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Author Topic: Good Work(Keep It Up) - शाबास  (Read 5662 times)

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Offline हलिया

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Good Work(Keep It Up) - शाबास
« on: April 01, 2008, 03:58:34 PM »
बन्धुओ,
यहां पर हम उत्तराखण्ड के उन प्रतिभाशाली युवाओं को शाबासी दे सकते हैं जो बिभिन्न क्षेत्रों में अनुकरणीय कार्य करते हैं।


पिथौरागढ़। विवेकानन्द विद्या मंदिर  के नौंवी कक्षा के छात्र भरत जोशी सर्वाधिक अंक प्राप्त कर विद्यालय में अव्वल रहे।  भरत जोशी ने सर्वाधिक 92.8 प्रतिशत अंक हासिल कर विद्यालय में पहला स्थान प्राप्त किया।

शाबास भरत, शाबास
« Last Edit: August 14, 2009, 01:56:08 PM by हिमांशु पाठक »
हौसिया छन डाना पर्वत, हौसिया छन भरौ का भाड़ा,
मन में बसौ मेरो मुलुक, आँख में रिटौ 'म्यर पहाड़' ||

 

Online सत्यदेव सिंह नेगी

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Re: Good Work(Keep It Up) - शाबास
« Reply #61 on: July 29, 2010, 02:14:08 PM »
जीवन सरल बनाएं
आधुनिक जीवन अत्यधिक असंतोषजनक बनता जा रहा है। यह हमें प्रसन्नता नहीं प्रदान करता। इसमें बहुत सी जटिलताएं हैं, बहुत सी इच्छाएं हैं। हम अत्यधिक आवश्यकताओं से स्वयं को मुक्त करें और ईश्वर के साथ अधिक समय व्यतीत करें। अपने जीवन को सरल बनाएं। अपने अंतर में, अपनी आत्मा से प्रसन्न रहें। हम अपने बचे हुए समय को ध्यान में लगाएं, जो ईश-संपर्क प्रदान करता है तथा शांति एवं प्रसन्नता रूपी जीवन की वास्तविकताओंकी प्राप्ति में सच्ची प्रगति प्रदान करता है।
अपना जीवन सरल बनाएं और उतने में ही आनन्द लें जो हमें ईश्वर ने दिया है। अपना खाली समय स्वाध्याय में लगाएं। ईश्वर की मौन वाणी समस्त प्राणी-जगत का आधार है,धर्म-ग्रन्थों के माध्यम से और हमारे अंत:करण के माध्यम से सदा हमें पुकारती रहती है। चिरस्थायी आनंद प्राप्ति के लिए भौतिक धन-संपदा पर विश्वास करना उचित नहीं है। सरल जीवन के द्वारा हमें सर्वसंतुष्टिदायकप्रसन्नता प्राप्त होती है। सादगी का अर्थ है इच्छाओं और आसक्तियोंसे मुक्त रहना और आंतरिक रूप से परमानन्द में मग्न रहना। सरलता से जीवनयापन करने के लिए हमें प्रबल मन और अदम्य इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। इसका अर्थ यह नहीं कि हम अभाव में रहें, बल्कि हम उसी के लिए प्रयास करें और उसी में संतोष करें जिस चीज की हमें वास्तव में आवश्यकता है। जब हमारी अंतरात्मा मानसिक रूप से सांसारिक वस्तुओं का परित्याग कर देती है, तो हमें स्थायी रूप से संतुष्टि करने वाले आनंद की प्राप्ति होने लगती है। जब हम ईश्वर की इच्छा के अनुसार अपने कर्मो का चयन करते हैं, तो जीवन सरल हो जाता है। यदि हम अपना मन निर्मल रखें, तो हम सदा ईश्वर को अपने साथ पाएंगे। हम अपने प्रत्येक विचार में उनकी झलक देखेंगे। एक निर्मल हृदय निर्मल विचारों का परिणाम होता है। हम स्वयं एक छोटे बच्चे के समान सरल बनकर,आसक्ति रहित,सच्चा एवं भोला बनकर ब्रह्म चैतन्य प्राप्त करने की चेष्टा करके उस दिव्य अवस्था को प्राप्त कर सकते हैं। भक्त अंत: प्रज्ञा से परिपूर्ण हो जाता है जो शिशु समान निष्कपट होता है, संशय रहित होता है, सत्यनिष्ठा से पूर्ण होता है तथा विनम्र एवं ग्रहणशील होता है। ऐसा भक्त ईश्वर को प्राप्त करता है।
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Online सत्यदेव सिंह नेगी

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Re: Good Work(Keep It Up) - शाबास
« Reply #62 on: July 29, 2010, 02:15:41 PM »
समर्पण का भाव
जन्म और मृत्यु के अंतराल का नाम जीवन है। यह जीवन आदमी को बडे सौभाग्य से मिलता है। आदमी के लिए यह स्वर्णिम अवसर है, पर जीवन पाकर मनुष्य बहक जाता है, जबकि जीवन पाने का सर्वश्रेष्ठ उद्देश्य है आवागमन से मुक्ति पाना। आदमी यहां एषणाओंकी पूर्ति में ऐसा फंस जाता है कि उसे अपना लक्ष्य ही नहीं याद रहता। कोई पुत्र व्यामोह में, कोई वित्त के अर्जन में अनैतिक कार्यो की ओर बढ जाता है। जीवन का भयावह पक्ष है लोकेषणा।इन व्यामोहोंके कारण काम, क्रोध, अहंकार, लोभ और मोह से ग्रस्त होकर पुनरपि जननंपुनरपि मरणंकी यात्रा करता रहता है।
इस यात्रा से बचने के उपाय सभी धर्म युगों से देते आए हैं। ऋषि, मुनि, संत साधन बताते चले आ रहे हैं। परमात्मा को पाने हेतु पहला सोपान समर्पण कहा गया है। बहुत से उदाहरण हैं जिन्होंने समर्पण भाव से शरणागत होकर अपने जीवन को कृतकृत्यकर लिया है। समर्पण से जितने मानसिक विकार होते हैं स्वयं ही विसर्जितहो जाते हैं। आदमी अंतर्मुखी होकर अपनी आत्मा को, अपने को जान लेता है। जब आत्म साक्षात्कार की मनोदशा साकार होती है तब आदमी पूर्णरूपेण अपने को परमचेतना,परमात्मा को अर्पित कर देता है। समर्पण भाव से ही परमात्ममिलन संभव है। समर्पण भाव से ही राम की सेवा में रत हनुमान भारत के सर्वमान्य पूजनीय हो गए। संत तुलसीदास जी राम की शरणागत होकर- सीय राम मैं सब जग जानी के प्रति समर्पित होकर विश्व कवि महान संत हो गए। मीराका समर्पण अपने गिरधर गोपाल के प्रति जग जाहिर है- मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरोन कोई- पांव में घुंघरू बांध मीरानाचती रही। अत:जन्म मरण से मुक्त होने का सरल उपाय है अपने को ईश्वर की शरण में समर्पित कर देना। परमात्मा को भक्ति से पाया जा सकता है युक्ति से नहीं। यदि हम ईश्वर के प्रति समर्पित हैं तो प्रभु हमारा कल्याण अवश्य करेंगे। हम जितनी ही अपनी श्रद्धा को बलवती करेंगे उतना ही हम अपने आत्मबल को बलवान बनायेंगे। हमारी श्रद्धा जितनी ही सजल होगी हम अपने लक्ष्य के उतने ही निकट होंगे, चाहे वह प्रभु मिलन की बात हो या किसी आत्मीयजनको पाने का सुख। किसी के प्रति असीम आदर का प्रतीक है श्रद्धा, जिसमें समर्पण भी समाहित है।
« Last Edit: July 29, 2010, 02:19:10 PM by सत्यदेव सिंह नेगी »
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Offline sunder singh negi/तनहा इंसान

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Re: Good Work(Keep It Up) - शाबास
« Reply #63 on: July 29, 2010, 06:28:08 PM »
शाबास नेगी जी बहुत अच्छा ज्ञान कराया है यह आपने
बुरा होकर भी मै, बुराई नही करता।

Online Vinod Singh Gariya विनोद सिंह गड़िया

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Re: Good Work(Keep It Up) - शाबास
« Reply #64 on: August 05, 2010, 10:20:31 AM »
बागेश्वर के मोहित भट्ट को मिला अमूल विद्यार्थी अवार्ड

बागेश्वर। गुजरात मिल्क फेडरेशन लिमिटेड आनंद द्वारा बागेश्वर जनपद के छात्र मोहित भट्ट को अमूल विद्या श्री अवार्ड से सम्मानित किया गया है। उन्हे यह अवार्ड बुधवार को राजकीय इंटर कालेज के प्रधानाचार्य ने प्रदान किया।

गुजरात मिल्क फेडरेशन लिमिटेड द्वारा प्रतिवर्ष यह अवार्ड प्रदान किया जाता है। इस वर्ष विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट रहने पर राजकीय इंटर कालेज बागेश्वर के छात्र मोहित भट्ट को पुरस्कार प्रदान किया। मोहित ने वर्ष 2009 की हाईस्कूल परीक्षा में 73 फीसदी अंक प्राप्त किए थे। फाउंडेशन की ओर से भेजे गए इस अवार्ड को प्रधानाचार्य प्रमोद तिवारी ने मोहित को प्रदान किया। एक सादे समारोह में पुरस्कार प्रदान करते हुए श्री तिवारी ने कहा कि वर्तमान युग प्रतियोगिता का युग है तथा प्रत्येक बच्चे को ऊंचे लक्ष्य तय कर मेहनत करनी चाहिए।
 
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6623436.html
"जय माँ नन्दा सुनन्दा"

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Ek Chalis ki last Local Film by sanjay Khanduri ... was recently graced   with the Silver Palm Award in Mexico International Film Festival this   year.
 
  Says Khanduri, "Ek Chalis... was selected amongst films   from 20 different countries and has won in the category of 'Excellence   in filmmaking'. I and my producers 'Quartet Films' are very proud and   thankful to the international jury at festival for recognizing our film   at such high stature. We see this recognition purely as God's gift as we   had never attempted to send our film to different festivals and had   hired no one to promote our film abroad."
 
  From India to Mexico,   how did it all happen? "Mexico has a very similar tradition and culture   as we Indians", he smiles, "I am sure this is why the film has connected   a chord there."http://www.bollywoodhungama.com/news/2010/08/05/14435/index.html
« Last Edit: August 06, 2010, 07:44:25 PM by एम.एस. मेहता /M S Mehta »
"जय १००८ मूल मूलनारायण जी की जय हो" !!

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हेमलता राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित


पिथौरागढ़। राजकीय प्राथमिक विद्यालय बांस की प्रधानाध्यापिका हेमलता जोशी   को राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार के   लिए चुने जाने पर जिले के तमाम शिक्षकों ने खुशी जताई है। श्रीमती जोशी   पांच सितम्बर को शिक्षक दिवस के रोज दिल्ली में राष्ट्रपति से यह पुरस्कार   प्राप्त करेंगी।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6654847.html
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