) English language Journalist, Columnist
34-Chhawan Singh Negi(Kolsi, Thangar, Pauri G 1900-1984) Great freedom Fighter, Politician
35-Pratpa Singh Negi(Dhaunri, Dabralsyun, Pauri G, 1897-1984) Freedom fighter, honest Parliamentary,social activist
36-I.P Thakur SinghNegi ( Soola, Aswalsyun, Pauri G  1902-1984),Disciplined Police Officer of Rajashthan, Director CRP, Social worker
37- Manohar lalUniyal ‘Shriman’ (Uniyal Saklana, Tihri G 1919-1985) Bharat Mukti andolanActivist, Hindi Literature creator
38- Keshva NandDhulia (madanpur, Langur, Pauri  G, 19321932-1988):High Court Judge
39- Dr Guna nandJuyal (Jivai, Bangarsyun, Pauri G 1905-1985) Freedom Fighter, Writer of book- MadhyPahadi  Bhasha (Garhwali –Kumauni ) kaAnusheelan, The most prolific  scholar ofMaithali and Vidyapati
39-Tejram Bhatt (Tihri, espired in 1985): Journalist and writer
40-Madan Lal shukla (Guptkashi, Rudraprayag G , expired in 1985) Freedom Fighter
41- Kamalsahityalankar (Baliram  Ghansala)(Haruli/Halli, Talain, Pauri G 1909-1985) great Hindi and Garhwali poet, Radio artist,and educationist
42-Major Jay BardhanBahuguna ( Pokhari Pauri G , born in Dehradun , 1947-1985) Antarctic Expeditorand  Everest mountaineer
43- Commissioner JayKrit Singh Bisht (Badkhol, Maniyarsyun, Pauri G1893-1985): Effective Administrator and social worker
                    The exclusivity and specialtyof great examiner, investigator, polisher Dr Nand Kishor Dhoundiyal is that henot only described about the personality but he also touched the subject ofhistorical back ground of the cast , village , village or area origin,geographical conditions of the region where the person belonged, his/her familyand social background and the circle where the person lived. For example whendr Dhoundiyal described about Major Jay Bardhan , dr Dhoundiyal takes thereaders to Bahguna family tree, reasons of migration of Bahugunas , the greatpeople of Patti Chalansyun, the Everest mountaineers etc. Such details makethis book outstanding
              The language is n doubt, is with lot of figuresof speeche but the flow is very smooth and readers enjoys the images created inreading the subject. The description is so live that readers can see the personas if the person is before the reader or the area is before reader. This is a charismaticcharacteristic of Dr Nand Kishor Dhoundiyal’s writing.
     Another specialty of Dr Nand Kishor Dhoundiyal  is that his writing of each greatGarhwali, Indian personality encourages the readers to be firm in achieving hisset goals.
                The details of ‘Garhwal ki Dibangat Bibhutiyan‘is proof that Dr Nand Kishor Dhoundiyal took immense pain in collecting therequired information.
   Second part is about brief information aboutmartyrs of Blue Star Operation in Golden temple Amritsar in 1984
                  GarhwaliMartyrs killed in Blue Star Operation, Amritsar, 1984 
The list is as in the book ‘Garhwal ki DibangatBibhutiyan ( 1980 ke Pashchat)
1-Hawaldar VetalSingh (Devara,Tangoli, Makhlogi,Tihri G)
2-Nayak Bhavani DattJoshi ( Chapdyaun, Pindpar, Chamli G)
3-LansNayak GangaPrasad (Bhadarki, Nagan, Tihri G)
4-Rifleman Hari singh( Divali, Maniyarsyun, Pauri G)
5- Rifleman RatanSingh (peepli, Bachhansyun, Pauri G)
6-Rifleman MehrbanSingh (Kathud, Sitaunsyun, Pauri G)
7-Rifleman DevendraPrasad ( Kuthar /Hathnood, Bichhala Dhangu, Pauri G)
8-Rifleman KundanSingh , Lalpur, Naldhara, Chamoli G)
9- Nayak Shaktidhar(manjhgaon, Kimgadi gad, Pauri G)
                   Great life sketch writer DrNand Kishor Dhoundiyal dedicated the first part of Garhwal ki Dibangat Bibhutiyan(1980 ke Pashchat) to Hari ram Mishra Chanchal, Captain Ram Prasad nautiyal andbarrister Mukandi lal
                 The book is very much inspirational and allGarhwalis are in debt to great writer and researcher Dr Nand Kishor Dhoundiyal.
            Each young Garhwali, Indianshould read this great book about Great Personalities of Garhwal, India.
Garhwal ki Dibangat Bibhutiyan (1980 kePashchat) Bhag -1 (san 1980-1985)
By Dr. Nand KishorDhoundiyal

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0
Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #7 on: December 23, 2011, 01:23:15 PM »
गढवाळ का नामी लोक अर ज़ात (मलारी जुग बिटेन अज्युं तलक ) - फड़की -50

         
              गढ़वाल के विभूतियाँ व समाज (मलारी  युग से  वर्तमान तक) - भग- 50                Great Garhwali Personalities (malari era to till date ) Part -50                                 Bhishm Kukreti                      टीरी क      राजा प्रताप शाह (1871 -1886  ई.)   राजा प्रताप शाह भवानी शाहौ ज्याठो नौनु छौ त वै तैं राजपाठ मील . वुँव्हारिक अर मयल़ू किस्मे मनिख थौ प्रताप शाह प्रताप शाह अपण जादातर समौ राजकाज मा इ लगान्दु छौ . थोडा भौत मनोरंजन का बानमाछ मरदो छौ, घ्वीड़ , काखड़ , बाज, चकोरूं  शिकार करदो थौ . कुश्ती को शौक बि छौ राणी ; चार राणी छे पण जब कैको बि नौनु णि बच त हिमाचल बिटेन कै थोकदार जजमान की बेटी दगड ब्यौ ह्व़ेजैन तैं गुअलेरिया जी बुले जांद छौ अर वीं से कीर्ती शाह, विचित्र शाह अर सुरेन्द्र शाह पैदा ह्वेन . कीर्ति शाह पैथर रज्जा बौण

लुट्यु   धन की खोजबीन : भवानी शाह क मोरण पर कुछ लोखुं  (दरबारी अर भावनी श की खवास राणी ) न  राज दरबार को धन लूठी. ए धन की खोज ह्व़े अरलुटेरों तैं डंड्याय़ी गे!

जागीर की झूटी सनद : कुछ द्वी चार लोक भवानी शाह की झूटी सनद ( मुआफी की जागीर ) पकडे गेन पलटन तैं तोड़ेगे : ढड़क आन्दोलन कार्युं तै रुकणो  बान ज्वा पलटन बणे छे वा तोड़े गे दरबारौ  इंतजाम : जब तक राम कृष्ण पैन्यूली बच्युं राई दीवान राई . पैथर वैको भुला श्रीचंद तैं दिवां बणे अर दुसर भुला गोबर्धन पैन्यूली तैं सिरस्तेदार बणाय़ी  श्रीचंद  भयंकर दर्वड्या छौ . राजकर्मचारी लोकुन तैं तंग करण मा माहिर था. कारिन्दा (जाग्रिया० घुसखोरी मा आज का पट्वार्यों से भौत अग्वाडि छया  भुव्यव्स्था मा बद्लौ:   बहू व्यवस्था मा बदलौ को पुट्ठ्याजोर  ( कोशिश ) करे गे न्याय  निसाब : छ्वटु नजीर - कुंवर विक्रम शाह अर बड़ो नजीर - शंकर दत्त ड्यूडी , सने कौरिक न्यायालय की भाषा उर्दू/फारसी हूंण  बिसे गे कोष रक्छा : पैल छोटे लाल खत्री कोषध्यक्ष छौ पण वो बदमासी करण लग गे . फिर बद्री लाल तैं कोषा ध्यक्ष बणाय़ी वो बि बदमाश निकळ त शंकर दत्त तैं कोष की चाबी दिए गेन

पुलिस व्यवस्था : शिव दत्त डंगवाळ अर वैक भै देवी दत्त डंग्व़ाळ कोतवाल छ्या. पैथर शिव दत्त डंगवाळ रंवायीं क कोतवाल बौण

नै निर्माण : रज्जा  न राजधानी मा एक बग्वान बणाय़ी . कार चलाण जोग बाटो बणाय़ी . कत्ति जगा डाक बंगला बणेन .भौत सी सड़कूं  मरम्मत कराई!

सरकारी स्कूल : टीरी मा एक प्रिमारी स्कोल ख्वाल जो पैथर प्रताप इंटर कालेज  का नाम से जणे गे सरकारी होस्पिटल : एक सरकारी हॉस्पिटल बि खोले गे जै मा राजू राज्बैद रवि दत्त आयुर्वेद क हिसाब से अर डा हरिराम एलोपैथी क हिसाब से उपचार करदा छा. उपचार मोफत होंद  छौ!

प्रताप नगर को थर्पयाँण (स्थापना ) : प्रताप शाह न गर्म्युं खुणि  टीरी से नौ मील दूर ७००० फीट की ऊंचाई पर प्रताप नगर नाम से नै राजधानी बणाय़ी . इख महल, न्यायलय , राज कारिंदों खुणि कूड, कोषागार, भण्डार आदि बणये गेन , टीरी से प्रताप नगर तक बाटो ठीक करे गे .

बौण व्यवस्था : बौणु  से आमद  बढाणो खातिर बौण व्यवस्था क वास्ता प्रताप शाह न अपण ज्याठो स्याल़ू हरि सिंग तैं कंजरवेटर अर कणसो स्याळ तैं डिप्टी कंजरवेटर बणाय़ी ,गौं की भौत स बौंण राजकीय बौण मा शामिल करे गेन जां से लोकुं तैं लकड , घास की तखलीफ़ होंण  लगी गे अर ऊन कुमौं कमिशनरी मा सिकैत करी!

बेगार से नकली छूट : गढ़वाळ कुमाऊं मा बेगार एक भौत पुराणि पर्था छे जैन तैं प्रभु सेवा नाम दिए गे छौ यीं प्रथा मा हरेक मवाषा तैं राजा, हाकिम आदि औंण  पर ऊंका सामान मोफत मा ल़ाण /ल्हिजाण जरोरी छौ . लोक बिद्रोह पर उतारू रौंदा छया . प्रताप शाह  न  नयो नियम बणेन बल जु बेगार मा शामिल णि ह्व़े सौकलवु एक रुपया देकी बेगार से माफ़ी मांग सकद. मतबल यो छौ बल भेळ उन्द लमडीक  मोर या ढंडी मा फाळ मारिक मोर , मोरण त तीन ही च. आख़री समउ मा राज दरबारियूं पाळीबंदी : प्रताप शा का समउ पर दर बारी यूँ मा पाळी  बंदी राई छे आखरी दिनु कुछ दरबार्युं न जनता तैं ढंढक  आन्दोलन का वास्ता उकसाई अर राजा क बिरुद्ध सिकैत कुमाऊं कमिश्नर हेनरी रामसे को चिट्ठी भ्याज. यूँ दर्बारियुं मादे दीवान राम कृष्ण कू नौनु जोगेश्वर, छ्वटि दीवानी क सिरसतेदार
श्रीदत्त सकलानी, बनवारी पैन्यूली, मुकुंद राम पैन्यूली , स्यालग राम पैन्यूली, जगरनाथ पैन्यूली ,
.. केशर सिंग धनारी वला, फते सिंह रौतेला, ज्वाला सजवाण आदि छ्या. यूँ तैं पड बिहीन कौरिक नै लोखुं तैं भारती करे गे References: Courtsy to books of Dr Shiv Prasad Dabral,  Pundit Hari Krishn Raturi, Minyaan Prem Singh (Uttarakhand ka Itihas, History of Garhwal, History of Tihri Garhwal)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0
Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #8 on: December 23, 2011, 01:23:54 PM »
गढवाळ का नामी लोक अर ज़ात (मलारी जुग बिटेन अज्युं तलक ) - फड़की -51
 
         
गढ़वाल के विभूतियाँ व समाज (मलारी  युग से  वर्तमान तक) - भग- 51                 Great Garhwali Personalities (malari era to till date ) Part -51                                                        Bhishm Kukreti                         टीरी को राजा कीर्ती शाह (1887 -1913  ई. )                        रज्जा ब्व़े क शासन राणी:   कीर्ति शाह   की एकी राणी छे जवा नेपाल क प्रधानमंत्री जंग बहादुर की नातण  छे . वींको  नरन्द्र सिंग नाम को इक्कू नौनु ह्व़े जु पैथर राजा बौण कीर्ति क एक खवास राणी छे ज्वा गढवाली बिष्ट (बरसाली-नदगांव )  छे    . वींक नरेंद्र सिंग अर सुरेन्द्र सिंग नौनु छया . पैथर नरेंद्र सिंग टीरी रियासत को रज्जा बौण    कीर्ति शा होश्यार मनिख थौ अर स्ब्ब्युं दगड सम्बन्ध ठीक ठाक रखण मा उस्ताद छौ      जब प्रताप शाह मोरी त टीका (राजकुमार ) कीर्ति शाह छ्वटु छौ . त वैकी  ब्व़े गुलेरिया जी न धीरज धौरिक शासन चलाई . जैबरी प्रताप शाह मोरे तैंबारी ढंढका आन्दोलनकारी बि राजधानी अयाँ छया . राणी न सूझ बूझ से तौं सणि समजाई  बुझाई अर सौब अपण ड़्यार चली गेन . उना प्रताप नगर मा राजकीय माल की चोरी बि ह्व़े :                 अस्सिटेंट कमिश्नर (जिला स्शाब ) को टीरी औण प्रताप शाह को मरण पर हेनरी रामसे को दूत जिला साब टीरी ऐन अर ऐलान कार बल राणी गुलेरिया जी क बुल्युं पर शासन चौलल अर तीन मुख्य लोक - कुंवर विक्रम शाह , दीवान श्रीचंद, अर केवलरामराणी की मदद कारलदोषी राजकारीन्दो तैं माफी : प्रताप शाह ण जौं राज्कारिन्दों तैं नौकरी से भैर निकाळी छौ तौं तैं डिप्लोमेसी  का अंतर्गत दुबर नौकरी पर रखे गे विक्रम शाह असफल : राणी न  अपण द्यूर विक्रम शाह तैं शासन करणे छुट डे छै पण विक्रम शाह असफल रायीअर राणी तैं शासन की बागडोर अफुम थमण पोड़ रीजेंसी कोंसिल : राणी न शासन की कमान सम्बाळणो  कुमाओं कमिश्नर की र्जबंदी से रेजेंस्य कौंसिल बणाई जै मा शिव दत सकलानी, केवलराम रतूड़ी , विश्वम्बर दत्त सकलानी छ्या अर सेक्रेटरी छौ रघुनाथ भट्टाचार्य कीर्ति शाह की पढे लिखै : कीर्ति शाह तैं हरिकृष्ण रतूड़ी क संरक्षता मा बरेली अर मेयो कोलेज अजमेर मा पढये गे कीती शाह की राजपोशी : 1892  खुणि ह्व़े स्कुलूं खुलण : इन मनण क्वी ऐतराज नी होंद बल कीर्ति शाह खुलो दिमाग को छौ कीर्ति शाह न प्रताप प्रायमरी स्कोल तैं है स्कोल कार अर भौत सी पट्टीयूँ  मा प्राइमरी  स्कोल खोलींन मुसल्मानु खुणि मदरसा ख्वाल टिहरी नगरपालिका : टिहरी अब नगरपालिका ह्व़े गे अर उख बिजली, पाणी को इंतजाम बि ह्व़े. विक्टोरिया क जयंती पर एक घंटाघर बि बणाई . कत्ति कूड बणेन . गढवाळ बैंक बि खोले गे बाटों सुधार : भौत सा महत्व पूर्ण रस्तों तै ठीक करे गे . कत्ति धर्मशाला चिणये  गेन  न्यायपालिका मा सुधार : न्याय पालिका मा बि सुधार करे गे अस्पतालूं खुलण : कुछ जगा खासकर जात्रा मार्ग पर अस्पताल खोले गेन बौणऊँ  इंतजाम : बौणु ठीक इंतजामौ बान गोदिगाँव को चंद्रमोहन रतूड़ी तैं ऍफ़ अर इ देहरादून बन प्रबंध की सिक्षा बान भिजे गे अर पैथर वै तैं अस्सिटेंट कोंजेर्वेटर बणये गे . रतूड़ी न आठ साल तक काम करी गंगाराम खंडूड़ी तैं  जंगल़ातौ  ठेका : गंगा राम खंडूड़ी (मरगदना, पौड़ी  ) तैं बौ णु ठेका दिए गे . मोरद दें गंगाराम पर ६४००० रु करज छौ पण फिर गंगाराम खंडूड़ी क  चार  नौनु घनानंद , तारादत्त, राधा बल्लभ, चन्द्र बल्लभ न ब्योपार ठीक से सम्बाळ अर टीरी रियासत तै बि फैदा दे , दगड मा कथगा इ सामजिक कामू मा हथ बंटे  कॉरी  भवानी दत्त उनियाल ; भवानी दत्त उनियाल जु पैल प्रताप हाई स्कूल मा अध्यपक था  ऊँ तैं भण्डार  को अधीक्षक बणये गे कीर्ति नगर की स्थापना : किर्ती शाह न श्रीनगर का सामणि बिलोली गौं मा कीर्ति नगर की स्थापना करी थै . हरि कृष्ण रतूड़ी : हरि कृष्ण रतूड़ी एक विद्वान् अर इतिहास खुजनेर छया हरि कृष्ण की गढ़वाल का इतिहास, नरेंद्र हिन्दू ल़ौ , गढवाल वर्णन किताब  प्रसिद्ध ह्वेन  दिवा कर शर्मा : दिवाकर शर्मा प्रताप है स्कूल मा मास्टर छौ अर ऐतिहासिक संग्रह कारका रूप मा प्रसिद्ध ह्व़े . रतूड़ी न अपण इतिहास किताब मा दिवा कर की भौत मदद ल़े बद्रीदत्त शर्मा : बद्री दत शर्मा संस्कृत पाठशाला मा मास्टर छौ अर इतिहास को जणगरु थौ मालू पंडित : कुमाऊं से टीरी अयाँ पांडे परिवार मा मालू पंडित बड़ो तांत्रिक छौ अर संस्कृत  पाठशाला मा अध्यापक थौ मगना पंडित : मालू पंडित को नौनु बि बड़ो पंडित ह्व़े हरि कृष्ण रुडोला दौर्गा दत्ती : हरिकृष्ण दौर्गादत्ती एक संस्कृत कवि ( शतश्लोकी रघुवंश , प्रस्ताव पुष्पांजलि , स्तवन स्त्वकावाली ) ; गढ़वाली कवि अर हिंदी का प्रसिद्ध कवि छौ सर्व धर्म सम्मलेन : कीर्ति शाह न  टीरी मा एक सर्व धर्म समेलन उर्या चौ स्वामी रामतीर्थ : कीर्ति शाह स्वामी राम तीर्थ को भगत छौ अर स्वामी जी तैं वैन सर्व धरम सम्मलेन मा जापान भेज, टीरी मा आश्रम  व्यवस्था कॉरी . पैथर स्वामी जी क नौनु मदनमोहन तैं  इंजीनिअर बणणो बान इंग्लैंड बि भ्याज प्रजा मा असंतोष : प्रजा मा बौण नीति जां से गौं वालुं लख्द , घास, आदि क परेशानी होंद गे . कत्ते दें लोखुं न कंजर  वेटर या फोरेस्ट गार्ड ऊँ दगड झगड़ा कॉरी . एक दें कंजर वेटर  की पिटाई क नौबत ऐ गे छे सकलाना  का मुआफी दारूं क अन्याय जारी छौ अर जनता न कथगा दै आन्दोलन कॉरी . आख़री मा मुआफदार्युं कमिश्नर न मुआफी दारूं जुडिसियल अधिकार छीन  देन २५ अप्रैल १९१३ खुणि कीर्ति शाह को इंतकाल ह्व़े अर वै बगत नरेंद्र शाह पन्दरा सालौ छौ References: Courtsy to books of Dr Shiv Prasad Dabral,  Pundit Hari Krishn Raturi, Minyaan Prem Singh (Uttarakhand ka Itihas, History of Garhwal, History of Tihri Garhwal) Copyright @ Bhishm Kukreti, Mumbai

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

  • Core Team
  • Hero Member
  • *******
  • Posts: 40,899
  • Karma: +76/-0
Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #9 on: December 23, 2011, 01:25:57 PM »
गढवाळ का नामी लोक अर ज़ात (मलारी जुग बिटेन अज्युं तलक ) - फड़की -52
         
                                       गढ़वाल के विभूतियाँ व समाज (मलारी  युग से  वर्तमान तक) - भग- 52                                       Great Garhwali Personalities (Malari era to till date ) Part -52                                     Bhishm Kukreti                          टिहरी महाराज नरेंद्र शाह (रा.काल. 1913 -1946  ई. )      जब कीर्ति शाह को इंतकाल ह्व़े त नरेंद्र सिंह सिरफ़ पन्द्र सालौ थौ. राज्यभिषेक को परांत नरेंद्र शाह अजमेर पढ़णो चली गे राणी : नरेंद्र शाह को ब्यौ क्यूँठळ  राजा (हिमाचल) के द्वी नौन्युं दगड ह्व़े ,मतबल - नरेंद्र शाह की कमलेन्दु शाह अर इंदुमती द्वी राणी छे संरक्षण समीति : नरेंद्र शाह क अनुपस्तिथी मा राज काज चल़ाणो एक संरक्ष्ण समीति बौण जैको अध्यक्ष अंग्रेज शैमिअर थौ पैथर मयूर आई. समीति मा हरिकृष्ण रतूड़ी , बह्वानी दत्त उनियाल छा. नरेंद्र की दादी ण राज काज संबाळी चन्द्र मोहन  रतूड़ी को त्यागपत्र  : चन्द्र मोहन रतूड़ी एक काबिल फोरेस्ट कंजर वेटर थौ पण संरक्ष्ण समीति की नीती वै तैं माफिक णि ऐन अर वो त्यागपत्र देकी भैर चले गे सत्य शरण रतूड़ी को त्यागपत्र : चन्द्र मोहन को गाँव को इ सत्य शरण रतूड़ी बागवानी निरीक्षक थौ पण संरक्षक समीति क काम काज को वजे से वो पटियाल राज्य चली गे महायुद्ध मा मिळवाक् (योगदान) : टीरी दरबार न पैलो महायुद्ध मा ब्रिटिश सरकार तैं पुरो मिळवाक् देइ. कीर्ति शाह न एक पलटन ब णे छै वीं पलटन तैं ब्रिटिश हकुमत को   हवाला करे गे दरबान सिंग नेगी : दरबान सिंग नेगी कफाड़तीर, कड़ा कोट ,  पौड़ी  को छौ जै तैं विक्टोरिया क्रोस मील . दरबान सिंग पैलो भारतीय छौ जै तैं लड़ाई मा विक्टोरिया क्रौस शौर्य पदक मील गबर सिंग नेगी : गबर सिंग नेगी (सान्जुर, बमुंड , टीरी ) पैल टीरी महराज को पलटन मा थौ फिर गढ़वाल रायफल मा भर्ती ह्व़े अर वीरगति ह्व़े . गबर सिंग नेगी तैं मोरणो परांत विक्टोरिया क्रोस मेडल  दिए गे तोताराम थपलियाल : पैल सेना मा जजमान ही जांदा छया . तोताराम  थपलियाल (समतुळी, खात्स्युं , पौड़ी ) न बामणु  फ़ौजी की टोली बणे अर ब्रिटिश सरकार न वै तैं वीं बटालियन को सूबेदार बणे दे. अकाळ  : १९१७-१८ मा गढवाल मा बड़ो अन्न  काल  पोड़. युद्ध जौर : १९१६-१९१९ तलक युद्ध जौर (इन्फ़्लुइन्जिया ) ह्व़े अर सैकड़ों मनिख, पशु मोरीन भुव्यव्स्था अर जोध सिंह नेगी : भूव्यव्स्था सुदारणो जोध सिंग नेगी (जु पैल पड़ी मा छौ) तैं रेविन्यु मेम्बर  बणये गे. विशाल कीर्ति का भूत पूर्व  सम्पादक प्रसिद्ध , इमानदार सदा नन्द कुकरेती (ग्वील पौड़ी) तैं भू व्यवस्था का सिरिस्तेदार बणये गे . सदानंद कुकरेती इमानदार मनिख थौ सो वो जादा दिन णि टिक सौकू .जोध सिंग नेगी अर भवानी दत्त उनियाल ओ दगड णि बौं त १९२० मा जोध सिंग नेगी न पड़  छोडि दे हरि कृष्ण रतूड़ी तैं भू व्यवस्था को अधिकारी बणेये गे. पैथर महा नन्द रतूड़ी न यो काम कॉरी. राम प्रसाद डोभाल अभिलेख अधिकारी छौ

म्यूर का शासन :म्यूर को संरक्षण मा य़ी शासन समीति लोग छ्या : १- कुंवर विचित्र शाह - मजिस्ट्रेट २- हरि कृष्ण रतूड़ी - दीवान३- राय बहादुर केशवा नन्द ममगाईं - कंजरवेटर ४- भवानी दत्त उनियाल- सेक्रेटरी                      नरेंद्र  शाह को शासन भवानी दत्त उनियाल तैं दीवान बणये गे कुली बेगार असंतोष : कुली बेगार या कुली बेगार पडत का वाजी से जगा जगा असंतोष राई लछ्म सिंग कठैत की बीरता : रवाईं  परगना को हाकिम लछ्म सिंग ण जब कुली बेगार मा जनता की तर्फ्दारे कॉरी त नरेंद्र शाह रूसे गे अर लछ्म सिंग की जायजाद कुडकी करे गे कमिश्नर की बदोलत कथित पर प्रतिबन्ध हटाये गेन . लछ्म सिंग तैं आज बि जनता याद करदी कुली बेगार खात्मा : १९४१ मा सरकारी तौर पर बेगार पर्था ख़तम करे गे यातायात व्यवस्था मा सुधार करे गे नरेंद्र नगर आधुनिक शहर : नरेंद्र शाह न ऋषिकेश से दस मील दूर एक शहर को निर्माण कौर जु अपण टैम को आधुनिक शहर थौ जख सौब सुविधा छे    मोटर मार्ग : मोटर मार्ग बणोन पर ध्यान दिए गे हजूर कोर्ट :  बड़ो कोर्ट याने हजूर कोर्ट मा राजा अफिक सुणवाई करदो थौ चीफ कोर्ट : टिहरी मा एक चीफ कोर्ट बि छौ जेमा य़ी कारिन्दा छा तीन जज - महेशा नन्द पैन्यूली , नारायण दत्त रतूड़ी अर सुरेशा नन्द नौटियाल ( बी.ये. एल एल बी ) नया का छै सर्कल :टिहरी सर्कल - उमा दत्त डंगवाल अड़ा थली: भैरब दत्त पैन्यूली रवांई: मुंशी करीम खान बाड़ाहाट  - नाग्दत्त रतूड़ी देव प्रयाग - रामानंद उनियाल कीर्ति नगर : प्रहलाद दास बहुखंडी शिक्षा प्रसार : नरेंद्र शाह क राज मा शिक्षा प्रसार बि होई प्राइमरी स्कूलूं  संख्या ६०  तलक पौंची कथगा ई छात्रवृति दिए गेन नरेंद्र शाह न कुंदन सिंग गुसाईं तैं इतिहास मा पी एच डी करणी इंग्लैण्ड (१९२६)  भेजी  पद्मा दत्त रतूड़ी तैं फोरेस्ट्री डिप्लोमा वास्ता इंग्लॅण्ड भेजी पैथर पद्मा दत्त बन विभाग को अधिकारी बौण लैंस डौन विद्यालय तैं ४००० रु, कर्ण प्रयाग विद्यालय तैं ३००० रु दिने कशी हिन्दू विष विद्यालय मा कीर्ति शाह चेयर -इण्डस्ट्रियल केमिस्ट्री ' का वास्ता एक लाख रुपया देन सार्ब्जानिक पुस्तकालय , प्रताप हाई स्कूल तैं इंटर कौलेज बणे . टीरी मा कन्या पाठशाला खोले गे टिहरी  मा कष्ट कला विद्यालय खोले गे  अस्पताल : भौत सा अस्पताल बि खोले गेन  जन संख्या आकलन : जन संख्या आकलन को काम बि शुरू ह्व़े घना नन्द खंडूडी को सम्मान : घना नन्द खंडूडी न तिब्ब्र सीमा विवाद, आदि भौत सा सामजिक काम क्ररीन घना नन्द खंडूडी तैं राजा ण सम्मान दे. घना नन्द खंडूडी ण मुकंदी लाल तैं इंग्लैण्ड जाणो बान ३५००० रु बि  दे छ्या चक्र धर जुयाल : झांझ गौं, सितौनस्युं, पौड़ी ग. को चक्रधर जुयाल सणि भवानी दत्त उनियाल की जगा पर दीवान बणये गे हिमाचलऔ दगड सीमा विवाद सुळजण : चक्रधर जुयाल के साफ़ सख्त ब्थुन हिमाचल सीमा विवाद सुळज  बीर गबर सिंघौ समळऔण मा स्मारक : चंबा मा बीर गबर सिंग स्मारक की स्थापना ह्व़े ग्राम पंचाय्तुं उत्थान : नरेंद्र शाह न गाँव मा पंचायत तैं सुचारू ढंग से काम करणों कोशिश करी    राज्य प्रतिनिधि सभा : पैल पैल त राज्य प्रतिनिधि दिखाणो ढोंग थौ पण पैथर यीं सभ मा २० चुनी क अयन सदस्य ह्वेन अर पन्दरा राजा क नामजद सदस्य ह्वेन शराब बणाण  पर रोक : चक्रधर जुयाल न खौळ म्यालोँ  बगत छोड़िक हौरी समौ मा शराब बणोण पर रोक लगाई मिलसारा से मुक्ति : बौ क परांत जब द्वी झणो मा नि बणदि छे त छुट (तलाक) लिए सक्यांद थौ अर जु ओ द्वी झण दुबर फिर से ब्यौ करण चन्दा छया त ऊँ तैं 'मिलासरा ' कर दीण पड़दो छौ. चक्रधर जुयाल न मिलसारा  कर बन्द कराये .             जनजाग्रती  गढवाली अब भैर जा न बिसे गे छया त याँ से टिहरी गढ़वा ळ मा बि स्वतंत्रता आन्दोलन की सुगबुगाट हों लगे गे छे रवाईं कांड : रवाईं  का लोक  बन व्यवस्था से रुस्यां /नाराज छ्या ऊँन आजाद पंचायत को गठन करी जो चक्रधर जुयालतैं नि सुवाई वैन आन्दोलान्कार्युं तैं पाठ पढ़ाणो काम करी. ये मा कत्ति दें लोकुं पर बंदूक चलाये गेअर फिर रवाईं काण्ड मा गोली चलये गे, लोखुं तैं प्रताड़ित करे गे . कथगा इ लोकुं जान गे

विशम्बर दत्त चंदोला तैं जेल : विश्वम्बर दत्त च्नादोला हिन्दू समाचार समाचार पत्र छापडा छौ अर वैन रवाईं काण्ड कि खबर अखबार मा क्या छाप कि चक्रधर जुयाल तैं नागँवार लगे गेचक्रधर जुयाल न धन, अर कुन्नेती का बल पर चंदोला तैं देहरादून का न्यायलय मा केश चलाये. चंदोला तैं जेल ह्व़े.

तारा दत्त गैरोला पर अभियोग: एक दें टिहरी गढ़वाळ को नमी वकील तारा दत्त गैरोला ( सदयी , मिमोर ऑफ गढ़वाल को लिख्वार) न टिहरी प्रशाशन की बड़ी काट करी त चक्रधर जुयाल न गैरोला पर मुकद्दमा कॉरी दे जखमा चक्रधर जुयाल हारी गे अर जुयाल तैं  गैरोलातैं 'हर्जा-खर्चा' दीण पोड़

तकाबी अर बकाया कर माफ़ी : नरेंद्र शाह क बगत 'तकाबी अर 'बकाया' कर की माफ़ी बि ह्व़े

ऋषिकेश कीर्तिनगर मोटर मार्ग
: चक्रधर जुयाल की रूचि को कारण ऋषिकेश-कीर्तिनगर मोटर मार्ग अर टिहरी मोटर मार्ग बौण

चक्रधर जुयाल को रिटायर हूण : चक्रधर जुयाल १९३९ मा रिटायर ह्व़े अर वैकी जगा पर मौली चन्द्र शर्मा तैं फेडरल सेक्रेटरी बणये गे टिहरी रियासत को दुसर विश्व जुद्ध मा मिळवाक् : टिहरी रियासत न दुसर महायुद्ध मा ब्रिटिश राजके बड़ी मदद करी अर सैकड़ों जावन ब्रिटिश सेना मा भारती कराये गेन

विद्या धर जुयाल तैं सम्मान :  ब्रिटिश सेना मा लेफ्टिनेंट विद्याधर जुयाल तैं अफ्रिका मा साहसपूर्ण काम का एवज मा डिस्टिंगविश्ड सर्विस आर्डर की उपाधि से सम्मानित करे गे

 

Sitemap 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22