Author Topic: NSG Commando Gajendra Singh /अमर शहीद गजेन्द्र सिंह बिष्ट  (Read 10332 times)

Mukesh Joshi

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गजेंद्र को थी देश पर न्योछावर होने की धुनअमित ठाकुर, देहरादून मुंबई में आतंकी कार्रवाई में शहीद हुआ दून का सपूत गजेन्द्र बात-बात पर देश पर जान न्यौछावर करने की बात करता था। उनके बड़े भाई बताते हैं कि आखिरी बार गजेन्द्र जब पिता के निधन के वक्त घर आया था तो तब भी उनकी जुबान पर देश की रक्षा की बातें ही चढ़ी हुई थी। करीब बीस दिन पहले बड़े भाई की गजेन्द्र से मोबाइल पर बात हुई थी। स्वभाव से काफी हंसमुख और बेहद मिलनसार गजेन्द्र का बचपन दून में ही बीता। उनके बड़े भाई विरेन्द्र सिंह बिष्ट बताते हैं कि वर्ष 1991 में जब उन्होंने बारहवीं की परीक्षा पास की तो उसने सेना में भर्ती होने की इच्छा जताई। विरेन्द्र बताते हैं कि उस समय उन्होंने गजेन्द्र को फौज के बजाए पुलिस में जाने की सलाह दी लेकिन गजेन्द्र राजी नहीं हुआ। उसकी रट किसी बात को लेकर थी तो बस सेना में जाकर देश की सेवा करने की। वह बताते हैं कि जब समझाने पर भी गजेन्द्र नहीं माना तो उन्होंने व पिताजी ने उनके सेना में जाने की इच्छा पर हामी भर दी। अपने सर्विस के दौरान गजेन्द्र ने अमूमन देश के प्रत्येक कोने में काम किया। उनके मुताबिक जब भी वह दून आता तो भाईयों व अन्य परिवारवालों के साथ अक्सर देश के लिए कुर्बान होने की बातें किया करता था। बड़े भाई विरेन्द्र बताते हैं कि आखिरी बार वह अगस्त माह में पिता के निधन के वक्त दून आया था। उस दौरान भी उनकी जुबान पर इसी तरह की बातें चढ़ी रहा करती थी। उन्होंने बताया कि आखिरी बार करीब बीस दिन पहले उनकी मोबाइल पर गजेन्द्र से बातचीत हुई थी। तब वह अपने किसी काम से गुड़गांव आया हुआ था। तब बस वह सिर्फ उसकी और बच्चों की कुशलक्षेम ही पूछ पाए थे। बताते हैं कि फिलहाल उनकी दून आने की कोई योजना नहीं थी। संभवत: अगले साल ही वह दून आते। उनका कहना है कि उन्हें कभी ऐसा अहसास भी नहीं था कि कुदरत उनके साथ ऐसा खेल खेलेगी। अपने भाई की शहादत पर गौरान्वित बड़े भाई विजेन्द्र कहते हैं कि उनका भाई शेर था। वह कभी किसी से डरा नहीं। वह बस यही कहा करता था एक दिन देश के लिए प्राण भी न्यौछावर करने पड़े तो इससे पीछे नहीं हटूंगा।
 

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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NSG Commando Gajendra Singh
« Reply #1 on: November 29, 2008, 12:01:08 PM »
NSG hawaldar Gajendra Singh, who gave the supreme sacrifice of his Life fighting terrorists in Mumbai's Nariman House.

We salute the martyr from Uttarakhand who did India proud.

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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NSG commando Gajendra Singh's body brought to Delhi
« Reply #2 on: November 29, 2008, 12:02:58 PM »
The body of NSG hawaldar Gajendra Singh, who died fighting terrorists in Mumbai's Nariman House, was brought to Delhi before being taken to his native place Dehradun for the last rites on Saturday.

All ranks and file of the elite force gathered at NSG headquarters in Palam to pay their tributes to the slain hawaldar.

The body of Singh, who was a member of NSG's 51 Special Action Group, will be later taken to Dehradun, an NSG spokesperson said.

Risky Pathak

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Re: NSG Commando Gajendra Singh
« Reply #3 on: November 29, 2008, 06:33:44 PM »
 Is Bharitya Sapoot ko sat Sat Naman..

पंकज सिंह महर

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Re: NSG Commando Gajendra Singh
« Reply #4 on: December 01, 2008, 10:38:17 AM »
amar shaheed GAJENDRA SINGH BISHT ko mera pahad ki vinamra shradhanjali

पंकज सिंह महर

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Re: NSG Commando Gajendra Singh
« Reply #5 on: December 01, 2008, 10:49:11 AM »


saheed G S Bisht


antim yatra

पंकज सिंह महर

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Re: NSG Commando Gajendra Singh
« Reply #6 on: December 01, 2008, 10:51:30 AM »







पंकज सिंह महर

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Re: NSG Commando Gajendra Singh
« Reply #7 on: December 01, 2008, 10:53:00 AM »
सांस टूटने तक नहीं छोड़ी आस

मुंबई का नरिमन हाउस। चारों तरफ धुआं ही धुआं और गोलियों की आवाज। हाउस के अंदर आतंकियों ने इजराइली परिवार को बंधक बनाया हुआ था। इसी बीच एनएसजी के कमांडोज को सूचना मिलती है कि उन्हें नरिमन हाउस जाकर मोर्चा संभालना है। इन्हीं कमांडोज में शामिल थे दून के वीर सपूत गजेंद्र सिंह। पांच कमांडोज की टुकड़ी को लीड कर रहे गजेंद्र नरिमन के तीसरे माले पर आतंकियों से मोर्चा ले रहे थे। आतंकियों पर लगातार भारी पड़ रहे गजेंद्र को इसी बीच आतंकी घेरने की तैयारी करते हैं। सामने से एक फायर चलता है, जो गजेंद्र के सिर पर लगता है। गजेंद्र जमीन पर गिर जाते हैं। बावजूद इसके वे हिम्मत नहीं हारते। लड़ने की कोशिश करते हैं, पर सांस टूट जाती है। गजेंद्र की अंत्येष्टि में शामिल होने आए उनके साथ ऑपरेशन में शामिल रहे कमांडो आरके कथूरिया ने यह घटना बताई। उन्होंने बताया कि नरिमन हाउस में आतंकियों के घुसे होने की सूचना मिलते ही एनएसजी के जवान हेलीकाप्टर से नरिमन हाउस में दाखिल हुए। गजेंद्र तीसरे माले पर आतंकियों से लोहा ले रहे थे। इसी दौरान एक बुलट गजेंद्र के सिर पर लगी। तब वे (आरके कथूरिया)नीचे मौजूद थे। इस दौरान दूसरे साथियों ने गजेंद्र को बचाने का काफी प्रयास किया, लेकिन गजेंद्र की जान नहीं बचाई जा सकी। आरके कथूरिया के मुताबिक गजेंद्र की उनसे मुलाकात करीब छह महीने पहले दिल्ली पोस्टिंग के दौरान हुई थी। उनके अनुसार गजेंद्र काफी मिलनसार स्वभाव के थे। किसी बात पर नाराज होना तो उन्होंने सीखा ही नहीं था। वे कहते हैं कि गजेंद्र की शहादत पर दुख तो बहुत है, लेकिन गर्व भी है कि उन्होंने आज वो काम कर दिखाया, जो हर जवान के लिए गौरव की बात होती है। दूसरी तरफ, गजेंद्र के दिल्ली में एक अन्य सहयोगी दून के भाऊवाला निवासी नवीन ने बताया कि बीती 26 नवंबर को जब गजेंद्र को मुंबई रवाना होने के निर्देश मिले, उस दिन वे दोनों साथ में खाना खा रहे थे। उनके मुताबिक गजेंद्र ने उनसे जल्द वापस आकर उनसे मुलाकात करने को कहा था। नवीन एनएसजी के दिल्ली कार्यालय में क्लर्क के पद पर तैनात हैं।
 

खीमसिंह रावत

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Re: NSG Commando Gajendra Singh
« Reply #8 on: December 01, 2008, 11:20:06 AM »
शतशत नमन उत्तराखंड के वीर सपूत गजेंदर बिष्ट को/

जय उत्तराखंड 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: NSG Commando Gajendra Singh
« Reply #9 on: December 01, 2008, 11:42:38 AM »

Khanduri joins family to mourn Gajendra’s death

SNS & PTI
DEHRADUN, Nov. 30: Paying tribute to NSG hawaldar Gajendra Singh, chief minister Maj. Gen. (retd.) BC Khanduri announced Rs 5 lakh compensation for the family of the slain soldier who was cremated at his native village Ganeshpur on Saturday. He said the state government will also render monetary help for the education of Singh's children.
The chief minister said the sons of Uttarakhand had put their lives at sake for the motherland several times in the past. It is a matter of pride for the state, he said, adding that the nation would always remember the sacrifice of Gajendra Singh. He had died during the operations at the Jewish Centre, Nariman House in Mumbai. 
The body of the martyr was brought to Ganeshpur on Saturday. His wife Vineeta and two siblings Gaurav and Priya had already arrived from Delhi. The body was cremated here with full military honours.
The funeral pyre was lit by Singh's son Gaurav Bisht amid a three-gun salute by a unit of the Gorkha Rifles. Thousands of people gathered at the village to pay homage to the martyr.
Singh was posted in Delhi as a NSG Commando. He was selected for NSG just after one year's service in the Army. He left for Mumbai on the night of 26 November, never to return.
Meanwhile recognising the sacrifice of not only Gajendra but other soldiers as well the Patanjali Yogpeeth of Baba Ramdev in Haridwar announced Rs 5 lakh for the families of each slain soldier. In a letter to the DG NSG, DGP Maharashtra  and GOC of western command, the general secretary of the Peeth Acharya Balkrishan has requested a list of soldiers who lost their lives while battling the terrorists in Mumbai.

 

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