Author Topic: Sun Temple Of Katarmal - कटारमल का सूर्य मंदिर  (Read 23392 times)

पंकज सिंह महर

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साथियो,
      आपने कोणार्क के सूर्य मंदिर के बारे में जरुर सुना होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि एक सूर्य मंदिर हमारे उत्तराखण्ड में भी है। अल्मोड़ा-कौसानी मोटर मार्ग पर कोसी से ऊपर की ओर कटारमल गांव है और वहां पर सूर्य मंदिर स्थित है। वैसे सूर्य के मंदिर हमारे देश में गिने-चुने ही हैं, जिसमें से एक कटारमल, उत्तराखण्ड में स्थित है। यह मंदिर हमारे पूर्वजों की सूर्य में आस्था का प्रमाण है, यह मंदिर बारहवीं शताब्दी का बना है और वहां पर प्रतिमायें बहुत ही सुन्दर हैं। यह मंदिर उत्तराखण्ड की गौरवशाली इतिहास का प्रमाण है।
      आइये जानते हैं, इस मंदिर के बारे में।

sathiyo,
       aapne konark ke surya mandir ke bare mai jarur suna hoga, lekin kya aapko pata hai ki ek surya mandir hamare uttarakhand mai bhi hai. Almora kausani motar marg par kosi se upar ki oar katarmal gaon hai aur vaha par surya mandir stith hai. vaise surya ke mandir hamare desh me gine-cune hi hai, jisme se ek uttarakhand mai stith hai. yah mandir hamare purvajo ki surya mai aastha ka praman hai, yah mandir 12 vi shatabdi ka bana huaa hai aur vaha par pratimaye bahut sundar hai. yah mandir Uttarakhand ke gauravashali itihas ka praman hai.
        aaiye jante hai, is mandir ke bare mai.

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Katyuri Raja Katarmal ne is mandir ka nirmaan karaya tha. Iski vaastukala Jaageshwar, Baijnath Mandiro se milti julti hai jinka Nirmaan bhi Katyuri shaasako ne hi kiya tha.

पंकज सिंह महर

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कटारमल :

कटारमल का सूर्य मन्दिर अपनी बनावट के लिए विख्यात है।  महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने इस मन्दिर की भूरि-भूरि प्रशंसा की।  उनका मानना है कि यहाँ पर समस्त हिमालय के देवतागण एकत्र होकर पूजा अर्चना करते रहै हैं।  उन्होंने यहाँ की मूर्तियों की कला की प्रशंसा की है।

कटारमल के मन्दिर में सूर्य पद्मासन लगाकर बैठे हुए हैं।  यह मूर्ति एक मीटर से अधिक लम्बी और पौन मीटर चौड़ी भूरे रंग के पत्थर में बनाई गई है।  यह मूर्ती बारहवीं शताब्दी की बतायी जाती है।  कोर्णाक के सूर्य मन्दिर के बाद कटारमल का यह सूर्य मन्दिर दर्शनीय है।  कोर्णाक के सूर्य मन्दिर के बाहर जो झलक है, वह कटारमल मन्दिर में आंशिक रुप में दिखाई देती है।

कटारमल के सूर्य मन्दिर तक पहुँचने के लिए अल्मोड़ा से रानीखेत मोटरमार्ग के रास्ते से जाना होता है।  अल्मोड़ा से १४ कि.मी. जाने के बाद ३ कि.मी. पैदल चलना पड़ता है।  मन्दिर १५५४ मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।  अल्मोड़ा से कटारमल मंदिर १७ कि.मी. की निकलकर जाता है। रानीखेत से सीतलाखेत २६ कि.मी. दूर है।  १८२९ मीटर की ऊँचाई पर बसा हुआ है।

पंकज सिंह महर

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कटारमल गांव में स्थित सूर्य मंदिर का दृश्य



पंकज सिंह महर

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मुख्य मंदिर


पंकज सिंह महर

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इस मंदिर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने १९२० में संरक्षित किया था, मंदिर परिसर में उनके द्वारा लगाया गया सूचना पट


पंकज सिंह महर

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हमारे अनुभव दा अभी कुछ दिन पहले इस मंदिर के दर्शन के लिये गये थे, उन्होंने पुजारी और स्थानीय लोगो का साक्षात्कार भी लिया था-

http://www.youtube.com/watch?v=W9SvaIp5HAs

पंकज सिंह महर

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शिव प्रसाद डबराल जी द्वारा लिखित "उत्तराखण्ड का इतिहास" में कटारमल के मंदिर निर्माण का वर्णन किया है-

कटारमल्ल देव (१०८०-९० ई०) ने अल्मोड़ा से लगभग ७ मील की दूरी पर बड़ादित्य (महान सूर्य) के मंदिर का निर्माण किया था। उस गांव को, जिसके निकट यह मंदिर है, अब कटारमल तथा मंदिर को कटार्मल मंदिर कहा जाता है। यहां के मंदिर पुंज के मध्य में कत्यूरी शिखर वाले बड़े और भव्य मंदिर का निर्माण राजा कटारमल्ल देव ने कराया था। मंदिर में सूर्य की उदीच्य प्रतिमा है, जिसमें सूर्य को बूट पहने हुये खड़ा दिखाया गया है।
      मंदिर की दीवार पर तीन पंक्तियों वाला शिलालेख, जिसे लिपि के आधार पर राहुल सांस्कृत्यायन ने दसवीं-ग्यारहवीं शती का माना है, अस्पष्ट हो गया है। इसमें राहुल जी ने ....मल्ल देव.... तो पढ़ा था, सम्भवतः लेख में मंदिर के निर्माण और तिथि के बारे में कुछ सूचनायें थी, जो अब अपाठ्य हो गई है।
      मन्दिर में प्रमुख मूर्त बूटधारी आदित्य (सूर्य) की है, जिसकी आराधना शक जाति में विशेष रुप से की जाती है। इन मंदिरों में सूर्य की दो मूर्तियों के अलावा विष्णु, शिव, गणेश की प्रतिमायें हैं। मंदिर के द्वार पर एक पुरुष की धातु मुर्ति भी है, राहुल सांस्कृतायन ने यहां की शिला और धातु की मूर्तियों को कत्यूरी काल का बताया है।

पंकज सिंह महर

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मंदिर समूह



पंकज सिंह महर

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कटारमल सूर्य मंदिरः इस सूर्य मंदिर का लोकप्रिय नाम बारादित्य है। पूरब की ओर रुख वाला यह मंदिर कुमायूं क्षेत्र का सबसे बड़ा और सबसे ऊंचा मंदिर है।

माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण कत्यूरी वंश के मध्यकालीन राजा कटारमल ने किया, जिन्होंने द्वाराहाट से इस हिमालयी क्षेत्र पर शासन किया।

यहां पर विभिन्न समूहों में बसे छोटे-छोटे मंदिरों के 50 समूह हैं। मुख्य मंदिर का निर्माण अलग-अलग समय में हुआ माना जाता है। वास्तुकला की विशेषताओं और खंभों पर लिखे शिलालेखों के आधार पर इस मंदिर का निर्माण 13वीं शदी में हुआ माना जाता है।