Author Topic: Anusuya Devi Temple, Chamoli Uttarakhand- अनुसूया देवी मंदिर चमोली उत्तराखंड  (Read 18553 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Dosto,

Dev Bhoomi Uttarkahand is known as Abode of God & Goddess. It meas a land where God & Goddess reside and where there is temple at step to step. We are sharing here information about Sati Ansuya Temple is situated in Chamoli district of Uttrakhand. This temple is located in the beautiful litigants of nature , this magnificent temple attracts pilgrims. Sati Ansuya Temple is one of India's leading Devi temple . It is a holy place dedicated to goddess Sati , and also depicts the religious nature of India. Sati Ansuya Temple is a sacred abode. Situated in the lap of Himalayas , the environment of this temple is very unique for travellers. From pilgrims to tourist everyone finds this place dear . Sati Anasuya Temple StorySati Anasuya Temple is an ancient Hindu temple. Some historical beliefs can be seen related to the temple. Situated in Ansuya Village , this magnificent temple attracts everyone. There is a tale related to the temple, according to which it is said that Atri Muni made this place his penance. His wife established a hut at this place and started living here .It is said that Devi Ansuya was wholly dedicated to her husband , and her wellness was spread in the three worlds.Ansuya’s Sati Dharm  awakened the sense of malice in Devi Parvati, Lakshmi ji, and Devi Saraswati and to take her test they sent their husbands Shivaji, Vishnuji and Brahma ji to Ansuya.But the gods of the ladies tried to explain ,when Devi’s did not understand  and the three gods forcibly reached the ashram of sage.The gods there went in disguise of sages and began to demand food at the entrance to the ashram.When Devi Ansuya started offering food to them , they put a condition in front of her . That they all will only accept this offering if she’ll serve it without wearing clothes.On this Devi became tensed , that how could she do that . Atlast , Devi closed her eyes and imagined her hisband on which she got an intuition that these sages are gods in disguise. On that devi said that she would do as they want , but for that they have to take the form of her sons.  The three gods agreed to it , and were then served food by Mata Devi.This way all the three gods started living there as Devi’s sons. After a while when the gods did not reach back to parlok , Devi Parvati, Lakshmi ji, and Devi Saraswati became concerned and devastated .All the three goddess apologized Devi Sati and asked her to free them from her sons form and give them back their husbands.Ma Sati agreed to it and since then this place is famous from Ma Sati’s name.

M S Mehta 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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अनुसूया देवी

मंदिर अनुसूया देवी का मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले के मुख्यालय से १३ किलोमीटर और वहां से ५ किलोमीटर की दूरी पर उत्तर दिश में कीलांचल पर्वत (ऋषयकुल पर्वत)  के तलहटी में स्थित है! यहाँ पञ्च केदारो के एक श्री रुद्रनाथ की दूरी १४ किलोमीटर की दूरी (पैदल मार्ग) रह जाती है! अनुसूया देवी से पश्चिम की और से पंच केदारो में ही एक श्री तुंगनाथ का मंदिर है ! इस प्रकार यह मंदिर तुंगनाथ के मध्य ७२०० फीट की ऊँचाई पर अवस्थित एक प्रसिद्ध सिद्दीपीठ के रूप में मान्यता है ! श्री अनुसूया माता के मंदिर निकट महर्षि आत्री तपोस्थली और दत्तात्रेय  है !

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पौराणिक कहानी

ब्रह्मा के मानस पुत्र व सप्त ऋषियों में वर्णित मह्रिषी अत्री वैदिक सूक्त द्रष्टा ऋषि थे, उन्ही की पत्नी अनुसूया कर्दम प्रजाति और देवहूति की कन्या थी! देवी अनुसूया को पतिव्रताओ  की आर्दश और शालीनता की दिव्य प्रतीक माना जाता है ! पौराणिक कथाओ के अनुसार सती अनुसूया के पति मह्रिषी की लम्बी तपस्या से देवगण घबरा गये और ब्रह्मा, विष्णु, महेश, अत्री के समक्ष प्रकट हुए और उनसे वरदान मांगने को कहा ! महर्षि अत्री ने कहा ऋषि का स्वभाव तप करना है, वरदान लेना नहीं! यदि अनुसूया चाहे तो वरदान मांग सकती है ! लेकिन पतिव्रता  अनुसूया ने वरदान लेने से इनकार कर दिया जिससे त्रिदेव रुष्ट हो गये! इसी पौराणिक आख्यान से जुदा एक प्रसंग है की माँ पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती में सतीत्व को लेकर आपस में विवाद हो गया जिसके निराकरण के लिए त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश बदलकर माँ अनुसूया की परीक्षा लेने गए! तीनो ने मांग की माँ अनुसूया नग्न अवस्था में भोजन कराये! देवी अनुसूया तनिक भी विचलित नहीं हुयी और उने नग्न अवस्था में भोजन कराने की स्वीकृति दे दी! देवी अनुसूया ने लौटे से गंगा जल लेकर तीनो देवो पर छिड़क दिया और तीनो नवजात शिशुओ के रूप में बदल गये और किल्कारिया मरने लगे! माँ अनुसूया ने उन्हें स्तनपान कराया!उधर तीनो देविया पतियों के वियोग से दुखी हो गए और ब्रह्मा के मानस पुत्र ब्रहऋषि नारद के सुझाव पर माँ अनुसूया के समक्ष अपने पतियों को पूर्व रूप में लाने की प्रार्थना करने लगी! अनुसूया माता ने अपनी सतीत्व से तीनो देवो को फिर से पूर्व रूप में कर दिया ! तभी से अनुसूया माता, सती अनुसूया से नाम से प्रसिद्ध हो गयी! त्रिदेवो के वरदान से उन्हें चन्द्रमा, दत्तात्रेय एव दुर्वासा पुत्र प्राप्त हुए!

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The birth place of Dattatreya
 
 
 
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Sati Anasuya with Trinities (as babies)  and their wives

 It is said that Ansuya with Sage Atri lived in Chitrakut and Dattatreya was born there. It enshrines the idol of Sati Anasuya, the wife of saint Atri, with her three babies who are said to be the incarnations of Brahma, Vishnu and Maheswar.The  temple is located further up-stream from Janaki Kund, amid thick forests, about 16 km from Chitrakoot. It is considered as the place where Atri Muni and his wife, Anasuya, had their ashram with their three sons, who were believed to be incarnations of Lord Brahma, Lord Vishnu and Lord Shiva. The Mandakini River lies close to this place, is believed to be have been created by Anasuya through her meditation. A delightful shrine situated here enshrines an image of Anusuya swinging her three babies. The temple features exquisite statues, depicting the story of Atri Muni and Anusuya.[/td][/tr][/table]

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नौदी MelaNaudi Fair,

सती अनसूइया मंदिर उत्सव 
प्रति वर्ष दिसंबर माह के दौरन यहां पर सती अनसूइया जी के पुत्र दत्तात्रेय जयंती का आयोजन किया जाता है. इस उत्सव के समय मेले का भी आयोजन होता है. जिसे दूर दूर से लोग देखने आते हैं और इसी पवित्र स्थान से पंच केदारों में से एक केदार रुद्रनाथ जाने का मार्ग भी बनता है. मंदिर के आस पास अनेक महत्वपूर्ण एवं मनोरम स्थल भी देखे जा सकते हैं. यह विहंगम दृश्य श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं. मंदिर तक पहुंचने के लिए खड़ी चढाई पर चलना होता है जो पैदल ही पार की जाती है मंदिर के रास्ते में आने वाला मंडल नामक गांव पेडों से भरा है तथा गाँव के पास एक नदी भी बहती है इसके साथ ही मार्ग में विश्राम स्थल की भी व्यवस्था कि गई है.

This fair held ever year on Shukal Poornima (December month) specially on Dattatrey Jayanti. Maa Anusuya son's name is Dattatrey.

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सती अनसूइया मंदिर महत्व Sati Anasuya Temple Importance मंदिर में प्रवेश से पहले भगवान गणेश जी की भव्य प्रतिमा के दर्शन प्राप्त होते हैं. यहां पर भगवान गणेश जी एक शिला पर विराजमान हैं मान्यता है कि यह शिला प्राकृतिक रूप से निर्मित है. मंदिर का निर्माण नागर शैली में हो रखा है. मंदिर के गर्भ गृह में सती अनसूइया की भव्य मूर्ति स्थापित है. मूर्ति पर चाँदी का छत्र रखा हुआ है.
मंदिर के प्रांगण में भगवान शिव, माता पार्वती एवं गणेश जी की प्रतिमा देखी जा सकती है. इसके साथ ही सती अनसूइया के पुत्र दत्तात्रेय जी की त्रिमुखी प्रतिमा भी विराजमान है. इस पवित्र मंदिर के दर्शन पाकर सभी लोग धन्य हो जाते हैं इसकी पवित्रता सभी के मन में समा जाती हैं सभी स्त्रियां मां सती अनसूया से पतिव्रता होने का आशिर्वाद पाने की कामना करती हैं.


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 photo height=480   Anusuya Mata Temple - Photo- Neeraj rawat

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सिरोली गाव से आगे बड़ते हुए २ किलोमीटर की दूरी पर सुरम्य प्राकृतिक परिवेश के मध्य एक उतंग चट्टान पर प्राकर्तिक गुफा है जिसे मह्रिषी अत्री गुफा के नाम से जाना जाता है ! यह आश्रम एक कन्दरा (गुफा) के अन्दर जिसमे जाने के लिए श्रद्धालु को दुर्गम चट्टान के लोहे की जंजीर का सहारा लेना पड़ता लेकर ६-७ फीट लम्बी सकरी शिला पर लेटकर उसमे परवेश करना पड़ता है ! गुफा में अत्री ऋषि की पाषाण मूर्ती स्थापित है! गुफा के कुछ बाहर अमृत गंगा के सुंदर जल प्रपात को देखर मन प्रसन्न हो जाता है! इस झरने से नीचे से होकर यात्रीगण परिकरमा कर गंगा को पार करते है इसे प्रकार गंगा को लांघे बिना ही परिकरमा करना विश्व के किसी आश्चर्य से कम नहीं है!

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माँ अनुसूया देवी के मंदिर के पीच के भाग में एक शिवालय निर्मित है! पांच पांडव और वन देता भी इस स्थान पर पूजा अर्चना हेतु रखे गये है! माँ अनुसूया का मंदिर बारह महीने खुला रहता है (मात्र १४ जनसे से ८ दिनों के लिए बंद रहता है) सात्विक पूजा का यहाँ विधान है!

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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पूजा पद्धति

वर्तमान में अणसी गवा के आठ परिवार इस मंदिर की पूजा से जुड़े हुए है! एक एक वर्ष की बारी प्रथा है ! प्रातः ६ बजे स्नान, श्रंगार, पूजा अर्चना, भोग १० बजे रोट, आटे का चूरमा, मालपुवा, आदि अर्पित किया जाता है ! सायंकालीन आरती ७, ८ बजे के मध्य संपन्न होती है!