Author Topic: NATIONAL & WORLD RECORDS BY UTTARAKHANDI उत्तराखंडीयो के कीर्तिमान  (Read 4070 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Dosto,


The soil of Uttarakhand is generally known for Abode of God & Goddess and a land for Saints to perform penance. There are innumerable renowned people to took birth in this soil and proved their worth by creating records at national and international level.

This thread is dedicated to those people Uttarakhand who has created National and World Records.


It will be our endeavor to provide exclusive information here and at the same time, we expect contribution from you in sharing similar information.

Regards,


M S Mehta

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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DR GOPAL DUTT BISHT – WORLD RECORD BY WRITING 250 WORDS IN A MINUTE IN STENOGRAPHY
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As I have mentioned in the initial post that Uttarakhand soil has produced multi-skilled and highly talented people. Dr Gopal Dutt Bisht, who born in Almora of Distt of Uttarakhand, created a word Record by writing 250 words in a minute in stenography. This is a world record so far. He was also the first person in World who had done Phd in Stenography.

पंकज सिंह महर

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DR GOPAL DUTT BISHT – WORLD RECORD BY WRITING 250 WORDS IN A MINUTE IN STENOGRAPHY
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As I have mentioned in the initial post that Uttarakhand soil has produced multi-skilled and highly talented people. Dr Gopal Dutt Bisht, who born in Almora of Distt of Uttarakhand, created a word Record by writing 250 words in a minute in stenography. This is a world record so far. He was also the first person in World who had done Phd in Stenography.


डा० गोपाल दत्त बिष्ट जी का जन्म अल्मोड़ा जिले के ग्राम मासर में १९३८ में हुआ था, इनका नाम हिन्दी आशुलिपि(शार्टहैण्ड) में अधिकतम गति, 250 शब्द प्रति मिनट के लिये गिनीज बुक आप वर्ड रिकार्ड्स (1993) में दर्ज किया गया। इसके अतिरिक्त वे भारत में इस विषय पर शोध कर पी०एच०डी० करने वाले पहले व्यक्ति हैं। श्री बिष्ट लोक सभा में रिपोर्टर  एवं राज्य सभा में प्रथम श्रेणी के रिपोर्टर पद पर रह चुके हैं। इस क्षेत्र में इनकी उल्लेखनीय सेवा के लिये इन्हें भारत के उप राष्ट्रपति द्वारा प्रशस्ति पत्र से सम्मानित भी किया गया है।
श्री बिष्ट ने शार्टहैण्ड की एक नई सुगम विधि "विशिष्ट प्रणाली" का आविष्कार भी किया। इसके अतिरिक्त इसी विषय पर इन्होंने १८ पुस्तकें भी लिखी हैं।
इनके द्वारा विश्व स्तर पर बनाये गये रिकार्ड को इन्हीं के पुत्र श्री हरीश चन्द्र बिष्ट ने तोड़ा है, इन्होंने 260 शब्द प्रति मिनट का नया कीर्तिमान स्थापित किया है, श्री हरीश चन्द्र बिष्ट लोक सभा सचिवालय में संसदीय रिपोर्टर हैं साथ ही वह विश्व में सबसे कम आयु के संसदीय रिपोर्टर हैं।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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बेनी कौशल (पौडी गड़वाल) ने बनाया काच का ताज महल लिम्का बुक रिकॉर्ड मे शामिल
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सतपुली (पौडी गड़वाल) के बेनी कौशल द्वारा काच के वेकार पड़े टुकडो से ताज महल बनाया गया ! जिसके लिए उन्होंने चूडियों से 4,45,000 टुकडो को जोड़ कर ५० किलोग्राम तक ३२ गुणा २३ इंच काच के ताज महल का मॉडल १ जनवरी २०००से  दिसम्बर २००० के  बीच तैयार किया ! इस ताज महल का निर्माण के लिए प्लाई के हार्ड बोर्ड पर ग्लास कटर और फेविकॉल के माध्यम से किया गया !

यह कारनामे को लिम्का बुक रिकॉर्ड मे २००० शामिल  किया गया !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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At the 2006 Asian Games in Doha, he equalled the world record in 25 m Center Fire Pistol with 590 points
Jaspal Rana

Rana was born in Uttarakhand. He grew up in Mussoorie, Dehradun Nainbagh and later on in Delhi and studied at the K.V. Air Force Station Tughlkabad, and St. Stephen's and Sri Aurobindo colleges. His first coach was his father, Narayan Singh Rana, an ITBP official. Later on Tibor Ganazol coached him to perfection.

At the 2006 Asian Games in Doha, he equalled the world record in 25 m Center
Fire Pistol with 590 points (he had made this score twice previously; in 1995 in Coimbatore, and in 1997 in Bangalore in the national competitions). The Indian Olympic Association sparked controversy when it announced that Rana would receive the 'Best Sportsperson' award at the Asian Games; but it was awarded to Korea's Tae Hwan Park. Rana was graceful about the goof-up. so yea[/b][/color]

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Bachendri Pal : FIRST INDIAN WOMEN TO SCALE MOUNT EVEREST
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Bachendri Pal was born into a family of very moderate means, in 1954, in a village named Nakuri in Garhwal. Her father, Kishan Singh Pal, was a small trader who used to carry provisions like wheat flour and rice from India to Tibet on mules and goats. Eventually he settled in Uttarkashi, where he married; the couple had five children, Bachendri being the middle one. Bachendri was an active child, and did well in her school; she excelled in sports too, and at the same time was singled out in school for punishments for a variety of petty misconducts.

In 1985, she led an Indo-Nepalese Everest Expedition team comprising of only women. The expedition created seven world [color=#ff0900]records and set benchmarks for Indian mountaineering. Nine years later, in 1994,
she led an all women team of rafters. The team coursed through the waters of the river Ganges, covering 2,500 km from Haridwar to Kolkata.


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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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इंडिया बुक आफ रिकार्ड में नवीन का नाम
Story Update : Saturday, July 30, 2011    12:01 AM
 
     
[/t][/t] चंपावत। समीपवर्ती खर्ककार्की ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान नवीन सिंह कार्की का नाम इंडिया बुक आफ रिकार्ड में दर्ज हो गया है। नवीन को यह उपलब्धि चंपावत से पिथौरागढ़ के बीच पहाड़ी मार्ग में बिना हाथ लगाए मोटर साइकिल चलाने का रिकार्ड बनाने पर मिली है। इंडिया बुक आफ रिकार्ड मैनेजमेंट टीम के हेड रिंकी तोमर की ओर से नवीन कार्की को हैंडफ्री बाइकिंग के लिए नया राष्ट्रीय रिकार्ड बनाने पर शुभकामनाएं प्रेषित की गई हैं। नवीन की उपलब्धि पर शुभचिंतकों एवं विभिन्न संगठनों ने खुशी का इजहार किया है।
पर्वतीय क्षेत्र के मोटर मार्गों में हाथ छोड़कर बाइक चलाना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। मगर खर्ककार्की निवासी नवीन कार्की के लिए यह एक जुनून है। इससे पूर्व चंपावत से सूखीढांग तथा सूखीढांग से टनकपुर के बीच हैंडफ्री बाइकिंग करने के साथ ही रुड़की एवं देहरादून के बीच भी यह हैरतअंगेज प्रदर्शन कर चुके हैं। वह अपनी इस कला को गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल किए जाने के लिए प्रयासरत हैं। इंडिया बुक आफ रिकार्ड की देखरेख में गत पांच मई को नवीन ने जिला प्रशासन से अनुमति लेने के बाद चंपावत से पिथौरागढ़ तक के लिए हैंडफ्री बाइकिंग की थी। इस दौरान उन्होंने टीवी कैमरों की देखरेख में बिना हाथ लगाए 50 किलोमीटर तक मोटर साइकिल चलाने का कारनामा कर दिखाया। नवीन की उपलब्धि पर क्षेत्र के लोगों ने खुशी का इजहार किया है। नवीन का अगला लक्ष्य लिम्का बुक आफ रिकार्ड एवं गिनीज बुक आफ रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराना है।
  http://www.amarujala.com/city/Champawat/Champawat-17104-115.html 


Devbhoomi,Uttarakhand

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हिंदी की आवाज बनी पहाड़ की नारी
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कामकाजी छवि से इतर पहाड़ की नारी हिंदी के माथे की बिंदी बनती जा रही है। उत्तराखंड की आधी दुनिया की कुछ प्रतिनिधि विदेशों में हिंदी की अलख जगा रही हैं तो कुछ अहिंदी भाषी राज्यों में हिंदी की आवाज बन गई हैं। कई ऐसी भी हैं जो पहाड़ पर ही हिंदी का शंखनाद कर रही हैं।

कम लोग ही जानते होंगे कि 1997 से डेनमार्क में हिंदी की पताका फहरा रहीं अर्चना पैन्यूली ने गढ़वाल विश्वविद्यालय से जीव विज्ञान में एमएससी किया था। भारत में जन्मीं अर्चना ने डेनिश समाज पर पहला उपन्यास हिंदी में लिखा। 'परिवर्तन' उपन्यास द्वारा उत्तरांचल के साहित्य में योगदान के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया। उनके उपन्यास और कहानियां डेनमार्क को जीवंत करतीं, हर प्रवासी भारतीय के मन का प्रश्न पूछती हैं कि वे कहां से ताल्लुक रखती हैं।

गुजरात में हिंदी का प्रवासी स्वर हैं रुड़की की अंजना संधीर। उन्होंने अमेरिका की कवयित्रियों पर पुस्तक संपादित कर वहां की महिला लेखिकाओं को जोड़ा। उन्हें पहचान और परिचय का मंच दे 'अमेरिका हड्डियों में बसता जाता है' कहकर वह भारत लौट आई। अंग्रेजी, उर्दू, गुजराती में भी उनकी मजबूत पकड़ है। 'बारिशों का मौसम' व 'धूप, छांव और आंगन' (गजल संग्रह), 'तुम मेरे पापा जैसे नहीं हो' व 'अमेरिका हड्डियों में जम जाता है' (काव्य संग्रह) और 'प्रवासी हस्ताक्षर' व 'सात समंदर पार से' उनके संपादित काव्य संग्रह हैं।

पिथौरागढ़ की दिवा भट्ट पहाड़ पर हिंदी का परचम लहरा रही हैं। कुमाऊं विश्वविद्यालय में हिंदी प्राध्यापक दिवा की कृतियां हैं- 'मेरे देश की चांदनी', 'नौ दिन चले अढ़ाई कोस', 'अनिकेतन', 'अक्षरों का पुल', 'हिमालयी लोक जीवन' और गुजराती में 'क्षणना भारा साहियारा'। दिवा छह पुस्तकों का संपादन भी कर चुकी हैं। गुजराती, पंजाबी, उड़िया, मलयालम व अंग्रेजी में उनकी रचनाओं के अनुवाद प्रकाशित हो चुके हैं। उनके हिस्से में गुजराती साहित्य अकादमी का भगिनी निवेदिता पुरस्कार, उत्तर प्रदेश हिंदी अकादमी पुरस्कार, सारिका पुरस्कार, संजीवनी सम्मान एवं आइसीएआर का उत्कृष्ट सेवा सम्मान आ चुके हैं।

डॉ. मधुबाला नयाल कुमाऊं में हिंदी की सेवा में लीन हैं। हिंदी में डीलिट की उपाधि प्राप्त मधुबाला की कृतियों में 'रामकाव्य में लक्ष्मण', 'छायावादोत्तर हिंदी कविता : एक अंतर्यात्रा', 'आधुनिक हिंदी कविता में शब्द-प्रयोग', 'समय-राग' और 'मध्यकालीन काव्य सप्तक' शामिल हैं। प्राचीन काव्य सुधा का उन्होंने संपादन किया। उनके 45 शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी झोली में अपभ्रंश साहित्य अकादमी के डॉ. आदिनाथ नेमिनाथ उपाध्याय पुरस्कार समेत कई सम्मान हैं।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_8209128.html

 

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