Author Topic: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date  (Read 14745 times)

Bhishma Kukreti

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Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #20 on: January 24, 2013, 01:40:36 PM »
गढवाळ का नामी गिरामी लोक (मलारी जुग बिटेन अब तलक ) : फडक -14




गढ़वाल की विभूतियाँ (मलारी युग से वर्तमान तक ) : भाग 14


Great Garhwali Personalities (Malari Era till Date): Part 14


भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti )

 

( ये लेख कु उद्देश्य नवाड़ी साख/छिंवाळी/न्यू जनरेशन तैं गढवाळी भाषा मां अपण ऊँ लोकुं तैं याद कराण जौंक कारण आज गढवाळ च , जौंक वजै से आज हम तैं घमंड च /गर्व च )
 




देव प्रयाग का वर्मन अर वर्धन रज्जा ( 601-700)

डा डबराल न पलेठा क शिलालेख अर तालेश्वर (अल्मोड़ा ) का भीड़ा (दीवार) का अभिलेखुं का बूता पर ल्याख बल सातवीं सदी मा पर्वताकार राज्य की स्थापना ह्व़े होली

पलेठा राज का रज्जा

 पलेठा कु राज टिहरी गढवाल मा देवप्रयाग का न्याड ध्वार को क्षेत्र छौ याने उत्तराखंड को दक्षिण पच्छिमी क्षेत्र पलेठा मा आन्द छया

आदिवर्मन : पलेठा राज कु संस्थापक आदिवर्मन छौ अर हर्ष को समौ पर ही आदिवर्मन न उत्तराखंड को दक्षिण पच्छिमी क्षेत्र मा अपण राज शुरू करी थौ

परमभट्टारक परमेश्वर कल्याणवर्मन : आदिवर्मन को नौनु परमभट्टारक परमेश्वर कल्याणवर्मन थौ

आदित्य वर्धन : परमभट्टारक परमेश्वर कल्याणवर्मन क पैथर वैकु नौनु आदित्य वर्मन पलेठा कु रज्जा ह्व़े

करक वर्धन : कारक वर्धन पलेठा राज्य कु आख़री राजा समजे जांद यू आदित्य वर्मन कु दौहित्र माने जांद




Reference : Dr Shiv Prasad Dabral , Uttarakhand ka Itihas - 3 (History of Garhwal Uttarakhand , )

(History of Early Garhwal, History of Early Kumaun )

 

...... बकै 15 वां खंड मा बाँचो

To be continued in 15th part







गढवाळ का नामी गिरामी लोक (मलारी जुग बिटेन अब तलक ) : फडक -15




गढ़वाल की विभूतियाँ (मलारी युग से वर्तमान तक ) : भाग 15


Great Garhwali Personalities (Malari Era till Date): Part 15


भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti )

 

( ये लेख कु उद्देश्य नवाड़ी साख/छिंवाळी/न्यू जनरेशन तैं गढवाळी भाषा मां अपण ऊँ लोकुं तैं याद कराण जौंक कारण आज गढवाळ च , जौंक वजै से आज हम तैं घमंड च /गर्व च )
 


पर्वताकर का पौरव -राजवंश ( 647- 735 AD)



अल्मोड़ा क तलेश्वरी मा एक पुंगड़औ भीड़ा से प्राप्त ताम्रपत्र से मालूम होंद बल कत्युरी राजाओं से पैली उत्तराखंड पर पौरव राजाओं कु राज छौ . पुरवा या पौरव राजवंश सोम दिवाकर वंशी माणदन अर ताम्रपत्र मा सोम वंशी . पौरव वंश तैं पुरवा का वंशज बताये जांद

विष्णुवर्मन: इन लगद विष्णुवर्मन हर्ष को समौ पर ब्रह्मपुरी को शाषक थौ

वृषभ वर्मन प्रथम: हर्ष को समौ पर ब्रह्मपुरी को शाषक थौ

परमभट्टारक महाराजाधिराज अग्निवर्मन: वृषभ वर्मन को नौनु परमभट्टारक महाराजाधिराज अग्निवर्मन ह्व़े. परमभट्टारक महाराजाधिराज अग्निवर्मन गो ब्राह्मण हितैषी थौ . हूण अर कुछ-कुछ बुद्ध धर्म को कारण वर्ण शंकर व्यवस्था कुमाऊं अर गढवाल मा बि सौरी/फ़ैली गे छे . अर परमभट्टारक महाराजाधिराज अग्निवर्मन वर्ण शंकर व्यवस्था तैं पुरी तरां खतम कार . बैरी विणाश मा परमभट्टारक महाराजाधिराज अग्निवर्मन ज्युंरा (यमराज) क रूप मा माणे जान्द .
 
परमभट्टारक महाराजाधिराज द्युति वर्मन या द्विज वर्मन : परमभट्टारक महाराजाधिराज अग्निवर्मन कु नौनु द्विज वर्मन थौ

विष्णुवर्मन दुसरू : सैत च परमभट्टारक महाराजाधिराज द्युति वर्मन/द्विज वर्मन कु नौनु विष्णुवर्मन दुसरू, पौरव राज को आखरी रज्जा छौ . वो मयल़ू (विनय), भड़ (बीर,शौर्यशाली ) धीरू, गम्भीर छौ

पौरव -राजवंश का मंत्री देवद्रोणयधिकृतएकास्वामिन: तालेश्वर ताम्रपत्र कु हिसाब से एकास्वामिन पौरव बंश कु मंत्री छौ अर वैकी पदवी देवद्रोणयधिकृत छे . एकास्वमिन कु समौ क पता नी च.

पौरव -राजवंश का मंत्री देवद्रोणयधिकृतमारीपतशर्मन : तालेश्वर ताम्रपत्र कु हिसाब से मारीपतशर्मन पौरव बंश कु मंत्री छौ अर वैकी पदवी देवद्रोणयधिकृत छे
 
आमात्य भद्र्विष्णु: आमात्य भद्र्विष्णु पौरव बंश को एक ख़ास मंत्री छौ

 




Reference : Dr Shiv Prasad Dabral , Uttarakhand ka Itihas - 3 (History of Garhwal Uttarakhand , )

(History of Early Garhwal, History of Early Kumaun )

 

...... बकै 16 वां खंड मा बाँचो

To be continued in 16th part





गढवाळ का नामी गिरामी लोक (मलारी जुग बिटेन अब तलक ) : फडक -16




गढ़वाल की विभूतियाँ (मलारी युग से वर्तमान तक ) : भाग 16


Great Garhwali Personalities (Malari Era till Date): Part 16


भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti )

 

( ये लेख कु उद्देश्य नवाड़ी साख/छिंवाळी/न्यू जनरेशन तैं गढवाळी भाषा मां अपण ऊँ लोकुं तैं याद कराण जौंक कारण आज गढवाळ च , जौंक वजै से आज हम तैं घमंड च /गर्व च )
 


Garhwali and Kumauni Languages Form in Paurav Era ( 647- 735 AD)

With the aid of Copper Plates found in Taleshwar, Almoda, Dr Shiv Prasad Dabral concludes tha there was certainly modified form of Garhwali and Kumauni languages than the older one Khas-and Kanaiti mixed Kumauni and Garhwali. Dr Dabral states that the language was Deshbhasha of common people which later on developed into refined Garhwali and Kumauni languages ( Uttarakhand ka Rajnaitik v Sanskritik Itihas -3, pp 420-421)

As is the tendency in present time, the rulars (Paurav Vanshi) transformed the original name into Sanskritized names as today, most of the goverment hordings are either in Hindi or in English and the names of villages are changed as per Hindi /English grammar or phonology than Kumauni or Garhwali.

Dr Dabral states that

" पौरव वंश के समय ग्रामों व खेतों के नाम समकालीन देशभाषा में थे. किन्तु पौरव शासनों (के ताम्रपत्रों ) में देश भाषा के नामों को संस्कृत रूप देकर ताम्रपत्रों में अंकित किया गया , यथा:

डा डबराल को बुलण छ बल पर्वताकर पौरव राज वन्श्युं क समौ पर कुमौं अर गढवाळ मा देशभाषा मा बचळयान्द छया पण राजाऊं अर बड़ा लोखुंन गढवाळी कुमाउनी का गाँव तैं ताम्रपत्रों मा संस्कृत रूप देकी अंकित कार अर या प्रवृति आज हिंदी या अंगरेजी सरकारी अधिसूचना मा बि दिखेंद जब गौं क नाम बदली जान्दन .

डा शिव प्रसाद डबराल न य़ी दिरिषटान्त दिने :

ताम्रपत्रों मा गाऊं नाम( 647- 735 AD) असली देशी भाषा मा गाऊं/पुंगड़/खेत का नाम

उदुम्बर बास ------------------------ ------------------------------------------------------ गोविलबास

कपिलगर्ता ------------------------------------------------------------------------------कपिल्यागाड

कोल्लपुरी ------------------------------------------------------------------------------ कोलिगांव

खंडाकप्ल्लिका ------------------------------------------------------------------------------ खंड गाऊं

खट्टल्लिका ---------------------------------------------------------------------------- खाटळी

खोहिलका ----------------------------------------------------------------------------- खोळी

गोहट्टबाटक ------------------------------------------------------------------------------- गोरबाट

चम्पक -----------------------------------------------------------------------------------चम्पा

चंदुलाकपाली ------------------------------------------------------------------------------------ चंडा पाली

छिद्र्गर्ता ------------------------------------------------------------------------------------ उड़्यार

जयभट्टपल्लिका -------------------------------------------------------------------------------------- जैगाँ भट्टगाँ

जम्बुसालिका --------------------------------------------------------------------------------------- जामुण सारी

डिणडिका ------------------------------------------------------------------------------------------ डिंडा

डुभाया ---------------------------------------------------------------------------------------------- डोभ

तोली ----------------------------------------------------------------------------------------------- तोळी

तापल्ली ------------------------------------------------------------------------------------------------ थापळी

दीपपुर ------------------------------------------------------------------------------------------------- द्यूल़ा

दूणणा ---------------------------------------------------------------------------------------------------- दूणी

देवखल ----------------------------------------------------------------------------------------------------- दिख्य्त

द्रोणी -------------------------------------------------------------------------------------------------------- दूण , दून

निम्बसारी --------------------------------------------------------------------------------------------------- निमसारी
 
पल्ली ---------------------------------------------------------------------------------------------------- पाल़ी

बुरासिका ------------------------------------------------------------------------------------------------- बुरांसी

बृद्धतर पाल्लिका ----------------------------------------------------------------------------------------- बड़ी पाली

बंजाली -------------------------------------------------------------------------------------------------- बंजागौं

भट्टपल्लिका --------------------------------------------------------------------------------------------- भट्ट गाँ

भूतप्ल्लिका ---------------------------------------------------------------------------------------------- भूत गाँ

मालवक क्षेत्र ------------------------------------------------------------------------------------------- मालूंखेत

रजक्स्थल --------------------------------------------------------------------------------------------- धोबीघाट

लवणोंदक -------------------------------------------------------------------------------------------- लुणियासोत

सेम्मक क्षेत्र ---------------------------------------------------------------------------------------- सीम

सेम्महिका ----------------------------------------------------------------------------------------- सिमलगा

गढवा ळी अर कुमाउनी भाषा का जणगरुं /विद्वानुं तैं भाषाओं क पुराण/ इतिहास लिखद दें इन बातों ध्यान रखण जरोरी छ .





Reference : Dr Shiv Prasad Dabral , Uttarakhand ka Itihas - 3 (History of Garhwal Uttarakhand , )

(History of Early Garhwal, History of Early Kumaun )
 


...... बकै 17 वां खंड मा बाँचो

To be continued in 17 th part

Bhishma Kukreti

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Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #21 on: January 24, 2013, 01:43:02 PM »
  Great Jounalists/Editors of Garhwal - 3     


 

गढवाळ का नामी लोक अर ज़ात (मलारी जुग बिटेन अज्युं तलक ) - फड़की -55


गढ़वाल के विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक) - भाग - 55



Great Garhwali Personalities (Malari era to till date ) Part -54


           Bhishm Kukreti

 

गढ़वाळ का नामी-गिरामी पत्रकार/संपादक -3

                             

भग्यान /स्व. परिपूर्णा नन्द पैन्यूली (छोळ , टिहरी, १९२६-स्वर्गीय) भग्यान/स्व. परिपूर्णा नन्द पैन्यूली

टिहरी रियासत क एक बागी,स्वतंत्रता सेनानी, लिखवार, सांसद  ,

पत्रकार अर संपादक छया भात स टैम पर राष्ट्रीय अर स्थानीय पत्रों मा खबर दीन्दा छया

 भौत समौ तलक 'हिमानी' मासिक क प्रकाशन अर संपादन .

 

भग्यान/स्व  भगवती चरण निर्मोही (सिराल़ा , कंडवाल स्यूं , १९११-स्वर्गीय) : टिहरी रियासत्त

का बागी, द्वी दें विधयाक, गढवाळी का कवि,भग्यान भगवती चरण निर्मोही 'लैंसडाउन बिटेन

'लैंसडाउन बिटेन छपेण  वाळ हफ्तावार 'उत्तर भारत' अर हरिद्वार बिटेन छपण  वाळ मासिक 'तीर्थ संदेस'

मा सह-संपादक रैन 

भग्यान /स्व.मधुर (कुकरेती) शास्त्री(चंपा, अजमेर, पौ.ग.१९०५-स्वर्गीय) भग्यान   मधुर शास्त्री स्वतंत्रता सेनानी .

लिखवार,  पत्रकार अर संपादक छया. मिलाप, अर्जुन, शक्ति, गढ़वाळी का खबरची रैन अर 'समृद्ध भारत'

हफ्तावार पत्र का संपादक रैन

भग्यान/स्व. मस्तराम बलूणी (देव बडी, डबराल्स्युं  १९५०-भग्यान ) :  भग्यान मस्तराम बलूणी

क दियां लेख अर खबर पंजाब केसरी, अमर उजाला, हिंदुस्तान, कीर्ति मा छपदा छया.

'सीमान्त वार्ता' साप्ताहिक का भग्यान मस्तराम बलूणी कार्यालय संपादक रैन फिर

कोटद्वार मा 'हिसाब किताब' हफ्तावार का संपादन , प्रकाशन कार . एक टैम

पर हिसाब किताब भ्रष्टाचार अर भ्रस्टाचारयूँ पल खुलण मा अग्वाड़ी को  पेपर माने जांद छौ.

भग्यान/स्व डा. महावीर प्रसाद गैरोला (सतेश्वर  मोहल्ला, टिहरी १९२२-भग्यान) गढवाली, अंग्रेजी, हिंदी

क उपन्यासकार, कथाकार, कवि , दार्शनिक भग्यान डा. महावीर प्रसाद गैरोला न 'नैतिकी' मासिक

क प्रकाशन अर संपादन सन १९६६ बिटेन शुरू कार पण कंळदारौ ९पैस, धन) समस्या से बन्द करण पोड़. 

भग्यान/स्व. रमा प्रसाद घिलडियाळ (बड़ेथ, मल्ला ढान्गु, मूल गां डांग , १९११-भग्यान)  हिंदी

क कथाकार, उपन्यासकार, बामपंथी साहित्य का पुरोधा , घडवा ळी भाषा का अभिनव समर्थक,

 भग्यान/स्व. रमा प्रसाद घिलडियाळ टाइम्स इंडिया, स्टेट्समैन का अंग्रेजी भाषाई संवाददाता रैन अर

फिर अमृत बाजार पत्रिका का संपदक बि रैन. ''कर्मयोग'मासिक अर 'भविष्य' साप्ताहिक मा

यशपाल जि क दगड सम्पादन कार . 'नया साहित्य'पत्रिका क सफल संपादन से बडी प्रसिधी.

भग्यान/स्व. राधा कृष्ण कुकरेती (तल्ला नौगाँव, उदयपुर, पौ.ग. १९३५- भग्यान) मार्क्सवाद- बामपंथ को धड्वे,

हिंदी का पर्वतीय ज्वीवन  का कथाकार भग्यान राधा कृष्ण कुकरेती न बीस सालुं से बि जादा दिन तलक

देहरादून बिटेन 'नया जमाना  साप्ताहिक' को प्रकाशन अर संपादन कार.   

भग्यान/स्व राधा कृष्ण वैष्णव(नन्दप्रयाग, १९२९-भग्यान)  भग्यान राधा कृष्ण वैष्णव हिन्दुस्तान टाइम्स अर भौत सा

 समाचार पत्रों मा प्रखर संवाददाता रैन. गढवाळ  का पत्रों मा भग्यान राधा कृष्ण वैष्णव  बि खबर दीन्दा छया.

 



Great Jounalists/Editors of Garhwal to be continued ....

 

Copyright@ Bhishm Kukreti




 

 

गढवाळ का नामी लोक अर ज़ात (मलारी जुग बिटेन अज्युं तलक ) - फड़की -55
       

गढ़वाल के विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक) - भाग - 55





Great Garhwali Personalities (Malari era to till date ) Part -54


                                Bhishm Kukreti




 

                        गढ़वाळ का नामी-गिरामी  पत्रकार/संपादक -2

                           Great Jounalists/Editors of Garhwal - 2 

 

                          सौ साल का जवान कुंवर सिंह नेगी "कर्मठ' : गढ़वाळ अर गढ़वाळी प्रति समर्पित जुझारू व्यक्तित्व

 

               सौ साल का कुंवर सिंह नेगी क  स्वास्थ्य, प्रतिभा अर  व्यक्तित्व बिलखणि च. कर्मठ जी एक स्वार्थहीन सामाजिक कार्यकर्ता.

 गढवाळी साहित्य का प्रकाशक , लगन शील लेखक अर जीवट का संपादक छन. अच्काल इन व्यक्तित्व को सर्वथा

अकाळ  पड्यूँ च .

 कुंवर सिंह कर्मठ को जनम सन उन्नीस सौ बारा मा पांग गौं , तहसील पौड़ी मा ह्व़े छौ.

                   पैल पैल १९३६ मा पैमैस क टैम पर पेपर कु ठेका लीण से कुंवर सिंह उर्फ़ 'कर्मठ' जी 'हिल पेपर कोंट्रेकटर ' का

नाम से प्रसिद्ध ह्वेन. कुछ समौ परांत कर्मठ जी न कालेश्वर प्रेस की स्थापना कार जख बिटेन भक्त दर्शन जी

अर भैरव दत्त धुलिया जे क संपादकत्व  मा  'कर्मभूमि' साप्ताहिक छ्पदो थौ. 

      भक्त दर्शन जी अर धुलिया जीक जेल जाण मा 'कर्मभूमि' क संपादन को काम कर्मठ जी न सम्बाळ.

                  पैथर कुंवर सिंग नेगी जी कालेश्वर प्रेस तैं कोटद्वार लै  गेन. सनै सनै कौरिक कालेश्वर प्रेस

कोटद्वार मा छपण वाळ  पत्र-पत्रिकाओं   जन कि कर्मभूमि, सत्यपथ, हितैषी , क्षत्रिय वीर,

देव भूमि, हिमालय की ललकार, अर 'आवाज' क मुद्रक बौणि गे . लैंसडौन अर श्रीनगर मा बि कालेश्वर प्रेस के

ब्रांच रैन .

                   सन १९७६ मा कर्मठ जीन 'गढ़ गौरव मासिक' पत्रिका क प्रकाशन अर सपादन शुरू का. 'गढ़ गौरव '

पत्रिका सन १९७६ बिटेन आज तक  छपेणि रौंदी .

                  कर्मठ जी न गढवाली कथामाला , जैलाल वर्मा क 'गढवाली शब्दकोश, वेताल पचीसी , अर

अदित्य्राम दुधपूड़ी  क भौत सी किताब क आलावा ग्ध्वालियों का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान,

डा पीताम्बर दत्त बडथ्वाळ क साहित्यिक जीवनी जन किताबुं प्रकाशन कार .

                  भौत सी संस्थाओं न सौ साल कु जवान कुंवर सिंह नेगी क सम्मान कार. 

   कुंवर सिंह नेगी 'कर्मठ' जी कोटद्वार मा रौंदन .

 


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गढवाळ का नामी लोक अर ज़ात (मलारी जुग बिटेन अज्युं तलक ) - फड़की -54
       

                  गढ़वाल के विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक) - भाग - 54





                     Great Garhwali Personalities (Malari era to till date ) Part -54


                           Bhishm Kukreti



            गढ़वाळ  का भगवान्(स्वर्गीय)  पत्रकार/संपादक- १

                Great Jounalists/Editors of Garhwal of Past - 1

           गढवाळ पत्रकारिता क मामला मा सुभागी च . जब बिटेन भारत अर गढ़वाल मा

अखबार छपेण बिसेन गढ़वाळ की धरती मा नामी  गिरामी  पत्रकार/संपादक पैदा ह्वेन .

१- नागेन्द्र उनियाल (असवाळस्यूं, पौ.ग,- स्वर्गवास-१९८१) : इन उना नौकरी क बाद 'धडकता

पहाड़ ' निकाळ . फिर कोटद्वार बिटेन 'जयंत' आठ्वाडा (साप्ताहिक) को प्रकाशन, संपादन  शुरू कार .
 
तेज तर्रार लिखणो बान प्रसिद्ध.

२- श्याम चरण काला (सुमाडी, पौ.ग,१९१०-१९८४):  काला जी टाइम्स ऑफ़ इंडिया , भारत का भौत का

रोजानौ  अखब़ारूं अर भैर देसु अखब़ारूं रैबार्या/ खबरची/संवाददाता रैन. भारतीय श्रमजीवी पत्रकार सम्मलेन,

योधा मा सम्मानित. जब  'श्रमजीवी पत्रकारूं  बान कोलोनी बौण त कोलोनी नाम

'श्यामाचरण  काला नगर' धरे गे.

३- सदा नन्द कुकरेती (ग्वील, मल्ला ढानगु, पौ.  १८८६-१९३७): पैल टीरी रियासत मा काम कार पण उख घूसखोरी

रास नि आये त पौड़ी आयें अर सन १९१३-१९१५ तक 'विशाल कीर्ति' का संपादन कार. लिखण मा चुटीली शैली

अर व्यंगात्मक ब्युंत का बान प्रसिद्ध. अख्बराऊ संपादकत्व मा अंग्रेजी हकुमत से झगड़ा बि ह्व़े. 

४- टेक चंद गुप्ता (देहरादून) : स्वतंत्रता से पैल 'देहरा पत्रिका' क संपादक रैन .

 

५-संपादक शिरोमणि विश्वम्बर दत्त चंदोला (थापळी,पौ.ग. १८७९ -१९७०) : कुछ दिन फ़ौजी दफ्तर मा

काम कार अर फिर १९०५ से 'गढवाळी पत्रिका' पत्रिका क संपादन अर प्रकाशन शुरू कार. टिहरी रियासत क
 
 रवाईं  कांड खबर छाप ण पर जेल (१९३३-१९३४) .

 

६- त्र्यम्बक चंदोला : पैल 'गढ़वाळी' हिंदी  साप्ताहिक का सह संपादक रैन फिर अंग्रेजी अखबार 'हिंदुस्तान टाइम्स '

 का ताउम्र संवाददाता रैन

७ ब्रज भूषण ( देहरादून १९१३-१९७७) ; स्वतंत्रता  सेनानी, कवि न साप्ताहिक 'दून घाटी' क संपादन कार .

 

८- व्याखान वाचस्पति विश्वम्बर  दत्त देवरानी (जेठो गाँव  पैनो); मालवीय जे क सेक्रेटरी संतान धर्म का प्रचारी बि छया .

अफ्रीका मा ऊंको बड़ो सम्मान थौ.  देवरानी जी न डिल्ली मा 'कर्मयोगी' क सम्पादन कार. ये लेखक तैं

अफ्रिका मा बस्यां गुजरात्युं द्वारा गुजराती मा छप्युं पम्फलेट दिख णो सौभाग्य बि हुयुं च जख मा

'महामहोपदेसक ' '  विश्वम्बर दत्त देवरानी क अफ्रिका मा प्रोग्राम क ब्यौरा च.

 

९- स्व दया नन्द थपलियाल (खैड़, पौ.ग.मावाळस्यूं) अंग्रेजी का पत्रकार जौन 'कोम्म्र्स एंड इंडस्ट्री ' अर 'थौट' क

संपादन बिभाग मा काम कार

१०- दामोदर प्रसाद थपलियाल (पालकोट, खात्स्युं, टि.ग, १९२३-१९७७) : गढवाली क साहित्यकार दामोदर प्रसाद

थपलियाळ न गढवाळी भाषा की 'फ्यूं ळी ' पत्रिका क संपादन कार .या पत्रिका धनाभाव से बन्द ह्व़े

 
 
११-महेशा नन्द थपलियाळ (टोलू, मन्यार स्यूं, पौ.ग. १९०१-१९६९) मेरठ बिटेन 'ह्रदय' हफ्तावार  अर 'आशा' मैनावार

पत्रिकाओं संपादन अर फिर पौड़ी बिटेन 'उत्तर भारत' एवम लैंसडाउन बिटेन 'नव भारत को संपादन

 

१२- देवकीनंदन ध्यानी (जखळ , सल्ट, अल्मोड़ा  , १९०७-१९३६ ); कवि देवकीनंदन न मुरादाबाद बिटेन 'विजय',

हल्द्वानी अर  पौड़ी बिटेन 'स्वर्ग भूमि' प्रकाशन अर संपादन 

 

१३- दयाधर धौल़ाखंडी (डुमैला, खाटली, पौ ग.  १९१९-१९४९): गढ़वाल साहित्य मंडल का कर्कर्ता अर

'गिरीश' पत्रिका डिल्ली क संपादक मंडल का सदस्य

 

१४-कोतवाल सिंग नेगी (कांडई , पौ. १९००-१९४८) कोतवाल सिंग जी न कानपूर बिटेन 'हिलमन' अर

पौड़ी बिटेन' क्षत्रिय वीर ' को संपादन कार

 

१५- गोविन्द सिंह नेगी ( दाल ढुंग, बडीयार गढ़ , टि.ग १९२८-१९७१) :  कति समाचार पत्रों मा संवाददाता रैन

'जीवन-पानी' अर 'दून अंचल ' का संपादन कार

 

१६- जोध सिंह नेगी (सुला, अस्वाल्स्युं, पौ.ग.१८६३-१९२५) ' क्षत्रिय वीर ' क संस्थापक

 

१७- प्रताप सिंह नेगी (नेग्याणा, गग्वाड़स्यूं ,पौ., १८७२-१९३५): 'क्षत्रिय वीर ' का संपादक अर प्रकाशक

 

१८- श्याम चन्द्र नेगी (बेलग्राम, अठुर, टि.ग १९१२-१९८२): अंग्रेजी समाचार पत्रुं  संवाददाता .

'नोर्दर्न टाइम्स ' का संदन बि कार

 

१९-महान संपादक  गिरिजा दत्त नैथाणी (नैथाणा ,मन्यार्स्युं , पौ. १८७२ -१९२७) गढवाळ   क्षेत्र का पैला

पत्रकार अर संपादक  १९०२-१९०४ तक ' गढ़वाल समाचार' (पैल लैंसडाउन अर फिर कोटद्वार ) का सम्पादन अर प्रकाशन.

१९०५-१९१० तक देहरादून  बिटेन 'गढवाली 'माववार क संपादन.

फिर दुगड्डा से '  गढ़वाल समाचार' (१९१२-१९१४० तक प्रकाशन अर संपादन.

फिर देहरादून क 'गढवाली' हफ्तावार पत्रिका क संपादन (१९१५-१९१६)

आखिरैं 'पुरुषार्थ' मासिक क प्रकाशन अर संपादन  (दुगड्डा  अर नैथाना ).

 

२०-मायादत्त नैथानी ( नैथान , मृत्यु १९७२) मुंबई का अंग्रेजी समाचार पत्रुं संवाददाता अर

सम्पादकीय मंडल सदस्य

 

२१-सत्यपाल पांधी (अमृतसर १९२३-१९८१): मस्सुरी मा रौंदा छा. कत्ति अंग्रेजी समाचार पत्रुं  मा

संवाददाता . मसूरी बिटेन अंग्रेजी साप्ताहिक 'मसूरी टाइम्स' को  संपादन कार .

फिर मसूरी बिटेन १९४९ मा,  अंग्रेजी साप्ताहिक 'हिमाचल टाइम्स' का प्रकाशन अर संपादन शुरू कार.

१९५३ मा हिंदी संस्करण शुरू. १९६९ मा ये पत्र क नाम 'हिमालय टाइम्स कार. १९६९ बिटेन दैनिक

अखबार 'हिमालय टाइम्स'  शुरू कार . १९७० बिटेन शिमला संस्करण शुरू.

उच्चस्तरीय तिमासी ' पेट्रोलियम एशिया' क प्रकाशन अर संपादन.

 

२२- जंगीलाल शाह 'श्रीबंधू' (चमोली, १९१४-१९८५ ): पत्रकार अर साप्ताहिक 'देवभूमि ' प्रकाशन मा अहम् भूमिका.

 

२३-अमीर चंद बम्बवाल (पेशावर , १८८६-१९७२) स्वतन्त्रता सेनानी . उर्दू अर अंग्रेजी का ज्ञानता. १९०५ मा पेशावर

बिटेन 'फ्रंटियर एडवोकेट' शुरू कार . १९०९--१९१० तक इलाहाबाद मा स्वराज' का संपादक.१९२८ मा फिर फ्रंतिया एडवोकेट

शुरू. १९३२ मा पश्तो भाषा मा पत्रिका प्रकाशन . पेशवर बिटेन 'अफगान' 'खुदाई खिदमतगार' अर द्विबशी फ्रंटियर

मेल' का प्रकाशन अर संपादन. 

भारत बिगल़ेणो परांत  देहरादून मा निवास अर फिर अंग्रेजी, हिंदी मा 'फ्रंटियर मेल' को प्रकाशन संपादन

 

२४- सतेन्द्र सिंह भंडारी (चौड़ीख , पौ.ग.स्वर्गवास - १९८३): डिल्ली मा फ्री लांसर जौर्नालिस्ट रैन.

१९६९ बिटेन पौड़ी बिटेन 'पौड़ी टाइम्स ' का संपादन अर प्रकाशन

 

२५-हुलास वर्मा (बिज्नौर, १८८७ -१९६०) देहरादून बिटेन पाक्षिक 'स्वराज्य सन्देश' क प्रकाशन

 

२६- स्वामी विचारानंद (प्रयाग,१९४०मा इहलोक वास  ) 'साप्ताहिक 'अभय' क संपादन, प्रकाशन.

 

२७-ठाकुर  चन्दन सिंह (1886 -१९६८ ( देहरादून मा 'नोर्दन टाइम्स' अर नोर्दन स्टार ' का

संपादन . फिर 'गोरखा संसार' अर स्वतंत्र नेपाली' क संपादन

 

२८- शहीद श्री देव सुमन (१९१५-१९४४) श्रीदेव सुमन न डिल्ली क साप्ताहिक 'हिंदु अर अंग्रेजी साप्ताहिक

'धर्म राज्य' क सम्पादकीय बिभाग मा काम करी

 
 
२९- कृपाराम मिश्र 'मनहर'  (सरूड़ा, १९०२-१९७५ ): गढ़ देश (१९२९-१९३०) को  प्रकाशन संपादन.

१९३४ मा फिर से प्रकाशन शुरू . १९४० मा साप्ताहिक 'सन्देश' को प्रकाशन शुरू पण जेल जाण से बंद.

 

३०-  हरिराम मिश्र (१९१८-१९८०) 'सन्देश' का सहकारी संपादक. १९५८ मा 'हिमालय की ललकार'.

हरिराम मिश्र 'चंचल' एक ओजस्वी पत्रकार छया.

 

३१- प्रताप सिंह नेगी (ढौरि, डबराल स्यूं, पौ.१८९७ -१९८०)स्वतंत्रता सेनानी , राजनीतिग्य, प्रताप सिंह नेगी अर

ज्योतिप्रसाद महेश्वरी न एक साप्ताहिक पत्र 'सन्देश' (१९३७) स्वतन्त्रता आन्दोलन तैं सब्बळ दीणो बान

शुरू कार.

 

३२- नरेंद्र सिंह भंडारी (जौरासी, चमोली, १९२०-१९८६) राजनैतिग्य लखनऊ मा 'कोंग्रेसी अखबार 'नया भारत' का संपादन कार

 

३३- प्रसिद्ध पत्रकार गोविन्द प्रसाद नौटियाल (नन्द प्रायद, चमोली,१९०१-१९८६(: अंग्रेजी अखब़ारूं जन की टाइम्स इंडिया,

स्टेट्स मैन , लीडर , हेराल्ड, हिंदुस्तान टाइम्स आदि का संवाददाता.

 

३४- शहीद उमेश डोभाल (सिरोली, इडवाळस्यूं, पौ.ग.१९५२-१९८८) बिजनौर टाइम्स, नव भारत टाइम्स, अमर उजाल़ा

आदि मा संवाददाता .

खोजी पत्रकारिता क वजे से शराब माफिया द्वारा  १९८८ मा ह्त्या

 

३५-संपादकाचार्य भैरव दत्त धुलिया (मदनपुर पौ.ग. , १९०१-१९८८): स्वतंत्रता सेनानी, विधयक,

जब 'कर्मभूमि' साप्ताहिक को जनम ह्व़े (लैंसडाउन १९३९) धुलिया जी अर भक्त दर्शन दुई संपादक छया .

फिर 'कर्म भूमि '  कोटद्वार आई अर १९८६ तलक भैरव दत्त धुलिया क संपादकत्व मा निरंतर छपणी रै

 

३६ पत्रकारिता का युग पुरुष ललिता प्रसाद नैथाणी (नैथाना , १९१३- १९८८) : पैल 'कर्मभूमि' क

संपादकमंडल मा काम कार. फिर 'सत्यपथ (१९५६) को प्रकाशन शुरू कार. सत्यपथ गढ़वाल को

नामी गिरामी, राष्ट्रवादी पत्र छौ 

 

३७- समाजसेवी, राज्नैतिग्य राम प्रसाद बहुगुणा (चमोली, १९२०-१९९०) १९५३ बिटेन साप्ताहिक 'देव भिमी' को प्रकाशन अर संपादन.

यू साप्ताहिक उत्तरी गढ़वाळ को बड़ो मशहूर  पत्र थौ.

 

३८- आचार्य गोपेश्वर कोठियाल (कूणजी . टि.ग.१९०९ -१९९९) युगवाणी का संपादक, प्रकाशक आचार्य गोपेश्वर जी '

युगवाणी' तैं शुरू करण वळ अर ये साप्ताहिक

तैं निरंतर चलाण वाळ छया. १९४७ बिटेन युगवाणी निरंतर छपेणी राई.  अब युगवाणी मासिक पत्र च

 

३९ धर्मानंद सेमवाल (रुद्रप्रयाग, १९५३-२००० ) धर्मानंद सेमवाल न पैल 'पर्वत मित्र' पाक्षिक अर फिर

'परिवहन मित्र' को प्रकाशन कार .

 

४०-  संघर्षशील पत्रकार मदन जोशी (सिंधार, पौ.ग १९५५-२००): पत्रकारिता मदन जोशी क हवस छे

पैल 'दून दर्पण' मा छई साल  काम कार.

१९८७ मा दयानंद अनंत क  'पर्वतीय टाइम्स'  मा ऐन. ओज्वासी लेख से युंकी प्रसिधी बढ़

१९९१-१९९२ तक आकशवाणी का उप संपादक रैन

१९९५-१९९६ से 'हिमालय दर्पण' देहरा दून मा उप संपादक रैन .

१९९६ मा दैनिक जागरण मा उपसंपादक रैन

४१- जुझारू मनिख स्वरुप ढौंडियाल (ढोड, पौ.ग १९३५-२००२)  हिंदी का प्रसिद्ध कथाकार, गढ़वा ळी नाटकूं

 लिख्वार स्वर्रोप ढौंडियाल न १९७३ बिटेन २००२ तक  'अलकनंदा' मासिक प्रकाशन अर सम्पादन कार .

४२- मुंबई क हिलांस अर्जुन सिंह गुसाईं ( ड़ान्गु , पौ.ग१९३४-२२००३) अर्जुन सिंग गुसाईं का नाम उत्तराखंडी

पत्रकारिता मा 'हिलांस ' (१९७८-१९९०, १९९२-१९९७) मासिक क कारण भौत प्रसिद्ध च . अपण टैम की या पत्रिका

साहित्यकारूं मा सम्माननीय पत्रिका रै.

 

४३- डा शिवा नन्द नौटियाल (कोठल़ा , पौ.ग.१९३६-२००४) प्रसिद्ध लोक साहित्य मर्मी , उत्तरप्रदेश का

भू.पू.उच्च शिक्षा मंत्री डा सिवा नन्द नौटिया न डिल्ली बिटेन १९६६ से  कुछ साल 'शैलोदय' पत्रिका का

संपादन /प्रकाशन बि कार

 

४४-धर्मानंद उनियाल (कफना, कड़ाकोट , टि.ग १९३६-२००९) धर्मानंद उनियाल की रिपोर्ट

स्थानीय अर राष्ट्रीय पत्रों मा छपदा छया

 
 
४५- पीताम्बर दत्त देवरानी (डुडेख , लंगूर, १९२५ -२००९) प्रसिद्ध मास्टर जी पीताम्बर दत्त जी न १९८६-१९८८ तक

साप्ताहिक 'कर्मभूमि क संपादन कार अर फिर १९८८-१९९४ तक 'सत्यपथ' क संपादन कार

 

४६ डा भक्त दर्शन ( भौरा ड, साबली, १९१७-१९९१)प्रसिद्ध राजनीतिग्य  भक्त दर्शन जी 'कर्मभूमि' का पैला संपादक छ्या.

 

४७- परुसराम नौटियाल : मुंबई बिटेन परुशराम नौटियाल न १९५२ मा 'नव भारत' का नाम से एक पत्रिका

प्रकाशित करी.

 

४८- शकुन्त जोशी : शकुन्त जोशी क गढ़वाळी मासिक 'रैबार' देहरादून बिटेन छपद छौ (कुछ समु तक इ)

 

४९-सतेश्वर आजाद  न पौड़ी बिटेन गढवाली पत्रिका क कुछ समौ तक प्रकाशन अर संपादन कार

 

५०- विनोद उनियाल (अमोल्डा, डबराल स्यूं) न डिल्ली बिटेन कुछ समौ तक 'मंडाण' अखबार

को प्रकाशन अर संपादन कार.   

 

५१- योगेश्वर धुलिया (मदनपुर) स्व. योगेश्वर धुलिया ण पैल कर्मभूमि मा काम कार

अर फिर १९७५ बिटेन 'तरुण हिंद' साप्ताहिक को प्रकाशन कुछ सालुं तक कार

५२-  हीरा लाल बडोला (ठनठोली, मल्ला ढान्गु १९३०-२००८) हीरा  बडोला न १९५५ से

 कुछ समौ तक   'उत्तराखंड' साप्ताहिक छाप अर संपादन कार

५३- प्रसिद्ध कलाविद स्व. बैरिस्टर  मुकंदी लाल न ' सन १९२२ मा कोटद्वार से ' तरुण कुमाओं' क प्रकाशन कार

 

 

Great Jounalists/Editors of Garhwal to be continued ....

 

Copyright@ Bhishm Kukreti

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 
 
 

   

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 Great Garhwali Personalities (Malari Era to Till date ) to be continued.....part 55

 

 

 

 

गढवाळ का नामी लोक अर ज़ात (मलारी जुग बिटेन अज्युं तलक ) - फड़की -53
       

                  गढ़वाल के विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक) - भग- 53


                        Great Garhwali Personalities (Malari era to till date ) Part -53


                          Bhishm Kukreti   

        सन १९२१ का आन्दोलनकारी जौं तैं सजा ह्व़ेइ  या डंडयाई छन
               नाम                                 गौं                                   सजा /डंड



१- इश्वरी दत्त ध्यानी                खन्द्वारी   पौ.ग.                     एक मैना जेल अर सौ रूप्या

२- खेम दत्त बहुगुणा                पौ.ग                                    छै मैना अर सौ रूप्या

३-जीवानन्द बडोला                 कोलिखाल, पौ ग                    नौ  मैना अर सौ  रूप्या

४-गोबर्धन बडोला                     कोलिखाल, पौ ग.                  तीन मैना पचास रूप्या
५- केशर सिंग रावत                  गजेरा , रिंगवाडस्यूं                द्वी साल, मालगुजारी जफ्त

६-मंगत राम खंत वाल             बन्दर गढ़ी , बदलपुर                  द्वी साल, पचास रूप्या

७-  योगेषर बहुखंडी                 कोटद्वार                                      तीन मैना पचास रूप्या

८- बालादास                        पौ.ग                                          छै मैना जेल

९- सकला नन्द डोभाल              डोभा, पौ.ग.                            छै  मैना जेल   

१०-हरि दत्त बौड़ाई                   बंगार,  सावली   पौ ग                        तीन मैना , पचास रूप्या

११- बादुर सिंग                      सितौनस्यूं    , पौ ग                          छै मैना

१२- बाल मुकुंद                      पौ ग.                                    छै मैना   




बकै फडकी - 54   मा 

असानमंद छौं : श्री शिव सिंह चौहाण : गढ़वाल का राजनैतिक इतिहास

(Political History of Garhwal by Shiv Singh Chauhan in Hindi )
 

Bhishma Kukreti

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Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #22 on: January 24, 2013, 01:43:50 PM »

          गढवाळ का नामी लोक अर ज़ात (मलारी जुग बिटेन अज्युं तलक ) - फड़की -50
         

              गढ़वाल के विभूतियाँ व समाज (मलारी  युग से  वर्तमान तक) - भग- 50

              Great Garhwali Personalities (malari era to till date ) Part -50

 

                                Bhishm Kukreti

 

                     टीरी क      राजा प्रताप शाह (1871 -1886 ई.)

  राजा प्रताप शाह भवानी शाहौ ज्याठो नौनु छौ त वै तैं राजपाठ मील . वुँव्हारिक अर मयल़ू

किस्मे मनिख थौ प्रताप शाह

 प्रताप शाह अपण जादातर समौ राजकाज मा इ लगान्दु छौ . थोडा भौत मनोरंजन का बान

माछ मरदो छौ, घ्वीड़ , काखड़ , बाज, चकोरूं  शिकार करदो थौ . कुश्ती को शौक बि छौ

राणी ; चार राणी छे पण जब कैको बि नौनु णि बच त हिमाचल बिटेन कै थोकदार जजमान की बेटी दगड ब्यौ ह्व़े

जैन तैं गुअलेरिया जी बुले जांद छौ अर वीं से कीर्ती शाह, विचित्र शाह अर सुरेन्द्र शाह पैदा ह्वेन . कीर्ति शाह पैथर रज्जा बौण

लुट्यु   धन की खोजबीन : भवानी शाह क मोरण पर कुछ लोखुं  (दरबारी अर भावनी श की खवास राणी ) न  राज दरबार को धन लूठी. ए धन की खोज ह्व़े अर

लुटेरों तैं डंड्याय़ी गे

जागीर की झूटी सनद : कुछ द्वी चार लोक भवानी शाह की झूटी सनद ( मुआफी की जागीर ) पकडे गेन

पलटन तैं तोड़ेगे : ढड़क आन्दोलन कार्युं तै रुकणो  बान ज्वा पलटन बणे छे वा तोड़े गे

दरबारौ  इंतजाम  : जब तक राम कृष्ण पैन्यूली बच्युं राई दीवान राई . पैथर वैको भुला श्रीचंद तैं दिवां बणे अर दुसर भुला

गोबर्धन पैन्यूली तैं सिरस्तेदार बणाय़ी  श्रीचंद  भयंकर दर्वड्या छौ . राजकर्मचारी लोकुन तैं तंग करण मा माहिर था.

कारिन्दा (जाग्रिया० घुसखोरी मा आज का पट्वार्यों से भौत अग्वाडि छया 

भुव्यव्स्था मा बद्लौ:   बहू व्यवस्था मा बदलौ को पुट्ठ्याजोर  ( कोशिश ) करे गे

न्याय  निसाब : छ्वटु नजीर - कुंवर विक्रम शाह अर बड़ो नजीर - शंकर दत्त ड्यूडी , सने कौरिक न्यायालय की भाषा उर्दू/फारसी

हूंण  बिसे गे

कोष रक्छा : पैल छोटे लाल खत्री कोषध्यक्ष छौ पण वो बदमासी करण लग गे . फिर बद्री लाल तैं कोषा ध्यक्ष बणाय़ी

वो बि बदमाश निकळ त शंकर दत्त तैं कोष की चाबी दिए गेन

पुलिस व्यवस्था : शिव दत्त डंगवाळ अर वैक भै देवी दत्त डंग्व़ाळ कोतवाल छ्या. पैथर शिव दत्त डंगवाळ रंवायीं क कोतवाल बौण

नै निर्माण : रज्जा  न राजधानी मा एक बग्वान बणाय़ी . कार चलाण जोग बाटो बणाय़ी . कत्ति जगा डाक बंगला बणेन .

भौत सी सड़कूं  मरम्मत कराई

सरकारी स्कूल : टीरी मा एक प्रिमारी स्कोल ख्वाल जो पैथर प्रताप इंटर कालेज  का नाम से जणे गे

सरकारी होस्पिटल : एक सरकारी हॉस्पिटल बि खोले गे जै मा राजू राज्बैद रवि दत्त आयुर्वेद क हिसाब से

अर डा हरिराम एलोपैथी क हिसाब से उपचार करदा छा. उपचार मोफत होंद  छौ

प्रताप नगर को थर्पयाँण (स्थापना ) : प्रताप शाह न गर्म्युं खुणि  टीरी से नौ मील दूर ७००० फीट की ऊंचाई

पर प्रताप नगर नाम से नै राजधानी बणाय़ी . इख महल, न्यायलय , राज कारिंदों खुणि कूड, कोषागार,

भण्डार आदि बणये गेन , टीरी से प्रताप नगर तक बाटो ठीक करे गे .

बौण व्यवस्था : बौणु  से आमद  बढाणो खातिर बौण व्यवस्था क वास्ता प्रताप शाह न अपण ज्याठो स्याल़ू

 हरि सिंग तैं कंजरवेटर अर कणसो स्याळ तैं डिप्टी कंजरवेटर बणाय़ी ,

गौं की भौत स बौंण राजकीय बौण मा शामिल करे गेन जां से लोकुं तैं लकड ,

घास की तखलीफ़ होंण  लगी गे अर ऊन कुमौं कमिशनरी मा सिकैत करी

 बेगार से नकली छूट : गढ़वाळ कुमाऊं मा बेगार एक भौत पुराणि पर्था छे जैन तैं प्रभु सेवा नाम दिए गे छौ

यीं प्रथा मा हरेक मवाषा तैं राजा, हाकिम आदि औंण  पर ऊंका सामान मोफत मा ल़ाण /ल्हिजाण जरोरी छौ

. लोक बिद्रोह पर उतारू रौंदा छया . प्रताप शाह  न  नयो नियम बणेन बल जु बेगार मा शामिल णि ह्व़े सौकल

वु एक रुपया देकी बेगार से माफ़ी मांग सकद. मतबल यो छौ बल भेळ उन्द लमडीक  मोर या ढंडी मा फाळ मारिक

मोर , मोरण त तीन ही च.

आख़री समउ मा राज दरबारियूं पाळीबंदी : प्रताप शा का समउ पर दर बारी यूँ मा पाळी  बंदी राई छे

आखरी दिनु कुछ दरबार्युं न जनता तैं ढंढक  आन्दोलन का वास्ता उकसाई अर राजा क बिरुद्ध सिकैत कुमाऊं कमिश्नर

हेनरी रामसे को चिट्ठी भ्याज. यूँ दर्बारियुं मादे दीवान राम कृष्ण कू नौनु जोगेश्वर, छ्वटि दीवानी क सिरसतेदार

श्रीदत्त सकलानी, बनवारी पैन्यूली, मुकुंद राम पैन्यूली , स्यालग राम पैन्यूली, जगरनाथ पैन्यूली ,

.. केशर सिंग धनारी वला, फते सिंह रौतेला, ज्वाला सजवाण आदि छ्या. यूँ तैं पड बिहीन कौरिक

नै लोखुं तैं भारती करे गे

 

 

 

 

References:

 Courtsy to books of Dr Shiv Prasad Dabral,  Pundit Hari Krishn Raturi, Minyaan Prem Singh

(Uttarakhand ka Itihas, History of Garhwal, History of Tihri Garhwal)

 

  गढवाळ का नामी लोक अर ज़ात (मलारी जुग बिटेन अज्युं तलक ) - फड़की -51
         
         गढ़वाल के विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक) - भग- 51 

   

               Great Garhwali Personalities (malari era to till date ) Part -51



                        Bhishm Kukreti

 

                        टीरी को राजा कीर्ती शाह (1887 -1913 ई. )

                       रज्जा ब्व़े क शासन

 

राणी:   कीर्ति शाह   की एकी राणी छे जवा नेपाल क प्रधानमंत्री जंग बहादुर की नातण  छे .

वींको  नरन्द्र सिंग नाम को इक्कू नौनु ह्व़े जु पैथर राजा बौण

कीर्ति क एक खवास राणी छे ज्वा गढवाली बिष्ट (बरसाली-नदगांव )  छे    . वींक नरेंद्र सिंग अर

सुरेन्द्र सिंग नौनु छया . पैथर नरेंद्र सिंग टीरी रियासत को रज्जा बौण 

  कीर्ति शा होश्यार मनिख थौ अर स्ब्ब्युं दगड सम्बन्ध ठीक ठाक रखण मा उस्ताद छौ

 

     जब प्रताप शाह मोरी त टीका (राजकुमार ) कीर्ति शाह छ्वटु छौ . त वैकी  ब्व़े गुलेरिया जी न धीरज

 धौरिक शासन चलाई . जैबरी प्रताप शाह मोरे तैंबारी ढंढका आन्दोलनकारी बि राजधानी अयाँ छया .

राणी न सूझ बूझ से तौं सणि समजाई  बुझाई अर सौब अपण ड़्यार चली गेन . उना प्रताप नगर मा

राजकीय माल की चोरी बि ह्व़े

 :

                अस्सिटेंट कमिश्नर (जिला स्शाब ) को टीरी औण

 प्रताप शाह को मरण पर हेनरी रामसे को दूत जिला साब टीरी ऐन अर ऐलान कार बल राणी गुलेरिया जी

क बुल्युं पर शासन चौलल अर तीन मुख्य लोक - कुंवर विक्रम शाह , दीवान श्रीचंद, अर केवलराम

राणी की मदद कारल

दोषी राजकारीन्दो तैं माफी : प्रताप शाह ण जौं राज्कारिन्दों तैं नौकरी से भैर निकाळी छौ तौं तैं डिप्लोमेसी  का अंतर्गत

दुबर नौकरी पर रखे गे

विक्रम शाह असफल : राणी न  अपण द्यूर विक्रम शाह तैं शासन करणे छुट डे छै पण विक्रम शाह असफल रायीअर

राणी तैं शासन की बागडोर अफुम थमण पोड़

रीजेंसी कोंसिल : राणी न शासन की कमान सम्बाळणो  कुमाओं कमिश्नर की र्जबंदी से रेजेंस्य कौंसिल बणाई

जै मा शिव दत सकलानी, केवलराम रतूड़ी , विश्वम्बर दत्त सकलानी छ्या अर सेक्रेटरी छौ रघुनाथ भट्टाचार्य

कीर्ति शाह की पढे लिखै : कीर्ति शाह तैं हरिकृष्ण रतूड़ी क संरक्षता मा बरेली अर मेयो कोलेज अजमेर मा पढये गे

कीती शाह की राजपोशी : 1892 खुणि ह्व़े

स्कुलूं खुलण : इन मनण क्वी ऐतराज नी होंद बल कीर्ति शाह खुलो दिमाग को छौ

कीर्ति शाह न प्रताप प्रायमरी स्कोल तैं है स्कोल कार अर भौत सी पट्टीयूँ  मा प्राइमरी  स्कोल खोलींन

मुसल्मानु खुणि मदरसा ख्वाल

टिहरी नगरपालिका : टिहरी अब नगरपालिका ह्व़े गे अर उख बिजली, पाणी को इंतजाम बि ह्व़े.

विक्टोरिया क जयंती पर एक घंटाघर बि बणाई . कत्ति कूड बणेन . गढवाळ बैंक बि खोले गे

बाटों सुधार : भौत सा महत्व पूर्ण रस्तों तै ठीक करे गे . कत्ति धर्मशाला चिणये  गेन 

न्यायपालिका मा सुधार : न्याय पालिका मा बि सुधार करे गे

अस्पतालूं खुलण : कुछ जगा खासकर जात्रा मार्ग पर अस्पताल खोले गेन

 बौणऊँ  इंतजाम : बौणु ठीक इंतजामौ बान गोदिगाँव को चंद्रमोहन रतूड़ी तैं ऍफ़ अर इ देहरादून

बन प्रबंध की सिक्षा बान भिजे गे अर पैथर वै तैं अस्सिटेंट कोंजेर्वेटर बणये गे . रतूड़ी न आठ साल

तक काम करी

गंगाराम खंडूड़ी तैं  जंगल़ातौ  ठेका : गंगा राम खंडूड़ी (मरगदना, पौड़ी  ) तैं बौ णु ठेका दिए गे .

मोरद दें गंगाराम पर ६४००० रु करज छौ पण फिर गंगाराम खंडूड़ी क  चार  नौनु

 घनानंद , तारादत्त, राधा बल्लभ, चन्द्र बल्लभ न ब्योपार ठीक से सम्बाळ अर टीरी

 रियासत तै बि फैदा दे , दगड मा कथगा इ सामजिक कामू मा हथ बंटे  कॉरी 
 
 भवानी दत्त उनियाल ; भवानी दत्त उनियाल जु पैल प्रताप हाई स्कूल मा अध्यपक था  ऊँ तैं

भण्डार  को अधीक्षक बणये गे

कीर्ति नगर की स्थापना : किर्ती शाह न श्रीनगर का सामणि बिलोली गौं मा कीर्ति नगर की

स्थापना करी थै .

हरि कृष्ण रतूड़ी : हरि कृष्ण रतूड़ी एक विद्वान् अर इतिहास खुजनेर छया

हरि कृष्ण की गढ़वाल का इतिहास, नरेंद्र हिन्दू ल़ौ , गढवाल वर्णन किताब  प्रसिद्ध ह्वेन 

दिवा कर शर्मा : दिवाकर शर्मा प्रताप है स्कूल मा मास्टर छौ अर ऐतिहासिक संग्रह कार

का रूप मा प्रसिद्ध ह्व़े . रतूड़ी न अपण इतिहास किताब मा दिवा कर की भौत मदद ल़े

बद्रीदत्त शर्मा : बद्री दत शर्मा संस्कृत पाठशाला मा मास्टर छौ अर इतिहास को जणगरु थौ

मालू पंडित : कुमाऊं से टीरी अयाँ पांडे परिवार मा मालू पंडित बड़ो तांत्रिक छौ अर

संस्कृत  पाठशाला मा अध्यापक थौ

मगना पंडित : मालू पंडित को नौनु बि बड़ो पंडित ह्व़े

हरि कृष्ण रुडोला दौर्गा दत्ती : हरिकृष्ण दौर्गादत्ती एक संस्कृत कवि ( शतश्लोकी रघुवंश ,

प्रस्ताव पुष्पांजलि , स्तवन स्त्वकावाली ) ; गढ़वाली कवि अर हिंदी का प्रसिद्ध कवि छौ

सर्व धर्म सम्मलेन : कीर्ति शाह न  टीरी मा एक सर्व धर्म समेलन उर्या चौ

स्वामी रामतीर्थ : कीर्ति शाह स्वामी राम तीर्थ को भगत छौ अर स्वामी जी तैं वैन सर्व धरम सम्मलेन मा

जापान भेज, टीरी मा आश्रम  व्यवस्था कॉरी . पैथर स्वामी जी क नौनु मदनमोहन तैं  इंजीनिअर बणणो

बान इंग्लैंड बि भ्याज

प्रजा मा असंतोष : प्रजा मा बौण नीति जां से गौं वालुं लख्द , घास, आदि क परेशानी होंद गे .

कत्ते दें लोखुं न कंजर  वेटर या फोरेस्ट गार्ड ऊँ दगड झगड़ा कॉरी . एक दें कंजर वेटर  की पिटाई क

नौबत ऐ गे छे

सकलाना  का मुआफी दारूं क अन्याय जारी छौ अर जनता न कथगा दै आन्दोलन कॉरी . आख़री मा

मुआफदार्युं कमिश्नर न मुआफी दारूं जुडिसियल अधिकार छीन  देन

 २५ अप्रैल १९१३ खुणि कीर्ति शाह को इंतकाल ह्व़े अर वै बगत नरेंद्र शाह पन्दरा सालौ छौ

 

 

 


 References:

Courtsy to books of Dr Shiv Prasad Dabral, Pundit Hari Krishn Raturi, Minyaan Prem Singh

(Uttarakhand ka Itihas, History of Garhwal, History of Tihri Garhwal)

 

Copyright @ Bhishm Kukreti, Mumbai

                  गढवाळ का नामी लोक अर ज़ात (मलारी जुग बिटेन अज्युं तलक ) - फड़की -52
         
                  गढ़वाल के विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक) - भग- 52 



                       Great Garhwali Personalities (Malari era to till date ) Part -52



                          Bhishm Kukreti     

                     टिहरी महाराज नरेंद्र शाह (रा.काल. 1913 -1946 ई. )

 

      जब कीर्ति शाह को इंतकाल ह्व़े त नरेंद्र सिंह सिरफ़ पन्द्र सालौ थौ. राज्यभिषेक को परांत

नरेंद्र शाह अजमेर पढ़णो चली गे

राणी : नरेंद्र शाह को ब्यौ क्यूँठळ  राजा (हिमाचल) के द्वी नौन्युं दगड ह्व़े ,मतबल - नरेंद्र शाह की

 कमलेन्दु शाह अर इंदुमती द्वी राणी छे

 संरक्षण समीति : नरेंद्र शाह क अनुपस्तिथी मा राज काज चल़ाणो एक संरक्ष्ण

समीति बौण जैको अध्यक्ष अंग्रेज शैमिअर थौ पैथर मयूर आई.

समीति मा हरिकृष्ण रतूड़ी , बह्वानी दत्त उनियाल छा. नरेंद्र की दादी ण राज काज

संबाळी

 चन्द्र मोहन  रतूड़ी को त्यागपत्र  : चन्द्र मोहन रतूड़ी एक काबिल फोरेस्ट कंजर वेटर थौ

पण संरक्ष्ण समीति की नीती वै तैं माफिक णि ऐन अर वो त्यागपत्र देकी भैर चले गे

सत्य शरण रतूड़ी को त्यागपत्र : चन्द्र मोहन को गाँव को इ सत्य शरण रतूड़ी बागवानी

निरीक्षक थौ पण संरक्षक समीति क काम काज को वजे से वो पटियाल राज्य चली गे

महायुद्ध मा मिळवाक् (योगदान) : टीरी दरबार न पैलो महायुद्ध मा ब्रिटिश सरकार तैं

पुरो मिळवाक् देइ. कीर्ति शाह न एक पलटन ब णे छै वीं पलटन तैं ब्रिटिश हकुमत को

  हवाला करे गे

दरबान सिंग नेगी : दरबान सिंग नेगी कफाड़तीर, कड़ा कोट ,  पौड़ी  को छौ जै तैं

विक्टोरिया क्रोस मील . दरबान सिंग पैलो भारतीय छौ जै तैं लड़ाई मा विक्टोरिया क्रौस शौर्य पदक मील

गबर सिंग नेगी : गबर सिंग नेगी (सान्जुर, बमुंड , टीरी ) पैल टीरी महराज को पलटन मा थौ फिर गढ़वाल रायफल

मा भर्ती ह्व़े अर वीरगति ह्व़े . गबर सिंग नेगी तैं मोरणो परांत विक्टोरिया क्रोस मेडल  दिए गे

तोताराम थपलियाल : पैल सेना मा जजमान ही जांदा छया . तोताराम  थपलियाल (समतुळी, खात्स्युं , पौड़ी ) न बामणु 

फ़ौजी की टोली बणे अर ब्रिटिश सरकार न वै तैं वीं बटालियन को सूबेदार बणे दे.

अकाळ  : १९१७-१८ मा गढवाल मा बड़ो अन्न  काल  पोड़.

युद्ध जौर : १९१६-१९१९ तलक युद्ध जौर (इन्फ़्लुइन्जिया ) ह्व़े अर सैकड़ों मनिख, पशु मोरीन

भुव्यव्स्था अर जोध सिंह नेगी : भूव्यव्स्था सुदारणो जोध सिंग नेगी (जु पैल पड़ी मा छौ)

 तैं रेविन्यु मेम्बर  बणये गे. विशाल कीर्ति का भूत पूर्व  सम्पादक प्रसिद्ध , इमानदार सदा नन्द कुकरेती (ग्वील पौड़ी)

तैं भू व्यवस्था का सिरिस्तेदार बणये गे . सदानंद कुकरेती इमानदार मनिख थौ सो वो जादा दिन

णि टिक सौकू .

जोध सिंग नेगी अर भवानी दत्त उनियाल ओ दगड णि बौं त १९२० मा जोध सिंग नेगी न पड़  छोडि दे

हरि कृष्ण रतूड़ी तैं भू व्यवस्था को अधिकारी बणेये गे. पैथर महा नन्द रतूड़ी न यो काम कॉरी.

राम प्रसाद डोभाल अभिलेख अधिकारी छौ

म्यूर का शासन :

म्यूर को संरक्षण मा य़ी शासन समीति लोग छ्या :

१- कुंवर विचित्र शाह - मजिस्ट्रेट

२- हरि कृष्ण रतूड़ी - दीवान

३- राय बहादुर केशवा नन्द ममगाईं - कंजरवेटर

४- भवानी दत्त उनियाल- सेक्रेटरी

                     नरेंद्र  शाह को शासन

भवानी दत्त उनियाल तैं दीवान बणये गे

कुली बेगार असंतोष : कुली बेगार या कुली बेगार पडत का वाजी से जगा जगा असंतोष राई

लछ्म सिंग कठैत की बीरता : रवाईं  परगना को हाकिम लछ्म सिंग ण जब कुली बेगार मा

जनता की तर्फ्दारे कॉरी त नरेंद्र शाह रूसे गे अर लछ्म सिंग की जायजाद कुडकी करे गे

कमिश्नर की बदोलत कथित पर प्रतिबन्ध हटाये गेन . लछ्म सिंग तैं आज बि

जनता याद करदी

कुली बेगार खात्मा : १९४१ मा सरकारी तौर पर बेगार पर्था ख़तम करे गे

यातायात व्यवस्था मा सुधार करे गे

नरेंद्र नगर आधुनिक शहर : नरेंद्र शाह न ऋषिकेश से दस मील दूर एक शहर को निर्माण कौर जु

अपण टैम को आधुनिक शहर थौ जख सौब सुविधा छे   

मोटर मार्ग : मोटर मार्ग बणोन पर ध्यान दिए गे

हजूर कोर्ट :  बड़ो कोर्ट याने हजूर कोर्ट मा राजा अफिक सुणवाई करदो थौ

चीफ कोर्ट : टिहरी मा एक चीफ कोर्ट बि छौ जेमा य़ी कारिन्दा छा

तीन जज - महेशा नन्द पैन्यूली , नारायण दत्त रतूड़ी अर सुरेशा नन्द नौटियाल ( बी.ये. एल एल बी )

 नया का छै सर्कल :

टिहरी सर्कल - उमा दत्त डंगवाल

अड़ा थली: भैरब दत्त पैन्यूली

रवांई: मुंशी करीम खान

बाड़ाहाट  - नाग्दत्त रतूड़ी

देव प्रयाग - रामानंद उनियाल

कीर्ति नगर : प्रहलाद दास बहुखंडी

शिक्षा प्रसार : नरेंद्र शाह क राज मा शिक्षा प्रसार बि होई

प्राइमरी स्कूलूं  संख्या ६०  तलक पौंची

कथगा ई छात्रवृति दिए गेन

नरेंद्र शाह न कुंदन सिंग गुसाईं तैं इतिहास मा पी एच डी करणी इंग्लैण्ड (१९२६)  भेजी 

पद्मा दत्त रतूड़ी तैं फोरेस्ट्री डिप्लोमा वास्ता इंग्लॅण्ड भेजी पैथर पद्मा दत्त बन विभाग को अधिकारी बौण

लैंस डौन विद्यालय तैं ४००० रु, कर्ण प्रयाग विद्यालय तैं ३००० रु दिने

कशी हिन्दू विष विद्यालय मा कीर्ति शाह चेयर -इण्डस्ट्रियल केमिस्ट्री ' का वास्ता एक लाख रुपया देन

सार्ब्जानिक पुस्तकालय , प्रताप हाई स्कूल तैं इंटर कौलेज बणे . टीरी मा कन्या पाठशाला खोले गे

टिहरी  मा कष्ट कला विद्यालय खोले गे 
 
अस्पताल : भौत सा अस्पताल बि खोले गेन 

जन संख्या आकलन : जन संख्या आकलन को काम बि शुरू ह्व़े

घना नन्द खंडूडी को सम्मान : घना नन्द खंडूडी न तिब्ब्र सीमा विवाद, आदि भौत सा सामजिक काम क्ररीन

 घना नन्द खंडूडी तैं राजा ण सम्मान दे. घना नन्द खंडूडी ण मुकंदी लाल तैं इंग्लैण्ड

जाणो बान ३५००० रु बि  दे छ्या

चक्र धर जुयाल : झांझ गौं, सितौनस्युं, पौड़ी ग. को चक्रधर जुयाल सणि भवानी दत्त उनियाल की जगा पर दीवान बणये गे

हिमाचलऔ दगड सीमा विवाद सुळजण : चक्रधर जुयाल के साफ़ सख्त ब्थुन हिमाचल सीमा विवाद सुळज 

बीर गबर सिंघौ समळऔण मा स्मारक : चंबा मा बीर गबर सिंग स्मारक की स्थापना ह्व़े

ग्राम पंचाय्तुं उत्थान : नरेंद्र शाह न गाँव मा पंचायत तैं सुचारू ढंग से काम करणों कोशिश करी   

 राज्य प्रतिनिधि सभा : पैल पैल त राज्य प्रतिनिधि दिखाणो ढोंग थौ पण पैथर यीं सभ मा २० चुनी क अयन सदस्य ह्वेन

अर पन्दरा राजा क नामजद सदस्य ह्वेन

शराब बणाण  पर रोक : चक्रधर जुयाल न खौळ म्यालोँ  बगत छोड़िक हौरी समौ मा शराब बणोण पर रोक लगाई

मिलसारा से मुक्ति : बौ क परांत जब द्वी झणो मा नि बणदि छे त छुट (तलाक) लिए सक्यांद थौ अर

जु ओ द्वी झण दुबर फिर से ब्यौ करण चन्दा छया त ऊँ तैं 'मिलासरा ' कर दीण पड़दो छौ. चक्रधर जुयाल

न मिलसारा  कर बन्द कराये .

             जनजाग्रती 

गढवाली अब भैर जा न बिसे गे छया त याँ से टिहरी गढ़वा ळ मा बि स्वतंत्रता आन्दोलन की सुगबुगाट हों लगे गे छे

रवाईं कांड : रवाईं  का लोक  बन व्यवस्था से रुस्यां /नाराज छ्या ऊँन आजाद पंचायत को गठन करी जो चक्रधर जुयाल

तैं नि सुवाई वैन आन्दोलान्कार्युं तैं पाठ पढ़ाणो काम करी.

ये मा कत्ति दें लोकुं पर बंदूक चलाये गे

अर फिर रवाईं काण्ड मा गोली चलये गे, लोखुं तैं प्रताड़ित करे गे . कथगा इ लोकुं जान गे

विशम्बर दत्त चंदोला तैं जेल : विश्वम्बर दत्त च्नादोला हिन्दू समाचार समाचार पत्र छापडा छौ अर वैन

रवाईं काण्ड कि खबर अखबार मा क्या छाप कि चक्रधर जुयाल तैं नागँवार लगे गे

चक्रधर जुयाल न धन, अर कुन्नेती का बल पर चंदोला तैं देहरादून का न्यायलय मा केश चलाये

. चंदोला तैं जेल ह्व़े.

तारा दत्त गैरोला पर अभियोग: एक दें टिहरी गढ़वाळ को नमी वकील तारा दत्त गैरोला ( सदयी ,

मिमोर ऑफ गढ़वाल को लिख्वार) न टिहरी प्रशाशन की बड़ी काट करी त चक्रधर जुयाल न

गैरोला पर मुकद्दमा कॉरी दे जखमा चक्रधर जुयाल हारी गे अर जुयाल तैं  गैरोला

तैं 'हर्जा-खर्चा' दीण पोड़

तकाबी अर बकाया कर माफ़ी : नरेंद्र शाह क बगत 'तकाबी अर 'बकाया' कर की माफ़ी बि ह्व़े

ऋषिकेश कीर्तिनगर मोटर मार्ग : चक्रधर जुयाल की रूचि को कारण ऋषिकेश-कीर्तिनगर मोटर मार्ग

 अर टिहरी मोटर मार्ग बौण

चक्रधर जुयाल को रिटायर हूण : चक्रधर जुयाल १९३९ मा रिटायर ह्व़े अर वैकी जगा पर

मौली चन्द्र शर्मा तैं फेडरल सेक्रेटरी बणये गे

टिहरी रियासत को दुसर विश्व जुद्ध मा मिळवाक् : टिहरी रियासत न दुसर महायुद्ध मा ब्रिटिश राज

के बड़ी मदद करी अर सैकड़ों जावन ब्रिटिश सेना मा भारती कराये गेन

विद्या धर जुयाल तैं सम्मान :  ब्रिटिश सेना मा लेफ्टिनेंट विद्याधर जुयाल तैं अफ्रिका मा साहसपूर्ण काम

का एवज मा डिस्टिंगविश्ड सर्विस आर्डर की उपाधि से सम्मानित करे गे

                प्रजामंडल अर सुमन की आहुती

      कोंग्रेस अर गांधी जे क नेतृत्व मा ब्रिटिश गढ़वाळ मा स्वतंत्रता आन्दोलन जोरून मा चलणु छौ

टिहरी मा द्वी काम छौ एक त टीरी का राजा से छुटकारा र स्वतंत्रता .

देहरादून मा टीरी का वास्ता टिहरी राज्य प्रजामंडल कि स्थापना १९३९ मा ह्व़े

प्रजामंडल मा श्री देव सुमन (जौं ळ , बमुन्द , टिहरी) को आण से

प्रजामंडल की गति विशी भौत बढींन . सुमन कोंग्रेस का भौत सा सम्मेलनु  (श्रीनगर राजनैतिक सम्मेल्लन १९३८,

 देसी राज्य लोक परिषद्, लुधियाना १९३९,  लोक परिषद मुंबई १९४० आदि ) मा भाग ल़े. 

भाषण पर पाबंदी : टिहरी राज मा श्रीदेव सुमन का भष्णु पर पाबन्दी लगी.

कुछ आन्दोलनकारी ;  ये दौरान रज्जा अर वैका अधिकारी प्रजा मंडल का आन्दोलन तैं दबाणा बान भौं भौं

कौंळ  करणा रैन .

 छात्र नेता राम चन्द्र उनियाल अर राम प्रसाद बहुगुणा तैं  १९४२ मा जेल ह्व़े

लाहोर बिटेन कविराज दया शंकर भट्ट टिहरी का गौं गौं सोतान्त्र्ता का प्रचार करण लगी गे

आनंद स्वरुप रतूड़ी, ब्राह्म देव सीर्सवाल, शिव प्रसाद जोशी , डा कुशला नन्द गैरोला मसूरी मा मजदूर संगठन का बल

पर लोगूँ तैं चित्वळ जाग्रति फैल़ाणा) करणा  रैन

देव प्रयाग का बिद्या धर 'भिकारी' पत्रकार भैर का अख्बारून मा टिहरी को क्रूर शासन के खबर देणो रै

भगवान् दास मुल्तानी साबुण बेचणो बहाना से टिहरी का गाँव गाँव घुम्दो थौ अर लोखुं तैं चित्वळ करदो छौ

'पौण टूटी' कर : यू एक्श्पोर्ट अर इम्पोर्ट ड्यूटी छे अर लोक भौत रूसयाँ छया

'आमद  कर ' :   १९४१ मा राज्य प्रतिबिधि सभा न एक विधेयक पास ह्व़े जै मा  सालाना  २००० रु से अळग आमद पर कर लगाणे

नियम बौण हालाँकि खेम राज बहुगुणा, देवेन्द्र दत्त सकलानी, महानंद डंगवाल, लक्ष्मी चंद जैन,

इंद्र सिंह नेगी, शंकर सिंह, रतिराम अर नारायण सिंह जन प्रतिनिधि सभा सद्स्युन  विधेयक को विरोध कॉरी छौ

याँ से मातबर लोक बि राज को विरुद्ध ह्व़े गेन . सुमन न प्रतिन्ध्युं तैं त्यागपत्र को सुजौ दे

सुमन तैं राज्य निकाल़ा : १९३८ मा सुमन तैं राज्य निकाल़ा करे गे अर देहरादून जेल मा रखे गे . ९ सितम्बर खुणि

प्रों भगवती प्रसाद पांथरी , शिव प्रसाद पैन्यूली , रघुबीर पैन्यूली तैं बि देहरादून जेल मा भिजे गे

कार्यकर्ताओं की धर पकड़ : रियासत शासन न टैम टैम पर वीरेन्द्र सकलानी, प्रेम दत्त डोभाल, दिनेश चंद सकलानी,

बंशी लाल पुंडीर अर शिव प्रसाद नौटियाल, मनोहर लाल 'श्रीमन' तैं बंदी बणये गे

देव प्रयाग मा रामदयाल, विद्याधर डंगवाळ , देवी प्रसाद कोठियाल , घनश्याम कोठियाल तैं जेल भिजे गे

घूसखोरी : पुलिस वा लुं मजा ऐ गे छया ओ घुस ल़ीण मा उस्ताद ह्व़े गे छया
 
मुक्ती अर फिर बंदी : कुछ दिनों मा आन्दोलन कार्युं तै जेल से भैर कार . पर फिर श्री देव सुमन तै बंदी बणये गे

जेल मा श्रीदेव सुमन न टीरी जेल मा अनसन करीं अर बाद मा आमरण अनसन मा बैठी गेन  अर बयासी दिन की

भूख हडताल ५ जुलाई  १९४४ का दिन श्रीदेव सुमन को महाप्रयाण ह्व़े/बलिदान दिवस च . सुमन को बलिदान तैं

क्वी बि गढवाळी , क्वी बि भारतीय, क्वी बि स्वतन्त्रता प्रेमी नि बिसर सकदो

ये दौरान प्रजा क दगड अर प्रजामंडल का क्रांतिकारियों दगड प्रताडन को काम जारी रै

 प्रजमंडक का क्रन्तिकार्युं जां कि परिपुरना नन्द पैन्यूली , इंद्र सिंग , टीकाराम, , भूदेव लखेड़ा , दादा दौलतराम

जेल मा अगस्त १९४६ई.  मा भूख हडताल पर बैठी गेन  फिर समझौता ह्व़े त आन्दोलान्कार्युं न  सितम्बर खुणि 

भूख हडताल खतम करी .

                 नरेंद्र शाह को सिंघासन त्याग

श्रीदेव सुमन को इंतकाल से देश मा जगा जगा टिहरी नरेश के भौत काट ह्व़े . आन्दोलन जोरूं पर थौ जु

थमणो नाम नि लीणों थौ . राजा  नरेंद्र शाह तैं २६ मई १९४६ को गद्दी से उतरणे घोषणा करे अर

विजय दशमी को नरेंद्र शाह न टिहरी रियासत की गद्दी अपण ज्याठ नौनु मानवेन्द्र शाह  तैं सौम्पू

 

 

 

 

 

 

 
 
बकै फड़की - 53  मा बांचो ...

 To be continued on part 53

 

References:
Courtsy to books of Dr Shiv Prasad Dabral, Pundit Hari Krishn Raturi, Minyaan Prem Singh

Bhakt Darshan's garhwal kee divangat vibhutiyan

(Uttarakhand ka Itihas, History of Garhwal, History of Tihri Garhwal)



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         गढवाळ का नामी लोक अर ज़ात (मलारी जुग बिटेन अज्युं तलक ) - फड़की -53
         
            गढ़वाल के विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक) - भग- 53 


             Great Garhwali Personalities (Malari era to till date ) Part -53



                   
 

                           Bhishm Kukreti                   

 

               गढ़वाळ को आख़री महाराजा -मानवेन्द्र शाह (रा.का.1946 -1949 ई  )

       गढ़ देश को आख़री रज्जा मानवेन्द्र शाह ह्व़े . मानवेन्द्र  इन रज्जा छौ जै तैं
 
जुंड बुबा का राज पथ मील . मानवेन्द्र की पढे लिखै इन्दोर अर मयो कोलेज अजमेर मा होई

   रंडयूँ  तैं स्कोल मा ठैराण : जै दिन मानवेन्द्र शाह को राजगद्दी टीका छौ , बड़ा बड़ा लोखुं तैं बुलाये
 
गे छौ अर दगड मा रंडईयुं तैं बि भैर बिटेन नाचणो बुलाये गे छौ   रंडियूँ तैं   स्कोल मा ठहराई

त स्थानीय जनता रूसे गे छौ                 

तेज आन्दोलन : मवेंद्र को राजगद्दी संबाळण से स्वतंत्रता आन्दोलन कम नि ह्व़े उल्टान तेज ही ह्व़े

आन्दोलान्कार्युं तैं बि जोर से डंडयाणो इंतजाम ह्व़े

परि पूर्ण नन्द पैन्यूली तैं डेढ़ बरसों जेल ह्व़े

अवतार सिंग तैं सवा वर्स को कारावस

महताब सिंह तैं तिन  साल को जेल ह्व़े त नागेन्द्र दत्त सकलानी पकड़ मा नि आये

परिपूर्णा नन्द पैन्यूली को जेल बिटेन भाजण : प्रजामंडल को साहसी नेता परि पूर्ण नन्द पैन्यूली

दस दिसम्बर १९४६ को जेल से भग गे

नागेन्द्र सकलानी (सकलाना ) भौत बड़ो कृषक आन्दोलनकारी छौ वै तैं सरकार पकड़ी नि सकी

और सकलानी ब्रिटिश गढवाल मा चन्द्र सिंग गढ़वाली को चुनाव मा चुनाव प्रचार करी

दादा दौलत राम तैं बि कृषक आन्दोलन कारे क रूप मा जेल ह्व़े

पैथर नागेन्द्र दत्त सकलानी तैं पकड़े गे

टिहरी मा पन्द्र अगस्त मनाये गे

सकलाना , बडीयार गौं , कीर्ति नगर मा आज़ाद पंचायत की स्थापना ह्व़े . जै तैं टिहरी

सरकार न अमान्य घोषित करी.

१९४८ मा पुलिस न एक आन्दोलन मा किसान नेट नागेन्द्र सकलानी अर मौलू सिंग की हत्या करी दे  ,

टिहरी मा क्रांति करियुं शवयात्रा गौं गौं बिटेन लोक ऐन १९४८ मा टिहरी रियासत को भारत मा

विलीन करण ह्व़े ग्याई अर १९४९ मा मानवेन्द्र शाह गढवाल राज्य की राजगद्दी से उतर .

 

 


 बकै फड़की - 54  मा बांचो ...

 To be continued on part 54



References:
Courtsy to books of Dr Shiv Prasad Dabral, Pundit Hari Krishn Raturi, Minyaan Prem Singh

Bhakt Darshan's garhwal kee divangat vibhutiyan

(Uttarakhand ka Itihas, History of Garhwal, History of Tihri Garhwal)



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Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #23 on: January 24, 2013, 01:44:54 PM »
गढवाळ का नामी लोक अर ज़ात (मलारी जुग बिटेन अज्युं तलक ) - फड़की -54

 

    गढ़वाल के विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक) - भाग - 54

  Great Garhwali Personalities (Malari era to till date ) Part -54



                                            Bhishm Kukreti
 
 

 
 
गढ़वाळ का भगवान्(स्वर्गीय) पत्रकार/संपादक- १

 

                              Great Jounalists/Editors of Garhwal of Past - 1
 
 

 
 
गढवाळ पत्रकारिता क मामला मा सुभागी च . जब बिटेन भारत अर गढ़वाल मा

अखबार छपेण बिसेन गढ़वाळ की धरती मा नामी गिरामी पत्रकार/संपादक पैदा ह्वेन .
 
 
 
१- नागेन्द्र उनियाल (असवाळस्यूं, पौ.ग,- स्वर्गवास-१९८१) : इन उना नौकरी क बाद 'धडकता

पहाड़ ' निकाळ . फिर कोटद्वार बिटेन 'जयंत' आठ्वाडा (साप्ताहिक) को प्रकाशन, संपादन शुरू कार .
 
तेज तर्रार लिखणो बान प्रसिद्ध.

 

२- श्याम चरण काला (सुमाडी, पौ.ग,१९१०-१९८४): काला जी टाइम्स ऑफ़ इंडिया , भारत का भौत का

रोजानौ अखब़ारूं अर भैर देसु अखब़ारूं रैबार्या/ खबरची/संवाददाता रैन. भारतीय श्रमजीवी पत्रकार सम्मलेन,
 
योधा मा सम्मानित. जब 'श्रमजीवी पत्रकारूं बान कोलोनी बौण त कोलोनी नाम

'श्यामाचरण काला नगर' धरे गे.

 
 
३- सदा नन्द कुकरेती (ग्वील, मल्ला ढानगु, पौ. १८८६-१९३७): पैल टीरी रियासत मा काम कार पण उख घूसखोरी

रास नि आये त पौड़ी आयें अर सन १९१३-१९१५ तक 'विशाल कीर्ति' का संपादन कार. लिखण मा चुटीली शैली

अर व्यंगात्मक ब्युंत का बान प्रसिद्ध. अख्बराऊ संपादकत्व मा अंग्रेजी हकुमत से झगड़ा बि ह्व़े.

 

४- टेक चंद गुप्ता (देहरादून) : स्वतंत्रता से पैल 'देहरा पत्रिका' क संपादक रैन .

 

५-संपादक शिरोमणि विश्वम्बर दत्त चंदोला (थापळी,पौ.ग. १८७९ -१९७०) : कुछ दिन फ़ौजी दफ्तर मा

काम कार अर फिर १९०५ से 'गढवाळी पत्रिका' पत्रिका क संपादन अर प्रकाशन शुरू कार. टिहरी रियासत क

 रवाईं कांड खबर छाप ण पर जेल (१९३३-१९३४) .

 

६- त्र्यम्बक चंदोला : पैल 'गढ़वाळी' हिंदी साप्ताहिक का सह संपादक रैन फिर अंग्रेजी अखबार 'हिंदुस्तान टाइम्स '
 
का ताउम्र संवाददाता रैन

७ ब्रज भूषण ( देहरादून १९१३-१९७७) ; स्वतंत्रता सेनानी, कवि न साप्ताहिक 'दून घाटी' क संपादन कार .
 


८- व्याखान वाचस्पति विश्वम्बर दत्त देवरानी (जेठो गाँव पैनो); मालवीय जे क सेक्रेटरी संतान धर्म का प्रचारी बि छया .

अफ्रीका मा ऊंको बड़ो सम्मान थौ. देवरानी जी न डिल्ली मा 'कर्मयोगी' क सम्पादन कार. ये लेखक तैं

अफ्रिका मा बस्यां गुजरात्युं द्वारा गुजराती मा छप्युं पम्फलेट दिख णो सौभाग्य बि हुयुं च जख मा

'महामहोपदेसक ' ' विश्वम्बर दत्त देवरानी क अफ्रिका मा प्रोग्राम क ब्यौरा च.



९- स्व दया नन्द थपलियाल (खैड़, पौ.ग.मावाळस्यूं) अंग्रेजी का पत्रकार जौन 'कोम्म्र्स एंड इंडस्ट्री ' अर 'थौट' क

संपादन बिभाग मा काम कार

१०- दामोदर प्रसाद थपलियाल (पालकोट, खात्स्युं, टि.ग, १९२३-१९७७) : गढवाली क साहित्यकार दामोदर प्रसाद

थपलियाळ न गढवाळी भाषा की 'फ्यूं ळी ' पत्रिका क संपादन कार .या पत्रिका धनाभाव से बन्द ह्व़े



११-महेशा नन्द थपलियाळ (टोलू, मन्यार स्यूं, पौ.ग. १९०१-१९६९) मेरठ बिटेन 'ह्रदय' हफ्तावार अर 'आशा' मैनावार

पत्रिकाओं संपादन अर फिर पौड़ी बिटेन 'उत्तर भारत' एवम लैंसडाउन बिटेन 'नव भारत को संपादन



१२- देवकीनंदन ध्यानी (जखळ , सल्ट, अल्मोड़ा , १९०७-१९३६ ); कवि देवकीनंदन न मुरादाबाद बिटेन 'विजय',

हल्द्वानी अर पौड़ी बिटेन 'स्वर्ग भूमि' प्रकाशन अर संपादन



१३- दयाधर धौल़ाखंडी (डुमैला, खाटली, पौ ग. १९१९-१९४९): गढ़वाल साहित्य मंडल का कर्कर्ता अर

'गिरीश' पत्रिका डिल्ली क संपादक मंडल का सदस्य



१४-कोतवाल सिंग नेगी (कांडई , पौ. १९००-१९४८) कोतवाल सिंग जी न कानपूर बिटेन 'हिलमन' अर

पौड़ी बिटेन' क्षत्रिय वीर ' को संपादन कार



१५- गोविन्द सिंह नेगी ( दाल ढुंग, बडीयार गढ़ , टि.ग १९२८-१९७१) : कति समाचार पत्रों मा संवाददाता रैन

'जीवन-पानी' अर 'दून अंचल ' का संपादन कार



१६- जोध सिंह नेगी (सुला, अस्वाल्स्युं, पौ.ग.१८६३-१९२५) ' क्षत्रिय वीर ' क संस्थापक



१७- प्रताप सिंह नेगी (नेग्याणा, गग्वाड़स्यूं ,पौ., १८७२-१९३५): 'क्षत्रिय वीर ' का संपादक अर प्रकाशक



१८- श्याम चन्द्र नेगी (बेलग्राम, अठुर, टि.ग १९१२-१९८२): अंग्रेजी समाचार पत्रुं संवाददाता .

'नोर्दर्न टाइम्स ' का संदन बि कार



१९-महान संपादक गिरिजा दत्त नैथाणी (नैथाणा ,मन्यार्स्युं , पौ. १८७२ -१९२७) गढवाळ क्षेत्र का पैला
 
पत्रकार अर संपादक १९०२-१९०४ तक ' गढ़वाल समाचार' (पैल लैंसडाउन अर फिर कोटद्वार ) का सम्पादन अर प्रकाशन.

१९०५-१९१० तक देहरादून बिटेन 'गढवाली 'माववार क संपादन.

फिर दुगड्डा से ' गढ़वाल समाचार' (१९१२-१९१४० तक प्रकाशन अर संपादन.

फिर देहरादून क 'गढवाली' हफ्तावार पत्रिका क संपादन (१९१५-१९१६)

आखिरैं 'पुरुषार्थ' मासिक क प्रकाशन अर संपादन (दुगड्डा अर नैथाना ).

 

२०-मायादत्त नैथानी ( नैथान , मृत्यु १९७२) मुंबई का अंग्रेजी समाचार पत्रुं संवाददाता अर
 
सम्पादकीय मंडल सदस्य



२१-सत्यपाल पांधी (अमृतसर १९२३-१९८१): मस्सुरी मा रौंदा छा. कत्ति अंग्रेजी समाचार पत्रुं मा

संवाददाता . मसूरी बिटेन अंग्रेजी साप्ताहिक 'मसूरी टाइम्स' को संपादन कार .
 
फिर मसूरी बिटेन १९४९ मा, अंग्रेजी साप्ताहिक 'हिमाचल टाइम्स' का प्रकाशन अर संपादन शुरू कार.

१९५३ मा हिंदी संस्करण शुरू. १९६९ मा ये पत्र क नाम 'हिमालय टाइम्स कार. १९६९ बिटेन दैनिक
 
अखबार 'हिमालय टाइम्स' शुरू कार . १९७० बिटेन शिमला संस्करण शुरू.

उच्चस्तरीय तिमासी ' पेट्रोलियम एशिया' क प्रकाशन अर संपादन.

 

२२- जंगीलाल शाह 'श्रीबंधू' (चमोली, १९१४-१९८५ ): पत्रकार अर साप्ताहिक 'देवभूमि ' प्रकाशन मा अहम् भूमिका.
 


२३-अमीर चंद बम्बवाल (पेशावर , १८८६-१९७२) स्वतन्त्रता सेनानी . उर्दू अर अंग्रेजी का ज्ञानता. १९०५ मा पेशावर

बिटेन 'फ्रंटियर एडवोकेट' शुरू कार . १९०९--१९१० तक इलाहाबाद मा स्वराज' का संपादक.१९२८ मा फिर फ्रंतिया एडवोकेट

शुरू. १९३२ मा पश्तो भाषा मा पत्रिका प्रकाशन . पेशवर बिटेन 'अफगान' 'खुदाई खिदमतगार' अर द्विबशी फ्रंटियर

मेल' का प्रकाशन अर संपादन.

भारत बिगल़ेणो परांत देहरादून मा निवास अर फिर अंग्रेजी, हिंदी मा 'फ्रंटियर मेल' को प्रकाशन संपादन



२४- सतेन्द्र सिंह भंडारी (चौड़ीख , पौ.ग.स्वर्गवास - १९८३): डिल्ली मा फ्री लांसर जौर्नालिस्ट रैन.

१९६९ बिटेन पौड़ी बिटेन 'पौड़ी टाइम्स ' का संपादन अर प्रकाशन



२५-हुलास वर्मा (बिज्नौर, १८८७ -१९६०) देहरादून बिटेन पाक्षिक 'स्वराज्य सन्देश' क प्रकाशन



२६- स्वामी विचारानंद (प्रयाग,१९४०मा इहलोक वास ) 'साप्ताहिक 'अभय' क संपादन, प्रकाशन.
 


२७-ठाकुर चन्दन सिंह (1886 -१९६८ ( देहरादून मा 'नोर्दन टाइम्स' अर नोर्दन स्टार ' का

संपादन . फिर 'गोरखा संसार' अर स्वतंत्र नेपाली' क संपादन



२८- शहीद श्री देव सुमन (१९१५-१९४४) श्रीदेव सुमन न डिल्ली क साप्ताहिक 'हिंदु अर अंग्रेजी साप्ताहिक

'धर्म राज्य' क सम्पादकीय बिभाग मा काम करी



२९- कृपाराम मिश्र 'मनहर' (सरूड़ा, १९०२-१९७५ ): गढ़ देश (१९२९-१९३०) को प्रकाशन संपादन.

१९३४ मा फिर से प्रकाशन शुरू . १९४० मा साप्ताहिक 'सन्देश' को प्रकाशन शुरू पण जेल जाण से बंद.
 


३०- हरिराम मिश्र (१९१८-१९८०) 'सन्देश' का सहकारी संपादक. १९५८ मा 'हिमालय की ललकार'.

हरिराम मिश्र 'चंचल' एक ओजस्वी पत्रकार छया.
 


३१- प्रताप सिंह नेगी (ढौरि, डबराल स्यूं, पौ.१८९७ -१९८०)स्वतंत्रता सेनानी , राजनीतिग्य, प्रताप सिंह नेगी अर

ज्योतिप्रसाद महेश्वरी न एक साप्ताहिक पत्र 'सन्देश' (१९३७) स्वतन्त्रता आन्दोलन तैं सब्बळ दीणो बान

शुरू कार.

 

३२- नरेंद्र सिंह भंडारी (जौरासी, चमोली, १९२०-१९८६) राजनैतिग्य लखनऊ मा 'कोंग्रेसी अखबार 'नया भारत' का संपादन कार



३३- प्रसिद्ध पत्रकार गोविन्द प्रसाद नौटियाल (नन्द प्रायद, चमोली,१९०१-१९८६(: अंग्रेजी अखब़ारूं जन की टाइम्स इंडिया,

स्टेट्स मैन , लीडर , हेराल्ड, हिंदुस्तान टाइम्स आदि का संवाददाता.



३४- शहीद उमेश डोभाल (सिरोली, इडवाळस्यूं, पौ.ग.१९५२-१९८८) बिजनौर टाइम्स, नव भारत टाइम्स, अमर उजाल़ा

आदि मा संवाददाता .

खोजी पत्रकारिता क वजे से शराब माफिया द्वारा १९८८ मा ह्त्या



३५-संपादकाचार्य भैरव दत्त धुलिया (मदनपुर पौ.ग. , १९०१-१९८८): स्वतंत्रता सेनानी, विधयक,

जब 'कर्मभूमि' साप्ताहिक को जनम ह्व़े (लैंसडाउन १९३९) धुलिया जी अर भक्त दर्शन दुई संपादक छया .

फिर 'कर्म भूमि ' कोटद्वार आई अर १९८६ तलक भैरव दत्त धुलिया क संपादकत्व मा निरंतर छपणी रै



३६ पत्रकारिता का युग पुरुष ललिता प्रसाद नैथाणी (नैथाना , १९१३- १९८८) : पैल 'कर्मभूमि' क

संपादकमंडल मा काम कार. फिर 'सत्यपथ (१९५६) को प्रकाशन शुरू कार. सत्यपथ गढ़वाल को

नामी गिरामी, राष्ट्रवादी पत्र छौ



३७- समाजसेवी, राज्नैतिग्य राम प्रसाद बहुगुणा (चमोली, १९२०-१९९०) १९५३ बिटेन साप्ताहिक 'देव भिमी' को प्रकाशन अर संपादन.

यू साप्ताहिक उत्तरी गढ़वाळ को बड़ो मशहूर पत्र थौ.

 

३८- आचार्य गोपेश्वर कोठियाल (कूणजी . टि.ग.१९०९ -१९९९) युगवाणी का संपादक, प्रकाशक आचार्य गोपेश्वर जी '
 
युगवाणी' तैं शुरू करण वळ अर ये साप्ताहिक

तैं निरंतर चलाण वाळ छया. १९४७ बिटेन युगवाणी निरंतर छपेणी राई. अब युगवाणी मासिक पत्र च



३९ धर्मानंद सेमवाल (रुद्रप्रयाग, १९५३-२००० ) धर्मानंद सेमवाल न पैल 'पर्वत मित्र' पाक्षिक अर फिर

'परिवहन मित्र' को प्रकाशन कार .



४०- संघर्षशील पत्रकार मदन जोशी (सिंधार, पौ.ग १९५५-२००): पत्रकारिता मदन जोशी क हवस छे

पैल 'दून दर्पण' मा छई साल काम कार.

१९८७ मा दयानंद अनंत क 'पर्वतीय टाइम्स' मा ऐन. ओज्वासी लेख से युंकी प्रसिधी बढ़

१९९१-१९९२ तक आकशवाणी का उप संपादक रैन

१९९५-१९९६ से 'हिमालय दर्पण' देहरा दून मा उप संपादक रैन .
 
१९९६ मा दैनिक जागरण मा उपसंपादक रैन

४१- जुझारू मनिख स्वरुप ढौंडियाल (ढोड, पौ.ग १९३५-२००२) हिंदी का प्रसिद्ध कथाकार, गढ़वा ळी नाटकूं

लिख्वार स्वर्रोप ढौंडियाल न १९७३ बिटेन २००२ तक 'अलकनंदा' मासिक प्रकाशन अर सम्पादन कार .
 
४२- मुंबई क हिलांस अर्जुन सिंह गुसाईं ( ड़ान्गु , पौ.ग१९३४-२२००३) अर्जुन सिंग गुसाईं का नाम उत्तराखंडी

पत्रकारिता मा 'हिलांस ' (१९७८-१९९०, १९९२-१९९७) मासिक क कारण भौत प्रसिद्ध च . अपण टैम की या पत्रिका

साहित्यकारूं मा सम्माननीय पत्रिका रै.



४३- डा शिवा नन्द नौटियाल (कोठल़ा , पौ.ग.१९३६-२००४) प्रसिद्ध लोक साहित्य मर्मी , उत्तरप्रदेश का

भू.पू.उच्च शिक्षा मंत्री डा सिवा नन्द नौटिया न डिल्ली बिटेन १९६६ से कुछ साल 'शैलोदय' पत्रिका का

संपादन /प्रकाशन बि कार



४४-धर्मानंद उनियाल (कफना, कड़ाकोट , टि.ग १९३६-२००९) धर्मानंद उनियाल की रिपोर्ट
 
स्थानीय अर राष्ट्रीय पत्रों मा छपदा छया



४५- पीताम्बर दत्त देवरानी (डुडेख , लंगूर, १९२५ -२००९) प्रसिद्ध मास्टर जी पीताम्बर दत्त जी न १९८६-१९८८ तक

साप्ताहिक 'कर्मभूमि क संपादन कार अर फिर १९८८-१९९४ तक 'सत्यपथ' क संपादन कार



४६ डा भक्त दर्शन ( भौरा ड, साबली, १९१७-१९९१)प्रसिद्ध राजनीतिग्य भक्त दर्शन जी 'कर्मभूमि' का पैला संपादक छ्या.



४७- परुसराम नौटियाल : मुंबई बिटेन परुशराम नौटियाल न १९५२ मा 'नव भारत' का नाम से एक पत्रिका

प्रकाशित करी.



४८- शकुन्त जोशी : शकुन्त जोशी क गढ़वाळी मासिक 'रैबार' देहरादून बिटेन छपद छौ (कुछ समु तक इ)



४९-सतेश्वर आजाद न पौड़ी बिटेन गढवाली पत्रिका क कुछ समौ तक प्रकाशन अर संपादन कार



५०- विनोद उनियाल (अमोल्डा, डबराल स्यूं) न डिल्ली बिटेन कुछ समौ तक 'मंडाण' अखबार

को प्रकाशन अर संपादन कार.



५१- योगेश्वर धुलिया (मदनपुर) स्व. योगेश्वर धुलिया ण पैल कर्मभूमि मा काम कार

अर फिर १९७५ बिटेन 'तरुण हिंद' साप्ताहिक को प्रकाशन कुछ सालुं तक कार

 

५२- हीरा लाल बडोला (ठनठोली, मल्ला ढान्गु १९३०-२००८) हीरा बडोला न १९५५ से

कुछ समौ तक 'उत्तराखंड' साप्ताहिक छाप अर संपादन कार

 

५३- प्रसिद्ध कलाविद स्व. बैरिस्टर मुकंदी लाल न ' सन १९२२ मा कोटद्वार से ' तरुण कुमाओं' क प्रकाशन कार





Great Jounalists/Editors of Garhwal to be continued ....

 

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Bhishma Kukreti

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Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #24 on: January 24, 2013, 01:45:59 PM »
गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -39

गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 39



Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -39




भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti )


 महाराज पृथ्वीपति शाह (रा.का. 1634 -1664 या 1631 -1664 ई. )


पृथ्वी पति शाह महान पराक्रमी, भड़, साहसी , विपदा मा भौत धीरू , बैर्युं बिणासी छयो .
 
पृथ्वी पति शाह को जादा तर समौ जुद्ध अर बैरी बिणास मा ही व्यतीत ह्व़े.

पृथ्वी पति शाह का समौ की कुछ बड़ी घटनाउन बान याद करे जान्दन :

 १-पच्छिम का तरफ राज्य बढ़ोतरी : पृथ्वी पति क टैम पर गढवाळ राज्य सतलज तक पौंची गे थौ.

फिर हिमाचल का राजा एक्ब्न्द ह्वेना अर हाट कोटी तक राज राई

२- शाहजहाँ से राज्य रक्षा ; पृथ्वी पति तैं शाहजंहा से कथगा दें गढवाल राज्य की रक्छा करण पोड़ .

 पैथर पृथ्वी पति के डरा शिकोह दगड दोस्ती होई गे

३- पृथ्वी पति को नौनु मेदनी शाह को दिल्ली दरबार मा जाण

४- जब औरंगजेब न अपण भायुं तैं गिरफ्तार करीक दिल्ली को राज हथियाई त दारा शिकोह को नौनु सुलेमान सिकोह

तैं पृथ्वी पति न श्रीनगर मा शरण दे छे

५- सुलेमान शिकोह तैं पृथ्वी पति को नौनु मेदनी शाह न औरंगजेब तैं सौंप

६- मेदनी शाह न औरंगजेब को तरां अपण बुबा को राज्य हथियाई

पृथ्वी पति शाह का दरबारी:
 
पुरोहित : श्री कंठ

राजगुरु : सारंगधर नौटियाल अर वृहस्पति

बजीर: माधो सिंह भंडारी

सेना नायक : माधो सिंह भंडारी को ब्यटा गजे सिंह

देवत्री : डोभाल

दीवान ; बंदे सिंह भंडारी

राणी : पृथ्वी पति शाह की भौत सी राणी छे .
 
मथुरा बौराणी : मथुरा बौराणी को एक रजत पत्र देव प्रयाग मंदिर मा च (1664 AD ). मथुरा बौराणी गजे सिंह की कज्याण छे

गजे सिंह भंडारी: गजे सिंह भंडारी बि अपण बुबा ज्यू माधो सिंह भंडारी जन बड़ो भड़ (बलशाली, वीर ) थौ.

गजे सिंह त्यागी छौ. गढवाल राज्य रक्छा बान वैन कथगा इ लड़ऐयूँ मा भाग ल़े

गजे सिंह का कत्ति पावडा /जागर/लोक गीत गढवाळ मा अबी तलक चलदन

राणी बर्त्वाल जी, राणी सिरमौर जी : पृथ्वी पति शाह को मोरणो परांत सात साल तक फतेशाह की अभिभावक का रूप मा
 
राणी बर्त्वाल जी न राज सम्बाळ , ए बीच मेदनी शाह मुग़ल दरबार मा ही राई . बीच मा राणी सिरमौर जी न बि अभिभावक का रूप मा राज करी


References;


1- Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand Ka Itihas Bhag 4
 
History of Garhwal, History of Kumaun)

2- Harikrishn Raturi Garhwal ka Itihas

3- Garhwal ka Aitihasik Birtaant in Garhwali and Memoir oof Garhwal as translation by Tara Datt Gairola



बकै अगने खंड 40 मा बाँचो ...

To be continued part 40





गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -40


गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 40



Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -40




भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti )
 मेदनी शाह (रा.का.1664 -1684 ई. )
मेदनी शाह एक अवसरवादी मनिख छयो. वैन 1661 ई. मा अपण बुबा ज्यू क राजगद्दी छीनी पण

लोखुंन वै तैं तबी राजा मान जब वैका बुबा ज्यू गुजरी गेन

सुलेमान सिकोह तैं मेदनी शाह न औरंगजेब तैं सौंप

बुटोळगढ़ पर अधिकार : मेदनी शाह की सेना मा सेनानायक तुंवर न बुटोऊळ गढ़ जीति

अर तुंवर सेनानायक तैं मेदनी शाह न बुटोला नेगी कि उपाधि दे थै.

पृथ्वीपुर कस्बा बसाण : औरंगजेब से मेदनी शाह तैं दून को पट्टा मील अर मेदनी शाह न अपण बुबा ज्यू का नाम पर उख

एक कस्बा बसै.

बाज बहादुर को आक्रमण : ये समौ पर पूरबी सीमा क रज्जा बाज बहदुर न गढवाळ पर आक्रमण करी थौ.

पुरिया नैथाणी : पुरिया नैथाणी एक होशियार राजनायक छौ . जब कै स्य्यिद न भाभर पर कब्जा करी त
 
मेदनी शाह न पुरिया नैथाणी तैं औरंगजेब का दरबार मा भेजी अर सईद बिटेन भाभर वापस ल़े .

पुरिया नैथाणी न औरंगजेब से कथगा ही कर ख़तम कर्रें. पुरिया नैथाणी क होशियारी का कथगा इ किस्सा

लोक कथाओं मा प्रसिद्ध छन अल्पवयस्क राजा प्रदीप शाह के रक्छा बि पुरिया नैथाणी न करी छे

मेरी गंगा ह्वेली तो मीमा आली: हरिद्वार मा जब हौरी राजाओं न गढवाली राजा से पैलि नयाणो

खड़यंत्र रच गंगा न अपनों रस्ता बदली अर गढ़वाळी राजा मेदनी शाह क शिविर का पास बगण बिसे गे

गुरु राम राय तैं जगा : मेदनी शाह न निरंकारी गुरु गुरु राम राय तैं देहरादून मा धामावाला गाँव डेरा बसाणे दे

मेदनी शाह क टैम पर कुमौं नरेश न उत्तरी गढवाळ पर आक्रमण बि करी

मेदनी शाह न डोटी नरेश से संधि करी छे

मेदनी शाह का टैम पर रानीतिक उठा पटक ही राई

 मनसबदार भीमसिंह /भीमसिंह बर्त्वाल:: १६५८-१६७८ ई. तलक मुग़ल दरबार मा गढवाल का द्वी प्रतिनिधि (मनसबदार ) छया.
 
एक को नाम भीम सिंह या भीम सिंह बर्त्वाल थौ. भीमसिंह तैं १००० जात अर ६०० सवार को मनसब मिल्युं थौ . सैत च

भीम सिंह राणी बर्त्वाळी को भै बंद राय होलू

मनसबदार प्रेम सिंह : प्रेम सिंह तैं बि १००० जात अर ५०० सवार को मनसब मिल्युं थौ.







References;

1- Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand Ka Itihas Bhag 4
 
History of Garhwal, History of Kumaun)

2- Harikrishn Raturi Garhwal ka Itihas

3- Garhwal ka Aitihasik Birtaant in Garhwali and Memoir of Garhwal as translation by Tara Datt Gairola



बकै अगने खंड 41 मा बाँचो ...
 
To be continued part 41





गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -41


गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 41



Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -41




भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti )
 महाराज फतेपति शाह (फतेशाह )(रा.का. १६६४-१७१६ ई. )

फतेपति शाह को राज्य काल क बारा मा इतियास कारुं मा घंघतोळ इ च .

फतेशाह वीर, पराक्रमी , भड़, सांसदार (साहसी) थौ जैक राज मा , पड़ोसी राजाओं दगड कथगा जुद्ध ह्वेन .

महाराज फते शाह न जिंदगी का भौत सा हिस्सा जुद्ध भूमि मा बितायेन . प्रजा क दगड वैको संपर्क बरोबर रौंदो थौ.

गढवाल का सीमान्त अडगै (क्षेत्र) मा आक्रमणकारियूँ से प्रजा की रक्षा करें मा अगने छौ .

महाराज फते शाह कवियों, विद्वानुं , चित्र्कारून बड़ो मान करदो छौ .

 

गुरु व पुरोहित : फते शाह का राज मा वृहस्पति ओझा, धीरेन्द्र जी, बागेश्वर ज्यू, गुणा नाथ जोशी
 
, मणि कंठ दुयाल, पूर्ण नन्द कंडवाल पुरोहित अर गुरु छाया

बजीर: चन्द्र मणि डंगवाल अर गजे सिंह भंडारी

राज ज्योतिषी : जटा धर मिश्र

बक्षी : केसर सिंह सुकेत्या , भोजवाण , भादल का बणिया

दीवान : चारो खत्री , गुलाब सिंह

भंडारी ; नित्या नन्द डोभाल

लेखवार : धीरज मणि पैन्युली

फौन्ज्दार ;

घाल का - बीरा नेगी
 
रवांई का : अर्जुन सिंग रायजादा, बलराम सकन्यानी
 
सल़ाण का : औतार सिंह भंडारी

भांग का : रौथाण , मेघा बुगाणि , गुणा, नत्थू , मिसर, सिद्ध साह

टकसाली : केसोपुरी, निर्मल पुरी
 
उमराव : असवाल, झिन्क्वाण , बर्त्वाल , सजवाण

मंत्री: धमादों दीना नाथ पल्याल

नागपुर खान को कारिन्दा : गरीबदास

नागपुर का कमीण : मदु रावत

दालिपोथा का खिदमत गार : दीना बुगाणों

बद्रीनाथ का रावल : नारायण, सीताराम

केदारनाथ का रावल : महालिंग

देहरा का महंत : माता पंजाब कौर

२४ राणियाँ ; महाराज फते शाह के चौबीस राणियां छे

१- सुकेत जी - २

२- कुमैणी जी -२

३- पश्चिम की -२

४-कहलूर की - २

५-बघाट कि -२

६ - मडी की - १

७- बिसर की -२

८- बर्त्वाली - २

९- झिन्क्वाणी -२
 
१०-बड़े पुरिया की- २

११-जस रोटा की -२

१२- जम्मू की -१

गुरु राम राय तैं गाँव दान : फतेशाह न गुरु राम राय तैं सात हौरी गाँव दान मा दिनी . अर फिर ड्यारा दू ण (देहरादून )
 
सहर बसणे शुरुवात ह्व़े

श्रीनगर मा गुरु राम राय मंदिर :फते शाह न एक गुरु राम को मंदिर श्रीनगर मा बि बणे छयो जु बिरही गंगा औगळ-बौगळ (बढ़ ) मा बौगी गे

सिरमौर से युद्ध : फतेशाह की सिरमौर से जुद्ध ह्व़े छौ .सिरमौर का हिसा पर कब्जा बि करी, पण औरंगजेब का दबाब में वापिस करी.
 
गुरु गोविन्द सिंग का दगड झडप : फते शाह की ख्द्प गुरु गोविन्द सिंह से अपण समद्युळ का वजे से ह्वीं

दाबा गढपतिको दगड लड़ाई: दाबा रज्जा न जब कर दींण बंद करी त फते शाह न वै पर आक्रमण करी एर वै तैं हराई

श्रीनगर पर कुमौं क रज्जा को अधिकार : १७०९ ई मा कुमाऊं का रज्जा को अधिकार श्रीनगर पर होई फिर १९१० मा

फते शाह न श्रीनगर अर बाकि जगाओं पर दुबार अपण अधिकार करी.

पुरिया नैथाणी का दौत्य कार्य: पुरिया नैथाणी के राज्नैयीक चतुरता का वजे से दिल्ली का बादशाह न गढवाल पर आक्रमण नि
 
करी.

कवि भूषण को गढवाल औण : फते शाह कवियुं आदर करदो छौ. इन बुले जांद कवि भूषण १६८५ का करीब गढवाळ ऐ थौ.

कवि मतिराम को गढवाळ औण : कवि मतिराम गढवाळ ऐ छौ अर गढवा ळ मा ' व्रितकौमादी' की रचना करी छे

कवि रतन (क्षेमराज) को गढवाळ औण : क्षेम राज कवि भौत सा साल श्रीनगर राज दरबार मा राई अर क्षेम राज न

कथगा इ संस्कृत ग्रन्थ रचेन जु अबी बि सेंट पीट्स बर्ग पुस्तकालय मा छन

राज सभा का नवरत्न : श्रीनगर दरबार मा नौ रत्न छया जौंक नाम इन छन :

सुरेशा नन्द बडथ्वाल

 रेवत राम धष्माना

 रुद्री दत्त किमोठी
 
हरि दत्त नौटियाल

 वासबा नन्द बहुगुणा,

किर्ती राम कैंथोला

 शशि धर डंगवाल

सहदेव चंदोला

 हरि दत्त थपलियाल

ज्योतिषी जटाधर मिश्र : जाता धर मिश्र न ज्योतिष पर कति ग्रन्थ लेखिन .

नीलकंठ : नीलकंठ संस्कृत को प्रकांड विद्वान् थौ

सुखदेव मिश्र : सुखदेव मिश्र संस्कृत को बड़ो विद्वान् छौ

राम चन्द्र कंडियाल: सभा कवि राम चन्द्र कंडियाल न संस्कृत मा ' फतेहशाहयशोवर्णन ' की रचना करी थौ.

चित्रकार श्याम दास ; चित्रकार श्याम दास दरबारी तसवीरदार छयो जो मेदनी शाह का टैम पर सुलेमान सिकोह का दगड श्रीनगर ऐ गे छयो

चित्रकार केहिर दास: केहिर दास श्याम दस को नौनु छौ अर दरबार क तस्वीर दार छौ

चित्रकार मंगत राम : श्याम दास को नाती मंगत राम बि दरबारी तस्वीर दार छयो.

References;


1- Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand Ka Itihas Bhag 4
 
History of Garhwal, History of Kumaun)

2- Harikrishn Raturi Garhwal ka Itihas

3- Garhwal ka Aitihasik Birtaant in Garhwali and Memoir of Garhwal as translation by Tara Datt Gairola



बकै अगने खंड 42 मा बाँचो ...

 To be continued part 42



Bhishma Kukreti

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Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #25 on: January 24, 2013, 01:47:16 PM »
गढवाळ का नामी लोक अर ज़ात (मलारी जुग बिटेन अज्युं तलक ) - फड़की -54

गढ़वाल के विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक) - भाग - 54



Great Garhwali Personalities (Malari era to till date ) Part -54


 
                 Bhishm Kukreti
 


                         गढ़वाळ का नामी-गिरामी पत्रकार/संपादक -2



            Great Jounalists/Editors of Garhwal - 2



सौ साल का जवान कुंवर सिंह नेगी "कर्मठ' : गढ़वाळ अर गढ़वाळी प्रति समर्पित जुझारू व्यक्तित्व

 
 


            सौ साल का कुंवर सिंह नेगी क स्वास्थ्य, प्रतिभा अर व्यक्तित्व बिलखणि च. कर्मठ जी एक स्वार्थहीन सामाजिक कार्यकर्ता.
 
गढवाळी साहित्य का प्रकाशक , लगन शील लेखक अर जीवट का संपादक छन. अच्काल इन व्यक्तित्व को सर्वथा

अकाळ पड्यूँ च .

        कुंवर सिंह कर्मठ को जनम सन उन्नीस सौ बारा (1912 AD) मा पांग गौं , तहसील पौड़ी मा ह्व़े छौ.

              पैल पैल १९३६ मा पैमैस क टैम पर पेपर कु ठेका लीण से कुंवर सिंह उर्फ़ 'कर्मठ' जी 'हिल पेपर कोंट्रेकटर ' का

नाम से प्रसिद्ध ह्वेन. कुछ समौ परांत कर्मठ जी न कालेश्वर प्रेस की स्थापना कार जख बिटेन भक्त दर्शन जी

अर भैरव दत्त धुलिया जे क संपादकत्व मा 'कर्मभूमि' साप्ताहिक छ्पदो थौ.

    सन  1942   मा भक्त दर्शन जी अर धुलिया जीक जेल जाण मा 'कर्मभूमि' क संपादन को काम
 
 कर्मठ जी न सम्बाळ.
 
                    पैथर कुंवर सिंग नेगी जी कालेश्वर प्रेस तैं कोटद्वार लै गेन. सनै सनै कौरिक कालेश्वर प्रेस

कोटद्वार मा छपण वाळ पत्र-पत्रिकाओं जन कि कर्मभूमि, सत्यपथ, हितैषी , क्षत्रिय वीर,

देव भूमि, हिमालय की ललकार, अर 'आवाज' क मुद्रक बौणि गे . लैंसडौन अर श्रीनगर मा बि कालेश्वर प्रेस के

ब्रांच रैन .

                     सन १९७६ मा कर्मठ जीन 'गढ़ गौरव मासिक' पत्रिका क प्रकाशन अर सपादन शुरू का. 'गढ़ गौरव '
 
पत्रिका सन १९७६ बिटेन आज तक छपेणि रौंदी .

 

            कर्मठ जी न गढवाली कथामाला , जैलाल वर्मा क 'गढवाली शब्दकोश, वेताल पचीसी , अर

अदित्य्राम दुधपूड़ी क भौत सी किताब क आलावा ग्ध्वालियों का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान,

डा पीताम्बर दत्त बडथ्वाळ क साहित्यिक जीवनी जन किताबुं प्रकाशन कार .
 
 

              भौत सी संस्थाओं न सौ साल कु जवान कुंवर सिंह नेगी जी क सम्मान कार.

 

                  कुंवर सिंह नेगी 'कर्मठ' जी कोटद्वार मा रौंदन .




Great Jounalists/Editors of Garhwal to be continued ....
 


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Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #26 on: January 24, 2013, 01:49:54 PM »


गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -17
गढ़वाल कि विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 17
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -17
भीष्म कुकरेती ( Bhishm Kukreti )
यशोवर्मन कु राज मा उत्तराखंड (725-752)
यशोवर्मन: तुक्का अर कुछ काव्य साहित्य क हिसाब से इन बुले जान्द बल यशोवर्मन (कान्यकुब कु राजा ) न उत्तराखुंट पर राज करी थौ. ह्व़े क्या छे बल तिब्बती राजा न नेपाल जितणो परांत गढवाल-कुमाऊं पर आक्रमण करी दे अर काब्य्कुब्ज कु राजा यशोवर्मन न तिब्बती राजा तैं लड़ाई मा हरे दे छौ अर कैंतुरा राजा /प्रशाशक मसंतन या वसन्तं तैं राज करणों मुख्त्यार बणे दे .
बकै खंड 18 मा बाँचो
To be continued in 18th Part ..
Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -3 ( History of Uttarakhand - 3
History of Garhwal, History of Kumaun )
बकै खंड 18 मा बाँचो
To be continued in 18th Part ..
गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -18
गढ़वाल कि विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 18
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -18
भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti )
कार्तिकेय का कत्युरी -राजवंश (732-1000 AD)
उन त इतिहासु जणगरों इकमत नी च बल कार्तिकेय तैं जोशीमठ का नजीक माने जाओ या कुमाऊं का कत्युर उपत्यका तैं. पण एक बात जरुर छ एक दें सरा उत्तराखुंट पर
कैंत्युराऊं राज छौ
कैंत्युराओं क तीन परिवार
कैंत्युराओं अभिलेख ( जोशीमठ, बागेश्वर, , पांडुकेश्वर , बालेश्वर, कालीमठ अर बडापुर से पता चलद बल एकी राजवंश का तीन परिवारों न न्याड ध्वार अपणी राजधानी बसै थौ अर राज करी थौ
शक- कुषाणों से सम्बन्ध : पुराण लिख्वार (इतिहास लेखक) कनिंघम को मणन च बल कनितुरा शब्द ' कटोर्मन या किटोरान ' से आई. राहुल बोल्दो बल कैंतुरौं सम्बन्ध शक- कुषाणों से थौ
खश जाती से सम्बन्ध : डा डबराल अपणी राय दीन्दन बल कन्त्युरा पैली खश रै होला. ओकले बुलद बल कार्तिकेय राजधानी से कैंत्युरा शब्द बौण.
वसंतदेव की साखी (वंशज) (732-800 AD)
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर वसंतदेव या मसंतदेव या भसंतदेव ( राज्यारम्भ ७३२ ई.) : इन माने जांद बल कन्त्युरा राज की पवाण (शुरुवात) वसंतदेव न लगै थै . वसंत देव धार्मिक वृति अर शौर्य वल़ू रजा छौ . वैन सैत च जोशीमठ को नृसिंह मंदिर की पौ धरी छे (स्थापना की )
राणी सज्यनरा : वसंतदेव की राणी सज्यनरा छे .
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर वसंतदेव को नौनु : ये नौनु को नाम अभिलेखों मा नी च बस परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर की पदवी लिखीं च . यू शिव भक्त थौ
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर खर्पर देव : खर्पर देव वसंत देव को नाती थौ .
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर अधिधज: अधिधज वित्त-विद्या-मान छौ
राणी लद्धा देवी अधिधज की राणी क नौ लद्धादेवी छौ अर वीन्का द्वी नौन्याळ छ्या
त्रिभुवन राजदेव : त्रिभुवन राजदेव कमजोर रज्जा थौ
निम्बर अर वैकी साखी (वंशज ) (800- 876)
निम्बर राजा : निम्बर रज्जा पांडूकेश्वर कु राजा थौ अर धार्मिक गम्भीर रज्जा थौ
राणी नाशुदेवी : निम्बर राजा की अग्रम्हिषी को नाम नाशु देवी छौ
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर इष्टगण देव : इष्ट गण देव निम्बर कु राजकुमार छौ . वैकी द्वी राणी छे . वो अपण तलवार से हाथियुं तैं काटी दींदु थौ
धरादेवी : धरादेवी इष्ट गण देव कि राणी छे
वेग देवी : वेग देवी बि इष्ट गण देव की राणी छे
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर ललितशुरदेव : इष्टदेव कु राजकुमार कु नौ ललितशुरदेव थौ
लयादेवी राणी : लयादेवी ललितशुर देव की राणी छे
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर भूदेव : भूदेव ललित शूर देव कु राजकुमार छौ भूदेव ब्रह्मण भक्त अर बुद्ध-श्रवण शत्रु छौ यानि कि कखी ना कखी वो बुद्ध धर्म को विरुद्ध छौ
सलोणादित्य अर वैकी साखी (वंशज) (876-1000 AD)
सलोणादित्य : सलोणादित्य की राजधानी सुभिक्षपुर छे
राणी सिन्धवली देवी : सलोणादित्य की राणी सिन्धवळी देवी छे
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर इच्छट देव : इच्छ्ट देव सलोणादित्य को राजकुमार थौ
राणी सिन्धुदेवी : इच्छ्ट देव की राणी सिन्धुदेवी छे
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर देशट देव : इच्छ्ट देव कु नौनु देशट देव बामण पूजक अर दानि थौ . वैकी प्रतिहार नरेश से भिडंत ह्व़े छौ जैमा जीत देशट देव की ही ह्व़े . मैदानी खसरों (रिकार्ड) मा इच्छ्ट देव तैं खशाधिपति माने गे
पदमल्ल देवी : देशट देव की राणी कु नौ पदमल्ल देवी छौ
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर पद्मट : पद्मट पराक्रमी रज्जा थौ
राणी दिशाल देवी : पद्मट की राणी दिशल देवी छे
परम भटटारक महाराजाधिराज परमेश्वर पद्मट सुभिक्षराज : इन बुले जांद बल वो बैरी विणास मा कुशल रज्जा थौ. बैर्युं क्ज्यान /राणी कु हरण करण मा उस्ताद छौ अर सलोणादित्य कैंतुरा वंश को आख़री चिराग बि छौ
भट्ट भवशर्मन बामण : भट्ट भवशर्मन बामण सैत च सुभिक्ष राज का आमात्य थौ अर भट्ट रूद्र - भोगा वळी को नौनु थौ
नरसिंह देव : इन माने जांद बल सलोणादित्य कैंतुरा वंश का बाद नरसिंघ देव कैंतुरा न राज सँभाळी थौ अर राजधानी बैजनाथ ल्ही गे छौ
कैंतुरा नरेश चरित्रवान , भड़ , बीर अर जनता का प्रेमी छया तबी त अबी तलक कुमौं अर गढवाल मा कैंत्युरा नचाये जान्दन
कैंतुरा राजाऊं न गढवाल-कुमौं मा तिब्बती राज तैं आण से र्वाक अर मैदानी राजाओं पर बि रोक लगाई
अगने बाँचो शंकराचार्य को गढवाल औण .....
Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -3 ( History of Uttarakhand - 3
History of Garhwal, History of Kumaun )
बकै खंड 19 मा बाँचो
To be continued in 19th Part ..
गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -19
गढ़वाल कि विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 19
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -19
भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti )
शंकराचार्य (788-820AD) कु गढवाल औण
Arrival of Shankaracharya in Garhwal
शंकराचार्य कु जनम केरल मा कलटी गाँव मा शिव गुरु नाम्बुदिपराद अर विशिष्ठा या सती को ड़्यार ह्व़े . बुबा बाल़ापन मा गुजर गे छौ अर शंकर बाल़ापन मा इ सन्यासी ह्व़े गे छौ
शंकर न बचपन मा ही उपनिषद अर ब्रह्मसुत्रुं ज्ञान ल़े आली थौ . १२ बरस मा कशी मा वैन वेदान्त को प्रचार शुरू करी.
शंकर गढवाल कि तरफ चली जख वैकी मनशा व्यासगुफा मा वेदांत सूत्र लिखणे छे अर ऋषिकेश मा औण पर पता चौल बल पुजारियों न तिबतियों डौर न विष्णु मुरती लुकाई दिनी . शंकर न मुरती को उद्धार करी अर फिर से मन्दिर मा मुरती थर्पी .
बद्रिकाश्रम औण पर पता चली बल तिब्बती लुठेरों डौरन बद्रेश्वर की मुरती नारद कुंड मा लुकायीं च . शंकर ण वा खंडित मूर्ती को उद्धार करी अर फिर से मंदिर मा थर्पी .
शंकर न व्यासगुफा (माणा गौं मथी ) मा ब्रह्म सूत्र, भगवद्गीता, उपनिषदों पर भाष्य लिखी
शंकर न भारत का चरी कूणो मा शृगेरी, गोवर्धन, शारदा अर ज्योतिर्मठ की स्थापना बि करी
शंकर केदारनाथ मा ३२ साल कि उमर मा (८२० ई.) परलोक गेन
शंकरं बद्रिकाश्रम कि पूजा विधान का नियम बि बणेन अर अपनों पैलू च्याला तोटकाचार्य तैं यू काज सौंप.
820 AD--1222 AD तलक बदीनाथ की पूजा अर ज्योतिर्मठ की व्यवस्था आचार्य करदा था . फिर केरल का रावलुं हथ मा या गद्दी आई
820 AD--1222 AD तलक बद्रीनाथ मा तौळ लिख्यान उनीस (19 ) आचार्य ह्वेन जौन बदीनाथ की पूजा अर ज्योतिर्मठ की व्यवस्था करी
तोटकाचार्य
विजयाचार्य
कृष्णाचार्य
कुमारोआचार्य
गरुड़ध्वजाचार्य
विन्ध्याचार्य
विशालाचार्य
वकुलाचार्य
वामनाचार्य
सुन्दरअरुणाचार्य
श्री निवाशाचार्य
सुखनंदाचार्य
विद्यानन्दाचार्य
शिवाचार्य
गिरिआचार्य
विद्याधराचार्य
गुणानन्दाचार्या
नारायणाचार्य
उमापतिआचार्य
शंकराचार्या को भारत मा सांस्कृतिक एकता बणाणो बान बड़ो योगदान च
Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -3 ( History of Uttarakhand - 3
History of Garhwal, History of Kumaun )
बकै खंड 20 मा बाँचो
To be continued in 20th Part ..
गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -20
गढ़वाल कि विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 20
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -20
भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti )
वैद्यनाथ का कत्युरी राजसाखी (राजवंश 100-1100 )
जु बि वजे रै होली 1000 AD का न्याड ध्वार , कत्युरी राजा नरसिंघ देव अपणो कोट (अपणी राजधानी ) कार्तिकेय बिटेन बैजनाथ ल्ही गे.
इतिहास्कारुं तैं कत्युरी वंश का तीन परिवारून जानकारी मिल्द
डोटी वंशावली : पिथियराजदेव , धामदेव अर ब्रह्म देव
असकोट वंशावळी : प्रीतामदेव , धाम देव, ब्रह्मदेव
पाली वंशावळी : धामदेव , ब्रह्मदेव
जागरुं मा कत्ति राजाओं जागर लगदन
प्रीतमदेव : प्रीतमदेव सैत च नर्सिंग्देव कू वंशज नी छयो अर नरसिंघ देव कू स्व़ार बहार रै होलू . जागरूं मा प्रीतम देव की दस साखुं बिरतांत बुले जान्द
अमरदेव पुंडीर :प्रीतम देव का समौ पर यू हरिद्वार का न्याड धोरा क रज्जा या सामंत छयो अर वैकी बेटी को नाम मोलादेई थौ जैन ब्यौ प्रेतं देव से ह्व़े थौ
राणी मोलादेई : राणी मोलादेई को ब्यौ बुड्या राजा प्रीतम देव से ह्व़े छौ . अमरदेव पुंडीर न अपण राजकुमारी को ब्यौ प्रीतम देव को दगड डौरन करी थौ . राणी मोलादेई बद्रीनाथ बि गे छई .
धामदेव : धामदेव प्रीतम देव को बुद्यांद दें औलाद छे वैकी ब्व़े मोलादेई छे . जग्रून मा धामदेव कि बड़ी बडंचइ होंद
ब्रह्मदेव : ब्रह्मदेव धामदेव को उत्तराधिकारी थौ
जगस समवा : जगस समवा न धामदेव अर ब्रह्मदेव की मौ मदद करी छे . ब्रह्म देव न भाभर क्षेत्र समवा की मदद से जीति छे
वीरदेव: इन लगद वीरदेव गढवाळ मा कत्युरा वंश को आखरी रज्जा छौ पन कुमाऊं मा राज राई अर मनराल जात का लोक कन्त्युरा जाती का छन अर वूं कुछ समौ तक कुमौं मा राज करी. नरसिंग देव का वंशजूं राज 1100 AD तलक रै होलू
त्रिभुवन पालदेव की साखी ( वंशज ) (1100 AD- 1223 AD)
रामदत्त त्रिपाठी कि पोथी से वैद्यनाथ - कार्तिकेय मा ११०० बिटेन १२२३ ई तक यूँ राजाओं न राज करी
१- त्रिभुवन पालदेव
२-पता नीच
३- पता नी च
४-उदयपाल देव ( ११५२ ई)
५- अनंत पालदेव (११८१ ई)
६- इंद्र देव ( १२०२ ई)
६ अ - राणी दमयन्ती : दमयंती राणी न चौघाड़पाटा मा एक बग्वान (उद्द्यान) बणे छौ
७- विजयपाल देव (१२१४ ई)
८- लक्ष्मण पाल देव
९- बल्लाल देव ( १२२३ ई.)
गुलण : गुलण (११४३-११४५ ) न द्वारहात अर गोपेश्वर मा मंदिर बणे छ्या
साधुवर देव ; साधुवरदेव न द्वारहात मा बद्रीनाथ मन्दिर निर्माण अर उखमा मा लक्ष्मी जी कि मुरती (११८५) स्थापित करी छे अर गोरिल मंदिर (१२१९ ई) की स्थापना बि करी छे
मण देव : मण देव न केदारनाथ मार्ग पर नालाचट्टी मा एक मन्दिर (१२४२) बणे छौ
माधवा नन्द को गढवाळ औण
वैष्णव धर्म प्रवर्तक ११५३ का करीब बदरीनाथ मन्दिर आई छया
कैंतुरा जागर अर ये रणभूत जागर का नामी मनिख मनख्याणि
कालू भंडारी : यू म्ल्लूं मा श्रेष्ठ मल थौ अर ध्यान्माला क कारण लड़ाई करणों गे
ध्यान माला ; ध्यान माला राजा धर्म देव कि बेटी छे अर कालू भंडारी क मोरण क बाद सती ह्व़े छे
रूपु गंगसारा : रूप गंगसारा गंगाडी हाट को राजकुमार छौ अर ध्यान माला दगड ब्यौ बान धर्म देव की राजधानी आई.रूपु गंगसारा तैं कालू भंडारी न मारी
लूला गंगोला : लूला गंगोला रूपु गंगसारा को भुला छौ अर वैन धोका मा कालू भंडारी तैं मारी
Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -3 ( History of Uttarakhand - 3
History of Garhwal, History of Kumaun )
Dr Shiva Nand Nautiyal, garhwal ke Nrity Geet
बकै खंड 21 मा बाँचो
To be continued in 21st h Part ..
गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -21
गढ़वाल कि विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 21
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -21
भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti )
उत्तराखंड पर अशोकचल्ल को अधिकार
1170-1209 AD गढवाल अर कुमाऊं पर अशोकचल्ल को अधिकार रै .इन लगद अशोक चल्ल नेपाल को वासिन्दा थौ
क्राचल्ल को उत्तराखंड पर अधिकार
नेपाल विजेता क्राचल्ल न कीर्तिपुर (वैद्यनाथ) का राजौं तैं ध्वस्त करी अर उत्तराखंड पर राज कायम करी. क्राचल्ल न उत्तराखंड पर सामंतों बल पर राज करी .
क्रा चल्ल का साम्न्तुं नौ इन च :
१-बल्लालदेव मांडलिक
२- जय सिंह मांडलिक
३- हरि राज राउत
४- अनिलादित्य राउत
५- चन्द्र देव मांडलिक
६- विनय चन्द्र मांडलिक
७- विद्या चन्द्र मांडलिक
८- याहड देव मांडलिक
९- जीहल देव मांडलिक
१०- मूस देव मांडलिक
अगने ८० गढुं को ब्यौरा
Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -3 ( History of Uttarakhand - 3
History of Garhwal, History of Kumaun )
बकै खंड 22 मा बाँचो
To be continued in 22nd Part ..
गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -22
गढ़वाल कि विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 22
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -22
भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti )
गढवाळ मा 52 से बिंडी गढ़ी (1250-1450 AD)
क्राचल्ल या वैक उत्तराधिकार्युं राज खतम हूणओ उपरान्त गढवाळ-कुमाऊं मा जगा जगा छ्व्ट छ्व्ट राजा ह्व़े गेन जौन तैं गढ़पति बुले जांद थौ. असल मा य़ी गढ़पति अपण अपण क्षेत्र का सूबेदार/सामंत/मांडलिक छ्या जु बाद मा सोतांतर ह्व़े गेन.डा शिव प्रसाद न जख ८० का करीब गढ़पत्युं का गढ़ूं नाम बताएं उख डा चौहान न १२६ से बिंडी गढ़ूं नाम देनी .असल मा य़ी गढ़पति अपण अपण क्षेत्र का सूबेदार/सामंत/मांडलिक छ्या जु बाद मा सोतांतर ह्व़े गेन.
गढ़ूं नाम अच्काल का परगना
गढ़ तांग , पैनखंडा खाड, दशौली टकनौर, पैनखंडा, दशौली
बधाण, चांदपुर, चौड़ ,तोप, राणीगढ़, लोहाब, धौना, बनगढ़, कांडा, गुज्डू , साबली, बधाण, चांदपुर, मल्ला सलाण
उल्का, एडासु, देवल, नयाल, कोल्ली, धौना, , बन , कांडा, चौन्दकोट देवलगढ़ बारहस्यूं , चंद्कोट, देवलगढ़ बारहस्यूं , चंद्कोट
माबगढ़, बाग़, अजमेर, श्रीगुरु तल्ला सलाण
मवाकोट, गड़कोट, भैरों गढ़, घुघती गढ़ , ढागु गढ़ , जोर, बिराल्टा, सिल गढ़ , गंगा सलाण, भाबर, नरेन्द्रनगर, देहरादून
बदलपुर, लालढांग, चांडी, सान्तुर, कोला, शेर, नानोर, नाला, बीरभद्र, मोरध्वज,
पत्थर गढ़ , कुजणी, रत्न, कवीला (कुइली) , भरपूर,
जोर, बिराल्टा, सिल गढ़, मुंगरा, सांकरी, बडकोट, डोडराक्वांरा , रामी जौनपुर, रवाईं. महासू, शिमला
नागपुर, कंडारा, नागपुर
उल्का, एडासु, देवल, नयाल, कोल्ली, धौना, , बन , कांडा, चौन्दकोट देवलगढ़ बारहस्यूं , चौदकोट
उप्पू,मौल्या, रैन्का, बागर, भरदार, संगेला पश्चमी पठार, (टिहरी)
यांक अलावा गाथाओं मा
मलुवाकोट, अमुवाकोट, कल्निकोट, रामोलिगढ़, लोहानिगढ़, कत्युर गढ़ , कोककोट, कलावती कोट, नंदनी कोट, धरनी गढ़ , मलसिगढ़, कोतली गढ़, भानी कोट, चांडी कोट, जण गढ़युं को नाम बि आन्दन
सजनसिंह : सजनसिंह नागपुर गढ़ को आख़री गढ़पति थौ
दिल़ेबर सिंह : लोहाब गढ़ को गढ़पति छौ
प्रमोद सिंह : इन बुले जान्द बल प्रमोद सिंह लोहब गढ़ को गढ़पति छौ
देवल : इन बुले जान्द बल देवल न देवल गढ़ की स्थापना करी छे
घिरवाण : इन माने जान्द बल बागर गढ़ मा घिरवाण खशपत्युं राज राई
कफ्फु चौहान : भड़ /बीर कफ्फु चौहान उप्पुगढ़ को गढ़पति राई
भूप सिंह : इन बुले जांद बल भूप सिंह जौनपुर गढ़ को आखरी गढ़ पति थौ
Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -3 ( History of Uttarakhand - 3
History of Garhwal, History of Kumaun )
बकै खंड 23 मा बाँचो
To be continued in 23nd Part ..
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Bhishma Kukreti

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Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #27 on: January 24, 2013, 01:50:31 PM »
गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -23
गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 23
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -23
भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti )
चाहमान गढ़पतियुं क गाथा ( 13 वीं ईस्वी सदी मा )
जै बगत मोहम्मद घोरी को आक्रमण अर अर दिल्ली मा पृथ्वी राज चौहान अर दिल्ली मा तोमर साम्न्तुं राज छयो वै बगत सैत च गढवाल का भौत सा गढून पर चौह्मान या चौहाण
१- अजमेर का चौहाण गढ़ पति : सलाण अजमेर (अजयमेरु) मा चौहाण गढ़पत्युं राज रायो
२- पयाळ गढ़पति : इन बुले जांद बल पैठारा अजमेर पर पयाळ जाती वालुं राज ह्व़े छौ
३- क्राचाल्ल को बाद भौत सा चौहाण सामंत /मांडलिक न अपणो अपणो गढ़ों पर अधिकार करी छौ
चौहाण की बारा तेरा (12- 13 ) शाखाओं क ब्योरा मिल्द ( रतूड़ी : गढ़वाल का इतिहास) : य़ी चौहाण ज़ात छन
१- झिन्क्वाण
२-तुलसारा
३-मकरोला रावत
४- परसारा रावत
५- धम्मादा बिष्ट
६- अस्वाळ ( या जात घवा डों की सवारी मा प्रवीन छे अर घ्वादों चित्र बि बणादा छ्या इलै अश्वारोही से अस्वाळ ह्व़े )
७- लोभन नेगी / लोहवान नेगी : य़ी साखि मा दिलवर सिंह अर प्रमोद सिंह नामी गढ़पति छ्या . यीं ज़ात की बड़ें गढ़ राजवंश मा भौत च
८- रमोला
९-अजमेर का चाहमान
१०-खैलपुर का चाहमान
११- चांदपुर का चाहमान
१२- उप्पुगढ़ का चाहमान
१३- कंडारा गढ़ का दुमग चौहान
दक्षिण गढ़वाळ का चौहाण
१- अजमेर का चौहान
२- रतनगढ़ का धम्मादा चौहाण : कुंजणि मा ब्रह्मपुरी का मथिन रतनगढ़ छौ अर वख एक दें धम्मादा बिष्टउन को राज थौ
३--मायापुर हाट : मा पुंडीरूं राज थौ
४- ज्वालापुर हाट या खैलपुर का चाहमान : इख का छै साख्युं /पीढी का राजाओं नाम इन छया
अ- उर्मी नाग
ब- कुर्मी नाग
स- राय मंगल
ड़- अफती
ई. धामदेव अर वैका छै भाई . इन बोले जांद बल पुंडीरूंन धाम देव अर वैका छै भैयुं तै मारिक कब्जा करी छौ
धामदेव का ७ नौन्यालुं मा से तीन नाम (ओकले अर गैरोला )
१- जीत सिंह
२- भूप सिंह
३-केदार सिंह
४- उत्तम सिंह
उप्पू गढ़ का कफ्फू चौहान : क्फ्फु चौहाण बड़ो भड़ छौ पण पंवार नरेश अजयपाल ण क्फ्फु चौहाण तै हरैकी उप्पू गढ़ पर अधिकार करी थौ
चांदपुर गढ़ का चौहाण
चांदपुर गढ़ युद्ध व्यूह रचना को हिसाब से महत्व पूर्ण गढ़ छयो.
भानु प्रताप : चांदपुर गढ़ी मा सबसे प्रसिद्ध गढ़ पति भानु प्रताप ह्व़े
मंगल सिंह : मंगल सिंग भानुप्रताप को राजकुमार छौ जैन अपण राज भौत फैलाई
हालांकि रतूड़ी को मत कुछ अलग ही छौ
भिलंग गढ़ का चौहान
सोनपाल : सोनपाल भिलंग गढ़ को राजा छौ अर वैक एकी नौनी औलाद छे . नौनी कू ब्यौ पंवार बंश को पैलो रज्जा कंक्पल क दगड कौरिक
पंवार बंश को श्रीगणेश करी थौ
पैन खंडा का बयालीस गढ़ पति
जुमल़ा चौहाण : टिहरी हस्तलेखऔ मुताबिक पैन्ख्नाडा मा हरेक गाँव एक गढ़ (राज) छौ . ए हिस्सा मा ४२ जुमला चौहान गढ़पत्युं राज छौ ( 1270 - 1321 AD)
Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -3 ( History of Uttarakhand - 3
History of Garhwal, History of Kumaun )
बकै खंड 24 मा बाँचो
To be continued in 24th Part
गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -24
गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 24
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -24
भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti )
देवपाल राजा अर उत्तराधिकारी (1250 -1280 ई.)
देव पाल अर वैका उत्तराधिकारी (१२५० - १२८० ई) : देवपाल अर वैका उत्तराधिकार्युं न पच्छमी गढ़ देश पर बलवन का करीब राज करी. राज बलबन न देव पाल को राज्य प्र१२५७ ई मा आक्रमण करी छौ .
एकचक्रा को बाहुबाण (चाहुबाण) राजबंश (तकरीबन 1280 -1390 AD )
जण श्रुति, अर अल्लाठनाथ की द्वी संस्कृत पोथी ' निर्णय सूत्र' अर 'सकलपुराण सम्मुचय' को हिसाब से डा. शिव प्रसाद डबराल न बतायी बल पच्छमी गढवाल अर जमुना का पूर्ब (चकराता जिना)
चौहाण (बाहु बाण ) जाती क 1230 - 1420 ई. राज राई अर राजधानी क नाम एकचक्री थौ .
सरूप बाहुबाण (चौहाण ): सरूप एक बीर भड़ थौ अर वैन बाहुबाण राज्य की स्थापना 1230 AD का करीब करी.
कर्ण देव : कर्ण देव राजा सरूप को नौनु थौ अर त्यागी, दानी, भड़ व शिव भक्त छौ
उद्धरण : कर्ण देव कू लौड़ एक बड़ो भड़, गंभीर, धीरू अर सुमति वल़ू राजा थौ, वैकी लड़ाई सीमा पर दिल्ली क रज्जा/सामंत का दगड बि ह्व़े
चन्द्र सेन : उद्धरण कू नौनु बि बड़ो दानि अर शैव्य थौ
सूर्यसेन : चन्द्र सेन कू बड़ो नौनु का नाम सूर्यसेन छौ अर वै ही राजा न अल्लाट नाथ तै 'निर्णय सूत्र ' लिखणो प्रेरणा दे थै .
अल्लाट नाथ सूरी : अल्लाट नाथ सूर्यसेन को राज दरबार मा संकृत को पंडित छौ. अल्लाट नाथ सुरी न 'निर्णय सूत्र' अर सकल पुराण सम्मुचय ' पुस्तक लेखिन.
'निर्णय सूत्र ' एक धर्म शाश्त्र पर नामी किताब छे अर पैथराँ निर्णय सिन्धु, तीर्थ निर्णय , कालनिर्णय , निर्णय दीपक जन किताबुं मा 'निर्णय सूत्र' का उदाहरण दिए गेन
निर्णय सूत्र का पैली भाग मा अल्लाट नाथ सुरी न सूर्यसेन की चार साख्युं (पीढी ) का वर्णन करी
प्रताप सेन : सूर्य सेन कू भुला कुंवर प्रताप सेन अपण बड़ा भैजी क बान लक्ष्मण को जन आज्ञाकारी थौ
देव सेन : देव सेन बि अपण ददा बुबा क तरां बीर अर शिव भक्त थौ
रतन सेन अर उत्तराधिकारी (1390-1420)
रतनसेन अर उत्तराधिकारी : रतन सेन अर वैका उत्तराधिकार्युं समौ १३९०-१४२० का माने जांद अर यूँ राजाओं क राज पच्छमी गढवाल ही थौ .तैमुर लंग न यूँ को राज पर चढ़ाई करी थै .
देवसेन : देवसेन रतनसेन को वंशज थौ
तुगलक उत्तराधिकारी तैं शरण : तुगलकों पर जब मुगलों न आक्रमण करी त देव सेन या रतन सेन न फिरोज तुगलक का बेटा मुम्मद खां तैं शरण दे छे
Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -3 ( History of Uttarakhand - 3
History of Garhwal, History of Kumaun )
बकै खंड 25 मा बाँचो
To be continued in 25th Part

गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -25
गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 25
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -25
भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti )
तुगलक का समौ का पूरबी गढवाळ का रज्जा
तुगलक समौ पर पूरबी गढवा ळ मा तौळ लिख्यां रज्जा छाया :
वत्सराज (बहरूज़ ) , श्रीधर : यूँ का राज 1390 -1440 ई. बताये जांद
जगतपाल रजवार : जगतपाल रजवार को राज समौ तकरीबन 1440 - 1460 ई. माने जांद
जितपाल, आनंद पाल : जितपाल, आनंद पाल को राज कू समौ 1460 -1500 ई. माने जांद
श्रजयपाल : श्रजयपाल को राज को टैम 1500 -1548 ई. माने गे
सत्यनाथ सम्प्रदाय : ये समौ पर गढवाल मा गुरु गोरखनाथ का सत्यनाथ शाखा को प्रभाव ह्व़े गे छौ
Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -4 ( History of Uttarakhand - 4
History of Garhwal, History of Kumaun )
बकै खंड 26 मा बाँचो
To be continued in 26th Part
गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -26
गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 26
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -26
भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti )
पंवार बंश को मूल पुरुष अर राज्य स्थापना वर्ष मा घंघतोळ (भरम)
गढवाळ मा पंवार बंशी राज की स्थापना कब अर कैन कार याँ पर क्वी बि इतिहासकार एकरायी नी च.
इतिहासकारुं मा तौळ क कुछ आधार छन :
भोग दत्त की जनश्रुति ; या जनश्रुति लिखीं च अर सबसे पुराणी जनश्रुति माने जान्द. य़ी जनश्रुति क हिसाब से अहमदाबाद कू बासिन्दा व्यवसाय की खोज मा
भोगदत्त अपण भुला सेज्दत्त क दगड श्रीनगर आये अर चांदपुर रज्जा क इख नौकरी करी फिर वैन चांदपुर राजा की गद्दी छीनी अर राजा बौणि गे .
पैथर वैन हौरी बि गढी जीतें. 900 साल उपरान्त भाग दत्त का 15 वां उत्तराधिकारी अजेयपाल ह्व़े अर तिहातरवीं पीढ़ी मा प्रद्युम्न शाह ह्व़े
भौन पाल की जनश्रुति : भौन पाल की जनश्रुति क हिसाब से भौनपाल धारा नगरी को छौ अर हरिद्वार ऐका खेती करदो छौ. एक जोगी क प्रेरणा से वैन गढवाल का बावन
गढीयों जीतिक पंवार बंशी राज की स्थापना करी
कनक पाल की अनुश्रुति : कनक पाल की अनुश्रुति क हिसाब से गुजरात बिटेन कनकपाल गढ़देश आई छौ , वैकी मृत्यु 699 ई मा ह्व़े सतरवां बंशज अनंतपाल की
राजधानी मलुवाकोट, एकीसवाँ बंशज विक्रम शाह की राजधानी अम्बुवाकोट अर चौबीसवां बंशज सोनपाल की राजधानी भिलंग घाटी मा छे.
सोनपाल न अपणी बेटी क ब्यौ धारा नगरे क राजकुमारकनक पाल को दगड करी अर वै तैं अपणो उत्तराधिकारी बणाय़ी
अगने बाँचो पंवार रज्जों की नामावली
Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -4 ( History of Uttarakhand - 4
History of Garhwal, History of Kumaun )
बकै खंड 27 मा बाँचो
To be continued in 27th Part
गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -27
गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 27
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -27
भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti
गढ़ राज्य राजाओं क नामावली
गढ़ राज्य या गढ़वाल (पंवार बंशी ) का रज्जौं पांच नामावली मिलदी :
१- हार्डविक्क की अंकित गढ़ नरेशों की नामावली : उन त या नामावली सबसे पुराणी च पर भरवस कर्ण लैक नी च. इख्मा प्रद्युम्न शाह तलक 74 रज्जों नाम च
२- मौलाराम की गढ़ नरेश नामावली : मौलाराम श्रीनगर रजा क इख दरबारी कवि अर चित्रकार थौ
३- अल्मोड़ा कू एक पंडित मांगन मिलीं गढ़ नरेश नामावली
४- वेकट की छ्पयीं गढ़ नरेश नामावली
५- विलियम्स की छाप्यीं गढ़ नरेश नामावली
सोमपाल का बूड-खूड (पूर्वज )
मौलाराम की नामवाली अल्मोड़ा की नामावली बेकट की नामावली विलियम्स नामावली
१- भौनपाल (भौना ) १- भगवान् पाल
२- अभयपाल २- अभयपाल
३- विशेष पाल
३-कर्ण पाल ४-कर्ण पाल १- कनकपाल १- कनकपाल
४- विशेषण पाल ५- क्षेम पाल २- श्याम पाल २- विशेश्वर पाल
५- सोमपाल ६- व्यक्त पाल ३- सुमति पाल
६-विगतपाल ७- सुरथपाल ३- पांडु पाल ४- पूरण पाल
७- सुरथ पाल ८- जयति पाल ४- अभिगत पाल ५- अभिगत पाल
८- जैत पाल ९- पूर्ण पाल ५- सीगाल पाल ६- भुक्ति पाल
९- पूर्ण पाल १०- अव्यक्त पाल ६-रत्न पाल ७- रेतिपाल
१०-सत पाल ११- शालिवाहन ७- शालिवाहन ८- शालिवाहन
११- अविगत पाल १२- संगती पाल
१३- मंगति पाल
१२- शालिवाहन पाल १४- रतन पाल
१३- संगीत पाल १५- मदनपाल ८- विधिपाल ९- मदनपाल
१४-मंगीत पाल १६-विधिपाल ९- मदन पाल १०- विधि पाल
१५- रतनपाल ११- भगदत्त पाल
१६- मदन पाल
१७- विधि पाल
१८- भग दत्त पाल १७ भग दत्त पाल १० भक्ति पाल १२- बिभोग पाल
१९- चन्द्र पाल १८- जय चन्द्र पाल ११- जय चन्द्र पाल १३- जय चन्द्र
२० कीर्ति पाल १९- कीर्ति पाल १२- पृथ्वी पाल १४- हीरत पाल
२१- मदन सिंह पाल २- मदनपाल १३- मदनपाल १५- मदन सहाय पाल
१४- अगस्त पाल १६- अविगत पाल
१५- सुरति पाल १७- सूरज पाल
१६- जयत सिंह पाल १८- जयत पाल
१७- अनंत पाल
२२- अणिबुद्ध पाल २१- अनिरुद्ध पाल १८- आनंद पाल १९- अनिरुद्ध पाल
२३- विभीगिरी पाल २२- विभोगति पाल १९- विभोग पाल २० - विभोग पाल
२४- विधान पाल २३- सुवधन पाल २०- सुभाजन पाल २१-गुमान पाल
२५-विक्रम पाल २४- विक्रम पाल २१- विक्रम पाल २२- विक्रम पाल
२६- बिर्ज पाल २५- विजय पाल २२ - विचित्र पाल २३- विचित्र पाल
२७- सहज पाल २६- हंस पाल २३ - हंस पाल २४--हंस पाल
२८ सोनपाल २७- सोनपाल २४ सोनपाल २५ सोन (सुवर्ण) पाल
अग्वाडि का खंड मा कान्दिपाल (सोनपाल कू जवें ) का साख्युं (वंशजूं ) बारा मा बाँचो......
Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -4 ( History of Uttarakhand - 4
History of Garhwal, History of Kumaun )
बकै खंड 28 मा बाँचो
To be continued in 28th Part
गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -28
गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 28
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -28
भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti
कांदिल पाल अर वैकी साखी (बंशज) याने जगतपाल से पैलाक रज्जा
सोनपाल का क्वी नौनु णि थै अर वैन अपण नौनी क ब्यौ कान्दिलपाल को दगड करी अर राज बि दे
मौलाराम की नामवाली अल्मोड़ा की नामावली बेकट की नामावली विलियम्स नामावली
१- कान्धपाल १- कान्ह्पाल १- कांदिलपाल १- कांतीकृपाल
२- सहदेव पाल २- संधि पाल २- काम देव पाल २- कामदेव
३- सुलक्षणपाल ३- सुलक्षण देव ३- सुलक्षणपाल ३-सुलक्षणपाल
४-लक्ष्मणपाल ४- लक्ष्मणपाल ४ लखन देव ४- महालक्ष्मणपाल
५- अलक्षणपाल ५-अलक्षणपाल
६- अनन्तपालदेव ६- अनंत पाल ५-अनंत पाल ५- सतपाल
७- अपूर्वपालदेव ७- अभिपाल ६- पूर्वदेव ६- अपूर्वदेव
८- अभयपालदेव ८- अभयपाल ७- अभयदेव
९-अजेयपाल देव ९- अजयपाल ८- जयरामपाल
१० अजयपाल देव १०- अजेयपाल
११- प्रतापपाल ११- असाप्रतापपाल ९- असलदेव
१२- राजपालदेव १२- जयदेवपाल ७- जय
अगने कू खंड मा जगतपाल की साख्युं (वंशज ) का बारा मा बांचो....
Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -4 ( History of Uttarakhand - 4
History of Garhwal, History of Kumaun )
बकै खंड 29 मा बाँचो
To be continued in 29th Part
गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -29
गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 29
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -29
भीष्म कुकरेती (Bhishm कुकरेती
जगतपाल की साखी (वंशज ) अर टिहरी राज का रज्जा
मौलाराम की नामावली अल्मोड़ा की नामावली बेकट की नामावली विलियम्स नामावली
१- देवपाल १- गणितपाल १- जगत पाल १- जितर्ग पाल
२- जितारथपाल २- जितारथपाल २- जितपाल
३-कल्याणपाल ३- कल्याणपाल ३- आनंदपाल २- कल्याणपाल
४- अनंत पाल ४- अनपाल ४- अजयपाल ३- अजयपाल
५- दिपांतपाल ५- दिपाल
६- प्रियनिहार जैपाल ६- प्रियनिहार ५- कल्याण पाल ४- अनन्तपाल
७-सुन्दर पाल ७- सुन्दर पाल ६- सुन्दर पाल ५- सुन्दर पाल
८- सहज पाल ८- सहज पाल ७- हंसदेव पाल ६- सहज पाल
९- विजय राजपाल ९- विजयपाल ८- विजयपाल ७- विजय पाल
९- सहजपाल
१०- बलभद्रशाह १०- बलभद्रशाह १०- बलभद्रशाह ८- बहादुर शाह
११- शीतलशाह ११-शीतलशाह ९-शीतलशाह
१२- मानशाह १२-मानशाह ११-मानशाह १० - मानशाह
१३- श्यामशाह १३- श्यामशाह १२-श्यामशाह- ११-श्यामशाह
१४- दुलारामशाह १४- दुलारामशाह
१५- महीपतिशाह १५-महीपतिशाह १३-महीपतिशाह 12-महीपतिशाह
१६- प्रथिपतिशाह १६- पृथ्वीशाह १४- पृथ्वीशाह १३- प्रथिपतिशाह
१७- मेदनीशाह १७- मेदनीशाह १५-मेदनीशाह १४ -मेदनीशाह
१८- फ़तेहशाह १८- फ़तेहशाह १६-फ़तेहशाह १५- फ़तेहशाह
१९- उपेन्द्रशाह १९- उपेन्द्रशाह १७-उपेन्द्रशाह १६- उपेन्द्रशाह
२०- प्रदीप शाह २०- प्रदीप्तशाह १८-प्रदीप्तशाह १७-प्रदीप्तशाह
२१- ललितशाह २१-ललितशाह १९- ललितशाह १८- ललितशाह
२२- प्रदयुम्नशाह २२-प्रदयुम्नशाह २०- जयकृत शाह १९- प्रदयुम्नशाह
२१- प्रदयुम्नशाह
टिहरी गढ़वाळ का रज्जा
१- सुदर्शन शाह
२- भवानी शाह
३-प्रताप शाह
४- कीर्ति शाह
५- नरेंद्र शाह
५- मानवेन्द्र शाह
Reference: Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand ka Itihas -4 ( History of Uttarakhand - 4
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बकै खंड 30 मा बाँचो
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Hisalu

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Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #28 on: January 24, 2013, 03:10:12 PM »
This is very very much exclusive. Thanks Kukreti jee

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: Great Personalities of Garhwal from Malari Era to till Date
« Reply #29 on: March 31, 2013, 10:47:57 AM »
चन्द्रशेखर करगेती बीज बचाओं आंदोलन के प्रणेता : विजय जड़धारी
 
 बीज बचाने की मुहिम को जीवन शैली बनाकर जीने वाले विजय जड़धारी आज के वक्त ज्यादा प्रासंगिक हो गए हैं ,  विजय जड़धारी भारत के संरक्षणवादी कार्यकर्ता हैं । वे 'बीज बचाओ आन्दोलन' के प्रणेता हैं । उन्होने 'बारहनाजा' नामक एक पुस्तक की रचना की जिस पर उन्हें गांधी शान्ति प्रतिष्ठान, नयी दिल्ली द्वारा सन् २००७ का 'प्रणवानन्द साहित्य पुरस्कार' प्रदान किया गया । वे चिपको आन्दोलन से भी सम्बद्ध रहे हैं । उनकी बीज बचाने की मुहीम से रूबरू होने के लिए कई देशी विदेशी विश्वविद्यालय एवं कृषि संस्थान उन्हें व्याख्यान देने के लिए अपने यहाँ आमंत्रित कर चुके हैं, वे आज भी चम्बा, जिला- टिहरी के पास स्थित अपने गाँव जड़धार से इस आंदोलन की अगुवाई किये हुए हैं l   
 
 टिहरी जनपद के चम्बा प्रखण्ड के जड़धार गांव में 8 नवम्बर 1953 को एक साधारण किसान परिवार में जन्में 60 वर्षीय विजय जड़धारी किसी परिचय के मोहताज नहीं है । स्नातक तक पढ़ाई करने के बाद विजय जड़धारी ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत चिपको आंदोलन से की । जब वे पर्यावरणविद् सुन्दरलाल बहुगुणा और धूम सिंह नेगी के साथ राज्य के विभिन्न हिस्सों में जाकर लोगों को जंगलों का संरक्षण करने के लिए जागरूक करने में लगे रहे । इस दौरान नरेन्द्रनगर में वनों की नीलामी का विरोध करने पर उन्हें जेल भी जाना पड़ा । चिपको आंदोलन की लक्ष्य प्राप्ति के बाद उन्होंने शराबबंदी आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की । वे गांव-गांव जाकर लोगों को शराब जैसी सामाजिक बुराई के प्रति जागरूक करते रहे ।
 
 विजय जड़धारी ने गांवों में महिलाओं व युवकों को संगठित करने का कार्य भी किया । उनके इस प्रयास की बदौलत आज कई गांवों में लोगों ने अपना खुद का जंगल पनपाया हुआ है । वे यहीं तक चुप न रहकर सन 80 व 2000 के दशक में कटाल्डी के खनन विरोधी आंदोलन में लोगों को संघर्ष के लिए प्रेरित करते रहे । इस दौरान उन पर झूठे मुकदमें तक दर्ज किये गये । जहां से बाद में वे बाइज्जत बरी हुए, किन्तु उन्होंने लोगों के जल, जंगल और जमीन को नहीं उजड़ने दिया । इतना ही नहीं सन अस्सी की शुरुआत में उन्होंने दूनघाटी के प्रसिद्ध सिस्यारूंखाला खनन विरोधी आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की । इन आंदोलनों की सफलता के बाद विजय जड़़धारी ने पहाड़ के पारंपरिक लुप्त होते बीजों को बचाने और गैर रासायनिक खेती को बढ़ावा देने का जो आंदोलन शुरू किया, उसके दर्शन व विचार को आज विश्वभर में मान्यता मिली है । उन्होंने कहा कि पुरस्कार के रूप में मिली धनराशि में से अधिकांश का प्रयोग बीज बचाओ आंदोलन के काम को आगे बढ़ाने में किया जायेगा ।
 
 पर्यावरणविद व प्रसिद्ध गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता विजय जड़धारी को पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए विगत माह 5 जून-2012  को दिल्ली में विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है । यह सम्मान उन्हें एक सम्मान समारोह में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और केन्द्रीय पर्यावरण राज्यमंत्री जंयती नटराजन के हाथों दिया गया । यह पुरस्कार उनकी चंद सालों की मेहनत नहीं है । आखिरकार वे 35 वर्षो से सामाजिक कार्यों में सक्रिय है । सन 70 के दशक में चिपको आंदोलन से लेकर आज के बीच बचाओ आंदोलन तक में उनकी सक्रिय भागीदारी जारी है ।
 
 (साभार : पर्वतजन ) —

 

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