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किमोली (चम्पावत ) के  दूसरे  जंगले दार भवन (संख्या २ ) में ' कुमाऊँ  शैली'   की  पारम्परिक  'काठ  कुर्याणौ  ब्यूंत 'की  काष्ठ कला अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन
Traditional House Wood carving Art of  Kimoli , Champawat, Kumaun 
कुमाऊँ ,गढ़वाल, के भवन ( बाखली,   खोली , )  में ' कुमाऊँ  शैली'   की  पारम्परिक  'काठ  कुर्याणौ  ब्यूंत 'की  काष्ठ कला अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन  -450
( लेख में इरानी , इराकी अरबी शब्दों की वर्जना प्रयास हुआ है )
 संकलन - भीष्म कुकरेती   
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 किमोली से दो एक भवनों की सूची मिली है।   आज किमोली (चम्पावत ) के  दुसरे   जंगले दार भवन (संख्या २ ) में ' कुमाऊँ  शैली'   की  पारम्परिक  'काठ  कुर्याणौ  ब्यूंत 'की  काष्ठ कला अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन पर चर्चा होगी।
किमोली का प्रस्तुत भवन जंगलेदार भवन है व तिपुर व दुखंड है।   भवन के भ्यूंतल व पहले तल में बरामदे स्थापित  हैं।  भ्यूंतल (Ground  floor  ) के  बरामदे  क्र बाहर दो तीन सपाट  चौखट स्तम्भ हैं जो ज्यामितीय कटान के उदाहरण हैं।
  पहले तल के बरामदे के बाहर ओर   सामने सात  व आड़े भी सात खड़े सपाट स्तम्भ हैं।  स्तम्भ के आधार में दोनों ओर खपचों  से स्तम्भ को  खड़े में आधार  देते हैं।  स्तम्भों के मध्य काष्ठ  जंगले  स्थापित हैं जिनमे   ज्यामितीय  कटान के XX  नुमा कटान से जंगले  बने हैं। 
ऊपर  मुरिन्ड / header की कड़ी भी सपाट है। 
 किमोली  के प्रस्तुत जंगलेदार भवन  में भव्य शैली का आकर्षण है व  काष्ठ  में  ज्यामितीय कटान की कला दर्शनीय है। 
सूचना व फोटो आभार : के एस  बोरा (जय ठक्कर संग्रह )
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021
Bakhali House wood Carving Art in  Champawat Tehsil,  Champawat, Uttarakhand;  Bakhali    House wood Carving Art in  Lohaghat Tehsil,  Champawat, Uttarakhand;  Bakhali, House wood Carving Art in  Poornagiri Tehsil,  Champawat, Uttarakhand;  Bakhali , House wood Carving Art in Pati Tehsil ,  Champawat, Uttarakhand;  चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला,  चम्पावत    तहसील , चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला,; लोहाघाट तहसील   चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला अंकन ,  पूर्णगिरी तहसील ,  चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला अंकन   ;पटी तहसील    चम्पावत , उत्तराखंड में भवन काष्ठ कला,, अंकन   

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चिकित्सा  व वैद्य  आदि के सद्गुण
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चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद 

 
 खंड - १  सूत्रस्थानम ,  नवों    अध्याय  ( खुड्डाक चतुष्पाद  )  १  पद   बिटेन  - तक
  अनुवाद भाग -   ६९
गढ़वालीम  सर्वाधिक  अनुवाद करण  वळ अनुवादक  - आचार्य  भीष्म कुकरेती
  ( अनुवादम ईरानी , इराकी अरबी शब्दों  वर्जणो  पुठ्याजोर )   
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      !!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!!
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अब 'खुड्डाक चतुष्पाद ' ( चिकित्सा चार क्षुद्र  चरण ) की व्याख्या करदां जन आत्रेय भगवान न बोली थौ।  १ , २।
वैद्य , औषध ,परिचारक (nursing ) अर  रोगी यी  चिकित्सा का चार चरण छन।  ी चारि इ रोग निदान म गुणवान कारण अर्थात महत्वपूर्ण छन। ३। 
शरीरा  धातु, , बात , पित्त ,अर कफै विषमता नाम विकार च।  अर धातुं साम्यता /अनुकूलता हूणो नाम प्रकृति च। आरोग्यता सुख च ार रोग दुःख च।  वैदक शास्त्रम सुख -आरोग्यता च ार दुःख -रोग च।  ४।
धातुओं क विषम हूण  पर भिषक , रोगी , औषध अर परिचारक धातुं तै सम्यक करदन वे कुण 'चिकित्सा ' बुल्दन।  ५। 
सद्गुरु उपदेश से परिपूर्ण शास्त्र ज्ञान  ,  चिकित्सा शास्त्र को बड़ो अनुभव , चिकित्सा कार्य म कुशलता, चिकित्सा कर्म की सिद्ध हस्तता , पवित्रता , स्वच्छता यी वैद्या गुण  छन।  ६। 
 द्रव्य गुण -
बहुता , प्रचुरता , रोग दूर करणो  सामर्थ, अर जैसे  बनी बनी प्रकारौ कल्प निर्माण ह्वे  साकन , रस , वीर्य ,प्रभाव गुण सम्पन  ह्वान्वो, ठीक ऋतू म कट्ठा करे गे ह्वावो , यी चार गुण  औषध म हूण  चएंदन।  ७। 
परिचारक गुण -
सेवा कर्म को जणगर, कर्म कुशल ,रोगियों से प्रेम करण वळ , सुचिता यी चार गुण परिचारकौ  छन।  ८।
स्मरण शक्ति युक्त, वैद्यौ  बुल्युं मनण  वळ , निडर ,रोग व चिकित्सा से नि डरण वळ ,अपण  शिकैत भली प्रकार से बताण  वळ रोगी लक्षण छन।  ९।

 
*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य
संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस ,पृष्ठ   ११९    ब्रिटेन   तक
सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021
शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम

चरक संहिता कु  एकमात्र  विश्वसनीय गढ़वाली अनुवाद; चरक संहिता कु सर्वपर्थम गढ़वाली अनुवाद; ढांगू वळक चरक सहिता  क गढवाली अनुवाद , चरक संहिता म   रोग निदान , आयुर्वेदम   रोग निदान  , चरक संहिता क्वाथ निर्माण गढवाली
 Fist-ever authentic Garhwali Translation of Charaka  Samhita, First-Ever Garhwali Translation of Charaka  Samhita by Agnivesh and Dridhbal,  First ever  Garhwali Translation of Charka Samhita. First-Ever Himalayan Language Translation of  Charaka Samhita   

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३२ अंगहारों  वर्णन

भरत नाट्य शाश्त्र  अध्याय  चौथो ४   , पद /गद्य भाग   १६  बिटेन  तक
(पंचों वेद भरत नाट्य शास्त्रौ प्रथम गढवाली अनुवाद)
  पंचों वेद भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद भाग -   

s = आधा अ
( ईरानी , इराकी , अरबी  शब्द  वर्जना प्रयत्न  करे गे )
 पैलो आधुनिक गढवाली नाटकौ लिखवार - स्व भवानी दत्त थपलियाल तैं समर्पित
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गढ़वळिम सर्वाधिक अनुवाद करणवळ अनुवादक -   आचार्य  भीष्म कुकरेती   
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अंगहार -
महेश्वरा वचन सूणी ब्रह्मा श्रीन बोलि -  हे देवाधिदेव तुम अंगहारों  विषय म ब्वालो। तब भगवान शिवन तंडू  तै बुलैक  बोलि - भरत मुनि तैं  अंगहार बारा म बथाओ।  १६ , १७। 
तब महामना तंडून करणों अर रेचक युक्त अंगहार का बारा म मे  बताई स्यू मि  अब व्याख्या करदो।   , १८। १९
अंगहार बत्तीस /३२ हूंदन -
स्थिरहस्त
पर्यस्तक
सूचीबिद्ध
अपविद्ध
आक्षिप्तक
उद्धट्टित
विष्कम्भ
अपराजित
विष्कम्भापसृत
मत्ताक्रीड
स्वस्तिकरे चित्त
पार्श्वस्वस्तिक
वृश्चिकापसृत
भ्र्मर
मत्तस्खलित
मदविलासित
 गतिमंडल
परिच्छिन्न
परिवृतरेचित
वैशाखरेचित
प्रवृत
अलातक
पार्श्वच्छेद
विद्युद्भ्रांत
उरुद वृत्त
आलीढ
रेचित
आच्छुरित
आक्षिप्तरेचित
संभ्रांत
अपसर्पित
तथा
अर्धनिकुट्टक           १९ -२७।
अब मि यूं अंगहारों का करणों पर निर्भर रण वळ  प्रयोगों बारा म बतांदु।  यांक अतिरिक्त मि  यी बि  बतौल बल अंगहार व करणों (नाच ) म हथ अर खुटुं गति (हलण -चलण ) कनो  हूण चयेंद। सबि अंगहार करणो द्वारा निष्पन्न हूंदन तो मि  पैल करणो  नाम बतांदु।  २८ - ३०।
नृत्यम हथ अर  खुटुं हलण -चलणौ कुण 'करण' बुल्दन।  द्वी करणों  योग से एक मातृका बणदि  अर  द्वी ,  तीन चार  मातृकाओं से अंगहार बणद।  तीन करणों द्वारा एक कलापक , चार करणों से एक मंडल , पांच करणों से संघातक।  ये अनुसार अंगहार छै , सात , आठ अर  नौ करणों मेल से बणदन।  अब यूंमा  हथ -खुटुं गति से बणन वळ  स्वरूपों / भेदों  बारम बथांदु।  ३० -३४।   




 

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  सन्दर्भ - बाबू लाल   शुक्ल शास्त्री , चौखम्बा संस्कृत संस्थान वाराणसी , पृष्ठ -  ८६ , 
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 भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
  भरत नाट्य शास्त्र का प्रथम गढ़वाली अनुवाद , पहली बार गढ़वाली में भरत नाट्य शास्त्र का वास्तविक अनुवाद , First Time Translation of   Bharata Natyashastra  in Garhwali  , प्रथम बार  जसपुर (द्वारीखाल ब्लॉक )  के कुकरेती द्वारा  भरत नाट्य शास्त्र का गढ़वाली अनुवाद   , डवोली (डबरालः यूं ) के भांजे द्वारा  भरत नाट्य शास्त्र का अनुवाद ,

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32 Science (Vidya) and 64 Art (Kala)


Strategies to be known by political leaders, administrators, statesmen for administrating the country
Immutable Strategic Formulas for Chief Executive Officer
(CEO-Logy, the science of CEO’s working based on Shukra Niti)
(Examples from Shukra Niti helpful for Chief executive Officer)             
Successful Strategies for successful Chief executive Officer – 292
Guidelines for Chief Officers (CEO) series – 292   
s= आधी अ   
By Bhishma Kukreti (Management Acharya)
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विद्या ह्यानंताश्च कला: संख्यातु नैव शक्यते I
विद्यामुख्याश्च द्वात्रिशच्चतु: षष्टिकला: स्मृता:
Art and science are infinite in numbers and it is not possible to enumerate. Mainly, there are 32 primary Vidya (Science) and 64 primary arts
(Shukraneeti, Chapter 7 Vidya va Kala Nirupan,1)

References:
1-Shukra Niti, Manoj Pocket Books Delhi, page -213 
Copyright@ Bhishma Kukreti, 2021


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अल्मोड़ा बाजार के एक  भवन खोली  (गजेंद्र बिष्ट छायाचित्र ३ ) में  कुमाऊं की    'काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत'  की काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन
Traditional House Wood Carving art of, Almora Bazar, Almora district Kumaon
 
कुमाऊँ ,गढ़वाल, के भवन  में ( बाखली ,तिबारी, निमदारी ,जंगलादार  मकान  खोली,  कोटि बनाल )   कुमाऊं की    'काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत'  की काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन - 449 
 (प्रयत्नहै कि इरानी , इराकी , अरबी शब्द वर्जन )
 संकलन - भीष्म कुकरेती
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  गजेन्द्र बिष्टसंग्रह से अल्मोड़ा बाज़ार के कई भवनों के छाया चित्र प्राप्त हुए हैं।  आज  गजेन्द्र बिष्टद्वारा प्रेषित अल्मोड़ा बाजार के एक भवन खोली में  कुमाऊं की    'काठ   कुर्याणौ   ब्यूंत'  की काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन पर चर्चा होगी।  अल्मोड़ा बाजार के प्रस्तुत भवन की खोली  अपने  युवा काल में बड़ी आकर्षक रही होगी और आज भी आकर्षक है। 
खोली में दोनों और तीन उप स्तम्भों  के युग्म से निर्मित मुख्य स्तम्भ हैं।  दो उप स्तम्भ एक प्रकार के हैं व एक भिन्न प्रकार का जिसमें   दूब   घास  की पत्तियों जैसे अंकन हुआ है जो लता नुमा दृष्टिगोचर होती हैं।  शेष दो अन्य उप स्तम्भों के आधार में घुंडियां या कुम्भियाँ का अंकन हुआ है व ड्यूल भी है ऊपरी कुम्भी  के ऊपरी सीधे कमल दल जैसा अंकन हुआ है।  इसके ऊपर उप स्तम्भ में चौखट में पत्तियों का अंकन हुआ है।  उप स्तम्भ ऊपर जाकर शीर्ष /मुरिन्ड /header  के अलग अलग स्तर बन जाते हैं।  इस तरह मुरिन्ड /मथिण्ड /header  के स्तरों /layers  की काष्ठ कला  उप स्तम्भों के ऊपरी भाग जैसी है। 
  मुरिन्ड /मथिण्ड के नीचे वाले भाग में तोरणम स्थापित है।  तोरणम के स्कन्धों में जीरा बीज , पत्ती  जैसे आकृतियों का अंकन हुआ है। 
खोली के ऊपर छपरिका के नीचे काष्ठ कला में ज्यामितीय कटान दृष्टिगोचर होता है।   
निष्कर्ष निकलता है कि अल्मोड़ा बाज़ार के भवन की इस खोली  में प्राकृतिक व ज्यामितीय कला का अंकन हुआ है।  .
सूचना व फोटो आभार : गजेंद्र बिष्ट संग्रह
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2020
Traditional House Wood Carving art of , Kumaon ;गढ़वाल,  कुमाऊँ , उत्तराखंड , हिमालय की भवन  (तिबारी, निमदारी , जंगलादार  मकान , बाखली, कोटि  बनाल  ) काष्ठ  कला अंकन, लकड़ी पर नक्काशी   
अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ; भिकयासैनण , अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ;  रानीखेत   अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ; भनोली   अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ; सोमेश्वर  अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ; द्वारहाट  अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ; चखुटिया  अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ;  जैंती  अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ; सल्ट  अल्मोड़ा में  बाखली  काष्ठ कला ;

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सद्वृत्ति को महत्व

चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद 

 
 खंड - १  सूत्रस्थानम ,  अटों   अध्याय ((इन्द्रियोपक्रमणीय )  पद  २९ से  ३४ तक   , 
  अनुवाद भाग -   ६८
गढ़वालीम  सर्वाधिक  अनुवाद करण  वळ अनुवादक  - आचार्य  भीष्म कुकरेती
  ( अनुवादम ईरानी , इराकी अरबी शब्दों  वर्जणो  पुठ्याजोर )   
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      !!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!!
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अपवित्र अवस्थाम गौ घी , अक्षत, तिल , कुशा व सरसों द्वारा अग्नि म हवन नि करण अर  प्रार्थना करण  चयेंद बल अग्नि म्यार शरीर से भैर नि  जा। वायु म्यार प्राणों तैं  धारण कारो।  विष्णु म्यार अंदर शक्ति भरे।  इंद्र बल संचार कारो।  कल्याणकारी जल मेम प्रवेश कारो।  ' आपो हिष्ठा मयो भुवस्ता न ऊर्जे दधातन ' ये मंत्र तै पड़द  दैं जल स्पर्श करदा  करदा स्नान  आचमन करण   चयेंद।  द्वी  समय भोजन उपरांत  होंठ अर खुट  सूखाण  चएंदन अर  मुंड ,आँख कंदूड़ , नाक तै जल स्पर्श करण  चयेंद।  तब अपण  हृदय व मुंड तै जल से स्पर्श कारो।  ब्रह्मचर्य  अर हौरुं  तै  ज्ञान दान की प्रवृति ,सब प्राणियों म आत्मवत् प्रवृति , सब प्राणियों से दया भाव ,अप्रतिग्रह ,  शांत   इन्द्रिय चित्त वळ बणो।  २९। 
पंचेन्द्रिय व यूंका पांच प्रकार ,मन अर  चार कारण , अर  सम्पूर्ण सद्वृत तै इन्द्रिययोग अध्याय म बुले गे।  जु मनिख सद्वृत आचरण करदो वु  सौ वर्ष तक निरोग रौंद।  साधुओं से पूजित ह्वेका मनुष्य लोक तै अपण  यश से भर दींदु, यश्वशी बण  जान्दो ।  धर्म अर अर्थ पांद।  सब प्राणियों प्रति बंधु भाव भर दीन्द। पुण्य कर्मो वळ मनिख अति उत्कृष्ट लोक (पद/ छवि )   पप्राप्त करद।  इलै सब्युं  तै सद्वृत पालन करण  चयेंद।  ये सद्वृत का अतिरिक्त जो  सद्वृत नि बुले गेन  ऊंको  बि  पालन हूण  चयेंद।  इन भगवान आत्रेय को अभिप्राय च।  ३०- ३४ I
इन्द्रियोप कर्मणोयो अध्याय समाप्त। 
 
*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य
संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस ,पृष्ठ   ११९   
सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021
शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम

चरक संहिता कु  एकमात्र  विश्वसनीय गढ़वाली अनुवाद; चरक संहिता कु सर्वपर्थम गढ़वाली अनुवाद; ढांगू वळक चरक सहिता  क गढवाली अनुवाद , चरक संहिता म   रोग निदान , आयुर्वेदम   रोग निदान  , चरक संहिता क्वाथ निर्माण गढवाली
 Fist-ever authentic Garhwali Translation of Charaka  Samhita, First-Ever Garhwali Translation of Charaka  Samhita by Agnivesh and Dridhbal,  First ever  Garhwali Translation of Charka Samhita. First-Ever Himalayan Language Translation of  Charaka Samhita   

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The employees follow up the behaviour of CEO

Strategies to be known by political leaders, administrators, statesmen for administrating the country
Immutable Strategic Formulas for Chief Executive Officer
(CEO-Logy, the science of CEO’s working based on Shukra Niti)
(Examples from Shukra Niti helpful for Chief executive Officer)             
Successful Strategies for successful Chief executive Officer – 291
Guidelines for Chief Officers (CEO) series – 291   
s= आधी अ   
By Bhishma Kukreti (Management Acharya)
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यस्याश्रितो भवेल्लोकस्तद्वदाचरित प्रजा I
भुंग्कते राष्ट्रफलं सम्यगतो राष्ट्रकृतं त्वघम् II
The subject follows the behaviour of the King. That is the reason the king is responsible for the pain and happiness of the subject.
(Shukraneeti, Chapter 5, Rashtra Praja Nirupan, 4)

References:
1-Shukra Niti, Manoj Pocket Books Delhi, page -209 
Copyright@ Bhishma Kukreti, 2021

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  राईला  (नैनीताल )  के एक भवन  में कुमाऊं शैली  की काष्ठ कला अंकन,अलंकरण, उत्कीर्णन

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   Traditional House Wood Carving Art in  Raila Nainital;
कुमाऊँ, गढ़वाल, केभवन (बाखली,तिबारी,निमदारी,जंगलादार मकान,खोली ) में कुमाऊं शैली  की काष्ठ कला अंकन,अलंकरण, उत्कीर्णन-448 
(प्रयत्न किया है कि आलेख में इरानी , इराकी , अरबी   शब्द न हों )
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संकलन - भीष्म कुकरेती
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 गढ़वाल की तरह ही कुमाऊं में जंगलेदार भवन निर्माण शैली  का मूल संभवतया  हरसिल राजा विल्सन का बंगला है।  इस सर्वेक्षण में पाया गया कि गढ़वाल में जंगलेदार भवनों की संख्या अधिक पायी गयी व कुमाऊं क्षेत्र में न्यून संख्या। 
प्रस्तुत भवन (संभवतया होम स्टे है )  स्वतंत्रता के पश्चात का निर्माण है व छत में ब्रिटिश शैली का प्रभाव है।  प्रस्तुत   राईला  (नैनीताल )  का   भवन  दुपुर व दुखंड /तिभित्या  है।  भवन में काष्ठ उत्कीर्णन /कुर्याण  नहीं है अपितु ज्यामितीय कटान से निर्मित स्तम्भ महत्वपूर्ण (शैली )  है।
  भवन के भ्यूंतल (Ground  Floor ) व पहले तल में  तीनेक फिट के बरामदे हैं दोनों ब्रांडों में बाहर  सात सात ज्यामितीय कटान से निर्मित चौखट स्तम्भ हैं। 
पहले तल में दो स्तम्भों के मध्य दो ढाई फिट की ऊंचाई में जंगला बंधा है और  दो कड़ियों के मध्य ज्यामितीय कटान का सपाट  जंगल है जिसमे XX  आकर की सरंचना निर्मित है।
  निष्कर्ष निकलता है कि   राईला  (नैनीताल )  के  प्रस्तुत  भवन  में ज्यामितीय कटान की कला ही प्रमुख काष्ठ कला है। 
सूचना व फोटो आभार: मनोज मेहता
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021 
  Traditional House Wood Carving Art in Nainital;  Traditional House Wood Carving Art in Haldwani,  Nainital;   Traditional House Wood Carving Art in  Ramnagar, Nainital;  Traditional House Wood Carving Art in  Lalkuan , Nainital; 
नैनीताल में मकान काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन ,  ; हल्द्वानी ,  नैनीताल में मकान  काष्ठ कला अलंकरण, ; रामनगर  नैनीताल में मकान  काष्ठ कला अलंकरण,  ; लालकुंआ नैनीताल में मकान  काष्ठ कला अलंकरण , उत्कीर्णन 

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पूर्वरंग विधान

भरत नाट्य शाश्त्र  अध्याय  तिसर ,  चौथो    ,  १ पद /गद्य भाग   बिटेन   १६ तक
(पंचों वेद भरत नाट्य शास्त्रौ प्रथम गढवाली अनुवाद)
  पंचों वेद भरत नाट्य शास्त्र गढवाली अनुवाद भाग -   


s = आधा अ
( ईरानी , इराकी , अरबी  शब्द  वर्जना प्रयत्न  करे गे )
 पैलो आधुनिक गढवाली नाटकौ लिखवार - स्व भवानी दत्त थपलियाल तैं समर्पित
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गढ़वळिम सर्वाधिक अनुवाद करणवळ अनुवादक -   आचार्य  भीष्म कुकरेती   
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ये प्रकार विधिवत पूजन उपरांत मीन पितामह बरमा  श्री से बोली - तुम शीघ्र आज्ञा द्यावो बल कु  नाटक खिले जाव ! I १। 
तब पितामह न बोले - ब्यटा ! तुम अमृतमंथन नाटक ख्यालो।  नाटक डिवॉन तै भलो लगद अर उंकुण उत्साहवर्धी बि  च।  २। 
हे विद्वान् ! मीन जै समवकार की रचना कार वो धर्म , काम  अर  अर्थ  को साधक च।  तुम अब ये नाटक का प्रयोग कारो।  ३।
ये समवकार का प्रस्तुत हूणो  उपरान्त दिबता अर दैत्यगण अभिनय , दृश्य , भावो , कल्पनाओं देखि  पुळेन।  ४। 
तब कै समयम कमलयोनि ब्रह्मा श्रीन मे से बवाल - हमर अपर  ये नाटक तै महात्मा शंकर समिण दिखौला।  ५। 
तब पितामह व देवगण भगवान शिवक निवास म गेन  अर विधिवत अर्चना उपरान्त उंन बोली - हे देवाधिदेव ! मीन जै समवकार की रचना कार वै  तै सुणनो  -दिखणो  कृपा कारो।  ६, ७ ।
भगवान शंकरन ब्रह्मा श्री से बोली - हम अवश्य दिखला।  तब ब्रह्मा श्रीन मीम ब्वाल - मुनि ये समवकार का प्रदर्शनै  तैयार कारो।  ८।
ये श्रेष्ठ मुनिगण  ! तब तब वे हिमालय पर्वतौ  प्रदेश पर जु  भौत सा पर्वतों से घिर्यूं छौ , जखम भौत सा भूतगण छा अर   जख  सुरम्य उड़्यारों  अर छिंछ्वड़ छा।  उख मीन पूर्वरंग विधान का उपरान्त  अमृतमंथन समवकार (नाटक ) व त्रिपुर दाह  नाटक डिम कु  प्रयोग कार।  ९ - १०।
तब सबि  भूतगण कार्य अर भावों प्रयोग देखि अति पुळेन अर भगवान शिवन  बि  अति  संतुष्ट ह्वेका ,   पितामह ब्रह्मा से ब्वाल- ।  ११।
हे महामते ! तुमन यु  नाटक  प्रयोग को श्रेष्ठ निर्माण कार जु यशदिंदेर , शुभ अर्थों साधक , पवित्र अर बुद्धि संवर्धक  च।  १२। 
स्याम दैं  संध्या समय जब मीन नृत्य निर्माण कार तब मीन ये तै अंगहारों  (शरीर का हलण - चलण ) से जो करणों  से मीलि  निर्मित हूंदन युक्त करदा और बि  सुंदर छन।  तुम यूँ अंगहारों का नाटक पूर्वरंगविधि म प्रयोग कारो।  १३।
     -------- पूर्व रंगा   द्वी प्रकार -
वर्धमानक , आसारित,, गीत , महागीत , की अवस्था म एको भावों का  भल  प्रकार  से अभिनय कर   सकिल्या क्या  ?  तुमन जो पूर्व रंग प्रयुक्त कार वु  शुद्ध पूर्वरंग च पर जब वर्धमानक आदि  मिल जाला तो मिश्रण  से यु पूर्वरंग  चित्र पूर्वरंग ह्वे  जांद।  १४- १६ ।

 

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  सन्दर्भ - बाबू लाल   शुक्ल शास्त्री , चौखम्बा संस्कृत संस्थान वाराणसी , पृष्ठ - ८३ बिटेन  ८६
 भरत  नाट्य शास्त्र अनुवाद  , व्याख्या सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती मुम्बई
भरत नाट्य  शास्त्रौ  शेष  भाग अग्वाड़ी  अध्यायों मा   
  भरत नाट्य शास्त्र का प्रथम गढ़वाली अनुवाद , पहली बार गढ़वाली में भरत नाट्य शास्त्र का वास्तविक अनुवाद , First Time Translation of   Bharata Natyashastra  in Garhwali  , प्रथम बार  जसपुर (द्वारीखाल ब्लॉक )  के कुकरेती द्वारा  भरत नाट्य शास्त्र का गढ़वाली अनुवाद   , डवोली (डबरालः यूं ) के भांजे द्वारा  भरत नाट्य शास्त्र का अनुवाद ,

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Shop Tax and Toll Tax (road Tax)


Guidelines for Political Leaders/Finance Ministry for levying the State Taxation -17 
Strategies to be known by political leaders, administrators, statesmen for administrating the country
Strategies for Chief Executive Officer for creating the wealth and defending the wealth -39
Immutable Strategic Formulas for Chief Executive Officer
(CEO-Logy, the science of CEO’s working based on Shukra Niti)
(Examples from Shukra Niti helpful for Chief executive Officer)             
Successful Strategies for successful Chief executive Officer – 290
Guidelines for Chief Officers (CEO) series – 290 
s= आधी अ   
By Bhishma Kukreti (Management Acharya) 
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तथा चापणिकेभ्यस्तु पण्य भूशुल्कमाहरेत् I
मार्गसंस्कार रक्षार्थ मार्गगेभ्यो हरेत फलम् II 127
सर्वत: फलभुग्  भूत्वा दासवत् स्यात्तु रक्षणो   II
The King should receive tax from the shops of the shopkeepers as land tax and should receive Road tax from travelers for maintaining the public roads.
By this way, the king should collect taxes and should protect all.
(Shukraneeti, Chapter 5, Kosha Nirupan, 127, 128)

References:
1-Shukra Niti, Manoj Pocket Books Delhi, page -207 
Copyright@ Bhishma Kukreti, 2021

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