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पत्रकारिता संबंधी प्रहसन (जोक्स )

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पत्रकारिता संबंधी   हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक , ठट्टा , मसखरी , लतीफा
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इकबटोळ - गढ़वळिम सर्वाधिक व्यंग्य रचयिता - भीष्म कुकरेती   'चबोड़ाचार्य'   
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पत्रकार  ब्वे -बाब जन हूंद। उंकी  क्वी नि सुणद  किन्तु सूचना नि मील  त भगार ब्वे -बाब पर।
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एक पत्रकार क बचन - पत्रकार  क्या करद ? दारू पींद , तमखु पींद अर लोकु  गंदगी खुजद।
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पत्रकार इन  यंत्र च जु  कॉफी  तैं कॉपी म बदल दींद।
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राजनैतिक पत्रकार - मि  तै भल लगद जब वु एक हैंक पर बुरी तरां से आक्रमण करदन अर मि  बच जांदु।
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सम्पादक - या रिपोर्टिंग मेरी जीवन की सबसे बुरी रिपोर्टिंग स्टोरी च।
सह सम्पादक - जी  तन  नि  फरकाओ।  मि  तै पूरो  विश्वास च तुमन यां से बि बुरी रिपोर्टिंग स्टोरी लेख  होली। 
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सम्पादक रिपोर्टर से - जाओ , कै  तै पकड़ो , वै से कुछ प्रश्न कारो अर  कुछ ल्याखो।
रिपोर्टर - वो तुमन पत्रकारिता की संक्षिप्त परिभाषा बताई दे।
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रूसम चुनाव हूण वळ  छा , ब्लादिमार पुतिन पत्रकार सम्मेलन म पत्रकारों प्रश्नौ  उत्तर दीणा छा।
एक पत्रकारन पूछ - पुतिन जी ! अमेरिका म मिसेज क्लिंटन राष्ट्रपति अर कमला हैरिस उपराष्ट्रपति  चुने   जाला।  महान देस  रूसम  क्या महिला राष्ट्रपति बणली क्या  ?
पुतिन कु  उत्तर छौ -  बिलकुल  ना।
पत्रकार आश्चर्य म छौ कि पुतिन  इन  ब्लंट उत्तर देला ।  पत्रकार न पूछ - किलै ?
पुतिनक उत्तर छौ - किलैकि मि  महिला नि  छौं।   

Copyright April 2022
 पत्रकारिता   संबंधी   हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक , ठट्टा , मसखरी , लतीफा  जारी रहेगा

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देवका (हिंडोलाखाल , टिहरी )   भवन में पारम्परिक गढवाली शैली की काष्ठ  कला, अलकंरण, उत्कीर्णन, अंकन
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Traditional House Wood Carving Art of,  Devka Tehri   
गढ़वाल भवनों (तिबारी, जंगलेदार निमदारी, बाखली, खोली, मोरी, कोटिबनाल ) में  गढवाली शैली की काष्ठ  कला, अलकंरण, उत्कीर्णन, अंकन-  616 

संकलन - भीष्म कुकरेती 
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 देवका (हिंडोलाखाल, देवप्रयाग , टिहरी ) का प्रस्तुत भवन ढैपुर व दुखंड भव्य भवन है।   देवका (हिंडोलाखाल, देवप्रयाग , टिहरी ) के  प्रस्तुत भवन  में आधार तल (उबर ) में द्वारों व खड़कियों के काष्ठ में सपाट काष्ठ ज्यामितीय कला दृष्टिगोचर होती है।  भवन के पहले तल में दो तिबारियां व एक खोली है जिसमे काष्ठ कला उत्कीर्ण हुयी है।
खोली के स्तम्भ सपाट ज्यामितीय कटान से निर्मित हुए हैं।  खोली के तोरणम के स्कंध भी सपाट दिख रहे हैं किन्तु लगता है कभी देव मूर्ति उत्कीर्ण हुईं थीं
देवका (हिंडोलाखाल, देवप्रयाग , टिहरी ) के  प्रस्तुत भवन  के पहले तल में  ब्रांडों के भार स्थित  प्रत्येक दोनों  तिबारियों में पांच पांच स्तम्भ है व स्तब्ध व तिबारियां आम गढ़वाली तिबारियों जैसे ही हैं।  स्तम्भ के आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल , ड्यूल व उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल की कुम्भियाँ है जो पुनः ऊपर भी दृष्टिगोचर होती हैं।  शीर्ष /मथिण्ड /मुरिन्ड में तोरणम हैं व तोरणम के स्कन्धों में सूरजमुखी पुष्प व लता कला उत्कीर्ण हुयी हैं।
देवका (हिंडोलाखाल, देवप्रयाग , टिहरी ) के  प्रस्तुत भवन  में काष्ठ  कला उत्कृष्ट है व प्राकृतिक व ज्यामितीय अलंकरण कला उत्कीर्णन के उदाहरण मिलते हैं। 

 
  सूचना व फोटो आभार:   बिलेश्वर  झल्डियाल   
यह आलेख कला संबंधित है , मिलकियत संबंधी नही है I   भौगोलिक स्तिथि और व भागीदारों  के नामों में त्रुटि   संभव है I 
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022
गढ़वाल, कुमाऊं , देहरादून , हरिद्वार ,  उत्तराखंड  , हिमालय की पारम्परिक भवन  (तिबारी, जंगलेदार निमदारी  , बाखली , खोली , मोरी कोटि बनाल ) काष्ठ  कला  , अलकंरण , अंकन लोक कला  घनसाली तहसील  टिहरी गढवाल  में   पारम्परिक भवन काष्ठ कला  ;  टिहरी तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला , ;   धनौल्टी,   टिहरी गढवाल  में  पारम्परिक  भवन काष्ठ कला, लकड़ी नक्काशी ;   जाखणी  तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला;   प्रताप  नगर तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला, नक्काशी ;   देव प्रयाग    तहसील  टिहरी गढवाल  में  भवन काष्ठ कला, ; Traditional House Wood carving Art from  Tehri

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लक्ष्मण सिद्ध मंदिर देहरादून
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सरोज शर्मा जनप्रिय लेखन श्रंखला


देहरादून म चार प्रसिद्ध सिद्ध मंदिर छन, और चारों कूणों म स्थापित छन,
देहरादून क चार सिद्ध मंदिरो म लक्ष्मण सिद्ध, कालू सिद्ध, मानक सिद्ध, और मांडु सिद्ध छन।
यूं थैं देहरादून क चार धाम ब्वलदिन, ई चार सिद्ध मंदिर देहरादून क चारो कोणा म स्थित छन,
बाबा कालू सिद्ध कि समाधि देहरादून क कालुवला जंगल म स्थित च,
मानक सिद्ध मंदिर प्रेम नगर क पास क्वारी गौं म स्थित च,
और मंडु सिद्ध कि समाधि पौधा और आमवला क जंगल म च,
और बाबा लक्ष्मण सिद्ध कि समाधि कुवांवाला गौं क नजदीक जंगल म स्थित च,
मांडुसिदध म बसंत पंचमी क दिन मेला लगद।
देहरादून से 12 किलोमीटर दूर ऋषिकेश मार्ग म लक्ष्मण सिद्ध मंदिर, लक्ष्मण बाबा क भक्तो क आस्था क केन्द्र च,इन मान्यता च कि भगवान दत्तात्रेय न लोककल्याण खुण 84 शिष्य बणै, और ऊंथैं अपणि सब्या शक्ति प्रदान करिन, कालांतर म ई 84 शिष्य ,चौरासी सिद्ध क नाम से जंणै गैन,और यूं का समाधि स्थल सिद्ध पीठ मंदिर बण गैन, यूं सिद्ध पीठ म देहरादून का चार सिद्ध पीठ भि छन।
एक अन्य पौराणिक कथा क अनुसार भगवान राम क अनुज लक्ष्मण न रावण और मेघनाथ कि ब्रह्म हत्या क पाप से मुक्ति खुण यख तपस्या कैर। इन ब्वलेजांद कि यख मंगी मन्नत पूर्ण हुंदिन, हर एत्वार् यख भारी भीड़ हूंद। प्रसाद म गुढ़ चढ़यै जांद, यू मंदिर गुरूपरम्परा पर आधारित च।महंत ही संपूर्ण व्यवस्था द्यखद।
सिद्ध पीठ परिसर म ब्रह्मलीन हुयां सब्या संतों कि समाधि स्थित छन, यख हर साल अप्रैल क अंतिम रविवार मा भव्य म्याला लगद, सिद्ध पीठ म रूद्राक्ष क एक 200 साल पुरण वृक्ष भि च ऐ मा एकमुखी से सोलह मुखी रूद्राक्ष मिल जंदिन।

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बॉस संबंधी प्रहसन
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बॉस संबंधी   हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक , ठट्टा , मसखरी , लतीफा
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इकबटोळ - गढ़वळिम सर्वाधिक व्यंग्य रचयिता - भीष्म कुकरेती   'चबोड़ाचार्य'   
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वैदिन म्यार  बॉस लैम्बोर्गिनी कार से कार्यालय ऐन।
मीन वधाई दींद  ब्वाल - ब्वा क्या अनोखी कार च !
बॉसक टिप्पणी  छे - तू इनि   उत्कृष्ट परिश्रम करदा  जा तो मि  दुसर वर्ष हैंक मंहगी कार से औलु।
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बॉस तैं अब्दुल क अतिरिक्त क्वी  हैंक  चाय द्यावो तो बॉस कु क्रोध आठों आसमान म पौंछ  जांद  छौ।
आज सुबेर बॉसन  अब्दुल तैं  पूछ - तू  पिछ्ला आठ वर्षों से मै चाय पिलाणी  छे किन्तु कबि मीन चाय कप या प्लेट म खतीं नि देखि।  यांक रहस्य क्या च ?
 "जी सीड्यूं म चढ़ण  से पैल  मि  कप से एक  कुळ्ळापी लींदु अर  तुमर दरवज से भैर चाय कुळ्ळा पुनः कप म गिरायी  दींदु। " अब्दुलक उत्तर छौ
आज अब्दुल तैं  फेयरवेल पार्टी दिए  गे।
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म्यार बॉस मि  तैं  कम्प्यूटर बुल्दन।
ना ना कि मि तेज गुणा -भाग करदो।  किन्तु यदि क्वी म्यार दगड़ बात  नि कारो त मि  १५ मिनट पैथर से (go to sleep ) जान्दो।
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एकॉन  मैं  पूछ कि " यी तुम मैं ५लाख रुप्या  देल्या तो मि  तुमर बॉसक मर्डर कर  सकुद।  "
म्यार उत्तर छौ - अति आनंद  की बात च किन्तु ५ लाख कमांद कमांद  तीन वर्ष लग जाल।
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मीन अपण  बॉसौ  कुण  ब्वाल - साब तुम तै मेरी महावरी वेतन वृद्धि करण इ  पोड़ल।  निथर  तीन कम्पनी म्यार पैथर पड्यां  छन
बॉसन पूछ - कु  कु ?
म्यार उत्तर छौ - बिजली , टेलीफोन अर  कारौ  ईएमआई  कम्पनी।
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म्यार बॉसन मेकुण  ईमेल भ्याज - चौड़  एक प्रहसन भेज।
मीन ईमेल से उत्तर दे - बस मि ये इ काम पर काम करणु  छौ।
बॉस क उत्तर आयी - ब्वा यु जोक बड़ो हंसोड्या  च हैंक जोक बि  भेज।


Copyright, 2022

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हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर इतिहास संदर्भ   :    दिल्ली पर चाहमानों का अधिकार


 हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर इतिहास संदर्भ में  तोमर वंश राज्य - ४

Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History with reference, Tomar Dynasty -4

Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,   Saharanpur History  Part  - 406             
                           
    हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -४०६             


                  इतिहास विद्यार्थी ::: आचार्य भीष्म कुकरेती
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तोमर राजा के गजनी उत्तराधिकारियों से संधि की प्रतिक्रिया स्वरुप चाहमान राजा बीसलदेव  तृतीय चाहमान (बिग्रहराज ११५० -११६४ ईश्वी )  ) ने ११५१ में  तोमर राज्य पर आक्रममन कर दिल्ली पर अधिकार कर लिया।   आर बी सिंह अनुसार पृथ्वीराज ने दिल्ली पर अधिकार किया था। 
डबराल अनुसार  (१ )पृथ्वीराज चाहमान  ने  गढ़देश (सहारनपुर , हरिद्वार व बिजनौर सहित  ) में तोमरों के सामंतो को हटाकर चाहमान सामंत बिठाये थे।
References-
संदर्भ
१- शिव प्रसाद डबराल चारण , १९६९ , उत्तराखंड का इतिहास भाग ४ पृष्ठ ७५
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Copyright @ Bhishma  Kukreti , 2022
हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर इतिहास  : तोमर वंश  परिपेक्ष्य में हरिद्वार , सहारनपुर , बिजनौर इतिहास, तोमर वंश व सहारनपुर इतिहास , बिजनौर इतिहास व तोमर राज्य इतिहास

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भाणजा  ग्वार (रुद्रप्रयाग ) के एक भवन में काष्ठ कला
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Traditional House wood Carving Art of Rudraprayag         : 
गढ़वाल के भवन (तिबारी, निमदारी, बाखली,जंगलेदार  मकान, खोलियों ) में पारम्परिक गढवाली शैली की काष्ठ कला अलंकरण उत्कीर्णन  अंकन,- 615 

 
 संकलन - भीष्म कुकरेती
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भाणजा  ग्वार  का प्रस्तुत भवन एक तलीय (उबर ) है व आधार के तल में बालकोनी पर में जंगल बंधा है।  जंगले  पर दस से अधिक स्तम्भ हैं।  प्रत्येक स्तम्भ में घुंडियां /कुम्भियाँ उकेरी (कटान से ) निर्मित हुयी हैं।  जंगले  के आधार में दो कड़ियों से रेलिंग निर्मित हुयी हैं। 
जंगले  व भवन में ज्यामितीय कटान से ही काष्ठ कला  पूरी   की गयी है। 
सूचना व फोटो आभार:  डी  . एस  . कांडपाल   
  * यह आलेख भवन कला संबंधी है न कि मिल्कियत संबंधी, भौगोलिक स्तिथि संबंधी।  भौगोलिक व मिलकियत की सूचना श्रुति से मिली है अत: अंतर  के लिए सूचना दाता व  संकलन  कर्ता उत्तरदायी नही हैं . 
  Copyright @ Bhishma Kukreti, 2022     
  रुद्रप्रयाग , गढवाल   तिबारियों , निमदारियों , डंड्यळियों, बाखलीयों   ,खोली, कोटि बनाल )   में काष्ठ उत्कीर्णन कला /अलंकरण ,
Traditional House Wood Carving Art (Tibari) of Garhwal , Uttarakhand , Himalaya ; Traditional House wood Carving Art of  Rudraprayag  Tehsil, Rudraprayag    Garhwal   Traditional House wood Carving Art of  Ukhimath Rudraprayag.   Garhwal;  Traditional House wood Carving Art of  Jakholi, Rudraprayag  , Garhwal, नक्काशी, जखोली , रुद्रप्रयाग में भवन काष्ठ कला,   ; उखीमठ , रुद्रप्रयाग  में भवन काष्ठ कला अंकन,  उत्कीर्णन  , खिड़कियों में नक्काशी , रुद्रप्रयाग में दरवाज़ों में उत्कीर्णन  , रुद्रप्रयाग में द्वारों में  उत्कीर्णन  श्रृंखला आगे निरंतर चलती रहेंगी

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चरक संहिता म  गोरस (दूध, दै , प्यूंस , घी , नौणी , छांछ आदि  ) वर्ग 
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चरक संहितौ सर्व प्रथम  गढ़वळि  अनुवाद   
 खंड - १  सूत्रस्थानम , 27th  सत्ताइसवां  अध्याय   ( अन्नपान विधि   अध्याय   )   पद २१६   बिटेन  २३५  तक
  अनुवाद भाग -  ३३०
गढ़वाळिम  सर्वाधिक पढ़े  जण  वळ एकमात्र लिख्वार-आचार्य  भीष्म कुकरेती
s = आधी अ
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      !!!  म्यार गुरु  श्री व बडाश्री  स्व बलदेव प्रसाद कुकरेती तैं  समर्पित !!!
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क्षीर वर्ग -
दूध मधुर ,शीतल , मृदु , स्निग्ध , बहल , श्लक्ष्ण ,प*पिच्छिल , गुरु , मंद , प्रसन्न यूं  दस  गुणों क हूंद। आज क बि यी गुण हूंदन।  इलै सामान्य हूण पर बि दूध आज बढ़ांद।  इलै  जीवनीय  वस्तुओं  म  दूध  अधिक  श्रेष्ठ  मने जांद।  दूध रसायन च।
भैंसौ दूध - गौंडी दूध से भारी , ठंडो , अर घी बिंडी बणदो।  अनिद्रा रोगी कुण व अगन बढ़न  पर  हितकारी हूंद, अगन कम करदो ।   ,
ऊंटनी दूध - ऊंटनी दूध रुखा उष्ण , कुछ लुण्या , लघु , वात , कफ , अनाह , कृमि , शोफ , उदर , अर्श रोगम  हितकारी। 
एक खुर वळ घोड़ी या गधी  दूध बलकारी सरैल तै स्थिर करण वळ , उष्ण , लवण अम्ल रस , रुखा , हथ -खूटों वातविकार नाशी हूंद। 
बखरौ दूध - कसैला , मधुर , शीतल , संग्राही , लघु , रक्तपित्त , अतासीर , नाशक , क्षय , कासु , जौरम हितकारी हूंद। 
ढिबरौ दूध - हिक्का , स्वास रोग पैदा करदो, ग्राम व पित्त उत्पादक हूंद । 
हथनी दूध - बलकारी , गुरु व सरैल तै दृढ कारी हूंद।
स्त्रियों दूध जीबनीय , बृंहणीय , शारीरक सात्म्य , स्नेहक , नत्स्य कुण अर रक्तपित्त म हितकारी हूंद।  आँख दुःखण म ाँह म डळणम हितकारी। 
दहीक गुण -  दै  (दही ) रुचिकारी , अग्निदीपक , वीर्यवर्धक , स्नेहन योग्य , बलवर्धक , अम्ल विपाक म , उष्णवीर्य, वातनाशक , मंगलकारी , बृंहण , पौष्टिक च।  पीनस, अतिसार , शीतजन्यविषम रोगम , अरुचि , मूत्रकृछ्र , अर  स्वाभाविक कृशता म दै उत्तम च।  शारद -ग्रीष्म अर वसंत ऋतुम दै नि खाण चयेंद। मंदक (जब दै पुअर नि जमी ह्वावो )  त्रिदोषकारी च अर  ठीक जमीं दै  वातनाशी च ।  दै मथि मलै शुक्रवर्धक च।  दै क मं ड (  स्वच्छ जल भाग- मस्तु  ) कफ -वातनाशी हूंद , सत्र साफ़ करण वळ च।
छांची  गुण - शोफ , अर्श,  मूत्रवरोध , उदर रोग , अरुचि , स्नेहन जन्य रोग , अरुचि , पाण्डु व संयोग जन्य विषों म उत्तम च। 
नौणी (मक्खन ) - संग्राही , अग्निदीपक , हृद्य , ग्रहणी , अर्श रोग नाशी , अरुचि समाप्त करण वळ  च।
गौड़ी घ्यू गुण - स्मरण शक्ति, बुद्धि , शक्ति ,  वर्धक , उत्साह , आज , कफ-मेद वर्धक हूंद।  वात , पित्त , विष , उन्माद , शोथ , दौर्भाग्य , अशुभ , अर जौर नाशी हूंद।  सौब स्न्हेऊँ म घ्यू उत्तम च, शीतल ,मधुर च ।
नाना प्रकारौ कर्म करण वळ  द्रव्यों से घीक संस्कार करण  पर घी सहस्त्रों प्रकारौ संस्कार कौर सकुद।  मद , अपस्मार , मूर्छा , शोथ , उन्माद , विष , जौर , योनिरोग , कर्ण रोग , मुंडक शूल , कुण  पुराणो  घी प्रशस्त च। 
अन्य पशुओं घी उन्का  दूध गुण अनुसार बिंगण चयेंद।
प्यूंस , मोरट (जब प्यूंस अगली दिन बि  स्वच्छ नि  ह्वावो ) , किकाट )मलाई रहित दूध ) , अर इनि  वस्तु , जौंक  अग्नि बढ़ीं ह्वावो , अनिद्रा रोगी , ऊँकूण  सुखदायी च, गुरु तृप्तकारी , पौष्टिक , वीर्यवर्धक , वातनाशी च । 
पनीर स्वच्छ , गुरु , रूखो व संग्राही च। 
नवां गोरस वर्ग समाप्त ह्वे।  २१६ - २३५
   








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*संवैधानिक चेतावनी : चरक संहिता पौढ़ी  थैला छाप वैद्य नि बणिन , अधिकृत वैद्य कु परामर्श अवश्य लीण
संदर्भ: कविराज अत्रिदेवजी गुप्त , भार्गव पुस्तकालय बनारस ,पृष्ठ   ३५३-३५६
सर्वाधिकार@ भीष्म कुकरेती (जसपुर गढ़वाल ) 2022
शेष अग्वाड़ी  फाड़ीम ,चरक संहिता कु  एकमात्र  विश्वसनीय गढ़वाली अनुवाद; चरक संहिता कु सर्वपर्थम गढ़वाली अनुवाद; ढांगू वळक चरक सहिता  क गढवाली अनुवाद , चरक संहिता म   रोग निदान , आयुर्वेदम   रोग निदान  , चरक संहिता क्वाथ निर्माण गढवाली  , चरक संहिता का प्रमाणिक गढ़वाली अनुवाद , हिमालयी लेखक द्वारा चरक संहिता अनुवाद , जसपुर (द्वारीखाल ) वाले का चरक संहिता अनुवाद , आधुनिक गढ़वाली गद्य उदाहरण, गढ़वाली में अनुदित साहित्य लक्षण व चरित्र उदाहरण   , गढ़वाली गद्य का चरित्र , लक्षण , गढ़वाली गद्य में हिंदी , उर्दू , विदेशी शब्द, गढ़वाली गद्य परम्परा में अनुवाद , सरल भाषा में आयुर्वेद समझाना।  आयुर्वेद के सिद्धांत गढ़वाली भाषा में ; आयुर्वेद सिद्धांत उत्तराखंडी भाषा में, गढ़वाली भाषा में आयुर्वेद तथ्य , गढ़वाली भाषा में आयुर्वेद सिद्धांत व स्वास्थ्य लाभ

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टपकेश्वर महादेव मंदिर देहरादून
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सरोज शर्मा कु  जनप्रिय साहित्य श्रंखला

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टपकेश्वर महादेव मंदिर साड़े छै हजार साल पुरण च,
ऐतिहासिक श्री टपकेश्वर महादेव मंदिर देहरादून शहर से करीब छै किलोमीटर दूर गढ़ी कैन्ट छावनी क्षेत्र म तमसा नदी क तट म स्थित च। महाभारत काल बटिक गुरू द्रोणाचार्य क तप न प्रसन्न ह्वै कि भगवान शिव न दर्शन दीं। गुरू द्रोणाचार्य क अनुरोध क कारण भगवान शिव जगत कल्याण क खातिर लिंग रूप मा वख स्थापित ह्वै गिन। ऐ क बाद द्रोणाचार्य न भगवान शिव की प्रार्थना कैर और अश्वत्थामा क जन्म ह्वै।
अश्वत्थामा न मंदिर कि गुफा मा छै मास एक खुट्टा म खड़ ह्वैकि भगवान शिव कि तपस्या कैर भगवान शिव प्रकट हुयीं त अश्वत्थामा न ऊं से दूध मांग ।
प्रसन्न ह्वै कि भगवान शिव न शिवलिंग क माथ जु चट्टान छै वै पर गौ का थन बणया दिन, वै से दूध कि धारा बगण लग, ऐ कारण से शिव क नौ दूधेश्वर पव्ड़ ।
कलयुग मा दूध कि धारा जल रूप म परिवर्तित ह्वै ग्या ऐ कारण टपकेश्वर नौ प्वाड़ ।महादेव न यखिम देवताओ थैं देवेश्वर रूप म दर्शन दीं ।देश भर बटिक ही न विदेशों बटिक भि पर्यटक दर्शन कनकु अंदिन। सौंणक मैना म यख म्याला लगयूं रैंद। जंमेश्वर और टपकेश्वर महादेव मंदिर क 'श्री एक हजार आठ ,कृष्णा गिरी महाराज क ब्वलण च कि भगवान शिव यख साक्षात प्रकट हुंई। सौंण क मैना केवल जल चढांण से भक्तो कि मनोकामना पूर्ण हुंदिन बारों मैना यख श्रृधालु आणा रंदिन।

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समयवाद्यूं  मजाक उड़ाण  वळ  जोक्स
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  (  साम्य वाद विरुद्ध  हास्य , प्रहसन , खौंख्याट , जोक्स , चबोड़, मजाक , ठट्टा , मसखरी , लतीफा )
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   गढ़वळिम सर्वाधिक व्यंग्य रचण वळ : भीष्म कुकरेती 'चबोड़ाकार्य'
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रूसक एक गाँवम एक  अल्लू किसाणन उत्साह म जोसेफ स्टालिन का स्वागत कार  अर  ब्वाल -
"द्याखौ  स्टालिन जी  ! इखम एक अल्लू हैंक अल्लू मथि ढेरम च अर एक दिन यी अल्लू स्वर्ग तक पौंछ जाला "
"किन्तु स्वर्गौ   तो  अस्तित्व इ    नी। " स्टालिन की टिप्पणी छे।
" हाँ हाँ जन अल्लू क अस्तित्व नी  रूसम।  " किसानन रहस्य ख्वाल।
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कॉमरेड ज्योति  बसुक बंगाल म राज छौ। 
सुरक्षा कर्मियोंन एक व्यक्ति  तै ज्योति बसु बंगला म घुसद  देखि अर पूछ - क्वा भाषा जणदि ?"
व्यक्तिन बोल - बंगाली अर क्या।
गार्डन पूछ - क्वी  कागजात छन  भितर प्रवेश कुण  ?
व्यक्तिन कागज दिखाई।
गार्डन  कागज बांच - यूरिन टेस्ट
प्रोटीन -निल
शक़्कर -निल
वसा (फैट ) - निल
गार्डन ब्वाल - जा जा  भितर  जा।   मुख्य मंत्री ले  क्या  तू तु माख बि मरण  लैक  नि  छे।
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विधान सभा चुनाव बगत  एक नोएडा वळ  बंगाल गे।  नॉएडा वळ क कन्दुड़ पर हेडफोन लग्युं  छौ। हेडफोन म लिख्युं छौ - मेड इन UP
तृणमूल कॉंग्रेसक कार्यकर्ता न ब्वाल - ममता दीदीक राज म हमन भौत प्रोग्रेस कार।  हमर बंगालम तुम से अच्छा गैजेट निर्मित हूंदन।
यूपी वळन ब्वाल - अच्छा ?
तृणमूल  कॉंग्रेस कार्यकर्ता न पूछ -पर  कन्दूड़ म ये  गजेटक नाम क्या च ?
XX
" मेरी पत्नी  कोलकत्ता म कम्युनिस्ट प्रायोजित कुकिंग क्लास म पिछ्ला तीन वर्षों से जाणी  च।  " कम्युनिस्ट   व्यक्ति न बतायी।   
 राजस्थानी दगड़्यान  ब्वाल -" औ  अब तक तो तुमारि पत्नी होटल संबाळण लैक  ह्वे गे  ह्वेलि  ?"
कम्युनिस्ट  क उत्तर छौ - "ना ना अबि  त  कार्ल मार्क्स की जीवनी समाप्त ह्वे  अर  माओ की जीवनी पूरी  शेष च।  "
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ज्योति बसुक  समय ,  एक तमिल , एक पंजाबी अर  बंगाली कम्युनिस्ट न आदम अर ईव  की फोटो देखि।
तमिलक बचन छा -द्याखौ  सि  क्या शांत छन द्वी।  अवश्य ही सि  तमिल रै  होला।
पंजाबिक बचन छा - ना ना इथगा  बिगरैल  छन तो अवश्य ही पंजाबी होला।
बंगालक कम्युनिस्टन टिप्पणी दे - ना ना सि नंगी छन , बेघर छन अर खाणो बि एकि सेव।  साफ़ मतलब च यी साम्यवादी बंगाल का छन। 
"


Copyright 2022  - जौन  यी प्रहसन रची
साम्यवाद संबंधी ( विरुद्ध)  प्रहसन , साम्यवाद क मजाक , साम्यवाद पर प्रहसन , साम्यवाद पर मसखरी , साम्य  वाद विरुद्ध जोक्स
प्रहसन कै  जाति  ना अपितु विचारधारा क विरुद्ध च। 

100
The Perfect Judiciary Court
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Duties (Raj dharma) of the Chief Executive Officer -31 
Judiciary System in the Organization /Country

Guidelines for Chief Officers (CEO) Series –439       
       Bhishma Kukreti (Marketing Strategist)
s= आधी –अ
एतत्दशांगकरणं यस्यामध्यास्य पार्थिव: II37II
न्यायान् पश्येत् कृतिमति: सा सभाsध्वर सन्निभा I
(Shukraniti, Raj dharma Nirupan or “The Duties of a King” –37, 38 (first)  )
The court is as good as heaven or Yagay Shala in which the King establishes the above ten requisites and the cases are studied accordingly. 
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Reference:
Shukraniti, Manoj Pocket Books, Delhi pp257
Copyright@ Bhishma Kukreti, 2021
Strategies for Executive for marketing warfare
Tactics for the Chief Executive Officers responsible for Marketing
Approaches   for the Chief Executive Officers responsible for Brand Image
Strategies for the Chief Executive Officers responsible for winning Competitors
Immutable Strategic Formulas for Chief Executive Officer
(CEO-Logy, the science of CEO’s working based on Shukra Niti)
(Examples from Shukra Niti helpful for Chief executive Officer)
Successful Strategies for successful Chief executive Officer
Duties (Raj dharma) of the Chief Executive Officer   
The Perfect Judiciary Court
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