Author Topic: Flora Of Uttarakhand - उत्तराखंड के फल, फूल एव वनस्पति  (Read 248528 times)

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
Myths and Religious Uses of Arjun in Uttarakhand
-
Plant Myths, Religious Importance, and Traditions in Uttarakhand (Himalaya) - 37
By: Bhishma Kukreti, M.Sc. (Botany) (Mythology, Culture Research Scholar)
Botanical name – Terminalia arjuna
Hindi Name – Arjun

                                           ---Economic benefits –--
Medical uses- Every part is sued in Ayurveda and Yunani system for making medicines
Furniture, Agriculture Instruments, wood etc.-silk production
 Wood is used in making boat and house furniture
                   Myths, Religious Uses and Traditions
   Hindu Astrologers suggest worshiping Arjuna plant for rituals related to Swati Nakshatra .

-
Copyright@ Bhishma Kukreti, Mumbai 2017
-
Plant Myths  , Religious Plants, Religious Importance, Traditions , Garhwal, Uttarakhand ; Plant Myths , Religious Importance, Traditions , Kumaon, Uttarakhand ;Plant Myths , Religious Importance, Traditions , Uttarakhand; Plant Myths , Religious Importance, Traditions , Uttarakhand, Himalaya; Plant Myths , Religious Importance, Traditions , Uttarakhand, North India; Plant Myths , Religious Importance, Traditions , Uttarakhand, South Asia, Religious Plants Garhwal, Religious Plants Kumaon, Religious Plants Dehradun , Religious Plant Haridwar .वनस्पति ज्योतिष , वनस्पति तंत्र, वनस्पति मंत्र




Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1

 
उत्तराखंड परिपेक्ष में  जंगली लहसुन / डोंडो/ जिमु / डंडू   का   मसाला व औषधि उपयोग व इतिहास 
History, Origin, Introduction,  Uses  of  Garlic Chives/Chinese Chives  as   Spices ,  in Uttarakhand
 
उत्तराखंड  परिपेक्ष में वन वनस्पति  मसाला , औषधि  व अन्य   उपयोग और   इतिहास - 1                                             
  History, Origin, Introduction Uses  of    Wild Plant  Spices ,  Uttarakhand -   1                       
         
  उत्तराखंड में कृषि व खान -पान -भोजन का इतिहास --   90
History of Agriculture , Culinary , Gastronomy, Food, Recipes  in Uttarakhand -90

 आलेख -भीष्म कुकरेती (वनस्पति व सांस्कृति शास्त्री )
-
वनस्पति शास्त्रीय नाम - Allium tubersum
सामन्य अंग्रेजी नाम - Garlic  Chives or Chines Chives
हिंदी नाम -जंगली लहसुन
नेपाली नाम -डुंडू
उत्तराखंडी नाम - दोणो , जिमू  (हिमाचल )
 जंगली लहसुन  या जंगली दोणो कुछ ही क्षेत्रों जैसे मुनसियारी में मसाले के रूप में उपयोग होता है किन्तु औषधि रूप में अधिक होता है।  यह पौधा 2300 -2600 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय व चीन हिमालय में उगता है। इसकी एक सेंटीमीटर चौड़ी व बीस सेंटीमीटर लम्बी पत्तियां गुच्छों में उगती हैं और अपने भार से झुक जाती हैं।  फूल सफेद व गुलाबी होते हैं 
जन्मस्थल संबंधी सूचना - जंगली लहसुन के जन्म के बारे में वनस्पति शास्त्री एकमत नहीं हैं किंतु इस पौधे का जन्म हिमालय में ही हुआ इसमें दो रे नहीं हैं।
संदर्भ पुस्तकों में वर्णन - चीन व  तिब्बत में जंगली लहसुन पिछले तीन हजार साल से उपयोग हो रहा है।  चीनी औषधि विज्ञानं की सोलहवीं सदी के पुस्तक में उल्लेख है।  भारत के निघंटु साहित्य में इस स्पेसीज से मिलते जुलते पौधों का जिक्र हुआ है
औषधि उपयोग -
 विटामिन सी से भरपूर , इसका उपयोग उत्तराखंड से बाहर कोलस्ट्रोल कम करने  , रतौंधी , नपंसुकता ,  आदि कष्टों में उपयोग होता है। बालों की आयु बढ़ाने , बुढ़ापा कम करने के लिए भी औसधि उपयोग होता है। पत्तियों के रस  फंगस आदि अवरोधक के रूप में प्रयोग होते हैं।
कुमाऊं विश्वविद्यालय  के फरहा सुल्ताना , ए . शाह व रक्षा मंत्रालय हल्द्वानी के मोहसिन जैसे वैज्ञानिकों ने सलाह दी है की जंगली लहसुन का उत्तराखंड में बड़े स्तर पर कृषिकरण होना चाहिए
                               मसालों में उपयोग

  उत्तराखंड , हिमाचल , नेपाल व मणिपुर जहां जहां तिब्बती संस्कृति का प्रभाव है वहां वहां जंगली लहसुन की पत्तियों व फूलों , मूल का लहसुन जैसे उपयोग होता है याने छौंका , सब्जी -दाल-मांश -अंडे ,  में सलाद व नमक के साथ पीसकर , अचार बनाकर उपयोग होता है।


Copyright@Bhishma Kukreti Mumbai 2018

Notes on History of Culinary, Gastronomy, Spices  in Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy , Spices in Pithoragarh Uttarakhand; History ofCulinary,Gastronomy,  Spices in Doti Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Dwarhat, Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy,  Spices in Pithoragarh Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Champawat Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Nainital Uttarakhand;History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Almora, Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Bageshwar Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Udham Singh Nagar Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Chamoli Garhwal Uttarakhand; History ofCulinary,Gastronomy in Rudraprayag, Garhwal Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Pauri Garhwal, Uttarakhand; History ofCulinary,Gastronomy in Dehradun Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices   in Tehri Garhwal  Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy,  Spices in Uttarakhand Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Haridwar Uttarakhand;

 ( उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; पिथोरागढ़ , कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;चम्पावत कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; बागेश्वर कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; नैनीताल कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;उधम सिंह नगर कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;अल्मोड़ा कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; हरिद्वार , उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;पौड़ी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;चमोली गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; देहरादून गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; टिहरी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; उत्तरकाशी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; हिमालय  में कृषि व भोजन का इतिहास ;     उत्तर भारत में कृषि व भोजन का इतिहास ; उत्तराखंड , दक्षिण एसिया में कृषि व भोजन का इतिहास लेखमाला श्रृंखला )


Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
उत्तराखंड में  वन अजवाइन , अजमोड़ / राधुनी   मसाला , औषधि उपयोग  इतिहास

   History, Origin, Introduction,  Uses  of  Wild Celery  as   Spices ,  in Uttarakhand
 
उत्तराखंड  परिपेक्ष में वन वनस्पति   का मसाला , औषधि  व अन्य   उपयोग और   इतिहास -  2                                             
             

  History, Origin, Introduction Uses  of    Wild Plant  Spices ,  Uttarakhand -  2                     
         
  उत्तराखंड में कृषि व खान -पान -भोजन का इतिहास --  91
History of Agriculture , Culinary , Gastronomy, Food, Recipes  in Uttarakhand -91

 आलेख -भीष्म कुकरेती (वनस्पति व सांस्कृति शास्त्री )
-
वनस्पति शास्त्रीय नाम - Trachyspermum roxburghianum
सामन्य अंग्रेजी नाम - Wild Celery
संस्कृत नाम -अजमोड़ / वन यवनक
हिंदी नाम -अजमोदा  /बंगाली राधुनी
नेपाली नाम -  वन जवानो
उत्तराखंडी नाम -वण अजवाइन , बण अज्वैण
  वास्तव में कृषि जनित अजवाइन में और वन अजवाइन में कुछ ही अंतर् है और दिखने भी कम ही अंतर् है। सुगंध में कुछ अंतर् है।
जन्मस्थल संबंधी सूचना - अधिकतर वैज्ञानिकों की एकमत राय है कि वन अजवाइन का जन्मस्थल इजिप्ट /मिश्र क्षेत्र है।
संदर्भ पुस्तकों में वर्णन - अजमोदा  का उल्लेख चरक संहिता , शुश्रुता संहिता , अमरकोश , मंदपाल निघण्टु , कैयदेव निघण्टु , सातवीं सदी के बागभट्ट का अष्टांग हृदयम , ग्यारवहीं सदी के चक्र दत्त , बारहवीं सदी के गदा संग्रह , तेरहवीं सदी के सारंगधर संहिता , सत्रहवीं सदी के योगरत्नकारा , अठारवीं सदी के भेषजरत्नावली ,  आदि में हुआ है। 

       वन अजवाइन का औषधि उपयोग

वास्तव में घरलू या जंगली अजवाइन दोनों का मुख्य उपयोग औषधि रूप में ही होता है , उत्तराखंड के हर घर में जंगली या घरेलू अजवाइन अनिवार्य मसाला या औषधि होती ही है।  पेट दर्द या बुखार में लोग अपने आप अजवाइन भूनकर या बिना भुने फांक लेते हैं।  लोग परम्परागत रूप से अदरक , गुड़ या शहद व जंगली या घरेलू अजवाइन बीज या पीसी अजवाइन का क्वाथ सर्दी -जुकाम भगाने हेतु उपयोग करते हैं।

बच्चों के गले में कपड़े के ताजिब में भी जंगली या घरेलू अजवाइन बीज बाँधने का रिवाज तो उत्तरखंडियों के मध्य मुंबई में भी है। 

     वन अजवाइन मसाले के रूप में

 आम लोग अजवाइन बीज को गरम  तासीर , वातनाशक , कफ नाशक मानते हैं और जाड़ों में तो दिन में एक बार भोज्य पदार्थ में चुटकी भर अजवाइन डाल ही  देते हैं विशेषकर उड़द  दाल जैसे भोज्य पदार्थ में।  वास्तव में अजवाइन अन्य मसालों की सहेली है। 
  जाड़ों में चाय में भी डालने का रिवाज है।  मिठाईयों में विशेष स्वाद हेतु वन अजवाइन प्रयोग की जाती है।   



Copyright@Bhishma Kukreti Mumbai 2018

Notes on History of Culinary, Gastronomy, Spices  in Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy , Spices in Pithoragarh Uttarakhand; History ofCulinary,Gastronomy,  Spices in Doti Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Dwarhat, Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy,  Spices in Pithoragarh Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Champawat Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Nainital Uttarakhand;History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Almora, Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Bageshwar Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Udham Singh Nagar Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Chamoli Garhwal Uttarakhand; History ofCulinary,Gastronomy in Rudraprayag, Garhwal Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Pauri Garhwal, Uttarakhand; History ofCulinary,Gastronomy in Dehradun Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices   in Tehri Garhwal  Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy,  Spices in Uttarakhand Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Haridwar Uttarakhand;

 ( उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; पिथोरागढ़ , कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;चम्पावत कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; बागेश्वर कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; नैनीताल कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;उधम सिंह नगर कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;अल्मोड़ा कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; हरिद्वार , उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;पौड़ी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ;चमोली गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; देहरादून गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; टिहरी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; उत्तरकाशी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि व भोजन का इतिहास ; हिमालय  में कृषि व भोजन का इतिहास ;     उत्तर भारत में कृषि व भोजन का इतिहास ; उत्तराखंड , दक्षिण एसिया में कृषि व भोजन का इतिहास लेखमाला श्रृंखला )

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
Myths and Religious Uses of Nagkesar   in Uttarakhand
-
Plant Myths, Religious Importance, and Traditions in Uttarakhand (Himalaya) - 38
By: Bhishma Kukreti, M.Sc. (Botany) (Mythology, Culture Research Scholar)
Botanical name –Mesua ferrea
Hindi Name – Nagkesar
Sanskrit Name –Nagpushpa, nagkesar
                                           ---Economic benefits –--
Medical uses- Medicines by Nagkesar are used in bleeding disorders as Piles, Menorrhagia, Uterine Bleeding , Epistaxis   etc
Spices -used as spices too
Decoration – Ornamental plant
                   Myths, Religious Uses and Traditions
   According to Hindu astrology, Nagkesar is plant of Ashlesha  Nakshatra. Astrologers suggest ritual performance for Nagkeshar plant for satisfying effects of Ashlesha nakshatra.
            Tantrics also suggest to put Nagkesar seed with other items in a muslin bag ( Tabiz)  and put on hand or neck for wealth and prosperity

-
Copyright@ Bhishma Kukreti, Mumbai 2018
-
Plant Myths  , Religious Plants, Religious Importance, Traditions , Garhwal, Uttarakhand ; Plant Myths , Religious Importance, Traditions , Kumaon, Uttarakhand ;Plant Myths , Religious Importance, Traditions , Uttarakhand; Plant Myths , Religious Importance, Traditions , Uttarakhand, Himalaya; Plant Myths , Religious Importance, Traditions , Uttarakhand, North India; Plant Myths , Religious Importance, Traditions , Uttarakhand, South Asia, Religious Plants Garhwal, Religious Plants Kumaon, Religious Plants Dehradun , Religious Plant Haridwar .वनस्पति ज्योतिष , वनस्पति तंत्र, वनस्पति मंत्र




Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1
Myths and Religious Uses of Mahua, Butter Tree    in Uttarakhand
-
Plant Myths, Religious Importance, and Traditions in Uttarakhand (Himalaya) - 39
By: Bhishma Kukreti, M.Sc. (Botany) (Mythology, Culture Research Scholar)
Botanical name – Madhuca logifolia    
Local Name – Mahwa, Mahua
Hindi Name –Mahwa, Mahua
Sanskrit Name – Guda Pushpa
                                           ---Economic benefits –--
Medical uses-Used as medicines in skin , boils, hiccup, cough , impotency , debility etc.
Furniture, Agriculture Instruments,- Each part of Mahua is useful for human beings.as  fodders, wood, fertilizers by products of oil extraction,  etc.
Food Uses – Making vegetable butter, fat, alcohol, sweetening agent from flowers, syrup etc.

                   Myths, Religious Uses and Traditions
    According to Hindu Astrology, Mahuwa, Mahua tree is representative of Revati nakshatra.
  Astrologers suggest for writing Swastika symbol on g Mahua leave and to keep in pocket for tension relief.
 Astrologers also suggest to write Swastika symbol on Mahua twig  and to keep it in Tijori/safe for prosperity.
 
Copyright@ Bhishma Kukreti, Mumbai 2018
-
Plant Myths  , Religious Plants, Religious Importance, Traditions , Garhwal, Uttarakhand ; Plant Myths , Religious Importance, Traditions , Kumaon, Uttarakhand ;Plant Myths , Religious Importance, Traditions , Uttarakhand; Plant Myths , Religious Importance, Traditions , Uttarakhand, Himalaya; Plant Myths , Religious Importance, Traditions , Uttarakhand, North India; Plant Myths , Religious Importance, Traditions , Uttarakhand, South Asia, Religious Plants Garhwal, Religious Plants Kumaon, Religious Plants Dehradun , Religious Plant Haridwar .वनस्पति ज्योतिष , वनस्पति तंत्र, वनस्पति मंत्र




Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1


उत्तराखंड  में    रतनजोत , रतन जोत   मसाला , औषधि उपयोग  इतिहास

   History, Origin, Introduction,  Uses  of Ratanjot/ Ratan jot , Alkanet   as   Spices ,  in Uttarakhand
 
उत्तराखंड  परिपेक्ष में वन वनस्पति  के मसाले , औषधि  व अन्य   उपयोग और   इतिहास -  3                                             
             

  History, Origin, Introduction Uses  of    Wild Plant  Spices ,  Uttarakhand -3                         
         
  उत्तराखंड में कृषि व खान -पान -भोजन का इतिहास --   92
History of Agriculture , spices ,  Culinary , Gastronomy, Food, Recipes  in Uttarakhand -92

 आलेख -भीष्म कुकरेती (वनस्पति व संस्कृति  शास्त्री )
-
वनस्पति शास्त्रीय नाम - Alkanna tinctoria
सामन्य अंग्रेजी नाम - Alkanet, Dyer's Alkanet
हिंदी नाम - रतनजोत , अंजनकेशी ,
उत्तराखंडी नाम - रतनजोत
सिद्ध नाम -रथपालै
रतनजोत एक खर पतवार है जिसकी जड़ें पौधे से बड़ी होती हैं  , नीले रंग  वाला रतनजोत  चीड़ वन स्तर की ऊंचाई में उगता है और कश्मीर  से कुमाऊं तक पाया जाता है ।  उत्तराखंड में रतनजोत का भोजन उपयोग बहुत कम होता है किन्तु पहले कपड़े आदि रंगाई में उपयोग होता था।  रतनजोत की जड़ों से लाल रंग मिलता है जो कि पानी में तो नहीं घुलता किन्तु पेड़ पौधों के भागों को रगने में कामयाब रंग है।  इसलिए इसका उपयोग भात , सूजी , दाल , मांश आदि को रंग देने हेतु होता था। अब नामात्र को उपयोग होता है।
जन्मस्थल संबंधी सूचना - रतनजोत का  मेडिटेरियन सागर , मध्य -दक्षिण यूरोप क्षेत्र माना जाता है जहां रतनजोत की जड़ों रस से से आज भी मेक अप सामग्री बनाई जाती है।
संदर्भ पुस्तकों में वर्णन - रतनजोत का जिक्र यूनानी साहित्य में सन 00 70 से मिलना शुरू होता है।  रोमन सेना में कार्यरत यूनानी डाक्टर पेडानियस डायोसकौरिदेस ने De Materia Medica में जिक्र किया जो बाद में लेटिन में सन 512 में अनुदित हुआ।
      औषधि उपयोग
रतनजोत का उपयोग उत्तराखंड में वैद करते थे।  रतनजोत के विभिन्न भागों से आँखों की रौशनी  वृद्धि , त्वचा का रूखापन  करने , खाज खुजली , पेट दर्द ,कृमि नास , पथरी नाश ,बालों की दूर करने , रक्त शोधन आदि में अन्य अवयवों या अकेले दवाई बनाने  है।

    रतनजोत जड़ों से भोजन रंग

  रतनजोत के जड़ों से भोजन को रंग देने हेतु उपयोग होता है।  रतनजोत की जड़ों के  भोजन  को रंग ही नहीं मिलता अपितु स्वाद वृद्धि भी होती है।

    उत्तराखंड में आयुष योजना हेतु सलाह

 राजीव कुमार , वी के जोशी आदि वैज्ञानिक उत्तराखंड को मेडिकल हब बनाने हेतु रतनजोत जैसे वनस्पति  पर ध्यान देने की सलाह देते रहे हैं।
   



Copyright@Bhishma Kukreti Mumbai 2018

Notes on History of Culinary, Gastronomy, Spices  in Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy , Spices in Pithoragarh Uttarakhand; History ofCulinary,Gastronomy,  Spices in Doti Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Dwarhat, Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy,  Spices in Pithoragarh Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Champawat Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Nainital Uttarakhand;History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Almora, Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Bageshwar Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Udham Singh Nagar Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Chamoli Garhwal Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy, Spices  in Rudraprayag, Garhwal Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Pauri Garhwal, Uttarakhand; History ofCulinary,Gastronomy in Dehradun Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices   in Tehri Garhwal  Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy,  Spices in Uttarakhand Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Haridwar Uttarakhand;

 ( उत्तराखंड में कृषि,  मसाला ,  व भोजन का इतिहास ; पिथोरागढ़ , कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;चम्पावत कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; बागेश्वर कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; नैनीताल कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;उधम सिंह नगर कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;अल्मोड़ा कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; हरिद्वार , उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;पौड़ी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;चमोली गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; देहरादून गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; टिहरी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; उत्तरकाशी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; हिमालय  में कृषि व भोजन का इतिहास ;     उत्तर भारत में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; उत्तराखंड , दक्षिण एसिया में कृषि व भोजन का इतिहास लेखमाला श्रृंखला )


Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1

उत्तराखंड  में   बथुआ /बेथु   मसाला , औषधि उपयोग  इतिहास

   History, Origin, Introduction,  Uses  of Bathua    as   Spices ,  in Uttarakhand
 
उत्तराखंड  परिपेक्ष में वन वनस्पति  मसाले , औषधि  व अन्य   उपयोग और   इतिहास -  4                                         
 History, Origin, Introduction Uses  of    Wild Plant  Spices ,  Uttarakhand - 4                       
  उत्तराखंड में कृषि, मसाला ,  खान -पान -भोजन का इतिहास --  93
History of Agriculture , spices ,  Culinary , Gastronomy, Food, Recipes  in Uttarakhand -93

 आलेख -भीष्म कुकरेती (वनस्पति व संस्कृति शास्त्री )
-
Botanical Name -Chenopodium album
हिंदी नाम बथुआ
स्थानीय नाम - बेथू, बथुआ
संस्कृत नाम -वस्तुका:
नेपाल -बेथे
चीनी नाम -ताक
बथुआ एक गेहूं में पाये जाने वाला खर पतवार है।   बथुआ की दूसरी प्रजाति का वर्णन हिमालयी  चीन में 2500 -1900 BC में मिलता है. अत:  कह सकते हैं कि बथुआ उत्तराखंड में प्रागैतिहासिक काल से पैदा होता रहा है।  यूरोप में इसका अस्तित्व 800 BC में  था।  वैज्ञानिक बथुआ का जन्मस्थान यूरोप मानते हैं।  हिमालय की कई देसों में बथुवा की खेती भी होती है।  डा के.पी.  सिंह ने लिखा है कि बथुवे का जन्मस्थल पश्चिम एसिया है।  शायद बथुआ का कृषिकरण चीन व भारत -नेपाल याने मध्य हिमालय में शुरू हुआ। अनुमान है कि बथुवा के बीज चालीस साल तक ज़िंदा रह सकते हैं।
आयुर्वैदिक साहित्य जैसे  भेल संहिता (1650 AD ) में बथुवे का आयुवैदिक उपयोग का उल्लेख है (K.T Acharya , 1994, Indian Food)। बथुआ का वर्णन भावप्रकाश निघण्टु , राज निघण्टु , मदनपाल में दवाईओं हेतु हुआ है।
  समरंगना सूत्रधार में बथुआ का उपयोग मकान पोतने हेतु उल्लेख हुआ है।
साधारणतया बथुआ का पौधा तीन फीट तक ऊंचा होता है किन्तु 6 फीट ऊंचा बथुआ भी पाया जाता है।
प्राचीन काल में बथुआ के बीजों को अन्य अनाजों के साथ मिलाकर आटा बनाया जाता  था।

   बथुआ का औषधि उपयोग
बथुआ का पेट दर्द , गठिया , पेचिस , जले आदि में औषधि में उपयोग होता है।
 
      फसलों के साथ बथुवा के पौधे कीटनाशक का कार्य भी करते हैं।  कई कीड़े गेहूं को छोड़ बथुवा  पर लग जाते  हैं और गेंहूं कीड़ों की मार से बच जाते हैं।

      बथुआ का मसाले रूप (पितकुट या बेथकुट ) में उपयोग
 
    गढ़वाल में बथुआ सब्जी बनाने , आटा बनाने हेतु ही प्रयोग नहीं होता था अपितु मसला मिश्रण का एक अंग भी होता था। इस लेखक ने  पने गाँव में बथुआ को मसाले रूप में प्रयोग होते देखा है और उपयोग भी किय है । 
   बेथकुट या पितकुट बनाने के लिए बेथु के पूर्ण पकी मा बीजों के टहनी  उखाड़ कर सुखाया जाता है फिर जड़ तोड़कर मय बीज , टहनी को ओखली में कूटा जाता है। बहुत अधिक महीन नहीं कूटा जाता है।  फिर इस कूटे मसाले को नमक के साथ पीसकर चटनी बनाई जा सकती है।  बेथकुट या पितकुट को पळयो , झुळी में बहुत उपयोग होता था।  अन्य सब्जियों में विशेष स्वाद बढ़ाने हेतु सहायक मसाले के रूप में उपयोग होता था। बहुत बार वैद्य  किसी विशेष उपचार हेतु मरीज को भोजन में पितकुट या बेथकूट  उपयोग की सलाह भी देते थे। 
 
        सुरा /शराब , घांटीबनाने हेतु एक अवयव

  हिमाचल व हिमाचल से लगे उत्तराखंड में बथुआ बीजों का उपयोग सुरा , घाँटी शराब बनाने हेतु एक अवयव के रूप में उपयोग होता है। 





Copyright@Bhishma Kukreti Mumbai 2018

Notes on History of Culinary, Gastronomy, Spices  in Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy , Spices in Pithoragarh Uttarakhand; History ofCulinary,Gastronomy,  Spices in Doti Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Dwarhat, Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy,  Spices in Pithoragarh Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Champawat Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Nainital Uttarakhand;History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Almora, Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Bageshwar Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Udham Singh Nagar Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Chamoli Garhwal Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy, Spices  in Rudraprayag, Garhwal Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Pauri Garhwal, Uttarakhand; History ofCulinary,Gastronomy in Dehradun Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices   in Tehri Garhwal  Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy,  Spices in Uttarakhand Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Haridwar Uttarakhand;

 ( उत्तराखंड में कृषि,  मसाला ,  व भोजन का इतिहास ; पिथोरागढ़ , कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;चम्पावत कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; बागेश्वर कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; नैनीताल कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;उधम सिंह नगर कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;अल्मोड़ा कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; हरिद्वार , उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;पौड़ी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;चमोली गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; देहरादून गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; टिहरी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; उत्तरकाशी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; हिमालय  में कृषि व भोजन का इतिहास ;     उत्तर भारत में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; उत्तराखंड , दक्षिण एसिया में कृषि व भोजन का इतिहास लेखमाला श्रृंखला )

Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1



उत्तराखंड  में   डम्फू , घुंगरी, रसभरी    मसाला , औषधि उपयोग  इतिहास

   History, Origin, Introduction,  Uses  of    as  Ground berries or Rasbhari   Spices ,  in Uttarakhand
उत्तराखंड  परिपेक्ष में वन वनस्पति  मसाले , औषधि  व अन्य   उपयोग और   इतिहास -    5                                           
  History, Origin, Introduction Uses  of    Wild Plant  Spices ,  Uttarakhand -  5                     
  उत्तराखंड में कृषि, मसाला ,  खान -पान -भोजन का इतिहास --  94
History of Agriculture , spices ,  Culinary , Gastronomy, Food, Recipes  in Uttarakhand -94

 आलेख -भीष्म कुकरेती (वनस्पति व संस्कृति शास्त्री )
-
वनस्पति शास्त्रीय नाम - Physalis divaricata
निकटस्त वनस्पति -Physalis indica , Physalis minima
सामन्य अंग्रेजी नाम - Ground Berries

उत्तराखंडी नाम -डम्फू , घुंगरी
  डम्फू एक बरसात में विकसित होने वाली 35 00 फ़ीट से अधिक  ऊंचाई वाली डेढ़ फुट ऊँची वनस्पति है जिसके फल नवंबर में आने शुरू हो जाते हैं   और फरवरी तक रहते हैं। घास के साथ धूप वाली साइड में होते हैं। रसभरी के फल सेपल्स के अंदर बंद रहते हैं और जब सेपल्स  कड़क पीला या भूरा हो जाता तो समझा जाता है कि डम्फू पक गया है।  पका फल लालिमा लिए पीला होता है।
     इस वनस्पति पर उत्तराखंड में कम ही वनस्पति वैज्ञानिकों का ध्यान गया है।
  औषधि उपयोग -
इस लेखक को डा आर डी  गौड़ , ज्योत्सना शर्मा व पैन्यूली के लेख मिले हैं जिसमें उन्होंने इस वनस्पति का स्थानीय लोगों द्वारा पीलिया , पेट दर्द में उपयोग की सूचना दी है।  रसभरी का पेशाब बीमारी व गुर्दा बीमारियों में भी उपयोग होता है।

    रसभरी /डम्फू का फल उपयोग

 डम्फू को जंगली फल के रूप में उपयोग होता है।   इस लेखक के क्षेत्र में मान्यता है कि हरे फल विषैले होते हैं।     पके फल का स्वाद कुछ विशेष खट्टा किन्तु मीठा होता है।   फल अधिक मात्रा में खाने से मनुष्य को नींद आने लगती है। इस लेखक को अपना व अन्य को देखकर अनुभव है कि अधिक खाने से नींद आने लगती है और इच्छा होती है जहां है वंही सो जाया जाय।
     इसी से मिलता जुलता एक अन्य वनस्पति है जो दो हजार फ़ीट से कम की ऊंचाई पर उगता है , फल छोटे होते हैं और उसे बिसैला माना जाता है।  बचपन से ही हमें ऐसा सिखाया जाता था  कि हम इस पौधे के फल  बिलकुल नहीं चखते हैं।

     डम्फू का चटनी उपयोग
  सन उन्नीस सौ साठ से पहले डम्फू का उपयोग चटनी बनाने में भी होता था।  पके डम्फू फल को मिर्च व नमक के साथ पीसा जाता था और रोटी के साथ डम्फू चटनी  खायी जाती थी ।



Copyright@Bhishma Kukreti Mumbai 2018

Notes on History of Culinary, Gastronomy, Spices  in Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy , Spices in Pithoragarh Uttarakhand; History ofCulinary,Gastronomy,  Spices in Doti Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Dwarhat, Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy,  Spices in Pithoragarh Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Champawat Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Nainital Uttarakhand;History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Almora, Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Bageshwar Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Udham Singh Nagar Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Chamoli Garhwal Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy, Spices  in Rudraprayag, Garhwal Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Pauri Garhwal, Uttarakhand; History ofCulinary,Gastronomy in Dehradun Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices   in Tehri Garhwal  Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy,  Spices in Uttarakhand Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Haridwar Uttarakhand;

 ( उत्तराखंड में कृषि,  मसाला ,  व भोजन का इतिहास ; पिथोरागढ़ , कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;चम्पावत कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; बागेश्वर कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; नैनीताल कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;उधम सिंह नगर कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;अल्मोड़ा कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; हरिद्वार , उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;पौड़ी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;चमोली गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; देहरादून गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; टिहरी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; उत्तरकाशी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; हिमालय  में कृषि व भोजन का इतिहास ;     उत्तर भारत में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; उत्तराखंड , दक्षिण एसिया में कृषि व भोजन का इतिहास लेखमाला श्रृंखला )


Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1



उत्तराखंड  में      बनफ्सा मसाला , औषधि उपयोग  इतिहास

   History, Origin, Introduction,  Uses  of  Banfsa , Himalayan  white violet   as   Spices ,  in Uttarakhand
उत्तराखंड  परिपेक्ष में वन वनस्पति  मसाले , औषधि  व अन्य   उपयोग और   इतिहास -  6                                             
  History, Origin, Introduction Uses  of    Wild Plant  Spices ,  Uttarakhand - 6                       
  उत्तराखंड में कृषि, मसाला ,  खान -पान -भोजन का इतिहास --  95
History of Agriculture , spices ,  Culinary , Gastronomy, Food, Recipes  in Uttarakhand -95

 आलेख -भीष्म कुकरेती (वनस्पति व संस्कृति शास्त्री )
-
वनस्पति शास्त्रीय नाम - Viola serpens, Viola canescens
सामन्य अंग्रेजी नाम - Banfsa , Himalayan  white violet
संस्कृत नाम -बनप्सा
हिंदी नाम - बनफ्सा
नेपाली नाम -घट्टेघांस
हिमाचल -गुगलु फूल , बनफ्सा , बनाक्षा
उत्तराखंडी नाम - बनफ्सा ,
बनफ्सा भूमि पर फैलने वाला बहुवर्षीय पौधा है जिसके बैंगनी , सफेद व नीले फूल होते है।  पाकिस्तान से उत्तर पूर्व के हिमालय में 1600 -2000 मीटर   ऊंचाई में पैदा होता है।
जन्मस्थल संबंधी सूचना - Viola की दो एक जातियों का जन्म हिमालय है
संदर्भ पुस्तकों में वर्णन -   संहिताओं में बनफ्सा का नाम नहीं है किन्तु आदर्श निघण्टु व सिद्ध भेषज मणिमाला में बनफ्सा व इसके उपयोग का वर्णन मिलता है।  सिद्ध भेषज मणिमाला में तो कथा भी मिलती है। भावप्रकाश निघंटु  में बनफ्सा को परसिष्ट  भाग में जोड़ा गया है।

       औषधि उपयोग

इसे गरम तासीर का पौधा माना जाता है।  कफ , शर्दी , जुकाम , बुखार , मलेरिया बुखार , बदहजमी निर्मूल हेतु  काम आता है।

                चाय मसाला

   फूल के सुक्सा को गढ़वाल में जाड़ों के दिनों में कम मात्रा में चाय में डाला जाता था- विशेषकर जब तापमान गिर जाता था या बर्फ पड़ी हो। लोककथ्य   है कि बनफ्सा को चाय में पीने से बर्फ में भी पसीना आ जाता है। काफी ठंडियों के दिनों में कभी उड़द की दाल में भी बनफ्सा के बहुत कम मात्रा में सूखे फूल डाल दिए जाते थे।

  वैज्ञानिकों का मत है अति दोहन से कई प्रजातियां खतरे में पड़ गयी हैं। 
 



Copyright@Bhishma Kukreti Mumbai 2018

Notes on History of Culinary, Gastronomy, Spices  in Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy , Spices in Pithoragarh Uttarakhand; History ofCulinary,Gastronomy,  Spices in Doti Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Dwarhat, Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy,  Spices in Pithoragarh Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Champawat Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Nainital Uttarakhand;History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Almora, Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Bageshwar Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Udham Singh Nagar Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Chamoli Garhwal Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy, Spices  in Rudraprayag, Garhwal Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Pauri Garhwal, Uttarakhand; History ofCulinary,Gastronomy in Dehradun Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices   in Tehri Garhwal  Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy,  Spices in Uttarakhand Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Haridwar Uttarakhand;

 ( उत्तराखंड में कृषि,  मसाला ,  व भोजन का इतिहास ; पिथोरागढ़ , कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;चम्पावत कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; बागेश्वर कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; नैनीताल कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;उधम सिंह नगर कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;अल्मोड़ा कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; हरिद्वार , उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;पौड़ी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;चमोली गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; देहरादून गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; टिहरी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; उत्तरकाशी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; हिमालय  में कृषि व भोजन का इतिहास ;     उत्तर भारत में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; उत्तराखंड , दक्षिण एसिया में कृषि व भोजन का इतिहास लेखमाला श्रृंखला )


Bhishma Kukreti

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 18,808
  • Karma: +22/-1

उत्तराखंड  में   सेमल कलियों का  मसाला , औषधि उपयोग  इतिहास

   History, Origin, Introduction,  Uses  of Dried Kapok, Semal, Dried Red Silk Cotton   Buds   as   Spices ,  in Uttarakhand
उत्तराखंड  परिपेक्ष में वन वनस्पति  मसाले , औषधि  व अन्य   उपयोग और   इतिहास -  7                                             
  History, Origin, Introduction Uses  of    Wild Plant  Spices ,  Uttarakhand -  7                     
  उत्तराखंड में कृषि, मसाला ,  खान -पान -भोजन का इतिहास --  96
History of Agriculture , spices ,  Culinary , Gastronomy, Food, Recipes  in Uttarakhand -96

 आलेख -भीष्म कुकरेती (वनस्पति व संस्कृति शास्त्री )
-
वनस्पति शास्त्रीय नाम -Bombax ceiba
सामन्य अंग्रेजी नाम - Red Silk Cotton, Kapok
संस्कृत नाम -शाल्मली
हिंदी नाम - सेमल
उत्तराखंडी नाम - सेमल , सिमुळ
(सब्जी खंड में सूचना दे दी गयीं हैं )

       उत्तराखंड का प्राचीन मसाला

  जब सेमल की सब्जी आम बात थी और मैदानों से सब्जी व मसाले मिलना सोने- गोल्ड खरीदना जैसा था तब सेमल की बंद कलियों को सुखाकर रख दिया जाता था।  फिर जब कभी दाल या फाणु  आदि  को विशेष स्वाद देना हो तो कलियों के सुक्सा को तेल में छौंककर स्वाद बढ़ाया जाता था  . 
   इस लेखक ने अपनी दादी  श्रीमती क्वाँरा देवी (पिता जी की ताई जी ) से सुना था जिन्होंने कभी अपनी सास द्वारा  सुखाया सेमल सुक्सा मसाला प्रयोग किया था। 



Copyright@Bhishma Kukreti Mumbai 2018

Notes on History of Culinary, Gastronomy, Spices  in Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy , Spices in Pithoragarh Uttarakhand; History ofCulinary,Gastronomy,  Spices in Doti Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Dwarhat, Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy,  Spices in Pithoragarh Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Champawat Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Nainital Uttarakhand;History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Almora, Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Bageshwar Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Udham Singh Nagar Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Chamoli Garhwal Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy, Spices  in Rudraprayag, Garhwal Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy in Pauri Garhwal, Uttarakhand; History ofCulinary,Gastronomy in Dehradun Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices   in Tehri Garhwal  Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy,  Spices in Uttarakhand Uttarakhand; History of Culinary,Gastronomy ,  Spices in Haridwar Uttarakhand;

 ( उत्तराखंड में कृषि,  मसाला ,  व भोजन का इतिहास ; पिथोरागढ़ , कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;चम्पावत कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; बागेश्वर कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; नैनीताल कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;उधम सिंह नगर कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;अल्मोड़ा कुमाऊं  उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; हरिद्वार , उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;पौड़ी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ;चमोली गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; देहरादून गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; टिहरी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; उत्तरकाशी गढ़वाल   उत्तराखंड में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; हिमालय  में कृषि व भोजन का इतिहास ;     उत्तर भारत में कृषि ,  मसाला व भोजन का इतिहास ; उत्तराखंड , दक्षिण एसिया में कृषि व भोजन का इतिहास लेखमाला श्रृंखला )
=

 

Sitemap 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22