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राज्य आन्दोलन के समय से ही उत्तराखण्ड राज्य की जनता का समर्थन राजधानी के लिये गैरसैंण को ही मिला था. दीक्षित आयोग, जिसके सामने 64% लोगों ने गैरसैंण के समर्थन में अपने विचार रखे, उसने राजधानी की सूची में गैरसैंण को अनुपयुक्त मानकर लोकतंत्र का गला घोटने की कोशिश की है. इस मुद्दे पर राजनैतिक दलों (क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय) की चुप्पी आश्चर्यजनक रूप से शर्मनाक है. यद्यपि राज्य आन्दोलन में सक्रिय कुछ शक्तियां संगठित होकर गैरसैण के समर्थन में आन्दोलन को अग्रसर दिखाई दे रही हैं. विश्व भर में और देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे उत्तराखण्ड के प्रवासी भी राजधानी के रूप गैरसैण के लिये एकजुट होने लगे हैं. एक जिम्मेदार उत्तराखण्डी होने के नाते हम राज्य आन्दोलन में शहीद हुए 42 शहीदों और मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर अपनी अस्मत पर हमला झेल चुकी महिलाओं के बलिदान को लज्जित नहीं होने देंगे. बाबा मोहन उत्तराखण्डी की शहादत को इस तरह व्यर्थ नहीं जाने दिया जा सकता. अपनी सुविधा के लिये जनता की आवाज को दबाने की साजिश रचने वाले नौकरशाहों और राजनेताओं की यह कुटिल चाल यदि सफल हुई तो उत्तराखंड वह राज्य नहीं रहेगा जिसका सपना राज्य आन्दोलन के दौरान देखा गया था."क्रिएटिव उत्तराखण्ड - म्यर पहाड़" और "म्योर उत्तराखण्ड" ने जिम्मेदारी ली है कि वह राज्य के युवाओं को गैरसैंण राजधानी की आवश्यकता के प्रति सजग करेगा और इस मुद्दे से जुड़ी जनभावनाओं को एक सशक्त आवाज प्रदान करेगा. दोनों संगठनों के सदस्य अगस्त के अन्तिम सप्ताह में गैरसैंण के साथ ही उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में एक जनसम्पर्क यात्रा का आयोजन करने जा रहे हैं. इस यात्रा का उद्देश्य आम जनता के बीच गैरसैण को राजधानी बनाने की अनिवार्यता को स्पष्ट करना और गैरसैण मुद्दे पर युवाशक्ति व मातृशक्ति को एकजुट करना है. कार्यक्रम का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है-27 अगस्त 2009- दिल्ली से यात्रा का शुभारंभ28 अगस्त 2009- रुद्रपुर, हल्द्वानी, अल्मोड़ा तथा द्वाराहाट आदि में जनजागरण अभियान29 अगस्त 2009-द्वाराहाट से गैरसैंण तक रैली30 अगस्त 2009- उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के अग्रणी नेता स्व. विपिन त्रिपाठी जी की पुण्य तिथि पर द्वाराहाट में श्रद्धांजली सभा तथा गैरसैण मुद्दे पर एक विशाल जनसभा/विचार गोष्टी.गैरसैंण राजधानी के मुद्दे पर इस समय आवाज बुलन्द करना अत्यन्त जरूरी है, अन्यथा यह चुप्पी उत्तराखण्ड के भविष्य के लिये घातक हो सकती है. आप सभी लोगों से अपील है कि आप इस मुद्दे पर आगे आयें और इस अभियान में सहभागी बनें.
गर कर सके तो गैरसैंण की बात करदिनेश ध्यानीकरनी है तो भाषण नही बात करसमय से साक्षात्कार करऔर कुछ नही सुनना हमेंबात छिड़ी है गैरसैंण की बात कर।तुम्हारे अपने सरोकारतुम्हारी अपनी सरकारहमारी गैरसैंण की बातजनता को गैरसैंण की दरकार।गैरसैंण हमारा सपना हैये पहाड़ हमारा अपना हैतुम्हें शायद पता नहीअब पहाड़ सोया नहीजाग रहा है औरअपने अधिकार के लिए ललकार रहा है।जरा कान देकर देखआरजू नही शेह की दहाड़ सुन।बात नही सुलझेगी अबबात और फरियाद सेजानते हैं हम फिर एक बार तैयार हैंहम आरपार के लिए।अब नही चलेगी राजनीति बिसातअब होगी पहाड़ में हमारी मर्जी से दिन और रातअगर तुम सोचते होतुम जीत गये होतो देख नीलकंठ मेंउगते सूरज की गरमाहट कोअहसास का जमीन की गर्मी कोजमीन से जुड़कर।गैरसैंण हमारा सपना नहीगैरसैंण हमारा अधिकार हैअब नही मांगना हमेंअब तो हमें राजधानीबनानी है गैरसैंणगर मादा है तुझमेंबरगला मतबात छिड़ी है तोगैरसैंण की बात करगैरसैंण की बात कर।।