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Alternate to Decided Judges
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Duties (Raj dharma) of the Chief Executive Officer -12 
Judiciary System in the Organization /Country

Guidelines for Chief Officers (CEO) Series –420       
       Bhishma Kukreti (Marketing Strategist)
s= आधी अ 
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यदा विप्रो न विद्वान् स्यात् क्षत्रियं तत्र योजयेत् I
वैश्यं वा धर्मशस्त्रज्ञम् शूद्रं यलेन वर्जयेत् II
If learned Brahman would not be available the king should consult (for conflict settlement ) Kshatriya or a Vaishya but not lower cadre employee.
 (Shukraniti, Raj dharma Nirupan of Duties of King –   14)

Reference:
Shukraniti, Manoj Pocket Books, Delhi pp 253
Copyright@ Bhishma Kukreti, 2021
Strategies for Executive for marketing warfare
Tactics for the Chief Executive Officers responsible for Marketing
Approaches   for the Chief Executive Officers responsible for Brand Image
Strategies for the Chief Executive Officers responsible for winning Competitors
Immutable Strategic Formulas for Chief Executive Officer
(CEO-Logy, the science of CEO’s working based on Shukra Niti)
(Examples from Shukra Niti helpful for Chief executive Officer)
Successful Strategies for successful Chief executive Officer
Duties (Raj dharma) of the Chief Executive Officer   


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मझीरा (भिकियासैण , अल्मोड़ा ) के एक भवन में कुमाऊं की    ' काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन
Traditional House Wood Carving art of, Majhera  Bhikiyasain Almora, Kumaon   
 
कुमाऊँ ,गढ़वाल, के भवन  में ( बाखली ,तिबारी, निमदारी ,जंगलादार  मकान  खोली,  कोटि बनाल )   कुमाऊं की    ' काष्ठ कला  अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन - 595 

 संकलन - भीष्म कुकरेती
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 मझीरा (भिकियासैण , अल्मोड़ा ) का  प्रस्तुत  भवन दुपुर व दुखंड है।  तल मंजिल में काष्ठ कलाकृति दृष्टि से कोई विशेष उललेकजन्य कृति नहीं है केवल सपाट दरवाजे वाले कमरे।  पहली मंजिल में एक बड़ा कमरे के दरवाजे व सिंगाड़  व छाज के स्तम्भादि उल्लेखनीय है।
कमरे वा छाज के स्तम्भ एक जैसे ही हैं।  मुख्य स्तम्भ दो उप स्तम्भों के युग्म से निर्मित हैं।  उप स्तम्भ में अधोगामी पद्म पुष्प दल , ड्यूल व उर्घ्वगामी पदम् पुष्प से निर्मित कुम्भिया निर्मित हैं।  कमरे के उप स्तम्भ में कमल दल से ऊपर लतानुमा अंकन हुआ है जो शीर्ष /मुरिन्ड /मथिण्ड  की परते भी हैं।  ऊपर मुरिन्ड /मथिण्ड  में देव प्रतीक सूरज मुखी पुष्प भी चिपकाया गया है।  छाज के उप स्तम्भों में ऊपर भी कुम्भिया हैं व फिर प्राकृतिक कला अंकन हुआ है। 
निष्कर्ष निकलता है कि  मझीरा (भिकियासैण , अल्मोड़ा ) के  प्रस्तुत  भवन में ज्यामितीय व प्राकृतिक अलंकरण अंकन हुआ है व कला अंकन उत्कृष्ट प्रकार का है। 
सूचना व फोटो आभार :  बलवंत सिंह
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022

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हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर इतिहास  :     चाहमान नरेश प्रीति राज तृतीय का दक्षिण उत्तराखंड पर अधिकार 

 हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर इतिहास संदर्भ में उत्तर भारत में मुस्लिम  क्रूरता, निर्दयी , प्रजा पीड़क  व मुस्लिम आतंकवादियों का अधिकार  भाग   -१५
उत्तर भारत में  आतंकवादी मुस्लिमों का मुस्लिम आतंकवाद का उदय
Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History with reference, the start Muslim Cruelty, Muslim  Terrorism in North India  - 15

Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  - 393             
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  ३९३           


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती -

पृथ्वी राज तृतीय का शासन काल ( ११७७- ११९२ ) मन जाता है।  उसे अजमेर का शासन ११७७ में मिला।  ११७८ में आतंकवादी , क्रूर , बिधर्मियों को मौत के घात उतरने वाली कौम के नरेश मुहमद गौरी ने गुजरात पर आतंकवादी आक्रमण किया।  जैसा कि मुस्लिम संस्कृति थी गौरी ने प्रजा पीड़क मार्ग ही अपनाये।  वः पक्का मुस्लिम था जो काफिरों को जिन्दा नहीं छोड़ता था।  हिंदी फिल्मों में लगभग गलत दर्शाया जाता की मुस्लिम ईमान पर विश्वास करते हैं व दयालु होते हैं गजनवी , गौरी , खिलजी ने प्रमाण दिया मुस्लिम आतंकवादी होते थे और पकिस्तान भी यही साबित क्र रहा है। आतंकवादी मुस्लिम मुहमद गोरी ने ११७८ में पंजाब पर प्रजा पीड़न, क्रूरता  व आतंकवाद का सहारा लेकर अधिकार कर डाला।  पृथ्वी राज तृतीय की सीमा पर ही आतंवादी मुस्लिम गौरी की सीमा लगती थी।
 पूर्व की ओर  दयालु हिन्दू पृथ्वी राज का राज पंजाब से प्राचीन ब्रिटिश  मेरठ कमिश्नरीसे  राम गंगा तक था।  गंगा यमुना मध्य तोमरों का अधिकार हो चला था जो बाद में पृथ्वी राज के अंतर्गत आ गया। आतंकवादी मुस्लिम  गौरी ने  ११९१ चौहान राज पर आक्रमण किया किन्तु हरा दिया गया। 
पृथ्वी राज चहुआन अन्य हिन्दू राष्ट्रों के अधिकार हनन में लग गया और अंत में ११९२ में गौरी द्वारा कैद क्र लिया गया व उसकी हत्त्या कर दी गयी।  अस्तु आतंकवादी गौरी का अजमेर व दिल्ली पर अधिकार हो गया।  यहीं से हरिद्वार , सहारनपुर व बिजनौर पर आतंकवादी मुस्लिमों के अधिकार की शुरुवात हुयी। 

 
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संदर्भ :
१- दशरथ शर्मा १९५९ अर्ली  चौहान डाइनेस्टीज , ऐस चाँद कम्पनी  पृष्ठ ६९
२  - शिव प्रसाद डबराल 'चारण ' ,  उत्तराखंड का इतिहास भाग ३ वीरगाथा प्रेस दुगड्डा , उत्तराखंड , पृष्ठ   -४९२


Copyright @ Bhishma  Kukreti
उत्तरी भारत पर आतंकवादी जाहिल , मुस्लिम, लोक हत्त्यारे मुस्लिम  आक्रांताओं के आक्रमण व अधिकार समय उत्तराखंड ; मुस्लिम आतंकवाद का प्रसार , आतंकवादी मुस्लिमों द्वारा लूटपाट इतिहास

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रस म विपाक चर्चा
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चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद   
 खंड - १  सूत्रस्थानम , 26  th,  छब्बीसवां  अध्याय   (  भद्र काप्यीय  अध्याय   )   पद  ५४  बिटेन  ६०  तक
  अनुवाद भाग -  ३०५
गढ़वाळिम  सर्वाधिक पढ़े  जण  वळ एकमात्र लिख्वार-आचार्य  भीष्म कुकरेती
s = आधी अ
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      !!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!!
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विपाक - यांक अगवाड़ी  चर्चा  होलि।  कटु , तिक्त , कषाय रसों आधारभूत द्रव्यों का विपाक अधिकतर कटु हूंद।  िप्पली कटु रस हूण पर बि कटु हूंद अर पिप्पली कटु रस हूण पर विपाक म मधुर च।  अम्ल रस्क अम्ल अर मधुर  लवण रस क मधुर विपाक हूंद।  मधुर , अम्ल व लवण रस तिनि स्निग्ध छन इलै वायु , मल मूत्र तै निकाळण  म सुखी से सहायक हूंदन।  कटु , कषाय , तिक्त   रुखा हूंदन इलै वात , मल , मूत्र , शुक्र तै भैर  निकळन म कठिनाई दींदन।  जै द्रव्य क विपाक कटु हूंद वो वीर्यनाशी , मल -मूत्र अवरोधक  अर  वायुकारक हूंदन।  जै द्रव्य क विपाक मधुर हूंद स्यु मल मूत्र रेचक अर कफ व शुक्र वर्धक हूंद।  जै द्रव्य क विपाक अम्ल हूंद वो पित्तकारक , मल मोटर रेचक व वीर्य नाशी हूंद . यूं विपाकों म मधुर विपाक गुरु , कटु व अम्ल विपाक लघु हूंदन . विपाक का अल्पत्व व बहुत्व द्रव्य क का रस रुपया गुण की अधिकता व न्यूनता पर निर्भर करद . उदाहरण गन्ना क रस म मधुर अधिक च तो विपाक  बि  मधुर हूंद।  जैमा मध्यम होलु विपाक म बि मध्य ही होलु, न्यून म विपाक न्यून ही होलु ।  प्रत्येक पदार्थ क विपाक वैका रस  परिमाण पर निर्भर  करद।  ५४-६०। 


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*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य
संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस ,पृष्ठ   ३११ - ३१२
सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2022 
शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम

चरक संहिता कु  एकमात्र  विश्वसनीय गढ़वाली अनुवाद; चरक संहिता कु सर्वपर्थम गढ़वाली अनुवाद; ढांगू वळक चरक सहिता  क गढवाली अनुवाद , चरक संहिता म   रोग निदान , आयुर्वेदम   रोग निदान  , चरक संहिता क्वाथ निर्माण गढवाली  , चरक संहिता का प्रमाणिक गढ़वाली अनुवाद , हिमालयी लेखक द्वारा चरक संहिता अनुवाद , जसपुर (द्वारीखाल ) वाले का चरक संहिता अनुवाद , आधुनिक गढ़वाली गद्य उदाहरण, गढ़वाली में अनुदित साहित्य लक्षण व चरित्र उदाहरण   , गढ़वाली गद्य का चरित्र , लक्षण , गढ़वाली गद्य में हिंदी , उर्दू , विदेशी शब्द, गढ़वाली गद्य परम्परा में अनुवाद , सरल भाषा में आयुर्वेद समझाना

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कैमरून बिटेन  चुटकला 
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 कैमरुन     बिटेन   हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक , ठट्टा , मसखरी , लतीफा
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 अफ़्रीकी चुटकले व हास्य भाग - २ 
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 कैमरुन     देस का चबोड़ , चखन्यौ , मजाक , हौंस
Humour from    Camroon
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 (   अफ्रीका कु  हास्य , प्रहसन, खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक , ठट्टा , मसखरी , लतीफा  श्रृंखला )
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इकबटोळ -   भीष्म कुकरेती   'चबोड़ाचार्य'   
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 ब्रिटिश प्र मंत्री डेविड कैमरॉन, बरैक ओबामा अर जिम्बाबे क राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे हवाई जाज से जात्रा करणा छा।  इमरजेंसी लैंडिंग आवश्यक छे तो पाइलेट अर कृ पैराशूट से उत्तर गेन।  एक ही पैरासूट  बच्युं  छौ अर उतरण वळ  छा तीन।  निर्णुय होइ कि  चूँकि सब प्रजातांत्रिक देस का छन तो वोटिंग करे जाव जै तै ज्यादा वोट मीलल  वु पैरासूट से उतर  जाल।
वोटिंग कु रिजल्ट इन आयी -
डेविड कैमरॉन - १
ओबामा - २
,मुगाबे - २३
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ब्रिटिश प्रधान मंत्री डेविड कैमरॉनन बयान दे बल हमन अफ़ग़ानिस्तान म जु चाई  सि  प्राप्ति कर आल। 
एक कैमरुन वासी की प्रतिक्रिया हाँ - तुम हमेशा अपण मंतव्य प्रॉपर कर ही लींदा जनकि अब अफ़ग़ानिस्तान म गरीबी , एक प्रतिशत से कम पढ़्या लिख्यां लोग , भुखमरी, हिंसा को तांडव  सब कुछ तो तुमन प्राप्त कर  याल।  या ही तो ब्रिटिश की इच्छा हूंदी।
XX
श्रीमती कैमरून अध्यापिका च। बोर्ड म लिख्युं च ाजक पाठ - सही या गलत क्या हूंद ?
स्कूलम वीन  पूछ - यदि मि कै व्यक्ति क खीसा उन्दन बटुआ निकाळलु त मि  क्या होलु (सही या गलत )  ?
ननु टॉनिक जबाब छौ - तुम वैकि पत्नी ह्वेलि।
XX


 
Copyright  2021
  कैमरुन ,   अफ्रीका ,  बिटेन   चुटकला , हौंस , हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक, मसखरी ,ठट्टा, लतीफा     
 अफ्रीका  के चुटकला , हौंस , हास्य , प्रहसन , खौंख्याट ,   अफ्रीका  से जोक्स , चबोड़, अफ़्रीकी   मजाक, मसखरी ,   अफ्रीकी ठट्टा, लतीफा  , हास्य      श्रृंखला निरंतर चलती रहेगी। 

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हिंदी फिल्मों कू बहु प्रचलित शूटिंग स्थल
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उषा बिजल्वाण की गढ़वाली पॉप लिटरेचर
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भारतीय फिल्म उद्योग का दर्शक दुनिया भर मा फैल्यां छन । हजारों फिल्मों न येतैं हर साल सिलवर स्क्रीन बणैयाली, यूं फिल्मों तै देखण वाला दर्शकों की संख्या असीम छ। बॉलीवुड भारत मा पर्यटन तै बढ़ावा देण वालू सर्वोत्तम माध्यमों मे से छ। भारत की शानदार स्थलाकृति फिल्मों की शूटिंग तै एक शानदार स्थान प्रदान करदी। भारत मा कई खूबसूरत जगह छन, लोगों तै यूं स्थानों का बारा मा जागरूक करना मा फिल्म एक महत्वपूर्ण भूमिका निभोंदी। भारत मा शूटिंग, विदेशी स्थानों की तुलना मा केवल सुविधाजनक ही नी बल्कि बजट का अनुकूल भी छ। भारत मा शूटिंग तै हिल स्टेशनों, रेगिस्तानों, समुद्र तटों, स्मारकों, ग्रामीण क्षेत्रों, किलों और महलों आदि जन कई स्थान आसानी से उपलब्ध छन। पिछला कुछ सालों मा भारतीय फिल्म निर्माताओं न अपणी फिल्म फिल्मौणा तै बड़ा पैमाना पर भारतीय स्थलों कू सहारा लिनी। अगर आप सोचणा छन कि इतना आकर्षक स्थान कख छन? त यू जाणिक आपतै आश्चर्य होलू कि यू आपकू अपणू ही देश छ। आश्चर्य ह्वै ना?
मेरा युं जगहों कू नाम संक्षेप मा लिखणा से आपतै वूं जगहों तै जाणनम आसानी होली, जूंन कई फिल्मों का निर्माण मा अपणी सहायता प्रदान करी।
1. मनाली
जब करीना कपूर न आनन्दमय हिमाचलित पहाड़ों मा “ये इश्क हाय, जन्नत दिखाये” गाई थौ, तब ये गाणा मा हिमाचल प्रदेश का स्वर्ग रूपी दृश्य तै दिखाए गै थौ। “जब वी मेट” मा दिखायी गयी किनारों पर बर्फ से ढकीं सड़कौं, सुरम्य घाटियाँ और खूबसूरत झोपड़ियाँ तै याद करा? खैर, यी खूबसूरत हिल स्टेशन तै मनाली का नाम से जाणे जांदू।
2. राजस्थान
शायद राजस्थान एक यनी जगह छ जख ज्यादा फिल्मों की शूटिंग ह्वै। यख होण वाली फिल्मों की शूटिंग मा हॉलीवुड की फिल्म भी शामिल छन। यू शाही स्थान झीलों की सफाई का साथ शानदार राजसी सौंदर्य भी प्रदान करदू। हम दिल दे चुके सनम, जोधा अकबर, यादें, बॉर्डर तथा डोर जनी कई हिट फिल्मों राजस्थान मा फिल्माये गैन।
3. दिल्ली
भारतीय फिल्म निर्माताओं का आकर्षण होणा का मामला मा राजधानी पिछाड़ी नी छ। ऐतिहासिक स्मारक, बाजार, दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली का शहरी जीवन हमेशा से फोटोग्राफरों की पसंद रै। दिल्ली मा बनाए गै कुछ सबसे लोकप्रिय फिल्मों मा रॉकस्टार, फ़ना, जन्नत-2, हम्पटी शर्मा की दुल्हानिया आदि फिल्म शामिल छन।
4. गोवा
बिना कै संकोच का बोले जैसकदू कि , भारत में गोवा सबसे ज्यादा शूटिंग करण वाला स्थलों मा दूसरा स्थान पर छ। यू समुद्र का वुई स्वर्ग रूपी तट छध जू दुनिया भर बटी फिल्म निर्माताओं तै अपणी ओर आकर्षित करदू। विडंबना यह छ कि गोवा मा स्थानीय लोग कम और पर्यटक ज्यादा छन। गोवा का दिव्य सौंदर्य तै बढ़ावा देण वाली फिल्मों मा जोश, एक विलेन, गोलमाल-3, फाइंडिंग फानी और सिंघम जैसी फिल्में शामिल छन।
5. कश्मीर
कू यन छ जू कश्मीर की स्वर्गीय सुंदरता तै कैप्चर नी करण चालू? यदि आप कश्मीर का शानदार आकर्षण का वर्णन करना की कोशिश करला त तारीफ करनक शब्द भी कम पड़जाला, या जगह आगंतुकों तै अपणी ओर खींचदी। फिल्म मारोमांस जोड़नक कश्मीर सबसे सुंदर स्थान छ। हाल ही में फिल्माई गै जब तक है जान, ये जवानी है दीवानी, हाईवे, और रॉकस्टार जैसी फिल्मों में कश्मीर की सुंदरता तै दरशौं दन।
6. केरल
जब सौंदर्य की बात औंदी त, भारत का दक्षिणी भाग उत्तर की तुलना मां कम नी छ। यदि उत्तर में बर्फ से ढंकी चोटियाँ छन, त दक्षिण मा प्रकृति का उपहार का रूप मा शानदार झरना। याद करा ऐश्वर्य राय तै फिल्म रावण मा यखी का विशाल झरना बटी गिरदा दिखाए गै और गुरु द्वारा बनाए गै गीत बारसो रे मेघा? केरल की दिव्य सुंदरता तै यूं फिल्मों मा दिखाए गै
7. लेह / लद्दाख
लेह / लद्दाख तै जटिल जलवायु परिस्थितियों का कारण पैली एक दुर्गम क्षेत्र माने गै थौ। लेकिन अब और न। फिल्म निर्माताओं तै धन्यवाद, यू स्थान अब विशेष रूप से युवाओं का बीच लोकप्रिय ह्वै गेन। 3 इडियट्स मा आमिर खान लद्दाख मा पढ़्यां थन। हाल ही का फ्लिक फगली मा युवाओं न लेह की सड़कों पर यात्रा करी। यूं क्षेत्रों मा फिल्माई गै फिल्मों मा लक्ष्य, जब तक है जान, दिल से और पाप आदि शामिल छन।
8. कोलकाता
बॉलीवुड का दुई लोकप्रिय गुंडा ये शहर में पैदा ह्वै था। शायद आप अब यूअनुमान लगाला कि यू रणवीर सिंह और अर्जुन कपूर छन। गुंडा तै फिल्मौणा मा कोलकाता तै मुख्य स्थान का रूप मा चुने गै। यख बणी दूसरी बड़ी फिल्में बर्फी, कहानी और परिणीता छन।
9. मुंबई
मुंबई भारत का सबसे बड़ा फिल्म उद्योग कू घर छ। कैमरा कू पैलू शॉट ये शहर बटी शूरू होंदू। भारत कू ये मनोरंजन की राजधानी मा भौत सी फिल्मों की शूटिंग करे गै। मुन्नाभाई एमबीबीएस, स्लमडॉग मिलेनियर, धूम, सागर, तलाश, एक दिवाना था आदि, यी सूची कू कुई अंत नी।
10. अमृतसर
पंजाब जना छोटा सा दिव्य शहर न भी हमारी फिल्मों तै आश्चर्यजनक रूप से खूबसूरती प्रदान करना मा अपणू योगदान दिनी। शहर की व्यस्त सड़क, स्वर्ण मंदिर, जलियांवाला बाग और खलसा कॉलेज निर्देशकों का पसंदीदा शूटिंग स्थल छन। यूं जगहों पर फिल्माई गै फिल्म मा गदर, ब्राइड एंड प्रेज्यूडिस, रब ने बना दी जोड़ी, वीर-ज़ारा और लीजेंड आफ भगत सिंह आदि शामिल छन।

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    धानाचुली (नैनीताल ) के भवन ८  में  काष्ठ कला, अंकन,अलंकरण, उत्कीर्णन

   Traditional House Wood Carving Art in Dhanachuli , Nainital; 
   कुमाऊँ, गढ़वाल, केभवन ( बाखली,तिबारी,निमदारी, जंगलादार मकान,  खोली, )  में कुमाऊं शैली की  काष्ठ कला, अंकन,अलंकरण, उत्कीर्णन  - 594

संकलन - भीष्म कुकरेती
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धानाचुली (नैनीताल ) के प्रस्तुत भवन संख्या ७ आम पारम्परिक कुमाउँनी भवन है। 
प्रस्तुत भवन दुपुर व दुखंड है।  भवन के प्रथम तल में भंडार व अथवा गौशाला के कश हैं. अतः  काष्ठ कला दृष्टि से कोई विशेष उल्लेखनीय वर्णन नहीं हो सकता है।  तल मंजिल से खोली है किन्तु आश्चर्य यह है कि खोली के स्तम्भ लकड़ी के नहीं मिले हैं। 
पहली मंजिल पर भंडार या गौशाला के ऊपर लकड़ी के शहतीर /बौळी हैं जिन पर प्राकृतिक (लता नुमा )  व ज्यामितीय कटान की काष्ठ चित्रांकन मिलता है। 
शहतीर के ऊपर एक एक जोड़ी   /झरना /छाज हैं जिनपर चित्रांकित उप स्तम्भों के युग्म से मुख्य स्तम्भ निर्मित हुए हैं।  उप स्तम्भों के आधार व ऊपरी भागों में कटान से कमल नुमा कटान कर घुंडियां या कुम्भिया निर्मित हुयी हैं।  प्रत्येक छाज आधार के छेदों को सपाट काष्ठ पटिलों /तख्तों से ढक्क्न निर्मित हुए हैं तो ऊपर तोरणम निर्मित हुए हैं।  तोरणम में प्राकृतिक कला अंकन हुआ है किन्तु स्पष्ट नहीं दिखता है।
भवन में खिन भी मानवीय (मनुष्य , जंतु या देव ) आकृति का अंकन नहीं मिलता है। छाज   छत तीन की बनी  दिखती है। 
निष्कर्ष है कि धनाचुली  (नैनीताल ) का  प्रस्तुत भवन   युवा अवस्था में उत्कृष्ट भवन में ज्यामितीय व प्राकृतिक कला अंकन मिलता है। 
सूचना  व फोटो आभार: मुकेश नायक संग्रह
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2021
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Qualities of a Session Court Judge
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Duties (Raj dharma) of the Chief Executive Officer -11 
Judiciary System in the Organization /Country

Guidelines for Chief Officers (CEO) Series –419       
       Bhishma Kukreti (Marketing Strategist)
s= आधी अ 
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यदा न कुर्यान्नृपति: स्वयं कार्यविनिर्णयम् I
तदा तत्र नियुंजीत ब्राह्मणम् वेदपारगम् II12II
दान्तं कुलीनं मध्यस्थमनुद्वेगकरं स्थिरम् I
If the King cannot administrate the justice, the King should appoint Brahman (those are well versed with Vedas (knowledge of country) ) , self-controlled, impartial, non-agitated, calm and who are afraid of next life , religious intent, active and anger less.   
(Shukraniti, Raj dharma Nirupan of Duties of King –   12, 13)
For becoming a session court judge , in India , a person should have following qualities
1-Citizen of India
2-LLB /LLM degree holder (equal to Vedas knowledge holder of Shukraniti)
3-Atleast 10 years’ experience as advocate  in High Court
Skill Required-
Critical Reasoning skill
Objective analysis
Careful listening skill
Unbiased Decision making
Reading Comprehension (Vast Knowledge)
Empathy
Writing skill 


Reference:
Shukraniti, Manoj Pocket Books, Delhi pp 253
Copyright@ Bhishma Kukreti, 2021

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हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर इतिहास  :  विग्रहराज   चाहमान का दक्षिण उत्तराखंड पर अपरोक्ष अधिकार   
( संस्कृत विद्यालय व ढाई दिन का झोपड़ा  मस्जिद )

 हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर इतिहास संदर्भ में उत्तर भारत में मुस्लिम  क्रूरता, निर्दयी , प्रजा पीड़क  व मुस्लिम आतंकवादियों का अधिकार  भाग   -१४
उत्तर भारत में  आतंकवादी मुस्लिमों का मुस्लिम आतंकवाद का उदय
Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History with reference, the start Muslim Cruelty, Muslim  Terrorism in North India  - 14

Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  -  392             
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -   ३९२         


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती -

  शाकम्भरी नरेश अर्णोराजा  (1135 - 1150  CE ) ने अजमेर के निकट ने तुरुष्कों को मार भगाया था।  किन्तु चालुक्यों से हार गया था।  विकिपीडिया अनुसार उसे उसके एक पुत्र जगदेव ने मरा था।
 विग्रहराज चौहमान  १०५१ में अपने पिता की राजगद्दी पर बैठा था।  उसका कार्य काल 1167 तक रहा था। विग्रहराज ने पूर्व पंजाब से आतंकवादी मुस्लिमों को मार भगाया था। 
 विग्रहराज  सहारनपुर व बिजनौर हरिद्वार पर परोक्ष या अपरोक्ष अधिकार था(शिवालिक स्तम्भ लेख, १  )  ।  .  डा डबराल (२ ) का अनुमान है उत्तराखंड राजा विग्रह राज को उपनयन देते थे। 
विग्रह राज  राजा भोज की भांति विद्वान् व विद्वान् ाश्रयी था।  विग्रह राज चौहमान ने अजमेर में एक संस्कृत विद्यालय की स्थापना की थी जिसे मुस्लिम आतंकवादियों ने तोड़ा व मस्जिद बना डाला जिसे ढाई दिन का झोपड़ा भी कहते  (१ )हैं। 
 
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संदर्भ :
१-  दशरथ शर्मा १९५९ अर्ली चौहान डाइनेस्टीज , मोतीलाल बनारसी दास , पृष्ठ ४३ , ४४
 २  - शिव प्रसाद डबराल 'चारण ' ,  उत्तराखंड का इतिहास भाग ३ वीरगाथा प्रेस दुगड्डा , उत्तराखंड , पृष्ठ   ४९१


Copyright @ Bhishma  Kukreti
उत्तरी भारत पर आतंकवादी जाहिल , मुस्लिम, लोक हत्त्यारे मुस्लिम  आक्रांताओं के आक्रमण व अधिकार समय उत्तराखंड ; मुस्लिम आतंकवाद का प्रसार , आतंकवादी मुस्लिमों द्वारा लूटपाट इतिहास

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रसों का  उच्चतम , उच्च , अवर गुण
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चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद   
 खंड - १  सूत्रस्थानम , 26  th,  छब्बीसवां  अध्याय   (  भद्र काप्यीय  अध्याय   )   पद  ५०  बिटेन  ५३  तक
  अनुवाद भाग -  ३०४
गढ़वाळिम  सर्वाधिक पढ़े  जण  वळ एकमात्र लिख्वार-आचार्य  भीष्म कुकरेती
s = आधी अ
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      !!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!!
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यूं मदे कषाय , कटु अर तिक्त रस रुखा रस छन।  यूं मदे  कषाय रुक्षतम , कटु रस रुक्षतर  अर तिक्त  रुक्ष हूंदन।  उनि लवण उष्णतम , अम्ल उष्णतर अर कटु  उष्ण हूंदन।  मधुर रस स्निघ्धतम , अम्ल सनिघतर , अर लवण स्निग्ध हूंदन।  शैत्य धर्मानुसार कषाय रस मध्यम , स्वादु रस उत्कृष्ट अर तिक्त रस अवर रस छन।  गुरुता दृष्टि से मधुर रस गुरुतम ,  कषाय रस गुरुतर अर लवण गुरु छन।  लघु गुण दृष्टि से अम्ल रस लघुतम , कटु लघुतर अर तिक्त रस लघु हूंदन।  कुछ आचार्य गण लवण तैं सबसे लघु मणदन।  किलैकि अम्ल म पृथ्वी च।  लवण म जल कारण च।  इलै पृथ्वीजन्य का मुकाबला म जल जन्य हळकी ही ह्वेलि।  इलै भूतो हिसाब से गौरव या लाघव  का ज्ञान नि करण  चयेंद।  किलैकि जल की अधिकता से  जनम्यां रस , पृथ्वी की अधिकता से जनम्यां  कषाय रस से गुरु हूंदन।  इखम गुरु त्व  से लघु मने गे।  वास्तव म ये मतभेद म विरोध बि नी।  किलैकि लवण तै अवर मणदन।  जु अम्ल , कटु तिक्त , लवण तै गुरु मणदन।  वो  गुरुता की दृष्टि से दिखदान।  वो लघु दृष्टि से दिखडन तो लघु हूंद।  द्वी इ गुरुत्व का महत्व समजदन।५०- ५३। 


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*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य
संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस ,पृष्ठ  ३१०-  ३११
सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2021
शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम

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