Author Topic: Uttarakhand News - उत्तराखंड समाचार  (Read 178817 times)

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Risky Pathak

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श्रोताओं का सर्वे नहीं, 2006 के बाद स्थिति अस्पष्ट
कौन सुनता है ‘आकाश’ की ‘वाणी’
अत्याधुनिक संचार माध्यमों से टक्कर की स्थिति नहीं
अल्मोड़ा। आकाशवाणी का यह अल्मोड़ा केंद्र है..। हाई-फाई एफएम और म्यूजिक के तमाम माडर्नाइज वर्जन के बीच में आकाश की यह वाणी पहाड़ के घरों में अब भी गूंजती जरूर है, मगर कहां और कितनी इसका कोई पता नहीं। न इस वाणी को माडर्न करने की कोई पहल और न ही उसका दायरा बढ़ाने की कोशिश। फिलहाल आकाशवाणी यह बताने की स्थिति में नहीं है कि उसके कितने श्रोता हैं।
संचार क्रांति के आधुनिक युग में तमाम रेडियो चैनल लांच हो रहे हैं। एफएम समेत कई चैनलों को श्रोता हाथों हाथ ले रहे हैं। पहाड़ के दूरस्थ स्थानों पर भी छतों में डिश एंटीना की सेंध है। इसकी टक्कर में रेडियो को बचाए रखने की कोशिश सरकारी ढर्रे जैसी ही दिखती है। किसी भी चैनल की साख तय होने के पीछे उसकी टीआरपी को ही आधार माना जाता है। इसके लिए बाकायदा दर्शक, श्रोताओं का सर्वे कराया जाता है। मगर ठीक सरकारी सिस्टम की तरह आकाशवाणी इस बात की कोई जरूरत नहीं समझता है। आकाशवाणी अल्मोड़ा में बैठ रहे अधिकारी इस पर कुछ करने की स्थिति में भी नहीं है क्योंकि आकाशवाणी के रिमोट बटन दिल्ली से दबाए जाते हैं। अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2006 में एक बार जरूर आडियांस रिसर्च कराई गई। मगर उसका आधार भी श्रोताओं की संख्या नहीं बल्कि कार्यक्रमों को आधार बनाकर किया गया था और ठोस कोई नतीजा सामने नहीं आ सका था। हालांकि आकाशवाणी की कोशिश विज्ञापन प्रसारित कर कुछ कमाने की भी है मगर यह कोशिश भी उसके ढर्रे को देखकर बेमानी ही लगती है। एफएम की टक्कर में आकाशवाणी को कैसा रिस्पांस मिलता होगा इससे समझा जा सकता है फिलवक्त प्रसारित हो रहे विज्ञापन इफ्को जैसी तमाम अन्य सरकारी संस्थाओं के ही हैं।
आकाशवाणी अल्मोड़ा की फ्रीक्वेंसी एक किलो वाट के साथ 25 किमी (हवाई दूरी) के दायरे में बताई जाती है। कुमाऊं के पांचों पर्वतीय जिलों में आकाशवाणी सुनाई देता है मगर इसकी फ्रीक्वेंसी बढ़ाने की कोई कोशिश नहीं हुई। बताया जाता है कि इसके लिए जगह की कमी आड़े आ रही है।

C.S.Mehta

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Re: Uttarakhand News - उत्तराखंड समाचार
« Reply #72 on: May 14, 2012, 05:45:41 AM »
दावानल की लपटों में झुलसे जंगलात के दावे




अल्मोड़ा, जागरण कार्यालय: फायर सीजन में वन महकमे के तमाम दावे दावानल की लपटों में झुलस कर रह गए हैं। हालांकि वनों को आग से बचाने के लिए क्रू स्टेशन कागजों में तैयार कर दिए गए हैं, मगर प्रशिक्षित फायर फाइटर व जरूरी संसाधनों के अभाव में अब तक लाखों की वन संपदा खाक हो चुकी है। विभागीय सूत्रों की मानें तो पीक समर सीजन में ही अब तक डेढ़ सौ हेक्टेअर से अधिक वन्य क्षेत्र अग्निकांड से प्रभावित हो चुका है।
दरअसल, वनाग्नि से जंगलों को बचाने के लिए तमाम गोष्ठियां व दावे किए जाते हैं। मगर साल-दर-साल दावानल के बढ़ते दायरे कुछ ही और ही हकीकत बयां कर रहे। विभागीय सूत्र बताते हैं कि फायर सीजन से पहले ही धधकी आग ने महज दो माह में ही डेढ़ सौ हेक्टेअर वन क्षेत्र को लील लिया है। यानी अब तक करोड़ों की वन संपदा राख हो चुकी है।
पौधार का मिश्रित वन क्षेत्र धधका
अल्मोड़ा: वृद्ध जागेश्वर के बाद अब पौधार का मिश्रित वन क्षेत्र धधक उठा है। शनिवार शाम उठी लपटों ने अब तक करीब 10 हेक्टेअर जंगलात को अपनी चपेट में ले लिया है। ग्रामीणों के अनुसार बांज, बुरांश आदि पेड़ों से लबरेज मिश्रित वन क्षेत्र में जंगली मुर्गी, खरगोश, दुर्लभ तीतर आदि को भारी नुकसान हुआ है। मगर अफसोस वन कर्मी 24 घंटे बाद भी आग बुझाने नहीं पहुंचे।
लमगड़ा ब्लॉक के पौधार व पलना के बीच मिश्रित वन क्षेत्र में रविवार को दावानल विकराल रूप ले चुकी है। पौधरोपण में लगाए गए बांज, सुरई आदि के पेड़ों को जहां खासा नुकसान पहुंचा है, वहीं लाखों की वन संपदा आग की भेंट चढ़ चुकी है। गांव वालों ने बताया कि जंगली मुर्गियों व तीतर-बटेर आदि के झुंड पलायन करने लगे हैं। वहीं जंगली खरगोश आदि को लोगों ने आबादी की ओर भागते देखा। देर शाम तक जंगल धू-धू कर जल रहा था लेकिन वन महकमे का कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा था।
दावानल में कब कितनी क्षति
वर्ष दावाग्नि संख्या प्रभावित क्षेत्रफल
-2008 - 20 - 86.50
-2009 - 26 - 51.75
-2010 - 29 - 66
-2011 - 03 - 06
-2012 - 11 - 150 (अब तक)
(इस साल के आंकड़े आंकड़े सिविल सोयम अल्मोड़ा प्रभाग व रिजर्व फॉरेस्ट के हैं।)
दावाग्नि से निपटने को 25 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। दावानल से प्रभावित क्षेत्र पलना वन पंचायत के अधीन है। वन कर्मियों की टीम फॉरेस्टर के साथ भेजी गई है। रात में ही युद्धस्तर पर आग बुझाने का काम शुरु कर दिया गया है। ग्रामीणो को भी सहयोग करना चाहिए। मिश्रित वन क्षेत्र में नुकसान अधिक हुआ है।
-एमके बहुखंडी, एसडीओ, सिविल सोयम

Devbhoomi,Uttarakhand

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Re: Uttarakhand News - उत्तराखंड समाचार
« Reply #73 on: May 23, 2012, 09:56:39 AM »
ग्रामीणों और वन कर्मियों ने आग बुझाने से खड़े किए हाथ


गौचर। केदारनाथ वन प्रभाग के धनपुर रेंज के अंगोत गांव के जंगलों में पांच दिन पूर्व भड़की आग अब कमेड़ा, शैल, बसंतपुर और दुआ गांव के जंगलों को भी खाक कर चुकी है लेकिन जिला मुख्यालय में मंगलवार को विभाग के मुखिया और अधिकारियों की बैठक में आग बुझाने को लेकर विचार विमर्श चलता रहा।  धनपुर रेंज के जंगलों में धुएं के गुबार के बीच आग की लपटें आसमान छू रही हैं।

 मंगलवार को नजदीक आती जा रही आग की विकराल लपटों को लेकर बसंतपुर तोक और पालीटेक्निक परिसर में अफरातफरी मची रही। रेंजर बीएस रावत एवं वन कर्मियों का कहना है कि ग्रामीण स्वयं       जंगलों में आग लगा रहे हैं         और आग बुझाने में सहयोग        नहीं कर रहे हैं।
चार धाम यात्रा के लिए खतरा है आग


उत्तरकाशी। बेकाबू होती जा रही जंगल की आग से यमुनोत्री तथा गंगोत्री की तीर्थयात्रा पर भी खतरा मंडराने लगा है। सुलग रहे नाकुरी सिंगोट के जंगल से लीसे के घान से बेदम चीड़ के विशाल पेड़ गंगोत्री राजमार्ग पर लुढ़क आए। आग से सड़कों पर खड़ी पहाड़ी से पत्थर भी लुढ़क रहे हैं। ब्रह्मखाल के पास आग की लपटें सड़क के दोनों ओर उठने से पेट्रोल गाड़ियों के इसमें चपेट में आने का अंदेशा बना हुआ है। वरुणावत पहाड़ी के वानस्पतिक उपचार के लिए बिछायी गई जियो जूट भी कई बार आग से घिर चुकी है।


उत्तरकाशी वन प्रभाग के एसीएफ नंदाबल्लभ शर्मा ने दावा किया है कि वरुणावत ट्रीटमेंट के तहत जियोजूट वाला क्षेत्र अभी सुरक्षित है। किंतु इस क्षेत्र में ज्ञानसू से संग्राली तक 3 किमी क्षेत्र में आग फैल चुकी है। पूरे डिवीजन में इस बार दावानल की 31 घटनाओं में 44 हेक्टेयर जंगल की वनस्पति खाक हो चुकी है। तीर्थयात्रा के दौरान जंगल में भड़की आग से यात्री डरे सहमे हैं। आग ने बढ़ाया पारा, धुएं से परेशानियां


पौड़ी। जंगलाें की आग से फैल रहे धुंए से आमजन का स्वास्थ्य खराब होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। करीब एक पखवाड़े से पहाड़ों के जंगल धधक रहे हैं। वन विभाग एवं स्थानीय लोगों के प्रयासों से एक ओर आग पर काबू हो रहा है तो दूसरी ओर दावानल शुरू हो जा रहा है। मांडाखाल के जिस क्षेत्र में नगर पालिका द्वारा कचरा गिराया जाता है, वहां भी लगातार आग सुलग रही है। चारों ओर फैल रहे धुएं ने भी आम जन के स्वास्थ्य पर असर डालना शुरू कर दिया है।

 चिकित्सकों के मुताबिक वातावरण में फैल रहे धुएं के कारण सांस की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। अस्थमा के मरीजों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की जरूरत है।
गोपेश्वर।

मंगलवार को भी जिले के सोनला व घाट क्षेत्र से सटे जंगलों में भीषण आग लगी रही। आग से धधक रहे जंगलों के चलते अब जानवर भी गांवों की ओर रुख करने लगे हैं। घाट क्षेत्र के फाली, सैंती आदि गावों के ग्रामीण रात को भी पहरा दे रहे हैं। वन विभाग द्वारा कड़ी मशक्त के बाद भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका है।

[/font]पांचवें दिन भी धधकते रहे अंगोत के जंगल प्रचंड लपटों से बसंतपुर तोक और पॉलीटेक्निक में दहशत

विनोद सिंह गढ़िया

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उत्तराखंड बोर्ड का रिजल्ट घोषित, छात्राएं फिर अव्वल

उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में इस बार भी छात्राओं ने बाजी मारी है। हाईस्कूल का परीक्षा परिणाम 70.26 प्रतिशत और इंटरमीडिएट का परीक्षा परिणाम 78.49 प्रतिशत रहा है।

हाईस्कूल में 76.10 प्रतिशत बालिकाओं और 64.97 प्रतिशत बालकों ने सफलता पाई है। जबकि इंटरमीडिएट में 83.44 प्रतिशत बालिका एवं 73.84 बालकों ने सफलता हासिल की है।

इंटरमीडिएट में पूर्णानंद इंटर कालेज जसपुर की इरम सैफी ने 92.40 प्रतिशत हासिल कर सूबा ऑप किया है जबकि हाईस्कूल में जीआईसी रामनगर के समीर रियाज 95.80 अंकों के साथ टॉपर रहे हैं।

अन्य दो टॉपरों में इंटर में शुभम गुप्ता (विद्या मंदिर बाबूगढ़, विकासनगर, देहरादून) 91.80 प्रतिशत अंक लेकर दूसरे और संजीव कुमार (आरकेएम विद्या मंदिर इंटर कालेज बाजपुर) 90.20 प्रतिशत अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे हैं।

हाईस्कूल में हरगोविंद सुयाल विद्या मंदिर हल्द्वानी की अदिति मंमगाई 94.60 प्रतिशत अंक लेकर दूसरे और विद्या मंदिर मुनस्यारी के सिद्धार्थ कुमार ने 93.80 प्रतिशत अंकों के साथ तीसरा स्थान पाया है। बोर्ड सचिव डॉक्टर डीके मथेला के मुताबिक सभापति के रूप में माध्यमिक शिक्षा निदेशक चंद्र सिंह ग्वाल ने परीक्षाफल घोषित किया।

प्रदेश में 12 से 30 मार्च तक 1226 केंद्रों पर हाईस्कूल, इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा हुई थी। इसमें पंजीकृत 3.16 लाख में से करीब आठ हजार परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे थे। इन केंद्रों में से 188 केंद्र संवेदनशील थे। मूल्यांकन कार्य 10 से 25 अप्रैल तक हुआ था।

स्रोत - अमर उजाला

विनोद सिंह गढ़िया

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उत्तराखंड को विशेष राज्य का दर्जा

पहाड़ी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को तेज करने लिए केंद्र ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के फेज-टू (2012-17) में उत्तराखंड को विशेष राज्य का दर्जा दिया है। इससे अब मिशन के तहत मिलने वाली स्वास्थ्य योजनाओं में राज्य की वित्तीय हिस्सेदारी मात्र 10 फीसदी रह जाएगी। इतना ही नहीं चालू वित्तीय वर्ष में अतिरिक्त बजट भी राज्य को मिल सकेगा। वहीं गैर दर्जा प्राप्त राज्यों के लिए वित्तीय हिस्सेदारी को इस बार 15 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया है।
मिशन के तहत इस बार राज्य के लिए बीते वर्ष से 28 फीसदी ज्यादा 272.29 करोड़ रुपये विभिन्न मदों में स्वीकृत हुए हैं। फेज-टू में उत्तराखंड के अलावा हिमाचल और जम्मू कश्मीर को भी विशेष राज्य का दर्जा मिला है। 1 जुलाई से फेज-टू की स्वीकृत योजनाएं सभी जनपदों में लागू हो जाएंगी। एनआरएचएम फेज-टू सर्वाधिक जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य पर केंद्रित है। इस साल जननी सुरक्षा योजना पर बीते वर्ष से लगभग दोगुने 14 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। चिकित्सकों विशेष तौर पर विशेषज्ञों की कमी दूर करने को निर्देश जारी किए हैं, जिसमें पिथौरागढ़, चमोली, बागेश्वर और उत्तरकाशी में डाक्टरों की संख्या को बढ़ाया जाना है। विशेषज्ञ डाक्टरों की अनुबंध पर तैनाती को 2 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। आशा हेल्थ वर्कर को भी सुदृढ़ करने के लिए 10 करोड़ का प्रावधान विभिन्न योजनाओं में है।
एनआरएचएम में उत्तराखंड को विशेष राज्य का दर्जा मिलने से स्वास्थ्य योजनाओं में राज्य को मात्र 10 फीसदी राशि देनी होगी। फेज टू में स्वास्थ्य सूचकांक के लक्ष्य निर्धारित होने से चिकित्सकों की तैनाती प्राथमिकता पर होगी।


Ajay Pandey

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Re: Uttarakhand News - उत्तराखंड समाचार
« Reply #76 on: June 14, 2012, 12:26:16 PM »
बड़ी ख़ुशी हुई जानकर की राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य mission  उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पहल कर रहा है और राज्य को विशेष दर्जा दे दिया एक काम nrhm  और कर देता वह था हमारे ग्राम गेरार में एक अस्पताल बनवाना nrhm  वहां भी आये और एक अस्पताल का निर्माण भी करवाए विधायक जी ने भी कहा था जय उत्तराखंड
धन्यवाद

C.S.Mehta

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Re: Uttarakhand News - उत्तराखंड समाचार
« Reply #77 on: June 29, 2012, 10:13:26 PM »
पुलिस ने नाबालिग की शादी रुकवाई

जागरण प्रतिनिधि, गोपेश्वर: दुल्हन के नाबालिग होने की शिकायत पर पुलिस ने बरात रुकवा दी। साथ ही घराती और बरातियों को थाने ले गई। हालांकि, अभी इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। बालिग होने का प्रमाण उपलब्ध न कराए जाने पर शनिवार को दुल्हन का मेडिकल कराया जाएगा। एसपी पी रेणुका देवी ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मामले की छानबीन की जा रही है।
चमोली थाना क्षेत्र के ग्राम बालखिला में यह वाकया हुआ। यहां शोभाराम के घर पर बेटी रीना की शादी की रस्म पूरी हो रही थी। ग्राम फतेहपुर जिला बागपत उत्तर प्रदेश के सुभाष चंद्र पुत्र खुशीराम बरात लेकर वहां पहुंचे थे। इस बीच, पुलिस को दुल्हन के नाबालिग होने की शिकायत मिली। इस पर एसओजी टीम ने विवाह स्थल पर पहुंचकर शादी रुकवा दी। पुलिस को देखकर बराती भाग खड़े हुए।
दूल्हे और दुल्हन के साथ ही दोनों के परिजनों को पुलिस चमोली थाने ले आई। पुलिस ने दुल्हन पक्ष से बालिग होने के प्रमाण मांगे, लेकिन वे कोई भी ऐसा दस्तावेज नहीं दिखा पाए। अब पुलिस उसकी उम्र का पता लगाने के लिए शनिवार को जिला चिकित्सालय में मेडिकल कराएगी।
पुलिस अधीक्षक पी रेणुका देवी का कहना है कि नाबालिग की शादी की शिकायत पुलिस ने यह कार्रवाई की। अभी इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है। उम्र का सही पता चलने के बाद कदम उठाया जाएगा।

C.S.Mehta

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Re: Uttarakhand News - उत्तराखंड समाचार
« Reply #78 on: June 29, 2012, 10:38:15 PM »
दलित बालिका के साथ सामूहिक बलात्कार
पिथौरागढ़ के क्वीतड़ गांव में दो युवकों के दलित बालिका के साथ सामूहिक बलात्कार का मामला प्रकाश में आया है.
पीड़िता की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है. आरोपित फरार हैं. प्रख्यात गायिका कबूतरी देवी इसी गांव की रहने वाली हैं.
क्वीतड़ गांव की 16 वर्षीय किशोरी इंटर की छात्रा है. वह शुक्रवार को मवेशियों को चराने पास ही स्थित जंगल में गयी थी तभी मौका पाकर गांव के ही दो युवकों त्रिभुवन सिंह सौन व अशोक सौन ने उसके साथ दुराचार किया. पीड़िता रोते हुए घर पहुंची और परिजनों को अपने साथ हुए हादसे की जानकारी दी.
पीड़िता का पिता अन्य ग्रामीणों को साथ लेकर रात में ही कोतवाली पहुंच गये और पुलिस में मामला दर्ज कराया. पीड़िता के दलित व नाबालिग होने से पुलिस के हाथ-पांव फूल गये. रात में ही कोतवाल बीआर आर्या ने जवानों के साथ गांव में दबिश दी लेकिन आरोपित हत्थे नहीं चढ़े.

इस पर शनिवार को फिर से कोतवाल ने क्षेत्र में दबिश दी और आसपास के लोगों से पूछताछ की, लेकिन युवकों का कोई पता नहीं चला. दोनों युवकों की उम्र 20-22 वर्ष बताई जा रही है.

इधर एसपी अनंत शंकर ताकवाले ने बताया कि बालिका का मेडिकल करा लिया गया है. इसमें बलात्कार की पुष्टि हुई है.

उन्होंने कहा कि आरोपितों को दबोचने की लिए पुलिस की टीम गांव में दबिश पर है. शीघ्र ही उन्हें दबोच लिया जाएगा.
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विनोद सिंह गढ़िया

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Re: Uttarakhand News - उत्तराखंड समाचार
« Reply #79 on: July 05, 2012, 02:32:55 AM »
पर्यावरणीय सेवाओं का मुआवजा मांगेंगे पहाड़वासी

बागेश्वर। देश के पर्वतीय राज्यों में रहने वाले लोग प्राकृतिक संपदाओं का त्याग करके देश और दुनिया को पर्यावरणीय सेवाएं दे रहे हैं किंतु इसके ऐवज में उन्हें कुछ नहीं मिल रहा है। पर्यावरणीय सेवाओं का मुआवजा प्राप्त करने के लिए देश के सभी 11 पर्वतीय राज्यों के लोग केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए एकजुट हो रहे हैं। इंडियन माउंटेन इनिसिएटिव कार्यक्रम के तहत पर्वतीय राज्य अपने लिए अलग मंत्रालय तथा योजना आयोग में विशेष प्रकोष्ठ की मांग कर रहे हैं।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव तथा वरिष्ठ प्रशासक डा. आरएस टोलिया ने यहां एक मुलाकात में बताया कि इंडियन माउंटेन इनिसिएटिव के तहत देश के सभी 11 पर्वतीय राज्यों को एकजुट करने के प्रयास शुरू हो गए हैं। देश और दुनिया को पर्यावरण सेवाएं प्रदान करने में इन प्रांतों का उल्लेखनीय योगदान रहा है। यहां की वन संपदाओं के दोहन पर पहले से ही प्रतिबंध है। वनों की सुरक्षा करने वाले लोग संपदाओं का उपयोग नहीं कर पाते हैं। अब जल संपदाओं के दोहन पर भी प्रतिबंध लगाने के लिए तमाम तरह के प्रयास चल रहे हैं। उत्तराखंड में पहले से ही निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजनाओं को रोकने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। पर्वतीय राज्यों में प्राकृतिक संसाधनों को बचाने की भारी कीमत स्थानीय लोगों को चुकानी पड़ रही है। इसके लिए पहाड़ वासियों को विशेष आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।
डा. टोलिया ने बताया कि सभी 11 पर्वतीय राज्यों के बुद्धिजीवी, प्रशासक, योजनाकार तथा जन नेता इसके लिए केंद्र सरकार और योजना आयोग पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंडियन माउंटेन इनिसिएटिव के तहत पर्वतीय राज्यों के लिए अलग मंत्रालय बनाने, योजना आयोग में विशेष पर्वतीय प्रकोष्ठ स्थापित करने जैसी अहम मांगें शामिल हैं। उन्होंने बताया कि दून विश्वविद्यालय स्थित सेंटर फार पब्लिक पालिसी के स्कूल आफ सोसल साइंस की तरफ से पर्वतीय विकास नीति पर पत्रक तैयार करके सरकार को भेजे गए हैं। दबाव के चलते 11वें वित्त आयोग में पर्वतीय राज्यों को एक हजार करोड़ रुपये अधिक मिले। 12वें वित्त आयोग में ढाई हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मिलेगी। उन्होने बताया कि इस पहल के तहत पूर्व में नैनीताल और गंगटोक में बैठकें हो चुकी हैं। अगली बैठक नागालैंडमें होगी।

साभार : अमर उजाला

 

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