Author Topic: PRASOON JOSHI - AD GURU, LYRICIST IN BOLLYHOOD FROM UTTARAKHAND  (Read 17988 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Breakfast With Prasoon Joshi
« Reply #10 on: May 03, 2008, 01:01:26 PM »

Breakfast With Prasoon Joshi

His flourish with words has allowed his creative currency to transcend the advertising industry as a film lyricist in his own right. And Bollywood has embraced him with open arms, as one of its own — a subtle blend of Javed Akhtar and Gulzar.

Apparently both happen to be the most admired contemporary Bollywood lyricists of Prasoon Joshi — McCann-Erickson’s executive chairman and South Asia creative director. However, Joshi stands out for the youthful energy in his lyrics — recollect the entirely hummable sound tracks of Hum Tum, Rang De Basanti and more recently Tare Zameen Par — that has become sine qua non in today’sIndian society.

Though Joshi’s association with film industry is getting more pronounced, he is still rooted firmly in the world of advertising. That may be a conscious decision, but 38-year old Joshi doesn’t view it as a case of either or. “It could be,” he says with a leisurely smile. “But right now I am happy with my dual career.” And why not? Many illustrious Indian poets of our time have had dual careers. “Firaq Gorakhpuri kept his job as a civil servant. So did the famous lyricist Shailendra who was a railway employee.”

We set out to make a sense of this creative stalwart in a breakfast meeting with him. The rendezvous: 360-degree at Delhi’s Oberoi Hotel. Although a bit late, the breakfast itself was as humble as Joshi’s benign manners — an egg-white omelette, toast and fresh juice. However, his creative flamboyance often finds utterance in his words. Though Joshi may be wearing two hats —advertising professional and film lyricist — at heart he is your proverbial poet who writes to quench his own creative thirst, unshackled of briefs, deadlines and “forced stimulation” that invariably comes with commercial art like advertising and cinema.

An Idyllic Upbringing

Those who have had chance to interact with Joshi would know where this profound talent flows from. His years of quest with nature in quiet hills of Almora in Kumaon, where he was born, and his love for books seem to have packed this delightful symphony of music and words within him. And he celebrates it at the slightest opportunity.

“I stalk the world of poetry and writings like a ghost,” he says of his passion. His father, who is a qualified classical vocalist, was a civil servant and his stint in the education ministry did open the doors for the young Joshi to the world of books.

“All the local libraries, where my father was posted as a PCS officer, came under his supervision. I would get them opened at night and read voraciously,” Joshi says. He would wake up to his mother’s early morning riyaaz. She too, like his father, is a trained Indian classical vocalist with over three decades of All India Radio performances to her credit. With music in his blood, Joshi self-taught himself to weave words into a meaningful and rhythmic expression.

His creative expression flowered early in life. He wrote his first book at a tender age of 17. Main aur Woh — a ‘conversation with himself’ — he says was inspired by Frederich Nietzsche’s Thus Spake Zarathustra.




http://economictimes.indiatimes.com/The_Leisure_Lounge/Breakfast_With_Prasoon_Joshi/articleshow/3006049.cms

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: PRASOON JOSHI - AD GURU, LYRICIST IN BOLLYHOOD FROM UTTARAKHAND
« Reply #11 on: February 05, 2009, 12:46:50 PM »
Lyrics written by in various films are hit now-a-days. The major films are :-


-   Ghajni -  Too meri adhori pyas -2
-   Delhi 6-  Masak Kali -2

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: PRASOON JOSHI - AD GURU, LYRICIST IN BOLLYHOOD FROM UTTARAKHAND
« Reply #12 on: February 28, 2009, 04:01:57 PM »
Filmography

He has been the lyricist for the following Bollywood films:[2]

Delhi 6 (2009)
Ghajini (2008)
Thoda Pyaar Thoda Magic (2008)
Taare Zameen Par (2007)
Fanaa (2006)
Rang De Basanti (2006)
Black (2005)
Rok Sako To Rok Lo (2004)
Phir Milenge (2004)
Hum Tum (2004)
Aankhen (2002)
Lajja (2001)

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Re: PRASOON JOSHI - AD GURU, LYRICIST IN BOLLYHOOD FROM UTTARAKHAND
« Reply #13 on: February 28, 2009, 04:05:13 PM »
इस बार नही - By Prasoon Joshi (after the mumbai terror attacks)
Add a new comment
इस बार जब वो छोटी सी बच्ची मेरे पास अपनी खरोच ले कर आएगी
मैं उसे फूं-फूं कर नही बहलाऊगा
पनपने दूंगा उसकी टीस को
इस बार नही

इस बार जब मैं चेहरों पर दर्द लिखा देखूंगा
नही गाऊंगा गीत पीड़ा भुला देने वालें
दर्द को रिसने दूंगा, उतरने दूंगा अंदर गहरे
इस बार नही

इस बार मैं ना मरहम लगाऊंगा
ना ही उठाऊंगा रुई के फाहे
और ना ही कहूंगा कि तुम आँखे बंद करलो, गरदन उधर करलो, मैं दवा लगाता हूँ
देखने दूंगा सबको, हम सबको खुले नंगे घाव
इस बार नही

इस बार कर्म का हवाला देकर नही उठाऊंगा औज़ार
नही करुंगा फिर से एक नयी शुरुआत
नही बनुंगा मिसाल एक कर्मयोगी की
नही आने दूंगा ज़िंदगी को आसानी से पटरी पर
उतरने दूंगा उसे किचड़ में, टेढ़े मेढ़े रासतों पे
नही सूखने दूंगा दिवारों पर लगा खून
हल्का नही पड़ने दूंगा उसका रंग
इस बार नही बनने दूंगा उसे इतना लाचार कि पानी की पींक और खून का फर्क ही खतम हो जाये
इस बार नही

इस बार घावों को देखना है
गौर से थोडा लम्बे वक्त तक
कुछ फैसले और उसके बाद हौसले
कही तो शुरआत करनी होगी
इस बार यही तेय किया है ।

- Poem written by Prasoon Joshi

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Re: PRASOON JOSHI - AD GURU, LYRICIST IN BOLLYHOOD FROM UTTARAKHAND
« Reply #14 on: April 01, 2009, 04:20:57 PM »

Pasoon Ji ek Add Guru ke Alawa bahut bade pratibhashali lyricist and Kavi bhai hai.


इस बार नही - By Prasoon Joshi (after the mumbai terror attacks)
Add a new comment
इस बार जब वो छोटी सी बच्ची मेरे पास अपनी खरोच ले कर आएगी
मैं उसे फूं-फूं कर नही बहलाऊगा
पनपने दूंगा उसकी टीस को
इस बार नही

इस बार जब मैं चेहरों पर दर्द लिखा देखूंगा
नही गाऊंगा गीत पीड़ा भुला देने वालें
दर्द को रिसने दूंगा, उतरने दूंगा अंदर गहरे
इस बार नही

इस बार मैं ना मरहम लगाऊंगा
ना ही उठाऊंगा रुई के फाहे
और ना ही कहूंगा कि तुम आँखे बंद करलो, गरदन उधर करलो, मैं दवा लगाता हूँ
देखने दूंगा सबको, हम सबको खुले नंगे घाव
इस बार नही

इस बार कर्म का हवाला देकर नही उठाऊंगा औज़ार
नही करुंगा फिर से एक नयी शुरुआत
नही बनुंगा मिसाल एक कर्मयोगी की
नही आने दूंगा ज़िंदगी को आसानी से पटरी पर
उतरने दूंगा उसे किचड़ में, टेढ़े मेढ़े रासतों पे
नही सूखने दूंगा दिवारों पर लगा खून
हल्का नही पड़ने दूंगा उसका रंग
इस बार नही बनने दूंगा उसे इतना लाचार कि पानी की पींक और खून का फर्क ही खतम हो जाये
इस बार नही

इस बार घावों को देखना है
गौर से थोडा लम्बे वक्त तक
कुछ फैसले और उसके बाद हौसले
कही तो शुरआत करनी होगी
इस बार यही तेय किया है ।

- Poem written by Prasoon Joshi


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Re: PRASOON JOSHI - AD GURU, LYRICIST IN BOLLYHOOD FROM UTTARAKHAND
« Reply #15 on: April 01, 2009, 04:28:41 PM »
चांद सिफारीश जो करता हमारी देता वह तुम को बता
शर्म-ओ-हया पे परदे गीरा के करनी हैं हम को खता
जिद हैं अब तो हैं खुद को मिटाना होना हैं तुझ में फना

तेरी अदा भी हैं झोंके वाली छू के गुजर जाने दे
तेरी लचक हैं के जैसे डाली दिल में उतर जाने दे
आजा बाहों में करके बहाना होना हैं तुझ में फना

हैं जो ईरादे बता दूँ तुम को शरमा ही जाओगी तुम
धडकने जो सुना दूँ तुम को घबरा ही जाओगी तुम
हम को आता नही हैं छुपाना होना हैं तुझ में फना


Lyricist  :Prasoon Joshi
Singer  :Shaan
Music Director  :Jatin - Lalit
Movie  :Fanaa - 2006

 
गीतकार  :प्रसून जोशी
गायक  :शान
संगीतकार  :जतिन - ललित
चित्रपट  :फना - 2006

 

http://www.geetmanjusha.com/hindi/lyrics/1694.html

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Re: PRASOON JOSHI - AD GURU, LYRICIST IN BOLLYHOOD FROM UTTARAKHAND
« Reply #16 on: April 01, 2009, 04:36:56 PM »
Films, : TARE JAMEEN PAR

JOSHI JI KA LIKHA YAH GANAA
==========================



देखो इन्हें, ये हैं आस की बूँदें
पत्तों की गोद में, आस्माँ से कूदें
अँगडाई लें, फिर करवट बदल कर
नाज़ुक-से मोती, हँस दें फिसलकर

खो न जायें ये...तारे ज़मीं पर

ये तो हैं सर्दी में, धूप की किरणे
उतरें तो आँगन को सुनहरा-सा कर दें
मन के अँधेरों को रौशन-सा कर दें
ठिठुरती हथेली की रँगत बदल दें

खो न जायें ये...तारे ज़मीं पर

जैसे आँखों की डिबिया में निँदिया
और निँदिया में मीठा-सा सपना
और सपने में मिल जाए फ़रिश्ता-सा कोई
जैसे रँगों भरी पिचकारी
जैसे तितलियाँ, फूलों की क्यारी
जैसे बिना मतलब का, प्यारा रिश्ता हो कोई

ये तो आशा की लहर हैं
ये तो उम्मीद की सहर है
खुशियों की नहर है

खो न जायें ये...तारे ज़मीं पर

देखो रातों के सीने पे ये तो
झिलमिल किसी लौ-से उगे हैं
ये तो अँबिया की खुश्बू है - बाग़ों से बह चले
जैसे काँच में चूडी के टुकडे
जैसे खिले-खिले फूलों के मुखडे
जैसे बँसी कोई बजाए पेडों के तले

ये तो झोंके हैं पवन के
हैं ये घुँघरू जीवन के
ये तो सुर है चमन के

खो न जायें ये...तारे ज़मीं पर

मुहल्ले की रौनक़ गलियाँ हैं जैसे
खिलने की ज़िद पर कलियाँ हों जैसे
मुठ्ठी में मौसम की जैसे हवाएँ
ये हैं बुज़ुर्ग़ों के दिल की दुआएँ

खो न जायें ये...तारे ज़मीं पर

कभी बातें जैसे दादी नानी
कभी छलकें जैसे "मम्-मम्" पानी
कभी बन जाएँ भोले, सवालों की झडी
सन्नाटे में हँसी के जैसे
सूने होंठों पे खुशी के जैसे
ये तो नूर हैं बरसे गर, तेरी क़िसमत हो बडी

जैसे झील मे लहराए चँदा
जैसे भीड में अपने का कँधा
जैसे मनमौजी नदिया, झाग उडाए कुछ कहे
जैसे बैठे-बैठे मीठी-सी झपकी
जैसे प्यार की धीमी-सी थपकी
जैसे कानों में सरगम हरदम बजती ही रहे

खो न जायें ये...तारे ज़मीं पर

(प्रसून जोशी)

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Re: PRASOON JOSHI - AD GURU, LYRICIST IN BOLLYHOOD FROM UTTARAKHAND
« Reply #17 on: July 01, 2009, 03:23:44 PM »
धूप के सिक्के है प्रसून का ताज़ा गीत

"ठंडा मतलब कोला कोला" जुमला देकर प्रसून ने इस शीतल पेय को घर घर में स्थापित कर दिया, मूल रूप से खुद को हिंदी कवि कहने वाले प्रसून जोशी ने बेशक धनार्जन के लिए विज्ञापन इंडस्ट्री में पैठ जमाई पर उनके हुनर को असली मंजिल मिली हिंदी फिल्मों में गीत लिखकर. राज कुमार संतोषी की फिल्म "लज्जा" से उन्होंने गीतकारी की शुरुआत की. यश चोपडा की "हम तुम" में उनके लिखे गीत "सांसों को सांसों में घुलने दो ज़रा" को इतनी ख्याति मिली कि जानकार इसे हिंदी फिल्मों के श्रेष्ठतम युगल गीतों में शुमार करने लगे. इसी फिल्म में उनका लिखा "लड़कियां न जाने क्यों लड़कों सी नहीं होती" आदमी और औरत की मूलभूत प्रवर्तियों जो उनके बीच आकर्षण का भी कारण बनती है और मतभेद का भी, को बेहद खूबसूरत और दिलचस्प अंदाज़ में उजागर करता है. "रंग दे बसंती" को नयी सदी की एक मील का पत्थर फिल्म कही जा सकती है, यहाँ प्रसून को साथ मिला संगीत सरताज ए आर रहमान का. प्रसून ने न सिर्फ इस फिल्म के यादगार गीत लिखे बल्कि इस फिल्म में संवाद भी उन्ही के थे. इस फिल्म के "खलबली" गीत का जिक्र करते हुए प्रसून ने एक बार कहा था- "मैं और रहमान रात भर इस गीत पर काम करते रहे, सुबह मैं उनके रिकॉर्डिंग स्टूडियो से वापस लौट रहा था तो रहमान का फ़ोन आया. उन्होंने कहा कि वो जो हिस्सा है गीत का 'जिद्दी जिद्दी जिद्दी' वाला उसमें कुछ और तरह के शब्द चाहते हैं. पहले इस धुन पर मैंने कुछ और लिखा था पर जब उन्होंने जिद्द की यहाँ कुछ और लिखो तो मैंने फ़ोन पर ही उनसे कहा कि आप बहुत जिद्दी हैं और गाकर सुनाया जिद्दी जिद्दी रहमान...बस इसी तरह ये जिद्दी शब्द इस गीत में आया."

प्रसून और रहमान की जोड़ी ने "दिल्ली ६" और "गजिनी" में भी जम कर रंग जमाया. "फ़ना" में जतिन ललित के लिए "चाँद सिफारिश" और "तारे ज़मीन पर" में शंकर एहसान लॉय के लिए "माँ" जैसे गीत उनकी कलम से निकले कालजयी गीतों में शामिल हैं. २००७ और २००८ में उन्होंने लगातार फिल्म फेयर जीता. १६ सितम्बर १९७१ उत्तराखंड में जन्में प्रसून की लिखी कविताओं की किताब "मैं और वो" जब प्रकाशित हुई तब वह मात्र १७ वर्ष के थे. फ़िल्मी गीतों में भी उनका शब्दकोष सीमित नहीं है. नए शब्दों के साथ नए तजुर्बे करना उनकी खासियत है. "मसकली" की उड़ान हो या ज़मीन पर उतरे "तारों" का दर्द हो, स्त्री स्वतंत्रता की तान छेड़ते "मन के मंजीरे" हो फिर सिल्क रूट का "डूबा डूबा" प्यार का खुमार हो, प्रसून की छाप उनके लिखे हर गीत में झलकती है. शंकर एहसान लॉय की तिकडी के साथ उन्होंने फिर से काम किया है फिल्म "सिकंदर" में जिसका गीत आज हम यहाँ आपके लिए लेकर हाज़िर हुए हैं.



सुधीर मिश्रा की सिने रास और बिग पिक्चर के बैनर पर बनी यह फिल्म एक सस्पेंस थ्रिल्लर है, जो एक १४ साल के बच्चे के इर्द गिर्द घूमती है. "किंग ऑफ़ बॉलीवुड" और "चलो अमेरिका" जैसी फिल्मों के निर्देशक पियूष झा ने संभाली है निर्देशन की कमान तो परजान दस्तूर (याद कीजिये कुछ कुछ होता है का वो नन्हा सरदार) हैं सिकंदर की भूमिका में, साथ में हैं संजय सूरी और आर माधवन. फिल्म ब्लैक की नन्ही लड़की आयेशा कपूर ने भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. दो संगीतकार हैं शंकर एहसान लॉय और सन्देश संदलिया. प्रसून के आलावा नीलेश मिश्रा और कुमार ने भी गीत लिखे हैं फिल्म के लिए. फिल्म का अधिकतर हिस्सा कश्मीर की वादियों में शूट हुआ है, और तमाम हिंसा के बीच भी फिल्म शांति का सन्देश देती है. फिल्म जल्दी ही आपके नजदीकी सिनेमा घरों में होगी, पर आज आप सुनिए इस फिल्म से ये ताज़ा तरीन गीत, प्रसून जोशी का लिखा, धुन है शंकर एहसान लॉय की, और गाया है खुद शंकर ने और साथ दिया है आयिशा ने. पर गीत को सुनने से पहले देखिये प्रसून के हुनर की ये बानगी.

धूप के सिक्के उठाकर गुनगुनाने दो उसे,
बैंगनी कंचे हथेली पर सजाने दो उसे,
भोली भाली भोली भाली रहने दो
जिन्दगी को जिन्दगी को बहने दो....

बारूद जब बच्चा था वो तितली पकड़ता था,
वो अम्बिया भी चुराता था पतंगों पर झगड़ता था,
अगर तुम उसका मांझा लूटते वो कुछ नहीं कहता,
थोडा नाराज़ तो होता मगर फिर भी वो खुश रहता,
मगर धोखे से तुमने उसका बचपन भी तो लूटा है,
ज़रा देखो तो उसकी आँखों में वो कबसे रूठा है,
जुगनुओं की रोशनी में दिल लगाने दो उसे...

बहुत जल्दी दुपट्टे ओढ़ना सिखा रहे हैं हम,
क्यों जिंदगी को रात से मिलवा रहे हैं हम,
वो पल्लू से चिपक कर माँ के चलती थी तो अच्छी थी,
अकेला छोड़कर उसकी क्या कहना चाह रहे हैं हम,
एक गहरी नींद से हमको जगाने दो उसे

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Re: PRASOON JOSHI - AD GURU, LYRICIST IN BOLLYHOOD FROM UTTARAKHAND
« Reply #18 on: July 01, 2009, 05:00:43 PM »
मैं कभी बतलाता नहीं पर अंधेरे से डरता हूं मैं

यूं तो मैं दिखलाता नहीं, तेरी परवाह करता हूं मैं मां

तुझे सब है पता, है ना मां

तुझे सब है पता मेरी मां ।।



भीड़ में यूं ना छोड़ो मुझे, घर लौट के भी आ ना पाऊं मां

भेज ना इतना दूर मुझको तू, याद भी तुझको आ ना पाऊं मां

क्‍या इतना बुरा हूं मैं मां

मेरी मां ।।



जब भी कभी पापा मुझे जो ज़ोर से झूला झुलाते हैं मां

मेरी नज़र ढूंढे तुझे, सोचूं यही तू आके थामेगी मां

तुमसे मैं ये कहता नहीं, पर मैं सहम जाता हूं मां

चेहरे पे आने देता नहीं, दिल ही दिल में घबराता हूं मां

तुझे सब है पता, है ना मां

मेरी मां ।।



मैं कभी बतलाता नहीं, पर अंधेरे से डरता हूं मैं मां

यूं तो मैं दिखलाता नहीं, तेरी परवाह करता हूं मैं मां

तुझे सब है पता, है ना मां

मेरी मां ।।

हेम पन्त

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Re: PRASOON JOSHI - AD GURU, LYRICIST IN BOLLYHOOD FROM UTTARAKHAND
« Reply #19 on: August 25, 2009, 10:05:35 AM »
Bollywood lyricist Prasoon Joshi to get 'Shailendra Samman'

Dehra Dun, Aug 22 (UNI) Famous Bollywood lyricist Prasoon Joshi will be conferred with prestigious 'Shailendra Samman-09' on August 30 here.

ONGC GM Sunder Lal said the Samman was instituted in memory of famous Bollywood lyricist late Shailendra in 2000 by a Roorkee-based Shailendra Trust.

Prasoon Joshi, who hails from Uttarakhand, has written some of the best lyrics for songs in the hit films like Rang De Basanti, Black, Tare Zameen par, Fanaa and Gazini.

Lyricists such as Gulzar, Kaifi Azmi, Gulshan Bawara, Neeraj and Yogesh have also been felicitated with this award.

Source : www.uniindia.com

 

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