Author Topic: Piran Kaliyar - एकता का प्रतीक: पिरान कलियर  (Read 45706 times)

पंकज सिंह महर

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Piran kaliyar shareef sahib situated At a distance of 20km from Haridwar at the bank of river Ganga  gives a lesson of humanity and unity to the world .the tomb of this dargah was made by Ibrahim Lodhi.

The 'Dargah' of  Hazrat Makhdum Allauddin Ali Ahamed 'Sabir' on the outskirts of Roorkee town is a worth-visit-place for every visitor. It is situated towards the south of Haridwar. This place is one of the living examples of unity. Famed for its mystical powers that fulfill the desires of the devout, the Dargah is visited by millions of devotees from all religions from India and abroad. The Urs is celebrated at this Dargah every year, from the first day of sighting the moon to the sixteenth day during the Rabeeull month of the Islamic calendar.


पंकज सिंह महर

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Piran Kaliyar, also known as Kaliyar Sharif, is the burial place of a Sufi saint named Ali`uddin Ali Ahmad Sabir. It is only a half hours drive from Haridwar, but the Islamic tone makes the feel of the place completely different. The tomb is set in a small village, whose only attraction is the presence of the saint, for whose blessings the faithful still seek, as at the shrine of Hazrat Nizam-ud-din, or Baba Mu'in ud-din Chishti.  This picture shows one of the gateways to the shrine (and the cucumber vendor who recognized a good business location)
 
The veneration of saints in Islam is based on the belief that their piety brought them close to Allah, and that they can therefore act as channels for Allah's grace. Not only do people visit the saints to ask for favors, but some strive to be buried near them. The tomb compound at Piran Kaliyar contains the graves of numerous followers, whereas this smaller tomb is built outside the shrine, but close by. 

पंकज सिंह महर

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Piran Kaliyar, also known as Kaliyar Sharif, is the burial place of a Sufi saint named Ali`uddin Ali Ahmad Sabir. It is only a half hours drive from Haridwar, but the Islamic tone makes the feel of the place completely different. The tomb is set in a small village, whose only attraction is the presence of the saint, for whose blessings the faithful still seek, as at the shrine of Hazrat Nizam-ud-din, or Baba Mu'in ud-din Chishti.  This picture shows one of the gateways to the shrine (and the cucumber vendor who recognized a good business location)
 
The veneration of saints in Islam is based on the belief that their piety brought them close to Allah, and that they can therefore act as channels for Allah's grace. Not only do people visit the saints to ask for favors, but some strive to be buried near them. The tomb compound at Piran Kaliyar contains the graves of numerous followers, whereas this smaller tomb is built outside the shrine, but close by. 

The shrine of Piran Kaliyar is the anchor and  raison d'etre for the town of Kaliyar, which is little more than a collection of shops around the saint's tomb, to sell merchandise, souvenirs, food, and offerings for the saint such as roses and sugar. The only time things get really busy is during the annual urs ("marriage"), the festival celebrating the saint's death anniversary, and hence his marriage with God

पंकज सिंह महर

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Name:  Piran Kaliyar Sharif - Dargah of Hazrat Makhdum Sayyed Allauddin Ali Ahmed (Sabir) 
 
Tel: +91-1332-277072
Mobile: +91-9837574586
 
Address:  Dargah Hazrat Sabir Pak, Piran Kaliyar Sarif, Roorkee  District-  Haridwar, Uttarakhand-247667

Contact person:  Mr. Shah Mansoor, Ejaz Sajjada Nasheen

Directions:  It is located at Peeran Kaliyar, 10 kilometres from Roorkee roadways bus depot.
 
Closed on:  Open on all days.

Deity Worshipped:  It is the 'mazaar' of Sufi Saint Hazrat Makhdum Sayyed Allauddin Ali Ahmed (Sabir)

Traditional/Historical Significance:  It is the famous dargah of 13th centaury Sufi Saint Hazrat Makhdum Sayyed Allaudin Ali Ahmed. It is greatly revered by the followers of every religion.

Remarks:  Dargah is visited by thousands of people who throng the place to pay their respect to the holy soul.
 
Towards the north of 'Gular' tree, there is a 'langar' where free food is distributed to poor and needy in afternoon and evening.
 

पंकज सिंह महर

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Piran Kaliyar Urs :
This Festival is held at Piran Kaliyar Sharif of Roorkee Tehsil in Haridwar District. In this Urs, Jaireens from within and outside the country come in Lacs. The Urs is of about one month which is held according to the Muslim Calendar near Id-E-Milad.

पंकज सिंह महर

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झंडा लेकर पिरान कलियर पहुंचा बरेली का जत्था    

कलियर (हरिद्वार)। पाक दरगाह पर चढ़ाया जाने वाला झंडा शनिवार को बरेली से कलियर पहुंचा। झंडा कुसाई की रस्म दरगाह के बुलंद दरवाजे पर होगी। झंडे को लाने वाले जत्थे का कई जगहों पर स्वागत हुआ।

उर्स शुरू होने से पहले झंडा कुसाई की रस्म अदा होती है। बरेली से आने वाला झंडा कलियर दरगाह के बुलंद दरवाजे पर चढ़ाया जाता है। पिछले 20 सालों से बरेली के सूफी रईस मियां इस झंडे को लाते रहे, लेकिन उनकी मृत्यु होने पर अब झंडा वसीम साबरी, कमाल साबरी के नेतृत्व में कलियर पहुंचा है। जत्थे में इस बार 105 व्यक्ति आए हैं। झंडा लेकर यह जत्था बरेली से एक सप्ताह पहले पैदल चल देता है। जत्था फतेहगंज, मिलक, शंकरपुर, रामपुर, दलपतपुर, मुरादाबाद, नहटौर, चिड़ियापुर होते हुए हरिद्वार पहुंचता है। जत्थे के यहां पहुंचते ही उर्स की तैयारियां शुरु हो गई हैं। अब रविवार को मेहंदी डोरी की रस्म अदा की जाएगी। पाक झंडे वाला जत्था बाबा जिलानी की पुर्स मिजाजी में है

पंकज सिंह महर

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पिरान कलियर उर्स, रूडकी 
 
मेले का आयोजन रूडकी के समीप ऊपरी गंग नहर के किनारे जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पिरान कलियर गांव में होता है। इस स्थान पर हजरत मखदूम अलाउदीन अहमद ‘‘साबरी‘‘ की दरगाह है। यह स्थान हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच एकता का सूत्र है। यहां पर हिन्दु व मुसलमान मन्नते मांगते है व चादरे चढाते है। मेले स्थल पर दरगाह कमेटी द्वारा देश/विदेश से आने वाले जायरिनों/श्रद्वालुओं के लिये आवास की उचित व्यवस्था है।दरगाह के बाहर खाने पीने की अच्छी व्यवस्था उपलब्ध है।
गढवाल मण्डल विकास निगम द्वारा संचालित पर्यटन आवासगृह उपलब्ध है जिसके आवास एवं खान-पान की व्यवस्था उपलब्ध है। डाकखाना ,पुलिस चौकी, दूरसंचार विभाग के पी0सी0ओ0 कार्यरत है पीने का पानी की व्यवस्था दरगाह कमेटी द्वारा की जाती है मेले के समय हैण्ड पम्पों की व्यवस्था एवं शौचालय आदि का सुविधा उपलब्ध है स्थानीय स्तर पर मेटाडोर द्वारा यातायात की सुविधा उपलब्ध है। रवीउल अब्बल, चाँद के अनुसार मेले के आयोजन की तिथि तय की जाती है एवं मेला एक माह तक चलता है ।

यहां पर प्रत्येक वर्ष उर्स का आयोजन होता है। उर्स की परम्परा सात सौ वर्षो से भी अधिक पुरानी है। इस अवसर पर यहां लाखों की संख्या में जायरीन (श्रद्धालु) देश व विदेश से आते है। पारम्पारिक सूफीयाना कलाम व कव्वालियां उर्स के समय यहां पर विशेष आकर्षण होता है । उत्तराखण्ड पर्यटन द्वारा वार्षिक उर्स मेले के आयोजन हेतु विगत वर्ष रू0 3.25 लाख की अनुदान धनराशि भी उपलब्ध कराई गई थी।
 
 
 
कैसे पहुँचा जाये 
 
 
पिरान कलियर जिला मुख्यालय हरिद्वार से 25 किमी की दूरी पर स्थित है तथा बस, टैक्सी तथा अन्य स्थानीय यातायात की सुविधायें उपलब्ध है । 
निकटतम रेलवे स्टेशन
 हरिद्वार 25 किमी0, रूडकी 8 किमी0
निकटतम हवाई अड्डा
 जौलीग्रांट 66 किमी0

हेम पन्त

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पिरान कलियर के बारे में सुन्दर जानकारी दी है... मुझे इस स्थान के बारे में पता नहीं था.

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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पाक जायरीनों का गर्मजोशी से स्वागत
Mar 19, 02:37 am

रुड़की (हरिद्वार)। पिरान कलियर जियारत करने आए पाकिस्तान के जत्थे का रुड़की रेलवे स्टेशन व पिरान कलियर में गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस दौरान दोनों ही जगहों पर सुरक्षा के कडे़ इंतजाम रहे।

पाकिस्तान के जायरीनों के जत्थे के रुड़की रेलवे स्टेशन पहुंचने पर मेलाधिकारी हरीश चंद कांडपाल, एसपी देहात अजय जोशी, प्रभारी मेलाधिकारी भगत सिंह फोनिया, तहसीलदार शाहिद हुसैन के अलावा एलआईयू के इंसपेक्टर संजय कुमार ने स्वागत किया। यहां से जायरीनों को बस से पिरान कलियर ले जाया गया। पिरान कलियर पहुंचने पर पाक जायरीनों का दरगाह प्रबंधन और दुकानदारों ने स्वागत किया। दरगाह के प्रबंधक फुरकान अली ने बताया है कि पहले सूचना दो सौ जायरीनों के आने की थी। मात्र 99 जायरीन ही पाकिस्तान से पहुंचे हैं। इन सभी को दरगाह के नए गेस्ट हाऊस में ठहराया गया है। पाकिस्तान के जायरीनों ने दरगाह की मस्जिद में जौहर की नमाज अदा कर विश्व की शांति के लिए दुआ मांगी। पाकिस्तानी जत्थे के लीडर मोहम्मद सलीम मलिक से जिलाधिकारी आंनद ब‌र्द्धन व अन्य अधिकारियों ने वार्ता की।

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Piran Kaliyar humare Uttarakhand ke Dhaarmik sauhard ka prateek hai. Agli baar jab main us taraf jaaunga to wahan jaroor jaane ki koshish karunga.