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कुठार (मल्ला ढांगू , द्वारीखाल ) के एक भवन में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन
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    Tibari, Traditional  House Wood  Art  and Carving Art in House of, Kuthar, Malla  Dhangu, Dwarikhal  Pauri Garhwal       

पौड़ी गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन--653   


 संकलन - भीष्म कुकरेती   

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कुठार  (, मल्ला ढांगू  )  से एक भवन की सूचना मिली है।  कुठार में प्रस्तुत भवन दुपुर -दुखंड है।  तल तल (ग्राउंड फ्लोर ) में कमरों , खड़कियों के दरवाजे आम ज्यामितीय कटान की कड़ियों व तख्तों से बने हैं।  पहले तल में बरामदे पर निमदारी  (तिबारी का दूसरा रूप ) स्थापित है।  निमदारी  में चार स्तम्भ हैं।  स्तम्भों के आधार व ऊपर चौखट ा  मोटे  , जायमितीय कटान से बने हैं  किन्तु मध्य में कड़ी महीन है जो स्तम्भ को आकर्षित बना देते हैं।  निमदारी के अंदर वाले छोर में भी इसी प्रकार के स्तम्भ हैं। 
निमदारी  ज्यामितीय कटान अलंकरण का उदाहरण है। 

सूचना व फोटो आभार: राजेश कुकरेती

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022
Tibari, Traditional  House Wood  Art  and Carving Art in House of, Pauri Garhwal     

पौड़ी गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन निरंतर   

Tibari, Traditional  House Wood  Art  and Carving Art in House of, Pauri Garhwal      to be continued

पौड़ी गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन निरंतर चलता रहेगा

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बाराकोट (चम्पावत ) के एक भवन  (१ ) के एक भाग की काष्ठ कला अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन
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Traditional House Wood carving Art of Barakot ,  Champawat, Kumaun 
कुमाऊँ ,गढ़वाल, के भवन ( बाखली,   खोली , )  में ' कुमाऊँ  शैली'   की   काष्ठ कला अंकन , अलंकरण, उत्कीर्णन  -652
 संकलन - भीष्म कुकरेती   
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बाराकोट से कुछ भवनों की सूचना मिली हैं।  आज एक भवन में काष्ठ चर्चा होगी।  भवन का मुख्य बड़ा भाग  दुपुर व दुखंड है व बालकोनियाँ बनतीं हैं।  एक भाग तिपुर वाला है जिसकी चर्चा आज होगी।  तिपुर   वाले भाग में तल तल (भू मंजिल ) में काष्ठ कला दृष्टिकोण से कोई विशेष उल्लेखनीय संरचनाएं नहीं हैं।  पहले व दूसरे तल में बालकोनी पर जंगले  बंधे हैं व दोनों तलों के जंगलों या छाज या  झरना  में स्तम्भ स्थापित हुए हैं जो छज्जे से ऊपर शीर्ष तक हैं।  आधार पर भी रेलिंग हैं व रेलिंग मध्य लघु जंगले  स्थापित हुए हैं।  रेलिंग के मध्य XX I XX  नुमा सपाट लघु स्तम्भ लगे हैं। 
 बाराकोट  के इस बड़े भवन (बाखली ) के तिपुर  वाले भाग में   छाज , खंरे या जंगले  में   सपाट ज्यामितीय कटान की ही कला दृष्टिगोचर हो रही है। 
बाराकोट  के इस भवन संख्या १ में दूसरा भाग दुपुर  है व  तल तल (ग्राउंड फ्लोर ) में द्वारों व खड़कियों के द्वारों पर सपाट कटान की काष्ठ है।  पहले तल में छज्जों को खिड़कियों के द्वारों से ढका गया है व् आम कुमाउनी शैली के छाज ढक्कन नहीं दृष्टिगोचर हो रहे हैं। 
निष्कर्ष निकलता है कि  बाराकोट का भवन संख्या १ में  काष्ठ , गरा मिटटी कला में शैली में उत्कृष्ट निकट है।   बाराकोट भवन संख्या १  में  सपाट ज्यामितीय अलंकृत कटान ही दृष्टिगोचर हो रहा है। 
सूचना व फोटो आभार : जय ठक्कर संग्रह
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022

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कोठार (पौड़ी ) के एक भवन के जंगले में   काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन

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    Tibari, Traditional  House Wood  Art  and Carving Art in House of, Kothar Pauri Garhwal       

पौड़ी गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन--651   


 संकलन - भीष्म कुकरेती   

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कोठार में प्रस्तुत  जंगला दुपुर व दुखंड है व जीर्ण शीर्ण अवस्था में है।  भवन के पहले तल (मंजिल ) में बालकोनी में छज्जे पर चार स्तम्भ (खाम ) वाला जंगल अभी भी विद्यामन है व भवन अपने युवा काल में  आकर्षक भवनों में गिना जाता रहा होगा। 
भवन में जंगल में चार स्तम्भ दृष्टिगोचर हो रहे हैं।  स्तम्भों के आधार में छिलपट्टी  लगाकर मोटा कर दिया गया है।  स्तम्भों के आधारके कुछ  ऊपर व ऊपरी भाग में पृथ्वी समांनातर तीन चार  कटान किये गए हैं जो स्तम्भ को विशेष छवि प्रदान करते हैं। 
शेष भवन में काष्ठ कला  स्तम्भ कला जैसे ही ज्यामितीय ही है।   

सूचना व फोटो आभार: अरविन्द मुदगिल

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022
ibari, Traditional  House Wood  Art  and Carving Art in House of, Pauri Garhwal     

पौड़ी गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन निरंतर   

Tibari, Traditional  House Wood  Art  and Carving Art in House of, Pauri Garhwal      to be continued

पौड़ी गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन निरंतर चलता रहेगा

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बडोली (बडोळी )  के एक भवन में  काष्ठ कला

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    Tibari, Traditional  House Wood  Art  and Carving Art in House of, Badoli, Ekeshwar Pauri Garhwal       

पौड़ी गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन--650   


 संकलन - भीष्म कुकरेती   

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 बडोली  से सुनील बडोला ने कुछ भवनों के चित्र भेजे हैं।  प्रस्तुत भवन प्रथम तल पर जंगल बंधा है।  जंगले  में स्तम्भ हैं।  स्तम्भ के आधार में मोटाई लिए हैं।  ड्यूल है फिर ऊपर कलयुक्त अंकन युक्त स्तम्भ है। 
स्तम्भ में कलयुत अन्न हुआ है।  स्तम्भ में कलयुक्त अंकन हुआ है। 

सूचना व फोटो आभार: सुनील बडोला

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022
ibari, Traditional  House Wood  Art  and Carving Art in House of, Pauri Garhwal     

पौड़ी गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन--   

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 बलुती (नैनीताल ) के एक भवन में काष्ठ कला
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   Traditional House Wood Carving Art in Baluti  Nainital; 
   कुमाऊँ, गढ़वाल, केभवन ( बाखली,तिबारी,निमदारी, जंगलादार मकान,  खोली, )  में कुमाऊं शैली की  काष्ठ कला, अंकन,अलंकरण, उत्कीर्णन-649

संकलन - भीष्म कुकरेती
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ग्रामीण नैनीताल  से कई काष्ठ कला युक्त भवनों की सूची मिलीं हैं अधिकतर FB  से।  आज बलुती के एक जीर्ण शीर्ण भवन की काष्ठ कला पर चर्चा होगी।  प्रस्तुत भवन दुपुर व दुखंड है।  भवन में खोली , दोनों छाजों  के स्तम्भों के अतिरिक्त अन्य कक्षों(दानों )  , मोरियों (खिड़की ) के द्वारों व स्तम्भों में ज्यामितीय कटान की कला विद्यमान है। 
खोली व दोनों छज्जों के स्तम्भ कला दृष्टि से एक समान हैं।  स्तम्भों के आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल , ऊपर ड्यूल व इसके ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प की संरचना अंकन हुआ है।  इस संरचना के बाद खोली के स्तम्भ में ऊपर इसी संरंचना की पुनरावृति हुयी है।  छज्जों के स्तम्भ ऊपरी पद्म पुष्प दल के ऊपर सपाट दिख रही हैं। 
छायाचित्र से साक्ष्य होता है कि  भवन भव्य था व कष्ट कला दृष्टि से उत्तम प्रकार का था।
भवन में ज्यामितीय व प्राकृतिक अलंकृत कला दृष्टिगोचर हो रही है।  संभवतया खोली के शीर्ष (मुरिन्ड , मथिण्ड ) में कोई देव आकृति रही होगी।
सूचना व फोटो आभार: उमेश नगरकोटी  (FB )
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी।  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022 
raditional House Wood Carving Art in Nainital;  continued
   कुमाऊँ, गढ़वाल, केभवन ( बाखली,तिबारी,निमदारी, जंगलादार मकान,  खोली, )  में कुमाऊं शैली की  काष्ठ कला, अंकन,अलंकरण, उत्कीर्णन निरंतर

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  तपोण  गांव (जोशीमठ , चमोली ) के एक भवन  संख्या १  की पारम्परिक गढ़वाली शैली की  काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन  अंकन
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Traditional House Wood Carving Art from  Tapon, Joshimath, Chamoli   
 गढ़वाल, के  भवन (तिबारी, निमदारी,जंगलादार मकान, बाखली,खोली) में पारम्परिक गढ़वाली शैली की  काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन  अंकन, -649
( काष्ठ कला पर केंद्रित ) 
 
 संकलन - भीष्म कुकरेती     
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चमोली गढ़वाल में प्राचीनतम से लेकर नई शैली के काष्ठ कलयुक्त भवनों की सूची मिलीं हैं।  आज तपोण  गांव (जोशीमठ , चमोली ) के एक भवन की काष्ठ कला शैली पर चर्चा होगी।
तपोण  गांव (जोशीमठ , चमोली ) का प्रस्तुत भवन  दुपुर  व दुखंड है।  प्रस्तुत भवन में तल तल (ground floor ) व पहले तल पर काष्ठ कला महत्वपूर्ण है।
 भवन के तल तल में एक कक्ष को छोड़ अन्य कक्षों व खड़कियों के द्वार  ज्यामिति कटान से निर्मित हैं।  खोली के द्वार भी सपाट हैं किन्तु स्तम्भ कलेक्ट व अंकन युक्त हैं।  स्तम्भों के आधार में अधोगामी पद्म दल की संरचना उत्कीर्णित हुयी है , ऊपर ड्यूल है व इसके ऊपर एक चौखट में स्वयं हंस की गर्दन संरचना दृष्टिगोचर हो रही है।  इस विशेष  स्वयं गर्दन संरचना (जो अब तक के सर्वेक्षण में  गढ़वाल में कम ही पायी गईहै )  के ऊपर स्तम्भ तीन भागों में खड़ी / वर्टिकली में बंट गए हैं।  एक खड़े भाग में प्राकृतिक बेल बूटों का अंकन हुआ है जैसे केले के फल हों।  मुरिन्ड /मथिण्ड  (शीर्ष  की कड़ी ) चौखट है (जितनी छायाचित्र में दिख रही है ) व उस चौखट में चतुर्भुज या बहुभुजीय देव मूर्ति स्थापित हुयी है। 
भवन में पहले तल पर काष्ठ छज्जा बंधा है जिस पर जंगलें   स्थापित हुए हैं।  मुख्य जंगल पर दस या ग्यारह स्तम्भ हैं जो सपाट चौखट हैं।  आधार पर रेलिंग है व रेलिंग मध्य उप जंगल बंधा है जिस पर XIX  नुमा लघु स्तम्भ हैं।  सभी काष्ठ संरचनाएं ज्यामितीय कटान से निर्मित हुए हैं।
  निष्कर्ष निकलता है कि  तपोण  गांव (जोशीमठ , चमोली ) के  प्रस्तुत भवन में ज्यामितीय कटान , प्राकृतिक व मानवीय अलंकरण की कला विद्यमान है।  संभवतया देव मूर्ति धातु की है। 
सूचना व फोटो आभार: नंद किशोर हटवाल
यह लेख  भवन  कला संबंधित  है न कि मिल्कियत  संबंधी  . मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत:  वस्तु स्थिति में  अंतर   हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022 
Traditional House Wood Carving Art from     , Chamoli   
 गढ़वाल, के  भवन (तिबारी, निमदारी,जंगलादार मकान, बाखली,खोली) में पारम्परिक गढ़वाली शैली की  काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन  अंकन

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खुबानी (जह्रीखाल , पौड़ी गढवाल )  में भवन संख्या ३  के पहले तल में काष्ठ कला

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    Tibari, Traditional  House Wood  Art  and Carving Art in House of, Khubani, Jahrikhal  Pauri Garhwal     

पौड़ी गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन--648   


 संकलन - भीष्म कुकरेती   
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आज  खुबानी के    दूसरे  भवन में जंगले  की  काष्ठ  कला पर  चर्चा होगी।  प्रस्तुत चित्र में दो जंगलेदार  भवन हैं आज पहले तल पर स्थापित जंगले  की काष्ठ कला पर चर्चा होगी।  प्रस्तुत भवन दुपुर  व दुखंड है।  आधार तल पर कोई काष्ठ संरचना के दर्शन नहीं हो रहे हैं।  पहले तल में आकर्षक जंगला बंधा है जो भवन को प्रसिद्धि दिलाने में सफल हुआ है। 
भवन में काष्ठ छज्जा स्थापित है जिस पर दस स्तम्भों से अधिक का जंगल बंधा है।  जंगल की विशेषता यह है कि  जंगले   के बड़े स्तम्भों के ऊपरी भागों में तोरणम निर्मित हुए हैं।  तोरणम के स्कंध में संभवतया बेल बूटों की कला अंकित हुयी है।
मुख्य जंगले   के आधार पर एक अन्य जंगला स्थापित हुआ है। काष्ठ छज्जे के ऊपर  एक दो फिट के ऊपर एक कड़ी (रेलिंग ) है व जिस पर लघु स्तम्भ स्थापित हुए हैं।  यह आधार का जंगल व मुख्य जंगले पर तोरणम इस भवन को विशेष बना देते हैं। 
भवन में ज्यामितीय कटान की ही कला है किन्तु आकर्षक शैली है।  संभवतया तोरणम में प्राकृतिक अलंकरण हुआ है। 

सूचना व फोटो आभार: रघुबीर सिंह बिष्ट

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022

Tibari, Traditional  House Wood  Art  and Carving Art in House of, Pauri Garhwal      to be continued

पौड़ी गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन निरंतर चलता रहेगा

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खड़कोला (पौड़ी गढ़वाल ) में सुनारों के  भवनों  में  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन

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    Tibari, Traditional  House Wood  Art  and Carving Art in House of, Kharkola, Kapholsyun Pauri Garhwal       

पौड़ी गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन--647   


 संकलन - भीष्म कुकरेती   

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 कफोलस्यूं से कई  काष्ठ कला उत्कीर्णन युक्त भवनों की सूचना मिलीं हैं।  आज खड़कोला  में सुनार परिवार के दो भवनों में काष्ठ कला , काष्ठ उत्कीर्णन पर चर्चा होगी। 
खड़कोला के प्रस्तुत दोनों भवन  तिपुर  व दुखंड है।  खिड़कियों , द्वारों में सपाट ज्यामितीय  काष्ठ  कटान मिलता है।  पहले तल में दोनों भवनों में सामान्य गढ़वाली तिबारी  काष्ठ कला  विद्यमान है।  तिबारियों में चार चार कलयुक्त उत्कीर्णित स्तम्भ हैं।
तिबारियों के प्रत्येक स्तम्भ के आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल से निर्मित संरचना है जिसके ऊपर ड्यूल है।  ड्यूल के ऊपर उत्घ्वगामी पद्म दल की संरचना विद्यमान है।  उर्घ्वगामी पद्म पुष्प से स्तम्भ लौकी आकार लेकर ऊपर बढ़ती है।  जहां सबसे कम मोटाई है वहां पुनः अधोगामी पद्म दल , ड्यूल व  उर्घ्वगामी पद्म दल के दर्शन होते हैं।  उर्घ्वगामी पद्म दल  संरचना से एक और तोरणम निर्मित होती है व ऊपर स्तम्भ में थांत आकृति उभरती है।  तोरणम के स्कंध में लता , पत्तियों की संरचना स्थापित हैं व किनारे पर सूरजमुखी नुमा संरचना अंकित हुयी है।  तोरणम के ऊपर शगुन चिन्ह हैं किन्तु मानवीय नहीं हैं। 
 तोरणम व स्तम्भ के ऊपर शीर्ष की कड़ियों में प्राकृतिक कला अंकन मिलता है।  शीर्ष की कड़ियों में ज्यामितीय कटान से निर्मित संरचना भी विद्यमान हैं।  शीर्ष के ऊपर तीसरे तल के  छज्जे आधार में काष्ठ दास (bracket )  हैं।  दास कलयुक्त हैं।
निष्कर्ष निकलता है कि खड़कोला के सुनार भवनों में प्राकृतिक व ज्यामितीय अलंकरण कला अंकन विद्यमान है। 

सूचना व फोटो आभार: जगमोहन डांगी

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022
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बमणखोळा (रिखणीखाळ, पौड़ी गढ़वाल  ) में ध्यानी भवन की तल मंजिल में तिबारियों की काष्ठ कला व अंकन 
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    Tibari, Traditional  House Wood  Art  and Carving Art in House of, Bamnakhola, Rikhanikhal Pauri Garhwal       

पौड़ी गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन--646   

 संकलन - भीष्म कुकरेती   
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रिखणीखाळ  से ऐसे  विशेष भवन  की सूचना पहले भी  ज्याठा  गाँव  (पैनों  पट्टी ) से भी मिली है जिसमे तिबारी पहले मंजिल के स्थान पर तल मंजिल में स्थापित हैं देखिये भाग १५७ )। आज बमणखोळा में ध्यानी भवन में भी  दो तिबारियां  तल मंजिल में हैं।  यह भवन सं १९४० में स्व अम्बा दत्त ध्यानी ने निर्माण करवाया था व शिल्पकार थे स्व बालू मिस्त्री। 
दोनों तिबारियां शक्तिशाली काष्ठ की हैं व आकर्षक हैं।  दोनों तिबारियां एक जैसे व चार चार स्तम्भ वाली हैं।  प्रत्येक स्तम्भ के आधार पर अधोगामी पद्म दल अंकित हुआ है जिसके ऊपर ड्यूल है , फिर ऊपर  उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल अंकित हुए हैं।  ऊपरी कमल दल से स्तम्भ लौकीनुमा शक्ल ले लेते हैं व जहां कम मोटाई है वहीं से कमल दल , ड्यूल व उर्घ्वगामी कमल दल की पुनराब्रिटी होती है।  ऊपरी कमल दल से स्तम्भ थांत शक्ल ले लेता है. यहीं पर  दो स्तम्भ  मध्य तोरणम स्थापित हुए हैं।  तोरणम के स्कन्धों में कलाकारी हुयी है  तोरणम  स्कंध में लता पत्तियों का अंकन हुआ है व किनारे पर सूरजमुखी पुष्प नुमा आकृति अंकन हुआ है ।  थांत पर ज्यामितीय अलंकरण कला अंकन हुआ है।
  निष्कर्ष निकलता है कि ध्यानी भवन  के काष्ठ में  ज्यामितीय , प्राकृतिक अलंकृत कला अंकन हुआ है। 


सूचना व फोटो आभार: रमेश ध्यानी

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022
Tibari, Traditional  House Wood  Art  and Carving Art in House of, Pauri Garhwal      to be continued

पौड़ी गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन निरंतर चलता रहेगा

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 चुरैड़ गांव (चौंदकोट ) में सुन्दरियाल भवन की काष्ठ कटान कला 

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    Tibari, Traditional  House Wood  Art  and Carving Art in House of, Churaid  Ganv, Pauri Garhwal       
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पौड़ी गढ़वाल, के  भवनों  (तिबारी,निमदारी,जंगलेदार मकान,,,खोली ,मोरी,कोटिबनाल ) में  गढवाली  शैली   की  काष्ठ कला अलंकरण,  उत्कीर्णन , अंकन-- 645 
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 संकलन - भीष्म कुकरेती   
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 चौंदकोट से अच्छी संख्या में भवनों में काष्ठ  कला सूचना मिली हैं।  आज इसी क्रम में  चुरैड़ गांव (चौंदकोट ) के एक भवन में काष्ठ कटान कला पर चर्चा करेंगे।   चुरैड़ गांव (चौंदकोट ) का प्रस्तुत सुन्दरियाल
भवन दूपुर  व दुखंड है।  भवन के आधार तल /ग्राउंड फ्लोर में दरवाजों व (मोरी )  खिड़कियों में सपाट ज्यामितीय कटान दृष्टिगोचर होता है।  भवन की मुख्य विशेषता है जिस्सके कारण भवन क्षेत्र में प्रसिद्ध है वः है लम्बे भवन में लम्बा जंगला।  इतना लम्बा जंगल पौड़ी गढ़वाल में  अति हीन संख्या में मिले हैं। 
 पहले तल में जंगल बंधा है।  जंगल में  पंद्रह  से अधिक खड़े सपाट स्तम्भ हैं। 
भवन के  आकर्षण में इस जंगल का बड़ा महत्व है।
निष्कर्ष निकलता है कि  चुरैड़ गांव (चौंदकोट ) के प्रस्तुत सुन्दरियाल भवन में ज्यामितीय कटान की सपाट कला ही है।  कलयुक्त उत्कीर्णन भवन में नहीं दृष्टिगोचर हुआ है।  भवन निर्माण शैली व लम्बाई के लिए सदा यद् किया जायेगा।
सूचना व फोटो आभार: गिरीश सुन्दरियाल

यह लेख  भवन  कला संबंधित  है . भौगोलिक स्थिति व  मालिकाना   जानकारी  श्रुति से मिलती है अत: यथास्थिति में अंतर हो सकता है जिसके लिए  सूचना  दाता व  संकलन कर्ता  उत्तरदायी  नही हैं .

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022   

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