Author Topic: Famous Caves In Uttarakhand - उत्तराखंड मे प्रसिद्ध गुफाये  (Read 43670 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Sani Udiyar

Sani Udiyar is a small town in Bageshwar District of Uttaranchal. It is situated on the state highway connecting Bageshwar to Berinag in Pithoragarh District. Some of the nearby cities and villages are Kanda, Tharap, Syakot, and Chaunra.
The major tourist attractions around Sani Udiyar include Sundardunga Glacier, Gauri Udiyar Temple and Shri Haru Temple.

By road, Sani Udiyar is well connected to Bageshwar. Pant Nagar Airport serves this area. Kathgodam Railway Station is the nearest major railhead.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Bog Udiyar

 


Bog Udiyar is a beautiful village in Pithoragarh District of Uttaranchal. It is situated midway between Munsiyari and Laspa. Paton, Lilam, Rargari Udiyar and Poting are places nearby.
The River Gori flows very close to this village. Nanda Devi Peak, the highest peak among the Garhwal Himalayas, is easily accessible from here.

Tanakpur Railway Station and Pant Nagar Airport are the nearest access points.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Vyasa Cave

Vyasa Cave is situated on a mountain near Kalapani in Pithoragarh District. It is located at an altitude of 3,600 m. Legends say that Veda Vyasa had stayed here. This region is also known as Byans. Kalapani Spring, Kali Temple, Gunji and Budhi are the nearby attractions. It is surrounded by pine and juniper forests. The place provides an enchanting view of the snow clad mountains all around. Rock climbing equipments are required to reach here. Para gliding, hand gliding and trekking are arranged by the Department of Tourism, Uttaranchal.
Pant Nagar Airport is the nearest airport. The nearest railway station is at Kathgodam.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Tapkeshwar Mahadev temple  & A cave temple


Located next to a scenic seasonal river is the famous cave temple of Tapkeshwar Mahadev, dedicated to the Indian God Shiva. Water drips from the rock above the Shivalinga and down over the lingam (deity) in this temple - this process inspiring its name. No entry fee, no crowds, no shops - this is a personal and moving experience. The personal makes way for the equally worthwhile communal experience, though, during the Shivratri festival, a huge fair that's held nearby and which attracts people from all over India.Tourists attractions nearby: Robbers' Cave: A very popular picnic spot - legend has it that robbers used to seek refuge after their escape.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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A CAVE IN PANDKHOLI

Dronagiri is 52 km from Ranikhet lies the 1100 century old Dronagiri Temple. It is said that during battle between Rama and Ravana, when Laxman got hurt with the Arrow of Meghnadh, Hanuman went to obtain Sanjiwani Buti from Himalayas. On his way back, a part of Sanjiwani Buti fell at the place called Dronagiri. Five kilometres away from Dronagiri is the famous cave of Pandavkholi where it is believed that Pandavas stayed during their exile

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Robber's Cave (Guchhupani)

Address:  Vijay Pur, Gopiwala, Anarwala, Guchhupani, Dehradun
 District-Dehradun, Uttarakhand-248001

One of the features that make this place popular is the fact that a stream of water goes underground and re-appears a few metres away. The cave itself is surrounded by hills and presents a perfect opportunity for people in pursuit of peace and tranquillity.





एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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SOME OF THE FAMOUS CAVES OF UTTARKAHAND

1..  Vasisth Gufa               =   In Uttarkashi District
2.   Hanuman Gufa            =   Laghasu near Girsa
3.   Ram Gufa                   =   Near Badrinath
4.   Bhart Gufa                  =  Laghasu near Girsa
5.   Vyas Gufa                   =  Near Badri nath
6.   Gorakh Nath Gufa        =  Near Srinagar & the place called Bhaktyana
7.   Ganesh Gufa               =  Near Badri Nath
8.  Shankar Gufa               =  In Devparayag
9.  Sakand Gufa                =  Near Badri Nath
10. Pandakholi Gufa           =  Near Doonagiri (Dwarahaat Almora)
11. Bheem Gufa                =  Near Kedarnaath
12. Sumeru Gufa              =   In pithorgarh District (near Gangoli Haat)
13  Brahma Gufa              =   Near Kedarnath
14  Swadharm Gufa          =   Near Pithoragah

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Vashisht Cave

An ancient cave, known to be the place of penance by sage Vashisht is situated at a distance of 25 kms from Rishikesh on the road to Rodprayag. The place is worth seeing owing to its religious importance.

पंकज सिंह महर

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धारचूला, पिथौरागढ, तेज सिंह गुंज्याल।

अमरनाथ गुफा से मिलती-जुलती एक गुफा तहसील क्षेत्र में भी मिली है। कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग पर करीब 12 हजार फिट की ऊंचाई पर स्थित इस गुफा में अमरनाथ की तरह ही बर्फ से बना हुआ शिवलिंग है। इस गुफा को सबसे पहले यारसागम्बो की खोज में पहुंचे स्थानीय लोगों ने देखा। यहां तक पहुंचने के लिए करीब डेढ किलोमीटर खडी चढाई चढनी पडती है।

यूं तो तहसील क्षेत्र के ऊंचाई वाले इलाके में पौराणिक महत्व की चीजें बिखरी पडी हैं, लेकिन पहली बार इस क्षेत्र में ऐसी गुफा का पता चला है, जो विश्व प्रसिद्ध अमरनाथ गुफा से मिलती जुलती है। कैलास मानसरोवर यात्रा पथ पर मालपा और बूंदी पडावों के बीच करीब 12000 फिट की ऊंचाई पर यह गुफा देखी गई। इसी से कुछ नीचे गलछिया गुफा है, जो काफी पहले प्रकाश में आ चुकी है। इस क्षेत्र में बेहद कीमती शक्तिव‌र्द्धक यारसागम्बो की खोज करने वाले लोग लम्बे समय से गलछिया गुफा में रहते रहे हैं।

कुछ समय पूर्व यारसागम्बो की खोज में लगे स्थानीय लोगों ने यह नयी गुफा देखी और इसकी सूचना क्षेत्र के वन सरपंच ईश्वर सिंह रायपा को दी। श्री रायपा ने गुफा के भीतर जाकर देखा तो उन्हें उसमें अद्भुत संसार नजर आया। गुफा के भीतर अमरनाथ की तरह ही बर्फ से बना हुआ शिवलिंग है, जिस पर ऊंचाई से पानी टपकता रहता है। इसी के नजदीक भगवान गणेश की सूंड के आकार की हिम आकृति बनी हुई है। पास में ही एक मां अपने बच्चे को स्तनपान कराती हुई दिखती है। गुफा के भीतर अस्त्र-शस्त्रों का ढेर लगा हुआ है।

आश्चर्यजनक यह है कि इन अस्त्र-शस्त्रों में जंक नहीं लगी है। गुफा तक पहुंचने के लिए डेढ किलोमीटर की खडी चढाई चढनी पडती है और सामान्य व्यक्ति के लिए एक दिन में यहां तक पहुंच पाना मुश्किल है। गुफा की पांच सौ मीटर परिधि में ही एक विशाल तालाब भी है। पूरा क्षेत्र भोजपत्र, बांज,बुरांश के पेडों से घिरा हुआ है। वन सरपंच ने इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दे दी है।


साभार- http://in.jagran.yahoo.com/dharm/?page=article&category=6&articleid=4634

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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उत्तराखंड की गुफाएं संजोए हैं आदिम इतिहास

देहरादून। उत्तराखंड के बारे में आम धारणा है कि यहां लोग दूसरे प्रदेशों से आकर बसे हैं। बहुत से उत्तराखंडी लोग भी यही मानते हैं कि उनके पूर्वज कहीं और से आकर उत्तराखंड में बस गए, लेकिन पुरातात्विक साक्ष्य इस बात को झुठलाते ही नहींबल्कि सिद्ध करते हैं कि उत्तराखंड में प्रागैतिहासिक मानव का अस्तित्व था। वह यहां बसता ही नहींथा बल्कि उसने यहां की कंदराओं में अपनी गुहाचित्र कला के नमूने भी रख छोड़े हैं।

पुरातत्व विभाग के अभिलेखों के मुताबिक सन 1968 में अल्मोड़ा जिले में सुयाल नदी के दाएं तट पर लखु उड्यार में गुहा चित्रों की खोज मध्य हिमालय में गुहावासी आदि मानव की गतिविधियों की पहली पुख्ता खोज थी। कुमाऊं विवि के प्रोफेसर डॉ. महेश्वर प्रसाद जोशी को यहां काले, कत्थई लाल और सफेद रंगों से बने सामूहिक नृत्यों के चित्रों के साथ ज्यामितीय आकृतियों के चित्र मिले थे। इस खोज को प्रकाश में लाने में डॉ. धर्मपाल अग्रवाल और डॉ. यशोधर मठपाल ने भी मदद की थी। डॉ. जोशी की इस महत्वपूर्ण खोज के बाद अल्मोड़ा जिले में ही फड़कानौली, फलसीमा, ल्वेथाप, पेटशाल और कसारदेवी में भी गुहाचित्र मिले हैं। बाद में गढ़वाल मंडल में भी गुहावासी मानवों के दो शैलाश्रयों को खोज हुई। अलकनंदा घाटी में स्थित पहले शैलाश्रय को स्थानीय लोग ग्वरख्या उड्यार के नाम से जानते हैं, तो पिंडरघाटी के किमनी गांव के पास भी एक अन्य शैलाश्रय मिला है। इतना ही नहीं1877 में रिवेट कार्नक ने अल्मोड़ा के द्वाराहाट में शैल चित्रांकन का वर्णन किया है। देहरादून के कालसी के पास भी प्राचीन पत्थर के उपकरण मिले हैं जिन्हें आरंभिक पाषाण युग के उपकरण माना जाता है।

कुमाऊं मंडल में अल्मोड़ा जिले की पश्चिमी राम गंगा घाटी और नैनीताल जिले के खुटानी नाले में भी पूर्व पुरापाषाण कालीन पत्थर के औजार मिले हैं। भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के देहरादून सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. देवकी नंदन डिमरी का कहना है कि ये पुरातात्विक साक्ष्य उत्तराखंड के प्राचीन ही नहीं प्रागैतिहासिक इतिहास की ओर संकेत करते हैं। यह सिद्ध करते हैं कि हिमालय प्रागैतिहासिक मानव का वासस्थल भी रहा है। उनका कहना है कि इन पुख्ता पुरातात्विक साक्ष्यों के जरिए उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल से अब तक का क्रमिक इतिहास गढ़ा जाना चाहिए।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6344697.html

 

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