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Speed is one of the differential factors in the same art

Art as a strong tool for personal branding, Tourism Promotion and Place Branding-32
Different Marketing Strategies for fighting with Competitors
Strategies for Executive for marketing warfare
Guidelines for Chief Officers (CEO) series –407     
       Bhishma Kukreti (Marketing Strategist)
s= आधी अ 
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आदानमाशूकरितां  प्रतिदानं चिर्क्रिया I
कलासु द्वौ गुणौ ग्येयौ कले प्रकीर्तिते I
Fastness in learning and slowness in offering /giving are two features of all arts
 (Shukraneeti, Vidya Wa Kala Nirupan Chapter Shloka 77)
When two persons or organization are busy in the same type of art they can differentiate from each other is by speeding offering the service of said art.
Reference:
Shukraniti, Manoj Pocket Books, Delhi pp 223 
Copyright@ Bhishma Kukreti, 2021
Strategies for Executive for marketing warfare
Tactics for the Chief Executive Officers responsible for Marketing
Approaches   for the Chief Executive Officers responsible for Brand Image
Strategies for the Chief Executive Officers responsible for winning Competitors
Immutable Strategic Formulas for Chief Executive Officer
(CEO-Logy, the science of CEO’s working based on Shukra Niti)
(Examples from Shukra Niti helpful for Chief executive Officer)
Successful Strategies for successful Chief executive Officer
Art: the strong medium of Tourism Development, Place Branding
Art: A tool for Personal fame and Place branding
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  इटली बिटेन  चुटकला  ,  हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक , ठट्टा , मसखरी , लतीफा
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  इटली    देस का चबोड़ , चखन्यौ , मजाक , हौंस
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 (यूरोपीय हास्य , प्रहसन, खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक , ठट्टा , मसखरी , लतीफा  श्रृंखला )
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इकबटोळ - भीष्म कुकरेती 'चबोड़ाचार्य' 
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भौत सदी पैलाक छ्वीं छन। पोपन निर्णय ले बल यहुद्युं  तै इटली छुड़न पोड़ल।  यहूदी समाज से बड़ो प्रतिरोध आयी।  अंत म पोपन निर्णय ले कि अब  यहूदी व म्यार (पॉप ) मध्य  शास्त्रार्थ होलु।  जु मि जीत ग्यायी त यहुद्युं  तै ईसाई धर्म अपनाण  पोड़ल या इटली छोड़ि जाण पड़ल।  जु यहूदी जीय जावन त यहूदी इटली म रै सकदन। 
इन म शास्त्रार्थ हेतु यहूदी  कै तै  अनुभवी व  जणगरु अपण धर्म गुरु   लैन अर पोप  व यहूदी धरमगतु मध्य  शास्त्रार्थ शुरू ह्वे गे।  किन्तु यहूदी धर्म गुरु तै इटालियाई भाषा नि आदि छे ना हि लैटिन।  त शास्त्रार्थ सैन इ सैन म हूण निश्चित ह्वे। 
पोपन अपण तीन अंगुळ दिखैन। 
यहूदी धर्मगुरुन कुछ देर तक सोची अर फिर निर्देशिका  अंगुळी उठायी दे।  पोप कुछ परेशान दिखयाई।
फिर पोपन अपण मुंड  चरों ओर अंगुळी घुमाई।
यहुदी  धर्म गुरु न फिर स्वाच अर तौळ जमीन तरफ  जखम  वो  बैठ्युं  छौ तरफ अंगुळी घुमाई।  पोप कुछ अधिक परेशान दिख्याइ।
पोपन वेफर अर चैली वाइन दिखाई। 
यहूदी धर्म गुरुन सेब निकाळ अर सेव दिखाई।
पोपन हार स्वीकार कर दे अर  ब्वाल अब यहूदी इटली म रै सकदन।
चर्च क भितर खंड शिष्यों न पोप तैं पूछ आपन किलै हार मान ?
पोपन बोली - मीन तीन अंगुळी दिखैन  कि त्रिदेव छन।  यहूदी गुरु न एक अंगुळी दिखैक  याद  कि द्वी धर्मों का  एक ही भगवान च।
मीन अंगुळी मुंड मथि घुमाई जांक अर्थ छौ भगवान सब जगा च जबकि यहूदी गुरुन जमीन तरफ अंगुळी कौरि सिद्ध कार कि भगवान उखम जमीन  बि  च ।   
मीन वेफर अर वाइन  दिखैक  बताई कि  भगवान सब तै पाप मुक्त करदो   त यहूदी धर्मगुरुन सेव दिखैक याद दिलाई कि शुरुवाती पाप तो सेव खायिक  ही ह्वे छौं।
उना यहुद्यूंन गुरु पूछ - गुरु जी कमाल कर दे, आपन. . . ह्वाइ क्या छौ ?
गुरु न बताई - मि तै तो पता इ नि मि कनै जीत ?
वैन तीन अंगुळी दिखैन।  मीन समज कि वु बुलणु च कि हमम केवल तीन दिन बच्यां छन देस छुड़नो कुण।  मीन एक अंगुळी  दिखैक  धमकाई कि इन नि ह्वे सकद।  पोपन अंगुळी मुंड म घुमाई मीन समज वु बुलणु यहुद्यूं तै सरा देस छुड़न पोड़ल तो मीन जमीन का तरफ अंगुळी करि  धमकी दे कि हमन तो इखम इ रौण , कखि नि जाण।
 फिरपोपन अपण भोजन दिखाई तो मीन अपण।
XX
फ़्रांसिसी , इतालयी अर सर्वियाई राष्ट्रपति प्राइवेट जेट से यात्रा करणा छा। 
तबि फ़्रांसिसी राष्ट्रपति किराए औ द्याखौ ! म्यार फ्रांस ?
कनै पता चौल ?सब्युंन पूछि।
इटली राष्ट्रपति चिल्लाई - ल्या सि इटली च।
कनै ? प्रश्न छौ।
किलैकि पीसा मीनार दिख्याई।
इनम सर्वियाई कराई - म्यार सर्विया , म्यार सर्विया !
कनै पता चल ? प्रश्न छौ।
सर्वियाइ राष्ट्रपति न अपण हथ पर बंधीं घड़ी दिखाइ अर फिर जेब म हथ डाळ फिर हथ भैर गाड त घड़ी गायब छे।
(अर्थात हम चोर छंवां )
 
 
 
 
Copyright  2021
  इटली    बिटेन   चुटकला , हौंस , हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक, मसखरी ,ठट्टा, लतीफा   
यूरोप के चुटकला , हौंस , हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक, मसखरी ,ठट्टा, लतीफा     श्रृंखला निरंतर चलती रहेगी। 
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            बद्रिकाश्रम में पूजा प्रबंधन

हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर इतिहास संदर्भ में   कत्यूरी युग  :   आदि शंकराचार्य उत्तराखंड आगमन  -३           

 हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर इतिहास संदर्भ में उत्तराखंड पर कत्यूरी राज भाग  -
Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History with reference  Katyuri rule -
 
Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -                   
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -                 


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती -
बद्रिकाश्रम महाभारत काल से ही हिन्दू धर्मियों का आस्था केंद्र था।  किन्तु तिब्बती बौद्ध आतंकियों द्वारा मंदिर के आभूषण लूटने की घटनायी हुईं जिससे बद्रिकाश्रम मंदिर में पूजा व्यवधान पड़ा।  शंकराचार्य आगमन से अंतर् यह आया कि बद्रिकाश्रम में पूजा व्यवस्था प्रबंध अनुशासित हो गया। 
शंकराचार्य ने पूउजा प्रबंधन भार अपने शिष्य तोटकाचार्य को दिया।
रतूड़ी गढ़वाल  का इतिहास (पृष्ठ ४८२ ) में १९ आचार्यों का नाम जिन्होंने ८२० ईश्वी से १२२० ईश्वी तक पूजा प्रबंध किया। 
बद्रिकाश्रम में रावल पुजारियों का प्रवेश बहुत बाद में हुआ। 
 
-
 
Copyright @ Bhishma  Kukreti
हरिद्वार, बिजनौर , सहारनपुर का  कत्यूरी युगीन प्राचीन  इतिहास   अगले खंडों में , कत्युरी वंश इतिहास और हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर , कत्यूरी युग में हरिद्वार , सहारनपुर व बिजनौर  इतिहास , कत्यूरी नरेशों की शासन पद्धति , कत्यूरी राज में जनता , कत्यूरी राज में मंत्री परिषद आदि ,  कत्यूरी  शासन में आंतरिक सुरक्षा , कत्यूरी शासन में कर व आय साधन , कत्युरी राज्य में संस्कृति , कत्यूरी राज्य में धर्म संस्कृति
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राणाकोट (कोट, पौड़ी गढ़वाल )  में ध्यानी परिवार के भवन की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन

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    Tibari, Traditional  House Wood Art in House of Ranakot , Kot Block  , Pauri Garhwal       
गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन -579

 संकलन - भीष्म कुकरेती   
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राणाकोट (कोट, पौड़ी गढ़वाल )  में ध्यानी परिवार  का प्रस्तुत भवन तिमंजिला है।  तल व दूसरी  मंजिल में ज्यामितीय कटान की काष्ठ कला ही दृष्टिगोचर हो रही।  पहले मंजिल में बालकोनी (तिबारी ) है।  तिबारी सात सिंगाड़ों (स्तम्भों ) से निर्मित है।  स्तम्भों के आधार व शीर्ष में अधोगामी पद्म पुष्प , ड्यूल व उर्घ्वगामी पद्म पुष्प से कुम्भियां  निर्मित हुयी हैं।  शीर्ष /मथिण्ड में दो सिंगाड़ों मध्य तोरणम (मेहराब , arch ) सधे हैं।  तोरणम के स्कन्धों में सूर्यमुखी पुष्प (धार्मिक ) व बेलबूटों का उत्कीर्णन हुआ है।
 भवन उत्कृष्ट प्रकार का है व तोरणम भी उत्कृष्ट श्रेणी का है जिसमे ज्यामितीय , प्राकृतिक अलंकरण कला देखि गयी।  भवन में मानवीय काष्ठ अलंकरण नहीं मिलता है।   
सूचना व फोटो आभार: योगेश ध्यानी व देवेंद्र उनियाल
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021

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रोग उतपत्ति कारण पर चर्चा
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चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद   
 खंड - १  सूत्रस्थानम , 25 th,  पचीसवां   अध्याय  (  यज: पुरुषीय     अध्याय   )   पद  २०  बिटेन  २५  तक
  अनुवाद भाग -  १९५
गढ़वाळिम  सर्वाधिक पढ़े  जण  वळ एकमात्र लिख्वार-आचार्य  भीष्म कुकरेती
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      !!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!!
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यांमा भरद्वाज ऋषिन बोलि - कर्म से पैल कर्ता हूंद। बिन कर्मों कर्म फल नि दिखे जांद।  प्रथम , कर्म हूण से फल हूंद जांन पुरुष उतपन्न हूण चयेंद। कर्म करणो कर्ता (पुरुष ) आवश्यक च।  इलै मनुष्य रोग उतपत्ति  कारण 'स्वभाव' इ  च।  जन पृथ्वी , अप,  वायु , अग्नि , खरखरापन , द्रवत्व (तरलता ), चलत्व , अर उष्णत्व सब स्वभाव से इ हूंद।  २०-२१।
कंकायन ऋषिन बोलि -यु सई नी च।  जु  स्वभाव से रोग अर पुरुषों सिद्धि या असिद्धि हूंदी त आरम्भ अर्थात लोक अर शास्त्र म प्रसिद्धि , यज्ञ , कृषि , पढ़न , पढ़ाण , आदि कार्य निष्प्रयोजन ह्वे जाल।  ये सुख दुःख बणाण वळ अर चेतन अर अचेतन क कर्ता अनंत संकल्प कर्ता ब्रह्मा पुत्र प्रजापति च।  २२ -२३। 
भिक्षुरात्रेय बोलि - यु  न  सई नी।  यु संसार प्रजापति से पुत्र रुपेण नि उतपन्न ह्वे।  किलैकि प्रजा क भल कामना करण वळ प्रजापति संतान से द्वेष करण वळा तरां कनो दुःख दींद , अपण संतान तै दुखी करद , वास्तव म पुरुष काल से उतपन्न हूंद अर रोग बि काल से उतपन्न हूंदन ।  सरा दुन्या काल वश म च अर सब जगा काल इ कारण च।  २४ - २५ ।   -
*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य
संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस ,पृष्ठ   २७७ - २७८
सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021
शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम
 
चरक संहिता कु  एकमात्र  विश्वसनीय गढ़वाली अनुवाद; चरक संहिता कु सर्वपर्थम गढ़वाली अनुवाद; ढांगू वळक चरक सहिता  क गढवाली अनुवाद , चरक संहिता म   रोग निदान , आयुर्वेदम   रोग निदान  , चरक संहिता क्वाथ निर्माण गढवाली  , चरक संहिता का प्रमाणिक गढ़वाली अनुवाद , हिमालयी लेखक द्वारा चरक संहिता अनुवाद , जसपुर (द्वारीखाल ) वाले का चरक संहिता अनुवाद , आधुनिक गढ़वाली गद्य उदाहरण, गढ़वाली में अनुदित साहित्य लक्षण व चरित्र उदाहरण   , गढ़वाली गद्य का चरित्र , लक्षण , गढ़वाली गद्य में हिंदी , उर्दू , विदेशी शब्द
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Language Interpretation makes a person famous and prosperous


Art as a strong tool for personal branding, Tourism Promotion, and Place Branding-31
Different Marketing Strategies for fighting with Competitors
Strategies for Executive for marketing warfare
Guidelines for Chief Officers (CEO) series –4045   
       Bhishma Kukreti (Marketing Strategist)
s= आधी अ 
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नानादेशीयवर्णानां सुसम्ग्लेखनं  कला I
The writing of foreign language alphabets is an art.
 (Shukraneeti, Vidya Wa Kala Nirupan Chapter Shloka 77)
     Foreign Language interpretation had been a special task for many centuries. Today, foreign language interpretation is more important than past as globalization is the era. The language translator and interpreter job is to facilitate the communication between two persons or groups not knowing other’s languages.
There are 7000 languages spoken in the world and then it is difficult persons know all languages.
 The foreign language interpreter has to speak in such tone and words  that other person feels communication as original language communication.
The most targeted foreign languages are
English
French
Russian
German
Italian
Now Chinese is important language to interpret as China is biggest exporter in the world.
Spanish is easier to interpreting. 
The easier
 
 Types of foreign language interpreter –
Simultaneous interpreters
Consecutive Interpreters
Sight translation interpreters




Reference:
Shukraniti, Manoj Pocket Books, Delhi pp 223 
Copyright@ Bhishma Kukreti, 2021
Strategies for Executive for marketing warfare
Tactics for the Chief Executive Officers responsible for Marketing
Approaches   for the Chief Executive Officers responsible for Brand Image
Strategies for the Chief Executive Officers responsible for winning Competitors
Immutable Strategic Formulas for Chief Executive Officer
(CEO-Logy, the science of CEO’s working based on Shukra Niti)
(Examples from Shukra Niti helpful for Chief executive Officer)
Successful Strategies for successful Chief executive Officer
Art: the strong medium of Tourism Development, Place Branding
Art: A tool for Personal fame and Place branding




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यूनान (Greece ) बिटेन  चुटकला   ,  हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक , ठट्टा , मसखरी , लतीफा
     देस का चबोड़ , चखन्यौ , मजाक , हौंस
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 (यूरोपीय हास्य , प्रहसन, खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक , ठट्टा , मसखरी , लतीफा  श्रृंखला )
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इकबटोळ - भीष्म कुकरेती 'चबोड़ाचार्य' 
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फ्रेंच फ्राई फ्रांस म नि तळे जंदन अपितु ग्रीस म। 
XX
मै लगद यूनान कुण बुर दिन आण वळ छन।
दुसर - हाँ मीन परिणाम देखि ऐन।
XX
अमेरिका म थैंक्सगिविंग को दिन छुट्टी हूंद. दक्षिण यूरोप म रण  वळ मी भूतपूर्व सैनिक हूणो   नातो थैंक्स गिविंग  छुटि मनाणो  बुल्गारिया  ग्यों।  बुल्गारिया म थैंक्सगिविंग को अर्थ - बुल्गारिया  Greece अर  Turkey क पड़ोसी च। 
XX
यूनान म बैंक लुटण इनि च जन उगांडा म कै  अनाज भंडार पर रेड मरण च।
द्वी जगा जैक पछतावा हूंद किलैकि द्वी जगा कुछ नि मिल्दो।
XX
 पुलिस पूछताछ कमरा म एक पुलिस वळन बैंक डाकू से पूछ - तीन बैंक म डाका डाळ।  बता पैसा कख छन ?
डाकुन अपण खीसाउन्द हाथ डाळ अर पांच यूरो दिखैक ब्वाल - साल्ला ! बोर्ड तो रिजर्ब बैंक कु अर भितर धेला बि ना !
XX
ऐंथन म हैमबर्गर  कैली नि खाण  चयेंद ?
किलैकि उख हैमबर्गर भौत ग्रीसी हूंद।
XX
चांसलर ऐंजेला मार्कल ग्रीस एयरपोर्ट म आयी।
अप्रवासन  अधिकारी न पूछ - देस ?
वींन जबाब दे - जर्मन
काम (Ocuupetion )  क्या ?
बस घुमणो (वैकेशन )
XX
मेरो शरीर ग्रीक मंदिर जन च।
हाँ सब खंडहर !
XX
म्यार दोस्तन बोलि बल मेरो शरीर बुद्ध जन च।
मीन बड़ी मुश्किल से समजायी बल बुद्ध यूनानी नि छौ
 
Copyright  2021
   यूनान (Greece  )  बिटेन   चुटकला , हौंस , हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक, मसखरी ,ठट्टा, लतीफा   
यूरोप के चुटकला , हौंस , हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक, मसखरी ,ठट्टा, लतीफा     श्रृंखला निरंतर चलती रहेगी। 
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डोबा (लैंसडाउन , पौड़ी गढ़वाल ) में ध्यानी परिवार भवन में गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन

    Tibari, Traditional  House Wood Art in House of Doba , Lainsdown    , Pauri Garhwal       

गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन -577

 

 संकलन - भीष्म कुकरेती   

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डोबा में ध्यानी परिवार का प्रस्तुत द्वितीय भवन निमदारी है अर्थात बालकोनी है तो तिबारी नुमा ही किन्तु स्तम्भ सपाट होते हैं।

पहली मंजिल में तिबारी स्टाइल में निमदारी स्थापित है।  निमदारी पांच स्तम्भों वाली निमदारी है. सभी स्तम्भ सपाट व चौखट नुमा हैं। 

निष्कर्ष निकलता है कि  डोबा में ध्यानी परिवार (२सरा ) भवन में केवल ज्यामितीय कटान की कला उपलब्ध है। 

सूचना व फोटो आभार:  जनार्दन ध्यानी

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,बाखली ,  बाखई, कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन नक्काशी श्रृंखला  जारी रहेगी   -
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चौथान कुमाऊं  के एक भवन में काष्ठ कला

    Tibari, Traditional  House Wood Art in House of  Chauthan , Kumaun     

गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  बाखली शैली    की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन -576

 

 संकलन - भीष्म कुकरेती   

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 अजय निहलानी ने अपने ससुराल  से एक भवन की सूचना दी थी जिसमें  उन्होंने पाठों चौथान थलीसैण , पौड़ी गढ़वाल लिखा था।  किन्तु चौथान व भवन की फोटो साफ़ साफ़ दर्शाती है कि भवन गढ़वाल का नहीं कुमाऊं का है जो एक बाखली है।

भवन दुपुर व दुखंड है, दो खोली व चार युग्म छाज दिख रहे हैं  व निम्न तल के कमरों के द्वारों आदि में स्तम्भ ऐसे ही कलायुक्त हैं जैसे खोलियों के व  पहले मंजिल में छाजों के व खड़कियों के स्तम्भों में हैं। 

स्तम्भों में आधार व ऊपर अधोगामी पदम् पुष्प दल , ड्यूल व उर्घ्वगामी पदम् पुष्प से कुम्भियाँ निर्मित हुयी हैं।  ऊपरी कुम्भियों के ऊपर बेल बूटे (प्राकृतिक ) कला अन्न हुआ है। 

खोली व छाजों के तोरणम (मेहराब , arch ) में प्राकृतिक बेल बूटों का अंकन दृष्टिगोचर होता है। 

खोली के शीर्ष /मुरिन्ड /मथिण्ड /header के तहें ( layers ) की कला व स्तम्भों के ऊपरी भाग  की कला (बूटे ) एक ही  है।  खोली के निम्न शीर्ष में देव आकृति स्थापित हुयी है।   खोली में शीर्ष के ऊपर एक अन्य याने मध्य शीर्ष में पांच चौखट हैं जिनमे चक्रात्मक रूप से आध्यात्मिक अंकन हुआ है। 

खोली के छपरिका से शंकु नुमा आकृतियां लटक रही हैं।  छपरिका वा खोली के शीर्ष के किनारे दोनों ओर दीवालगीर स्थापित हुए हैं।  दीवालगीर में निम्न ओर कलायुक्त आकृतियां है तो ऊपर  कुम्भीनुमा चिड़िया  उत्कीर्णित हुयी हैं। 

भवन के छत के नीचे कुम्भी नुमा आकृति के काष्ठ लटक रहे हैं। 

भवन के कमरों व छाजों के दरवाजों के ढक्क्न ज्यामितीय कटान से तख्ते निर्मीय हैं।

 चौथान  भवन की कला उत्कृष्ट प्रकार की है व  प्राकृतिक , ज्यामिति , मानवीय , भक्तिमाय अलंकरण कला उत्कीर्णन युक्त है। 

सूचना व फोटो आभार: अजय निहलानी

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021

गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान ,बाखली ,  बाखई, कोटि बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन नक्काशी श्रृंखला  जारी रहेगी   -
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 रोग जनक को ?  - आत्मा , पुरुष या मन पर चर्चा !

चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद 
 खंड - १  सूत्रस्थानम , 25 th,  पचीसवां   अध्याय  (  यज: पुरुषीय     अध्याय   )   पद  १  बिटेन  ११  तक
  अनुवाद भाग -  १९३
गढ़वाळिम  सर्वाधिक पढ़े  जण  वळ एकमात्र लिख्वार-आचार्य  भीष्म कुकरेती
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      !!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!!
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अब 'यज: पुरुषीय     अध्याय ' की ब्याख्या करला।  जन भगवान आत्रेयन बोलि छौ। १ -२।
धर्म तै प्रत्यक्ष कयां महर्षि आत्रेय एक दैं महर्षियों दगड़ छ्वीं लगाण लगिन बल - आत्मा , इन्द्रिय , मन अर विषय यूं से युक्त 'पुरुष' बणद।  एकी अर रोगुं उतपत्ति कन अर  कखन  हूंदी? ये प्रसंग म काशी राजा वामक ऋषि सभा क सन्मुख बुलण लगिन -हे भगवन  जौं  कारणों से ' पुरुषों' की उतपत्ति हूंदी, ऊं कारणों से इ रोग पैदा हूंदन।  इन मनण संगत च या ना ? ऋषि पुनर्वसु न बोलि - ये महर्षियो ! तुम सब ज्ञान भंडार छंवां , विज्ञान से तुमर सब शंका दूर हुईं छन , तुम लोक काशी राजाक संदेह दूर कारो। ३ - ७।
पारक्षी मौद्गल्य बोलण मिसेन - पुरुष आत्मा से उतपन्न हूंद अर रोग बि आत्मा से इ ।  या आत्मा आहार व्यवहार आदि कर्म करवांदी अर  यांसे इ आरोग्यता व रोग रूपी कर्मफलों क भोग करदो। किलैकि 'चेतना धातु' बिन आत्मा सुःख -दुःख  हेतु रूप आरोग्यता या व्याधि ह्वेइ नि सकद। ८ -९।
शरलोमा ऋषि न बोलि -यु ठीक नी , आत्मा स्वभाव से दुःख से दोष रखण  वळ  आनंद माय च ।  इलै आत्मा दुःख उतपन्न कारी व्याधि दगड़ युक्त नि कौर सकद।  असलम 'सत्व' नामक मनक दगड़ रज व तम मिलिक पुरुष अर रोग उतपन्न करदन।  १०-११।

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*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य
संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस ,पृष्ठ   २७५ -२७६
सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021
शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम

चरक संहिता कु  एकमात्र  विश्वसनीय गढ़वाली अनुवाद; चरक संहिता कु सर्वपर्थम गढ़वाली अनुवाद; ढांगू वळक चरक सहिता  क गढवाली अनुवाद , चरक संहिता म   रोग निदान , आयुर्वेदम   रोग निदान  , चरक संहिता क्वाथ निर्माण गढवाली  , चरक संहिता का प्रमाणिक गढ़वाली अनुवाद , हिमालयी लेखक द्वारा चरक संहिता अनुवाद , जसपुर (द्वारीखाल ) वाले का चरक संहिता अनुवाद , आधुनिक गढ़वाली गद्य उदाहरण, गढ़वाली में अनुदित साहित्य लक्षण व चरित्र उदाहरण   , गढ़वाली गद्य का चरित्र , लक्षण , गढ़वाली गद्य में हिंदी , उर्दू , विदेशी शब्द
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